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Thursday, 14 June 2012

वो हसीं दर्द दे दो-हमसाया १९६८

आज एक मकान में सूखते कपड़ों के बीच एक साये(petticoat) को सूखते  
देख एक कहावत याद आई-गर्दिश में साया भी साथ छोड़ देता है। उस
कहावत के याद आते आते एक हमसाये की याद भी आई जो अचानक
से गायब हो गया था समय के थपेड़ों में। लोग क्यूँ गायब हो जाते हैं
इसका पुख्ता जवाब मिलना असंभव सा है।

खैर फिल्म हमसाया से एक बेहद लोकप्रिय गीत सुनते हैं आज जिसे
गाया है आशा भोंसले ने। इसे फिल्माया गया है माला सिन्हा और जॉय
मुखर्जी पर। माला सिन्हा पर फिल्माए लता के गाये हिट गीत आपने
बहुतेरे सुने होंगे, ये दुर्लभ सा है। क्यूँ ना हो, फिल्म में संगीत नैयर का
जो है। अब नैयर हैं तो लता के गीत आपको फिल्म में कैसे मिल सकते
हैं भाई ? गीत शेवान रिज़वी साहब ने लिखा है

गीत क्या है जनाब   आवाज़ और वाद्य यंत्रों की आवाजों का अद्भुत मिश्रण
है और किसी भी आवाज़ की अनुपस्थिति की कल्पना करना असंभव सा
है। गीत की ताल मनमोहक किस्म की है जो दिमाग की सीढियां तुरंत ही
चढ़ जाती है।




गीत के बोल:

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ

मैं तुमसे मांगती हूँ, ज़रा अपना हाथ दे दो
मुझे आज ज़िंदगी की, वो सुहागरात दे दो
जिसे ले के कुछ मांगूं, और मांग में सजा लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ

मेरी आरज़ू तो देखो, तुम्हें सामने बिठा कर
कभी दिल के पास लाकर, कभी दिलरुबा बना कर
कोई दास्तान सुन लूँ, कोई दास्तां सुना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ

मैंने प्यार के अलावा कभी तुमसे कुछ ना माँगा
तुम्हें जाने क्या समझ कर मैंने हर कदम पे चाहा
मेरा आज फैसला है तुम्हें हमसफ़र बना लूं

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
..........................................
Wo haseen dard de do-Humsaya 1968

Thursday, 11 August 2011

बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी-एक मुसाफिर एक हसीना १९६२

दिल की धडकनें बढ़ा दिया करता था ये गीत एक ज़माने में प्रेमियों का.

यह काफी लोकप्रिय और चर्चित गीत है फिल्म एक मुसाफिर एक हसीना से.

जॉय मुखर्जी के साथ विडम्बना ये है कि वाचाल फिल्म प्रेमी उन्हें गरीबों

का शम्मी कपूर कहते हैं. शम्मी कपूर के दौर में उनका फिल्मों में पदार्पण

हुआ अतः शम्मी के हाव भाव और अभिनय का थोडा बहुत असर तो मिलेगा

ही आपको. किस्मत से फ़िल्में भी उन्हें जो मिलीं, वे सब लगभग, मधुर

संगीत वाली थीं. प्रस्तुत गीत में वे दिल के बीमार के बजाये अस्पताल से

अभी अभी ठीक हो के उठे बीमार जैसे ज्यादा दिखाई देते हैं. उनकी तुलना

में नायिका के चहरे पर चमक अधिक है. मगर बीच बीच में दिखाई देने

वाली उनकी आँखों की चमक कुछ और ही अफसाना बयां करती हैं. गीत में

नायिका साधना के चेहरे के भाव गीत की हर पंक्ति के साथ बदलते हैं जो इस

गीत का सबसे मजबूत पक्ष है.



फिल्म एक मुसाफिर एक हसीना ने तो सफलता के कीर्तिमान रच दिए थे.

फिल्म से ज्यादा मगर, इसका संगीत लोकप्रिय रहा और आज भी इसके गीत

आपको सुनाई देते होंगे. प्रस्तुत गीत का तो फिल्मांकन भी बहुत उम्दा दर्जे का

है. फिल्म निर्देशक राज खोसला की ऑंखें कुछ अलग कोण से कैमरे को घुमाया

करती थीं. ट्रोली शाट उन्हें बेहद पसंद थे जो कि आप उनकी फिल्मों के गीत

देखते वक्त अवश्य महसूस करेंगे. उनके शाट में नायक नायिका के बजाये कैमरा

ज्यादा घूमा करता था.



चम्मच वाली ढोलक बजायी जा रही है गीत में, ढोलक लटकते ही आवाज़ आनी

शुरू हो जाती है. चम्मच को ढूँढने कि कोशिश न करें, फ़िल्मी ढोलक में से कुछ

भी आवाज़ निकल सकती है. वैसे हारमोनियम भी लटकते ही बजना शुरू हो जाता

है गीत में. इसको ज्यादा ज्ञानियों के एंगल से देखें तो-प्रतीकात्मक स्वरुप ढोलक

और हारमोनियम का प्रयोग हुआ है शुरू में.



यकीनन ये गीत हिंदी फिल्म संगीत के सबसे लोकप्रिय ढोलक-हारमोनियम गीतों

में यूँ ही नहीं गिना जाता है. नैयर की इस धुन में बहुत कसावट है और गायकी

भी अपने पूरे शबाब पर है. नैयर और एस एच बिहारी को सलाम इतने रोमांटिक

गीत के निर्माण के लिए.











गीत के बोल:



बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी

मेरी ज़िन्दगी में हुज़ूर आप आए

कदम चूम लूँ या के आँखें बिछा दूँ

करूँ क्या ये मेरी समझ में न आए



बहुत शुक्रिया



करूँ पेश तुमको नज़राना दिल का

नज़राना दिल का

के बन जाए कोई अफ़साना दिल का

खुदा जाने ऐसी सुहानी घड़ी फिर

खुदा जाने ऐसी सुहानी घड़ी फिर

मेरी ज़िन्दगी में पलट के न आए



बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी

मेरी ज़िन्दगी में हुज़ूर आप आए

बहुत शुक्रिया



खुशी तो बहुत है मगर ये भी ग़म है

मगर ये भी ग़म है

के ये साथ अपना कदम दो कदम है

मगर ये मुसाफ़िर दुआ माँगता है

मगर ये मुसाफ़िर दुआ माँगता है

खुदा आपसे किसी दिन मिलाए



बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी

मेरी ज़िन्दगी में हुज़ूर आप आए

बहुत शुक्रिया



आ आ आ आ आ आ आ आ

मुझे डर है मुझमें ग़ुरूर आ न जाए

लगूँ झूमने मैं सुरूर आ न जाए

सुरूर आ न जाए

कहीं दिल ये मेरा ये तारीफ़ सुन कर

कहीं दिल ये मेरा ये तारीफ़ सुन कर

तुम्हारा बने और मुझे भूल जाए



बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी

मेरी ज़िन्दगी में हुज़ूर आप आए

बहुत शुक्रिया

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Bahut shukriya badi meharbani-Ek musafir ek haseena 1962

Thursday, 21 July 2011

आप यूँ ही अगर -एक मुसाफिर एक हसीना १९६२

फिल्म के मुसाफिर एक हसीना एक musical extravaganza है
बहुत हसीन किस्म का . सारे गीत लाजवाब हैं. जॉय मुखर्जी और
साधना की जोड़ी वाली फिल्म से एक रोमांटिक गीत पेश है जो
बेहद लोकप्रिय है और एक समय में प्रेमी प्रेमिकाओं के बीच बहुत
लोकप्रिय था क्यूंकि ये एक टूल का काम करता था . टूल किस चीज़
का आप खुद समझ जाएँ. अगर आपने लड़की/लड़का पटाया है तो
आप आसानी से समझेंगे .

गीत राजा मेहँदी अली खान का है और धुन ओ पी नय्यर की. इसके
गायक कलाकारों की आवाजें आप खुद पहचानें.




गीत के बोल:


आप यूँ ही अगर हमसे मिलते रहे
देखिए एक दिन प्यार हो जाएगा
ऐसी बातें न कर ऐ हसीं जादूगर
मेरा दिल तेरी नज़रों में खो जाएगा

पीछे-पीछे मेरे आप आतीं हैं क्यों
पीछे-पीछे मेरे आप आतीं हैं क्यों
मेरी राहों में आँखें बिछाती हैं क्यों
आप आती हैं क्यों

क्या कहूँ आपसे ये भी एक राज़ है
एक दिन इसका इज़हार हो जाएगा

कैसी जादूगरी की अरे जादूगर
कैसी जादूगरी की अरे जादूगर
तेरे चहरे से हटती नहीं ये नज़र
नहीं ये नज़र

ऐसी नज़रों से देखा अगर आपने
शर्म से रँग गुलनार हो जाएगा

मैं मोहब्बत की राहों से अंजान हूँ
मैं मोहब्बत की राहों से अंजान हूँ
क्या करूँ क्या क्या करूँ परेशान हूँ
मैं परेशान हूँ

आपकी ये परेशानियाँ देखकर
मेरा दिल भी परेशान हो जाएगा
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Aap yun hi agar hamse-Ek musafir ek haseena 1962

Tuesday, 19 July 2011

ये दिल ले कर नज़राना-एक बार मुस्कुरा दो १९७२

फिर आ गया सन १९७२. क्या किया जाए, उस वर्ष बहुत से मधुर गीत
जो बने थे. एक और सुन लेते हैं. बहुत दिन से ओ. पी. नैयर के संगीत
वाले गीत नहीं सुने हैं. आज आपके लिए लिया है फिल्म 'एक बार मुस्कुरा
दो' से एक गीत. फिल्म के सभी गीत काफी दफे सुने गए हैं और ये नैयर
के सबसे सफल एल्बम में गिना जाता है. नैयर की खूबी थी कि वे एक
फिल्म के लिए धुनें बनाते तो ऐसी बनाते कि श्रोता सभी गीतों को सुने.
इस चक्कर में कभी कभी एक ही फिल्म के गीत सगे भाई बहनों जैसे
सुनाई देते जैसे कि उनकी एक हिट फिल्म फागुन के गीत हैं. काम चलाऊ
धुनें उनकी फिल्मों में ने के बराबर मिलेगी आपको. उनका गाने/हिट का
अनुपात कई समकालीनों से बेहतर है.

प्रस्तुत गीत कि विशेषता ये है कि ये मुकेश कि आवाज़ में है. मुकेश से
नय्यर ने बहुत कम गीत गवाए. रफ़ी के बाद उनकी पसंद महेंद्र कपूर रहे.
प्रस्तुत गीत में मुकेश के साथ आशा भोंसले की आवाज़ है जो नय्यर खेमे
कि प्रमुख गायिका रहीं.

फिल्म के नायक हैं देव मुखर्जी और नायिका हैं तनुजा. दोनों में से शायद
तनुजा बेहतर अभिनय कर लेती हैं. गीत किस्मत फिल्म के गीत की
याद ज़रूर ही दिलाएगा जिसमें संगीत नैयर का ही है. नायक महिला के
वेश में और नायिका पुरुष भेस में. गीत शमसुल हुदा बिहारी का लिखा
हुआ है.




गीत के बोल:


ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
आ आ आ आ, आ आ, आ आ आ आ

ये दिल ले कर नज़राना आ गया तेरा दीवाना
ये दिल ले कर नज़राना आ गया तेरा दीवाना
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़

ये प्यार है गहरा सागर है डूब के तुझको जाना
ये प्यार है गहरा सागर है डूब के तुझको जाना
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़


ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
नस-नस में है बिजली कहीं जल ना जाना
कहीं जल ना जाना, जल ना जाना
सोच समझकर हमसे ज़रा दिल टकराना
ज़रा दिल टकराना, दिल टकराना
राह प्यार की बड़ी कठिन है कहाँ चला मर जाने, ओ
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़

ये दिल ले कर नज़राना आ गया तेरा दीवाना
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
टूट पड़े ये बिजली तो क़िस्मत चमके
अरे क़िस्मत चमके, क़िस्मत चमके
आग में तप कर सोना और भी दमके
अरे और भी दमके, और भी दमके
हार-जीत की बात प्यार में चली किसे समझाने
ओ दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़

ये प्यार है गहरा सागर है डूब के तुझको जाना
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़
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Ye dil le ke nazrana-Ek baar muskura do 1972

Wednesday, 15 June 2011

उड़ के पवन के...रुक जा ऐ हवा-शागिर्द १९६७

एक मधुर गीत सुनवाते हैं आपको लता मंगेशकर
की आवाज़ में। मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे गीत की
तर्ज़ बनाई है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने।

सायरा बानो और जॉय मुखर्जी पर फिल्माया गया ये गीत
आपको फिल्म शागिर्द में देखने को मिलेगा। कर्णप्रिय होने के
साथ साथ दर्शनीय गीत है और इसका आकर्षण पक्षियों की
आवाजें प्रचुर मात्र में सुनाई देती हैं जो इसे खूबसूरत बनाती हैं।

अल्हड, मस्त बोल और अदाओं वाला ये गीत रात्रि के वक़्त सुनने
में सबसे ज्यादा आनंद देता है।



गीत के बोल:


हो ओ ओ ओ
रुक जा, रुक जा, रुक जा

उड़ के पवन के रंग चलूंगी
मैं भी तिहारे संग चलूंगी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार


उड़ के पवन के रंग चलूंगी
मैं भी तिहारे संग चलूंगी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार


परबत परबत तेरी महक है
लट मेरी भी दूर तलक है
देखो रे डाली डाली
देखो रे डाली डाली
खिली मेरे तन की लाली
हो ओ ओ ओ ओ ओ रुक जा
जो तू है वोही मैं हूँ

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार

झरना दर्पण ले के निहारे
बूंदों का गहना तन पे संवारे
लहरें झूला झुलायें
लहरें झूला झुलायें
मेरे लिए गीत गएँ
हो ओ ओ ओ ओ ओ रुक जा
पनघट की, मैं हूँ गोरी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा, जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार

हो ओ ओ, हो ओ ओ

देख ज़रा सा तू मुझे छू के
पग बजते हैं बिन घुँघरू के
जो तेरी ताल में है
जो तेरी ताल में है
वही मेरी चाल में है
हो ओ ओ ओ ओ ओ रुक जा
मैं हिरनिया, मैं चकोरी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार

उड़ के पवन के रंग चलूंगी
मैं भी तिहारे संग चलूंगी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
...........................
Ud ke pawan ke...ruk ja ae hawa-Shagird 1967
 
 
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