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Saturday, 27 August 2011

काहे बोले पपीहा-सावन आया रे १९४९

जिस दिन बारिश होती है, सावन के या बारिश के उल्लेख वाले

गीत और फ़िल्में याद आ जाती हैं। आज कुछ इलाकों में बारिश

हुयी अतः एक फिल्म का नाम याद आया –सावन आया रे। वैसे

महीना तो भादो का चल रहा है मगर हमने ये गीत सावन के

महीने में नहीं सुना इसलिए अब सुन लेते हैं।



बारिश के मौसम में चील-कौवे, कोयल-पपीहे, छोरे-छोरी सभी का

कलरव/शोरगुल आप सुन सकते हैं। मौसम है ही ऐसा जो प्रकृति

के सभी तत्वों को आनंदित करता है। पत्थरों की ज़ुबान होती तो

वे भी बतलाते कि बारिश में भीगने में कितना आनंद आता है।



अमीरबाई कर्नाटकी के गाये गीत को परदे पर फिल्माया गया है

रमला देवी पर जो किशोर साहू से मुखातिब हैं। राममूर्ति चतुर्वेदी

इस गीत के लेखक हैं और इसे संगीतबद्ध किया है उस ज़माने के

नामचीन संगीतकार ‘खेमू जी’ उर्फ खेमचंद प्रकाश ने। गीत में

अगर आपको प्यानो की आवाज़ न आये तो शिकायत न कीजियेगा

क्यूंकि फ़िल्मी साज़ कैसी भी आवाज़ निकल सकते हैं। हो सकता है

प्यानो नायिका के नृत्य के लिए रिमोट कंट्रोल का काम कर रहा हो।











गीत के बोल :



पहने पीली रंग साडी

लाल लागी हो किनारी

मैं तो गवन चली हूँ

मैं तो गवन चली हूँ

काहे बोले पपीहा बोले पपीहा

काहे बोले पपीहा बोले पपीहा

मैं तो गवन चली हूँ

काहे बोले पपीहा बोले पपीहा



नैना मोरे कजरारे

बेली गजरा संवारे

नैना मोरे कजरारे

बेली गजरा संवारे

लाली होंठों की निराली

लाली होंठों की निराली

रस घोले पपीहा, घोले पपीहा

काहे बोले पपीहा, बोले पपीहा



मैं तो गवन चली हूँ

काहे बोले पपीहा बोले पपीहा



माथे की बिंदिया चम् चम् चमके

माथे की बिंदिया चम् चम् चमके

पायल मोरी छम छम छमके

पायल मोरी छम छम छमके

मोरे नैना मतवारे करे छुप के इशारे

करे छुप के इशारे

वहां झूलूंगी

वहां झूलूंगी दुलार के हिंडोले पपीहा

बोले पपीहा

काहे बोले पपीहा बोले पपीहा



मैं तो गवन चली हूँ

काहे बोले पपीहा बोले पपीहा



मन की उमंगें संवारे चली मैं

मन की उमंगें संवारे चली मैं

दुल्हन बने पी के द्वारे चली मैं

दुल्हन बने पी के द्वारे चली मैं

उनमें खो जाऊँगी उनकी हो जाऊँगी

उनमें खो जाऊँगी उनकी हो जाऊँगी

पिया रंग और उमंग भरा डोले पपीहा

डोले पपीहा

काहे बोले पपीहा बोले पपीहा



मैं तो गवन चली हूँ

काहे बोले पपीहा बोले पपीहा

काहे बोले पपीहा बोले पपीहा

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Main to gawan chali-Sawan aaya re 1949

Tuesday, 2 August 2011

बिछड़े हुए परदेसी-बरसात १९४९

परदेसी हिट्स में सबसे पुराना हिट गीत कह सकती है आज की पीढ़ी
इसे। वैसे इससे पहले भी हिंदी फिल्मों में परदेसी गीत(जिनमें परदेसी
शब्द का प्रयोग हुआ है) बने हैं। इस गीत ने सफलता के नए कीर्तिमान
रचे। लता मंगेशकर की आवाज़ है, नर्गिस का अभिनय है, हसरत जयपुरी
के बोल और शंकर जयकिशन का संगीत है।




गीत के बोल:

बिछड़े हुए परदेसी
बिछड़े हुए परदेसी इक बार तो आना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू
बिछड़े हुए परदेसी

वादे भी किए तूने खाई थी क़सम मेरी
वादे भी किए तूने खाई थी क़सम मेरी
वादों पे ही जीती हूँ है आस मुझे तेरी
वादों पे ही जीती हूँ है आस मुझे तेरी
इतनी है अरज मेरी
इतनी है अरज मेरी मुझको न भुलाना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू

बिछड़े हुए परदेसी

दुनिया मुझे छीने है सबने मुझे घेरा है
दुनिया मुझे छीने है सबने मुझे घेरा है
और मेरी ज़ुबाँ पर तो बस नाम ही तेरा है
और मेरी ज़ुबाँ पर तो बस नाम ही तेरा है
दुनिया न हँसे मुझ पर
दुनिया न हँसे मुझ परइतना न रुलाना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू

बिछड़े हुए परदेसी

गैरों का न हो जाना जब अपना बनाया है
गैरों का न हो जाना जब अपना बनाया है
पास आ के न खो जाना जब दिल में बसाया है
पास आ के न खो जाना जब दिल में बसाया है
जो बात कही तूने
जो बात कही तूने वो बात निभाना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू

बिछड़े हुए परदेसी
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Bichhde hue pardesi-Barsaat 1949

Thursday, 30 June 2011

अब मेरा कौन सहारा-बरसात १९४९

नर्गिस और राजकपूर की जोड़ी की ये तीसरी फिल्म थी। इसमें
राज कपूर के साले साहब-प्रेमनाथ भी हैं उनके साथ। बरसात
फिल्म ने फिल्म सिनेमा को नए समीकरण दिखाए तो कुछ
समीकरण बदले भी। बदलते युगों के युग्म पर कुछ घटनाएँ
होती हैं कुछ वैसी ही यह फिल्म है जिसे हम ५० के दशक में
हिंदी सिनेमा में होने वाले बदलाव का बिगुल जैसा कह सकते हैं।
ऐसी उस दौर की कुछ और प्रतिनिधि फ़िल्में भी हैं जिनपर चर्चा
आगे उन फिल्मों के गीतों की प्रस्तुति के समय हम करेंगे ।

फ़िल्म बरसात से तीसरा गीत पेश है। नर्गिस के ऊपर फिल्माया
गया अधिक कर्णप्रिय गीत सन १९४९ से सुनने वालों को आनंद दे
रहा है। एक दर्द भरा गीत जिसका फिल्मांकन भी बढ़िया है आपको
अंत तक बांधे रखेगा । ऐसे गीतों में किसी रंग की आवश्यकता नहीं
होती, ये तो श्वेत श्याम में भी ऐसा कमाल दिखाते हैं कि देखने वाला
भूल जाता है कि वो श्वेत श्याम फिल्म देख रहा है या रंगीन।

हुस्नलाल भगतराम के संगीत की जो ध्वनियाँ हैं वैसी ही साजों की
आवाजें इस गीत में भी हैं मगर थोड़ी तेज़ गति में ।



गीत के बोल:

अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
मेरे बलम
मेरे बलम मुझको ना भुलाना
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा

तुझसे बिछड़ कर दूर हुई
मिलने से मजबूर हुई
तुझसे बिछड़ कर दूर हुई
मिलने से मजबूर हुई
रो-रो के दिल ने तुझको पुकारा

अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा

तुझसे मिलन की आस लगी
नैना रस की प्यास लगी
नैना रस्ते
मुझको है तेरा गम भी न्यारा

अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा

पंख लगे उड़ जाऊं मैं
लेकिन कैसे आऊँ मैं
पंख लगे उड़ जाऊं मैं
लेकिन कैसे आऊँ मैं
बेबस हुयी किस्मत ने मारा

अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
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Ab mera kaun sahara-Barsaat 1949

Saturday, 28 May 2011

ये काफिला है प्यार का-लेख १९४९

फिल्म आशिक के गीत से एक और युगल गीत याद आया आशा भोंसले
और मुकेश का गाया हुआ। आशा है आपने नहीं सुना होगा इसे पहले और
आप इसे एक बार अवश्य ही सुनना चाहेंगे। मोतीलाल और सुरैया अभिनीत
फिल्म लेख से ये गीत लिया गया है। कमर जलालाबादी के लिखे बोलों को
सुरों में पिरोया है संगीतकार कृष्ण दयाल ने। फ़िल्मी गीतों के काफिले
अक्सर प्यार के ही हुआ करते हैं और ये काफिले काफी पुराने हैं। गीतकार
कमर जलालाबादी का लिखा गीत बहुत दिन बाद शामिल किया है ब्लॉग पर।
संगीतकार कृष्ण दयाल के कुछ और गीत हम शामिल करेंगे आगे इस
ब्लॉग पर, टटोलते रहिये हिंदी फिल्म संगीत का खज़ाना ।





गीत के बोल:

ये क़ाफ़िला है प्यार का चलता ही जाएगा
ये क़ाफ़िला है प्यार का चलता ही जाएगा

ये क़ाफ़िला है प्यार का चलता ही जाएगा
जी भर के हँस ले गा ले ये दिन फिर न आएगा
ये क़ाफ़िला है प्यार का चलता ही जाएगा

इस क़ाफ़िले के साथ हँसी भी है अश्क़ भी
इस क़ाफ़िले के साथ हँसी भी है अश्क़ भी
गाएगा कोई और कोई आँसू बहाएगा
इस क़ाफ़िले के साथ हँसी भी है अश्क़ भी
गाएगा कोई और कोई आँसू बहाएगा

ये क़ाफ़िला है प्यार का चलता ही जाएगा

राही गुज़र न जाएं
राही गुज़र न जाएं मुहब्बत के दिन कहीं
आँखें तरस रही हैं कब आँखें मिलाएगा
आँखें तरस रही हैं कब आँखें मिलाएगा
राही गुज़र न जाएं मुहब्बत के दिन कहीं
आँखें तरस रही हैं कब आँखें मिलाएगा

ये क़ाफ़िला है प्यार का चलता ही जाएगा

इस क़ाफ़िले में
इस क़ाफ़िले में वस्ल भी है और जुदाई भी
इस क़ाफ़िले में वस्ल भी है और जुदाई भी
तू जो भी माँग लेगा तेरे पास आएगा
तू जो भी माँग लेगा तेरे पास आएगा
इस क़ाफ़िले में वस्ल भी है और जुदाई भी
तू जो भी माँग लेगा
तू जो भी माँग लेगा तेरे पास आएगा

ये क़ाफ़िला है प्यार का चलता ही जाएगा
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Ye kafila hai pyar ka-Lekh 1949

Friday, 3 December 2010

मेरी आँखों में बस गया कोई रे-बरसात १९४९

पहाड़ी पर ही घूमा जाए थोड़ी देर। फिल्म बरसात में बहुत
सी पहाड़ियां दिखाई देती हैं। अगला गीत जो आपको सुनवाया
जा रहा है वो भी राग पहाड़ी पर आधारित है. इस गीत को भी
लता मंगेशकर ने गाया है। शंकर जयकिशन की बतौर स्वतंत्र
संगीत निर्देशक पहली फिल्म में मधुर गीतों की ओवरलोडिंग
थी। ऐसा लगा मानो बहुत दिन से वे ढेर सारे मधुर गीत सुनाने
के लिए बेताब थे। सारी कसर उन्होंने फिल्म बरसात में निकाल
ली। उन दिनों वैसे भी एक फिल्म में ढेर सारे गीत हुआ करते थे,
इसलिए सब चल गया और ऐसा चला कि आज तक पब्लिक उसके
जादू से मुक्त नहीं हुई है। बरसात ने संगीत-वाणिज्य के क्षेत्र में धन
की बहुत अच्छी बरसात की। गीत का फिल्मांकन आला दर्जे का है
और चकित करने वाला है। गीत में आपको विलंबित और द्रुत दोनों
गत का आनंद मिलेगा।



गीत के बोल:

मेरी आँखों में बस गया कोई रे
मोहे नींद न आये मैं का करूँ

मेरी आँखों में बस गया कोई रे
मोहे नींद न आये मैं का करूँ
मेरी आँखों में बस गया कोई रे
मोहे नींद न आये मैं का करूँ
मेरी आँखों में बस गया कोई

मुस्काये जब रात की बिंदिया, हो ओ ओ
मुस्काये जब रात की बिंदिया
उड़ जाये आँखों से निंदिया
उड़ जाये आँखों से निंदिया
ठंडी ठंडी मैं आहें भरूँ
ठंडी ठंडी मैं आहें भरूँ
हाये मैं का करूँ
हाये मैं का करूँ
हाये मैं का करूँ

मेरी आँखों में बस गया कोई

बात करें जब चाँद सितारे
बात करें जब चाँद सितारे
जल बरसायें नैन हमारे
जल बरसायें नैन हमारे
तेरी याद में रो रो मरूँ
तेरी याद में रो रो मरूँ
हाये मैं का करूँ
हाये मैं का करूँ
हाये मैं का करूँ

मेरी आँखों में बस गया कोई रे
मोहे नींद न आये मैं का करूँ
मेरी आँखों में बस गया कोई
 
 
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