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Friday, 4 February 2011

छलकाएं जाम-मेरे हमदम मेरे दोस्त १९६८

फिल्म मेरे हमदम मेरे दोस्त के ४ गीत आपको सुनवा चुके
हैं। आइये एक और गीत सुनें। गीत मजरूह साहब का लिखा
हुआ है और संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का। इतने ही विवरण से
काम चला लीजिये और गीत का आनंद उठाइए। बस इतना ध्यान
दीजिये की पहले फ्रेम में जो शख्स गिटार बजा रहा है वो फ़िल्मकार
और नायक ओ पी रल्हन का कुम्भ के मेले में buइछ्दा भाई जैसा
दिख रहा है।






गीत के बोल:


छलकाएं जाम आइये आपकी आँखों के नाम
होंठों के नाम

फूल जैसे तन के जलवे, ये रँग-ओ-बू के
ये रँग-ओ-बू के
आज जाम-ए-मय उठे, इन होंठों को छू के
इन होंठों को छू के
लचकाइये शाख-ए-बदन, लहराइये ज़ुल्फों की शाम

छलकाएं जाम आइये आपकी आँखों के नाम
होंठों के नाम

आपका ही नाम लेकर, पी है सभी ने
पी है सभी ने
आप पर धड़क रहे हैं, प्यालों के सीने
प्यालों के सीने
यहाँ अजनबी कोई नहीं, ये है आपकी महफ़िल तमाम

छलकाएं जाम आइये आपकी आँखों के नाम
होंठों के नाम

कौन हर किसी की बाहें, बाहों में डाल ले
बाहों में डाल ले
जो नज़र को शाख लाए, वो ही सम्भाल ले
वो ही सम्भाल ले
दुनिया को हो औरों की धुन, हमको तो है साक़ी से काम

छलकाएं जाम आइये आपकी आँखों के नाम
होंठों के नाम

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