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Friday, 26 August 2011

मन मोर हुआ मतवाला-अफसर १९५०

आपको फिल्म अफसर से एक गीत सुनवाया था कुछ महीने पहले।

आइये सुन जाये फिल्म से एक और गीत जो बेहद लोकप्रिय गीत

है सुरैया की आवाज़ में। फिल्म अपने ज़माने की एक हिट फिल्म है

और इसका संगीत भी बहुत लोकप्रिय था फिल्म रिलीज़ के समय और

उसके बाद। किसने जादू डाला रे ? पूछते पूछते गायिका सुनने वालों

पर जादू कर जाती है।



गीत पंडित नरेन्द्र शर्मा ने लिखा है जिन्होंने ५० के दशक में फिल्मों

के लिए काफी गीत लिखे। उस समय गीतों की गुणवत्ता बेहतर थी।

६० के दशक में उनके लिखे गीत फिल्मों में इक्का दुक्का ही सुनाई दिए।



प्रस्तुत गीत सुरैया द्वारा गाया गया है और फिल्म में उन्हीं पर फिल्माया

भी गया है। फिल्म में देव आनंद और सुरैया की जोड़ी है जो अपने ज़माने

की एक हिट जोड़ी कही जाती थी ।



गीत सरल प्रकृति का है और कुछ कुछ पंकज मालिक की संगीत रचनाओं

की भांति सुनाई देता है। सचिन देव बर्मन ने जिस युग में सिनेमा संगीत

क्षेत्र में पदार्पण किया उस युग का असर तो उनके संगीत में मिलेगा ही

मगर समय के साथ साथ उन्होंने अपनी अलग शैली विकसित कर ली जो

उनके भक्त आसानी से पहचान जाते हैं और कुछ हद तक सामान्य श्रोता भी।









गीत के बोल:



मन मोर

मन मोर हुआ मतवाला

किसने जादू डाला रे

किसने जादू डाला

अरे किसने जादू डाला

मन मोर



घिर घिर आई

घिर घिर आई प्रीत बदरिया

बोले प्राण पपीहा, पिया पिया पिया

जिया शरमाये, हे हे हे

जिया शरमाये

मुस्काई अरमानों की जयमाला

मतवाला हुआ, मतवाला

किसने जादू डाला रे

किसने जादू डाला

अरे किसने जादू डाला

मन मोर



तुम सुहाग हो मैं सुहागिनी

सुहागिनी, मैं सुहागिनी

तुम सुर हो मैं मधुर रागिनी

मधुर रागिनी, मैं सुहागिनी

तुम सुहाग हो

तुम नस नस रस की फुहार

मैं रोम रोम मधुशाला

मतवाला हुआ, मतवाला

किसने जादू डाला रे

किसने जादू डाला रे

किसने जादू डाला

मन मोर

...............................

Man mor hua matwala-Afsar 1950

Monday, 20 June 2011

ओ जी धीरे धीरे-परदेस १९५०

सन ५० के संगीत पर थोड़ी गुफ्तगूँ और हो जाये । सन ५० में आलातरीन
नगमे तैयार किये गये। उस समय बहुत से दिग्गज संगीतकार मौजूद थे
फिल्म संगीत के दृश्य पटल पर। एक थे गुलाम मोहम्मद साहब। इन्होनें
भी कई अविस्मर्णीय धुनें तैयार कीं। नौशाद की तरह इनके भी पसंदीदा
गीतकार थे शकील बदायूनीं । शकील साहब ज़रूर ही बदायूं से आये होंगे
उनके नाम के साथ जगह का नाम जो जुड़ा हुआ है। शकील बदायूनीं ने
भी तकरीबन सभी किस्म के अफसानों पर गीत, ग़ज़ल, शेर, शायरी लिख
डाली अपने पूरे फ़िल्मी करियर में। प्रस्तुत गीत थोड़ा हलके फुल्के मूड
वाला है।

गीत थोड़ा हास्य का सा पुट लिए चालू होता है। नायक मैन्डोलिन बजा
रहा है प्रत्युत्तर में नायिका सितार बजाती है और थोड़ा बजा कर उछलना
कूदना शुरू कर देती है जैसे सितार बिजली से चलने वाला हो और
उसे २२० वोल्ट का झटका लग गया हो।

गीत की उल्लेखनीय पंक्ति है-सबके ज़माने बीते, मेरा ज़माना आया। ये पंक्ति
क्या आपको ऐसा नहीं लगता गीतकार ने मधुबाला के लिए ही लिखी हो। सन
५० के बाद मधुबाला की कई यादगार फ़िल्में आयीं।



गीत के बोल:

ओ जी धीरे धीरे ओ जी हौले हौले
अंगना में आ जा पिया
ओ जी धीरे धीरे ओ जी हौले हौले
अंगना में आ जा पिया

ओ जी धीरे धीरे ओ जी हौले हौले आ

हो ओ ओ, ओ ओ ओ ओ ओ ओ
गीत अनोखे लेकर आई जवानी मोरी
आई जवानी मोरी
सुन ले ना कोई ऐ दिल गाये जा चोरी चोरी
गाये जा चोरी चोरी
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
जब बान में कोयल बोले, सुन मेरा डोले जिया
तो सुन मेरा डोले जिया

ओ जी धीरे धीरे ओ जी हौले हौले
अंगना में आ जा पिया
ओ जी धीरे धीरे ओ जी हौले हौले आ

हो ओ ओ, ओ ओ ओ ओ ओ ओ
रात रंगीली आई, दिन भी सुहाना आया
दिन भी सुहाना आया
सबके ज़माने बीते, मेरा ज़माना आया
मेरा ज़माना आया
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ
जब नैनों से दिल हारा, जग मैंने जीत लिया
ओ जग मैंने जीत लिया

ओ जी धीरे धीरे ओ जी हौले हौले
अंगना में आ जा पिया
ओ जी धीरे धीरे ओ जी हौले हौले आ

..............................
O ji dheere dheere o ji haule haule-Pardes 1950

बन के सुहागन रही अभागन-आधी रात १९५०

एक बार किसी ने फरमाइश की-मेलंकली किसिम के गीत सुनवाओ।
हमने कहा ज़रूर। हमने उसे हुस्नलाल भगतराम द्वारा संगीतबद्ध
कुछ गीत सुनवा दिए। जो गीत सुनवाए थे उनमें से एक था फिल्म
आधी रात का यह गीत-बन के सुहागन रही अभागन। सन १९५० की
फिल्म आधी रात में अशोक कुमार और नर्गिस प्रमुख भूमिकाओं
में हैं। सरशर सैलानी का लिखा गीत गा रही हैं लता मंगेशकर।

पुराने फ़िल्मी गीत इस मायने में भी बढ़िया लगा करते थे कि २-३ मिनट
में ख़त्म हो जाया करते थे। आजकल के गीतों में बोलों से ज्यादा वाद्य
यंत्रों की आवाजें होती हैं जिन्हें कभी कभी ज़बरदस्ती झेलना पड़ता है।





गीत के बोल:

बन के सुहागन, रही अभागन
फूट गई तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी
फूटी हुई तक़दीर के आगे
चल न सकी तदबीर मेरी
चल न सकी तदबीर मेरी

बन के सुहागन, रही अभागन
फूट गई तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी

दिल में आग आँखों में पानी
दिल में आग आँखों में पानी
हाय मेरी बरबाद जवानी
हाय मेरी बरबाद जवानी
किसको सुनाऊँ ग़म की कहानी
कौन बँधाए धीर मेरी
कौन बँधाए धीर मेरी

बन के सुहागन, रही अभागन
फूट गई तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी

ख़ून के आँसू पीती हूँ मैं
ख़ून के आँसू पीती हूँ मैं
मौत की आस पे जीती हूँ मैं
मौत की आस पे जीती हूँ मैं
इसके सिवा ऐ दुनिया वालो
कोई नहीं तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी

बन के सुहागन, रही अभागन
फूट गई तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी
................................
Ban ke suhagan-Aadi Raat 1950

Saturday, 21 May 2011

ख्यालों में किसी के इस तरह-बावरे नैन १९५०

अजीब इत्तेफाक है। बीच रोड पर ट्राफिक के सर्कस के बीच आपको
अगर फिल्म बावरे नैन का ये गीत याद आ जाये तो क्या कीजियेगा ?
अजी बस गुनगुना लग जाइये और क्या। बीच में आड़े टेड़े चलने वालों
के चरित्रों का उल्लेख करके जुबान ख़राब करने के बजाये गीत जोर जोर
से गाने लग जाइये। आज हमने भी यही किया और गाने ने होर्न का काम
किया। बात फिर भी समझ नहीं आई-ऐसा क्यूँ होता है-उलझन में
दिमाग हो और कोई गीत अपने आप दिमाग में कौंध जाये। हम भी
गीत बनाने वालों से यही पूछ लेते हैं-"ख्यालों में किसी के इस तरह
आया नहीं करते" । केदार शर्मा के लिखे गीत की धुन बनाई है रोशन
ने। गीत गा रहे हैं गीता दत्त और मुकेश। राज कपूर के साथ परदे
पर शायद विजय लक्ष्मी नामक अभिनेत्री हैं।



गीत के बोल:

ख़यालों में किसी के, इस तरह आया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते
ख़यालों में किसी के, इस तरह आया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते

दिलों को रौंद कर दिल अपना बहलाया नहीं करते
जो ठुकराए गए हों उनको ठुकराया नहीं करते
दिलों को रौंद कर

हँसी फूलों की दो दिन चाँदनी भी चार दिन की है
चाँदनी चार दिन की है
हँसी फूलों की दो दिन चाँदनी भी चार दिन की है
चाँदनी चार दिन की है
मिली हो चाँद सी सूरत तो इतराया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते

ख़यालों में किसी के

जिन्हें मिटना हो वो मिटने से डर जाया नहीं करते
वो डर जाया नहीं करते
जिन्हें मिटना हो वो मिटने से डर जाया नहीं करते
वो डर जाया नहीं करते
मुहब्बत करने वाले ग़म से घबराया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते

ख़यालों में किसी के

मुहब्बत का सबक सीखो, ये जाकर जलने वालों से
ये जाकर जलने वालों से
मुहब्बत का सबक सीखो, ये जाकर जलने वालों से
ये जाकर जलने वालों से
के दिल की बात भी लब तक कभी लाया नहीं करते
जो ठुकराए गए हों उनको ठुकराया नहीं करते

ख़यालों में किसी के, इस तरह आया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते

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Khayalon mein kisi ke-Baawre Nain 1950

Sunday, 5 December 2010

महफ़िल में जल उठी शमा- निराला १९५०

ये आपने ज़रूर महसूस किया होगा की शमा-परवाना
थीम पर बने गीत कुछ ज्यादा ही मशहूर होते हैं। ये
प्रतीक स्वरुप हैं उसके अलावा प्रेमी जोड़ों को भी यदा कदा
हिंदी गीत याद कर लिया करते हैं >-जैसे कि शीरीं फ़रहाद,
हीर-रांझा और लैला-मजनू ।

एक शमा परवाने की दास्तान सुनिए फिल्म निराला से।
पिछला गीत सुनते समय जाने क्यूँ ये गीत याद आ गया।
फिल्म निराला(१९५०) में देव आनंद और मधुबाला
की जोड़ी है।


फिल्म निराला का नाम याद आते ही स्वतः दिमाग में
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का नाम अपने आप कौंध जाता
है जिहोने छंद मुक्त कविताओं की ईजाद कर के आधुनिक
कवियों के लिए नए रास्ते खोले थे। रास्ते तो उन्होंने ज़रूर
खोले थे और सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय जैसे
रचनाकारों ने साधिकार उन रास्तों का प्रयोग कर के देखा
लेकिन अनेक आधुनिक हिंदी कवि कल्पनाशीलता और
शब्द सामर्थ्य के अभाव में सतही दोहराव करते से प्रतीत
होते हैं। स्तिथि तकरीबन चहुँ ओर एक समान है। जब हिंदी
गीतों में "मैं झंडू बाम हुई डार्लिंग तेरे लिए" प्रयुक्त होने का
समय आ गया है तो आप समझ ही सकते हैं कि भविष्य
कैस्टर आयल सरीखा चिकना और चमकदार है।

साहित्य क्षेत्र आपना नहीं है अतः फटे में टांग उलझाने
बजाये गीत पर चर्चा कर लेते हैं थोड़ी सी। ये हालाँकि एक
दर्द भरा गीत है लेकिन इसकी आकर्षक धुन कि वजह से
वे लोग भी चाव से सुना करते हैं जो गीत के बोलों पर ज्यादा
ध्यान नहीं दिया करते ।

प्यारेलाल संतोषी के लिखे गीत को तर्ज़ में ढाला है संगीतकार
चितलकर रामचंद्र ने और गाया है लता मंगेशकर ने। ये लता
के सबसे लोकप्रिय गीतों में से एक है। परदे पर गाने वाली
अभिनेत्री हैं मधुबाला ।



गीत के बोल:

महफ़िल में जल उठी शमा
महफ़िल में जल उठी शमा
परवाने के लिए
प्रीत बनी है दुनिया में
मर जाने के लिए

महफ़िल में जल उठी शमा
परवाने के लिए
प्रीत बनी है दुनिया में
मर जाने के लिए

चरों तरफ लगाये फेरे
फिर भी हर दम दूर रहे
उल्फत देखो आग बनी है
मिलने से मजबूर रहे
यही सजा है दुनिया में
यही सजा है दुनिया में
दीवाने के लिए
प्रीत बनी है दुनिया में
मर जाने के लिए

महफ़िल में जल उठी शमा
परवाने के लिए
प्रीत बनी है दुनिया में
मर जाने के लिए

मरने का है नाम मुहब्बत
जलने का है नाम जवानी
पत्थर दिल हैं सुनाने वाले
कहने वाला आँख का पानी
आंसू आये आँखों में
आंसू आये आँखों में
गिर जाने के लिए
प्रीत बनी है दुनिया में
मर जाने के लिए

महफ़िल में जल उठी शमा
परवाने के लिए
प्रीत बनी है दुनिया में
मर जाने के लिए
 
 
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