फिल्म छैला बाबू से एक मधुर गीत आपको सुनवाया था पहले। अब सुनवाते हैं
एक मधुर युगल गीत जिसमें नायक नायिका की झुकी हुई पलकों के बारे में
प्रश्न कर रहा है। इन्टरनेट की दुनिया जानकारियों के खजाने से भरी पड़ी है। कई
श्रोता और दर्शक ऐसे भी मिलेंगे आपको जिनके पास दुर्लभ जानकारी होती है। ये
बात और है कि इन दुर्लभ जानकारियों को जगह जगह से इकठ्ठा कर के कुछ चंपुओं
ने सारा श्रेय लेने के लिए कुछ वेबसाइट बना मारी हैं जिन्हें देख के ऐसा लगता है
मानो उन्होंने पैदा होते साथ ही पी एच डी कर मारी हो. इनमें से अधिकतर चंपुओं
की साईट आंग्ल भाषा में है।
गीत और फिल्म के बारे में चर्चा कि जाए। यू ट्यूब पर गीत के नीचे दो कमेन्ट लिखे
हैं जिनसे ये पता चलता है कि इस फिल्म के नायक वही हैं-सलीम जावेद की जोड़ी वाले
सलीम. गौरतलब है पिछले गीत में फिल्म के दुसरे नायक थे-सुबिराज। इस गीत में
सलीम के साथ नायिका हैं जेब रहमान। फिल्म के निर्माता नवसारी निवासी हैं और वहां
के एक सिनेमा के मालिक हैं जैसा कि एक कमेन्ट में उल्लेख है। जहाँगीर टॉकीज़ या
भारत सिनेमा बनवाया था नौशेरवां बारिया ने। सन १९५६ में फिल्म गणेश महिमा से
इसका व्यवसाय शुरू हुआ। जैसा कि विकी के लिंक पर कांतिभाई ने उल्लेख किया है-
गायक मोहम्मद रफ़ी ने इसके स्टेज पर एक लाइव शो भी किया सन १९५७ में जिसमें
उन्होंने प्यासा फिल्म जो कि उस समय रिलीज़ नहीं हुई थी, का एक गीत गा कर वहां
के श्रोताओं को अचंभित किया था। इस सिनेमा को बरसों तक रूसी और नवल नामक
दो भाइयों ने चलाया।
नेट पर उपलब्ध जानकारियों में फिल्म के निर्माता की जगह लिखा मिलेगा-आर. एच.
मुल्लन प्रोडक्शंस । अब ये आप खोजिये कि इस फिल्म का असली निर्माता कौन है ?
एक दिलचस्प बात और बताते चलें आपको. फिल्म के निर्देशक के. परवेज़ हैं जिन्होंने
अपना नाम बाद में कल्पतरु रख लिया और कई परिवारिक फ़िल्में बनाई ८० के दशक
में. उनकी अधिकांश फिल्मों में आपको लक्ष्मी प्यारे का संगीत मिलेगा.
गीत के बोल:
क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें
क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें मेरी जाँ ये बात क्या है
क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें मेरी जाँ ये बात क्या है
मेरे दिल मैं कैसे कह दूँ मुझे प्यार हो गया है
क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें
ये घटा भी आज हम पर मोती लुटा रही है
हमें देख कर कली भी सर को झुका रही है
मेरे दिल की बात सुनने ये हवा भी आ रही है
ये गगन भी देखता है देखे तो हर्ज क्या है
क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें मेरी जाँ ये बात क्या है
मेरे दिल मैं कैसे कह दूँ मुझे प्यार हो गया है
क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें
ये शरम न हमसे कीजे हम भी तो हैं तुम्हारे
किरनों से माँग भर दें कर दो अगर इशारे
दिल गा रहा है नग़मा बस में नहीं हमारे
मौसम भी झूमता है झूमें तो हर्ज क्या है
मेरे दिल मैं कैसे कह दूँ मुझे प्यार हो गया है
क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें मेरी जाँ ये बात क्या है
मेरे दिल मैं कैसे कह दूँ मुझे प्यार हो गया है
क्यों झुकी-झुकी हैं पलकें
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Kyun jhuki jhuki hai palken-Chhaila Babu 1967
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Saturday, 3 September 2011
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