फिल्म एक मुसाफिर एक हसीना का गीत जनता को इतना भाया कि ये
एक पैरोडी में भी सुनाई दिया। पंजाबी फिल्म सात सालियाँ के एक गीत
में शुरुआत बहुत शुक्रिया गीत से होती है। बाकी के गीत इस प्रकार
से हैं जिनकी टांग मरोड़ी गयी है- १)अँखियाँ मिला के जिया भरमा के-रतन,
२) ये इश्क इश्क है इश्क इश्क-बरसात की रात
गीत गा रहे हैं मोहम्मद रफ़ी, सुमन कल्याणपुर और कमल बारोट । गीत
लिखा है नक्श लायलपुरी ने और इसकी धुन बनाई है एस मदन ने।
गीत के बोल:
अगर आपके समझ आयें तो मुझे भी बतला दें, कृपया। उसके बाद मैं भी
बोल प्रदान करने वाले के लिए गाऊंगा-बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी ।
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Monday, 22 August 2011
Wednesday, 17 August 2011
है दुनिया उसी की ज़माना उसी का-काश्मीर की कली १९६१
फिल्म दुनिया के कुछ सम्पूर्ण मनोरंजन प्रदान करने वाले कलाकारों
में से एक और अपने समय में युवा पीढ़ी के प्रतिनिधि शम्मी कपूर
इस फानी दुनिया को अलविदा कह गए. काफी समय से बीमारी से
जूझ रहे शम्मी अपने अंतिम समय तक भी जीवन का भरपूर आनंद
उठाते रहे.
उनके नृत्य वाले गीत दर्शकों को ज्यादा पसंद आते हैं. मैं आज प्रस्तुत
कर रहा हूँ एक दर्द भरा गीत जो मुझे उनके ऊपर फिल्माए गए गीतों
में सबसे ज्यादा पसंद है. गीत में बहुत गहरी बात कह दी गयी है.
गीत एस एह बिहारी साहब का है और इसका संगीत तैयार किया है
ओ पी नय्यर ने. आवाज़ रफ़ी कि है और गीत में बज रही सैक्सोफोन
कि ध्वनि मनोहारी सिंह कि साँसों के सहयोग से आ रही है. गीत दिल
को छू लेने वाला है और कुछ हद तक झंझोड़ने वाला भी.
गीत के बोल:
है दुनिया उसी कि ज़माना उसी का
मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का
है दुनिया उसी कि ज़माना उसी का
मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का
लुटा जो मुसाफिर दिल के सफर में
है जन्नत ये दुनिया उसकी नज़र में
लुटा जो मुसाफिर दिल के सफर में
है जन्नत ये दुनिया उसकी नज़र में
उसी ने है लूटा मज़ा जिंदगी का
मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का
है सजदे के काबिल हर वो दीवाना
कि जो बन गया हो तस्वीर-ऐ-जाना
है सजदे के काबिल हर वो दीवाना
कि जो बन गया हो तस्वीर-ऐ-जाना
करो एहतराम उसकी दीवानगी का
मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का
बर्बाद होना जिसकी अदा हो
दर्द-ऐ-मोहब्बत जिसकी दवा हो
बर्बाद होना जिसकी अदा हो
दर्द-ऐ-मोहब्बत जिसकी दवा हो
सताएगा क्या गम उसे जिंदगी का
मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का
......................................
Hai duniya usi ki-Kashmir ki kali 1964
में से एक और अपने समय में युवा पीढ़ी के प्रतिनिधि शम्मी कपूर
इस फानी दुनिया को अलविदा कह गए. काफी समय से बीमारी से
जूझ रहे शम्मी अपने अंतिम समय तक भी जीवन का भरपूर आनंद
उठाते रहे.
उनके नृत्य वाले गीत दर्शकों को ज्यादा पसंद आते हैं. मैं आज प्रस्तुत
कर रहा हूँ एक दर्द भरा गीत जो मुझे उनके ऊपर फिल्माए गए गीतों
में सबसे ज्यादा पसंद है. गीत में बहुत गहरी बात कह दी गयी है.
गीत एस एह बिहारी साहब का है और इसका संगीत तैयार किया है
ओ पी नय्यर ने. आवाज़ रफ़ी कि है और गीत में बज रही सैक्सोफोन
कि ध्वनि मनोहारी सिंह कि साँसों के सहयोग से आ रही है. गीत दिल
को छू लेने वाला है और कुछ हद तक झंझोड़ने वाला भी.
गीत के बोल:
है दुनिया उसी कि ज़माना उसी का
मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का
है दुनिया उसी कि ज़माना उसी का
मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का
लुटा जो मुसाफिर दिल के सफर में
है जन्नत ये दुनिया उसकी नज़र में
लुटा जो मुसाफिर दिल के सफर में
है जन्नत ये दुनिया उसकी नज़र में
उसी ने है लूटा मज़ा जिंदगी का
मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का
है सजदे के काबिल हर वो दीवाना
कि जो बन गया हो तस्वीर-ऐ-जाना
है सजदे के काबिल हर वो दीवाना
कि जो बन गया हो तस्वीर-ऐ-जाना
करो एहतराम उसकी दीवानगी का
मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का
बर्बाद होना जिसकी अदा हो
दर्द-ऐ-मोहब्बत जिसकी दवा हो
बर्बाद होना जिसकी अदा हो
दर्द-ऐ-मोहब्बत जिसकी दवा हो
सताएगा क्या गम उसे जिंदगी का
मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का
......................................
Hai duniya usi ki-Kashmir ki kali 1964
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Tuesday, 2 August 2011
ये चाँद सा रोशन चेहरा-काश्मीर की कली १९६४
प्रस्तुत गीत में ऐसा क्या खास है जो जनता इसे बेहद पसंद करती है, खोजिये !
जवाब बहुत से हैं- शम्मी कपूर का शरारती उछल्कूदियाना अंदाज़ है, शर्मिला टैगोर
की खूबसूरती और बिनाका स्माइल है, कश्मीर की मुफ्त सैर है, एस एच बिहारी
के बोल हैं, ओ पी नय्यर का जादुई संगीत है और रफ़ी की मोहक आवाज़ है।
बस बोलों में एक बेसिक फॉल्ट है वो ये कि झील सी ऑंखें नायिका की ज़रूर होंगी
मगर नीला रंग नायक की आँखों का है। अब गीत बढ़िया हो तो फॉल्ट वॉल्ट गए
तेल लेने, है न ?
इतना विवरण पर्याप्त है या पांच पन्ने का निबंध लिखूं.............
गीत के बोल:
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
एक चीज़ क़यामत भी है
लोगों से सुना करते थे
तुम्हें देख के मैंने माना
वो ठीक कहा करते थे
वो ठीक कहा करते थे
है चाल में तेरी ज़ालिम
कुछ ऐसी बाला का जादू
सौ बार संभाला दिल को
मगर हो के रहा बेकाबू
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
हर सुबह किरण की लाली
है रंग तेरे गालों का
हर शाम की चादर काली
साया है तेरे बालों का
हर सुबह किरण की लाली
है रंग तेरे गालों का
हर शाम की चादर काली
साया है तेरे बालों का
साया है तेरे बालों का
तू बलखाती एक नदिया
हर मौज तेरी अंगडाई
जो इन मौजों में डूबा
उसने ही दुनिया पायी
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
मैं खोज में हूँ मंजिल की
और मंजिल पास है मेरे
मुखड़े से हटा दो आँचल
हो जाएँ दूर अँधेरे
हो जाएँ दूर अँधेरे
माना के ये जलवे तेरे
कर देंगे मुझे दीवाना
जी भर के ज़रा मैं देखूं
अंदाज़ तेरा मस्ताना
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
......................................
Ye chand sa roshan chehra-Kashmir ki kali 1964
जवाब बहुत से हैं- शम्मी कपूर का शरारती उछल्कूदियाना अंदाज़ है, शर्मिला टैगोर
की खूबसूरती और बिनाका स्माइल है, कश्मीर की मुफ्त सैर है, एस एच बिहारी
के बोल हैं, ओ पी नय्यर का जादुई संगीत है और रफ़ी की मोहक आवाज़ है।
बस बोलों में एक बेसिक फॉल्ट है वो ये कि झील सी ऑंखें नायिका की ज़रूर होंगी
मगर नीला रंग नायक की आँखों का है। अब गीत बढ़िया हो तो फॉल्ट वॉल्ट गए
तेल लेने, है न ?
इतना विवरण पर्याप्त है या पांच पन्ने का निबंध लिखूं.............
गीत के बोल:
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
एक चीज़ क़यामत भी है
लोगों से सुना करते थे
तुम्हें देख के मैंने माना
वो ठीक कहा करते थे
वो ठीक कहा करते थे
है चाल में तेरी ज़ालिम
कुछ ऐसी बाला का जादू
सौ बार संभाला दिल को
मगर हो के रहा बेकाबू
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
हर सुबह किरण की लाली
है रंग तेरे गालों का
हर शाम की चादर काली
साया है तेरे बालों का
हर सुबह किरण की लाली
है रंग तेरे गालों का
हर शाम की चादर काली
साया है तेरे बालों का
साया है तेरे बालों का
तू बलखाती एक नदिया
हर मौज तेरी अंगडाई
जो इन मौजों में डूबा
उसने ही दुनिया पायी
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
मैं खोज में हूँ मंजिल की
और मंजिल पास है मेरे
मुखड़े से हटा दो आँचल
हो जाएँ दूर अँधेरे
हो जाएँ दूर अँधेरे
माना के ये जलवे तेरे
कर देंगे मुझे दीवाना
जी भर के ज़रा मैं देखूं
अंदाज़ तेरा मस्ताना
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
......................................
Ye chand sa roshan chehra-Kashmir ki kali 1964
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Wednesday, 13 July 2011
प्यासी हिरनी बन बन धाए-दो दिल १९६४
हेमंत कुमार के संगीत निर्देशन में अब आपको सुनवाते हैं फिल्म
'दो दिल' का एक गीत जिसे गा रही हैं लता मंगेशकर. वी शांताराम
की पुत्री राजश्री दो दिल फिल्म में नायिका हैं. नायक हैं विश्वजीत.
गीत कैफ़ी आज़मी का लिखा हुआ है.
कुछ भूतिया फिल्मों के गीतों सा शुरू होता है ये गीत. नयिका खुद
दौड लगा रही है और नायक की भी जोगिंग की प्रैक्टिस करवा रही है.
अब इतना मधुर गीत कोई सुन्दर बाला गाती हुई जंगल में दिख
जाए तो अच्छे अच्छे दौड लगा दें उसे देख कर.
गीत के बोल :
कहाँ है तू
तू कहाँ है
आ जा ,ऐ मेरे मेरे सपनों के राजा
प्यासी हिरनी बन बन धाए
कोई शिकारी आये रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे
प्यासी हिरनी बन बन धाए
कोई शिकारी आये रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे
प्यासी हिरनी बन बन धाए
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
नयी नयी कली खिली
चुन ले न कोई
नयी नयी कली खिली
चुन ले न कोई
ऐसी वैसी बातें दिल की
सुन ले न कोई
मन हंसा जिया मोरा
जाने क्या गाये रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे
प्यासी हिरनी बन बन धाए
कोई शिकारी आये रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे
प्यासी हिरनी बन बन धाए
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
चलते चलते रुक जाऊं मैं
चल नहीं पाऊँ
चलते चलते रुक जाऊं मैं
चल नहीं पाऊँ
पल पल भड़के तन में अग्नि
कैसे बुझाऊँ
लगी न बुझे कहीं
जी को जलाये रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे
प्यासी हिरनी बन बन धाए
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
एक तो मैं हूँ भोली भाली
दूजे अकेली
एक तो मैं हूँ भोली भाली
दूजे अकेली
कैसे बूझी जाए मोसे
मन की पहेली
चली है हवा नयी
जिया घबराए रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे
प्यासी हिरनी बन बन धाए
कोई शिकारी आये रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे
प्यासी हिरनी बन बन धाए
..................................
Pyasi hirni ban ban dhaaye-Do Dil 1964
'दो दिल' का एक गीत जिसे गा रही हैं लता मंगेशकर. वी शांताराम
की पुत्री राजश्री दो दिल फिल्म में नायिका हैं. नायक हैं विश्वजीत.
गीत कैफ़ी आज़मी का लिखा हुआ है.
कुछ भूतिया फिल्मों के गीतों सा शुरू होता है ये गीत. नयिका खुद
दौड लगा रही है और नायक की भी जोगिंग की प्रैक्टिस करवा रही है.
अब इतना मधुर गीत कोई सुन्दर बाला गाती हुई जंगल में दिख
जाए तो अच्छे अच्छे दौड लगा दें उसे देख कर.
गीत के बोल :
कहाँ है तू
तू कहाँ है
आ जा ,ऐ मेरे मेरे सपनों के राजा
प्यासी हिरनी बन बन धाए
कोई शिकारी आये रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे
प्यासी हिरनी बन बन धाए
कोई शिकारी आये रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे
प्यासी हिरनी बन बन धाए
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
नयी नयी कली खिली
चुन ले न कोई
नयी नयी कली खिली
चुन ले न कोई
ऐसी वैसी बातें दिल की
सुन ले न कोई
मन हंसा जिया मोरा
जाने क्या गाये रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे
प्यासी हिरनी बन बन धाए
कोई शिकारी आये रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे
प्यासी हिरनी बन बन धाए
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
चलते चलते रुक जाऊं मैं
चल नहीं पाऊँ
चलते चलते रुक जाऊं मैं
चल नहीं पाऊँ
पल पल भड़के तन में अग्नि
कैसे बुझाऊँ
लगी न बुझे कहीं
जी को जलाये रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे
प्यासी हिरनी बन बन धाए
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
एक तो मैं हूँ भोली भाली
दूजे अकेली
एक तो मैं हूँ भोली भाली
दूजे अकेली
कैसे बूझी जाए मोसे
मन की पहेली
चली है हवा नयी
जिया घबराए रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे
प्यासी हिरनी बन बन धाए
कोई शिकारी आये रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे
प्यासी हिरनी बन बन धाए
..................................
Pyasi hirni ban ban dhaaye-Do Dil 1964
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Monday, 6 June 2011
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो-सुहागन १९६४
फिल्म सुहागन(१९६४) से आपको पूर्व में २ गीत सुनवा चुके हैं।
अब सुनिए फिल्म का तीसरा गीत जो कि लता और तलत
की आवाज़ में एक युगल गीत है। इस फिल्म का एक युगल गीत
जो आपने पहले सुना था वो मन्ना डे और लता की आवाज़ में है।
६० के दशक के आते तलत महमूद को फिल्मों में गीत मिलना
कम हो गये। बदलते ज़माने और पसंद के साथ दूसरे गायक दृश्य
में दिखाई देने लगे। दूसरे संगीतकार जहाँ उनसे किनारा करने लगे,
मदन मोहन ने उन्हें कुछ गीत अवश्य दिए गाने को. मदन मोहन
ने तलत महमूद को फिल्म जहाँआरा में भी अवसर दिए।
गीत के बोल:
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
हाँ हाँ हाँ आ आ आ आ
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
तुम्हें दिल में बसाया है
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
हाँ हाँ हाँ हाँ आ आ आ आ
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हें दिल से लगाया है
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
इबादत है निगाहों की तुझी को देखते रहना
तेरी हर बात को सहना
तुम्हीं तो मेरे साथी हो तुम्हें अपना बनाया है
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
तमन्ना है इन आँखों की तुम्हारे ही नज़ारे हों
जहाँ देखूँ तुम्हें देखूँ हसीं जलवे तुम्हारे हों
हसीं जलवे तुम्हारे हों
तुम्हीं ने मेरी मंज़िल को बहारों से सजाया है
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हारे हाथ में है अब हमारी लाज का आँचल
न बह जाए कहीं देखो हमारी आँख का काजल
न बह जाए कहीं देखो हमारी आँख का काजल
हमारी आंख का काजल
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
......................................
Tumhin to meri pooja ho-Suhagan 1964
अब सुनिए फिल्म का तीसरा गीत जो कि लता और तलत
की आवाज़ में एक युगल गीत है। इस फिल्म का एक युगल गीत
जो आपने पहले सुना था वो मन्ना डे और लता की आवाज़ में है।
६० के दशक के आते तलत महमूद को फिल्मों में गीत मिलना
कम हो गये। बदलते ज़माने और पसंद के साथ दूसरे गायक दृश्य
में दिखाई देने लगे। दूसरे संगीतकार जहाँ उनसे किनारा करने लगे,
मदन मोहन ने उन्हें कुछ गीत अवश्य दिए गाने को. मदन मोहन
ने तलत महमूद को फिल्म जहाँआरा में भी अवसर दिए।
गीत के बोल:
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
हाँ हाँ हाँ आ आ आ आ
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
तुम्हें दिल में बसाया है
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
हाँ हाँ हाँ हाँ आ आ आ आ
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हें दिल से लगाया है
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
इबादत है निगाहों की तुझी को देखते रहना
तेरी हर बात को सहना
तुम्हीं तो मेरे साथी हो तुम्हें अपना बनाया है
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
तमन्ना है इन आँखों की तुम्हारे ही नज़ारे हों
जहाँ देखूँ तुम्हें देखूँ हसीं जलवे तुम्हारे हों
हसीं जलवे तुम्हारे हों
तुम्हीं ने मेरी मंज़िल को बहारों से सजाया है
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हारे हाथ में है अब हमारी लाज का आँचल
न बह जाए कहीं देखो हमारी आँख का काजल
न बह जाए कहीं देखो हमारी आँख का काजल
हमारी आंख का काजल
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
......................................
Tumhin to meri pooja ho-Suhagan 1964
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Sunday, 5 June 2011
तू मेरे सामने है-सुहागन १९६४
आइये आपको एक रोमांटिक गीत सुनवाते हैं। ये असली छाया गीत
है, श्वेत श्याम युग का और इसमें भाव भंगिमाएं भी कुछ श्याम
वर्ण सी हैं । गीत की सिचुएशन कुछ विरोधाभासी किस्म की सी है।
नायक रोमांटिक मूड में है और नायिका बेबस और लाचार सी दिखती
है। नायक हैं गुरुदत्त और नायिका माला सिन्हा।
नायक न्यूनतम और दृढ़ प्रतिज्ञ से भावों के साथ गीत गा रहा है
और नायिका अपनी पूरी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन कर रही है और
काफी ज़द्दो ज़हद के बाद आखिरकार समर्पण वाली मुद्रा में आ जाती
है। मदन मोहन के साथ हसरत जयपुरी ने बहुत कम फिल्मों में गीतों
पर काम किया है। इस गीत के लिए तो मानना पड़ेगा कि हसरत जयपुरी
का रोमांटिक गीतों को लिखने के मामले में कोई सानी नहीं। गीत में
संगीत कहीं कहीं लाऊड हो जाता है, इसको मदन मोहन भक्तों की भाषा
में बोलें तो-इतना तो चलता है गाने में.
गीत के बोल :
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तेरी आँखें तो छलकते हुए पैमाने हैं
तेरी आँखें तो छलकते हुए पैमाने हैं
और तेरे होंठ लरजते हुए मैखाने हैं
मेरे अरमान इसी बात पे दीवाने हैं
मैं भला होश में कैसे रहूँ, कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तू जो हँसती है तो बिजली सी चमक जाती है
तू जो हँसती है तो बिजली सी चमक जाती है
तेरी साँसों से ग़ुलाबों की महक आती है
तू जो चलती है तो कुदरत भी बहक जाती है
मैं भला होश में कैसे रहूँ, कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
................................
Too mere samne hai-Suhagan 1964
है, श्वेत श्याम युग का और इसमें भाव भंगिमाएं भी कुछ श्याम
वर्ण सी हैं । गीत की सिचुएशन कुछ विरोधाभासी किस्म की सी है।
नायक रोमांटिक मूड में है और नायिका बेबस और लाचार सी दिखती
है। नायक हैं गुरुदत्त और नायिका माला सिन्हा।
नायक न्यूनतम और दृढ़ प्रतिज्ञ से भावों के साथ गीत गा रहा है
और नायिका अपनी पूरी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन कर रही है और
काफी ज़द्दो ज़हद के बाद आखिरकार समर्पण वाली मुद्रा में आ जाती
है। मदन मोहन के साथ हसरत जयपुरी ने बहुत कम फिल्मों में गीतों
पर काम किया है। इस गीत के लिए तो मानना पड़ेगा कि हसरत जयपुरी
का रोमांटिक गीतों को लिखने के मामले में कोई सानी नहीं। गीत में
संगीत कहीं कहीं लाऊड हो जाता है, इसको मदन मोहन भक्तों की भाषा
में बोलें तो-इतना तो चलता है गाने में.
गीत के बोल :
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तेरी आँखें तो छलकते हुए पैमाने हैं
तेरी आँखें तो छलकते हुए पैमाने हैं
और तेरे होंठ लरजते हुए मैखाने हैं
मेरे अरमान इसी बात पे दीवाने हैं
मैं भला होश में कैसे रहूँ, कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
तू जो हँसती है तो बिजली सी चमक जाती है
तू जो हँसती है तो बिजली सी चमक जाती है
तेरी साँसों से ग़ुलाबों की महक आती है
तू जो चलती है तो कुदरत भी बहक जाती है
मैं भला होश में कैसे रहूँ, कैसे रहूँ
तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ
................................
Too mere samne hai-Suhagan 1964
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Saturday, 29 January 2011
तुम अपना रंज ओ ग़म अपनी परेशानी -शगुन १९६४
आपको फिल्म शगुन का एक गीत सुमन कल्याणपुर का गाया
हुआ हम सुनवा चुके हैं। आइये एक और गीत सुना जाये इसी फिल्म
का जो जगजीत कौर की आवाज़ में है। जगजीत उर्फ़ श्रीमती
ख़य्याम ने कुछ एक गीत गए हैं हिंदी फिल्मों में और शायद
सभी में संगीत ख़य्याम का ही है। साहिर का लिखा हुआ ये गीत
मुझे बेहद पसंद है और कभी कभार इसे सुन लिया करता
हूँ-वजह -इसके बोल। प्यानो की मधुर आवाज़ के साथ गीत का
आगाज़ होता है। गीत शायद निवेदिता नाम की कलाकार पर
फिल्माया गया है।
गीत के बोल:
तुम अपना रंज-ओ-ग़म, अपनी परेशानी मुझे दे दो
तुम्हें ग़म की क़सम, इस दिल की वीरानी मुझे दे दो
ये माना मैं किसी क़ाबिल नहीं हूँ इन निगाहों में
ये माना मैं किसी क़ाबिल नहीं हूँ इन निगाहों में
बुरा क्या है अगर, ये दुख ये हैरानी मुझे दे दो
तुम अपना रंज-ओ-ग़म, अपनी परेशानी मुझे दे दो
मैं देखूँ तो सही, दुनिया तुम्हें कैसे सताती है
मैं देखूँ तो सही, दुनिया तुम्हें कैसे सताती है
कोई दिन के लिये, अपनी निगहबानी मुझे दे दो
तुम अपना रंज-ओ-ग़म, अपनी परेशानी मुझे दे दो
वो दिल जो मैने मांगा था मगर गैरों ने पाया था
वो दिल जो मैने मांगा था मगर गैरों ने पाया था
बड़ी ख्वाहिश है अगर, उसकी पशेमानी मुझे दे दो
तुम अपना रंज-ओ-ग़म, अपनी परेशानी मुझे दे दो
हुआ हम सुनवा चुके हैं। आइये एक और गीत सुना जाये इसी फिल्म
का जो जगजीत कौर की आवाज़ में है। जगजीत उर्फ़ श्रीमती
ख़य्याम ने कुछ एक गीत गए हैं हिंदी फिल्मों में और शायद
सभी में संगीत ख़य्याम का ही है। साहिर का लिखा हुआ ये गीत
मुझे बेहद पसंद है और कभी कभार इसे सुन लिया करता
हूँ-वजह -इसके बोल। प्यानो की मधुर आवाज़ के साथ गीत का
आगाज़ होता है। गीत शायद निवेदिता नाम की कलाकार पर
फिल्माया गया है।
गीत के बोल:
तुम अपना रंज-ओ-ग़म, अपनी परेशानी मुझे दे दो
तुम्हें ग़म की क़सम, इस दिल की वीरानी मुझे दे दो
ये माना मैं किसी क़ाबिल नहीं हूँ इन निगाहों में
ये माना मैं किसी क़ाबिल नहीं हूँ इन निगाहों में
बुरा क्या है अगर, ये दुख ये हैरानी मुझे दे दो
तुम अपना रंज-ओ-ग़म, अपनी परेशानी मुझे दे दो
मैं देखूँ तो सही, दुनिया तुम्हें कैसे सताती है
मैं देखूँ तो सही, दुनिया तुम्हें कैसे सताती है
कोई दिन के लिये, अपनी निगहबानी मुझे दे दो
तुम अपना रंज-ओ-ग़म, अपनी परेशानी मुझे दे दो
वो दिल जो मैने मांगा था मगर गैरों ने पाया था
वो दिल जो मैने मांगा था मगर गैरों ने पाया था
बड़ी ख्वाहिश है अगर, उसकी पशेमानी मुझे दे दो
तुम अपना रंज-ओ-ग़म, अपनी परेशानी मुझे दे दो
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Saturday, 4 December 2010
शोख नज़र की बिजलियाँ- वो कौन थी १९६४
मदन मोहन ने आशा भोंसले की सेवाएँ भी लीं और कुछ
कुछ आशा के प्रचलित नगमे उन्हीं के बनाये हुए हैं।
उन जाने पहचाने गीतों में एक है वो कौन थी का थोडा
तेज़ गति वाला गीत-शोख नज़र की बिजलियाँ। उनके
संगीतबद्ध किये आशा के गीतों को वो प्रसिद्धि तो नहीं
मिली जो लता के गाये गीतों को मिली, लेकिन मदन मोहन
भक्त कई बार औपचारिकता निभाने के लिए आशा के
गीत भी सुन कर वाह वाह कर लिया करते हैं।
गीत फिल्माया गया है तीखे नाक नक्श वाली अभिनेत्री
परवीन चौधरी पर । हिंदी फिल्म के दर्शकों को बर्फ पर
स्केटिंग क्या होती है ये बतलाने वाला गाना। कितने सस्ते
में एक दर्शक दुनिया की सैर कर लेता है हिंदी गीतों के
बहाने। इसमें स्केटिंग करने वाले एक दुसरे का हाथ
पकड़ कर कलाबाजियां दिखा रहे हैं ताकि गिरे भीं तो
उस अंदाज़ में-हम तो डूबेंगे सनम तुमको भी ले डूबेंगे।
गीत के बोल:
हो, आ हा हा हा हा हो हो हो , आ हा हा हा हा हो हो हो
शोख़ नज़र की बिजलियाँ दिल पे मेरे गिराए जा
मेरा न कुछ ख़्याल कर, तू यूँ ही मुस्कुराए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ
जाग उठी है आरज़ू, जैसे चिराग़ जल पड़े
अब तो वफ़ा की राह में, हम तेरे साथ चल पड़े
चाहे हँसाए जा हमें, चाहे हमें रुलाए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ दिल पे मेरे गिराए जा
मेरा न कुछ ख़्याल कर, तू यूँ ही मुस्कुराए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ
चैन कहीं किसी घड़ी, आये ना तेरे बिन मुझे
काश मैं इस जहान से, छीन लूँ एक दिन तुझे
मैं तेरे साथ साथ हूँ, चाहे नज़र बचाए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ दिल पे मेरे गिराए जा
मेरा न कुछ ख़्याल कर, तू यूँ ही मुस्कुराए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ
..........................................
Shokh Nazar Ki Bijliyan-Woh Kaun Thi 1964
कुछ आशा के प्रचलित नगमे उन्हीं के बनाये हुए हैं।
उन जाने पहचाने गीतों में एक है वो कौन थी का थोडा
तेज़ गति वाला गीत-शोख नज़र की बिजलियाँ। उनके
संगीतबद्ध किये आशा के गीतों को वो प्रसिद्धि तो नहीं
मिली जो लता के गाये गीतों को मिली, लेकिन मदन मोहन
भक्त कई बार औपचारिकता निभाने के लिए आशा के
गीत भी सुन कर वाह वाह कर लिया करते हैं।
गीत फिल्माया गया है तीखे नाक नक्श वाली अभिनेत्री
परवीन चौधरी पर । हिंदी फिल्म के दर्शकों को बर्फ पर
स्केटिंग क्या होती है ये बतलाने वाला गाना। कितने सस्ते
में एक दर्शक दुनिया की सैर कर लेता है हिंदी गीतों के
बहाने। इसमें स्केटिंग करने वाले एक दुसरे का हाथ
पकड़ कर कलाबाजियां दिखा रहे हैं ताकि गिरे भीं तो
उस अंदाज़ में-हम तो डूबेंगे सनम तुमको भी ले डूबेंगे।
गीत के बोल:
हो, आ हा हा हा हा हो हो हो , आ हा हा हा हा हो हो हो
शोख़ नज़र की बिजलियाँ दिल पे मेरे गिराए जा
मेरा न कुछ ख़्याल कर, तू यूँ ही मुस्कुराए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ
जाग उठी है आरज़ू, जैसे चिराग़ जल पड़े
अब तो वफ़ा की राह में, हम तेरे साथ चल पड़े
चाहे हँसाए जा हमें, चाहे हमें रुलाए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ दिल पे मेरे गिराए जा
मेरा न कुछ ख़्याल कर, तू यूँ ही मुस्कुराए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ
चैन कहीं किसी घड़ी, आये ना तेरे बिन मुझे
काश मैं इस जहान से, छीन लूँ एक दिन तुझे
मैं तेरे साथ साथ हूँ, चाहे नज़र बचाए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ दिल पे मेरे गिराए जा
मेरा न कुछ ख़्याल कर, तू यूँ ही मुस्कुराए जा
शोख़ नज़र की बिजलियाँ
..........................................
Shokh Nazar Ki Bijliyan-Woh Kaun Thi 1964
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Wo kaun thi
Friday, 3 December 2010
लग जा गले के फिर ये हंसी रात-वो कौन थी १९६४
राज खोसला की सस्पेंस फिल्म से अगला गीत पेश है।
ये फिल्म भी बहुत से पहाड़ी वाले दृश्यों से भरी पड़ी है।
अब पहाड़ी है तो राग पहाड़ी पर आधारित कोई गीत भी
होना चाहिए। है जी है, एक गीत और वो भी सुपर डुपर
हिट गीत। राजा मेहँदी अली खान के बोल और मदन
मोहन का संगीत, परदे पर साधना और परदे के पीछे
लता मंगेशकर की आवाज़। इसका फिल्मांकन भी
ज़ोरदार है। अपनी नायिकाओं को किस तरह बला की
खूबसूरत दिखाया जाए ये फलसफा राज खोसला के गीतों
से सीखे कोई। मदन मोहन की इस रचना का मैं भी बड़ा
दीवाना हूँ । उल्लेखनीय है कि ये गीत सम्पादित स्वरुप
में उपलब्ध है फिल्म के एल. पी. रिकोर्ड पर। फिल्म वाला
वर्जन थोडा लम्बा है और इसमें संगीत के अंश कुछ
ज्यादा हैं। 'लग जा गले' कहने का इससे खूबसूरत अंदाज़
शायद ही आपको देखने को मिले।
इसका आधुनिक और ठेठ तरीका यूँ होगा, नायिका नायक
से बोलेगी -ओये सोणियो यूँ घूर घूर के क्या देख रहे हो,
गले लग जा, ये नाईट शिफ्ट फिर नहीं होगी , गले नहीं
लगा तो तो भूत बन के तेरे गले पड़ जाऊंगी। गीत में
निवेदन की जगह हुक्म होगा। ऐसा होने की संभावना
थोड़ी कम है क्यूंकि रीमिक्स वालों के लिए मदन मोहन
की रचनायें सरदर्द हैं।
गीत के बोल:
लग जा गले हूँ हूँ हूँ , हसीं रात हं हं हं
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले से, ऐ
हमको मिली हैं आज, ये घड़ियाँ नसीब से
हमको मिली हैं आज, ये घड़ियाँ नसीब से
जी भर के देख लीजिये हमको क़रीब से
फिर आपके नसीब में ये बात हो न हो
फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले से, ऐ
पास आइये कि हम नहीं आएंगे बार-बार
पास आइये कि हम नहीं आएंगे बार-बार
बाहें गले में डाल के हम रो लें ज़ार-ज़ार
आँखों से फिर ये प्यार की बरसात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले से, ऐ
ये फिल्म भी बहुत से पहाड़ी वाले दृश्यों से भरी पड़ी है।
अब पहाड़ी है तो राग पहाड़ी पर आधारित कोई गीत भी
होना चाहिए। है जी है, एक गीत और वो भी सुपर डुपर
हिट गीत। राजा मेहँदी अली खान के बोल और मदन
मोहन का संगीत, परदे पर साधना और परदे के पीछे
लता मंगेशकर की आवाज़। इसका फिल्मांकन भी
ज़ोरदार है। अपनी नायिकाओं को किस तरह बला की
खूबसूरत दिखाया जाए ये फलसफा राज खोसला के गीतों
से सीखे कोई। मदन मोहन की इस रचना का मैं भी बड़ा
दीवाना हूँ । उल्लेखनीय है कि ये गीत सम्पादित स्वरुप
में उपलब्ध है फिल्म के एल. पी. रिकोर्ड पर। फिल्म वाला
वर्जन थोडा लम्बा है और इसमें संगीत के अंश कुछ
ज्यादा हैं। 'लग जा गले' कहने का इससे खूबसूरत अंदाज़
शायद ही आपको देखने को मिले।
इसका आधुनिक और ठेठ तरीका यूँ होगा, नायिका नायक
से बोलेगी -ओये सोणियो यूँ घूर घूर के क्या देख रहे हो,
गले लग जा, ये नाईट शिफ्ट फिर नहीं होगी , गले नहीं
लगा तो तो भूत बन के तेरे गले पड़ जाऊंगी। गीत में
निवेदन की जगह हुक्म होगा। ऐसा होने की संभावना
थोड़ी कम है क्यूंकि रीमिक्स वालों के लिए मदन मोहन
की रचनायें सरदर्द हैं।
गीत के बोल:
लग जा गले हूँ हूँ हूँ , हसीं रात हं हं हं
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले से, ऐ
हमको मिली हैं आज, ये घड़ियाँ नसीब से
हमको मिली हैं आज, ये घड़ियाँ नसीब से
जी भर के देख लीजिये हमको क़रीब से
फिर आपके नसीब में ये बात हो न हो
फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले से, ऐ
पास आइये कि हम नहीं आएंगे बार-बार
पास आइये कि हम नहीं आएंगे बार-बार
बाहें गले में डाल के हम रो लें ज़ार-ज़ार
आँखों से फिर ये प्यार की बरसात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले से, ऐ
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Raja Mehdi Ali Khan,
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Wo kaun thi
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