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Monday, 23 May 2011

डोली में बिठाई के कहार-अमर प्रेम १९७१

अभिनेत्री शर्मिला टैगोर की शायद सबसे यादगार फिल्मों
में से एक है-अमर प्रेम, सन १९७१ की फिल्म जो एक मील का
पत्थर फिल्म भी है हिंदी सिनेमा इतिहास की। फिल्म एक से
बढ़ कर एक नायब गीतों से भरी हुई है। फिल्म के ३ गीत मुझे
बेहद पसंद हैं, प्रस्तुत गीत उनमें से एक है। इस फिल्म के गीत
आनंद बक्षी के लिखे हुए हैं। संगीत तैयार किया है आर डी बर्मन
ने। इस गीत को आर डी के पिता सचिन देव बर्मन ने गाया है। ये
संभवतः पुत्र के संगीत निर्देशन में पिता का गाया हुआ एकमात्र
गीत है। एस. डी. बर्मन ने हिंदी में कम ही गीत गाये हैं, मगर जितने
भी गाये हैं वे गुणवत्ता की दृष्टि से उत्तम की श्रेणी में आते हैं। उनकी
भारी सी, खनक और खरखराहट के मिश्रण वाली आवाज़ में अजीब
आकर्षण है। गीत को बांसुरी कि आवाज़ ने और मर्मस्पर्शी बना दिया
है। गीत फिल्म में दो हिस्सों में सुनाई देता है। उस दयालु आत्मा का
धन्यवाद् जिसने दोनों हिस्सों को जोड़कर यू-ट्यूब पर प्रस्तुत किया है।




गीत के बोल:

हो रामा रे, हो रामा

डोली में बिठाई के कहार
डोली में बिठाई के कहार
लाये मोहे सजना के द्वार
हो, डोली में बिठाई के कहार

बीते दिन खुशियों के चार
दे के दुख मन को हजार
डोली में बिठाई के कहार

मर के निकलना था, हो
मर के निकलना था घर से सँवरिया के,
जीते-जी निकलना पड़ा
फूलों जैसे पावों में पड़ गए छाले,
काँटों पे जो चलना पड़ा
पतझड़, बन गई
पतझड़, ओ बन गई
पतझड़ बैरन बहार।

डोली में बिठाई के कहार

जितने हैं अनसुन मेरी, ओ
जितने हैं आँसू मेरी अँखियों में उतना
नदिया में नाहि रे नीर
ओ लिखने वाले तूने लिख दी ये कैसी मेरी,
टूटी नैया जैसी तकदीर।
रूठा मांझी, ओ मांझी
रूठा मांझी, ओ मांझी रे
रूठा माँझी टूटे पतवार।

डोली में बिठाई के कहार

टूटा पहले मेरा मन हो
टूटा पहले मनवा में, चूड़ियाँ टूटीं,
हुए सारे सपने यूँ चूर
कैसा हुआ धोखा आया, पवन का झोंका,
मिट गया मेरा सिंदूर।
लुट गए ओ रामा
लुट गए ओ रामा मेरे
लुट गए सोलह श्रृंगार

डोली में बिठाई के कहार
लाये मोहे सजना के द्वार
हो, डोली में बिठाई के कहार
..................................
Doli mein bithayi ke kahar-Amar prem 1971

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