Social Icons

Showing posts with label Sharmila Tagore. Show all posts
Showing posts with label Sharmila Tagore. Show all posts

Saturday, 13 August 2011

बहारों की बारात आ गई-यकीन १९६९

फिल्म यकीन से एक गाना तो झट जुबान पे आ जाता है वो है फिल्म

का शीर्षक गीत। इतना भी याद आता है कि इस फिल्म में धर्मेन्द्र और

शर्मिला टैगोर हैं। इनकी जोड़ी भी कुछ ही फिल्मों में देखी होगी आपने।

३ फ़िल्में तो मुझे याद आती है-अनुपमा, चुपके चुपके और देवर। देवर

में थोड़ा अलग सा किस्सा था।



हिंदी फिल्म के नायक/हीरो अगर सामान्य पृठभूमि वाले होंगे तो भी उनके

पास गज़ब का सामान होता है। इस फिल्म के हीरो के पास एक शानदार

कार है। अब कार शानदार हो या ना हो, इससे विशेष फर्क नहीं पढता जब

नायिका ज्यादा आकर्षण का केंद्र हो बनिस्बत फिल्म में दिख रहे बाकी के

सामानों के। अब आप ये मत पूछ लीजियेगा कि गाने कि शुरुआत में नायिका

काली साडी पहने हुए है और नायक की कार के शीशे में वो सफ़ेद साडी पहने

दिखाई देती है.



एक बात ज़रूर कार चलने वालों से कहना चाहूँगा-अगर इतना स्टीयरिंग आप

गलती से भी न घुमाएँ किसी पुल पर चलते समय, अन्यथा आपके गाने के

अंतरे नाले या नदी में सुनाई देंगे. या तो फ़िल्मी कार का स्टीयरिंग खराब है,

या फिर उसमें विशेष प्रावधान किया हुआ है, या फिर कार एक जगह पर खड़ी

है और पुल पीछे सरक रहा है.



एक बात में तो सामान्य जीवन और फिल्म कम से कम एक सरीखी

लगते हैं-कार का टायर पंचर होना। गौरतलब है कि टायर पंचर होने

के बाद बदलने वाली कसरत में जिसको पसीना कम निकलता हो वो

भी पसीने से लथ-पथ हो जाता है, उस स्तिथि में नायक का उसी जोश

के साथ गीत गाना और मुस्कुराना अतिश्योक्ति सी लगती है। खैर गीत

सुनिए जो हसरत जयपुरी का लिखा हुआ है और इसकी धुन बनाई है

शंकर जयकिशन ने। मोहम्मद रफी ने इसे गाया है जो कि धर्मेन्द्र के

पसंदीदा गायक रहे हैं।







गीत के बोल:





बहारों की बारात आ गई

ख़ुशी को ले के साथ आ गई

सुनो तो मेरे दिल सुनो तो मेरी जान

होठों पे दिल कि बात आ गई



बहारों की बारात आ गई

ख़ुशी को ले के साथ आ गई

सुनो तो मेरे दिल सुनो तो मेरी जान

होठों पे दिल की बात आ गई



बहारों की बारात



मुझसे देखो ना शरमाना तुम

मेरी बाहों में खो जाना तुम

मुझसे देखो ना शरमाना तुम

मेरी बाहों में खो जाना तुम

इंतजारी की हद हो चुकी

और ज्यादा ना तरसना तुम

और ज्यादा ना तरसना तुम



बहारों की बारात आ गई

ख़ुशी को ले के साथ आ गई

सुनो तो मेरे दिल सुनो तो मेरी जान

होठों पे दिल की बात आ गई



बहारों की बारात



आज छेड़ी हवाओं ने भी

प्यार की मस्त शहनाईयां

आज छेड़ी हवाओं ने भी

प्यार की मस्त शहनाईयां

वादियाँ बन गयीं हैं दुल्हन

जैसे उनकी हों परछाईयाँ

जैसे उनकी हों परछाईयाँ



बहारों की बारात आ गई

ख़ुशी को ले के साथ आ गई

सुनो तो मेरे दिल सुनो तो मेरी जान

होठों पे दिल की बात आ गई



बहारों की बारात

.................................

Baharon ki baraat-Yakeen 1969

Wednesday, 3 August 2011

ज़िंदगी फूलों की नहीं-गृह प्रवेश 1979

आइये कुछ अलग हट के बनी फिल्मों से गीत सुने जाएँ । सबसे पहले
सुनते हैं कुछ ज्यादा ही हट के बनी फिल्म गृह प्रवेश से एक गीत।

बुद्धिजीवी दो प्रकार के होते हैं-नैसर्गिक और निर्मित। पहले वाले पैदाइशी
होते हैं और दुसरे वालों को जनता दर्ज़ा प्रदान करती है। हमारे देश के कुछ
बुद्धिजीवियों की खूबी है कि वे न समझ आने वाली चीज़ों पर भी वाह वाह
कर उठते हैं। आम जनता जब समझ में कुछ नहीं आता हो तो वो उन
बुद्धिजीवियों की राय और सहमति पर निर्भर हो जाती है ।

फिल्म के कथानक को थकानक कहा जाए तो भी फर्क नहीं पड़ेगा। इसको
समझने के लिए दिमाग खपाने की ज़रूरत पढ़ती है। संजीव कुमार और
शर्मीला टैगोर ने अपने अपने हिस्से का बढ़िया अभिनय किया है। १९७९
में बनी इस फिल्म को समय से आगे की बताते हैं कुछ लोग।

प्रस्तुत गीत फिल्म के टाइटल के साथ सुनाई पढता है इसलिए इसमें गीत का
आनंद लेने के अलावा कोई कन्फ्यूज़न नहीं है। गीत गुलज़ार का लिखा हुआ
है जिसे गा रहे हैं भूपेंद्र। संगीत तैयार किया है कनु रॉय ने।



गीत के बोल:


ज़िंदगी फूलों की नहीं
फूलों की तरह महकी रहे
ज़िंदगी फूलों की नहीं
फूलों की तरह महकी रहे

ज़िंदगी

जब कोई कहीं गुल खिलता है
आवाज़ नहीं आती लेकिन
आवाज़ नहीं आती लेकिन
खुशबू की खबर आ जाती है
खुशबू महकी रहे

ज़िंदगी

जब राह कहीं कोई मुड़ती है
मंजिल का पता तो होता नहीं
मंजिल का पता तो होता नहीं
इक राह पे राह मिल जाती है
राहें मुड़ती रहें

ज़िंदगी
.....................................
Zindagi phoolon ki nahin-Griha Pravesh 1979

Tuesday, 2 August 2011

ये चाँद सा रोशन चेहरा-काश्मीर की कली १९६४

प्रस्तुत गीत में ऐसा क्या खास है जो जनता इसे बेहद पसंद करती है, खोजिये !

जवाब बहुत से हैं- शम्मी कपूर का शरारती उछल्कूदियाना अंदाज़ है, शर्मिला टैगोर
की खूबसूरती और बिनाका स्माइल है, कश्मीर की मुफ्त सैर है, एस एच बिहारी
के बोल हैं, ओ पी नय्यर का जादुई संगीत है और रफ़ी की मोहक आवाज़ है।

बस बोलों में एक बेसिक फॉल्ट है वो ये कि झील सी ऑंखें नायिका की ज़रूर होंगी
मगर नीला रंग नायक की आँखों का है। अब गीत बढ़िया हो तो फॉल्ट वॉल्ट गए
तेल लेने, है न ?

इतना विवरण पर्याप्त है या पांच पन्ने का निबंध लिखूं.............




गीत के बोल:

ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा

तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा

तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

एक चीज़ क़यामत भी है
लोगों से सुना करते थे
तुम्हें देख के मैंने माना
वो ठीक कहा करते थे
वो ठीक कहा करते थे

है चाल में तेरी ज़ालिम
कुछ ऐसी बाला का जादू
सौ बार संभाला दिल को
मगर हो के रहा बेकाबू
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा

तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

हर सुबह किरण की लाली
है रंग तेरे गालों का
हर शाम की चादर काली
साया है तेरे बालों का
हर सुबह किरण की लाली
है रंग तेरे गालों का
हर शाम की चादर काली
साया है तेरे बालों का
साया है तेरे बालों का

तू बलखाती एक नदिया
हर मौज तेरी अंगडाई
जो इन मौजों में डूबा
उसने ही दुनिया पायी
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा

तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

मैं खोज में हूँ मंजिल की
और मंजिल पास है मेरे
मुखड़े से हटा दो आँचल
हो जाएँ दूर अँधेरे
हो जाएँ दूर अँधेरे

माना के ये जलवे तेरे
कर देंगे मुझे दीवाना
जी भर के ज़रा मैं देखूं
अंदाज़ तेरा मस्ताना

तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा

तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
......................................
Ye chand sa roshan chehra-Kashmir ki kali 1964

बहारों ने मेरा चमन लूट कर-देवर १९६६

जिंदगी में बहुत कुछ सरप्राइज़ गिफ्ट सरीखा प्राप्त होता है। फिल्म में नायक
जिस युवती से प्रेम करता है उसकी शादी नायक के मित्र से हो जाती है।
कुछ कुछ धोखे वाली कहानी है। धोखा नायक का मित्र देता है । नायक
घटनाक्रम बदलते ही नायिका का देवर बन जाता है। अपनी भावनाओं को
वो गीत के माध्यम से कैसे व्यक्त कर रहा है सुनिए आनंद बक्षी के बोलों,
मुकेश की आवाज़ और रोशन के संगीत में। नायक हैं धर्मेन्द्र, दूल्हा बने हैं
देवेन वर्मा और नायिका हैं शर्मीला टैगोर । आनंद बक्षी के लेखन कौशल के
अगर आप कायल नहीं हैं तो इस गीत को ध्यान से एक बार सुन लीजिए।






गीत के बोल:

बहारों ने मेरा चमन लूटकर
खिज़ां को ये इल्ज़ाम क्यों दे दिया
किसी ने चलो दुश्मनी की मगर
इसे दोस्ती नाम क्यों दे दिया

बहारों ने मेरा चमन लूटकर

मैं समझा नहीं ऐ मेरे हमनशीं
सज़ा ये मिली है मुझे किस लिये
सज़ा ये मिली है मुझे किस लिये
के साक़ी ने लब से मेरे छीन कर
किसी और को जाम क्यों दे दिया

बहारों ने मेरा चमन लूटकर

मुझे क्या पता था कभी इश्क़ में
रक़ीबों को कासिद बनाते नहीं
रक़ीबों को कासिद बनाते नहीं
खता हो गई मुझसे कासिद मेरे
तेरे हाथ पैगाम क्यों दे दिया

बहारों ने मेरा चमन लूटकर

खुदाया यहाँ तेरे इन्साफ़ के
बहुत मैंने चर्चे सुने हैं मगर
बहुत मैंने चर्चे सुने हैं मगर
सज़ा की जगह एक खतावार को
भला तूने ईनाम क्यों दे दिया

बहारों ने मेरा चमन लूटकर
खिज़ां को ये इल्ज़ाम क्यों दे दिया
....................................
Baharon ne mera chaman loot kar-Devar 1966

Tuesday, 19 July 2011

या दिल की सुनो दुनियावालों-अनुपमा १९६६

फिल्म अनुपमा से एक गीत पेश है हेमंत कुमार की आवाज़ में.
बोल लिखे हैं कैफी अजमी ने और धुन बनायीं है स्वयं हेमंत कुमार ने.
गीत फिल्माया गया है धर्मेन्द्र पर जिन्हें एक पार्टी में गीत गाने के
लिए बोला गया है. दुखियारी नायिका(शर्मिला टैगोर) को ध्यान में रखते
हुए शायद ऐसा गीत गाया जा रहा है.



गीत के बोल:

या दिल की सुनो दुनियावालों
या मुझको अभी चुप रहने दो
मैं ग़म को खुशी कैसे कह दूँ
जो कहते हैं उनको कहने दो

या दिल की सुनो दुनियावालों

ये फूल चमन में कैसा खिला
माली की नजर में प्यार नहीं
हँसते हुए क्या-क्या देख लिया
अब बहते हैं आँसू बहने दो

या दिल की सुनो दुनियावालों

इक ख्वाब खुशी का देखा नहीं
देखा जो कभी तो भूल गए
मांगा हुआ तुम कुछ दे न सके
जो तुमने दिया वो सहने दो

या दिल की सुनो दुनियावालों

क्या दर्द किसी का लेगा कोई
इतना तो किसी में दर्द नहीं
बहते हुए आँसू और बहें
अब ऐसी तसल्ली रहने दो

या दिल की सुनो दुनियावालों
............................
Ya dil ki suno-Anupama 1966

Wednesday, 22 June 2011

चूड़ियाँ बाज़ार से मंगवा दे-सुहाना सफ़र १९७०

फ़िल्मी गीतों की कई श्रेणियां हैं-चूड़ी हिट, बिंदी हिट, कंगना हिट,
घाघरा हिट, चोली हिट, परदेसी हिट, विदेशी हिट इत्यादि ।
हमारे एक मित्र को श्रेणियां बनाने का बड़ा शौक है। दो श्रेणी वे
बनाते, दो हम उन्हें मुफ्त में सुझा देते, कभी वे खुश होते तो
कभी वे सुनकर सर खुजाते। इसको यूँ पढ़ें-कभी वे सर पीटते
कभी हम। उसका किस्सा फिर कभी।

आइये आपको एक बहुत दिन से ना सुना एक गीत सुनवाते हैं
जिसमें नायिका नायक से चूड़ियाँ लाने की फरमाइश कर रही है।
उसके बाद बैयाँ पकड़ने का आकर्षक ऑफर भी दिया जा रहा है।

होली का अवसर है और इसमें हुडदंग, डांस, शोरगुल और गीत के
बोल सभी का मिश्रण है। कुल मिला कर ये फ़िल्मी मसालेदार खिचड़ी
सुनने में स्वादिष्ट सी है।



गीत के बोल:

चूड़ियाँ बाज़ार से मंगवा दे रे पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, ओ
पकड़ फिर बैयाँ

चूड़ियाँ बाज़ार से मंगवा दे रे पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, ओ
पकड़ फिर बैयाँ

रेशमी सलवार तो दिलवा दे रे पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, हो

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

गोरे मुखड़े से गोरी सरका दे
हा आ आ आ
गोरे मुखड़े से गोरी सरका दे
चुनर रंग लेने दे
कच्चा रंग है उतार जायेगा
नज़र रंग लेने दे
जो उतरे ना फिर अंग से
मोहे रंग दे ऐसे रंग से
प्यार ज़रा गुलाल में मिला ले हो पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, ओ
पकड़ फिर बैयाँ

चूड़ियाँ बाज़ार से मंगवा दे रे पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, हो

माने बात जो तू एक मेरी
हा आ आ आ आ
माने बात जो तू एक मेरी
मैं मानूं सौ बातें
तेरे कदमें में डाल दूं ला के
ज़माने की सौगातें
पहले ले दे मुझको घाघरा
फिर ले चल मुझे आगरा

ताजमहल की सैर तो करवा दे रे पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, ओ
पकड़ फिर बैयाँ

चूड़ियाँ बाज़ार से मंगवा दे रे पहले सैयां
पकड़ फिर बैयाँ
पकड़ फिर बैयाँ, हो
............................
Choodiyan bazaar se-Suhana Safar 1970

Monday, 23 May 2011

डोली में बिठाई के कहार-अमर प्रेम १९७१

अभिनेत्री शर्मिला टैगोर की शायद सबसे यादगार फिल्मों
में से एक है-अमर प्रेम, सन १९७१ की फिल्म जो एक मील का
पत्थर फिल्म भी है हिंदी सिनेमा इतिहास की। फिल्म एक से
बढ़ कर एक नायब गीतों से भरी हुई है। फिल्म के ३ गीत मुझे
बेहद पसंद हैं, प्रस्तुत गीत उनमें से एक है। इस फिल्म के गीत
आनंद बक्षी के लिखे हुए हैं। संगीत तैयार किया है आर डी बर्मन
ने। इस गीत को आर डी के पिता सचिन देव बर्मन ने गाया है। ये
संभवतः पुत्र के संगीत निर्देशन में पिता का गाया हुआ एकमात्र
गीत है। एस. डी. बर्मन ने हिंदी में कम ही गीत गाये हैं, मगर जितने
भी गाये हैं वे गुणवत्ता की दृष्टि से उत्तम की श्रेणी में आते हैं। उनकी
भारी सी, खनक और खरखराहट के मिश्रण वाली आवाज़ में अजीब
आकर्षण है। गीत को बांसुरी कि आवाज़ ने और मर्मस्पर्शी बना दिया
है। गीत फिल्म में दो हिस्सों में सुनाई देता है। उस दयालु आत्मा का
धन्यवाद् जिसने दोनों हिस्सों को जोड़कर यू-ट्यूब पर प्रस्तुत किया है।




गीत के बोल:

हो रामा रे, हो रामा

डोली में बिठाई के कहार
डोली में बिठाई के कहार
लाये मोहे सजना के द्वार
हो, डोली में बिठाई के कहार

बीते दिन खुशियों के चार
दे के दुख मन को हजार
डोली में बिठाई के कहार

मर के निकलना था, हो
मर के निकलना था घर से सँवरिया के,
जीते-जी निकलना पड़ा
फूलों जैसे पावों में पड़ गए छाले,
काँटों पे जो चलना पड़ा
पतझड़, बन गई
पतझड़, ओ बन गई
पतझड़ बैरन बहार।

डोली में बिठाई के कहार

जितने हैं अनसुन मेरी, ओ
जितने हैं आँसू मेरी अँखियों में उतना
नदिया में नाहि रे नीर
ओ लिखने वाले तूने लिख दी ये कैसी मेरी,
टूटी नैया जैसी तकदीर।
रूठा मांझी, ओ मांझी
रूठा मांझी, ओ मांझी रे
रूठा माँझी टूटे पतवार।

डोली में बिठाई के कहार

टूटा पहले मेरा मन हो
टूटा पहले मनवा में, चूड़ियाँ टूटीं,
हुए सारे सपने यूँ चूर
कैसा हुआ धोखा आया, पवन का झोंका,
मिट गया मेरा सिंदूर।
लुट गए ओ रामा
लुट गए ओ रामा मेरे
लुट गए सोलह श्रृंगार

डोली में बिठाई के कहार
लाये मोहे सजना के द्वार
हो, डोली में बिठाई के कहार
..................................
Doli mein bithayi ke kahar-Amar prem 1971

Friday, 4 February 2011

छलकाएं जाम-मेरे हमदम मेरे दोस्त १९६८

फिल्म मेरे हमदम मेरे दोस्त के ४ गीत आपको सुनवा चुके
हैं। आइये एक और गीत सुनें। गीत मजरूह साहब का लिखा
हुआ है और संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का। इतने ही विवरण से
काम चला लीजिये और गीत का आनंद उठाइए। बस इतना ध्यान
दीजिये की पहले फ्रेम में जो शख्स गिटार बजा रहा है वो फ़िल्मकार
और नायक ओ पी रल्हन का कुम्भ के मेले में buइछ्दा भाई जैसा
दिख रहा है।






गीत के बोल:


छलकाएं जाम आइये आपकी आँखों के नाम
होंठों के नाम

फूल जैसे तन के जलवे, ये रँग-ओ-बू के
ये रँग-ओ-बू के
आज जाम-ए-मय उठे, इन होंठों को छू के
इन होंठों को छू के
लचकाइये शाख-ए-बदन, लहराइये ज़ुल्फों की शाम

छलकाएं जाम आइये आपकी आँखों के नाम
होंठों के नाम

आपका ही नाम लेकर, पी है सभी ने
पी है सभी ने
आप पर धड़क रहे हैं, प्यालों के सीने
प्यालों के सीने
यहाँ अजनबी कोई नहीं, ये है आपकी महफ़िल तमाम

छलकाएं जाम आइये आपकी आँखों के नाम
होंठों के नाम

कौन हर किसी की बाहें, बाहों में डाल ले
बाहों में डाल ले
जो नज़र को शाख लाए, वो ही सम्भाल ले
वो ही सम्भाल ले
दुनिया को हो औरों की धुन, हमको तो है साक़ी से काम

छलकाएं जाम आइये आपकी आँखों के नाम
होंठों के नाम

Monday, 31 January 2011

हुई शाम उन का ख़याल- मेरे हमदम मेरे दोस्त १९६८

आज गुलाम अली की एक मशहूर ग़ज़ल सुन रहा था -
"बिछड़ के भी मुझे तुझसे ये बदगुमानी है " , कि अचानक
यादों के ठीकरे इधर उधर फूटना शुरू हो गए और ठीकरों के
टुकड़ों ने मन को थोडा कुरेद दिया। दिमाग कितना भी भुलाना
चाहे मगर यादें लौट लौट कर आपको दुखाती अवश्य हैं।
कुछ लोग जोर का झटका धीरे से लगा के रवाना हो जाया
करते हैं तो कुछ हल्का सा झटका जोर से लगा कर। दोनों ही
स्तिथियों में मनाव मन को कष्ट अवश्य होता है । ठीकरे से
तुलना इसलिए कि गई क्यूंकि उन ख्यालों का स्वर अक्सर
एक सा ही होता है। ऐसे में एक गीत याद आया और वो आज
पेश-ए-खिदमत है। मजरूह के लाजवाब बोलों को दिल में
सनसनी पैदा करने वाली धुन से सजाया है संगीतकार
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने और गीत को रूह दी है रफ़ी ने।




गीत के बोल :


हुई शाम उन का ख़याल आ गया
वही ज़िंदगी का सवाल आ गया

अभी तक तो होंठों पे था तबस्सुम का एक सिलसिला
बहुत शादमां थे हम उनको भुलाकर
अचानक ये क्या हो गया
कि चेहरे पे रंग-ए-मलाल आ गया

कि चेहरे पे रंग-ए-मलाल आ गया
हुई शाम उन का ख़याल आ गया

हमें तो यही था गुरूर गम-ए-यार है हम से दूर
वही ग़म जिसे हमने किस-किस जतन से
निकाला था इस दिल से दूर
वो चलकर क़यामात की चाल आ गया
वो चलकर क़यामात की चाल आ गया

हुई शाम उन का ख़याल आ गया
................................................
Hui shaam unka khayal-Mere humdum mere dost 1968

Saturday, 22 January 2011

अल्लाह ये अदा- मेरे हमदम मेरे दोस्त १९६८

फिल्म मेरे हमदम मरे दोस्त के दो मधुर गीत -
ना जा कहीं अब ना जा और चलो सजना आपको
सुनवाए जा चुके हैं भरी भरकम विवरण के साथ
इस गीत को कम विवरण के साथ ही सुन लीजिये।
गीत एक पार्टी में गया जा रहा है। नायिका मुमताज़
इसको परदे पर गा रही हैं, धर्मेन्द्र और शर्मिला
बाकी श्रोताओं के साथ इसको ध्यान से सुन रहे हैं।
गीत में सत्तर प्रतिशत क़व्वाली का आनंद मिलेगा।
इस तरह से ये टू इन वन गीत हुआ।



गीत के बोल:

अल्लाह ये अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह ये अदा कैसी है इन हसीनों में
रूठे पल में ना माने महीनों में
रूठे पल में ना माने महीनों में
अल्लाह ये अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह ये अदा कैसी है इन हसीनों में

आहें भर भर के इल्तज़ा कर के
आहें भर भर के इल्तज़ा कर के

हमने देखा है ये हैं पत्थर के
हाँ, हमने देखा है ये हैं पत्थर के

जो मनाओ
जो मनाओ ना माने महीनों में
जो मनाओ ना माने महीनों में

अल्लाह यह अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह

चाहे भी हम तो इनको
चाहे भी हम तो इनको
ज़ालिम कहाँ ना जाये
शिकवा है उनसे दिल को
शिकवा है उनसे दिल को , के दिल को
के जिनको देखे से प्यार आये, हाय

अल्लाह यह अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह यह अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह

चमक आँखों में है सितारों की
चमक आँखों में है सितारों की
छाँव छाओं मुखड़े पे है बहारों की
छाँव मुखड़े पे है बहारों की

बस दिल ही
बस दिल ही
बस दिल ही
बस दिल ही नहीं इनके सीनों में
बस दिल ही नहीं इनके सीनों में

अल्लाह , अल्लाह , यह अदा, ये अदा
कैसी है इन हसीनों में, अल्लाह

हो हो , ओ ओ ओ ओ, हो ओ ओ ओ
चाहत में चीज़ क्या है
चाहत में चीज़ क्या है
यह रंग यह जवानी
उन पर लुटाने वाले
हो, उन पर लुटाने वाले
लुटाये बैठे हैं जिंदगानी, हाय

अल्लाह यह अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह यह अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह

चाहे राज़ी वो ना रहे फिर भी
चाहे राज़ी वो ना रहे फिर भी
साड़ी महफ़िल में वो तो है फिर भी
हाँ साड़ी महफ़िल में वो तो है फिर भी

खूबसूरत, हाय
खूबसूरत हज़ारों हसीनों में
खूबसूरत हज़ारों हसीनों में

अल्लाह यह अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह यह अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह

अल्लाह यह अदा कैसी है इन हसीनों में, हसीनों में
रूठे पल में ना माने ना माने महीनों में, महीनों में

अल्लाह, यह अदा कैसी है इन हसीनों में
अल्लाह
.................................
Allah ye ada kaisi hai-Mere humdam mere dost 1968

Friday, 21 January 2011

हिंदी फिल्म में बरसात-हम तुम तुम हम हम तुम -त्याग १९७७

आपको सुनवाते हैं एक बर्मन ब्रांड का लता-किशोर युगल गीत।
ये भी एक बरसाती गीत है मगर बरसात दूसरे अंतरे में होगी।
इस गीत की सबसे बड़ी विशेषता बता दूं-कलाकारों की कुछ ख़ास
खूबियाँ अपने चरम पर हैं-जैसे शर्मिला के गालों के गड्ढे कुछ
ज्यादा स्पष्ट और बड़े नज़र आ रहे हैं। उनकी एक और ख़ास बात
ये है कि अभिनय करते वक़्त उनके होंठ काफी कंपकंपाते हैं
विशेषकर रोने धोने वाले दृश्यों में। इस गीत में वे काफी गदगद
हैं फिर भी होंठ कंपकंपा रहे हैं।

राजेश खन्ना जो गर्दन हिला हिला कर अभिनय किया करते थे
उनकी गर्दन भी कुछ ज्यादा ही घूम रही है इस गीत में। मानना
पड़ेगा गीत के फिल्मांकन करनेवाले के दिमाग को, जिसने दोनों
के USP का बखूबी प्रयोग किया है।

गीत आनंद बक्षी का लिखा हुआ है और इसके संगीतकार हैं
एस डी बर्मन जिनकी ये आखिरी प्रदर्शित फिल्म है । काफी
कर्णप्रिय गीत है ये ।



गीत के बोल:

हम तुम तुम हम हम तुम
एक नदी के हैं दो किनारे
हम तुम तुम हम हम तुम
कैसे मिलेंगे प्रीतम हो प्यारे

हम तुम तुम हम हम तुम
ऐसे मिलेंगे कि देखेंगे सारे

हम तुम तुम हम हम तुम

दूर क्या है पास क्या है
सुन ओ जीवन साथी
आर पार बहती धार
हमको है मिलाती
दूर क्या है पास क्या है
सुन ओ जीवन साथी
आर पार बहती धार
हमको है मिलाती

जीवन है जबसे ना जाने कब से
जीवन है जबसे ना जाने कब से
हम हैं तुम्हारे तुम हो हमारे

हम तुम तुम हम हम तुम
ऐसे मिलेंगे कि देखेंगे सारे

हम तुम तुम हम हम तुम

मान लेते हैं के चलो
तुमने ये कहा है
दिल मगर हमारा जाने
क्यूँ धड़क रहा है
मान लेते हैं के चलो
तुमने ये कहा है
दिल मगर हमारा जाने
क्यूँ धड़क रहा है

भीगे नज़ारे जैसे ये सारे
भीगे नज़ारे जैसे ये सारे
भीग ना जाएँ यूँ नैना हमारे

हम तुम तुम हम हम तुम
ऐसे मिलेंगे कि देखेंगे सारे

हम तुम तुम हम हम तुम

Monday, 6 December 2010

आप से मैंने मेरी जान-ये रात फिर नहीं आएगी १९६६

ओ पी नय्यर के संगीत निर्देशन वाली एक और फिल्म है
जिसके सभी गीत सुने जाते हैं और ये तय करना मुश्किल
होता है कि कौन सा बेहतर है। ओ पी नय्यर के लिए शायद
ये चुनौती भरा विषय रहा होगा एक भूतिया फिल्म के लिए
संगीत तैयार करना। हिंदी सस्पेंस फिल्मों का खाका अक्सर
भूतों के इर्द गिर्द घूमा करता है। इस गीत में नायक नायिका
दोनों स्मार्ट दिख रहे हैं। मैंने सुन्दर शब्द का प्रयोग इसलिए
नहीं किया कि सुन्दरता शब्द शायद स्त्रियों के लिए सुरक्षित
है। पुराने ज़माने में पुरुषों का चेहरा गोरा बनाने वाली क्रीम
नहीं आया करती थी।

गीत फिल्माया गया है विश्वजीत और शर्मिला टेगोर पर।
शर्मिला अपनी चित-परिचित घबराहट मिश्रित मुस्कराहट
के साथ प्रस्तुत हैं। ये एक ऐसा भाव था जो उनका ट्रेड मार्क
भाव कहा जा सकता है।

गीत के बोल लाजवाब हैं और इसको टाइप करने में भी आनंद की
अनुभूति हो रही है। इसको आप कह सकते हैं आदर्श/संपूर्ण युगल
गीत । एक उम्दा किस्म का रोमांटिक गीत सुनकर दिल बाग़ बाग़ हो
उठता है। गीत लिखा है शम्सुल हुदा बिहारी(SH Bihari) ने।




गीत के बोल:

आपसे मैंने मेरी जान मोहब्बत की है
आप चाहें तो मेरी जान भी ले सकती हैं
आप जब हैं तो मेरे पास मेरा सब कुछ है
जान क्या चीज है ईमान भी ले सकती हैं

आप से मैंने मेरी जान

आपको मैंने मोहब्बत का खुदा समझा है
आप कहिये कि मुझे आपने क्या समझा है
ज़िन्दगी क्या है मोहब्बत की मेहरबानी है
दर्द को मैंने हकीकत में दवा समझा है

आपसे मैंने मेरी जान मोहब्बत की है
आप चाहें तो मेरी जान भी ले सकती हैं

आप से मैंने मेरी जान

दिल वही है जो सदा गीत वफ़ा के गाये
प्यार करता हो जिसे प्यार ही करता जाए
सैंकड़ों साल जीने से बेहतर है वो घडी
हाथ में जब हाथ हो जब यार का मौत आ जाए

आपसे मैंने मेरी जान मोहब्बत की है
आप चाहें तो मेरी जान भी ले सकते हैं

आप जब हैं तो मेरे पास मेरा सब कुछ है
जान क्या चीज है ईमान भी ले सकती हैं

आपसे मैंने मेरी जान

Friday, 26 November 2010

हमका धोखा हुई गवा-बेशरम १९७८

आपने पिछली एक पोस्ट में कल्याणजी आनंदजी के
संगीत निर्देशन में लता मंगेशकर का गाया एक गीत सुना
था जो फिल्म कर्मयोगी से लिया गया था। गीत फिल्माया
गया था रीना रॉय पर। अब अभिनेत्री बदल देते हैं जी।

अब आपको लता का एक और गीत सुनवाते हैं जो शर्मिला
टैगोर पर फिल्माया गया है फिल्म बेशरम(१९७८) में।
अमिताभ बच्चन टैगोर टैगोर कि जोड़ी वाली ये फिल्म
ज्यादा नहीं चली बस यही एक गीत रेडुआ पर बज बज के
इस फिल्म कि यादें ताज़ा करता रहा। गौरतलब है कि इस
फिल्म में अमजद खान भी हैं जो शायद फिल्म शोले के
बाद सीधे इसी फिल्म में अमिताभ के साथ दिखाई दिए।

गाने की एक खूबी बस बतलाऊँगा आपको-इसमें नृत्य तो
बढ़िया हो ही रहा है साथ साथ संगीतमय कपडा धुलाई हो
रही है।

आम आदमी की भाषा में बात करें तो- शर्मिला सामने बैठी
बिंदु को चिढाने के लिए इत्ता अच्छा नाच रही है-के-मैं भी
तेरे जैसे ठुमके लगा सकती हूँ।




गीत के बोल:

चोरी चोरी चुपके चुपके
मिलने मैं आती थी
प्यार भरी बतियान मैं,
रोज़ सुनती थी
मगर तुम ना समझे
हमका धोखा हुई गवा
धोखा हुई गवा
मगर तुम ना समझे
हमका धोखा हुई गवा
धोखा हुई गवा

चोरी चोरी चुपके चुपके
मिलने मैं आती थी
प्यार भरी बतियान मैं,
रोज़ सुनती थी
मगर तुम ना समझे
हमका धोखा हुई गवा
धोखा हुई गवा
धोखा हुई गवा
हाय हाय, धोखा हुई गवा

याद करो, याद करो वो बातें
तारों भरी रातें
जब हम मिले थे नदिया किनारे
चंदा ने चुपके चुपके
बदली से छुप के
हंस कर किये थे वो जो इशारे
वो चंदा के इशारे
मैं समझ गई थी सारे

मगर तुम ना समझे
हमका धोखा हुई गवा
धोखा हुई गवा
धोखा हुई गवा
हाय राम धोखा हुई गवा

तुमने हमें ना जाना
ना जाना
तुमने हमें ना जाना
बड़े नादान हो, बड़े नादान हो
हमने तुम्हे पहचाना
बड़े बेईमान हो, बड़े बेईमान हो
संग बैठे हो सौतन के,
यहाँ टुकड़े हो गए मन के

मगर तुम ना समझे
हमका धोखा हुई गवा
धोखा हुई गवा
धोखा हुई गवा
हाय राम, धोखा हुई गवा
 
 
www.lyrics2nd.blogspot.com