फिल्म अमरदीप से तीसरा गीत पेश है लता मंगेशकर की
आवाज़ में। बोल लिखे हैं रेजेंद्र कृष्ण ने और संगीतकार
हैं सी रामचंद्र। गीत फिल्माया गया है वैजयंतीमाला पर।
गीत विडियो मिक्सिंग के प्रभाव के कारण मुझे बारम्बार
याद आ जाता है। थोड़ा दुखी करने वाला गीत है लेकिन सुनने
में अच्छा लगता है इसलिए इसे सुन लेते हैं कभी कभी।
अब हर गीत में लोजिक, मैजिक और झिक झिक ज़रूरी नहीं
हैं ना जी ? फिर भी आपको सी रामचंद्र और दूसरे संगीतकारों
में फर्क बताये देते हैं-सी रामचंद्र ने गायकों को ज्यादा मौका
दिया बजाये वाद्य यंत्रों के। साजों की बाजीगरी उन्होंने लगभग
हमेशा ही नियंत्रण में रखी। सन ५८ के दूसरे संगीतकारों के बनाये
और लता के गाये गीत सुन लीजिये। फर्क आप खुद ब खुद
समझ जायेंगे। गीत में लता की आवाज़ के अलावा आप बांसुरी की
आवाज़ को ज्यादा स्पष्ट सुन पाएंगे। इसके अलावा रामचंद्र का
पसंदीदा साज़ मैन्डोलिन की झलक भी कहीं कहीं सुनाई देगी।
वायलिन के अनावश्यक शोर में शायद सी रामचंद्र का ज्यादा
विश्वास नहीं रहा ।
गीत के बोल:
दिल की दुनिया बसा के सांवरिया
दिल की दुनिया बसा के सांवरिया
तुम ना जाने कहाँ खो गये, खो गये
साथ रहना था सारी उमरिया
दूर नज़रों से दूर क्यूँ हो गये, हो गये
जाने वाले, जाने वाले पता तेरा मैंने
आती जाती बहारों से पूछा
जाने वाले पता तेरा मैंने
आती जाती बहारों से पूछा
चुप रहे जब ज़मीन के नज़ारे
आसमान के सितारों से पूछा
चुप रहे जब ज़मीन के नज़ारे
आसमान के सितारों से पूछा
सुन के बादल भी मेरी कहानी
सुन के बादल भी मेरी कहानी
बेबसी पर मेरी रो गये, रो गये
दिल की दुनिया बसा के सांवरिया
तुम ना जाने कहाँ खो गये, खो गये
हंस रहा है
हंस रहा है ये ज़ालिम ज़माना
अपनी खुशियों की महफ़िल सजाये
हंस रहा है ये ज़ालिम ज़माना
अपनी खुशियों की महफ़िल सजाये
मैं अकेली मगर रो रही हूँ
तेरी यादों को दिल से लगाये
मैं अकेली मगर रो रही हूँ
तेरी यादों को दिल से लगाये
बहते बहते ये आंसू भी हारे
बहते बहते ये आंसू भी हारे
आ के पलकों पे हैं सो गये, सो गये
दिल की दुनिया बसा के सांवरिया
तुम ना जाने कहाँ खो गये, खो गये
......................................
Dil ki duniya basa ke sanwariya-Amardeep 1958
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Monday, 20 June 2011
तुम रूठ के मत जाना- फागुन १९५८
मधुबाला के नाम से ये गीत मुझे बार बार याद आ जाता है-
मैं सोया अँखियाँ मीचे। इस गीत को सुनते सुनते मुझे भी
नींद आ जाती है। गीत के विडियो ऑडियो दोनों में नशा
सा है। गीत इतनी सौम्यता से गाया और फिल्माया गया है
कि इसकी सादगी से भी नशा सा होने लगता है। एक बार इसे
अवश्य सुनें और देखें।
आज आपको एक और गीत सुनवाते हैं फिल्म फागुन से।
ये भी युगल गीत है आशा और रफ़ी की आवाजों में। कमर
जलालाबादी के सरल बोलों पर धुन तैयार की है संगीतकार
ओ पी नय्यर ने। फागुन फिल्म सन १९५८ की एक बड़ी हिट
फिल्म थी। सफलता में फिल्म के संगीत का भी बहुत बड़ा
योगदान था।
एक कविता पाठ की तरह सा ये गीत विरह गीत के रूप में प्रस्तुत
किया गया है फिल्म में। जैसे फिल्म फागुन के गीत एक दूसरे के
निकट के सम्बन्धी से सुनाई देते हैं वैसे ही इस गीत में रोती हुई
नायिका सुचित्रा सेन की दूर की रिश्तेदार सी दिखाई देती है।
गीत के बोल:
तुम रूठ के मत जाना
तुम रूठ के मत जाना
मुझसे क्या शिकवा दीवाना है दीवाना
मुझसे क्या शिकवा दीवाना है दीवाना
क्यों हो गया बेगाना
क्यों हो गया बेगाना
तेरा-मेरा क्या रिश्ता ये तूने नहीं जाना
तेरा-मेरा क्या रिश्ता ये तूने नहीं जाना
मैं लाख हूँ बेगाना
मैं लाख हूँ बेगाना
फिर ये तड़प कैसी इतना तो बता जाना
फिर ये तड़प कैसी इतना तो बता जाना
फ़ुरसत हो तो आ जाना
फ़ुरसत हो तो आ जाना
अपने ही हाथों से मेरी दुनिया मिटा जाना
अपने ही हाथों से मेरी दुनिया मिटा जाना
तुम रूठ के मत जाना
तुम रूठ के मत जाना
मुझसे क्या शिकवा दीवाना है दीवाना
मुझसे क्या शिकवा दीवाना है दीवाना
.................................
Tum rooth ke mat jaana-Phagun 1958
मैं सोया अँखियाँ मीचे। इस गीत को सुनते सुनते मुझे भी
नींद आ जाती है। गीत के विडियो ऑडियो दोनों में नशा
सा है। गीत इतनी सौम्यता से गाया और फिल्माया गया है
कि इसकी सादगी से भी नशा सा होने लगता है। एक बार इसे
अवश्य सुनें और देखें।
आज आपको एक और गीत सुनवाते हैं फिल्म फागुन से।
ये भी युगल गीत है आशा और रफ़ी की आवाजों में। कमर
जलालाबादी के सरल बोलों पर धुन तैयार की है संगीतकार
ओ पी नय्यर ने। फागुन फिल्म सन १९५८ की एक बड़ी हिट
फिल्म थी। सफलता में फिल्म के संगीत का भी बहुत बड़ा
योगदान था।
एक कविता पाठ की तरह सा ये गीत विरह गीत के रूप में प्रस्तुत
किया गया है फिल्म में। जैसे फिल्म फागुन के गीत एक दूसरे के
निकट के सम्बन्धी से सुनाई देते हैं वैसे ही इस गीत में रोती हुई
नायिका सुचित्रा सेन की दूर की रिश्तेदार सी दिखाई देती है।
गीत के बोल:
तुम रूठ के मत जाना
तुम रूठ के मत जाना
मुझसे क्या शिकवा दीवाना है दीवाना
मुझसे क्या शिकवा दीवाना है दीवाना
क्यों हो गया बेगाना
क्यों हो गया बेगाना
तेरा-मेरा क्या रिश्ता ये तूने नहीं जाना
तेरा-मेरा क्या रिश्ता ये तूने नहीं जाना
मैं लाख हूँ बेगाना
मैं लाख हूँ बेगाना
फिर ये तड़प कैसी इतना तो बता जाना
फिर ये तड़प कैसी इतना तो बता जाना
फ़ुरसत हो तो आ जाना
फ़ुरसत हो तो आ जाना
अपने ही हाथों से मेरी दुनिया मिटा जाना
अपने ही हाथों से मेरी दुनिया मिटा जाना
तुम रूठ के मत जाना
तुम रूठ के मत जाना
मुझसे क्या शिकवा दीवाना है दीवाना
मुझसे क्या शिकवा दीवाना है दीवाना
.................................
Tum rooth ke mat jaana-Phagun 1958
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Thursday, 9 June 2011
दिल की नज़र से-अनाड़ी १९५८
ब्लॉग पर नज़र दौडाई तो फिल्म अनाड़ी का एक भी गीत नहीं
दिखा। आज सड़क पर चलते चलते मुझे ये गीत कहीं सुनाई
दिया। सदाबहार युगल गीत जो फिल्माया गया है नूतन और
राज कपूर पर। राज कपूर की फिल्मों में नायिकाओं के रोल
दूसरे निर्देशकों की फिल्मों की तुलना में ज्यादा लम्बे होते। ये
फिल्म हृषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी थी, हो सकता है
की कहानी की मांग और राज कपूर के आग्रह पर नायिका और
चरित्र भूमिका में ललिता पवार की भूमिकाएं बढ़ा दी गई हों।
वैसे इस मामले में श्वेत श्याम का युग रंगीन युग से कहीं बेहतर
था। नारी की छबि और उसके चरित्र परदे पर ज्यादा सशक्त
हुआ करते थे। ये मैं अपनी देखी हुई फिल्मों और अपने अनुभवों
के आधार पर अनुमान लगा रहा हूँ, हो सकता है आपके विचार
मुझसे अलग हों। जो भी हो, नूतन इस फिल्म में भी अपनी
गरिमामयी उपस्थिति से सबको प्रभावित कर गयीं। ये कुछ
अजीब तथ्य है कि आम जनता को राज कपूर की फिल्मों में
नायक नज़र आता और मुझे उन फिल्मों की नायिकाएं।
राज कपूर की फिल्मों की नायिकाओं ने मुझे ज्यादा प्रभावित
किया, अभिनय के मामले में।
गीत शैलेन्द्र का लिखा हुआ है और शंकर जयकिशन की धुन पर
इसे गाया है मुकेश और लता मंगेशकर ने।
गीत के बोल:
दिल की नज़र से, नज़रों की दिल से
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
धीरे से उठकर, होठों पे आया
ये गीता कैसा, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से, नज़रों की दिल से
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से
क्यों बेखबर, यूँ खिंची सी चली जा रही मैं
ये कौनसे बन्धनों में बंधी जा रही मैं
क्यों बेखबर, यूँ खिंची सी चली जा रही मैं
ये कौनसे बन्धनों में बंधी जा रही मैं
कुछ खो रहा है, कुछ मिल रहा है
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से
हम खो चले, चाँद है या कोई जादूगर है
या, मदभरी, ये तुम्हारी नज़र का असर है
हम खो चले, चाँद है या कोई जादूगर है
या, मदभरी, ये तुम्हारी नज़र का असर है
सब कुछ हमारा, अब है तुम्हारा
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे,
दिल की नज़र से
आकाश में, हो रहें हैं ये कैसे इशारे
क्या, देखकर, आज हैं इतने खुश चाँद-तारे
आकाश में, हो रहें हैं ये कैसे इशारे
क्या, देखकर, आज हैं इतने खुश चाँद-तारे
क्यों तुम पराये, दिल में समाये
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से, नज़रों की दिल से
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
धीरे से उठकर, होठों पे आया
ये गीता कैसा, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से
.....................................
Dil ki nazar se-Anadi 1958
दिखा। आज सड़क पर चलते चलते मुझे ये गीत कहीं सुनाई
दिया। सदाबहार युगल गीत जो फिल्माया गया है नूतन और
राज कपूर पर। राज कपूर की फिल्मों में नायिकाओं के रोल
दूसरे निर्देशकों की फिल्मों की तुलना में ज्यादा लम्बे होते। ये
फिल्म हृषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी थी, हो सकता है
की कहानी की मांग और राज कपूर के आग्रह पर नायिका और
चरित्र भूमिका में ललिता पवार की भूमिकाएं बढ़ा दी गई हों।
वैसे इस मामले में श्वेत श्याम का युग रंगीन युग से कहीं बेहतर
था। नारी की छबि और उसके चरित्र परदे पर ज्यादा सशक्त
हुआ करते थे। ये मैं अपनी देखी हुई फिल्मों और अपने अनुभवों
के आधार पर अनुमान लगा रहा हूँ, हो सकता है आपके विचार
मुझसे अलग हों। जो भी हो, नूतन इस फिल्म में भी अपनी
गरिमामयी उपस्थिति से सबको प्रभावित कर गयीं। ये कुछ
अजीब तथ्य है कि आम जनता को राज कपूर की फिल्मों में
नायक नज़र आता और मुझे उन फिल्मों की नायिकाएं।
राज कपूर की फिल्मों की नायिकाओं ने मुझे ज्यादा प्रभावित
किया, अभिनय के मामले में।
गीत शैलेन्द्र का लिखा हुआ है और शंकर जयकिशन की धुन पर
इसे गाया है मुकेश और लता मंगेशकर ने।
गीत के बोल:
दिल की नज़र से, नज़रों की दिल से
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
धीरे से उठकर, होठों पे आया
ये गीता कैसा, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से, नज़रों की दिल से
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से
क्यों बेखबर, यूँ खिंची सी चली जा रही मैं
ये कौनसे बन्धनों में बंधी जा रही मैं
क्यों बेखबर, यूँ खिंची सी चली जा रही मैं
ये कौनसे बन्धनों में बंधी जा रही मैं
कुछ खो रहा है, कुछ मिल रहा है
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से
हम खो चले, चाँद है या कोई जादूगर है
या, मदभरी, ये तुम्हारी नज़र का असर है
हम खो चले, चाँद है या कोई जादूगर है
या, मदभरी, ये तुम्हारी नज़र का असर है
सब कुछ हमारा, अब है तुम्हारा
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे,
दिल की नज़र से
आकाश में, हो रहें हैं ये कैसे इशारे
क्या, देखकर, आज हैं इतने खुश चाँद-तारे
आकाश में, हो रहें हैं ये कैसे इशारे
क्या, देखकर, आज हैं इतने खुश चाँद-तारे
क्यों तुम पराये, दिल में समाये
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से, नज़रों की दिल से
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
धीरे से उठकर, होठों पे आया
ये गीता कैसा, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से
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Dil ki nazar se-Anadi 1958
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Monday, 27 December 2010
दिल लगा के कदर गई प्यारे- काला पानी १९५८
अभी दो दिन पहले नलिनी जयवंत के दुखद निधन की खबर सुनने में
आई। ५० के दशक की सुपर सितारा रहीं नलिनी जयवंत अपने आशियाने
में शांत ज़िन्दगी व्यतीत कर रही थीं। उनकी मौत पर भी सवाल खड़े हो
चुके हैं। उनकी रहस्मय परिस्थितियों में मौत की शंका व्यक्त की जा रही है।
जीवन के आखरी दिनों में उन्होंने दो जीवों को अपने घर में शरण दी थी वे भी
अब बेसहारा हो गए हैं। कमोबेश यही स्तिथि हर जीव के साथ हो जाती है जब
उस पर से स्नेह का साया उठ जाता है। चकाचौंध की ज़िन्दगी बिताने वाले
कलाकारों का ऐसा अंत मन को व्यथित करता है, शायद नियति को यही मंज़ूर
होता है , जितनी शोहरत उन्हें जीवन के पूर्वार्ध में प्राप्त होती है उतनी ही गुमनामी
में उन्हें उत्तरार्ध में मिलती है । कुछ ही कलाकार खुशकिस्मत होते हैं जिनका नाम
मरते दम तक जनता द्वारा लिया जाता है। नलिनी बॉलीवुड की पहली फैशन क्वीन
के रूप में पहचानी जाती थीं। ईश्वर दिवंगत आत्मा की आत्मा को शांति प्रदान करे।
आइये सुनें एक गीत देव आनंद और नलिनी जयवंत अभिनीत एक पुराणी फिल्म
काला पानी से जो सन १९५८ में आई थी। गीत में स्वर आशा भोंसले का है और धुन
एस डी बर्मन की। ये गीत काफी चर्चित और लोकप्रिय हुआ था।
गीत के बोल:
आ आ आ
ऊ ऊ ऊ
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के
पूछे ना कोई फिरूं बेसहारे
पूछे ना कोई फिरूं बेसहारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के
धिन ता धा ता ता ता धा
बोली बोले दुनिया सारी
मैं राजा तुमसे हारी
क्या करूं मैं नैनामारी
कहो ना क्या करूं मैं नैनामारी
कोई कुछ पुकारे
कोई कुछ पुकारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के
दिल लगा के
दिल लगा के
धिन ता धा ,ता ता ता धा
ना कोई साथी ना कोई बेली
सोऊँ-जागूँ मैं अकेली
सूनी सेजिया सूनी हवेली
देखो ना सूनी सेजिया सूनी हवेली
ये सोचा था मन में बसूँगी तिहारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के
पूछे ना कोई फिरूं बेसहारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
..............................
Dil laga ke kadar gayi pyare-Kala Pani 1958
आई। ५० के दशक की सुपर सितारा रहीं नलिनी जयवंत अपने आशियाने
में शांत ज़िन्दगी व्यतीत कर रही थीं। उनकी मौत पर भी सवाल खड़े हो
चुके हैं। उनकी रहस्मय परिस्थितियों में मौत की शंका व्यक्त की जा रही है।
जीवन के आखरी दिनों में उन्होंने दो जीवों को अपने घर में शरण दी थी वे भी
अब बेसहारा हो गए हैं। कमोबेश यही स्तिथि हर जीव के साथ हो जाती है जब
उस पर से स्नेह का साया उठ जाता है। चकाचौंध की ज़िन्दगी बिताने वाले
कलाकारों का ऐसा अंत मन को व्यथित करता है, शायद नियति को यही मंज़ूर
होता है , जितनी शोहरत उन्हें जीवन के पूर्वार्ध में प्राप्त होती है उतनी ही गुमनामी
में उन्हें उत्तरार्ध में मिलती है । कुछ ही कलाकार खुशकिस्मत होते हैं जिनका नाम
मरते दम तक जनता द्वारा लिया जाता है। नलिनी बॉलीवुड की पहली फैशन क्वीन
के रूप में पहचानी जाती थीं। ईश्वर दिवंगत आत्मा की आत्मा को शांति प्रदान करे।
आइये सुनें एक गीत देव आनंद और नलिनी जयवंत अभिनीत एक पुराणी फिल्म
काला पानी से जो सन १९५८ में आई थी। गीत में स्वर आशा भोंसले का है और धुन
एस डी बर्मन की। ये गीत काफी चर्चित और लोकप्रिय हुआ था।
गीत के बोल:
आ आ आ
ऊ ऊ ऊ
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के
पूछे ना कोई फिरूं बेसहारे
पूछे ना कोई फिरूं बेसहारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के
धिन ता धा ता ता ता धा
बोली बोले दुनिया सारी
मैं राजा तुमसे हारी
क्या करूं मैं नैनामारी
कहो ना क्या करूं मैं नैनामारी
कोई कुछ पुकारे
कोई कुछ पुकारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के
दिल लगा के
दिल लगा के
धिन ता धा ,ता ता ता धा
ना कोई साथी ना कोई बेली
सोऊँ-जागूँ मैं अकेली
सूनी सेजिया सूनी हवेली
देखो ना सूनी सेजिया सूनी हवेली
ये सोचा था मन में बसूँगी तिहारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
दिल लगा के
पूछे ना कोई फिरूं बेसहारे
दिल लगा के क़दर गई प्यारे
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Dil laga ke kadar gayi pyare-Kala Pani 1958
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Nalini Jaywant,
SD Burman
Monday, 6 December 2010
छम छम घुँघरू बोले-फागुन १९५८
लौट के बुद्धू घर को आये इशटाईल में फिर लौट चलें
काले पीले ज़माने की ओर। सुनिए एक झकास गाना
फिल्म फागुन से। ये है आशा की आवाज़ में एकल गीत।
इसे फिल्माया गया है हिंदी सिनेमा की वीनस मधुबाला
पर। कमर जलालाबादी के बोल, ओ पी नय्यर का संगीत
और आशा की आवाज़ साथ में मधुबाला की मुस्कराहट।
भारत भूषण भी दिखते हैं गीत में, उनकी मुस्कराहट
से कोई फर्क नहीं पढता। वस्तुतः वे गीत में नहीं
प्रकट होते तो भी काम चल जाता।
ओ पी नय्यर ऐसे संगीतकार है एस डी बर्मन के अलावा
जिनकी फिल्मों के एक नहीं वरन पूरे गीत सुनती है जनता।
अंदाज़ा लगाइए दोन ने कितनी मेहनत की होगी ये जानने
में कि जनता को कैसे लुभाया जाए। इन दोनों के कुछ
ही एल्बम औसत दर्जे के होंगे जिनमें से जनता एक आध
गीत सुनती होगी। उदाहरण के लिए फागुन फिल्म के सभी
गीत चाव से सुने जाते हैं।
गीत के बोल:
छम छम घुँघरू बोले
मेरी चाल नशीली डोले
मन गाने लगा समझाने लगा
तू आज किसी की हो ले
छम छम घुँघरू बोले
मेरी चाल नशीली डोले
मन गाने लगा समझाने लगा
तू आज किसी की हो ले
छम छम घुँघरू बोले
जब से तू दिल में सामने लगा
ज़िन्दगी में नया मज़ा आने लगा
जब से तू दिल में सामने लगा
ज़िन्दगी में नया मज़ा आने लगा
बदली है चाल खिल गए गाल
आँखों में सवाल बिखरे हैं बाल
छम छम घुँघरू बोले
मेरी चाल नशीली डोले
मन गाने लगा समझाने लगा
तू आज किसी की हो ले
छम छम घुँघरू बोले
याद रहे पिया मेरा प्यार सच्चा जी
फिर कभी आपसे मिलेंगे अच्छा जी
याद रहे पिया मेरा प्यार सच्चा जी
फिर कभी आपसे मिलेंगे अच्छा जी
आपके ग़ुलाम देते हैं सलाम
देख लिया नाच लाओ जी इनाम
छम छम घुँघरू बोले
मेरी चाल नशीली डोले
मन गाने लगा समझाने लगा
तू आज किसी की हो ले
छम छम घुँघरू बोले
...............................
Chham chham ghunghroo bole-Phagun 1958
काले पीले ज़माने की ओर। सुनिए एक झकास गाना
फिल्म फागुन से। ये है आशा की आवाज़ में एकल गीत।
इसे फिल्माया गया है हिंदी सिनेमा की वीनस मधुबाला
पर। कमर जलालाबादी के बोल, ओ पी नय्यर का संगीत
और आशा की आवाज़ साथ में मधुबाला की मुस्कराहट।
भारत भूषण भी दिखते हैं गीत में, उनकी मुस्कराहट
से कोई फर्क नहीं पढता। वस्तुतः वे गीत में नहीं
प्रकट होते तो भी काम चल जाता।
ओ पी नय्यर ऐसे संगीतकार है एस डी बर्मन के अलावा
जिनकी फिल्मों के एक नहीं वरन पूरे गीत सुनती है जनता।
अंदाज़ा लगाइए दोन ने कितनी मेहनत की होगी ये जानने
में कि जनता को कैसे लुभाया जाए। इन दोनों के कुछ
ही एल्बम औसत दर्जे के होंगे जिनमें से जनता एक आध
गीत सुनती होगी। उदाहरण के लिए फागुन फिल्म के सभी
गीत चाव से सुने जाते हैं।
गीत के बोल:
छम छम घुँघरू बोले
मेरी चाल नशीली डोले
मन गाने लगा समझाने लगा
तू आज किसी की हो ले
छम छम घुँघरू बोले
मेरी चाल नशीली डोले
मन गाने लगा समझाने लगा
तू आज किसी की हो ले
छम छम घुँघरू बोले
जब से तू दिल में सामने लगा
ज़िन्दगी में नया मज़ा आने लगा
जब से तू दिल में सामने लगा
ज़िन्दगी में नया मज़ा आने लगा
बदली है चाल खिल गए गाल
आँखों में सवाल बिखरे हैं बाल
छम छम घुँघरू बोले
मेरी चाल नशीली डोले
मन गाने लगा समझाने लगा
तू आज किसी की हो ले
छम छम घुँघरू बोले
याद रहे पिया मेरा प्यार सच्चा जी
फिर कभी आपसे मिलेंगे अच्छा जी
याद रहे पिया मेरा प्यार सच्चा जी
फिर कभी आपसे मिलेंगे अच्छा जी
आपके ग़ुलाम देते हैं सलाम
देख लिया नाच लाओ जी इनाम
छम छम घुँघरू बोले
मेरी चाल नशीली डोले
मन गाने लगा समझाने लगा
तू आज किसी की हो ले
छम छम घुँघरू बोले
...............................
Chham chham ghunghroo bole-Phagun 1958
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