क्या दिन थे साहब वे भी. सन १९५५ में भी कई नायब गीत बने.
एक फिल्म आई जिसके सभी गाने बड़े चाव से सुने गए. फिल्म में
निम्मी और दिलीप कुमार की जोड़ी है. फिल्म में संगीत नौशाद का
है. नाम है फिल्म का-उड़न खटोला. इस फिल्म का नाव वाला गीत
सुनाते हैं आपको. इसके 'हैया हो हैया रे हैया हैया हो' ने वो गूँज की
जो सभी जगह सुनाई पढ़ी. कितने आदर के साथ सैयां का नाम लिया
जा रहा है-'मोरे सैयां जी' ! नाव चालिका हैं निम्मी और सवार हैं
दिलीप कुमार.
फिल्म में ढेर सारे गीत हैं और सभी तकरीबन सुने जाते हैं पुराने संगीत
प्रेमियों द्वारा. गीत में अँगरेज़ सी और अभिनेत्री मुमताज़ की दूर की रिश्तेदार
सी दिखने वाली बाला का नाम है-सूर्य कुमारी.
गीत में गौर करने लायक बात जो है-अंगूठी किस ऊँगली में पहनाई जा रही
है ?
गीत के बोल:
मोरे सैयां जी उतरेंगे पार हो
नदिया धीरे बहो
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो
हैय्या रे हैय्या
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो
मोरे सैंया जी
ओ मोरे सैंया जी उतरेंगे पार हो
नदिया धीरे बहो
ओ मोरे सैंया जी
ओ मोरे सैंया जी उतरेंगे पार हो
नदिया धीरे बहो
धीरे बहो धीरे धीरे, धीरे बहो नदिया
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो
चंचल धारा बहता पानी, बहता पानी
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो
जल थल नदिया हो, जल थल नदिया
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या
नाव पुरानी सर पे ठाड़ा मँझधार हो
हैय्या रे हैय्या
सर पे ठाड़ा मँझधार हो
नदिया धीरे बहो
मोरे सैंया जी
ओ मोरे सैंया जी उतरेंगे पार हो
नदिया धीरे बहो
धीरे बहो धीरे धीरे, धीरे बहो नदिया
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो
हा आ आ आ आ आ आ आ
ताल तलैया दुनिया माने, दुनिया माने
हैय्या हो हैय्या
मन का सागर कोऊ न जाने, कोऊ न जाने
हैय्या हो हैय्या
मैं जानूँ या मोरा यार हो
हैय्या रे हैय्या
मैं जानूँ या मोरा यार हो
नदिया धीरे बहो
मोरे सैंया जी
ओ मोरे सैंया जी उतरेंगे पार हो
नदिया धीरे बहो
धीरे बहो धीरे धीरे, धीरे बहो नदिया
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो
चलती नैया रोके आँधी, रोके आँधी
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो
चुप चुप देखे, हो चुप चुप देखे
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या
बेबस माँझी छूटे जाये पतवार हो
हैय्या रे हैय्या
छूटे जाये पतवार हो
नदिया धीरे बहो,
धीरे बहो धीरे धीरे, धीरे बहो नदिया
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो
हैय्या हो हो
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो
हैय्या हो हो
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो
हैय्या हो हो
हैय्या रे हैय्या हैय्या रे हैय्या हैय्या
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या
...................................
More saiyan ji utrenge paar-Udan Khatola 1955
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Wednesday, 20 July 2011
Monday, 18 July 2011
उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी-नया दौर १९५७
फिल्म नया दौर के साथ कुछ रोचक किस्से जुड़े हुए हैं. सुनते हैं कि
पहले नायिका के रोल में मधुबाला को लिया जाना था. उनकी जगह
वैजयंतीमाला आ गयीं. उसी तरह से ओ पी नय्यर भी मूल योजना का
हिस्सा नहीं थे. उन्हें भी बाद में अनुबंधित किया गया.
ओ पी नय्यर ने जो गीत इस फिल्म के लिए बनाये वो आज भी उतने ही
उत्साह से सुने जाते हैं, विशेषकर एक गीत जिसे शादी ब्याह के अवसर पर
खूब बजाया और गाया जाता है. ये युगल गीत जो इधर प्रस्तुत है आज उसे
भी खूब सुना जाता है. गायक हैं आशा और रफ़ी.
साहिर लुधियानवी ने इस फिल्म के गीत लिखे हैं. साहिर ने बी. आर. चोपड़ा की
कई फिल्मों के लिए गीत लिखे, अधिकतर में संगीत एन. दत्ता या रवि का होता.
ऐसा क्यूँ इसकी कहानी फिर कभी, फिलहाल ये गीत सुनिए.
गीत के बोल:
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
कुँवारियों का दिल मचले
कुँवारियों का दिल मचले
जिन्द मेरिये
जब ऐसे चिकने चेहरे
जब ऐसे चिकने चेहरे
तो कैसे ना नज़र फिसले
तो कैसे ना नज़र फिसले
जिन्द मेरिये
हो, रुत प्यार करन की आई
रुत प्यार करन की आई
हो, रुत प्यार करन की आई
हो, रुत प्यार करन की आई
के बेरियों के बेर पक गये
के बेरियों के बेर पक गये
जिन्द मेरिये
कभी डाल इधर भी फेरा
कभी डाल इधर भी फेरा
के तक-तक नैन थक गये
के तक-तक नैन थक गये
जिन्द मेरिये
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
के जहाँ मेरा यार बसता
के जहाँ मेरा यार बसता
जिन्द मेरिये
पानी लेने के बहाने आजा
पानी लेने के बहाने आजा
के तेरा मेरा इक रस्ता
के तेरा मेरा इक रस्ता
जिन्द मेरिये
हो, तुझे चाँद के बहाने देखूँ
हो, तुझे चाँद के बहाने देखूँ
तुझे चाँद के बहाने देखूँ
तुझे चाँद के बहाने देखूँ
तू छत पर आजा गोरिये
तू छत पर आजा गोरिये
जिन्द मेरिये
अभी छेड़ेंगे गली के सब लड़के
अभी छेड़ेंगे गली के सब लड़के
के चाँद बैरी छिप जाने दे
के चाँद बैरी छिप जाने दे
जिन्द मेरिये
हो, तेरी चाल है नागन जैसी
हो, तेरी चाल है नागन जैसी
तेरी चाल है नागन जैसी
हो, तेरी चाल है नागन जैसी
रे जोगी तुझे ले जायेंगे
रे जोगी तुझे ले जायेंगे
जिन्द मेरिये
जायेँ कहीं भी मगर हम सजना
हो, जायेँ कहीं भी मगर हम सजना
यह दिल तुझे दे जायेंगे
यह दिल तुझे दे जायेंगे
जिन्द मेरिये
...................................
Ude jab jab zulfen teri-Naya daur 1957
पहले नायिका के रोल में मधुबाला को लिया जाना था. उनकी जगह
वैजयंतीमाला आ गयीं. उसी तरह से ओ पी नय्यर भी मूल योजना का
हिस्सा नहीं थे. उन्हें भी बाद में अनुबंधित किया गया.
ओ पी नय्यर ने जो गीत इस फिल्म के लिए बनाये वो आज भी उतने ही
उत्साह से सुने जाते हैं, विशेषकर एक गीत जिसे शादी ब्याह के अवसर पर
खूब बजाया और गाया जाता है. ये युगल गीत जो इधर प्रस्तुत है आज उसे
भी खूब सुना जाता है. गायक हैं आशा और रफ़ी.
साहिर लुधियानवी ने इस फिल्म के गीत लिखे हैं. साहिर ने बी. आर. चोपड़ा की
कई फिल्मों के लिए गीत लिखे, अधिकतर में संगीत एन. दत्ता या रवि का होता.
ऐसा क्यूँ इसकी कहानी फिर कभी, फिलहाल ये गीत सुनिए.
गीत के बोल:
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
कुँवारियों का दिल मचले
कुँवारियों का दिल मचले
जिन्द मेरिये
जब ऐसे चिकने चेहरे
जब ऐसे चिकने चेहरे
तो कैसे ना नज़र फिसले
तो कैसे ना नज़र फिसले
जिन्द मेरिये
हो, रुत प्यार करन की आई
रुत प्यार करन की आई
हो, रुत प्यार करन की आई
हो, रुत प्यार करन की आई
के बेरियों के बेर पक गये
के बेरियों के बेर पक गये
जिन्द मेरिये
कभी डाल इधर भी फेरा
कभी डाल इधर भी फेरा
के तक-तक नैन थक गये
के तक-तक नैन थक गये
जिन्द मेरिये
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
के जहाँ मेरा यार बसता
के जहाँ मेरा यार बसता
जिन्द मेरिये
पानी लेने के बहाने आजा
पानी लेने के बहाने आजा
के तेरा मेरा इक रस्ता
के तेरा मेरा इक रस्ता
जिन्द मेरिये
हो, तुझे चाँद के बहाने देखूँ
हो, तुझे चाँद के बहाने देखूँ
तुझे चाँद के बहाने देखूँ
तुझे चाँद के बहाने देखूँ
तू छत पर आजा गोरिये
तू छत पर आजा गोरिये
जिन्द मेरिये
अभी छेड़ेंगे गली के सब लड़के
अभी छेड़ेंगे गली के सब लड़के
के चाँद बैरी छिप जाने दे
के चाँद बैरी छिप जाने दे
जिन्द मेरिये
हो, तेरी चाल है नागन जैसी
हो, तेरी चाल है नागन जैसी
तेरी चाल है नागन जैसी
हो, तेरी चाल है नागन जैसी
रे जोगी तुझे ले जायेंगे
रे जोगी तुझे ले जायेंगे
जिन्द मेरिये
जायेँ कहीं भी मगर हम सजना
हो, जायेँ कहीं भी मगर हम सजना
यह दिल तुझे दे जायेंगे
यह दिल तुझे दे जायेंगे
जिन्द मेरिये
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Ude jab jab zulfen teri-Naya daur 1957
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Vaijayantimala
Thursday, 30 June 2011
मैं टूटी हुई एक नैया हूँ-आदमी १९६८
फिल्म आदमी के तीन गीत आप सुन ही चुके हैं। अब
सुनते हैं चौथा गीत। ये दर्द भरा या यूँ कहिये नैराश्य के
भावों को उभारता गीत है। गायक ने जिस गंभीर तरीके
से उस मूड को उभारा है वो बहुत तारीफ़-ए-काबिल है।
शकील बदायूनी के बोलों को धुन प्रदान की है नौशाद
ने। इस गीत के लिए दिलीप कुमार से उपयुक्त नायक
कौन हो सकता है भला ? एक दुविधा सी है और नायक
अपन आप को नायिका के हवाले करना चाहता है मगर
गीत के अंत में वो अकेला छोड़ देने की ख्वाहिश ज़ाहिर
कर ही देता है।
गीत के बोल:
मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ
मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ
जी चाहे डुबो दो मौजों में या साहिल पे ले जाओ
मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ
एक तुम ही सहारा हो मेरा जीवन की अँधेरी रातों में
दुनिया की ख़ुशी तक़दीर का ग़म सब कुछ है तुम्हारे हाथों में
अब चाहे इधर ले जाओ मुझे या चाहे उधर ले जाओ
मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ
मायूस नज़र मजबूर क़दम उजड़ा हुआ आलम है दिल का
जीना भी ये कोई जीना है मुँह देख सकूँ ना मंज़िल का
बीते हुए दिन मिल जाएँ जहाँ मुझे ऐसी डगर ले जाओ -२
मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ
आँसू न बहाओ मेरे लिए ग़म मुझको अकेले सहने दो
टूटे न तुम्हारा नाज़ुक दिल ये दर्द मुझी तक रहने दो
अब छोड़ दो मुझको राहों में या दूर नगर ले जाओ
मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ
......................................
Main tooti hui ek naiya hoon-Aadmi 1968
सुनते हैं चौथा गीत। ये दर्द भरा या यूँ कहिये नैराश्य के
भावों को उभारता गीत है। गायक ने जिस गंभीर तरीके
से उस मूड को उभारा है वो बहुत तारीफ़-ए-काबिल है।
शकील बदायूनी के बोलों को धुन प्रदान की है नौशाद
ने। इस गीत के लिए दिलीप कुमार से उपयुक्त नायक
कौन हो सकता है भला ? एक दुविधा सी है और नायक
अपन आप को नायिका के हवाले करना चाहता है मगर
गीत के अंत में वो अकेला छोड़ देने की ख्वाहिश ज़ाहिर
कर ही देता है।
गीत के बोल:
मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ
मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ
जी चाहे डुबो दो मौजों में या साहिल पे ले जाओ
मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ
एक तुम ही सहारा हो मेरा जीवन की अँधेरी रातों में
दुनिया की ख़ुशी तक़दीर का ग़म सब कुछ है तुम्हारे हाथों में
अब चाहे इधर ले जाओ मुझे या चाहे उधर ले जाओ
मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ
मायूस नज़र मजबूर क़दम उजड़ा हुआ आलम है दिल का
जीना भी ये कोई जीना है मुँह देख सकूँ ना मंज़िल का
बीते हुए दिन मिल जाएँ जहाँ मुझे ऐसी डगर ले जाओ -२
मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ
आँसू न बहाओ मेरे लिए ग़म मुझको अकेले सहने दो
टूटे न तुम्हारा नाज़ुक दिल ये दर्द मुझी तक रहने दो
अब छोड़ दो मुझको राहों में या दूर नगर ले जाओ
मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ
......................................
Main tooti hui ek naiya hoon-Aadmi 1968
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Mohd. Rafi,
Naushad,
Shakeel Badayuni,
Waheeda Rehman
Tuesday, 7 June 2011
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख-शिकस्त १९५३
क से क्लासिक। सबकी क्लासिक की अपनी अपनी परिभाषा होती
है। आइये एक क्लासिक गीत देखें और सुनें। इसके क्लासिक होने का
सबसे पहला कारण ये है कि ये शैलेन्द्र का लिखा हुआ गीत है और
प्रेरणादाई गीत है। संगीतमय फिल्म शिकस्त से ये गीत लिया
गया है। ब्लॉग पर ये शिकस्त फिल्म का तीसरा गीत है। पिछले
दो गीत तलत महमूद की आवाज़ में हैं, इसमें रफ़ी की आवाज़ है।
गीत के बोल:
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
सच कभी तो होंगे ख़्वाब और ख़याल, तेरे ख़्वाब और ख़याल
हो तेरे ख़्वाब और ख़याल
कब तलक रहेंगे बेक़सी के जाल, दिल पे बेक़सी के जाल
हो दिल पे बेक़सी के जाल
वक़्त सुन चुका है तेरे दिल का हाल तेरे दिल का हाल
वक़्त सुन चुका है तेरे दिल का हाल तेरे दिल का हाल
और चार दिन गुज़ार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
दिल के तार छू के गा रहा है कौन गीत गा रहा है कौन
हो गीत गा रहा है कौन
ले के ये बहारें आ रहा है कौन मुस्कुरा रहा है कौन
हो मुस्कुरा रहा है कौन
तन पे और मन पे छा रहा है कौन छा रहा है कौन
तन पे और मन पे छा रहा है कौन छा रहा है कौन
अपना दिल किसी पे हार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
नींद से धरती को जो जगायेगा ज़मीं को जो जगायेगा
ज़मीं को जो जगायेगा
बीज आँसुओं के जो बिछायेगा जो मेहनतें लुटायेगा
जो मेहनतें लुटायेगा
फूल उसके आँगन में मुस्कुरायेगा मुस्कुरायेगा
फूल उसके आँगन में मुस्कुरायेगा मुस्कुरायेगा
और चार दिन गुज़ार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
गा रही है धरती गीत प्यार के सुहाने गीत प्यार के
सुहाने गीत प्यार के
दिन गुज़र चुके हैं इंतज़ार के हो तेरे इंतज़ार के
हो तेरे इंतज़ार के
चुप न रह पपीहे ये मन को मार के मन को मार के
चुप न रह पपीहे मन को मार के मन को मार के
आयेंगे पिया पुकार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
आयेंगे पिया पुकार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
.....................................
Nayi zindai se pyar kar ke dekh-Shikast 1953
है। आइये एक क्लासिक गीत देखें और सुनें। इसके क्लासिक होने का
सबसे पहला कारण ये है कि ये शैलेन्द्र का लिखा हुआ गीत है और
प्रेरणादाई गीत है। संगीतमय फिल्म शिकस्त से ये गीत लिया
गया है। ब्लॉग पर ये शिकस्त फिल्म का तीसरा गीत है। पिछले
दो गीत तलत महमूद की आवाज़ में हैं, इसमें रफ़ी की आवाज़ है।
गीत के बोल:
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
सच कभी तो होंगे ख़्वाब और ख़याल, तेरे ख़्वाब और ख़याल
हो तेरे ख़्वाब और ख़याल
कब तलक रहेंगे बेक़सी के जाल, दिल पे बेक़सी के जाल
हो दिल पे बेक़सी के जाल
वक़्त सुन चुका है तेरे दिल का हाल तेरे दिल का हाल
वक़्त सुन चुका है तेरे दिल का हाल तेरे दिल का हाल
और चार दिन गुज़ार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
दिल के तार छू के गा रहा है कौन गीत गा रहा है कौन
हो गीत गा रहा है कौन
ले के ये बहारें आ रहा है कौन मुस्कुरा रहा है कौन
हो मुस्कुरा रहा है कौन
तन पे और मन पे छा रहा है कौन छा रहा है कौन
तन पे और मन पे छा रहा है कौन छा रहा है कौन
अपना दिल किसी पे हार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
नींद से धरती को जो जगायेगा ज़मीं को जो जगायेगा
ज़मीं को जो जगायेगा
बीज आँसुओं के जो बिछायेगा जो मेहनतें लुटायेगा
जो मेहनतें लुटायेगा
फूल उसके आँगन में मुस्कुरायेगा मुस्कुरायेगा
फूल उसके आँगन में मुस्कुरायेगा मुस्कुरायेगा
और चार दिन गुज़ार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
गा रही है धरती गीत प्यार के सुहाने गीत प्यार के
सुहाने गीत प्यार के
दिन गुज़र चुके हैं इंतज़ार के हो तेरे इंतज़ार के
हो तेरे इंतज़ार के
चुप न रह पपीहे ये मन को मार के मन को मार के
चुप न रह पपीहे मन को मार के मन को मार के
आयेंगे पिया पुकार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
आयेंगे पिया पुकार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
.....................................
Nayi zindai se pyar kar ke dekh-Shikast 1953
Saturday, 21 May 2011
नैन मिले नैन हुए बाँवरे-तराना १९५१
आपको पुरानी तराना फिल्म का एक भी गीत नहीं सुनाया है अभी तक।
आज आपको इस हिट मुज़िकल फिल्म से एक गीत सुनवाते हैं जो
सुबह सुबह के किसी रेडियो प्रोग्राम में आपने ज़रूर सुना होगा।
कुछ haunting(भूतिया नहीं) melodies अक्सर बिना किसी वजह से
याद आ जाती हैं और आप उनको गुनगुनाने लग जाते हैं। ये भी एक ऐसा
ही युगल गीत है। इस गीत में बहुत स्कोप है आहें भरने का विशेषकर प्रेमी
युगल के लिए। प्रेम धवन के सरल से मगर प्रभावी बोलों को एक
आकर्षक धुन पर तैराया है संगीतकार अनिल बिस्वास ने। अनिल बिश्वास
जैसे कुशल चितेरे फिल्म संगीत जगत में कम ही हुए हैं। हिंदी गीत जो आज हम
आज सुनते हैं उसके स्वरुप को व्यवस्थित करने का श्री अनिल बिस्वास को
ही जाता है। गीत में सौम्यता को शुरू से आखिर तक कायम रखने की कला
में अनिल बिश्वास सिद्धहस्त थे। गीत फिल्माया गया है दो नामी कलाकारों
पर-दिलीप कुमार और मधुबाला।
गीत के बोल:
नैन मिले नैन हुए बाँवरे
नैन मिले नैन हुए बाँवरे
चैन कहाँ मोहे सजन संवरे
नैन हुए बाँवरे
नैन मिले नैन हुए बाँवरे
नैन मिले नैन हुए बाँवरे
देखते ही देखते मैं खो गई
देखते ही देखते मैं खो गई
जागते ही जागते मैं सो गई
जागते ही जागते मैं सो गई
अब कभी मैं जागना ना चाहूँ रे
अब कभी मैं जागना ना चाहूँ रे
नैन हुए बावरे
चलते चलते पाँव मेरे थम गये
चलते चलते पाँव मेरे थम गये
तुम मिले तो दिल के सारे ग़म गये
तुम मिले तो दिल के सारे ग़म गये
मिल गयी ज़ुल्फ़ों की ठंड़ी छाँव रे
मिल गयी ज़ुल्फ़ों की ठंड़ी छाँव रे
नैन हुए बावरे
धड़कने दिल की छुपाऊँ किस तरह
ऐ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
धड़कने दिल की छुपाऊँ किस तरह
लाज का घूँघट उठाऊँ किस तरह
लाज का घूँघट उठाऊँ किस तरह
किस तरह साजन तेरी बन जाऊँ रे
किस तरह साजन तेरी बन जाऊँ रे
नैन हुए बावरे
नैनों से नैना तेरे कुछ कह गये
ऐ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
नैनों से नैना तेरे कुछ कह गये
प्यार की लहरों में दो दिल बह गये
प्यार की लहरों में दो दिल बह गये
अब रुके ना प्रीत की ये नाव रे
अब रुके ना प्रीत की ये नाव रे
नैन हुए बावरे
नैन मिले नैन हुए बावरे
चैन कहाँ मोहे सजन साँवरे
नैन हुए बावरे
.....................................
Nain mile nain hue banwre-Tarana 1951
आज आपको इस हिट मुज़िकल फिल्म से एक गीत सुनवाते हैं जो
सुबह सुबह के किसी रेडियो प्रोग्राम में आपने ज़रूर सुना होगा।
कुछ haunting(भूतिया नहीं) melodies अक्सर बिना किसी वजह से
याद आ जाती हैं और आप उनको गुनगुनाने लग जाते हैं। ये भी एक ऐसा
ही युगल गीत है। इस गीत में बहुत स्कोप है आहें भरने का विशेषकर प्रेमी
युगल के लिए। प्रेम धवन के सरल से मगर प्रभावी बोलों को एक
आकर्षक धुन पर तैराया है संगीतकार अनिल बिस्वास ने। अनिल बिश्वास
जैसे कुशल चितेरे फिल्म संगीत जगत में कम ही हुए हैं। हिंदी गीत जो आज हम
आज सुनते हैं उसके स्वरुप को व्यवस्थित करने का श्री अनिल बिस्वास को
ही जाता है। गीत में सौम्यता को शुरू से आखिर तक कायम रखने की कला
में अनिल बिश्वास सिद्धहस्त थे। गीत फिल्माया गया है दो नामी कलाकारों
पर-दिलीप कुमार और मधुबाला।
गीत के बोल:
नैन मिले नैन हुए बाँवरे
नैन मिले नैन हुए बाँवरे
चैन कहाँ मोहे सजन संवरे
नैन हुए बाँवरे
नैन मिले नैन हुए बाँवरे
नैन मिले नैन हुए बाँवरे
देखते ही देखते मैं खो गई
देखते ही देखते मैं खो गई
जागते ही जागते मैं सो गई
जागते ही जागते मैं सो गई
अब कभी मैं जागना ना चाहूँ रे
अब कभी मैं जागना ना चाहूँ रे
नैन हुए बावरे
चलते चलते पाँव मेरे थम गये
चलते चलते पाँव मेरे थम गये
तुम मिले तो दिल के सारे ग़म गये
तुम मिले तो दिल के सारे ग़म गये
मिल गयी ज़ुल्फ़ों की ठंड़ी छाँव रे
मिल गयी ज़ुल्फ़ों की ठंड़ी छाँव रे
नैन हुए बावरे
धड़कने दिल की छुपाऊँ किस तरह
ऐ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
धड़कने दिल की छुपाऊँ किस तरह
लाज का घूँघट उठाऊँ किस तरह
लाज का घूँघट उठाऊँ किस तरह
किस तरह साजन तेरी बन जाऊँ रे
किस तरह साजन तेरी बन जाऊँ रे
नैन हुए बावरे
नैनों से नैना तेरे कुछ कह गये
ऐ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
नैनों से नैना तेरे कुछ कह गये
प्यार की लहरों में दो दिल बह गये
प्यार की लहरों में दो दिल बह गये
अब रुके ना प्रीत की ये नाव रे
अब रुके ना प्रीत की ये नाव रे
नैन हुए बावरे
नैन मिले नैन हुए बावरे
चैन कहाँ मोहे सजन साँवरे
नैन हुए बावरे
.....................................
Nain mile nain hue banwre-Tarana 1951
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Saturday, 14 May 2011
ऐ मेरे दिल कहीं और चल २- दाग १९५२
"प्यासा हूँ मगर लोग समझते हैं पिया सा"- वाह साहब क्या पंक्तियाँ
हैं पिछले गीत की। आप सभी ने ये ज़रूर एक ना एक बार सुना होगा
कि कोई शराबी नाली में पड़ा है और कुत्ता उसका मुंह चाट रहा है।
मैंने २-३ बार देखा भी है। कुछ रोज़ पहले ध्यान से देखने पर
पाया कुत्ता उस व्यक्ति के होंठ भी चाट के साफ़ कर रहा है। अमूमन
ऐसे दृश्य केवल वहीँ देखे जा सकते हैं जहाँ कुत्ते पाले होते
हैं और कुत्तों को घर के सदस्य की तरह रखा जाता है। वैसी
जगहों पर उनकी चाटा-चाटी को भी खुली छूट होती है।
प्रस्तुत गीत एक प्रसिद्ध फिल्म दाग से है। सन १९५२ की दाग।
१९५२ की दाग शैलेन्द्र के गीतों के लिए याद की जाती है
तो सन १९७३ वाली साहिर के गीतों के लिए। प्रस्तुत गीत में
नायक कुत्ते को निमंत्रण देता सा प्रतीत होता है-आ जा मेरे
पीछे पीछे, मैं आगे चल के गिरने वाला हूँ उसके बाद तेरी जो
मर्ज़ी हो करना। इस फिल्म के लिए नायक को फ़िल्म फेयर
पुरस्कार मिला था। नायक को तो आप पहचान ही गए होंगे।
गीत गाया है तलत महमूद ने और इसकी धुन तैयार की है
शंकर जयकिशन ने।
गीत के बोल:
ऐ मेरे दिल कहीं और चल
गम की दुनिया से दिल भर गया
ढूंढ ले अब कोई घर नया
ऐ मेरे दिल कहीं और चल
गम की दुनिया से दिल भर गया
ढूंढ ले अब कोई घर नया
ऐ मेरे दिल कहीं और चल
चल जहां गम के मारे ना हों
झूठी आशा के तारे ना हों
चल जहां गम के मारे ना हों
झूठी आशा के तारे ना हों
झूठी आशा के तारे ना हों
इन बहारों से क्या फ़ायदा
जिस में दिल की कली जल गई
ज़ख्म फिर से हरा हो गया
ऐ मेरे दिल कहीं और चल
चार आंसू कोई रो दिया
फेर के मुंह कोई चल दिया
चार आंसू कोई रो दिया
फेर के मुंह कोई चल दिया
फेर के मुंह कोई चल दिया
लुट रहा था किसी का जहाँ
देखती रह गई ये ज़मीन
चुप रहा बेरहम आसमान
ऐ मेरे दिल कहीं और चल
........................................
Ae mere dil kahin aur chaal(Talat)-Daag 1952
हैं पिछले गीत की। आप सभी ने ये ज़रूर एक ना एक बार सुना होगा
कि कोई शराबी नाली में पड़ा है और कुत्ता उसका मुंह चाट रहा है।
मैंने २-३ बार देखा भी है। कुछ रोज़ पहले ध्यान से देखने पर
पाया कुत्ता उस व्यक्ति के होंठ भी चाट के साफ़ कर रहा है। अमूमन
ऐसे दृश्य केवल वहीँ देखे जा सकते हैं जहाँ कुत्ते पाले होते
हैं और कुत्तों को घर के सदस्य की तरह रखा जाता है। वैसी
जगहों पर उनकी चाटा-चाटी को भी खुली छूट होती है।
प्रस्तुत गीत एक प्रसिद्ध फिल्म दाग से है। सन १९५२ की दाग।
१९५२ की दाग शैलेन्द्र के गीतों के लिए याद की जाती है
तो सन १९७३ वाली साहिर के गीतों के लिए। प्रस्तुत गीत में
नायक कुत्ते को निमंत्रण देता सा प्रतीत होता है-आ जा मेरे
पीछे पीछे, मैं आगे चल के गिरने वाला हूँ उसके बाद तेरी जो
मर्ज़ी हो करना। इस फिल्म के लिए नायक को फ़िल्म फेयर
पुरस्कार मिला था। नायक को तो आप पहचान ही गए होंगे।
गीत गाया है तलत महमूद ने और इसकी धुन तैयार की है
शंकर जयकिशन ने।
गीत के बोल:
ऐ मेरे दिल कहीं और चल
गम की दुनिया से दिल भर गया
ढूंढ ले अब कोई घर नया
ऐ मेरे दिल कहीं और चल
गम की दुनिया से दिल भर गया
ढूंढ ले अब कोई घर नया
ऐ मेरे दिल कहीं और चल
चल जहां गम के मारे ना हों
झूठी आशा के तारे ना हों
चल जहां गम के मारे ना हों
झूठी आशा के तारे ना हों
झूठी आशा के तारे ना हों
इन बहारों से क्या फ़ायदा
जिस में दिल की कली जल गई
ज़ख्म फिर से हरा हो गया
ऐ मेरे दिल कहीं और चल
चार आंसू कोई रो दिया
फेर के मुंह कोई चल दिया
चार आंसू कोई रो दिया
फेर के मुंह कोई चल दिया
फेर के मुंह कोई चल दिया
लुट रहा था किसी का जहाँ
देखती रह गई ये ज़मीन
चुप रहा बेरहम आसमान
ऐ मेरे दिल कहीं और चल
........................................
Ae mere dil kahin aur chaal(Talat)-Daag 1952
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Tuesday, 11 January 2011
शाम-ए-ग़म की क़सम-फुटपाथ १९५३
आपको मखमली आवाज़ सुनवाते हैं बहुत दिनों बाद।
तलत महमूद की आवाज़ में ये सदाबहार गीत सुनिए
फिल्म फुटपाथ से। सन १९५३ से ये गीत श्रोताओं को
आनंदित करता आ रहा है। मजरूह के बोलों को सुरों
में पिरोया है खय्याम ने। दिलीप कुमार की ट्रेजेडी किंग
की इमेज में ऐसे गीतों का योगदान बहुत रहा। इस गीत
को अक्सर श्रोता दुखी अवस्था में सुना करते हैं और ऐसा
सुना जाता है कि इसको सुनने के बाद वे अवसाद से बाहर
आ जाते हैं। कुछ कुछ होम्योपैथी के इलाज़ की तरह.....
गीत के बोल:
शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम
दिल परेशान है रात वीरान है
देख जा किस तरह आज तनहा हैं हम
शाम-ए-ग़म की क़सम
चैन कैसा जो पहलू में तू ही नहीं
मार डाले न दर्द-ए-जुदाई कहीं
रुत हंसीं हैं तो क्या चाँदनी है तो क्या
चाँदनी ज़ुल्म है और जुदाई सितम
शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम
अब तो आ जा के अब रात भी सो गई
ज़िन्दगी ग़म के सेहराव में खो गई
अब तो आ जा के अब रात भी सो गई
ज़िन्दगी ग़म के सेहराव में खो गई
ढूँढती हैं नज़र तू कहाँ हैं मगर
देखते देखते आया आँखों में ग़म
शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम
..............................
Sham-e-gham ki kasam-Footpath 1952
तलत महमूद की आवाज़ में ये सदाबहार गीत सुनिए
फिल्म फुटपाथ से। सन १९५३ से ये गीत श्रोताओं को
आनंदित करता आ रहा है। मजरूह के बोलों को सुरों
में पिरोया है खय्याम ने। दिलीप कुमार की ट्रेजेडी किंग
की इमेज में ऐसे गीतों का योगदान बहुत रहा। इस गीत
को अक्सर श्रोता दुखी अवस्था में सुना करते हैं और ऐसा
सुना जाता है कि इसको सुनने के बाद वे अवसाद से बाहर
आ जाते हैं। कुछ कुछ होम्योपैथी के इलाज़ की तरह.....
गीत के बोल:
शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम
दिल परेशान है रात वीरान है
देख जा किस तरह आज तनहा हैं हम
शाम-ए-ग़म की क़सम
चैन कैसा जो पहलू में तू ही नहीं
मार डाले न दर्द-ए-जुदाई कहीं
रुत हंसीं हैं तो क्या चाँदनी है तो क्या
चाँदनी ज़ुल्म है और जुदाई सितम
शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम
अब तो आ जा के अब रात भी सो गई
ज़िन्दगी ग़म के सेहराव में खो गई
अब तो आ जा के अब रात भी सो गई
ज़िन्दगी ग़म के सेहराव में खो गई
ढूँढती हैं नज़र तू कहाँ हैं मगर
देखते देखते आया आँखों में ग़म
शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम
..............................
Sham-e-gham ki kasam-Footpath 1952
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Monday, 10 January 2011
सो जा मेरे प्यारे-फुटपाथ १९५३
हिंदी फिल्म संगीत का खज़ाना अजब गज़ब लोरियों से भरा पड़ा है।
अधिकतर लोकप्रिय लोरियां आपको पुरानी फिल्मों में ही मिलेंगी।
बॉलीवुड का मानना है कि फ़िल्मी बच्चे बड़े हो गए हैं अतः इस ज़माने
में लोरियों की आवश्यकता नहीं है। आजकल लोरी की जगह दूसरे किस्म
के गानों ने ले ली है। उदाहरण के लिए बच्चे बड़े हो गए हैं और शायद
आईटम-सोंग ज्यादा देखना सुनना पसंद करते हैं।
मीठी और मधुर खुशनुमा लोरियां आपने बहुत सुनी होंगी। एक
दुःख भरी लोरी भी सुनिए जो फिल्म फुटपाथ में है। ये सन १९५३
कि फिल्म है. दुःख भरी लोरी गा कर बच्चे को सुलाना बहुत ही
कठिन कार्य है जो आप महसूस करेंगे इस गीत में। गीत फिल्माया
गया है मीना कुमारी पर। गीत लिखा है मजरूह ने और इसकी
धुन बनाई है खय्याम ने। आंसुओं में भीगी लोरी गाने वाली गायिका
हैं आशा भोंसले।
गीत के बोल:
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा
रात सुहानी चंदा गाये
मीठी मीठी निंदिया आये
रात सुहानी चंदा गाये
मीठी मीठी निंदिया आये
राजदुलारे नैनन तारे सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा
आहों की फ़रियाद की दुनिया
ये दुनिया बेदाज की दुनिया
आहों की फ़रियाद की दुनिया
ये दुनिया बेदाज की दुनिया
तेरी दुनिया चाँद सितारे सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
अधिकतर लोकप्रिय लोरियां आपको पुरानी फिल्मों में ही मिलेंगी।
बॉलीवुड का मानना है कि फ़िल्मी बच्चे बड़े हो गए हैं अतः इस ज़माने
में लोरियों की आवश्यकता नहीं है। आजकल लोरी की जगह दूसरे किस्म
के गानों ने ले ली है। उदाहरण के लिए बच्चे बड़े हो गए हैं और शायद
आईटम-सोंग ज्यादा देखना सुनना पसंद करते हैं।
मीठी और मधुर खुशनुमा लोरियां आपने बहुत सुनी होंगी। एक
दुःख भरी लोरी भी सुनिए जो फिल्म फुटपाथ में है। ये सन १९५३
कि फिल्म है. दुःख भरी लोरी गा कर बच्चे को सुलाना बहुत ही
कठिन कार्य है जो आप महसूस करेंगे इस गीत में। गीत फिल्माया
गया है मीना कुमारी पर। गीत लिखा है मजरूह ने और इसकी
धुन बनाई है खय्याम ने। आंसुओं में भीगी लोरी गाने वाली गायिका
हैं आशा भोंसले।
गीत के बोल:
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा
रात सुहानी चंदा गाये
मीठी मीठी निंदिया आये
रात सुहानी चंदा गाये
मीठी मीठी निंदिया आये
राजदुलारे नैनन तारे सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा
आहों की फ़रियाद की दुनिया
ये दुनिया बेदाज की दुनिया
आहों की फ़रियाद की दुनिया
ये दुनिया बेदाज की दुनिया
तेरी दुनिया चाँद सितारे सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
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Saturday, 18 December 2010
साला मैं तो साहब बन गया-सगीना १९७४
बिना विवरण वाला एक गीत प्रस्तुत है। आशा है आपको
पसंद आएगा। स्वच्छता जीवन का एक आवश्यक तत्त्व है
और इसी को ब्लॉग पर भी अमल में लाने की कोशिश जारी है।
टिप्पणी वाले स्थान में तो वैसे भी बहुत सफाई रहती है, थोड़ी
पोस्ट वाले स्थान में भी दर्शायी जाए। वो तो देखिये कमबख्त
हाथ की उँगलियाँ हरकत करती रहती है और देखते ही देखते
७ लाइन टाइप हो गयीं।
गीत के बोल:
साला मैं तो साहब बन गया
अरे, साला मैं तो साहब बन गया
रे, साहब बनके कैसा तन गया
ये सूट मेरा देखो, ये बूट मेरा देखो
जैसे गोरा कोई लन्दन का
वाह फकीरे! वाह फकीरे
वाह फकीरे, सूट पहनकर कैसा कूड़े फंडे
कौवा जैसे पंख मयूर का अपनी दम में बांधे
अपना दम में बांधे
अरे क्या जानो हम इस भेजा में क्या-क्या नक्षा खींचा
लीडर लोग की ऊंची बातें, क्या समझे तुम नीचा?
क्या समझे तुम नीचा?
मेरा वो सब जाहिलपन गया
साला मैं तो साहब बन गया
साला मैं तो साहब बन गया
रे, साहब बनके कैसा तन गया
ये सूट मेरा देखो, ये बूट मेरा देखो
जैसे गोरा कोई लन्दन का
सूरत है बन्दर की फिर भी लगती है अलबेली
कैसा राजा भोज बना है मेरा गंगू तेली
तेरा गंगू तेली
तुम लंगोटी-वाला ना बदला मैं ना बदलेगा
तुम सब साला लोग का किस्मत, हम साला बदलेगा
हम साला बदलेगा
सीना देखो कैसा तन गया!
साला मैं तो साहब बन गया
अरे, साला मैं तो साहब बन गया
रे, साहब बनके कैसा तन गया
ये सूट मेरा देखो, ये बूट मेरा देखो
जैसे गोरा कोई लन्दन का
.............................
Saala main to sahab ban gaya-Sagina 1974
पसंद आएगा। स्वच्छता जीवन का एक आवश्यक तत्त्व है
और इसी को ब्लॉग पर भी अमल में लाने की कोशिश जारी है।
टिप्पणी वाले स्थान में तो वैसे भी बहुत सफाई रहती है, थोड़ी
पोस्ट वाले स्थान में भी दर्शायी जाए। वो तो देखिये कमबख्त
हाथ की उँगलियाँ हरकत करती रहती है और देखते ही देखते
७ लाइन टाइप हो गयीं।
गीत के बोल:
साला मैं तो साहब बन गया
अरे, साला मैं तो साहब बन गया
रे, साहब बनके कैसा तन गया
ये सूट मेरा देखो, ये बूट मेरा देखो
जैसे गोरा कोई लन्दन का
वाह फकीरे! वाह फकीरे
वाह फकीरे, सूट पहनकर कैसा कूड़े फंडे
कौवा जैसे पंख मयूर का अपनी दम में बांधे
अपना दम में बांधे
अरे क्या जानो हम इस भेजा में क्या-क्या नक्षा खींचा
लीडर लोग की ऊंची बातें, क्या समझे तुम नीचा?
क्या समझे तुम नीचा?
मेरा वो सब जाहिलपन गया
साला मैं तो साहब बन गया
साला मैं तो साहब बन गया
रे, साहब बनके कैसा तन गया
ये सूट मेरा देखो, ये बूट मेरा देखो
जैसे गोरा कोई लन्दन का
सूरत है बन्दर की फिर भी लगती है अलबेली
कैसा राजा भोज बना है मेरा गंगू तेली
तेरा गंगू तेली
तुम लंगोटी-वाला ना बदला मैं ना बदलेगा
तुम सब साला लोग का किस्मत, हम साला बदलेगा
हम साला बदलेगा
सीना देखो कैसा तन गया!
साला मैं तो साहब बन गया
अरे, साला मैं तो साहब बन गया
रे, साहब बनके कैसा तन गया
ये सूट मेरा देखो, ये बूट मेरा देखो
जैसे गोरा कोई लन्दन का
.............................
Saala main to sahab ban gaya-Sagina 1974
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आग लगी हमरी झोपडिया में-सगीना १९७४
बिना विवरण वाला एक और गीत प्रस्तुत है। आपको पिछला
गीत बहुत पसंद आया तो मैंने सोचा एक और दे दिया जाए-
गीत, विवरण रहित। हीरो को आप पहचान ही गए हैं।
अरे भाई विवरण दे दिया तो आप सुनेंगे क्या। गीत खुद
अपना विवरण देने में समर्थ जो है। सुन भी लीजिये और
देख भी लीजिये। पूरे पैसे वसूल की गारंटी है। गीत के बोल
अलबत्ता दिए देते हैं आपकी सहूलियत के लिए।
गीत के बोल:
ऊपर वाला दुखियों की नाहीं सुनता रे
सोता है, बहुत जागा है ना
ऊपर वाला दुखियों की नहीं सुनता रे
कौन है जो उसको गगन से उतारे
बन-बन-बन मेरे जैसा बन
इस जीवन का यही है जतन, साला यही है जतन
अरे गम की आग बुझाना है तो हमसे सीखो यार
आग लगी
आग लगी हमारी झोपडिया में हम गावें मल्हार
देख भाई कितने तमाशे की जिंदगानी हमार
हे भोले-भाले ललवा खाए जा रोटी बासी
अरे ये ही खा के जवां होगा बेटा
भोले-भाले ललवा खाए जा रोटी बासी
बड़ा हो के बनेगा साहेब का चपरासी
खेल-खेल-खेल माती में होली खेल
गाल में गुलाल है ना जुल्फों में तेल
अरे अपनी भी जवानी क्या है सुना तैने यार
आग लगी
आग लगी हमारी झोपडिया में हम गावें मल्हार
हे सजनी तू काहे आई नगरी हमारी
चल जा भाग जा भाग
सजनी तू काहे आई नगरी हमारी
धरे सा बिदेसी बाबू बहियाँ तुम्हारी
थाम-थाम-थाम गोरी ज़रा थाम
नाहीं लुट जायेगी राम कसम
अरे केहूं नाहीं आएगा रे सुन के पुकार
आग लगी
आग लगी हमारी झोपडिया में हम गावें मल्हार
..................................
Aag lagi hamri jhopadiya mein-Sagina 1974
गीत बहुत पसंद आया तो मैंने सोचा एक और दे दिया जाए-
गीत, विवरण रहित। हीरो को आप पहचान ही गए हैं।
अरे भाई विवरण दे दिया तो आप सुनेंगे क्या। गीत खुद
अपना विवरण देने में समर्थ जो है। सुन भी लीजिये और
देख भी लीजिये। पूरे पैसे वसूल की गारंटी है। गीत के बोल
अलबत्ता दिए देते हैं आपकी सहूलियत के लिए।
गीत के बोल:
ऊपर वाला दुखियों की नाहीं सुनता रे
सोता है, बहुत जागा है ना
ऊपर वाला दुखियों की नहीं सुनता रे
कौन है जो उसको गगन से उतारे
बन-बन-बन मेरे जैसा बन
इस जीवन का यही है जतन, साला यही है जतन
अरे गम की आग बुझाना है तो हमसे सीखो यार
आग लगी
आग लगी हमारी झोपडिया में हम गावें मल्हार
देख भाई कितने तमाशे की जिंदगानी हमार
हे भोले-भाले ललवा खाए जा रोटी बासी
अरे ये ही खा के जवां होगा बेटा
भोले-भाले ललवा खाए जा रोटी बासी
बड़ा हो के बनेगा साहेब का चपरासी
खेल-खेल-खेल माती में होली खेल
गाल में गुलाल है ना जुल्फों में तेल
अरे अपनी भी जवानी क्या है सुना तैने यार
आग लगी
आग लगी हमारी झोपडिया में हम गावें मल्हार
हे सजनी तू काहे आई नगरी हमारी
चल जा भाग जा भाग
सजनी तू काहे आई नगरी हमारी
धरे सा बिदेसी बाबू बहियाँ तुम्हारी
थाम-थाम-थाम गोरी ज़रा थाम
नाहीं लुट जायेगी राम कसम
अरे केहूं नाहीं आएगा रे सुन के पुकार
आग लगी
आग लगी हमारी झोपडिया में हम गावें मल्हार
..................................
Aag lagi hamri jhopadiya mein-Sagina 1974
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