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Monday, 22 July 2013

तुझे दिल की बात बता दूं-मैं सुन्दर हूँ १९७१


इस ब्लॉग के पाठकों का स्वागत है एक बार फिर से. 

फ़िल्मी गीतों ने हमें बहुत कुछ सिखाया है. शेर शायरी न आती हो तो
प्रेम का इज़हार गीत गा कर कर दो वगैरह वगैरह.....

बेबी डॉल से लगा कर उडद दाल तक हमने सालों के फ़िल्मी सफर में
बहुत कुछ देखा है. फ़िल्मी बेबी डॉल बहुतेरी आयीं हैं अभी तक. प्रभाव
बहुत कम छोड़ पायी हैं दर्शकों के मन पर.

आज आपको सत्तर के दशक की एक प्रभावशाली डॉल से मिलवाते हैं.
फिल्म का नाम है -मैं सुन्दर हूँ. फिल्म के नाम से लगता है मानो ये
नायिका के बारे में जिक्र हो रहा हो. अगर ऐसा है तो एकदम सटीक है

गाना पी टी एक्सरसाइज़ से भरपूर है. गर इसमें एक दो लाइन औरत
होतीं तो संभवतः इस प्रकार से होतीं -तुझे क्या मैं पी टी सिखा दूं, नहीं नहीं,
नहीं नहीं किसी को सिखा देगी तू,

गीत मधुर है और जयकिशन की धुन तैर रही है आनंद बक्षी के बोलों पर.यूँ कहें
आनंद बक्षी के बोल तैर रहें हैं जयकिशन की धुन पर. जो भी हो कुछ हो ज़रूर रहा है
गौर तलब है इस फिल्म के गीतों को बक्षी साहब ने ही लिखा है. शंकर जयकिशन के
पुराने साथी शैलेन्द्र और हसरत के गीत इस फिल्म में नहीं हैं.



गीत के बोल:

नहीं नहीं नहीं , नहीं बताऊंगी

तुझे दिल की बात बता दूं
नहीं नहीं, नहीं नहीं
किसी को बता देगी तू
कहानी बना देगी तू

इस राधा ने खेली अपने श्याम से होली भी
इस राधा ने खेली अपने श्याम से होली भी
होली क्या सपने में खेली आंख मिचोली भी
तुझे मैं ये खेल सिखा दूं
नहीं नहीं, नहीं नहीं
किसी दिन दगा देगी तू,
कहानी बना देगी तू

तुझे दिल की बात बता दूं
नहीं नहीं, नहीं नहीं
किसी को बता देगी तू
कहानी बना देगी तू

अपनी जुल्फों से अपनी ज़ंजीर बनायीं है
अपनी जुल्फों से अपनी ज़ंजीर बनायीं है
मैंने ख्यालों में कोई तस्वीर बनायीं है
तुझे वो तस्वीर दिखा दूं
नहीं नहीं, नहीं नहीं
किसी को दिखा देगी तू
कहानी बना देगी तू 

तुझे दिल की बात बता दूं
नहीं नहीं, नहीं नहीं
किसी को बता देगी तू
कहानी बना देगी तू
.................................................................................
Tujhe dil ki baat bata doon-Main sundar hoon 1971


Monday, 30 January 2012

रात गई फिर दिन आता है-बूट पॉलिश १९५४

कथनी और करनी में अंतर मिट जाता है तभी व्यक्ति महात्मा बनता है।
आज बापू की पुण्यतिथि है और उनकी याद में एक गीत प्रस्तुत है फिल्म
बूट पॉलिश से। प्रेरणादायक गीत है ये और मानो ये सन्देश दे रहा हो कि
राजनीति के संक्रमण काल के बाद सुहानी भोर ज़रूर आएगी एक बार फिर।

आम आदमी का जीवन क्या जीवन है इस गीत के माध्यम से ही जान लीजिये।
बच्चों पर बनी ये मर्मस्पर्शी फिल्म मधुर गीतों का खज़ाना है। गीतकार शैलेन्द्र
हसरत और 'सरस्वती कुमार दीपक' ने एक एक गीत में प्राण फूँक दिए हों
मानो। फिल्म 'तीसरी कसम' के एक गीत में भी बुढ़ापे और जवानी की गाथा है
जो शैलेन्द्र का लिखा हुआ है । काल के पहिये पर नीरज साहब फिल्म 'चंदा
और बिजली' के गीत में कह चुके हैं। तीनों ही गीतों का संगीत तैयार किया है
शंकर जयकिशन ने। गीत में प्रमुख कलाकार हैं-बेबी नाज़ और डेविड।

प्रस्तुत गीत के लेखक हैं सरस्वती कुमार "दीपक" । गायक मन्ना डे की आवाज़
को तो आप पहचानते ही होंगे।



गीत के बोल:

रात गई
हो हो हो हो हो
रात गई फिर दिन आता है
इसी तरह आते जाते ही
ये सारा जीवन जाता है
हो ओ रात गई, रात गई

रात गई फिर दिन आता है
इसी तरह आते जाते ही
ये सारा जीवन जाता है
हो ओ रात गई, रात गई

कितना बड़ा सफ़र इस दुनिया का
एक रोता एक मुस्काता है
एक रोता एक मुस्काता है
हा आ आ आ आ आ आ आ
कदम कदम रखता राही
कितनी दूर चला जाता है
एक एक तिनके तिनके से
एक एक तिनके तिनके से
पंछी का घर बन जाता है

हो ओ रात गई, रात गई

कभी अँधेरा कभी उजाला
कभी अँधेरा कभी उजाला
फूल खिला फिर मुरझाता है
खेला बचपन हंसी जवानी
खेला बचपन हंसी जवानी
मगर बुढ़ापा तडपाता है
मगर बुढ़ापा तडपाता है
खेला बचपन हंसी जवानी
मगर बुढ़ापा तडपाता है

सुख दुःख का पहिया चलता है
वही नसीबा कहलाता है

हो ओ रात गई, रात गई

रात गई फिर दिन आता है
इसी तरह आते जाते ही
ये सारा जीवन जाता है
हो ओ रात गई, रात गई
........................................
Raat gayi fir din aata hai-Boot Polish

Tuesday, 18 October 2011

मैं आशिक हूँ बहारों का-आशिक १९६२

बिलकुल राज कपूराना गीत है ये। कुछ गीत ख़ास राज कपूर के लिए रचे
गये थे उनमें से एक है फिल्म आशिक का ये शीर्षक गीत। इस फिल्म से पूर्व
में आप ४ गीत सुन चुके हैं इस ब्लॉग पर। किसी मोहतरमा के ख्याल में
आशिक होना आम बात है। इसमें कुदरत के नज़रों के साथ साथ कई और
पहलुओं के साथ आशिकी का जिक्र है जो गीत को अलग बनाता है।

इस तरह के गीत राज कपूर कि फिल्मों में कई हैं। इन सभी गीतों में वे इधर
उधार घुमते हुए बेफिक्र से गीत गेट दिखाई देते हैं। फिल्म आवारा के शीर्षक
गीत का ही उदाहरण ले लीजिये। ऐसे प्रेरणादायी गीत उनकी फिल्मों की
विशेषता होते थे। ऐसे गीतों को रचने के लिए गीतकार शैलेन्द्र का एक बार
फिर से तह-ए-दिल शुक्रिया।



गीत के बोल:

मैं आशिक हूँ बहारों का, नज़रों का, फिजाओं का, इशारों का
मैं आशिक हूँ बहारों का नज़रों का, फिजाओं का, इशारों का
मैं मस्ताना मुसाफिर हूँ जवां धरती के अनजाने किनारों का
मैं आशिक हूँ बहारों का

सदियों से जग में आता रहा मैं
नए रंग जीवन में गता रहा मैं
नए भेस में नित नए देश मैं

मैं आशिक हूँ बहारों का नज़रों का, फिजाओं का,इशारों का
मैं मस्ताना मुसाफिर हूँ जवां धरती के अनजाने किनारों का
मैं आशिक हूँ बहारों का

कभी मैंने हंस के दीपक जलाए
कभी बन के बादल आंसू बहाए
मेरा रास्ता प्यार का रास्ता

मैं आशिक हूँ बहारों का नज़रों का, फिजाओं का, इशारों का
मैं मस्ताना मुसाफिर हूँ जवां धरती के अनजाने किनारों का
मैं आशिक हूँ बहारों का

चला गर सफ़र को कोई बेसहारा
तो मैं हो लिया संग दिए एक तारा
गाता हुआ दुःख भूलता हुआ

मैं आशिक हूँ बहारों का नज़रों का, फिजाओं का, इशारों का
मैं मस्ताना मुसाफिर हूँ जवां धरती के अनजाने किनारों का
मैं आशिक हूँ बहारों का

..........................................
Main aashiq hoon baharon ka-Aashiq 1962

Saturday, 13 August 2011

बहारों की बारात आ गई-यकीन १९६९

फिल्म यकीन से एक गाना तो झट जुबान पे आ जाता है वो है फिल्म

का शीर्षक गीत। इतना भी याद आता है कि इस फिल्म में धर्मेन्द्र और

शर्मिला टैगोर हैं। इनकी जोड़ी भी कुछ ही फिल्मों में देखी होगी आपने।

३ फ़िल्में तो मुझे याद आती है-अनुपमा, चुपके चुपके और देवर। देवर

में थोड़ा अलग सा किस्सा था।



हिंदी फिल्म के नायक/हीरो अगर सामान्य पृठभूमि वाले होंगे तो भी उनके

पास गज़ब का सामान होता है। इस फिल्म के हीरो के पास एक शानदार

कार है। अब कार शानदार हो या ना हो, इससे विशेष फर्क नहीं पढता जब

नायिका ज्यादा आकर्षण का केंद्र हो बनिस्बत फिल्म में दिख रहे बाकी के

सामानों के। अब आप ये मत पूछ लीजियेगा कि गाने कि शुरुआत में नायिका

काली साडी पहने हुए है और नायक की कार के शीशे में वो सफ़ेद साडी पहने

दिखाई देती है.



एक बात ज़रूर कार चलने वालों से कहना चाहूँगा-अगर इतना स्टीयरिंग आप

गलती से भी न घुमाएँ किसी पुल पर चलते समय, अन्यथा आपके गाने के

अंतरे नाले या नदी में सुनाई देंगे. या तो फ़िल्मी कार का स्टीयरिंग खराब है,

या फिर उसमें विशेष प्रावधान किया हुआ है, या फिर कार एक जगह पर खड़ी

है और पुल पीछे सरक रहा है.



एक बात में तो सामान्य जीवन और फिल्म कम से कम एक सरीखी

लगते हैं-कार का टायर पंचर होना। गौरतलब है कि टायर पंचर होने

के बाद बदलने वाली कसरत में जिसको पसीना कम निकलता हो वो

भी पसीने से लथ-पथ हो जाता है, उस स्तिथि में नायक का उसी जोश

के साथ गीत गाना और मुस्कुराना अतिश्योक्ति सी लगती है। खैर गीत

सुनिए जो हसरत जयपुरी का लिखा हुआ है और इसकी धुन बनाई है

शंकर जयकिशन ने। मोहम्मद रफी ने इसे गाया है जो कि धर्मेन्द्र के

पसंदीदा गायक रहे हैं।







गीत के बोल:





बहारों की बारात आ गई

ख़ुशी को ले के साथ आ गई

सुनो तो मेरे दिल सुनो तो मेरी जान

होठों पे दिल कि बात आ गई



बहारों की बारात आ गई

ख़ुशी को ले के साथ आ गई

सुनो तो मेरे दिल सुनो तो मेरी जान

होठों पे दिल की बात आ गई



बहारों की बारात



मुझसे देखो ना शरमाना तुम

मेरी बाहों में खो जाना तुम

मुझसे देखो ना शरमाना तुम

मेरी बाहों में खो जाना तुम

इंतजारी की हद हो चुकी

और ज्यादा ना तरसना तुम

और ज्यादा ना तरसना तुम



बहारों की बारात आ गई

ख़ुशी को ले के साथ आ गई

सुनो तो मेरे दिल सुनो तो मेरी जान

होठों पे दिल की बात आ गई



बहारों की बारात



आज छेड़ी हवाओं ने भी

प्यार की मस्त शहनाईयां

आज छेड़ी हवाओं ने भी

प्यार की मस्त शहनाईयां

वादियाँ बन गयीं हैं दुल्हन

जैसे उनकी हों परछाईयाँ

जैसे उनकी हों परछाईयाँ



बहारों की बारात आ गई

ख़ुशी को ले के साथ आ गई

सुनो तो मेरे दिल सुनो तो मेरी जान

होठों पे दिल की बात आ गई



बहारों की बारात

.................................

Baharon ki baraat-Yakeen 1969

Thursday, 4 August 2011

अंदाज़ मेरा मस्ताना-दिल अपना और प्रीत परायी १९६०

ये शायद मीना कुमारी के ट्रेजेडी क्वीन की छबि वाले युग में प्रवेश करने
के पहले के खुशनुमा गीतों में से एक है. एक ड्रीम सीक्वेंस की तरह सा
ये गीत एक मस्त धुन के दायरे में कैद है. मीना कुमारी के साथ इस दृश्य
में अभिनेता राजकुमार हैं. एक शब्द-तकलीना इस गीत का आकर्षण है.
इसका क्या मतलब है और क्यूँ प्रयोग हुआ है मेरे स्टार पर खोज जारी है.

गीत लिखा है शैलेन्द्र ने जिसे गाया है लता मंगेशकर के साथ महिला कोरस
ने. शंकर जयकिशन ने फिल्म दिल अपना और प्रीत परायी फिल्म का संगीत
तैयार किया है.



गीत के बोल:


अंदाज़ मेरा मस्ताना,
माँगे दिल का नज़राना
ज़रा सोच के आँख मिलाना,
हो जाए न तू दीवाना
के हम भी जवाँ हैं, समा भी जवाँ है
न फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है

तकलीना

अंदाज़ मेरा मस्ताना,
माँगे दिल का नज़राना
ज़रा सोच के आँख मिलाना,
हो जाए न तू दीवाना
के हम भी जवाँ हैं, समा भी जवाँ है
न फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है

प्यार की किताब हूँ मैं सच हूँ फिर भी ख़्वाब हूँ मैं
देखकर सुरूर आए, वो अजब शराब हूँ मैं
मैं हूँ जवानी का रंगीं तराना, रंगीं तराना

तकलीना

अंदाज़ मेरा मस्ताना,
माँगे दिल का नज़राना
ज़रा सोच के आँख मिलाना,
हो जाए न तू दीवाना
के हम भी जवाँ हैं, समा भी जवाँ है
न फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है

तुझको मेरी जुस्तुजू है मुझको तेरी आरज़ू है
मेरे दिल का आईना तू दिल के आईने में तू है
हम से ही रोशन है सारा ज़माना, सारा ज़माना

तकलीना

अंदाज़ मेरा मस्ताना,
माँगे दिल का नज़राना
ज़रा सोच के आँख मिलाना,
हो जाए न तू दीवाना
के हम भी जवाँ हैं, समा भी जवाँ है
न फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है

मैं किधर हूँ तू कहाँ है ये ज़मीं या आसमाँ है
मेरे तेरे प्यार की ये क्या अजीब दास्ताँ है
मीठा सा ये दर्द भी है सुहाना, दर्द सुहाना

तकलीना

अंदाज़ मेरा मस्ताना,
माँगे दिल का नज़राना
ज़रा सोच के आँख मिलाना,
हो जाए न तू दीवाना
के हम भी जवाँ हैं, समा भी जवाँ है
न फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है
.........................................
Andaz mera mastana-Dil Apna Aur Preet Parayi 1960

Wednesday, 3 August 2011

सुनते थे नाम हम-आह १९५३

सन १९५३ की फिल्म आह के लिए शंकर जयकिशन ने
एक से बढ़कर एक धुनें बनायीं। फिल्म का दर्द भरा गीत
हो या मस्ती भरा, हर गीत सुनने में अच्छा लगता है।
फिल्म से एक थोडा तेज गति वाला गीत सुनवाते हैं
लता मंगेशकर की आवाज़ में। गीत फिल्माया गया है
विजय लक्ष्मी पर जो एक पार्टी में ये गीत गा रही हैं।






गीत के बोल:



सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के
सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के

छुपते रहे जो मेरी नज़र से
दिल बोले मेरा तुम ही तो हो
आँखों से रंग मेरे दिल के उमंग पे
डाला तो डोला जिया झूम झूम के

सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के

ठुकरा चुके थे जिन की मुहब्बत
क्यों उन पे दीवाने हुए
तड़पा के प्यार ने जब हम को प्यार से
छेड़ा तो बोला जिया झूम झूम के

सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के

पहले कहीं ये दिल न झुका था
क्या जानूँ अब क्या हो गया
जाओ न आज कल तुम हम को छोड़ के
अपना तो डोला जिया झूम झूम के

सुनते थे नाम हम जिन का बहार से
देखा तो डोला जिया झूम झूम के
...................................
Sunte the naam ham-Aah 1953

Tuesday, 2 August 2011

जाने न नज़र पहचाने जिगर-आह १९५३

भीगने के बाद कपडे उतार कर ड्रम में बैठ कर मधुर गीत कैसे गाया जाए
राज कपूर सिखा रहे हैं फिल्म आह के इस गीत में। उनके साथ नर्गिस की
जोड़ी है. लता और मुकेश की आवाज़ में ये सदाबहार युगल गीत सुनिए।
इसे भी हसरत जयपुरी ने लिखा है और धुन बनायीं है शंकर जयकिशन ने।
फिल्म बरसात के साथ १९४९ में शुरू हुयी शैलेन्द्र, हसरत, शंकर जयकिशन
की चौकड़ी की संगीतमय धमा-चौकड़ी ने काफी समय तक हिंदी फिल्म संगीत
जगत में अपना डंका बजाया ।




गीत के बोल:

जाने न नज़र पहचाने जिगर
ये कौन जो दिल पर छाया
मेरा अंग अंग मुस्काया
मेरा अंग अंग मुस्काया

आवाज़ ये किसकी आती है
जो छेड़ के दिल को जाती है
आवाज़ ये किसकी आती है
जो छेड़ के दिल को जाती है
मैं सुन के जिसे शर्मा जाऊँ
है कौन जो दिल में समाया
मेरा अंग अंग मुस्काया
मेरा अंग अंग मुस्काया

जाने न नज़र पहचाने जिगर
ये कौन जो दिल पर छाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया

ढूँढेंगे उसे हम तारों में
सावन की ठण्डी बहारों में
ढूँढेंगे उसे हम तारों में
सावन की ठण्डी बहारों में
पर हम भी किसी से कम तो नहीं
क्यों रूप को अपने छुपाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया

बिन देखे जिसको प्यार करूँ
गर देखूँ उस को जान भी दूँ
बिन देखे जिसको प्यार करूँ
गर देखूँ उस को जान भी दूँ
एक बार कहो ओ जादूगर
ये कौन सा खेल रचाया
मेरा अंग अंग मुस्काया
मेरा अंग अंग मुस्काया
..................................
Jaane na nazar-Aah 1953

बिछड़े हुए परदेसी-बरसात १९४९

परदेसी हिट्स में सबसे पुराना हिट गीत कह सकती है आज की पीढ़ी
इसे। वैसे इससे पहले भी हिंदी फिल्मों में परदेसी गीत(जिनमें परदेसी
शब्द का प्रयोग हुआ है) बने हैं। इस गीत ने सफलता के नए कीर्तिमान
रचे। लता मंगेशकर की आवाज़ है, नर्गिस का अभिनय है, हसरत जयपुरी
के बोल और शंकर जयकिशन का संगीत है।




गीत के बोल:

बिछड़े हुए परदेसी
बिछड़े हुए परदेसी इक बार तो आना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू
बिछड़े हुए परदेसी

वादे भी किए तूने खाई थी क़सम मेरी
वादे भी किए तूने खाई थी क़सम मेरी
वादों पे ही जीती हूँ है आस मुझे तेरी
वादों पे ही जीती हूँ है आस मुझे तेरी
इतनी है अरज मेरी
इतनी है अरज मेरी मुझको न भुलाना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू

बिछड़े हुए परदेसी

दुनिया मुझे छीने है सबने मुझे घेरा है
दुनिया मुझे छीने है सबने मुझे घेरा है
और मेरी ज़ुबाँ पर तो बस नाम ही तेरा है
और मेरी ज़ुबाँ पर तो बस नाम ही तेरा है
दुनिया न हँसे मुझ पर
दुनिया न हँसे मुझ परइतना न रुलाना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू

बिछड़े हुए परदेसी

गैरों का न हो जाना जब अपना बनाया है
गैरों का न हो जाना जब अपना बनाया है
पास आ के न खो जाना जब दिल में बसाया है
पास आ के न खो जाना जब दिल में बसाया है
जो बात कही तूने
जो बात कही तूने वो बात निभाना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू

बिछड़े हुए परदेसी
........................................
Bichhde hue pardesi-Barsaat 1949

Thursday, 28 July 2011

इब्तिदा-ए-इश्क में हम -हरियाली और रास्ता १९६२

आज फरियाली का नाश्ता करते हुए एक फिल्म का नाम याद आया
हरियाली और रास्ता. फिल्म सन १९६२ की है जनाब. गीत एक युगल
गीत है लता और मुकेश की आवाजों में. गीत हलके फुल्के मूड वाला
है जिसे अपनी अपनी फ्री इस्टाइल में गाया जा रहा है परदे पर. फैशनेबल
स्वेटर के साथ सरकारी दफ्तर के चपरासी की टोपी का कुछ अजीब सा
कोम्बिनेशन लिए नायक बर्फीले पहाड़ों में कामगार मजदूर सरीखी दिख
रही नायिका के साथ गीत गा रहा है. बर्फीले इलाकों में ऐसी टोपी पहने
शायद ही आप किसी को देखें. अब शायद आप समझ गए होंगे कि फिल्म
जगत में इस जुमले का प्रयोग ज्यादा क्यूँ होता है-"अलग हट के"
नायक नायिका अति गदगद हैं उसकी क्या वज़ह है इसके लिए आपको एक
बार फिल्म अवश्य देखना पड़ेगी.

गीत लिखा है हसरत जयपुरइ ने और इसकी धुन बनायीं है शंकर जयकिशन
ने. फिल्म के सबसे लोकप्रिय गीतों में इसकी गिनती होती है.





गीत के बोल:

इब्तिदा-ए-इश्क़ में हम सारी रात जागे
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे
दिल में तेरी उलफ़त के बंधने लगे धागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे

क्या कहूँ कुछ कहाँ नहीं जाए
बिन कहे भी रहा नहीं जाए
रात-रात भर करवट मैं बदलूँ
दर्द दिल का सहा नहीं जाए
नींद मेरी आँखों से दूर-दूर भागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे

दिल में जागी प्रीत की ज्वाला
जबसे मैंने होश सम्भाला
मैं हूँ तेरे प्यार की सीमा
तू मेरा राही मतवाला
मेरे मन की बीना में तेरे राग जागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे

तूने जब से आँख मिलाई
दिल से इक आवाज़ ये आई
चल के अब तारों में रहेंगे
प्यार के हम तो हैं सौदाई
मुझको तेरी सूरत भी चाँद रात लागे,
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे
....................................
Ibteda-e-ishq mein ham-Hariyali aur rasta 1962

Sunday, 17 July 2011

मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए-पतिता १९५३

आइये लता के एक श्रेष्ठ दर्दीले गीत पर थोड़ी चर्चा की जाए। गीत के
बोल दर्द की सियाही से निकले से सुनाई पढ़ते हैं। गीत की खूबसूरती
ये है की शुरुआत से पहले हेमंत कुमार की आवाज़ में 'रघुपति राजा राम'
भजन की कुछ पंक्तियाँ हैं । फिल्म का नाम पतिता है और यह फिल्म
अपने समय की काफी बोल्ड विषय वाली फिल्म मानी जाती है थी। एक
पतिता को उचित स्थान दिलाने की जद्दोजहद में लगे नायक से नायिका
गीत के माध्यम से प्रश्न कर रही है जो खुद भी मस्तिष्क में चल रही
कशमकश से परेशां है।

गीत में कहीं भी पतिता शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है और नारी
चरित्र के गरिमा को इतनी खूबसूरती से पेश किया गया है की एकबारगी
आपको भी उस चरित्र से जुड़ाव सा महसूस होने लगता है और उसकी पीढ़ा
अपनी लगने लगती है।

ऐसे सरल से मगर मर्मस्पर्शी गीत किस गीतकार की कलम की देन हो सकते
हैं भला-? उषाकिरण पर फिल्माए गए और लता के गाये इस गीत को लिखा
है शैलेन्द्र ने और संवेदना को टटोलती धुन बनाई है शंकर जयकिशन ने.




गीत के बोल:

मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए
मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए
टूटे हुए खिलौनों से प्यार किसलिए
टूटे हुए खिलौनों से प्यार किसलिए

मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए
मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए

बना के जिन्दगानियाँ बिगाड़ने से क्या मिला
मेरी उम्मीद का जहाँ
मेरी उम्मीद का जहाँ उजाड़ने से क्या मिला
आई थी दो दिनों की ये बहार किसलिए

मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए
मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए

ज़रा सी धूल को हज़ार रूप नाम दे दिए
ज़रा सी जान, सर पे सात आसमान दे दिए
बर्बाद जिंदगी का ये सिंगार किसलिए

मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए
मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए

ज़मीन गैर हो गयी ये आसमान बदल गया
हवा के रुख बदल गए
हवा के रुख बदल गए हर एक फूल जल गया
बजते हैं अब ये साँसों के तार किसलिए

मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए
मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए
............................................
Mitti se khelte ho baar baar kis liye-Patita 1953

Saturday, 16 July 2011

तेरा मेरा प्यार अमर-असली नकली १९६२

आपको सुनवाते हैं एक सीधा सरल सा गीत. मैंडोलिन और तबले के
साथ एक सरल सी धुन बनाई है शंकर जयकिशन ने. अंतरों के बीच
का संगीत समूह-वायलिन द्वारा बनाया गया है जिसका प्रचुर मात्रा में
शंकर जयकिशन के संगीत में प्रयोग हुआ है. फिल्म की नायिका गरीब
घर की है इसलिए उसको दर लगता है-जैसा की इस गीत में उल्लेख है.
नायिका हैं साधना और नायक हैं देव आनंद.

गीत शैलेन्द्र ने लिखा है और शंकर जयकिशन की धुन पर इसे गाया है
लाता मंगेशकर ने. सादगी कितनी खूबसूरत है इस गीत को देख कर
आज की पीढ़ी को कुछ समझने की आवश्यकता है.



गीत के बोल:

तेरा मेरा प्यार अमर
तेरा मेरा प्यार अमर
फिर क्यों मुझको लगता है डर
मेरे जीवनसाथी बता
क्यों दिल धड़के रह-रह कर

क्या कहा है चाँद ने
जिसको सुन के चाँदनी
हर लहर पे झूम के
क्यों ये नाचने लगी
चाहत का है हरसूँ असर
फिर क्यों मुझको लगता है डर

तेरा मेरा प्यार अमर
फिर क्यों मुझको लगता है डर

कह रहा है मेरा दिल
अब ये रात ना ढले
खुशियों को ये सिलसिला
ऐसे ही चला चले
तुझको देखूँ, देखूँ जिधर
फिर क्यों मुझको लगता है डर

तेरा मेरा प्यार अमर
फिर क्यों मुझको लगता है डर

है शबाब पर उमंग
हर खुशी जवान है
मेरे दोनों बाहों में
जैसे आसमान है
चलती हूँ तारों पर
फिर क्यों मुझको लगता है डर

तेरा मेरा प्यार अमर
फिर क्यों मुझको लगता है डर
..................................
Tera mera pyar amar-Asli Naqli 1962

Friday, 15 July 2011

आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे-ब्रह्मचारी १९६८

आपको एक सूचना प्रधान गीत सुनवाते हैं. इसके मुखड़े के बोल ही
ऐसे हैं की लगता है सूचना दी जा रही हो. अपने ज़माने में आम श्रोता
और बाद के ज़माने में ओर्केस्ट्रा के कलाकारों और श्रोताओं का पसंदीदा
ये गीत है फिल्म ब्रह्मचारी से. गीत लिखा है शैलेन्द्र ने और इसे गाया
है रफ़ी और सुमन कल्याणपुर ने. संगीत तो आप पहचान ही गए होंगे
नहीं? तो, आपको पोस्ट के अंत में बतायेंगे.

आपको इसका विवरण ऐसे सुनाते हैं जैसे किसी किरकिट के मैच की
कमेंट्री सुनाई जाती है. - साड़े पांच इंच की मुस्कान के साथ एक
गिटार भांजता युवक गीत में सर्वप्रथम दिखाई देता है. इसके बाद प्रश्न
सूचक अंदाज़ में नायक नायिका की ओर कदम बढ़ा कर उससे कुछ
करने की इच्छा जाहिर करता है इशारों में जिसे नायिका शायद अभी
समझ नहीं पायी है. और जैसे ही नायक उसका हाथ पकड़ कर एक
चक्कर उसको खिलाता है नायिका खुशी से दायें बाएं होती हुई हाथ
झटकते हुए नाचना शुरू कर देती है मानो किसी खिलौने को चाबी दे
दी गयी हो. उसके बाद नायक बड़ी टांगने की पेटी(हारमोनियम)जैसे
दिखने वाले किसी वाद्य को बजाना शुरू कर देता है. मजे की बात ये
है कि वो एक कोर्ड(chord)के सेट पर उँगलियाँ जमाए है और बाकी
का काम बाजा खुद कर रहा है. अब एक विलन से दिखने वाले नौजवान
को देखिये सफ़ेद शेरवानी पहने, इनका नाम प्राण है. नायक नायिका का
गर्दन हिलाने का कार्यक्रम भी जारी है. हमारे स्टेटीशीयन थोड़ी देर में
बतलायेंगे कितनी बार गर्दन हिल गयी और कितनी बार शरीर के बाकी
भाग.

और लीजिए इसी के साथ नायक ने गाना शुरू कर दिया है. और मैंने भी
गीत के बोल लिखना शुरू कर दिया है. नायिका "अच्छा, तो क्या" जुमले
बोलने के बाद जो नायक गा रहा है वही दोहराना शुरू कर देती है जैसे कोई
ट्यूशन लेता हुआ बच्चा मास्टरजी के पहाडा को याद करते वक्त करता है-
दो एकं दो, दो दूनी चार . इसके बाद नायक एक अंग्रेजी बाजा जिसको हम
सेक्सोफोन कहते हैं, बजाना शुरू कर देता है एक आल राउंडर की तरह.
ऐसे होनहार युवकों की खेल जगत में बहुत ज़रूरत है जो कि समय आने
पर किरकिट का बल्ला छोड़ होकी, फुटबाल वगैरह खेल सकें, ज़रूरत पढ़ने
पर नाव का चप्पू भी चला सकें.

नायक नायिका का परिचय करवा दिया जाए इसी बीच जब तक सेक्सोफोन की
आवाज़ सुनाई देती है. नायक है शम्मी कपूर और नायिका हैं मुमताज़. अगले
ब्रेक में आपको गायक गायिकाओं के बारे में बतलायेंगे. और लीजिए वही नृत्य
फिर से चालू है अंग्रेजी के ट्विस्ट नृत्य से प्रेरित और इसमें हाथ झटकने की
देसी मिलावट है. इसको करने के पहले बस इतना करना होता है ,हाथ पानी
से धो ले और उसे पोंछें नहीं. बस ट्विस्ट नृत्य करते करते हाथ झटकिये,
हाथ अपने आप सूख जायेंगे. शम्मी कपूर के सर हिलाने की ट्रेडमार्क अदा को
नायिका भी इस गीत में दोहरा रही हैं. इस अदा का फायदा ये है कि अगर
आपके सर पर आटे का खुला डब्बा गिर पड़े तो इस प्रक्रिया को ३ मिनट तक
करने से आपके बालों पर चिपका,गिरा आटा एकदम झड कर अलग हो जायेगा.

सेक्सोफोन की आवाज़ बंद होते ही कैमरे ने भी झूम के अपना सर घुमा लिया है
और वो पार्टी में मौजूद लोगों की शक्लें पहचानने का एक मौका दे रहा है.

नायिका उसी अंदाज़ में पंक्तियाँ दोहराती है जिस अंदाज़ में नायक ने गाना शुरू
किया था. नायक "तो क्या" बोलता हुआ बीच में कूद पढता है जैसे किसी खिडकी
से कूद कर अंदर आया हो.

बाकी की कमेंट्री चटके(कमेन्ट)लगने के पश्चात उपलब्ध कराई जायेगी. ......



गीत के बोल:

आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
अच्छा !
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
तो क्या
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी

हमने तो प्यार में ऐसा काम कर लिया
प्यार की राह में अपना नाम कर लिया
हमने तो प्यार में ऐसा काम कर लिया
प्यार की राह में अपना नाम कर लिया
प्यार की राह में अपना नाम कर लिया

आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
अच्छा !
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
तो क्या
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी

दो बदन एक दिन एक जान हो गए
मंज़िलें एक हुईं हमसफ़र बन गए
दो बदन एक दिन एक जान हो गए
मंज़िलें एक हुईं हमसफ़र बन गए
मंज़िलें एक हुईं हमसफ़र बन गए

आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
अच्छा !
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
तो क्या
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी

क्यों भला हम डरें दिल के मालिक हैं हम
हर जनम में तुझे अपना माना सनम
क्यों भला हम डरें दिल के मालिक हैं हम
हर जनम में तुझे अपना माना सनम
हर जनम में तुझे अपना माना सनम


आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
अच्छा !
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी
तो क्या
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
सबको मालूम है और सबको खबर हो गयी

..................................
Ajkal tere mere pyar ke charche-Brahmachari 1968

Monday, 11 July 2011

आ जाओ तड़पते हैं अरमां-आवारा १९५१

लता मंगेशकर की आवाज़ में सुना जाये एक उच्च कोटि का दर्द भरा गीत.
ये लिया गया है फिल्म आवारा से. हसरत जयपुरी ने कई बढ़िया दर्द भरे
गीत भी लिखे हैं. ये उनकी लेखन शैली का एक शानदार नमूना है. उनकी
उपमाएं समकालीन गीतकारों के समान ही लेकिन थोड़ी अलग सी लगती हैं.
उदाहरण के लिए- चाँद के डोले में आई नज़र. प्रयोग करने में वे भी नहीं
चूके और हमें उस वजह से कुछ अनूठी चीज़ें सुनने को मिलीं

प्रस्तुत गीत नर्गिस के ऊपर फिल्माया गया है जिनकी भावाभिव्यक्ति लता के
गीतों पर आला दर्जे की रही हमेशा.

अभी हमने संगीत पक्ष की तो बात ही नहीं की है. इस हिट फिल्म का संगीत
तैयार किया है शंकर जयकिशन की जोड़ी ने. फिल्म के सभी गाने बेहद लोकप्रिय
हैं और सबसे ज्यादा लोकप्रिय गीत होने का सेहरा बंधा था मुकेश के गाये शीर्षक
गीत पर-“आवारा हूँ”.




गीत के बोल:

आ जाओ तड़पते हैं अरमां
आ जाओ तड़पते हैं अरमां
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
मै रोऊँ यहाँ, तुम चुप हो वहां
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है

ओ, चाँद की रंगत उड़ने लगी
वो तारों के दिल अब डूब गये
डूब गये

है दर्द भरा बेचैन समां
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है

इस चाँद के डोले में आई नज़र
इस चाँद के डोले में आई नज़र
यह रात की दुलहन चल दी किधर
चल दी किधर

आवाज़ तो दो, खोये हो कहाँ
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है

घबरा के नज़र भी हार गई
घबरा के नज़र भी हार गई
तकदीर को भी नींद आने लगी
नींद आने लगी

तुम आते नहीं, मै जाऊं कहाँ
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
अब रात गुज़रने वाली है
........................................
Aa jao tadapte hain armaan-Awara 1951

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर २-जंगली १९६१

लता की आवाज़ में ये गीत आप सुन चुके हैं अब सूना
जाए रफ़ी की आवाज़ में जो ज्यादा लोकप्रिय है. शम्मी कपूर
इसको परदे पर गा रहे हैं. वो जो अलसाया नशीलापन है जिनमें
ये पंक्तियाँ गई जा रही हैं- "रोने कहोगे रो लेंगे अब" , वो रफ़ी
की आवाज़ की एक विशेष खूबी है.



गीत के बोल:

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर

तुमने मुझको हँसना सिखाया
तुमने मुझको हँसना सिखाया
रोने कहोगे रो लेंगे अब
आँसू का हमारे ग़म ना करो
वो बहते तो बहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर

चाहे बना दो चाहे मिटा दो
चाहे बना दो चाहे मिटा दो
मर भी गए तो देंगे दुआएँ
उड़-उड़ के कहेंगी खाक सनम
ये दर्द-ए-मुहब्बत सहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर
दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे
तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे
पलकों की छाँव में रहने दो
..............................
Ehsan tera hoga mujh par 2-Junglee

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे-आह १९५३

गायक - मुकेश
गीतकार-शैलेन्द्र
संगीतकार -शंकर जयकिशन
फिल्म -आह
वर्ष-१९५३
श्रेणी-तांगा गीत

* परदे पर तांगे में गायक मुकेश स्वयं हैं.



गीत के बोल:

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी

शाम हुई ये देश बीराना
तुझ को अपने बलम घर जाना,
सजन घर जाना
शाम हुई ये देश बीराना
तुझ को अपने बलम घर जाना,
सजन घर जाना
राह में मूरख मत लुट जाना,
मत लुट जाना

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी

बाबुल का घर छूटा जाये
अखियन घोर अँधेरा छाये,
जी दिल घबराये
आँख से टपके दिल का खज़ाना
दिल का खज़ाना

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी

छोटी सी ये ज़िंदगानी रे
चार दिन की जवानी तेरी
हाय रे हाय
ग़म की कहानी तेरी
...............................
Chhoti si ye zindagani-Aah 1953

दिल से दिल टकराये-लव मैरिज १९५९

गायक-गीता दत्त, मोहम्मद रफ़ी
गीतकार-शैलेन्द्र
संगीतकार-शंकर जयकिशन
फिल्म-लव मैरिज
वर्ष-१९५९




गीत के बोल:

दिल से दिल टकराये,
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

दिल से दिल टकराये
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

दिल से दिल टकराये
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

वो उत्तर के पंछी थे
और वो दक्षिण की मैना
ली ली ली ली ली ली ली ली ली या
वो उत्तर के पंछी थे
और वो दक्षिण की मैना
एक रोज़ एक बाग़ में
यूँ ही लड़ गये नैना
एक रोज़ एक बाग़ में
यूँ ही लड़ गये नैना
दिल दे के घर आये
घर आ कर पच्छताये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

कब तक छत पर लेट कर
करते तारों से बातें
ली ली ली ली ली ली ली ली ली या
कब तक छत पर लेट कर
करते तारों से बातें
नींद चली गई रूठ के
कैसे कटतीं रातें
नींद चली गई रूठ के
कैसे कटतीं रातें
अपनों से शरमाये
ग़ैरों से कतराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

दिल से दिल टकराये
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये

दिल से दिल टकराये
फिर दोनों घबराये
सब्र की डोरी टूट गई तो
लव मैरिज कर लाये
लव मैरिज कर लाये
...............................
Dil se dil takraye-Love Marriage 1959

Thursday, 30 June 2011

अब मेरा कौन सहारा-बरसात १९४९

नर्गिस और राजकपूर की जोड़ी की ये तीसरी फिल्म थी। इसमें
राज कपूर के साले साहब-प्रेमनाथ भी हैं उनके साथ। बरसात
फिल्म ने फिल्म सिनेमा को नए समीकरण दिखाए तो कुछ
समीकरण बदले भी। बदलते युगों के युग्म पर कुछ घटनाएँ
होती हैं कुछ वैसी ही यह फिल्म है जिसे हम ५० के दशक में
हिंदी सिनेमा में होने वाले बदलाव का बिगुल जैसा कह सकते हैं।
ऐसी उस दौर की कुछ और प्रतिनिधि फ़िल्में भी हैं जिनपर चर्चा
आगे उन फिल्मों के गीतों की प्रस्तुति के समय हम करेंगे ।

फ़िल्म बरसात से तीसरा गीत पेश है। नर्गिस के ऊपर फिल्माया
गया अधिक कर्णप्रिय गीत सन १९४९ से सुनने वालों को आनंद दे
रहा है। एक दर्द भरा गीत जिसका फिल्मांकन भी बढ़िया है आपको
अंत तक बांधे रखेगा । ऐसे गीतों में किसी रंग की आवश्यकता नहीं
होती, ये तो श्वेत श्याम में भी ऐसा कमाल दिखाते हैं कि देखने वाला
भूल जाता है कि वो श्वेत श्याम फिल्म देख रहा है या रंगीन।

हुस्नलाल भगतराम के संगीत की जो ध्वनियाँ हैं वैसी ही साजों की
आवाजें इस गीत में भी हैं मगर थोड़ी तेज़ गति में ।



गीत के बोल:

अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
मेरे बलम
मेरे बलम मुझको ना भुलाना
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा

तुझसे बिछड़ कर दूर हुई
मिलने से मजबूर हुई
तुझसे बिछड़ कर दूर हुई
मिलने से मजबूर हुई
रो-रो के दिल ने तुझको पुकारा

अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा

तुझसे मिलन की आस लगी
नैना रस की प्यास लगी
नैना रस्ते
मुझको है तेरा गम भी न्यारा

अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा

पंख लगे उड़ जाऊं मैं
लेकिन कैसे आऊँ मैं
पंख लगे उड़ जाऊं मैं
लेकिन कैसे आऊँ मैं
बेबस हुयी किस्मत ने मारा

अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
..............................
Ab mera kaun sahara-Barsaat 1949

Saturday, 18 June 2011

ऐहसान तेरा होगा मुझ पर १ -जंगली १९६१

आपको एक मधुर और लोकप्रिय गीत सुनवाते हैं फिल्म जंगली से।

इस फिल्म से दूसरा गीत पेश कर रहे हैं ब्लॉग पर। लता मंगेशकर

की आवाज़ में ये गीत फिल्माया गया है सायरा बानो पर। नायिका गीत

के माध्यम से नायक से मोहब्बत कबूल फरमाने की गुज़ारिश कर रही

है। युवा सायरा बानो और युवावस्था की आखिरी सीढ़ी पर खड़े

वाले शम्मी की ये फिल्म जनता द्वारा बेहद पसंद की गई, विशेषकर

इसके गीतों की वजह से। हसरत जयपुरी का लिखा हुआ गीत है और

संगीत शंकर जयकिशन ने तैयार किया है। गीत के अंतरे में लता की

आवाज़ को आप सुरों की ऊंची पट्टी पर पहुँचते पाएंगे। ये केवल एक

दो शब्दों तक ही सीमित है मगर काफी कष्टदायी होता है किसी भी

गायक गायिका के लिए। वैसे भी हिंदी फिल्म संगीतकारों ने लता

मंगेशकर से काफी ऊंची पट्टी वाले गाने गवाए हैं। सलिल चौधरी

साहब उस काम में उस्ताद रहे हैं और उन्होंने एक से बढ़कर एक

सुर खींचने वाले गाने लता को दिए। चलिए गीत सुना जाये, इस मुद्दे

पर चर्चा फिर कभी। गीत थोड़े अलग अंदाज़ में गाया गया है

और आप पाएंगे जैसे खुद सायरा ही ये गीत परदे पर गा रही हों।











गीत के बोल:



एहसान तेरा होगा मुझ पर

दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो



एहसान तेरा होगा मुझ पर

दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो



एहसान तेरा होगा मुझ पर



तुमने मुझको हँसना सिखाया

तुमने मुझको हँसना सिखाया

रोने कहोगे रो लेंगे अब

आँसू का हमारे ग़म ना करो

वो बहते तो बहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो



एहसान तेरा होगा मुझ पर



चाहे बना दो, चाहे मिटा दो,

चाहे बना दो, चाहे मिटा दो,

मर भी गए तो देंगे दुआएँ

उड़-उड़ के कहेंगी खाक सनम

ये दर्द-ए-मुहब्बत सहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो



एहसान तेरा होगा मुझ पर

दिल चाहता है वो कहने दो, मुझे

तुमसे मुहब्बत हो गई है मुझे

पलकों की छाँव में रहने दो

.................................

Ehsan tera hoga mujh par 1-Junglee 1961

Thursday, 9 June 2011

मैं रंगीला प्यार का राही-छोटी बहन १९५९

आइये एक हास्य गीत सुनें। गाने के बोल ज्यादा मजाकिया नहीं हैं
मगर ये फिल्माया गया है महमूद और शुभा खोटे की प्रसिद्ध जोड़ी पर।
फिल्म छोटी बहन के २ गीत आप सुन चुके हैं इस ब्लॉग पर। ये तीसरा
गीत है। गीत गाया है सुबीर सेन और लता मंगेशकर ने। इस गीत
को सुबीर जैसा गा रहे हैं वैसे ही बोल लिखने का प्रयास कर रहा हूँ।
भूल चूक लेनी देनी। हर दूसरा बंगाली गायक उन दिनों हेमंत कुमार
का दूर का रिश्तेदार सुनाई पढता। तांगा बहुत दिन से ना सड़क पे दिखा
और ना ही किसी बम्बैया गीत में, सो आज देख लेते हैं । उम्मीद है
इस गीत पर घोड़े ने भी खुश हो कर कुछ आवाजें ज़रूर निकाली होंगी।
ताँगे के नीचे लगी घंटी की आवाज़ तक सुना दी गई है गीत में।




गीत के बोल:

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

तेरे लिए ही संभाल के रखा था
प्यार भरा ये दिल
तेरे इशारों पे चलता रहेगा
ओ मेरे कातिल

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा हा हा

हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा हा हा

तेरी राह पर जो मैं रुक गया
मुझे रही ना अपनी खबर
तेरी राह पर जो मैं रुक गया
मुझे रही ना अपनी खबर
मेरे साथ चल मेरे हमसफ़र
अब तेरी मेरी एक डगर
मेरे साथ चल मेरे हमसफ़र
अब तेरी मेरी एक डगर
अब तेरी मेरी एक डगर

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

जो आज है वो कभी ना था
ये चमन पे उजला निखर
जो आज है वो कभी ना था
ये चमन पे उजला निखर
ये रंग है मेरे प्यार का
जो खिला है बन के बाहर
ये रंग है मेरे प्यार का
जो खिला है बन के बाहर
जो खिला है बन के बाहर

तेरे लिए ही संभाल के रखा था
प्यार भरा ये दिल
तेरे इशारों पे चलता रहेगा
ओ मेरे कातिल

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

फुर्र्र्र या हा
ऐ हा हा हा हा हा
.................................
Main rangeela pyar ka raahi-Chhoti behan 1959

दिल की नज़र से-अनाड़ी १९५८

ब्लॉग पर नज़र दौडाई तो फिल्म अनाड़ी का एक भी गीत नहीं
दिखा। आज सड़क पर चलते चलते मुझे ये गीत कहीं सुनाई
दिया। सदाबहार युगल गीत जो फिल्माया गया है नूतन और
राज कपूर पर। राज कपूर की फिल्मों में नायिकाओं के रोल
दूसरे निर्देशकों की फिल्मों की तुलना में ज्यादा लम्बे होते। ये
फिल्म हृषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी थी, हो सकता है
की कहानी की मांग और राज कपूर के आग्रह पर नायिका और
चरित्र भूमिका में ललिता पवार की भूमिकाएं बढ़ा दी गई हों।

वैसे इस मामले में श्वेत श्याम का युग रंगीन युग से कहीं बेहतर
था। नारी की छबि और उसके चरित्र परदे पर ज्यादा सशक्त
हुआ करते थे। ये मैं अपनी देखी हुई फिल्मों और अपने अनुभवों
के आधार पर अनुमान लगा रहा हूँ, हो सकता है आपके विचार
मुझसे अलग हों। जो भी हो, नूतन इस फिल्म में भी अपनी
गरिमामयी उपस्थिति से सबको प्रभावित कर गयीं। ये कुछ
अजीब तथ्य है कि आम जनता को राज कपूर की फिल्मों में
नायक नज़र आता और मुझे उन फिल्मों की नायिकाएं।
राज कपूर की फिल्मों की नायिकाओं ने मुझे ज्यादा प्रभावित
किया, अभिनय के मामले में।

गीत शैलेन्द्र का लिखा हुआ है और शंकर जयकिशन की धुन पर
इसे गाया है मुकेश और लता मंगेशकर ने।





गीत के बोल:

दिल की नज़र से, नज़रों की दिल से
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे

धीरे से उठकर, होठों पे आया
ये गीता कैसा, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे

दिल की नज़र से, नज़रों की दिल से
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से

क्यों बेखबर, यूँ खिंची सी चली जा रही मैं
ये कौनसे बन्धनों में बंधी जा रही मैं
क्यों बेखबर, यूँ खिंची सी चली जा रही मैं
ये कौनसे बन्धनों में बंधी जा रही मैं
कुछ खो रहा है, कुछ मिल रहा है
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से

हम खो चले, चाँद है या कोई जादूगर है
या, मदभरी, ये तुम्हारी नज़र का असर है
हम खो चले, चाँद है या कोई जादूगर है
या, मदभरी, ये तुम्हारी नज़र का असर है
सब कुछ हमारा, अब है तुम्हारा
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे,
दिल की नज़र से

आकाश में, हो रहें हैं ये कैसे इशारे
क्या, देखकर, आज हैं इतने खुश चाँद-तारे
आकाश में, हो रहें हैं ये कैसे इशारे
क्या, देखकर, आज हैं इतने खुश चाँद-तारे
क्यों तुम पराये, दिल में समाये
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे

दिल की नज़र से, नज़रों की दिल से
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे

धीरे से उठकर, होठों पे आया
ये गीता कैसा, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से
.....................................
Dil ki nazar se-Anadi 1958
 
 
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