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Thursday, 14 June 2012

वो हसीं दर्द दे दो-हमसाया १९६८

आज एक मकान में सूखते कपड़ों के बीच एक साये(petticoat) को सूखते  
देख एक कहावत याद आई-गर्दिश में साया भी साथ छोड़ देता है। उस
कहावत के याद आते आते एक हमसाये की याद भी आई जो अचानक
से गायब हो गया था समय के थपेड़ों में। लोग क्यूँ गायब हो जाते हैं
इसका पुख्ता जवाब मिलना असंभव सा है।

खैर फिल्म हमसाया से एक बेहद लोकप्रिय गीत सुनते हैं आज जिसे
गाया है आशा भोंसले ने। इसे फिल्माया गया है माला सिन्हा और जॉय
मुखर्जी पर। माला सिन्हा पर फिल्माए लता के गाये हिट गीत आपने
बहुतेरे सुने होंगे, ये दुर्लभ सा है। क्यूँ ना हो, फिल्म में संगीत नैयर का
जो है। अब नैयर हैं तो लता के गीत आपको फिल्म में कैसे मिल सकते
हैं भाई ? गीत शेवान रिज़वी साहब ने लिखा है

गीत क्या है जनाब   आवाज़ और वाद्य यंत्रों की आवाजों का अद्भुत मिश्रण
है और किसी भी आवाज़ की अनुपस्थिति की कल्पना करना असंभव सा
है। गीत की ताल मनमोहक किस्म की है जो दिमाग की सीढियां तुरंत ही
चढ़ जाती है।




गीत के बोल:

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ

मैं तुमसे मांगती हूँ, ज़रा अपना हाथ दे दो
मुझे आज ज़िंदगी की, वो सुहागरात दे दो
जिसे ले के कुछ मांगूं, और मांग में सजा लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ

मेरी आरज़ू तो देखो, तुम्हें सामने बिठा कर
कभी दिल के पास लाकर, कभी दिलरुबा बना कर
कोई दास्तान सुन लूँ, कोई दास्तां सुना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ

मैंने प्यार के अलावा कभी तुमसे कुछ ना माँगा
तुम्हें जाने क्या समझ कर मैंने हर कदम पे चाहा
मेरा आज फैसला है तुम्हें हमसफ़र बना लूं

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
..........................................
Wo haseen dard de do-Humsaya 1968

Wednesday, 17 August 2011

है दुनिया उसी की ज़माना उसी का-काश्मीर की कली १९६१

फिल्म दुनिया के कुछ सम्पूर्ण मनोरंजन प्रदान करने वाले कलाकारों

में से एक और अपने समय में युवा पीढ़ी के प्रतिनिधि शम्मी कपूर

इस फानी दुनिया को अलविदा कह गए. काफी समय से बीमारी से

जूझ रहे शम्मी अपने अंतिम समय तक भी जीवन का भरपूर आनंद

उठाते रहे.



उनके नृत्य वाले गीत दर्शकों को ज्यादा पसंद आते हैं. मैं आज प्रस्तुत

कर रहा हूँ एक दर्द भरा गीत जो मुझे उनके ऊपर फिल्माए गए गीतों

में सबसे ज्यादा पसंद है. गीत में बहुत गहरी बात कह दी गयी है.

गीत एस एह बिहारी साहब का है और इसका संगीत तैयार किया है

ओ पी नय्यर ने. आवाज़ रफ़ी कि है और गीत में बज रही सैक्सोफोन

कि ध्वनि मनोहारी सिंह कि साँसों के सहयोग से आ रही है. गीत दिल

को छू लेने वाला है और कुछ हद तक झंझोड़ने वाला भी.







गीत के बोल:



है दुनिया उसी कि ज़माना उसी का

मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का



है दुनिया उसी कि ज़माना उसी का

मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का



लुटा जो मुसाफिर दिल के सफर में

है जन्नत ये दुनिया उसकी नज़र में

लुटा जो मुसाफिर दिल के सफर में

है जन्नत ये दुनिया उसकी नज़र में

उसी ने है लूटा मज़ा जिंदगी का

मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का



है सजदे के काबिल हर वो दीवाना

कि जो बन गया हो तस्वीर-ऐ-जाना

है सजदे के काबिल हर वो दीवाना

कि जो बन गया हो तस्वीर-ऐ-जाना

करो एहतराम उसकी दीवानगी का

मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का



बर्बाद होना जिसकी अदा हो

दर्द-ऐ-मोहब्बत जिसकी दवा हो

बर्बाद होना जिसकी अदा हो

दर्द-ऐ-मोहब्बत जिसकी दवा हो

सताएगा क्या गम उसे जिंदगी का

मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का

......................................

Hai duniya usi ki-Kashmir ki kali 1964

Thursday, 11 August 2011

बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी-एक मुसाफिर एक हसीना १९६२

दिल की धडकनें बढ़ा दिया करता था ये गीत एक ज़माने में प्रेमियों का.

यह काफी लोकप्रिय और चर्चित गीत है फिल्म एक मुसाफिर एक हसीना से.

जॉय मुखर्जी के साथ विडम्बना ये है कि वाचाल फिल्म प्रेमी उन्हें गरीबों

का शम्मी कपूर कहते हैं. शम्मी कपूर के दौर में उनका फिल्मों में पदार्पण

हुआ अतः शम्मी के हाव भाव और अभिनय का थोडा बहुत असर तो मिलेगा

ही आपको. किस्मत से फ़िल्में भी उन्हें जो मिलीं, वे सब लगभग, मधुर

संगीत वाली थीं. प्रस्तुत गीत में वे दिल के बीमार के बजाये अस्पताल से

अभी अभी ठीक हो के उठे बीमार जैसे ज्यादा दिखाई देते हैं. उनकी तुलना

में नायिका के चहरे पर चमक अधिक है. मगर बीच बीच में दिखाई देने

वाली उनकी आँखों की चमक कुछ और ही अफसाना बयां करती हैं. गीत में

नायिका साधना के चेहरे के भाव गीत की हर पंक्ति के साथ बदलते हैं जो इस

गीत का सबसे मजबूत पक्ष है.



फिल्म एक मुसाफिर एक हसीना ने तो सफलता के कीर्तिमान रच दिए थे.

फिल्म से ज्यादा मगर, इसका संगीत लोकप्रिय रहा और आज भी इसके गीत

आपको सुनाई देते होंगे. प्रस्तुत गीत का तो फिल्मांकन भी बहुत उम्दा दर्जे का

है. फिल्म निर्देशक राज खोसला की ऑंखें कुछ अलग कोण से कैमरे को घुमाया

करती थीं. ट्रोली शाट उन्हें बेहद पसंद थे जो कि आप उनकी फिल्मों के गीत

देखते वक्त अवश्य महसूस करेंगे. उनके शाट में नायक नायिका के बजाये कैमरा

ज्यादा घूमा करता था.



चम्मच वाली ढोलक बजायी जा रही है गीत में, ढोलक लटकते ही आवाज़ आनी

शुरू हो जाती है. चम्मच को ढूँढने कि कोशिश न करें, फ़िल्मी ढोलक में से कुछ

भी आवाज़ निकल सकती है. वैसे हारमोनियम भी लटकते ही बजना शुरू हो जाता

है गीत में. इसको ज्यादा ज्ञानियों के एंगल से देखें तो-प्रतीकात्मक स्वरुप ढोलक

और हारमोनियम का प्रयोग हुआ है शुरू में.



यकीनन ये गीत हिंदी फिल्म संगीत के सबसे लोकप्रिय ढोलक-हारमोनियम गीतों

में यूँ ही नहीं गिना जाता है. नैयर की इस धुन में बहुत कसावट है और गायकी

भी अपने पूरे शबाब पर है. नैयर और एस एच बिहारी को सलाम इतने रोमांटिक

गीत के निर्माण के लिए.











गीत के बोल:



बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी

मेरी ज़िन्दगी में हुज़ूर आप आए

कदम चूम लूँ या के आँखें बिछा दूँ

करूँ क्या ये मेरी समझ में न आए



बहुत शुक्रिया



करूँ पेश तुमको नज़राना दिल का

नज़राना दिल का

के बन जाए कोई अफ़साना दिल का

खुदा जाने ऐसी सुहानी घड़ी फिर

खुदा जाने ऐसी सुहानी घड़ी फिर

मेरी ज़िन्दगी में पलट के न आए



बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी

मेरी ज़िन्दगी में हुज़ूर आप आए

बहुत शुक्रिया



खुशी तो बहुत है मगर ये भी ग़म है

मगर ये भी ग़म है

के ये साथ अपना कदम दो कदम है

मगर ये मुसाफ़िर दुआ माँगता है

मगर ये मुसाफ़िर दुआ माँगता है

खुदा आपसे किसी दिन मिलाए



बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी

मेरी ज़िन्दगी में हुज़ूर आप आए

बहुत शुक्रिया



आ आ आ आ आ आ आ आ

मुझे डर है मुझमें ग़ुरूर आ न जाए

लगूँ झूमने मैं सुरूर आ न जाए

सुरूर आ न जाए

कहीं दिल ये मेरा ये तारीफ़ सुन कर

कहीं दिल ये मेरा ये तारीफ़ सुन कर

तुम्हारा बने और मुझे भूल जाए



बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी

मेरी ज़िन्दगी में हुज़ूर आप आए

बहुत शुक्रिया

.........................................

Bahut shukriya badi meharbani-Ek musafir ek haseena 1962

Tuesday, 2 August 2011

ये चाँद सा रोशन चेहरा-काश्मीर की कली १९६४

प्रस्तुत गीत में ऐसा क्या खास है जो जनता इसे बेहद पसंद करती है, खोजिये !

जवाब बहुत से हैं- शम्मी कपूर का शरारती उछल्कूदियाना अंदाज़ है, शर्मिला टैगोर
की खूबसूरती और बिनाका स्माइल है, कश्मीर की मुफ्त सैर है, एस एच बिहारी
के बोल हैं, ओ पी नय्यर का जादुई संगीत है और रफ़ी की मोहक आवाज़ है।

बस बोलों में एक बेसिक फॉल्ट है वो ये कि झील सी ऑंखें नायिका की ज़रूर होंगी
मगर नीला रंग नायक की आँखों का है। अब गीत बढ़िया हो तो फॉल्ट वॉल्ट गए
तेल लेने, है न ?

इतना विवरण पर्याप्त है या पांच पन्ने का निबंध लिखूं.............




गीत के बोल:

ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा

तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा

तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

एक चीज़ क़यामत भी है
लोगों से सुना करते थे
तुम्हें देख के मैंने माना
वो ठीक कहा करते थे
वो ठीक कहा करते थे

है चाल में तेरी ज़ालिम
कुछ ऐसी बाला का जादू
सौ बार संभाला दिल को
मगर हो के रहा बेकाबू
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा

तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

हर सुबह किरण की लाली
है रंग तेरे गालों का
हर शाम की चादर काली
साया है तेरे बालों का
हर सुबह किरण की लाली
है रंग तेरे गालों का
हर शाम की चादर काली
साया है तेरे बालों का
साया है तेरे बालों का

तू बलखाती एक नदिया
हर मौज तेरी अंगडाई
जो इन मौजों में डूबा
उसने ही दुनिया पायी
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा

तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

मैं खोज में हूँ मंजिल की
और मंजिल पास है मेरे
मुखड़े से हटा दो आँचल
हो जाएँ दूर अँधेरे
हो जाएँ दूर अँधेरे

माना के ये जलवे तेरे
कर देंगे मुझे दीवाना
जी भर के ज़रा मैं देखूं
अंदाज़ तेरा मस्ताना

तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा

तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
......................................
Ye chand sa roshan chehra-Kashmir ki kali 1964

Thursday, 21 July 2011

आप यूँ ही अगर -एक मुसाफिर एक हसीना १९६२

फिल्म के मुसाफिर एक हसीना एक musical extravaganza है
बहुत हसीन किस्म का . सारे गीत लाजवाब हैं. जॉय मुखर्जी और
साधना की जोड़ी वाली फिल्म से एक रोमांटिक गीत पेश है जो
बेहद लोकप्रिय है और एक समय में प्रेमी प्रेमिकाओं के बीच बहुत
लोकप्रिय था क्यूंकि ये एक टूल का काम करता था . टूल किस चीज़
का आप खुद समझ जाएँ. अगर आपने लड़की/लड़का पटाया है तो
आप आसानी से समझेंगे .

गीत राजा मेहँदी अली खान का है और धुन ओ पी नय्यर की. इसके
गायक कलाकारों की आवाजें आप खुद पहचानें.




गीत के बोल:


आप यूँ ही अगर हमसे मिलते रहे
देखिए एक दिन प्यार हो जाएगा
ऐसी बातें न कर ऐ हसीं जादूगर
मेरा दिल तेरी नज़रों में खो जाएगा

पीछे-पीछे मेरे आप आतीं हैं क्यों
पीछे-पीछे मेरे आप आतीं हैं क्यों
मेरी राहों में आँखें बिछाती हैं क्यों
आप आती हैं क्यों

क्या कहूँ आपसे ये भी एक राज़ है
एक दिन इसका इज़हार हो जाएगा

कैसी जादूगरी की अरे जादूगर
कैसी जादूगरी की अरे जादूगर
तेरे चहरे से हटती नहीं ये नज़र
नहीं ये नज़र

ऐसी नज़रों से देखा अगर आपने
शर्म से रँग गुलनार हो जाएगा

मैं मोहब्बत की राहों से अंजान हूँ
मैं मोहब्बत की राहों से अंजान हूँ
क्या करूँ क्या क्या करूँ परेशान हूँ
मैं परेशान हूँ

आपकी ये परेशानियाँ देखकर
मेरा दिल भी परेशान हो जाएगा
.............................
Aap yun hi agar hamse-Ek musafir ek haseena 1962

Tuesday, 19 July 2011

ये दिल ले कर नज़राना-एक बार मुस्कुरा दो १९७२

फिर आ गया सन १९७२. क्या किया जाए, उस वर्ष बहुत से मधुर गीत
जो बने थे. एक और सुन लेते हैं. बहुत दिन से ओ. पी. नैयर के संगीत
वाले गीत नहीं सुने हैं. आज आपके लिए लिया है फिल्म 'एक बार मुस्कुरा
दो' से एक गीत. फिल्म के सभी गीत काफी दफे सुने गए हैं और ये नैयर
के सबसे सफल एल्बम में गिना जाता है. नैयर की खूबी थी कि वे एक
फिल्म के लिए धुनें बनाते तो ऐसी बनाते कि श्रोता सभी गीतों को सुने.
इस चक्कर में कभी कभी एक ही फिल्म के गीत सगे भाई बहनों जैसे
सुनाई देते जैसे कि उनकी एक हिट फिल्म फागुन के गीत हैं. काम चलाऊ
धुनें उनकी फिल्मों में ने के बराबर मिलेगी आपको. उनका गाने/हिट का
अनुपात कई समकालीनों से बेहतर है.

प्रस्तुत गीत कि विशेषता ये है कि ये मुकेश कि आवाज़ में है. मुकेश से
नय्यर ने बहुत कम गीत गवाए. रफ़ी के बाद उनकी पसंद महेंद्र कपूर रहे.
प्रस्तुत गीत में मुकेश के साथ आशा भोंसले की आवाज़ है जो नय्यर खेमे
कि प्रमुख गायिका रहीं.

फिल्म के नायक हैं देव मुखर्जी और नायिका हैं तनुजा. दोनों में से शायद
तनुजा बेहतर अभिनय कर लेती हैं. गीत किस्मत फिल्म के गीत की
याद ज़रूर ही दिलाएगा जिसमें संगीत नैयर का ही है. नायक महिला के
वेश में और नायिका पुरुष भेस में. गीत शमसुल हुदा बिहारी का लिखा
हुआ है.




गीत के बोल:


ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
आ आ आ आ, आ आ, आ आ आ आ

ये दिल ले कर नज़राना आ गया तेरा दीवाना
ये दिल ले कर नज़राना आ गया तेरा दीवाना
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़

ये प्यार है गहरा सागर है डूब के तुझको जाना
ये प्यार है गहरा सागर है डूब के तुझको जाना
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़


ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
नस-नस में है बिजली कहीं जल ना जाना
कहीं जल ना जाना, जल ना जाना
सोच समझकर हमसे ज़रा दिल टकराना
ज़रा दिल टकराना, दिल टकराना
राह प्यार की बड़ी कठिन है कहाँ चला मर जाने, ओ
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़

ये दिल ले कर नज़राना आ गया तेरा दीवाना
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
टूट पड़े ये बिजली तो क़िस्मत चमके
अरे क़िस्मत चमके, क़िस्मत चमके
आग में तप कर सोना और भी दमके
अरे और भी दमके, और भी दमके
हार-जीत की बात प्यार में चली किसे समझाने
ओ दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़

ये प्यार है गहरा सागर है डूब के तुझको जाना
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़
.................................
Ye dil le ke nazrana-Ek baar muskura do 1972

Monday, 18 July 2011

उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी-नया दौर १९५७

फिल्म नया दौर के साथ कुछ रोचक किस्से जुड़े हुए हैं. सुनते हैं कि
पहले नायिका के रोल में मधुबाला को लिया जाना था. उनकी जगह
वैजयंतीमाला आ गयीं. उसी तरह से ओ पी नय्यर भी मूल योजना का
हिस्सा नहीं थे. उन्हें भी बाद में अनुबंधित किया गया.

ओ पी नय्यर ने जो गीत इस फिल्म के लिए बनाये वो आज भी उतने ही
उत्साह से सुने जाते हैं, विशेषकर एक गीत जिसे शादी ब्याह के अवसर पर
खूब बजाया और गाया जाता है. ये युगल गीत जो इधर प्रस्तुत है आज उसे
भी खूब सुना जाता है. गायक हैं आशा और रफ़ी.

साहिर लुधियानवी ने इस फिल्म के गीत लिखे हैं. साहिर ने बी. आर. चोपड़ा की
कई फिल्मों के लिए गीत लिखे, अधिकतर में संगीत एन. दत्ता या रवि का होता.
ऐसा क्यूँ इसकी कहानी फिर कभी, फिलहाल ये गीत सुनिए.




गीत के बोल:

हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी

हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी

कुँवारियों का दिल मचले
कुँवारियों का दिल मचले
जिन्द मेरिये

जब ऐसे चिकने चेहरे
जब ऐसे चिकने चेहरे

तो कैसे ना नज़र फिसले
तो कैसे ना नज़र फिसले
जिन्द मेरिये

हो, रुत प्यार करन की आई
रुत प्यार करन की आई

हो, रुत प्यार करन की आई
हो, रुत प्यार करन की आई
के बेरियों के बेर पक गये
के बेरियों के बेर पक गये
जिन्द मेरिये

कभी डाल इधर भी फेरा
कभी डाल इधर भी फेरा

के तक-तक नैन थक गये
के तक-तक नैन थक गये
जिन्द मेरिये

हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े

हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े

के जहाँ मेरा यार बसता
के जहाँ मेरा यार बसता
जिन्द मेरिये

पानी लेने के बहाने आजा
पानी लेने के बहाने आजा

के तेरा मेरा इक रस्ता
के तेरा मेरा इक रस्ता
जिन्द मेरिये

हो, तुझे चाँद के बहाने देखूँ
हो, तुझे चाँद के बहाने देखूँ

तुझे चाँद के बहाने देखूँ
तुझे चाँद के बहाने देखूँ

तू छत पर आजा गोरिये
तू छत पर आजा गोरिये
जिन्द मेरिये

अभी छेड़ेंगे गली के सब लड़के
अभी छेड़ेंगे गली के सब लड़के

के चाँद बैरी छिप जाने दे
के चाँद बैरी छिप जाने दे
जिन्द मेरिये

हो, तेरी चाल है नागन जैसी
हो, तेरी चाल है नागन जैसी

तेरी चाल है नागन जैसी
हो, तेरी चाल है नागन जैसी

रे जोगी तुझे ले जायेंगे
रे जोगी तुझे ले जायेंगे
जिन्द मेरिये

जायेँ कहीं भी मगर हम सजना
हो, जायेँ कहीं भी मगर हम सजना

यह दिल तुझे दे जायेंगे
यह दिल तुझे दे जायेंगे
जिन्द मेरिये
...................................
Ude jab jab zulfen teri-Naya daur 1957

Friday, 1 July 2011

अकेली हूँ मैं पिया आ-सम्बन्ध १९६९

आशा भोंसले के गाये चुनिन्दा अलग-हट-के गीतों
में से एक आपको आज सुनवाते हैं। ये उपशास्त्रीय सा
सुनाई देता गीत है फिल्म सम्बन्ध से। कवि प्रदीप
के बोलों पर धुन बनाई है ओ. पी. नैयर ने। विडियो
में ये गीत संक्षिप्त है अतः आपको ऑडियो और विडियो
दोनों के लिंक दिए जा रहे हैं। नैयर की बहुआयामी प्रतिभा
को दर्शाता है राग शिवरंजिनी पर आधारित यह गीत ।
नैयर को भारतीय शास्त्रीय संगीत में प्रयुक्त होने वाले वाद्य
बहुत पसंद थे और इस गीत में भी उन वाद्यों में से कुछ
का प्रचुर प्रयोग हुआ है।








गीत के बोल:

मैं ख़ुद चन्द्रमुखी हूँ चमक से डरती हूँ
अपने मुखड़े की अनोखी दमक से डरती हूँ
ये सोलहवाँ जो लगा साल इसने मार दिया
अब तो पायल की ज़रा सी छमक से डरती हूँ

अकेली हूँ मैं पिया आ
अकेली हूँ मैं पिया आ
रूप नागर की कुंवरी तरसे
रूप नागर की कुंवरी तरसे
राजा प्रीत निभा

अकेली हूँ मैं पिया आ

रूप की धुप में जली सैयां
रूप की धुप में जली सैयां
कर दे प्यार की शीतल छैयां
रूप की धुप में जली सैयां
कर दे प्यार की शीतल छैयां
अब और मत जला

अकेली हूँ मैं पिया आ

जब-जब देखूँ मैं दर्पण में
जब-जब देखूँ मैं दर्पण में
आग सी लगती नाज़ुक तन में
जब-जब देखूँ मैं दर्पण में
आग सी लगती नाज़ुक तन में
का करूँ तू ही बता

अकेली हूँ मैं पिया आ
.............................
Akeli hoon main piya aa-Sambandh 1969

Monday, 20 June 2011

तुम रूठ के मत जाना- फागुन १९५८

मधुबाला के नाम से ये गीत मुझे बार बार याद आ जाता है-
मैं सोया अँखियाँ मीचे। इस गीत को सुनते सुनते मुझे भी
नींद आ जाती है। गीत के विडियो ऑडियो दोनों में नशा
सा है। गीत इतनी सौम्यता से गाया और फिल्माया गया है
कि इसकी सादगी से भी नशा सा होने लगता है। एक बार इसे
अवश्य सुनें और देखें।

आज आपको एक और गीत सुनवाते हैं फिल्म फागुन से।
ये भी युगल गीत है आशा और रफ़ी की आवाजों में। कमर
जलालाबादी के सरल बोलों पर धुन तैयार की है संगीतकार
ओ पी नय्यर ने। फागुन फिल्म सन १९५८ की एक बड़ी हिट
फिल्म थी। सफलता में फिल्म के संगीत का भी बहुत बड़ा
योगदान था।

एक कविता पाठ की तरह सा ये गीत विरह गीत के रूप में प्रस्तुत
किया गया है फिल्म में। जैसे फिल्म फागुन के गीत एक दूसरे के
निकट के सम्बन्धी से सुनाई देते हैं वैसे ही इस गीत में रोती हुई
नायिका सुचित्रा सेन की दूर की रिश्तेदार सी दिखाई देती है।





गीत के बोल:


तुम रूठ के मत जाना
तुम रूठ के मत जाना
मुझसे क्या शिकवा दीवाना है दीवाना
मुझसे क्या शिकवा दीवाना है दीवाना

क्यों हो गया बेगाना
क्यों हो गया बेगाना
तेरा-मेरा क्या रिश्ता ये तूने नहीं जाना
तेरा-मेरा क्या रिश्ता ये तूने नहीं जाना

मैं लाख हूँ बेगाना
मैं लाख हूँ बेगाना
फिर ये तड़प कैसी इतना तो बता जाना
फिर ये तड़प कैसी इतना तो बता जाना

फ़ुरसत हो तो आ जाना
फ़ुरसत हो तो आ जाना
अपने ही हाथों से मेरी दुनिया मिटा जाना
अपने ही हाथों से मेरी दुनिया मिटा जाना

तुम रूठ के मत जाना
तुम रूठ के मत जाना
मुझसे क्या शिकवा दीवाना है दीवाना
मुझसे क्या शिकवा दीवाना है दीवाना

.................................
Tum rooth ke mat jaana-Phagun 1958

Tuesday, 11 January 2011

मेरी नींदों में तुम-नया अंदाज़ १९५६

शमशाद बेगम की स्पष्ट और गूँज भरी आवाज़ के संगीत प्रेमी कायल
हैं। एक अमर युगल गीत सुनिए किशोर कुमार और शमशाद बेगम
की आवाज़ में। किशोर कुमार और मीना कुमारी पर फिल्माए गए इस
गीत के हजारों दीवाने हैं और आज भी उत्ब्ने ही चाव से इसे सुनते हैं जितने
चाव से वे फिल्म की रिलीज़ के आस पास सुना करते थे। अब तो साधन
बहुत हो गए हैं गीत सुनने के इसलिए पुराने गीतों को अपनी पसंद
अनुसार सुनना आसान हो गया है। ये एक goose bump पैदा करने वाला
गीत है।




गीत के बोल:

किशोर: मेरी नींदों में तुम, मेरे ख़्वाबों में तुम
हो चुके हम तुम्हारी मोहब्बत में गुम
मेरी नींदों में तुम, मेरे ख़्वाबों में तुम
हो चुके हम तुम्हारी मोहब्बत में गुम

शमशाद: मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन
मेरी नज़रों ने तुझ को लिया आज चुन
मन की बिना की धुन, तू बालम आज सुन
मेरी नज़रों ने तुझ को लिया आज चुन
मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन

शमशाद: मेरी दिल की लगी तू, मेरी जिंदगी तू
मेरी हर नज़र है तेरी दास्ताँ
मेरी दिल की लगी तू, मेरी जिंदगी तू
मेरी हर नज़र है तेरी दास्ताँ

किशोर: मेरे दिल की बहारें तुम्ही को पुकारें
तुम्ही से है आबाद मेरा जहां
मेरे दिल की बहारें तुम्ही को पुकारें
तुम्ही से है आबाद मेरा जहां

शमशाद: तू मेरा नाज़ है, मेरा अंदाज़ है, दिल की आवाज़ है

किशोर: मेरी नींदों में तुम, मेरे ख़्वाबों में तुम
हो चुके हम तुम्हारी मोहब्बत में गुम

शमशाद: मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन
मेरी नज़रों ने तुझ को लिया आज चुन
मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन
मेरी नज़रों ने तुझ को लिया आज चुन
मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन

शमशाद: दिल पे छाई ख़ुशी है लबों पर हंसी है
खिली है तेरे प्यार की चांदनी
किशोर: घूमती है निगाहें नशा छा रहा है
के दिल गा रहा है तेरी रागिनी
शमशाद: होले होले सजन मेरा कहता है मन
अब तो लागी लगन

किशोर: मेरी नींदों में तुम, मेरे ख़्वाबों में तुम
हो चुके हम तुम्हारी मोहब्बत में गुम
शमशाद: मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन

शमशाद: तुम मेरे हो गए हो तो ये चाँद तारे
ये सारे नज़ारे मेरे हो गए
किशोर: दिल हुआ है दीवाना समा है सुहाना
कहें क्या तेरे प्यार में खो गए
शमशाद: रात गाने लगी गुनगुनाने लगी
नींद छाने लगी

किशोर: मेरी नींदों में तुम, मेरे ख़्वाबों में तुम
हो चुके हम तुम्हारी मोहब्बत में गुम

शमशाद: मन की बीना की धुन, तू बालम आज सुन
........................................
Meri neendon mein tum-Naya Andaz 1956

Monday, 10 January 2011

बूझ मेरा क्या नाम रे-सी आइ डी १९५६

शमशाद बेगम के गाये गीतों में अलग ही बात हुआ करती थी। स्पष्टता
और खनक उनकी आवाज़ के दो विशेष गुण हैं। आइये उनकी आवाज़ में
सुनें एक सदाबहार अमर गीत फिल्म सी आइ डी से। ओ पी नय्यर का
संगीत है और बोल मजरूह के हैं। इस गीत को सुने हुए काफी दिन हो गए
तो मैंने सोचा सुनते सुनते आपको भी सुना दिया जाए। परदे पर
कौन कलाकार गा रहा है, पहचानिए ज़रा।

बूझ मेरा क्या नाम रे -विडियो गीत।



गीत के बोल:

बूझ मेरा क्या नाम रे
नदी किनारे गाँव रे

पीपल झूमे मोरे आँगना
ठण्डी ठण्डी छाँव रे

लोग कहे मुझे बाँवरी
मेरे उलझे उलझे बाल
मेरा काला काला तिल है
मेरे गोरे गोरे गाल
मैं चली जिस गली
झूमे सारा गाँव रे

बूझ मेरा क्या नाम रे
नदी किनारे गाँव रे

पीपल झूमे मोरे आँगना
ठण्डी ठण्डी छाँव रे

दिल वालों के बीच में
मेरी अखियाँ हैं बदनाम
हूँ एक पहेली फिर भी
कोई बूझे मेरा नाम
मैं चली मनचली
सबका मन ललचाऊँ रे

बूझ मेरा क्या नाम रे
नदी किनारे गाँव रे

पीपल झूमे मोरे आँगना
ठण्डी ठण्डी छाँव रे
.................................
Boojh mera kya naam re- C.I.D. 1956

Sunday, 9 January 2011

कुछ हम भी दीवाने हैं-नया अंदाज़ १९५६

क़व्वाली हम अक्सर पक्के कव्वालों की आवाज़ में सुनना ही
पसंद करते हैं। फ़िल्मी कलाकारों ने भी कव्वालियाँ गाई हैं ।
आज आपको सुनवाते हैं एक कम सुनी हुई कव्वाली जो फिल्म
नया अंदाज़ से ली गाई है। इसे परदे पर और परदे के पीछे दोनों
जगह किशोर कुमार गा रहे हैं




गीत के बोल:

अपना तो ज़माने में बस इतना फ़साना है
अपना तो ज़माने में बस इतना फ़साना है
इतना ही फ़साना है
बस इतना फ़साना है

कुछ हम भी दीवाने हैं
कुछ दिल भी दीवाना है

कुछ हम भी दीवाने हैं
कुछ दिल भी दीवाना है

हमसे तो कोई पूछे वो मस्त नज़र क्या है
हमसे तो कोई पूछे वो मस्त नज़र क्या है
वो मस्त नज़र क्या है
वो मस्त नज़र क्या है

जीने का सहारा है मरने का बहाना है
जीने का सहारा है मरने का बहाना है
मरने का बहाना है
मरने का बहाना है

कुछ हम भी दीवाने हैं
कुछ दिल भी दीवाना है

भूले से कभी हमने कातिल ना कहा उनको
भूले से कभी हमने कातिल ना कहा उनको
कातिल ना कहा उनको

दिल जिनकी अदाओं का खामोश निशाना है
दिल जिनकी अदाओं का खामोश निशाना है
खामोश निशाना है
खामोश निशाना है

कुछ हम भी दीवाने हैं
कुछ दिल भी दीवाना है

ये राज़ है उल्फत का
दुनिया इसे क्या जाने
ये राज़ है उल्फत का
दुनिया इसे क्या जाने
ये राज़ है उल्फत का
दुनिया इसे क्या जाने
दुनिया इसे क्या जाने

नज़रों का चूर्ण ही नज़रों का मिलाना है
नज़रों का चूर्ण ही नज़रों का मिलाना है
नज़रों का मिलाना है
नज़रों का मिलाना है

कुछ हम भी दीवाने हैं
कुछ दिल भी दीवाना है

इन शोख हसीनों पर हम और लुटायें क्या
इन शोख हसीनों पर हम और लुटायें क्या
हम और लुटायें क्या

कुछ पास नहीं अपने एक दिल का खज़ाना है
कुछ पास नहीं अपने एक दिल का खज़ाना है
एक दिल का खज़ाना है
एक दिल का खज़ाना है

कुछ हम भी दीवाने हैं
कुछ दिल भी दीवाना है

मंजिल है कहना ऐ दिल हम इश्क का मारों की
मंजिल है कहना ऐ दिल हम इश्क का मारों की
हम इश्क का मारों की

हम जा के जहाँ बैठें वो अपना ठिकाना है
हम जा के जहाँ बैठें वो अपना ठिकाना है
वो अपना ठिकाना है
वो अपना ठिकाना है

कुछ हम भी दीवाने हैं
कुछ दिल भी दीवाना है

कुछ हम भी दीवाने हैं
कुछ दिल भी दीवाना है
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Kuchh ham bhi deewane hain-Naya Andaz 1956

Saturday, 1 January 2011

बोल परदेसिया ये तूने क्या किया-मंगू १९५४

मधुर गीतों की श्रृंखला में अगला गीत पेश है सन १९५ की फिल्म
मंगू से। परदेसी शब्द से बॉलीवुड का खासा लगाव रहा है। परदेसी शब्द
के जिक्र वाले मधुर गीतों में से एक ये है आशा भोंसले की आवाज़ में।
गीत की धुन तबियत से तैयार की गई है संगीतकार ओ पी नय्यर द्वारा।



गीत के बोल:

बोल परदेसिया ये तूने क्या किया
अपना बना के सैयां हाय दगा दे दिया
बोल परदेसिया ये तूने क्या किया
अपना बना के सैयां हाय दगा दे दिया
बोल परदेसिया

किसको मैं जाऊं समझाने
दर्द मेरा जब तू ना जाने
जब तू ना जाने

बोल परदेसिया ये तूने क्या किया
अपना बना के सैयां हाय दगा दे दिया
बोल परदेसिया

जब तोहे नहीं पाऊंगी मैं
? आग-ए-वफ़ा ? किस जाऊंगी मैं
जाऊंगी मैं

बोल परदेसिया ये तूने क्या किया
अपना बना के सैयां हाय दगा दे दिया
बोल परदेसिया

इतना ही बतलाते जाना
मेरी गली कब होगा आना
होगा आना

बोल परदेसिया ये तूने क्या किया
अपना बना के ज़ालिम हाय दगा दे दिया
बोल परदेसिया

Monday, 6 December 2010

आप से मैंने मेरी जान-ये रात फिर नहीं आएगी १९६६

ओ पी नय्यर के संगीत निर्देशन वाली एक और फिल्म है
जिसके सभी गीत सुने जाते हैं और ये तय करना मुश्किल
होता है कि कौन सा बेहतर है। ओ पी नय्यर के लिए शायद
ये चुनौती भरा विषय रहा होगा एक भूतिया फिल्म के लिए
संगीत तैयार करना। हिंदी सस्पेंस फिल्मों का खाका अक्सर
भूतों के इर्द गिर्द घूमा करता है। इस गीत में नायक नायिका
दोनों स्मार्ट दिख रहे हैं। मैंने सुन्दर शब्द का प्रयोग इसलिए
नहीं किया कि सुन्दरता शब्द शायद स्त्रियों के लिए सुरक्षित
है। पुराने ज़माने में पुरुषों का चेहरा गोरा बनाने वाली क्रीम
नहीं आया करती थी।

गीत फिल्माया गया है विश्वजीत और शर्मिला टेगोर पर।
शर्मिला अपनी चित-परिचित घबराहट मिश्रित मुस्कराहट
के साथ प्रस्तुत हैं। ये एक ऐसा भाव था जो उनका ट्रेड मार्क
भाव कहा जा सकता है।

गीत के बोल लाजवाब हैं और इसको टाइप करने में भी आनंद की
अनुभूति हो रही है। इसको आप कह सकते हैं आदर्श/संपूर्ण युगल
गीत । एक उम्दा किस्म का रोमांटिक गीत सुनकर दिल बाग़ बाग़ हो
उठता है। गीत लिखा है शम्सुल हुदा बिहारी(SH Bihari) ने।




गीत के बोल:

आपसे मैंने मेरी जान मोहब्बत की है
आप चाहें तो मेरी जान भी ले सकती हैं
आप जब हैं तो मेरे पास मेरा सब कुछ है
जान क्या चीज है ईमान भी ले सकती हैं

आप से मैंने मेरी जान

आपको मैंने मोहब्बत का खुदा समझा है
आप कहिये कि मुझे आपने क्या समझा है
ज़िन्दगी क्या है मोहब्बत की मेहरबानी है
दर्द को मैंने हकीकत में दवा समझा है

आपसे मैंने मेरी जान मोहब्बत की है
आप चाहें तो मेरी जान भी ले सकती हैं

आप से मैंने मेरी जान

दिल वही है जो सदा गीत वफ़ा के गाये
प्यार करता हो जिसे प्यार ही करता जाए
सैंकड़ों साल जीने से बेहतर है वो घडी
हाथ में जब हाथ हो जब यार का मौत आ जाए

आपसे मैंने मेरी जान मोहब्बत की है
आप चाहें तो मेरी जान भी ले सकते हैं

आप जब हैं तो मेरे पास मेरा सब कुछ है
जान क्या चीज है ईमान भी ले सकती हैं

आपसे मैंने मेरी जान

छम छम घुँघरू बोले-फागुन १९५८

लौट के बुद्धू घर को आये इशटाईल में फिर लौट चलें
काले पीले ज़माने की ओर। सुनिए एक झकास गाना
फिल्म फागुन से। ये है आशा की आवाज़ में एकल गीत।
इसे फिल्माया गया है हिंदी सिनेमा की वीनस मधुबाला
पर। कमर जलालाबादी के बोल, ओ पी नय्यर का संगीत
और आशा की आवाज़ साथ में मधुबाला की मुस्कराहट।
भारत भूषण भी दिखते हैं गीत में, उनकी मुस्कराहट
से कोई फर्क नहीं पढता। वस्तुतः वे गीत में नहीं
प्रकट होते तो भी काम चल जाता।

ओ पी नय्यर ऐसे संगीतकार है एस डी बर्मन के अलावा
जिनकी फिल्मों के एक नहीं वरन पूरे गीत सुनती है जनता।
अंदाज़ा लगाइए दोन ने कितनी मेहनत की होगी ये जानने
में कि जनता को कैसे लुभाया जाए। इन दोनों के कुछ
ही एल्बम औसत दर्जे के होंगे जिनमें से जनता एक आध
गीत सुनती होगी। उदाहरण के लिए फागुन फिल्म के सभी
गीत चाव से सुने जाते हैं।



गीत के बोल:

छम छम घुँघरू बोले
मेरी चाल नशीली डोले
मन गाने लगा समझाने लगा
तू आज किसी की हो ले

छम छम घुँघरू बोले
मेरी चाल नशीली डोले
मन गाने लगा समझाने लगा
तू आज किसी की हो ले

छम छम घुँघरू बोले

जब से तू दिल में सामने लगा
ज़िन्दगी में नया मज़ा आने लगा
जब से तू दिल में सामने लगा
ज़िन्दगी में नया मज़ा आने लगा
बदली है चाल खिल गए गाल
आँखों में सवाल बिखरे हैं बाल

छम छम घुँघरू बोले
मेरी चाल नशीली डोले
मन गाने लगा समझाने लगा
तू आज किसी की हो ले

छम छम घुँघरू बोले


याद रहे पिया मेरा प्यार सच्चा जी
फिर कभी आपसे मिलेंगे अच्छा जी
याद रहे पिया मेरा प्यार सच्चा जी
फिर कभी आपसे मिलेंगे अच्छा जी
आपके ग़ुलाम देते हैं सलाम
देख लिया नाच लाओ जी इनाम

छम छम घुँघरू बोले
मेरी चाल नशीली डोले
मन गाने लगा समझाने लगा
तू आज किसी की हो ले

छम छम घुँघरू बोले
...............................
Chham chham ghunghroo bole-Phagun 1958
 
 
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