फिल्म समुन्दर से एक शानदार गीत आपको सुनवाया था पहले. अब
सुनते हैं फिल्म से एक कम सुना हुआ गीत. गीत ये भी कर्णप्रिय है
मगर ज्यादा सुना गया केवल मदन मोहन भक्तों द्वारा.
गीत फिल्माया गया है बीना रॉय पर. फिल्म में उनके साथ प्रेमनाथ
नायक हैं जिनकी फिल्म में दोहरी भूमिका है. राजेंद्र कृष्ण ने गीत लिखा
है और इसे गा रही हैं लता मंगेशकर.
गीत के बोल:
ओ मोरे सजना
ढूँढूँ कहाँ तेरा निशाँ
तुझको पुकारे मेरे दिल का जहाँ
आ जा कहीं से आ जा दिल का करार ले के
बैठे हुये हैं कब से तेरा इंतज़ार ले के
आ जा कहीं से आ जा दिल का करार ले के
बैठे हुये हैं कब से तेरा इंतज़ार ले के
आ जा कहीं से आ जा
ये हवायें भीगी भीगी ये हसीं हसीं नज़ारे
मेरे साथ कर रहे हैं तेरा इंतज़ार प्यारे
तेरा इंतज़ार प्यारे
बस एक झलक दिखा दे आँखों में प्यार ले के
बैठे हुये हैं कब से तेरा इंतज़ार ले के
आ जा कहीं से आ जा
कहती है आरजू ये आ जा किसी बहाने
कहती है आरजू ये आ जा किसी बहाने
दिल ही में रह न जाएँ कहीं प्यार के फ़साने
कहीं प्यार के फ़साने
सूने चमन में आ जा फिर से बहार ले के
बैठे हुये हैं कब से तेरा इंतज़ार ले के
आ जा कहीं से आ जा
.........................
O more sajna-Samundar 1957
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Wednesday, 3 August 2011
Thursday, 30 June 2011
कौन रोकेगा अब प्यार का रास्ता-एक कली मुस्काई १९६८
लगे हाथ 'एक कली मुस्काई' फिल्म का तीसरा गीत भी सुन ही
लिया जाये। शायद इस गीत का विडियो उपलब्ध नहीं है यू ट्यूब
पर। खुशनुमा सा गीत है और सितार का भरपूर इस्तेमाल हुआ है
इसमें।
गीत के बोल:
कौन रोकेगा अब प्यार का रास्ता
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
आज बैठे-बिठाए ये क्या हो गया
दिल की हर बात आँखों में आने लगी
दिल की हर बात आँखों में आने लगी
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
आ गए, आ गए, मुस्कुराने के दिन
आ गए, आ गए, मुस्कुराने के दिन
लड़खड़ाने के दिन, गुनगुनाने के दिन
लड़खड़ाने के दिन, गुनगुनाने के दिन
मैने पायल तो पाँवों में बाँधी नहीं
और आवाज़
और आवाज़ घुँघरू की आने लगी
और आवाज़ घुँघरू की आने लगी
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
कोई राहों में कलियाँ बिछाने लगा
कोई राहों में कलियाँ बिछाने लगा
और इशारों से मुझको बुलाने लगा
और इशारों से मुझको बुलाने लगा
मैने दर्पण अभी तक तो देखा नहीं
meri बिंदिया मगर झिलमिलाने लगी
meri बिंदिया मगर झिलमिलाने लगी
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
आज कैसी चली भीगी-भीगी पवन
आज कैसी चली भीगी-भीगी पवन
लहलहाने लगा मेरा नाज़ुक बदन
लहलहाने लगा मेरा नाज़ुक बदन
मैने पलकें अभी तक झुकाई नहीं
नींद क्यूँ मेरी आँखों में आने लगी
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
कौन रोकेगा अब प्यार का रास्ता
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
....................................
Kaun rokega ab....main to pee ki nagariya-Ek kali muskayi 1968
लिया जाये। शायद इस गीत का विडियो उपलब्ध नहीं है यू ट्यूब
पर। खुशनुमा सा गीत है और सितार का भरपूर इस्तेमाल हुआ है
इसमें।
गीत के बोल:
कौन रोकेगा अब प्यार का रास्ता
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
आज बैठे-बिठाए ये क्या हो गया
दिल की हर बात आँखों में आने लगी
दिल की हर बात आँखों में आने लगी
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
आ गए, आ गए, मुस्कुराने के दिन
आ गए, आ गए, मुस्कुराने के दिन
लड़खड़ाने के दिन, गुनगुनाने के दिन
लड़खड़ाने के दिन, गुनगुनाने के दिन
मैने पायल तो पाँवों में बाँधी नहीं
और आवाज़
और आवाज़ घुँघरू की आने लगी
और आवाज़ घुँघरू की आने लगी
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
कोई राहों में कलियाँ बिछाने लगा
कोई राहों में कलियाँ बिछाने लगा
और इशारों से मुझको बुलाने लगा
और इशारों से मुझको बुलाने लगा
मैने दर्पण अभी तक तो देखा नहीं
meri बिंदिया मगर झिलमिलाने लगी
meri बिंदिया मगर झिलमिलाने लगी
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
आज कैसी चली भीगी-भीगी पवन
आज कैसी चली भीगी-भीगी पवन
लहलहाने लगा मेरा नाज़ुक बदन
लहलहाने लगा मेरा नाज़ुक बदन
मैने पलकें अभी तक झुकाई नहीं
नींद क्यूँ मेरी आँखों में आने लगी
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
कौन रोकेगा अब प्यार का रास्ता
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
मैं तो पी की नगरिया जाने लगी
....................................
Kaun rokega ab....main to pee ki nagariya-Ek kali muskayi 1968
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Wednesday, 29 June 2011
न तुम बेवफ़ा हो-एक कली मुस्काई १९६८
ज़िन्दगी के सफ़र में कुछ ऐसे मुसाफिर मिलते हैं जो
बहुत दूर साथ चलने का वादा/ड्रामा कर के किसी मोड़ पर
बिछड़ जाते हैं या गधे के सर से सींग की तरह गायब हो
जाते हैं।
अगर अलगाव या बिछुड़न के लिए परिस्थितियां जिम्मेदार
होती हैं तो मामला ५०:५० अन्यथा प्रस्तुत गीत की पंक्तियाँ
दोहराते हुए दिल को ढाढ़स बंधाना पढता है। गीत में नायक
के जाते ही नायिका अपने दिल का गुबार बाहर निकाल रही
है।
मदन मोहन के रचे लता के गाये गीतों में से तकरीबन ५०
गीत मुझे बेहद पसंद हैं। ये उनमें से एक है। इसे मुझे सुनते
हुए कई साल हो गये ।
गीत में मीरा नामक अभिनेत्री दिखाई दे रही हैं। राजेंद्र कृष्ण
के बोलों को आवाज़ दी है लता मंगेशकर ने।
गीत के बोल:
न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं
न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं
मगर क्या करें अपनी राहें जुदा हैं
न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं
जहाँ ठंडी-ठंडी हवा चल रही है
जहाँ ठंडी-ठंडी हवा चल रही है
किसी की मोहब्बत वहाँ जल रही है
ज़मीं-आसमां हमसे दोनों खफ़ा हैं
न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं
अभी कल तलक़ तो मुहब्बत जवाँ थी
अभी कल तलक़ तो मुहब्बत जवाँ थी
मिलन ही मिलन था जुदाई कहाँ थी
मगर आज दोनों ही बेआसरा हैं
न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं
ज़माना कहे मेरी राहों में आ जा
ज़माना कहे मेरी राहों में आ जा
मुहब्बत कहे मेरी बाँहों में आ जा
वो समझें ना मजबूरियाँ अपनी क्या हैं
न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं
मगर क्या करें अपनी राहें जुदा हैं
न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं
.............................
Na tum bewafa ho-Ek Kali Muskayi 1968
बहुत दूर साथ चलने का वादा/ड्रामा कर के किसी मोड़ पर
बिछड़ जाते हैं या गधे के सर से सींग की तरह गायब हो
जाते हैं।
अगर अलगाव या बिछुड़न के लिए परिस्थितियां जिम्मेदार
होती हैं तो मामला ५०:५० अन्यथा प्रस्तुत गीत की पंक्तियाँ
दोहराते हुए दिल को ढाढ़स बंधाना पढता है। गीत में नायक
के जाते ही नायिका अपने दिल का गुबार बाहर निकाल रही
है।
मदन मोहन के रचे लता के गाये गीतों में से तकरीबन ५०
गीत मुझे बेहद पसंद हैं। ये उनमें से एक है। इसे मुझे सुनते
हुए कई साल हो गये ।
गीत में मीरा नामक अभिनेत्री दिखाई दे रही हैं। राजेंद्र कृष्ण
के बोलों को आवाज़ दी है लता मंगेशकर ने।
गीत के बोल:
न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं
न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं
मगर क्या करें अपनी राहें जुदा हैं
न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं
जहाँ ठंडी-ठंडी हवा चल रही है
जहाँ ठंडी-ठंडी हवा चल रही है
किसी की मोहब्बत वहाँ जल रही है
ज़मीं-आसमां हमसे दोनों खफ़ा हैं
न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं
अभी कल तलक़ तो मुहब्बत जवाँ थी
अभी कल तलक़ तो मुहब्बत जवाँ थी
मिलन ही मिलन था जुदाई कहाँ थी
मगर आज दोनों ही बेआसरा हैं
न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं
ज़माना कहे मेरी राहों में आ जा
ज़माना कहे मेरी राहों में आ जा
मुहब्बत कहे मेरी बाँहों में आ जा
वो समझें ना मजबूरियाँ अपनी क्या हैं
न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं
मगर क्या करें अपनी राहें जुदा हैं
न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं
.............................
Na tum bewafa ho-Ek Kali Muskayi 1968
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Tuesday, 28 June 2011
तेरी निगाहों में तेरी ही बाहों में -बहाना १९६०
जादू है या नशा है मालूम नहीं मगर जूने पुराने गीतों की तासीर
और असर आश्चर्यजनक है। मधुर गीत सुनने के लिए किसी भी
बहाने की ज़रुरत नहीं है अतः आज आपको फिल्म बहाना से एक
गीत सुनवा देते हैं। सन १९६० की फिल्म में ये मधुर गीत है जिसे
आशा और तलत महमूद ने गाया है। राजेंद्र कृष्ण के लिखे गीत
की धुन बनाई है मदन मोहन ने।
गीत के बोल:
तेरी निगाहों में तेरी ही बाहों में
रहने को जी चाहता है
दिल में छुपाई हुई बात सजन से
कहने को जी चाहता है
तेरी निगाहों में तेरी ही बाहों में
रहने को जी चाहता है
तेरी निगाहों में
दिल ये हमारा घर है तुम्हारा
आओ जी, आ के बस जाओ जी
दिल ये हमारा घर है तुम्हारा
आओ जी, आ के बस जाओ जी
नैन हमारे देखे ख़्वाब तुम्हारे
ज़रा ख़्वाबों में आ के हँस जाओ जी
जान से प्यारा हमें, घर ये तुम्हारा यहाँ
रहने को जी चाहता है
तेरी निगाहों में तेरी ही बाहों में
रहने को जी चाहता है
तेरी निगाहों में
देखो जी देखो और किसी को
दिल में न अपने बसाना जी
प्यार भरा ये वादा हम तो न भूले पिया
तुम भी इसे न भुलाना जी
प्रीत हमारी रहे दुनिया से न्यारी यही
कहने को जी चाहता है
तेरी निगाहों में तेरी ही बाहों में
रहने को जी चाहता है
दिल में छुपाई हुई बात सजन से
कहने को जी चाहता है
तेरी निगाहों में तेरी ही बाहों में
रहने को जी चाहता है
तेरी निगाहों में
........................
Teri nigahon mein-Bahana 1960
और असर आश्चर्यजनक है। मधुर गीत सुनने के लिए किसी भी
बहाने की ज़रुरत नहीं है अतः आज आपको फिल्म बहाना से एक
गीत सुनवा देते हैं। सन १९६० की फिल्म में ये मधुर गीत है जिसे
आशा और तलत महमूद ने गाया है। राजेंद्र कृष्ण के लिखे गीत
की धुन बनाई है मदन मोहन ने।
गीत के बोल:
तेरी निगाहों में तेरी ही बाहों में
रहने को जी चाहता है
दिल में छुपाई हुई बात सजन से
कहने को जी चाहता है
तेरी निगाहों में तेरी ही बाहों में
रहने को जी चाहता है
तेरी निगाहों में
दिल ये हमारा घर है तुम्हारा
आओ जी, आ के बस जाओ जी
दिल ये हमारा घर है तुम्हारा
आओ जी, आ के बस जाओ जी
नैन हमारे देखे ख़्वाब तुम्हारे
ज़रा ख़्वाबों में आ के हँस जाओ जी
जान से प्यारा हमें, घर ये तुम्हारा यहाँ
रहने को जी चाहता है
तेरी निगाहों में तेरी ही बाहों में
रहने को जी चाहता है
तेरी निगाहों में
देखो जी देखो और किसी को
दिल में न अपने बसाना जी
प्यार भरा ये वादा हम तो न भूले पिया
तुम भी इसे न भुलाना जी
प्रीत हमारी रहे दुनिया से न्यारी यही
कहने को जी चाहता है
तेरी निगाहों में तेरी ही बाहों में
रहने को जी चाहता है
दिल में छुपाई हुई बात सजन से
कहने को जी चाहता है
तेरी निगाहों में तेरी ही बाहों में
रहने को जी चाहता है
तेरी निगाहों में
........................
Teri nigahon mein-Bahana 1960
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Monday, 6 June 2011
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो-सुहागन १९६४
फिल्म सुहागन(१९६४) से आपको पूर्व में २ गीत सुनवा चुके हैं।
अब सुनिए फिल्म का तीसरा गीत जो कि लता और तलत
की आवाज़ में एक युगल गीत है। इस फिल्म का एक युगल गीत
जो आपने पहले सुना था वो मन्ना डे और लता की आवाज़ में है।
६० के दशक के आते तलत महमूद को फिल्मों में गीत मिलना
कम हो गये। बदलते ज़माने और पसंद के साथ दूसरे गायक दृश्य
में दिखाई देने लगे। दूसरे संगीतकार जहाँ उनसे किनारा करने लगे,
मदन मोहन ने उन्हें कुछ गीत अवश्य दिए गाने को. मदन मोहन
ने तलत महमूद को फिल्म जहाँआरा में भी अवसर दिए।
गीत के बोल:
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
हाँ हाँ हाँ आ आ आ आ
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
तुम्हें दिल में बसाया है
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
हाँ हाँ हाँ हाँ आ आ आ आ
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हें दिल से लगाया है
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
इबादत है निगाहों की तुझी को देखते रहना
तेरी हर बात को सहना
तुम्हीं तो मेरे साथी हो तुम्हें अपना बनाया है
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
तमन्ना है इन आँखों की तुम्हारे ही नज़ारे हों
जहाँ देखूँ तुम्हें देखूँ हसीं जलवे तुम्हारे हों
हसीं जलवे तुम्हारे हों
तुम्हीं ने मेरी मंज़िल को बहारों से सजाया है
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हारे हाथ में है अब हमारी लाज का आँचल
न बह जाए कहीं देखो हमारी आँख का काजल
न बह जाए कहीं देखो हमारी आँख का काजल
हमारी आंख का काजल
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
......................................
Tumhin to meri pooja ho-Suhagan 1964
अब सुनिए फिल्म का तीसरा गीत जो कि लता और तलत
की आवाज़ में एक युगल गीत है। इस फिल्म का एक युगल गीत
जो आपने पहले सुना था वो मन्ना डे और लता की आवाज़ में है।
६० के दशक के आते तलत महमूद को फिल्मों में गीत मिलना
कम हो गये। बदलते ज़माने और पसंद के साथ दूसरे गायक दृश्य
में दिखाई देने लगे। दूसरे संगीतकार जहाँ उनसे किनारा करने लगे,
मदन मोहन ने उन्हें कुछ गीत अवश्य दिए गाने को. मदन मोहन
ने तलत महमूद को फिल्म जहाँआरा में भी अवसर दिए।
गीत के बोल:
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
हाँ हाँ हाँ आ आ आ आ
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
तुम्हें दिल में बसाया है
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
हाँ हाँ हाँ हाँ आ आ आ आ
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हें दिल से लगाया है
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
इबादत है निगाहों की तुझी को देखते रहना
तेरी हर बात को सहना
तुम्हीं तो मेरे साथी हो तुम्हें अपना बनाया है
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
तमन्ना है इन आँखों की तुम्हारे ही नज़ारे हों
जहाँ देखूँ तुम्हें देखूँ हसीं जलवे तुम्हारे हों
हसीं जलवे तुम्हारे हों
तुम्हीं ने मेरी मंज़िल को बहारों से सजाया है
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हारे हाथ में है अब हमारी लाज का आँचल
न बह जाए कहीं देखो हमारी आँख का काजल
न बह जाए कहीं देखो हमारी आँख का काजल
हमारी आंख का काजल
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
......................................
Tumhin to meri pooja ho-Suhagan 1964
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Sunday, 5 June 2011
तू मेरे सामने है-सुहागन १९६४
आइये आपको एक रोमांटिक गीत सुनवाते हैं। ये असली छाया गीत
है, श्वेत श्याम युग का और इसमें भाव भंगिमाएं भी कुछ श्याम
वर्ण सी हैं । गीत की सिचुएशन कुछ विरोधाभासी किस्म की सी है।
नायक रोमांटिक मूड में है और नायिका बेबस और लाचार सी दिखती
है। नायक हैं गुरुदत्त और नायिका माला सिन्हा।
नायक न्यूनतम और दृढ़ प्रतिज्ञ से भावों के साथ गीत गा रहा है
और नायिका अपनी पूरी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन कर रही है और
काफी ज़द्दो ज़हद के बाद आखिरकार समर्पण वाली मुद्रा में आ जाती
है। मदन मोहन के साथ हसरत जयपुरी ने बहुत कम फिल्मों में गीतों
पर काम किया है। इस गीत के लिए तो मानना पड़ेगा कि हसरत जयपुरी
का रोमांटिक गीतों को लिखने के मामले में कोई सानी नहीं। गीत में
संगीत कहीं कहीं लाऊड हो जाता है, इसको मदन मोहन भक्तों की भाषा
में बोलें तो-इतना तो चलता है गाने में.
गीत के बोल :
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तेरी आँखें तो छलकते हुए पैमाने हैं
तेरी आँखें तो छलकते हुए पैमाने हैं
और तेरे होंठ लरजते हुए मैखाने हैं
मेरे अरमान इसी बात पे दीवाने हैं
मैं भला होश में कैसे रहूँ, कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तू जो हँसती है तो बिजली सी चमक जाती है
तू जो हँसती है तो बिजली सी चमक जाती है
तेरी साँसों से ग़ुलाबों की महक आती है
तू जो चलती है तो कुदरत भी बहक जाती है
मैं भला होश में कैसे रहूँ, कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
................................
Too mere samne hai-Suhagan 1964
है, श्वेत श्याम युग का और इसमें भाव भंगिमाएं भी कुछ श्याम
वर्ण सी हैं । गीत की सिचुएशन कुछ विरोधाभासी किस्म की सी है।
नायक रोमांटिक मूड में है और नायिका बेबस और लाचार सी दिखती
है। नायक हैं गुरुदत्त और नायिका माला सिन्हा।
नायक न्यूनतम और दृढ़ प्रतिज्ञ से भावों के साथ गीत गा रहा है
और नायिका अपनी पूरी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन कर रही है और
काफी ज़द्दो ज़हद के बाद आखिरकार समर्पण वाली मुद्रा में आ जाती
है। मदन मोहन के साथ हसरत जयपुरी ने बहुत कम फिल्मों में गीतों
पर काम किया है। इस गीत के लिए तो मानना पड़ेगा कि हसरत जयपुरी
का रोमांटिक गीतों को लिखने के मामले में कोई सानी नहीं। गीत में
संगीत कहीं कहीं लाऊड हो जाता है, इसको मदन मोहन भक्तों की भाषा
में बोलें तो-इतना तो चलता है गाने में.
गीत के बोल :
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तेरी आँखें तो छलकते हुए पैमाने हैं
तेरी आँखें तो छलकते हुए पैमाने हैं
और तेरे होंठ लरजते हुए मैखाने हैं
मेरे अरमान इसी बात पे दीवाने हैं
मैं भला होश में कैसे रहूँ, कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तू जो हँसती है तो बिजली सी चमक जाती है
तू जो हँसती है तो बिजली सी चमक जाती है
तेरी साँसों से ग़ुलाबों की महक आती है
तू जो चलती है तो कुदरत भी बहक जाती है
मैं भला होश में कैसे रहूँ, कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
................................
Too mere samne hai-Suhagan 1964
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Thursday, 28 April 2011
थोडा सा एतबार कीजिये-चौकीदार १९७३
इस गीत को मैंने फिल्म की रिलीज़ के आस पास पहली बार
ध्यान से सुना था। इसके ध्वनि संयोजन ने मुझे आकृष्ट किया
था। उसके बाद १-२ बार और सुनाई दिया ये, फिर ऐसा लगा
जैसे इसको रेडियो वाले सुनना भूल गए हैं। ऐसा ही होता है
जब फिल्म फ्लॉप हो जाया करती है। लता मंगेशकर की आवाज़
के प्रयोग से कई मधुर गीत देने वाले संगीतकार मदन मोहन ने
आशा के लिए एक अच्छी धुन बनाई ज़रूर मगर वो समय के
प्रवाह के साथ गुम हो गई। इस गीत की छाप आपको संगीतकार
सोनिक ओमी के संगीत में आशा के गाये गीतों में मिलेगी।
विडियो देख कर आपको ज़रूर लगेगा कि ये गीत शायद किसी मुजरे
के लिए बनाया गया था और फिल्म दिया गया सहनायिका के एकल
नृत्य पर। नाचने वाली नायिका जयश्री टी हालाँकि एक आला दर्जे की
नर्तकी हैं मगर इस गीत के बोलों के साथ उनके नृत्य का मेल कुछ
तेल और पानी के असंभव से collodial suspension जैसा लगता है।
दूसरे "दिल भी पहलु से जुदा हो जाये" पंक्तियों के दौरान कौनसा दिल
व कौनसे पहलू से जुदा होने की बात की जा रही है समझ नहीं आई।
एक बात तो तय है जी, होटल के लाल कारपेट की अच्छी तरह से
सफाई हो गई होगी।
गीत के बोल:
थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
प्यार की आरजू है
प्यार की जुस्तजू है
प्यार की आरजू है
प्यार की जुस्तजू है
तो पहले अपने दिल को बेकरार कीजिये
अपने दिल को बेकरार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
जाने कब इश्क में क्या हो जाये
बन्दा बन्दे का खुदा हो जाये
आप भी यार के
आप भी यार के दर पे रह जाएँ
दिल भी पहलू से जुदा हो जाये
दिल भी पहलू से जुदा हो जाये
जो सच हो तो
जो सच हो तो फिर प्यार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
दिल पे काबू ना हो तो
गैर के घर जाओ सनम
हो ओ ओ सनम जाओ जाओ सनम
दिल पे काबू ना हो तो
गैर के घर जाओ सनम
एक ही रात के वादे पे ना बहलाओ सनम
आँखें छू लो, आ आ आ आ
आँखें छू लो मगर हाथ से ना छूना बदन
खुद तडपाओ हमको भी तडपाओ सनम
हमको भी बेकरार कीजिये
हमको भी हमको भी
हमको भी बेकरार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
ध्यान से सुना था। इसके ध्वनि संयोजन ने मुझे आकृष्ट किया
था। उसके बाद १-२ बार और सुनाई दिया ये, फिर ऐसा लगा
जैसे इसको रेडियो वाले सुनना भूल गए हैं। ऐसा ही होता है
जब फिल्म फ्लॉप हो जाया करती है। लता मंगेशकर की आवाज़
के प्रयोग से कई मधुर गीत देने वाले संगीतकार मदन मोहन ने
आशा के लिए एक अच्छी धुन बनाई ज़रूर मगर वो समय के
प्रवाह के साथ गुम हो गई। इस गीत की छाप आपको संगीतकार
सोनिक ओमी के संगीत में आशा के गाये गीतों में मिलेगी।
विडियो देख कर आपको ज़रूर लगेगा कि ये गीत शायद किसी मुजरे
के लिए बनाया गया था और फिल्म दिया गया सहनायिका के एकल
नृत्य पर। नाचने वाली नायिका जयश्री टी हालाँकि एक आला दर्जे की
नर्तकी हैं मगर इस गीत के बोलों के साथ उनके नृत्य का मेल कुछ
तेल और पानी के असंभव से collodial suspension जैसा लगता है।
दूसरे "दिल भी पहलु से जुदा हो जाये" पंक्तियों के दौरान कौनसा दिल
व कौनसे पहलू से जुदा होने की बात की जा रही है समझ नहीं आई।
एक बात तो तय है जी, होटल के लाल कारपेट की अच्छी तरह से
सफाई हो गई होगी।
गीत के बोल:
थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
प्यार की आरजू है
प्यार की जुस्तजू है
प्यार की आरजू है
प्यार की जुस्तजू है
तो पहले अपने दिल को बेकरार कीजिये
अपने दिल को बेकरार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
जाने कब इश्क में क्या हो जाये
बन्दा बन्दे का खुदा हो जाये
आप भी यार के
आप भी यार के दर पे रह जाएँ
दिल भी पहलू से जुदा हो जाये
दिल भी पहलू से जुदा हो जाये
जो सच हो तो
जो सच हो तो फिर प्यार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
दिल पे काबू ना हो तो
गैर के घर जाओ सनम
हो ओ ओ सनम जाओ जाओ सनम
दिल पे काबू ना हो तो
गैर के घर जाओ सनम
एक ही रात के वादे पे ना बहलाओ सनम
आँखें छू लो, आ आ आ आ
आँखें छू लो मगर हाथ से ना छूना बदन
खुद तडपाओ हमको भी तडपाओ सनम
हमको भी बेकरार कीजिये
हमको भी हमको भी
हमको भी बेकरार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
फिर ज़रा सा इंतजार कीजिये
थोडा सा ऐतबार कीजिये
हाँ आ आ आ आ थोड़ा सा ऐतबार कीजिये
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Saturday, 29 January 2011
बेरहम आसमाँ मेरी मंज़िल बता-बहाना १९६०
मदन मोहन को ग़ज़ल किंग कहा जाता था ऐसा मैंने
जगह जगह पढ़ा है। तलत महमूद ग़ज़ल गायकी
में काफी नाम कमा कर गए हैं। अपनी थरथराती आवाज़
की खूबी के साथ उन्होंने हिंदी फिल्म संगीत में खूब
झंडे गाड़े। तलत महमूद का नाम ६० के दशक के
आते आते लोग भूलने लगे। ये गीत उनके आखिरी दौर
के गीतों में शामिल है। मदन मोहन के संगीत को पसंद
करने वाले ज़रूर इस गीत को चाव से सुना करते हैं
या फिर जो गायक तलत महमूद के गीत ज्यादा सुना
करते हैं। खैर राजेंद्र कृष्ण के लिखे और मदन
मोहन के संगीत से सजे इस गीत का आनंद उठाइए।
गीत के बोल:
बेरहम आसमाँ मेरी मंज़िल बता है कहाँ
बेरहम आसमाँ
जो न सोचा था वो हो गया
क्यों नसीबा मेरा सो गया
ग़म की ऐसी घटा छा गयी
चैन दिल का कहीं खो गया
ये बता किस लिये
ले रहा है मेरा इम्तिहाँ
बेरहम आसमाँ
बुझ गया है ये दिल इस तरह
चाँद पिछले पहर जिस तरह
इतनी तारीकियों में बता
राह ढूंढे कोई किस तरह
खो गयीं मन्ज़िलें
हो गया गुम कहीं कारवाँ
बेरहम आसमाँ
जा रहें हैं न जाने किधर
देख सकती नहीं कुछ नज़र
छोड़ दी नाव मंझधार में
किस किनारे लगे क्या ख़बर
क्या करें दूर तक
रोशनी का नहीं है निशाँ
बेरहम आसमाँ
मुझसे क़िसमत ने धोखा किया
हर क़दम पे नया ग़म दिया
है ख़ुशी की क़सम कि यहाँ
चैन का साँस तक न लिया
बुझ गया दिल मेरा
रास आया न तेरा जहाँ
बेरहम आसमाँ
तेरी दुनियाँ में यूँ हम जिये
आँसुओं के समुन्दर पिये
दिल में शिक़वे तड़पते रहे
होंठ लेकिन हमेशा सिये
कब तलक़ हम रहें
तेरी दुनिया में यूँ बेज़ुबाँ
बेरहम आसमाँ
अब कोई भी तमन्ना नहीं
अब यहाँ हम को जीना नहीं
ज़िंदगी अब तेरे जाम से
एक क़तरा भी पीना नहीं
मौत को भेज के
ख़त्म कर दे मेरी दास्तां
बेरहम आसमाँ
जगह जगह पढ़ा है। तलत महमूद ग़ज़ल गायकी
में काफी नाम कमा कर गए हैं। अपनी थरथराती आवाज़
की खूबी के साथ उन्होंने हिंदी फिल्म संगीत में खूब
झंडे गाड़े। तलत महमूद का नाम ६० के दशक के
आते आते लोग भूलने लगे। ये गीत उनके आखिरी दौर
के गीतों में शामिल है। मदन मोहन के संगीत को पसंद
करने वाले ज़रूर इस गीत को चाव से सुना करते हैं
या फिर जो गायक तलत महमूद के गीत ज्यादा सुना
करते हैं। खैर राजेंद्र कृष्ण के लिखे और मदन
मोहन के संगीत से सजे इस गीत का आनंद उठाइए।
गीत के बोल:
बेरहम आसमाँ मेरी मंज़िल बता है कहाँ
बेरहम आसमाँ
जो न सोचा था वो हो गया
क्यों नसीबा मेरा सो गया
ग़म की ऐसी घटा छा गयी
चैन दिल का कहीं खो गया
ये बता किस लिये
ले रहा है मेरा इम्तिहाँ
बेरहम आसमाँ
बुझ गया है ये दिल इस तरह
चाँद पिछले पहर जिस तरह
इतनी तारीकियों में बता
राह ढूंढे कोई किस तरह
खो गयीं मन्ज़िलें
हो गया गुम कहीं कारवाँ
बेरहम आसमाँ
जा रहें हैं न जाने किधर
देख सकती नहीं कुछ नज़र
छोड़ दी नाव मंझधार में
किस किनारे लगे क्या ख़बर
क्या करें दूर तक
रोशनी का नहीं है निशाँ
बेरहम आसमाँ
मुझसे क़िसमत ने धोखा किया
हर क़दम पे नया ग़म दिया
है ख़ुशी की क़सम कि यहाँ
चैन का साँस तक न लिया
बुझ गया दिल मेरा
रास आया न तेरा जहाँ
बेरहम आसमाँ
तेरी दुनियाँ में यूँ हम जिये
आँसुओं के समुन्दर पिये
दिल में शिक़वे तड़पते रहे
होंठ लेकिन हमेशा सिये
कब तलक़ हम रहें
तेरी दुनिया में यूँ बेज़ुबाँ
बेरहम आसमाँ
अब कोई भी तमन्ना नहीं
अब यहाँ हम को जीना नहीं
ज़िंदगी अब तेरे जाम से
एक क़तरा भी पीना नहीं
मौत को भेज के
ख़त्म कर दे मेरी दास्तां
बेरहम आसमाँ
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Tuesday, 11 January 2011
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे-गेटवे ऑफ़ इंडिया १९५७
आपने कफ़ सिरप ज़रूर एक ना एक बार पिया होगा आइये आज
पियें सौम्यता का सिरप। गीत है फिल्म 'गेटवे ऑफ़ इंडिया' से।
इसे दो सौम्य कलाकारों पर फिल्माया गया है-भारत भूषण और
मधुबाला। इस गीत को उतने ही आहिस्ता से गाया भी गया है
जितनी आहिस्ता से ये दोनों कलाकार अपने संवाद बोलते हैं या
अदाएं दिखाते हैं । सितार की आवाज़ के साथ गायकों की आवाज़
का मेल 'सोने में सुहागा' जैसा है। अभी इसी उपमा से काम चलाइए,
दूसरी सूझ नहीं रही है।
गीत के बोल:
रफ़ी : दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
आशा :हम ज़माने से दूर जा बैठे
आशा : दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
हम ज़माने से दूर जा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
रफ़ी : भूल की उनका हमनशीं हो के
रोयेंगे दिल को उम्र भर खो के
भूल की उनका हमनशीं हो के
रोयेंगे दिल को उम्र भर खो के
हाय! क्या चीज़ थी गँवा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
आशा : दिल को एक दिन ज़रुर जाना था
वही पहुँचा जहां ठिकाना था
दिल को एक दिन ज़रुर जाना था
वही पहुँचा जहां ठिकाना था
दिल वही दिल जो दिल में जा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
रफ़ी : एक दिल ही था ग़मगुसार अपना
मेहरबां खास राज़दार अपना
एक दिल ही था ग़मगुसार अपना
मेहरबां खास राज़दार अपना
गैर का क्यों उसे बना बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
आशा : गैर भी तो कोई हसीं होगा
दिल यूँ ही दे दिया नहीं होगा
गैर भी तो कोई हसीं होगा
दिल यूँ ही दे दिया नहीं होगा
देख कर कुछ तो चोट खा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
हम जमाने से दूर जा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
...................................................
Do ghadi wo jo paas aa baithe-Gateway of India 1957
पियें सौम्यता का सिरप। गीत है फिल्म 'गेटवे ऑफ़ इंडिया' से।
इसे दो सौम्य कलाकारों पर फिल्माया गया है-भारत भूषण और
मधुबाला। इस गीत को उतने ही आहिस्ता से गाया भी गया है
जितनी आहिस्ता से ये दोनों कलाकार अपने संवाद बोलते हैं या
अदाएं दिखाते हैं । सितार की आवाज़ के साथ गायकों की आवाज़
का मेल 'सोने में सुहागा' जैसा है। अभी इसी उपमा से काम चलाइए,
दूसरी सूझ नहीं रही है।
गीत के बोल:
रफ़ी : दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
आशा :हम ज़माने से दूर जा बैठे
आशा : दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
हम ज़माने से दूर जा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
रफ़ी : भूल की उनका हमनशीं हो के
रोयेंगे दिल को उम्र भर खो के
भूल की उनका हमनशीं हो के
रोयेंगे दिल को उम्र भर खो के
हाय! क्या चीज़ थी गँवा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
आशा : दिल को एक दिन ज़रुर जाना था
वही पहुँचा जहां ठिकाना था
दिल को एक दिन ज़रुर जाना था
वही पहुँचा जहां ठिकाना था
दिल वही दिल जो दिल में जा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
रफ़ी : एक दिल ही था ग़मगुसार अपना
मेहरबां खास राज़दार अपना
एक दिल ही था ग़मगुसार अपना
मेहरबां खास राज़दार अपना
गैर का क्यों उसे बना बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
आशा : गैर भी तो कोई हसीं होगा
दिल यूँ ही दे दिया नहीं होगा
गैर भी तो कोई हसीं होगा
दिल यूँ ही दे दिया नहीं होगा
देख कर कुछ तो चोट खा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
हम जमाने से दूर जा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
...................................................
Do ghadi wo jo paas aa baithe-Gateway of India 1957
Thursday, 6 January 2011
कदर जाने ना-भाई भाई -१९५६
एक मधुर दर्द भरा गीत सुनिए फिल्म भाई-भाई से। मेरे पसंदीदा
गीतों में से एक। परदे पर इसे निम्मी पर फिल्माया गया है। फिल्म
में किशोर कुमार और अशोक कुमार नायक हैं। फिल्म में इन सगे
भाइयों ने भाइयों की भूमिकाएं ही निभाई हैं। कुछ नायिकाओं को
देख कर यूँ लगता है की बॉलीवुड के डायरेक्टर उन्हें जबरन रोते हुए
दिखाना चाहते थे । हर दूसरी फिल्म में वे नायिकाएं रोती धोती ही
दिखाई देतीं।
गीत के बोल:
कदर जाने ना,हो कदर जाने ना
मोरा बालम बेदर्दी जी, मोरा बालम बेदर्दी
कदर जाने ना,हो कदर जाने ना
लाख जतन करूँ,बात ना माने जी, बात ना माने
मेरा दर्द ना जाने
लाख जतन करूँ,बात ना माने जी, बात ना माने
मेरा दर्द ना जाने
कदर जाने ना,हो कदर जाने ना
मोरा बालम बेदर्दी जी, मोरा बालम बेदर्दी
कदर जाने ना,हो कदर जाने ना
मैं भी हूँ तेरी पिया, दिल भी है तेरा
आ भी जा, आ कर ले भरोसा मेरा, कर ले भरोसा
मैं भी हूँ तेरी पिया, दिल भी है तेरा
आ भी जा, आ कर ले भरोसा मेरा, कर ले भरोसा
कदर जाने ना,हो कदर जाने ना
मोरा बालम बेदर्दी जी, मोरा बालम बेदर्दी
कदर जाने ना,हो कदर जाने ना
समझ ना आये कैसे, पी को मनाऊं मैं
कहे दे तो चीर के, दिल भी दिखाऊं मैं
समझ ना आये कैसे, पी को मनाऊं मैं
कहे दे तो चीर के, दिल भी दिखाऊं मैं
कदर जाने ना,हो कदर जाने ना
मोरा बालम बेदर्दी जी, मोरा बालम बेदर्दी
कदर जाने ना,हो कदर जाने ना
------------------------------
Kadar jaane na-Bhai bhai 1955
गीतों में से एक। परदे पर इसे निम्मी पर फिल्माया गया है। फिल्म
में किशोर कुमार और अशोक कुमार नायक हैं। फिल्म में इन सगे
भाइयों ने भाइयों की भूमिकाएं ही निभाई हैं। कुछ नायिकाओं को
देख कर यूँ लगता है की बॉलीवुड के डायरेक्टर उन्हें जबरन रोते हुए
दिखाना चाहते थे । हर दूसरी फिल्म में वे नायिकाएं रोती धोती ही
दिखाई देतीं।
गीत के बोल:
कदर जाने ना,हो कदर जाने ना
मोरा बालम बेदर्दी जी, मोरा बालम बेदर्दी
कदर जाने ना,हो कदर जाने ना
लाख जतन करूँ,बात ना माने जी, बात ना माने
मेरा दर्द ना जाने
लाख जतन करूँ,बात ना माने जी, बात ना माने
मेरा दर्द ना जाने
कदर जाने ना,हो कदर जाने ना
मोरा बालम बेदर्दी जी, मोरा बालम बेदर्दी
कदर जाने ना,हो कदर जाने ना
मैं भी हूँ तेरी पिया, दिल भी है तेरा
आ भी जा, आ कर ले भरोसा मेरा, कर ले भरोसा
मैं भी हूँ तेरी पिया, दिल भी है तेरा
आ भी जा, आ कर ले भरोसा मेरा, कर ले भरोसा
कदर जाने ना,हो कदर जाने ना
मोरा बालम बेदर्दी जी, मोरा बालम बेदर्दी
कदर जाने ना,हो कदर जाने ना
समझ ना आये कैसे, पी को मनाऊं मैं
कहे दे तो चीर के, दिल भी दिखाऊं मैं
समझ ना आये कैसे, पी को मनाऊं मैं
कहे दे तो चीर के, दिल भी दिखाऊं मैं
कदर जाने ना,हो कदर जाने ना
मोरा बालम बेदर्दी जी, मोरा बालम बेदर्दी
कदर जाने ना,हो कदर जाने ना
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Kadar jaane na-Bhai bhai 1955
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Friday, 17 December 2010
सपने में सजन से दो बातें-गेटवे ऑफ़ इंडिया १९५७
हिंदी फ़िल्में सभी नामों से बना करती हैं। प्याज़, आलू, मिर्च का
नाम शायद अभी तक फिल्मकारों के दिमाग में नहीं आया है।
वो शायद किसी पत्रकार के दिमाग में आये जो फिल्म बनाने की
तमन्ना रखता हो। गेट के नाम से दो फ़िल्में मेरे ध्यान में
आती हैं, 'गेटवे ऑफ़ इंडिया' और 'चाइना गेट'। बाकी के गेट
अभी शायद बाकी हैं । इस फिल्म से एक गीत सुनिए जो कि
राजेंद्र कृष्ण का लिखा हुआ है और संगीत मदन मोहन ने तैयार
किया है। लता मंगेशकर के गाये इस गीत को सुने काफी दिन
हो गए थे सोचा आपको भी सुनवा दिया जाए । ब्लॉग की सूची
में भी देखा तो यह गीत मौजूद नहीं था। इस गीत का विडियो
यू ट्यूब पर उपलब्ध नहीं है, ऑडियो सुन कर काम चला लें।
गीत के बोल:
सपने में सजन से दो बातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
इक रात मिलन की आई थी
और उस के बद जुदाई थी
ग़म और ख़ुशी की दो रातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
इक सावन रुत लाई झूले
दूजी में सजन हम को भूले
देखी हैं यही दो बरसातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
इक रोज़ तुम्हें दिल दे बेठे
फिर रोग बिरहा का ले बेठे
ये प्यार की हैं दो सौग़ातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
...............................
Sapne mein sajan se do batein-Gateway of India 1957
नाम शायद अभी तक फिल्मकारों के दिमाग में नहीं आया है।
वो शायद किसी पत्रकार के दिमाग में आये जो फिल्म बनाने की
तमन्ना रखता हो। गेट के नाम से दो फ़िल्में मेरे ध्यान में
आती हैं, 'गेटवे ऑफ़ इंडिया' और 'चाइना गेट'। बाकी के गेट
अभी शायद बाकी हैं । इस फिल्म से एक गीत सुनिए जो कि
राजेंद्र कृष्ण का लिखा हुआ है और संगीत मदन मोहन ने तैयार
किया है। लता मंगेशकर के गाये इस गीत को सुने काफी दिन
हो गए थे सोचा आपको भी सुनवा दिया जाए । ब्लॉग की सूची
में भी देखा तो यह गीत मौजूद नहीं था। इस गीत का विडियो
यू ट्यूब पर उपलब्ध नहीं है, ऑडियो सुन कर काम चला लें।
गीत के बोल:
सपने में सजन से दो बातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
इक रात मिलन की आई थी
और उस के बद जुदाई थी
ग़म और ख़ुशी की दो रातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
इक सावन रुत लाई झूले
दूजी में सजन हम को भूले
देखी हैं यही दो बरसातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
इक रोज़ तुम्हें दिल दे बेठे
फिर रोग बिरहा का ले बेठे
ये प्यार की हैं दो सौग़ातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
...............................
Sapne mein sajan se do batein-Gateway of India 1957
Saturday, 4 December 2010
शोख नज़र की बिजलियाँ- वो कौन थी १९६४
मदन मोहन ने आशा भोंसले की सेवाएँ भी लीं और कुछ
कुछ आशा के प्रचलित नगमे उन्हीं के बनाये हुए हैं।
उन जाने पहचाने गीतों में एक है वो कौन थी का थोडा
तेज़ गति वाला गीत-शोख नज़र की बिजलियाँ। उनके
संगीतबद्ध किये आशा के गीतों को वो प्रसिद्धि तो नहीं
मिली जो लता के गाये गीतों को मिली, लेकिन मदन मोहन
भक्त कई बार औपचारिकता निभाने के लिए आशा के
गीत भी सुन कर वाह वाह कर लिया करते हैं।
गीत फिल्माया गया है तीखे नाक नक्श वाली अभिनेत्री
परवीन चौधरी पर । हिंदी फिल्म के दर्शकों को बर्फ पर
स्केटिंग क्या होती है ये बतलाने वाला गाना। कितने सस्ते
में एक दर्शक दुनिया की सैर कर लेता है हिंदी गीतों के
बहाने। इसमें स्केटिंग करने वाले एक दुसरे का हाथ
पकड़ कर कलाबाजियां दिखा रहे हैं ताकि गिरे भीं तो
उस अंदाज़ में-हम तो डूबेंगे सनम तुमको भी ले डूबेंगे।
गीत के बोल:
हो, आ हा हा हा हा हो हो हो , आ हा हा हा हा हो हो हो
शोख़ नज़र की बिजलियाँ दिल पे मेरे गिराए जा
मेरा न कुछ ख़्याल कर, तू यूँ ही मुस्कुराए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ
जाग उठी है आरज़ू, जैसे चिराग़ जल पड़े
अब तो वफ़ा की राह में, हम तेरे साथ चल पड़े
चाहे हँसाए जा हमें, चाहे हमें रुलाए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ दिल पे मेरे गिराए जा
मेरा न कुछ ख़्याल कर, तू यूँ ही मुस्कुराए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ
चैन कहीं किसी घड़ी, आये ना तेरे बिन मुझे
काश मैं इस जहान से, छीन लूँ एक दिन तुझे
मैं तेरे साथ साथ हूँ, चाहे नज़र बचाए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ दिल पे मेरे गिराए जा
मेरा न कुछ ख़्याल कर, तू यूँ ही मुस्कुराए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ
..........................................
Shokh Nazar Ki Bijliyan-Woh Kaun Thi 1964
कुछ आशा के प्रचलित नगमे उन्हीं के बनाये हुए हैं।
उन जाने पहचाने गीतों में एक है वो कौन थी का थोडा
तेज़ गति वाला गीत-शोख नज़र की बिजलियाँ। उनके
संगीतबद्ध किये आशा के गीतों को वो प्रसिद्धि तो नहीं
मिली जो लता के गाये गीतों को मिली, लेकिन मदन मोहन
भक्त कई बार औपचारिकता निभाने के लिए आशा के
गीत भी सुन कर वाह वाह कर लिया करते हैं।
गीत फिल्माया गया है तीखे नाक नक्श वाली अभिनेत्री
परवीन चौधरी पर । हिंदी फिल्म के दर्शकों को बर्फ पर
स्केटिंग क्या होती है ये बतलाने वाला गाना। कितने सस्ते
में एक दर्शक दुनिया की सैर कर लेता है हिंदी गीतों के
बहाने। इसमें स्केटिंग करने वाले एक दुसरे का हाथ
पकड़ कर कलाबाजियां दिखा रहे हैं ताकि गिरे भीं तो
उस अंदाज़ में-हम तो डूबेंगे सनम तुमको भी ले डूबेंगे।
गीत के बोल:
हो, आ हा हा हा हा हो हो हो , आ हा हा हा हा हो हो हो
शोख़ नज़र की बिजलियाँ दिल पे मेरे गिराए जा
मेरा न कुछ ख़्याल कर, तू यूँ ही मुस्कुराए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ
जाग उठी है आरज़ू, जैसे चिराग़ जल पड़े
अब तो वफ़ा की राह में, हम तेरे साथ चल पड़े
चाहे हँसाए जा हमें, चाहे हमें रुलाए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ दिल पे मेरे गिराए जा
मेरा न कुछ ख़्याल कर, तू यूँ ही मुस्कुराए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ
चैन कहीं किसी घड़ी, आये ना तेरे बिन मुझे
काश मैं इस जहान से, छीन लूँ एक दिन तुझे
मैं तेरे साथ साथ हूँ, चाहे नज़र बचाए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ दिल पे मेरे गिराए जा
मेरा न कुछ ख़्याल कर, तू यूँ ही मुस्कुराए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ
..........................................
Shokh Nazar Ki Bijliyan-Woh Kaun Thi 1964
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Wo kaun thi
Friday, 3 December 2010
लग जा गले के फिर ये हंसी रात-वो कौन थी १९६४
राज खोसला की सस्पेंस फिल्म से अगला गीत पेश है।
ये फिल्म भी बहुत से पहाड़ी वाले दृश्यों से भरी पड़ी है।
अब पहाड़ी है तो राग पहाड़ी पर आधारित कोई गीत भी
होना चाहिए। है जी है, एक गीत और वो भी सुपर डुपर
हिट गीत। राजा मेहँदी अली खान के बोल और मदन
मोहन का संगीत, परदे पर साधना और परदे के पीछे
लता मंगेशकर की आवाज़। इसका फिल्मांकन भी
ज़ोरदार है। अपनी नायिकाओं को किस तरह बला की
खूबसूरत दिखाया जाए ये फलसफा राज खोसला के गीतों
से सीखे कोई। मदन मोहन की इस रचना का मैं भी बड़ा
दीवाना हूँ । उल्लेखनीय है कि ये गीत सम्पादित स्वरुप
में उपलब्ध है फिल्म के एल. पी. रिकोर्ड पर। फिल्म वाला
वर्जन थोडा लम्बा है और इसमें संगीत के अंश कुछ
ज्यादा हैं। 'लग जा गले' कहने का इससे खूबसूरत अंदाज़
शायद ही आपको देखने को मिले।
इसका आधुनिक और ठेठ तरीका यूँ होगा, नायिका नायक
से बोलेगी -ओये सोणियो यूँ घूर घूर के क्या देख रहे हो,
गले लग जा, ये नाईट शिफ्ट फिर नहीं होगी , गले नहीं
लगा तो तो भूत बन के तेरे गले पड़ जाऊंगी। गीत में
निवेदन की जगह हुक्म होगा। ऐसा होने की संभावना
थोड़ी कम है क्यूंकि रीमिक्स वालों के लिए मदन मोहन
की रचनायें सरदर्द हैं।
गीत के बोल:
लग जा गले हूँ हूँ हूँ , हसीं रात हं हं हं
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले से, ऐ
हमको मिली हैं आज, ये घड़ियाँ नसीब से
हमको मिली हैं आज, ये घड़ियाँ नसीब से
जी भर के देख लीजिये हमको क़रीब से
फिर आपके नसीब में ये बात हो न हो
फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले से, ऐ
पास आइये कि हम नहीं आएंगे बार-बार
पास आइये कि हम नहीं आएंगे बार-बार
बाहें गले में डाल के हम रो लें ज़ार-ज़ार
आँखों से फिर ये प्यार की बरसात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले से, ऐ
ये फिल्म भी बहुत से पहाड़ी वाले दृश्यों से भरी पड़ी है।
अब पहाड़ी है तो राग पहाड़ी पर आधारित कोई गीत भी
होना चाहिए। है जी है, एक गीत और वो भी सुपर डुपर
हिट गीत। राजा मेहँदी अली खान के बोल और मदन
मोहन का संगीत, परदे पर साधना और परदे के पीछे
लता मंगेशकर की आवाज़। इसका फिल्मांकन भी
ज़ोरदार है। अपनी नायिकाओं को किस तरह बला की
खूबसूरत दिखाया जाए ये फलसफा राज खोसला के गीतों
से सीखे कोई। मदन मोहन की इस रचना का मैं भी बड़ा
दीवाना हूँ । उल्लेखनीय है कि ये गीत सम्पादित स्वरुप
में उपलब्ध है फिल्म के एल. पी. रिकोर्ड पर। फिल्म वाला
वर्जन थोडा लम्बा है और इसमें संगीत के अंश कुछ
ज्यादा हैं। 'लग जा गले' कहने का इससे खूबसूरत अंदाज़
शायद ही आपको देखने को मिले।
इसका आधुनिक और ठेठ तरीका यूँ होगा, नायिका नायक
से बोलेगी -ओये सोणियो यूँ घूर घूर के क्या देख रहे हो,
गले लग जा, ये नाईट शिफ्ट फिर नहीं होगी , गले नहीं
लगा तो तो भूत बन के तेरे गले पड़ जाऊंगी। गीत में
निवेदन की जगह हुक्म होगा। ऐसा होने की संभावना
थोड़ी कम है क्यूंकि रीमिक्स वालों के लिए मदन मोहन
की रचनायें सरदर्द हैं।
गीत के बोल:
लग जा गले हूँ हूँ हूँ , हसीं रात हं हं हं
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले से, ऐ
हमको मिली हैं आज, ये घड़ियाँ नसीब से
हमको मिली हैं आज, ये घड़ियाँ नसीब से
जी भर के देख लीजिये हमको क़रीब से
फिर आपके नसीब में ये बात हो न हो
फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले से, ऐ
पास आइये कि हम नहीं आएंगे बार-बार
पास आइये कि हम नहीं आएंगे बार-बार
बाहें गले में डाल के हम रो लें ज़ार-ज़ार
आँखों से फिर ये प्यार की बरसात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले से, ऐ
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Thursday, 25 November 2010
मैं तो तुम संग नैन मिला के-मनमौजी १९६२
मदन मोहन और लता मंगेशकर के योगदान से बना एक और
कर्णप्रिय गीत सुनिए। फिल्म मनमौजी का सबसे पॉपुलर गीत
कहा जाए इसे तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। आपने भी इसी गीत को
ज्यादा देखा और सुना होगा। देहाती बाला की वेशभूषा में आप
देखंगे फिल्म अभिनेत्री साधना को। साधना कि भावाभिव्यक्ति
उनकी कई समकालीन अभिनेत्रियों से बेहतर थी। गौर फरमाएं
कि दर्द के भावों को जिस तरह से वो दर्शा रही हैं वो ग्लीसरीन
जनित आंसुओं के रेले को वास्तविकता प्रदान कर रहे हैं।
गीत की ख़ास बात ये है कि संगीत प्रेमी राजेंद्र कृष्ण को याद
कर लेते हैं इसके बहाने। सरल गीतों के मामले में शैलेन्द्र के
साथ साथ राजेंद्र कृष्ण को भी याद करते हैं पुराने गीतों के मुरीद।
गीत के बोल:
मैं तो तुम संग नैन मिला के हार गई सजना
हार गई सजना
मैं तो तुम संग नैन मिला के हार गई सजना
हार गई सजना
क्यों झूठे से प्रीत लगाई
क्यों झूठे से प्रीत लगाई
क्यों छलिये को मीत बनाया
क्यों आंधी में दीप जलाया
मैं तो तुम संग नैन मिला के हार गई सजना
हार गई सजना
सपनें में जो बाग़ लगाये
नींद खुली तो वीराने थे
हम भी कितने दीवाने थे
मैं तो तुम संग नैन मिला के हार गई सजना
हार गई सजना
ना मिलती ये बैरन अँखियाँ
ना मिलती ये बैरन अँखियाँ
चैन ना जाता, दिल भी ना रोता
काश किसी से प्यार ना होता
मैं तो तुम संग नैन मिला के हार गई सजना
हार गई सजना
........................................
Main to tum sang nain mila ke-Manmauji 1962
कर्णप्रिय गीत सुनिए। फिल्म मनमौजी का सबसे पॉपुलर गीत
कहा जाए इसे तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। आपने भी इसी गीत को
ज्यादा देखा और सुना होगा। देहाती बाला की वेशभूषा में आप
देखंगे फिल्म अभिनेत्री साधना को। साधना कि भावाभिव्यक्ति
उनकी कई समकालीन अभिनेत्रियों से बेहतर थी। गौर फरमाएं
कि दर्द के भावों को जिस तरह से वो दर्शा रही हैं वो ग्लीसरीन
जनित आंसुओं के रेले को वास्तविकता प्रदान कर रहे हैं।
गीत की ख़ास बात ये है कि संगीत प्रेमी राजेंद्र कृष्ण को याद
कर लेते हैं इसके बहाने। सरल गीतों के मामले में शैलेन्द्र के
साथ साथ राजेंद्र कृष्ण को भी याद करते हैं पुराने गीतों के मुरीद।
गीत के बोल:
मैं तो तुम संग नैन मिला के हार गई सजना
हार गई सजना
मैं तो तुम संग नैन मिला के हार गई सजना
हार गई सजना
क्यों झूठे से प्रीत लगाई
क्यों झूठे से प्रीत लगाई
क्यों छलिये को मीत बनाया
क्यों आंधी में दीप जलाया
मैं तो तुम संग नैन मिला के हार गई सजना
हार गई सजना
सपनें में जो बाग़ लगाये
नींद खुली तो वीराने थे
हम भी कितने दीवाने थे
मैं तो तुम संग नैन मिला के हार गई सजना
हार गई सजना
ना मिलती ये बैरन अँखियाँ
ना मिलती ये बैरन अँखियाँ
चैन ना जाता, दिल भी ना रोता
काश किसी से प्यार ना होता
मैं तो तुम संग नैन मिला के हार गई सजना
हार गई सजना
........................................
Main to tum sang nain mila ke-Manmauji 1962
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