फिल्म समुन्दर से एक शानदार गीत आपको सुनवाया था पहले. अब
सुनते हैं फिल्म से एक कम सुना हुआ गीत. गीत ये भी कर्णप्रिय है
मगर ज्यादा सुना गया केवल मदन मोहन भक्तों द्वारा.
गीत फिल्माया गया है बीना रॉय पर. फिल्म में उनके साथ प्रेमनाथ
नायक हैं जिनकी फिल्म में दोहरी भूमिका है. राजेंद्र कृष्ण ने गीत लिखा
है और इसे गा रही हैं लता मंगेशकर.
गीत के बोल:
ओ मोरे सजना
ढूँढूँ कहाँ तेरा निशाँ
तुझको पुकारे मेरे दिल का जहाँ
आ जा कहीं से आ जा दिल का करार ले के
बैठे हुये हैं कब से तेरा इंतज़ार ले के
आ जा कहीं से आ जा दिल का करार ले के
बैठे हुये हैं कब से तेरा इंतज़ार ले के
आ जा कहीं से आ जा
ये हवायें भीगी भीगी ये हसीं हसीं नज़ारे
मेरे साथ कर रहे हैं तेरा इंतज़ार प्यारे
तेरा इंतज़ार प्यारे
बस एक झलक दिखा दे आँखों में प्यार ले के
बैठे हुये हैं कब से तेरा इंतज़ार ले के
आ जा कहीं से आ जा
कहती है आरजू ये आ जा किसी बहाने
कहती है आरजू ये आ जा किसी बहाने
दिल ही में रह न जाएँ कहीं प्यार के फ़साने
कहीं प्यार के फ़साने
सूने चमन में आ जा फिर से बहार ले के
बैठे हुये हैं कब से तेरा इंतज़ार ले के
आ जा कहीं से आ जा
.........................
O more sajna-Samundar 1957
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Wednesday, 3 August 2011
Monday, 18 July 2011
उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी-नया दौर १९५७
फिल्म नया दौर के साथ कुछ रोचक किस्से जुड़े हुए हैं. सुनते हैं कि
पहले नायिका के रोल में मधुबाला को लिया जाना था. उनकी जगह
वैजयंतीमाला आ गयीं. उसी तरह से ओ पी नय्यर भी मूल योजना का
हिस्सा नहीं थे. उन्हें भी बाद में अनुबंधित किया गया.
ओ पी नय्यर ने जो गीत इस फिल्म के लिए बनाये वो आज भी उतने ही
उत्साह से सुने जाते हैं, विशेषकर एक गीत जिसे शादी ब्याह के अवसर पर
खूब बजाया और गाया जाता है. ये युगल गीत जो इधर प्रस्तुत है आज उसे
भी खूब सुना जाता है. गायक हैं आशा और रफ़ी.
साहिर लुधियानवी ने इस फिल्म के गीत लिखे हैं. साहिर ने बी. आर. चोपड़ा की
कई फिल्मों के लिए गीत लिखे, अधिकतर में संगीत एन. दत्ता या रवि का होता.
ऐसा क्यूँ इसकी कहानी फिर कभी, फिलहाल ये गीत सुनिए.
गीत के बोल:
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
कुँवारियों का दिल मचले
कुँवारियों का दिल मचले
जिन्द मेरिये
जब ऐसे चिकने चेहरे
जब ऐसे चिकने चेहरे
तो कैसे ना नज़र फिसले
तो कैसे ना नज़र फिसले
जिन्द मेरिये
हो, रुत प्यार करन की आई
रुत प्यार करन की आई
हो, रुत प्यार करन की आई
हो, रुत प्यार करन की आई
के बेरियों के बेर पक गये
के बेरियों के बेर पक गये
जिन्द मेरिये
कभी डाल इधर भी फेरा
कभी डाल इधर भी फेरा
के तक-तक नैन थक गये
के तक-तक नैन थक गये
जिन्द मेरिये
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
के जहाँ मेरा यार बसता
के जहाँ मेरा यार बसता
जिन्द मेरिये
पानी लेने के बहाने आजा
पानी लेने के बहाने आजा
के तेरा मेरा इक रस्ता
के तेरा मेरा इक रस्ता
जिन्द मेरिये
हो, तुझे चाँद के बहाने देखूँ
हो, तुझे चाँद के बहाने देखूँ
तुझे चाँद के बहाने देखूँ
तुझे चाँद के बहाने देखूँ
तू छत पर आजा गोरिये
तू छत पर आजा गोरिये
जिन्द मेरिये
अभी छेड़ेंगे गली के सब लड़के
अभी छेड़ेंगे गली के सब लड़के
के चाँद बैरी छिप जाने दे
के चाँद बैरी छिप जाने दे
जिन्द मेरिये
हो, तेरी चाल है नागन जैसी
हो, तेरी चाल है नागन जैसी
तेरी चाल है नागन जैसी
हो, तेरी चाल है नागन जैसी
रे जोगी तुझे ले जायेंगे
रे जोगी तुझे ले जायेंगे
जिन्द मेरिये
जायेँ कहीं भी मगर हम सजना
हो, जायेँ कहीं भी मगर हम सजना
यह दिल तुझे दे जायेंगे
यह दिल तुझे दे जायेंगे
जिन्द मेरिये
...................................
Ude jab jab zulfen teri-Naya daur 1957
पहले नायिका के रोल में मधुबाला को लिया जाना था. उनकी जगह
वैजयंतीमाला आ गयीं. उसी तरह से ओ पी नय्यर भी मूल योजना का
हिस्सा नहीं थे. उन्हें भी बाद में अनुबंधित किया गया.
ओ पी नय्यर ने जो गीत इस फिल्म के लिए बनाये वो आज भी उतने ही
उत्साह से सुने जाते हैं, विशेषकर एक गीत जिसे शादी ब्याह के अवसर पर
खूब बजाया और गाया जाता है. ये युगल गीत जो इधर प्रस्तुत है आज उसे
भी खूब सुना जाता है. गायक हैं आशा और रफ़ी.
साहिर लुधियानवी ने इस फिल्म के गीत लिखे हैं. साहिर ने बी. आर. चोपड़ा की
कई फिल्मों के लिए गीत लिखे, अधिकतर में संगीत एन. दत्ता या रवि का होता.
ऐसा क्यूँ इसकी कहानी फिर कभी, फिलहाल ये गीत सुनिए.
गीत के बोल:
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
कुँवारियों का दिल मचले
कुँवारियों का दिल मचले
जिन्द मेरिये
जब ऐसे चिकने चेहरे
जब ऐसे चिकने चेहरे
तो कैसे ना नज़र फिसले
तो कैसे ना नज़र फिसले
जिन्द मेरिये
हो, रुत प्यार करन की आई
रुत प्यार करन की आई
हो, रुत प्यार करन की आई
हो, रुत प्यार करन की आई
के बेरियों के बेर पक गये
के बेरियों के बेर पक गये
जिन्द मेरिये
कभी डाल इधर भी फेरा
कभी डाल इधर भी फेरा
के तक-तक नैन थक गये
के तक-तक नैन थक गये
जिन्द मेरिये
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
के जहाँ मेरा यार बसता
के जहाँ मेरा यार बसता
जिन्द मेरिये
पानी लेने के बहाने आजा
पानी लेने के बहाने आजा
के तेरा मेरा इक रस्ता
के तेरा मेरा इक रस्ता
जिन्द मेरिये
हो, तुझे चाँद के बहाने देखूँ
हो, तुझे चाँद के बहाने देखूँ
तुझे चाँद के बहाने देखूँ
तुझे चाँद के बहाने देखूँ
तू छत पर आजा गोरिये
तू छत पर आजा गोरिये
जिन्द मेरिये
अभी छेड़ेंगे गली के सब लड़के
अभी छेड़ेंगे गली के सब लड़के
के चाँद बैरी छिप जाने दे
के चाँद बैरी छिप जाने दे
जिन्द मेरिये
हो, तेरी चाल है नागन जैसी
हो, तेरी चाल है नागन जैसी
तेरी चाल है नागन जैसी
हो, तेरी चाल है नागन जैसी
रे जोगी तुझे ले जायेंगे
रे जोगी तुझे ले जायेंगे
जिन्द मेरिये
जायेँ कहीं भी मगर हम सजना
हो, जायेँ कहीं भी मगर हम सजना
यह दिल तुझे दे जायेंगे
यह दिल तुझे दे जायेंगे
जिन्द मेरिये
...................................
Ude jab jab zulfen teri-Naya daur 1957
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Vaijayantimala
Sunday, 17 July 2011
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी-रानी रूपमती १९५७
आइये गायकी का आनंद उठाया जाए। गीत के आनंद और
गायकी के आनंद में फर्क है। गायकी में बोल सुरीले हो सकते
हैं और नहीं भी। अभिनेता अभिनेत्री हो या ना हों, कोई फर्क नहीं
पढता। गायकी का मज़ा या तो किसी शास्त्रीय संगीत के दिग्गज
की आवाज़ में मिलता है या फिर मन्ना डे के गायन में मिलता
है। यहाँ परदे पर कृष्ण राव चोनकर नाम के शास्त्रीय संगीत के
गायक आपको दिखाई देंगे जो हमारे हीरो को गायन सिखा
रहे हैं। इस गीत में आवाज़ कृष्ण राव चोनकर और रफ़ी की है।
ऐसे गायन को हम उप-शास्त्रीय संगीत में शामिल कर सकते हैं
जो ना तो पूरा फ़िल्मी है ना पूर्ण रागदारी का हिस्सा।
गीत के बोल:
आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ
हा आ आ आ आ आ
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
हे ऐ ऐ ऐ ऐसो है बेदर्दी बनवारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
हे ऐ ऐ ऐ मोहे बेदर्दी बनवारी
ऐसो है निडर डरत न काहूँ से लंगर
ऐसो है निडर डरत न काहूँ से लंगर
अपने धिंगा धिंगी करत है डगर
हे मोरे राम, हे मोरे राम, हे मोरे राम
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
इतने दिनन में मोसे कबहूँ न अटक्यो
हा आ आ आ आ आ ,
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
बाट चलत
इतने दिनन में मोसे कबहूँ न
आ आ आ, आ आ आ, आ आ आ आ आ आ आ
हा आ आ आ आ आ
बाट चलत
इतने दिनन में मोसे कबहूँ न अटक्यो
नित प्रति जात गलिन में सुबह शाम
आवत फागुन इतरात जात दे-दे तारी
हे मोरे राम, हे मोरे राम, हे मोरे राम
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नई चुनरी रँग डारी रे
चुनरी रँग डारी रे, चुनरी रँग डारी रे,
चुनरी रँग डारी रे, चुनरी रँग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
ध, प म ग रे सा नी सा, रे ग म प ध प,
ध प, म ग, रे सा, सा ग रे म सा म ग
म ध नी ध म ग, म ध नी सा, आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ
बाट चलत नयी
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
बाट चलत नयी
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
बाट चलत नयी
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
..........................................
Baat chalat nayi chunri-Rani Roopmati 1957
गायकी के आनंद में फर्क है। गायकी में बोल सुरीले हो सकते
हैं और नहीं भी। अभिनेता अभिनेत्री हो या ना हों, कोई फर्क नहीं
पढता। गायकी का मज़ा या तो किसी शास्त्रीय संगीत के दिग्गज
की आवाज़ में मिलता है या फिर मन्ना डे के गायन में मिलता
है। यहाँ परदे पर कृष्ण राव चोनकर नाम के शास्त्रीय संगीत के
गायक आपको दिखाई देंगे जो हमारे हीरो को गायन सिखा
रहे हैं। इस गीत में आवाज़ कृष्ण राव चोनकर और रफ़ी की है।
ऐसे गायन को हम उप-शास्त्रीय संगीत में शामिल कर सकते हैं
जो ना तो पूरा फ़िल्मी है ना पूर्ण रागदारी का हिस्सा।
गीत के बोल:
आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ
हा आ आ आ आ आ
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
हे ऐ ऐ ऐ ऐसो है बेदर्दी बनवारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
हे ऐ ऐ ऐ मोहे बेदर्दी बनवारी
ऐसो है निडर डरत न काहूँ से लंगर
ऐसो है निडर डरत न काहूँ से लंगर
अपने धिंगा धिंगी करत है डगर
हे मोरे राम, हे मोरे राम, हे मोरे राम
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
इतने दिनन में मोसे कबहूँ न अटक्यो
हा आ आ आ आ आ ,
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
बाट चलत
इतने दिनन में मोसे कबहूँ न
आ आ आ, आ आ आ, आ आ आ आ आ आ आ
हा आ आ आ आ आ
बाट चलत
इतने दिनन में मोसे कबहूँ न अटक्यो
नित प्रति जात गलिन में सुबह शाम
आवत फागुन इतरात जात दे-दे तारी
हे मोरे राम, हे मोरे राम, हे मोरे राम
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नई चुनरी रँग डारी रे
चुनरी रँग डारी रे, चुनरी रँग डारी रे,
चुनरी रँग डारी रे, चुनरी रँग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
ध, प म ग रे सा नी सा, रे ग म प ध प,
ध प, म ग, रे सा, सा ग रे म सा म ग
म ध नी ध म ग, म ध नी सा, आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ
बाट चलत नयी
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
बाट चलत नयी
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
बाट चलत नयी
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
..........................................
Baat chalat nayi chunri-Rani Roopmati 1957
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Mohd. Rafi,
Rani Roopmati,
SN Tripathi
Friday, 15 July 2011
जाऊं मैं कहाँ ये ज़मीन -मिस इंडिया १९५७
आपको श्वेत श्याम युग से एक तेज धुन वाला युगल गीत
सुनवाते हैं. आकर्षक ध्वनि संयोजन से गीत शुरू होता है.
स्टेज पर नशेड़ी सा एक युवक लड़खड़ाते हुए गाना चालू करता
है. इतना नहीं लडखडाता है कि माइक ले के स्टेज के नीचे
टपक जाए. ये है फिल्म का नायक जिसने पार्टी में शायद
ज्यादा पी ली है. पी कितनी भी ली हो गाना सुर ताल में
गायेगा. ये हैं फिल्म के नायक प्रदीप कुमार. एक बात बस
समझ नहीं आई कि मन्ना डे वाले अंतरे एक से क्यूँ हैं इस
गीत में. कहीं ये पुराने ज़माने का 'कॉपी कट पेस्ट' एरर तो
नहीं ?
ये एक गीयर बदलने वाला गीत है. तेज संगीत के और हा हा
के बाद कुछ धीमा धीमा सा गीत सुनाई देता है. तेज वाले भाग
में नायिका शीला वाज़ हैं तो धीमे वाले भाग में नर्गिस.
अभिनेत्री नर्गिस के कैरियर की वे फ़िल्में अधिकांश दर्शकों
को याद हैं जिनमें इन्होने राज कपूर के साथ काम किया है.
सिवाए मदर इंडिया (१९५७) और रात और दिन(१९६४) के
इक्का दुक्का फ़िल्में और हैं जो प्रसिद्ध हुई हैं. सन १९५७ में
एक फिल्म आई थी-मिस इंडिया. इसमें उन्होंने एक आधुनिक
समय की नारी की भूमिका अदा की है. समय से आगे की
भूमिकाएं या फ़िल्में अक्सर नहीं चला करती हैं. इस फिल्म
का संगीत भी थोडा सा ही बजा वो भी सचिन देव बर्मन के
भक्तों के घर. गीत लता मंगेशकर और मन्ना डे का गाया हुआ
है. बोल लिखे हैं राजेंद्र कृष्ण ने.
एक बड़े शामियाने से अगर पहनने के कपडे निकाले जाएँ तो कुछ
कुछ वैसे ही बनेंगे जैसे की इस गीत में बालाएं पहने हुए हैं.
गीत के बोल:
हे हे हे हे हे हे, हे हे हे हे हे हे
हो, हा हा हा
हे हे हे हे हे, हो हो
हा हा, हो हो, हा हा हा हा हा
जाऊं मैं कहाँ,
हाय, जाऊं मैं कहाँ
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ,
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ
हो हो हो हो हो हो हो हो
हो हो हा हा हा हा हा
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
बाँहों में आ के सो जा,
सो जा, सो जा
जाऊं मैं कहाँ,
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ
रात गुज़रती जाए
आस नज़र न आये
रात गुज़रती जाए
आस नज़र न आये
रो न सकूं अब
रोते रोते आंसू भी शरमाये
हो हो हो, जाऊं मैं कहाँ
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ
हो हो हो हो हा हा हा हा
हो हो हा हा हो हो हो
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
बाँहों में आ के सो जा,
सो जा, सो जा
..............................
Jaoon main kahan-Miss India 1957
सुनवाते हैं. आकर्षक ध्वनि संयोजन से गीत शुरू होता है.
स्टेज पर नशेड़ी सा एक युवक लड़खड़ाते हुए गाना चालू करता
है. इतना नहीं लडखडाता है कि माइक ले के स्टेज के नीचे
टपक जाए. ये है फिल्म का नायक जिसने पार्टी में शायद
ज्यादा पी ली है. पी कितनी भी ली हो गाना सुर ताल में
गायेगा. ये हैं फिल्म के नायक प्रदीप कुमार. एक बात बस
समझ नहीं आई कि मन्ना डे वाले अंतरे एक से क्यूँ हैं इस
गीत में. कहीं ये पुराने ज़माने का 'कॉपी कट पेस्ट' एरर तो
नहीं ?
ये एक गीयर बदलने वाला गीत है. तेज संगीत के और हा हा
के बाद कुछ धीमा धीमा सा गीत सुनाई देता है. तेज वाले भाग
में नायिका शीला वाज़ हैं तो धीमे वाले भाग में नर्गिस.
अभिनेत्री नर्गिस के कैरियर की वे फ़िल्में अधिकांश दर्शकों
को याद हैं जिनमें इन्होने राज कपूर के साथ काम किया है.
सिवाए मदर इंडिया (१९५७) और रात और दिन(१९६४) के
इक्का दुक्का फ़िल्में और हैं जो प्रसिद्ध हुई हैं. सन १९५७ में
एक फिल्म आई थी-मिस इंडिया. इसमें उन्होंने एक आधुनिक
समय की नारी की भूमिका अदा की है. समय से आगे की
भूमिकाएं या फ़िल्में अक्सर नहीं चला करती हैं. इस फिल्म
का संगीत भी थोडा सा ही बजा वो भी सचिन देव बर्मन के
भक्तों के घर. गीत लता मंगेशकर और मन्ना डे का गाया हुआ
है. बोल लिखे हैं राजेंद्र कृष्ण ने.
एक बड़े शामियाने से अगर पहनने के कपडे निकाले जाएँ तो कुछ
कुछ वैसे ही बनेंगे जैसे की इस गीत में बालाएं पहने हुए हैं.
गीत के बोल:
हे हे हे हे हे हे, हे हे हे हे हे हे
हो, हा हा हा
हे हे हे हे हे, हो हो
हा हा, हो हो, हा हा हा हा हा
जाऊं मैं कहाँ,
हाय, जाऊं मैं कहाँ
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ,
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ
हो हो हो हो हो हो हो हो
हो हो हा हा हा हा हा
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
बाँहों में आ के सो जा,
सो जा, सो जा
जाऊं मैं कहाँ,
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ
रात गुज़रती जाए
आस नज़र न आये
रात गुज़रती जाए
आस नज़र न आये
रो न सकूं अब
रोते रोते आंसू भी शरमाये
हो हो हो, जाऊं मैं कहाँ
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ
हो हो हो हो हा हा हा हा
हो हो हा हा हो हो हो
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
बाँहों में आ के सो जा,
सो जा, सो जा
..............................
Jaoon main kahan-Miss India 1957
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Friday, 24 June 2011
जा रे जा रे ओ माखन चोर-चम्पाकली १९५७
सन १९५७ में भारत भूषण की जो उल्लेखनीय फ़िल्में आयीं
वे थीं-चम्पाकली, गेटवे ऑफ़ इंडिया और रानी रूपमती ।
तीनों फिल्मों में ही कर्णप्रिय संगीत है। इन फिल्मों में से एक
ना एक गीत कालजयी निश्चित ही हुआ।
राजेंद्र कृष्ण ने माखन चोर नन्द किशोर के उल्लेख वाले
कुछ बढ़िया गीत लिखे हैं। फिल्म चम्पाकली के इस गीत को
आपने शायद ही सुना हो। हेमंत कुमार के संगीत निर्देशन
वाली फिल्म चम्पाकली के गीत सॉफ्ट किस्म के हैं और सुनने
में कानों में हलकी सी गुदगुदी करते हैं।
गीत के बोल:
जा रे जा रे ओ माखन चोर
चलेगी ना ये चोरी तेरी जोरा-जोरी
ओ छलिया, जा रे ओ माखन चोर
चलेगी ना ये चोरी तेरी जोरा-जोरी
ओ छलिया, जा रे ओ माखन चोर
जा जा काहे मचावत शोर
कभी ना छोड़ूँ तोरी ये बैयाँ गोरी-गोरी
सजनिया काहे मचावत शोर
ऐसी ठिठोली करो हमसे ना रसिया
कौन हो तुम हमारे
ऐसी ठिठोली करो हमसे ना रसिया
कौन हो तुम हमारे
होता है गोरी जो चकोरी का चंदा
हम वही हैं तुम्हारे
देखो जी देखो मेरा भोला सा मनवा
समझे नहीं इशारे ओ छलिया
जा रे ओ माखन चोर
चलेगी ना ये चोरी तेरी जोरा-जोरी
ओ छलिया, जा रे ओ माखन चोर
मैं बन्सी तू तान मेरा तेरा साथ पुराना
ओ मैं बन्सी तू तान मेरा तेरा साथ पुराना
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
रहने दो ये बात चले ना कोई बहाना
मानो ना मानो तुम्हें दिल की क़सम है अपना हमें बनाना
सजनिया काहे मचावत शोर
कभी ना छोड़ूँ तोरी ये बैयाँ गोरी-गोरी
सजनिया काहे मचावत शोर
हटो जी हटो मेरी छोडो डगरिया यूँ हमें ना सताओ
हटो जी हटो मेरी छोडो डगरिया यूँ हमें ना सताओ
जाने से पहले मेरे दिल की नगरिया मुस्करा के बसाओ
जानूँ ना जानूँ कैसा दिल है तुम्हारा
पहले दिल तो दिखाओ रे छलिया
जा रे ओ माखन चोर
चलेगी ना ये चोरी तेरी जोरा-जोरी
ओ छलिया, जा रे ओ माखन चोर
....................................
Ja re o makhanchor-Champakali 1957
वे थीं-चम्पाकली, गेटवे ऑफ़ इंडिया और रानी रूपमती ।
तीनों फिल्मों में ही कर्णप्रिय संगीत है। इन फिल्मों में से एक
ना एक गीत कालजयी निश्चित ही हुआ।
राजेंद्र कृष्ण ने माखन चोर नन्द किशोर के उल्लेख वाले
कुछ बढ़िया गीत लिखे हैं। फिल्म चम्पाकली के इस गीत को
आपने शायद ही सुना हो। हेमंत कुमार के संगीत निर्देशन
वाली फिल्म चम्पाकली के गीत सॉफ्ट किस्म के हैं और सुनने
में कानों में हलकी सी गुदगुदी करते हैं।
गीत के बोल:
जा रे जा रे ओ माखन चोर
चलेगी ना ये चोरी तेरी जोरा-जोरी
ओ छलिया, जा रे ओ माखन चोर
चलेगी ना ये चोरी तेरी जोरा-जोरी
ओ छलिया, जा रे ओ माखन चोर
जा जा काहे मचावत शोर
कभी ना छोड़ूँ तोरी ये बैयाँ गोरी-गोरी
सजनिया काहे मचावत शोर
ऐसी ठिठोली करो हमसे ना रसिया
कौन हो तुम हमारे
ऐसी ठिठोली करो हमसे ना रसिया
कौन हो तुम हमारे
होता है गोरी जो चकोरी का चंदा
हम वही हैं तुम्हारे
देखो जी देखो मेरा भोला सा मनवा
समझे नहीं इशारे ओ छलिया
जा रे ओ माखन चोर
चलेगी ना ये चोरी तेरी जोरा-जोरी
ओ छलिया, जा रे ओ माखन चोर
मैं बन्सी तू तान मेरा तेरा साथ पुराना
ओ मैं बन्सी तू तान मेरा तेरा साथ पुराना
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
रहने दो ये बात चले ना कोई बहाना
मानो ना मानो तुम्हें दिल की क़सम है अपना हमें बनाना
सजनिया काहे मचावत शोर
कभी ना छोड़ूँ तोरी ये बैयाँ गोरी-गोरी
सजनिया काहे मचावत शोर
हटो जी हटो मेरी छोडो डगरिया यूँ हमें ना सताओ
हटो जी हटो मेरी छोडो डगरिया यूँ हमें ना सताओ
जाने से पहले मेरे दिल की नगरिया मुस्करा के बसाओ
जानूँ ना जानूँ कैसा दिल है तुम्हारा
पहले दिल तो दिखाओ रे छलिया
जा रे ओ माखन चोर
चलेगी ना ये चोरी तेरी जोरा-जोरी
ओ छलिया, जा रे ओ माखन चोर
....................................
Ja re o makhanchor-Champakali 1957
Tuesday, 31 May 2011
खुली हवा में डोले रे-चम्पाकली १९५७
फिल्म चम्पाकली में संगीतकार हेमंत कुमार ने अच्छा संगीत दिया
राजेंद्र कृष्ण के मधुर गीतों को लता और रफ़ी ने बड़ी तन्मयता के
साथ गाया भी। सॉफ्ट किस्म के गीत हैं फिल्म के। सॉफ्ट गीतों कि
विशेषता ये होती है उन्हें आप जब चाहे बिना ना नुकुर, मूड हो
ना हो सुन कर जी बहला सकते हैं। आपको पहले दो गीत सुनवाये
हैं-छुप गया कोई रे और ओ गवालन क्यूँ मेरा मन। गीत में नायिका
कुछ विशेष व्यायाम कर रही है और वो क्या है मुझे समझ नहींते हैं।
पढता। कृपया बतलाएं धागे में पत्थर बांध के ऐसा क्या किया जाता
है जिससे पक्षी बेचारे नीचे गिरने लगते हैं।
गीत के बोल:
खुली हवा में डोले रे आज मेरा मन बोले रे
दिल की बहार ले के आएगा साँवरिया
खुली हवा में डोले रे आज मेरा मन बोले रे
दिल की बहार ले के आएगा साँवरिया
बदरिया जो छाई संदेसा ऐसा लाई
कि सुन-सुन मैं तो शरमाई घबराई
बदरिया जो छाई संदेसा ऐसा लाई
कि सुन-सुन मैं तो शरमाई घबराई
किसी ने चोरी-चोरी मेरे घूँघट के पट खोले रे
लाज की मारी मैं तो हुई रे बावरिया
खुली हवा में डोले रे आज मेरा मन बोले रे
दिल की बहार ले के आएगा साँवरिया
मैं अँखियाँ झुकाऊँ या मुखड़ा छुपाऊँ
समझ नहीं आए हाय कित जाऊँ
मैं अँखियाँ झुकाऊँ या मुखड़ा छुपाऊँ
समझ नहीं आए हाय कित जाऊँ
आज किसी ने मुझे पुकारा प्यार से हौले-हौले रे
झुक झुक जाये हाय मेरी नजरिया
खुली हवा में डोले रे आज मेरा मन बोले रे
दिल की बहार ले के आएगा साँवरिया
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Khuli hawa mein dole re-Champakali 1957
राजेंद्र कृष्ण के मधुर गीतों को लता और रफ़ी ने बड़ी तन्मयता के
साथ गाया भी। सॉफ्ट किस्म के गीत हैं फिल्म के। सॉफ्ट गीतों कि
विशेषता ये होती है उन्हें आप जब चाहे बिना ना नुकुर, मूड हो
ना हो सुन कर जी बहला सकते हैं। आपको पहले दो गीत सुनवाये
हैं-छुप गया कोई रे और ओ गवालन क्यूँ मेरा मन। गीत में नायिका
कुछ विशेष व्यायाम कर रही है और वो क्या है मुझे समझ नहींते हैं।
पढता। कृपया बतलाएं धागे में पत्थर बांध के ऐसा क्या किया जाता
है जिससे पक्षी बेचारे नीचे गिरने लगते हैं।
गीत के बोल:
खुली हवा में डोले रे आज मेरा मन बोले रे
दिल की बहार ले के आएगा साँवरिया
खुली हवा में डोले रे आज मेरा मन बोले रे
दिल की बहार ले के आएगा साँवरिया
बदरिया जो छाई संदेसा ऐसा लाई
कि सुन-सुन मैं तो शरमाई घबराई
बदरिया जो छाई संदेसा ऐसा लाई
कि सुन-सुन मैं तो शरमाई घबराई
किसी ने चोरी-चोरी मेरे घूँघट के पट खोले रे
लाज की मारी मैं तो हुई रे बावरिया
खुली हवा में डोले रे आज मेरा मन बोले रे
दिल की बहार ले के आएगा साँवरिया
मैं अँखियाँ झुकाऊँ या मुखड़ा छुपाऊँ
समझ नहीं आए हाय कित जाऊँ
मैं अँखियाँ झुकाऊँ या मुखड़ा छुपाऊँ
समझ नहीं आए हाय कित जाऊँ
आज किसी ने मुझे पुकारा प्यार से हौले-हौले रे
झुक झुक जाये हाय मेरी नजरिया
खुली हवा में डोले रे आज मेरा मन बोले रे
दिल की बहार ले के आएगा साँवरिया
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Khuli hawa mein dole re-Champakali 1957
बाकड़ बम बम बम-कठपुतली १९५७
अमिया चक्रवर्ती के सिनेमा का मैं बहुत बड़ा फैन हूँ। आइये उनकी
फिल्म से एक गीत सुना जाये। फिल्म का नाम है कठपुतली जो
सन १९५७ की फिल्म है। वैजयंतीमाला एक कुशल नृत्यांगना के
साथ साथ एक बढ़िया अदाकारा भी हैं। आज उन्हीं पर फिल्माया
गया और लता का गाया गीत सुनवा रहे हैं आपको। इसका संगीत
शंकर जयकिशन का तैयार किया हुआ है । गीत की ध्वनि बच्चों
को भी आकर्षित करती है।
गीत के बोल:
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
बाकड़ बम बम बम
आसमान पे देखो आज सात रंग छाये
अपने दिल में आग ले के बादल काले आये
आसमान पे देखो आज सात रंग छाये
अपने दिल में आग ले के बादल काले आये
बादल गरजे मेघ बरसे चहूँ ओर सावन लहराए
ओ सावन लहराए
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
बाकड़ बम बम बम
मच रहा है डाल डाल पंछियों का शोर
आ गई है प्यार ले के अब सुहानी भोर
मच रहा है डाल डाल पंछियों का शोर
आ गई है प्यार ले के अब सुहानी भोर
भंवर घूमे फूल चूमे बांधे प्रीत की डोर
ओ प्रीत की डोर
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
बाकड़ बम बम बम
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Bakad bam bam bam-Kathputli 1957
फिल्म से एक गीत सुना जाये। फिल्म का नाम है कठपुतली जो
सन १९५७ की फिल्म है। वैजयंतीमाला एक कुशल नृत्यांगना के
साथ साथ एक बढ़िया अदाकारा भी हैं। आज उन्हीं पर फिल्माया
गया और लता का गाया गीत सुनवा रहे हैं आपको। इसका संगीत
शंकर जयकिशन का तैयार किया हुआ है । गीत की ध्वनि बच्चों
को भी आकर्षित करती है।
गीत के बोल:
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
बाकड़ बम बम बम
आसमान पे देखो आज सात रंग छाये
अपने दिल में आग ले के बादल काले आये
आसमान पे देखो आज सात रंग छाये
अपने दिल में आग ले के बादल काले आये
बादल गरजे मेघ बरसे चहूँ ओर सावन लहराए
ओ सावन लहराए
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
बाकड़ बम बम बम
मच रहा है डाल डाल पंछियों का शोर
आ गई है प्यार ले के अब सुहानी भोर
मच रहा है डाल डाल पंछियों का शोर
आ गई है प्यार ले के अब सुहानी भोर
भंवर घूमे फूल चूमे बांधे प्रीत की डोर
ओ प्रीत की डोर
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
ओ बाकड़ बम बम बम बम बाजे डमरू
बाजे डमरू
नाच रे मयूर झनझना के घुँघरू
बाकड़ बम बम बम
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Bakad bam bam bam-Kathputli 1957
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Tuesday, 11 January 2011
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे-गेटवे ऑफ़ इंडिया १९५७
आपने कफ़ सिरप ज़रूर एक ना एक बार पिया होगा आइये आज
पियें सौम्यता का सिरप। गीत है फिल्म 'गेटवे ऑफ़ इंडिया' से।
इसे दो सौम्य कलाकारों पर फिल्माया गया है-भारत भूषण और
मधुबाला। इस गीत को उतने ही आहिस्ता से गाया भी गया है
जितनी आहिस्ता से ये दोनों कलाकार अपने संवाद बोलते हैं या
अदाएं दिखाते हैं । सितार की आवाज़ के साथ गायकों की आवाज़
का मेल 'सोने में सुहागा' जैसा है। अभी इसी उपमा से काम चलाइए,
दूसरी सूझ नहीं रही है।
गीत के बोल:
रफ़ी : दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
आशा :हम ज़माने से दूर जा बैठे
आशा : दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
हम ज़माने से दूर जा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
रफ़ी : भूल की उनका हमनशीं हो के
रोयेंगे दिल को उम्र भर खो के
भूल की उनका हमनशीं हो के
रोयेंगे दिल को उम्र भर खो के
हाय! क्या चीज़ थी गँवा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
आशा : दिल को एक दिन ज़रुर जाना था
वही पहुँचा जहां ठिकाना था
दिल को एक दिन ज़रुर जाना था
वही पहुँचा जहां ठिकाना था
दिल वही दिल जो दिल में जा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
रफ़ी : एक दिल ही था ग़मगुसार अपना
मेहरबां खास राज़दार अपना
एक दिल ही था ग़मगुसार अपना
मेहरबां खास राज़दार अपना
गैर का क्यों उसे बना बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
आशा : गैर भी तो कोई हसीं होगा
दिल यूँ ही दे दिया नहीं होगा
गैर भी तो कोई हसीं होगा
दिल यूँ ही दे दिया नहीं होगा
देख कर कुछ तो चोट खा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
हम जमाने से दूर जा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
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Do ghadi wo jo paas aa baithe-Gateway of India 1957
पियें सौम्यता का सिरप। गीत है फिल्म 'गेटवे ऑफ़ इंडिया' से।
इसे दो सौम्य कलाकारों पर फिल्माया गया है-भारत भूषण और
मधुबाला। इस गीत को उतने ही आहिस्ता से गाया भी गया है
जितनी आहिस्ता से ये दोनों कलाकार अपने संवाद बोलते हैं या
अदाएं दिखाते हैं । सितार की आवाज़ के साथ गायकों की आवाज़
का मेल 'सोने में सुहागा' जैसा है। अभी इसी उपमा से काम चलाइए,
दूसरी सूझ नहीं रही है।
गीत के बोल:
रफ़ी : दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
आशा :हम ज़माने से दूर जा बैठे
आशा : दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
हम ज़माने से दूर जा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
रफ़ी : भूल की उनका हमनशीं हो के
रोयेंगे दिल को उम्र भर खो के
भूल की उनका हमनशीं हो के
रोयेंगे दिल को उम्र भर खो के
हाय! क्या चीज़ थी गँवा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
आशा : दिल को एक दिन ज़रुर जाना था
वही पहुँचा जहां ठिकाना था
दिल को एक दिन ज़रुर जाना था
वही पहुँचा जहां ठिकाना था
दिल वही दिल जो दिल में जा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
रफ़ी : एक दिल ही था ग़मगुसार अपना
मेहरबां खास राज़दार अपना
एक दिल ही था ग़मगुसार अपना
मेहरबां खास राज़दार अपना
गैर का क्यों उसे बना बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
आशा : गैर भी तो कोई हसीं होगा
दिल यूँ ही दे दिया नहीं होगा
गैर भी तो कोई हसीं होगा
दिल यूँ ही दे दिया नहीं होगा
देख कर कुछ तो चोट खा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
हम जमाने से दूर जा बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
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Do ghadi wo jo paas aa baithe-Gateway of India 1957
Saturday, 1 January 2011
नया नया चाँद है-खुदा का बंदा १९५७
नया साल, नई उमंगें, नई उमंगें, नई मंजिलें और नये रेज़ोल्यूशन ।
नव वर्ष की शुभकामनाओं के साथ ही ये गीत प्रस्तुत है पुरानी फिल्म
खुदा का बंदा से। संगीत एस एन त्रिपाठी का है और इसे गा रहे हैं
गीता दत्त और मन्ना डे।
नए साल में आपको प्याज़ और टमाटर खूब खाने को मिलें इसी दुआ
के साथ.......
गीत के बोल:
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया प्यार है जी
नया नया साथ है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नई नई रात है
कितने भी रंग चाहे बदले ज़माना
हो ओ ओ ओ ओ ओ
कितने भी रंग चाहे बदले ज़माना
दिल में जो आई हो तो
दिल पे ना जाना
दिल पे ना जाना
जी दिल पे ना जाना
मिल के बिछड़ जाना
बड़ी बुरी बात है
मिल के बिछड़ जाना
बड़ी बुरी बात है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया प्यार है जी
नया नया साथ है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नई नई रात है
नज़रों में आज मेरी दुनिया हसीं है
हो ओ ओ ओ
नज़रों में आज मेरी दुनिया हसीं है
उल्फत की राह देखो
कितनी रंगीन है
कितनी रंगीन है
जी,कितनी रंगीन है
घर में हमारे आई
ख़ुशी की बारात है
घर में हमारे आई
ख़ुशी की बारात है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया प्यार है जी
नया नया साथ है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नई नई रात है
तुम जो मिले तो
मिला ख़ुशी का खज़ाना
हो ओ ओ ओ ओ ओ
तुम जो मिले तो मिला
ख़ुशी का खज़ाना
तुम जो हो पास मेरे
समा है सुहाना
समा है सुहाना
जी समा है सुहाना
प्यार फले फूले यही
दुआ दिन रात है
प्यार फले फूले यही
दुआ दिन रात है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया प्यार है जी
नया नया साथ है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नई नई रात है
नव वर्ष की शुभकामनाओं के साथ ही ये गीत प्रस्तुत है पुरानी फिल्म
खुदा का बंदा से। संगीत एस एन त्रिपाठी का है और इसे गा रहे हैं
गीता दत्त और मन्ना डे।
नए साल में आपको प्याज़ और टमाटर खूब खाने को मिलें इसी दुआ
के साथ.......
गीत के बोल:
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया प्यार है जी
नया नया साथ है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नई नई रात है
कितने भी रंग चाहे बदले ज़माना
हो ओ ओ ओ ओ ओ
कितने भी रंग चाहे बदले ज़माना
दिल में जो आई हो तो
दिल पे ना जाना
दिल पे ना जाना
जी दिल पे ना जाना
मिल के बिछड़ जाना
बड़ी बुरी बात है
मिल के बिछड़ जाना
बड़ी बुरी बात है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया प्यार है जी
नया नया साथ है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नई नई रात है
नज़रों में आज मेरी दुनिया हसीं है
हो ओ ओ ओ
नज़रों में आज मेरी दुनिया हसीं है
उल्फत की राह देखो
कितनी रंगीन है
कितनी रंगीन है
जी,कितनी रंगीन है
घर में हमारे आई
ख़ुशी की बारात है
घर में हमारे आई
ख़ुशी की बारात है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया प्यार है जी
नया नया साथ है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नई नई रात है
तुम जो मिले तो
मिला ख़ुशी का खज़ाना
हो ओ ओ ओ ओ ओ
तुम जो मिले तो मिला
ख़ुशी का खज़ाना
तुम जो हो पास मेरे
समा है सुहाना
समा है सुहाना
जी समा है सुहाना
प्यार फले फूले यही
दुआ दिन रात है
प्यार फले फूले यही
दुआ दिन रात है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया प्यार है जी
नया नया साथ है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नई नई रात है
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1957,
Geeta Dutt,
Khuda ka banda,
Manna Dey,
SN Tripathi
Friday, 17 December 2010
सपने में सजन से दो बातें-गेटवे ऑफ़ इंडिया १९५७
हिंदी फ़िल्में सभी नामों से बना करती हैं। प्याज़, आलू, मिर्च का
नाम शायद अभी तक फिल्मकारों के दिमाग में नहीं आया है।
वो शायद किसी पत्रकार के दिमाग में आये जो फिल्म बनाने की
तमन्ना रखता हो। गेट के नाम से दो फ़िल्में मेरे ध्यान में
आती हैं, 'गेटवे ऑफ़ इंडिया' और 'चाइना गेट'। बाकी के गेट
अभी शायद बाकी हैं । इस फिल्म से एक गीत सुनिए जो कि
राजेंद्र कृष्ण का लिखा हुआ है और संगीत मदन मोहन ने तैयार
किया है। लता मंगेशकर के गाये इस गीत को सुने काफी दिन
हो गए थे सोचा आपको भी सुनवा दिया जाए । ब्लॉग की सूची
में भी देखा तो यह गीत मौजूद नहीं था। इस गीत का विडियो
यू ट्यूब पर उपलब्ध नहीं है, ऑडियो सुन कर काम चला लें।
गीत के बोल:
सपने में सजन से दो बातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
इक रात मिलन की आई थी
और उस के बद जुदाई थी
ग़म और ख़ुशी की दो रातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
इक सावन रुत लाई झूले
दूजी में सजन हम को भूले
देखी हैं यही दो बरसातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
इक रोज़ तुम्हें दिल दे बेठे
फिर रोग बिरहा का ले बेठे
ये प्यार की हैं दो सौग़ातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
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Sapne mein sajan se do batein-Gateway of India 1957
नाम शायद अभी तक फिल्मकारों के दिमाग में नहीं आया है।
वो शायद किसी पत्रकार के दिमाग में आये जो फिल्म बनाने की
तमन्ना रखता हो। गेट के नाम से दो फ़िल्में मेरे ध्यान में
आती हैं, 'गेटवे ऑफ़ इंडिया' और 'चाइना गेट'। बाकी के गेट
अभी शायद बाकी हैं । इस फिल्म से एक गीत सुनिए जो कि
राजेंद्र कृष्ण का लिखा हुआ है और संगीत मदन मोहन ने तैयार
किया है। लता मंगेशकर के गाये इस गीत को सुने काफी दिन
हो गए थे सोचा आपको भी सुनवा दिया जाए । ब्लॉग की सूची
में भी देखा तो यह गीत मौजूद नहीं था। इस गीत का विडियो
यू ट्यूब पर उपलब्ध नहीं है, ऑडियो सुन कर काम चला लें।
गीत के बोल:
सपने में सजन से दो बातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
इक रात मिलन की आई थी
और उस के बद जुदाई थी
ग़म और ख़ुशी की दो रातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
इक सावन रुत लाई झूले
दूजी में सजन हम को भूले
देखी हैं यही दो बरसातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
इक रोज़ तुम्हें दिल दे बेठे
फिर रोग बिरहा का ले बेठे
ये प्यार की हैं दो सौग़ातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
इक याद रही इक भूल गए
सपने में सजन से दो बातें
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Sapne mein sajan se do batein-Gateway of India 1957
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