आशा भोंसले के गाये चुनिन्दा अलग-हट-के गीतों
में से एक आपको आज सुनवाते हैं। ये उपशास्त्रीय सा
सुनाई देता गीत है फिल्म सम्बन्ध से। कवि प्रदीप
के बोलों पर धुन बनाई है ओ. पी. नैयर ने। विडियो
में ये गीत संक्षिप्त है अतः आपको ऑडियो और विडियो
दोनों के लिंक दिए जा रहे हैं। नैयर की बहुआयामी प्रतिभा
को दर्शाता है राग शिवरंजिनी पर आधारित यह गीत ।
नैयर को भारतीय शास्त्रीय संगीत में प्रयुक्त होने वाले वाद्य
बहुत पसंद थे और इस गीत में भी उन वाद्यों में से कुछ
का प्रचुर प्रयोग हुआ है।
गीत के बोल:
मैं ख़ुद चन्द्रमुखी हूँ चमक से डरती हूँ
अपने मुखड़े की अनोखी दमक से डरती हूँ
ये सोलहवाँ जो लगा साल इसने मार दिया
अब तो पायल की ज़रा सी छमक से डरती हूँ
अकेली हूँ मैं पिया आ
अकेली हूँ मैं पिया आ
रूप नागर की कुंवरी तरसे
रूप नागर की कुंवरी तरसे
राजा प्रीत निभा
अकेली हूँ मैं पिया आ
रूप की धुप में जली सैयां
रूप की धुप में जली सैयां
कर दे प्यार की शीतल छैयां
रूप की धुप में जली सैयां
कर दे प्यार की शीतल छैयां
अब और मत जला
अकेली हूँ मैं पिया आ
जब-जब देखूँ मैं दर्पण में
जब-जब देखूँ मैं दर्पण में
आग सी लगती नाज़ुक तन में
जब-जब देखूँ मैं दर्पण में
आग सी लगती नाज़ुक तन में
का करूँ तू ही बता
अकेली हूँ मैं पिया आ
.............................
Akeli hoon main piya aa-Sambandh 1969
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Friday, 1 July 2011
Sunday, 30 January 2011
सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी १९४८
आज महात्मा गाँधी कि पुण्यतिथि है। आइये उनको याद करते
हुए एक गीत सुनते हैं। सन १९४८ में एक गीत उनकी याद में रचा
गया था जिसे रफ़ी ने गाया है। काफी बड़ा गीत है ये। इसका एक
भाग आपको सुनवा रहे हैं।
आम आदमी और महात्मा में क्या फर्क है-गांधीजी के उदाहरण
से ही समझ लीजिये। जब कथनी और करनी में कोई फर्क नहीं
होता तभी व्यक्ति महात्मा का दर्ज़ा प्राप्त करता है और इसके लिए
बड़े बड़े त्याग करना पढ़ते हैं, तपस्या करना पढ़ती है। तपस्या
कंदराओं और वन में भटकना या डेरा ज़माना मात्र ही नहीं है,
संसार में रह कर भी तपस्या की जा सकती है।
गीत के बोल:
सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी
वो बापू जो पूज्य हैं इतना जितना गंगा माँ का पानी
सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी
पोरबंदर गुजरात देश में एक ऋषि ने जन्म लिया
माता पिता ने मोहनदास करमचंद गाँधी नाम दिया
बचपन खेल कूद में गुज़रा लन्दन जा कर विद्या पायी
बैरिस्टर बन अफ्रीका में जा कर अपनी धाक जमाई
लेकिन जो फानी दुनिया में अमर कहाने आते हैं
वो कब माया मोह में फँस कर अपना समय गंवाते हैं
सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी
अफ्रीका में हिंदी जन की बड़ी दुर्दशा पायी
गोरे राज़ से टक्कर लेकर सत्य की ज्योत जलाई
फिर भारत की सेवा करने अपने देश में आया
साबरमती में सत्याग्रह का आश्रम आन बनाया
और खिलाफत कन्फ्रांस में सभापति का दर्ज़ा पाया
इस्लामी अधिकार कि रक्षा में भी हाथ बताया
हिन्दू मुस्लिम दोनों उसकी आँखों के तारे थे
दुनिया के सारे ही मज़हब बापू को प्यारे थे
सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी
भारत कौमी कांग्रेस की ऐसी धूम मचाई
कौमी झंडे के नीचे फिर जनता दौड़ी आई
खादी का परचार किया फिर घर घर खादी आई
और बिदेशी माल की होली गाँधी ने जलवाई
चरखे की आवाज़ जो गूंजी हुईं मशीनें ठंडी
और शान से लहराई भारत की तिरंगी झंडी
सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी
वो बापू जो पूज्य हैं इतना जितना गंगा माँ का पानी
सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी
हुए एक गीत सुनते हैं। सन १९४८ में एक गीत उनकी याद में रचा
गया था जिसे रफ़ी ने गाया है। काफी बड़ा गीत है ये। इसका एक
भाग आपको सुनवा रहे हैं।
आम आदमी और महात्मा में क्या फर्क है-गांधीजी के उदाहरण
से ही समझ लीजिये। जब कथनी और करनी में कोई फर्क नहीं
होता तभी व्यक्ति महात्मा का दर्ज़ा प्राप्त करता है और इसके लिए
बड़े बड़े त्याग करना पढ़ते हैं, तपस्या करना पढ़ती है। तपस्या
कंदराओं और वन में भटकना या डेरा ज़माना मात्र ही नहीं है,
संसार में रह कर भी तपस्या की जा सकती है।
गीत के बोल:
सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी
वो बापू जो पूज्य हैं इतना जितना गंगा माँ का पानी
सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी
पोरबंदर गुजरात देश में एक ऋषि ने जन्म लिया
माता पिता ने मोहनदास करमचंद गाँधी नाम दिया
बचपन खेल कूद में गुज़रा लन्दन जा कर विद्या पायी
बैरिस्टर बन अफ्रीका में जा कर अपनी धाक जमाई
लेकिन जो फानी दुनिया में अमर कहाने आते हैं
वो कब माया मोह में फँस कर अपना समय गंवाते हैं
सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी
अफ्रीका में हिंदी जन की बड़ी दुर्दशा पायी
गोरे राज़ से टक्कर लेकर सत्य की ज्योत जलाई
फिर भारत की सेवा करने अपने देश में आया
साबरमती में सत्याग्रह का आश्रम आन बनाया
और खिलाफत कन्फ्रांस में सभापति का दर्ज़ा पाया
इस्लामी अधिकार कि रक्षा में भी हाथ बताया
हिन्दू मुस्लिम दोनों उसकी आँखों के तारे थे
दुनिया के सारे ही मज़हब बापू को प्यारे थे
सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी
भारत कौमी कांग्रेस की ऐसी धूम मचाई
कौमी झंडे के नीचे फिर जनता दौड़ी आई
खादी का परचार किया फिर घर घर खादी आई
और बिदेशी माल की होली गाँधी ने जलवाई
चरखे की आवाज़ जो गूंजी हुईं मशीनें ठंडी
और शान से लहराई भारत की तिरंगी झंडी
सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी
वो बापू जो पूज्य हैं इतना जितना गंगा माँ का पानी
सुनो सुनो ऐ दुनियावालों बापू की ये अमर कहानी
Thursday, 16 December 2010
मेरे जीवन के पथ पर छाई-अनजान १९४१
३० के दशक से लेकर आज तक बॉलीवुड में बहुत बदलाव हुए
हैं। होलिवुड कि तरह इसको पूर्ण विकसित तो नहीं मगर बेहद
विकासशील कह कर बुलाया जा सकता है। अधोसंरचना का भी
ज़बरदस्त विकास हुआ है। सन ८५ में हमें पहली ३-डी फिल्म
देखने को मिली जिसका नाम था शिवा का इन्साफ। ३-डी फिल्म
शिवा का इन्साफ में जैकी श्रोफ नायक हैं। ३-डी का अर्थ है
त्रियामी ।
दृश्य श्रव्य प्रभाव में क्या फर्क आया-जहाँ सन ३०-४० के दशक
में नायक नायिका एक ही जगह खड़े होकर थोडा बहुत हिल डुल
कर गाते थे वहीँ ८० के दशक में उन्होंने विशेष तकनीक के माध्यम
से हवा में उड़ कर भी गाना शुरू कर दिया।
आज पेश है एक पुरानी फिल्म अनजान का गीत जिसे फिल्माया
गया है अशोक कुमार और देविका रानी पर। अशोक कुमार अपने
ज़माने के एक बड़े स्टार थे। फिल्म 'किस्मत' ने उन्हें सुपर स्टार का
दर्ज़ा दिया था।
गीत एक युगल गीत है और आकर्षक धुन में बंधा हुआ है। इसके
गीतकार हैं पंडित प्रदीप । संगीत दिया है प्रसिद्ध बांसुरी वादक
पन्नालाल घोष ने। इसको गाया भी सितारों ने ही है-अशोक कुमार
और देविका रानी ने। प्रश्नोत्तर वाले गीतों में हिंदी सिनेमा इतिहास
के सबसे पहले गीतों में गिन लीजिये इसको आप।
गीत के बोल:
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
कौन
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
अरे
मधुर मधुर मन भाई
मधुर मधुर मन भाई
ये कौन
नहीं मधुर मधुर मन भाई
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
धीमे-धीमे मेरी कुटी में
धीमे-धीमे मेरी कुटी में
इठलाती हुई बलखाती हुई
इठलाती हुई बलखाती हुई
चुपचाप कहीं से आई
चुपचाप कहीं से आई
ये कौन
चुपचाप कहीं से आई
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
कौन पारी ये स्वर्ग से उतारी
कौन पारी ये स्वर्ग से उतारी
बड़ी लाज भरी मेरे आस पास
खेलन लागी रस रंग रास
खेलन लागी रस रंग रास
पल-पल ले कर अंगडाई
पल-पल ले कर अंगडाई
ये कौन
पल-पल ले कर अंगडाई
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
तुम कौन
पूनम की चांदनी
............................................
Mere jeevan ke path par chhayi-Anjaan 1941
हैं। होलिवुड कि तरह इसको पूर्ण विकसित तो नहीं मगर बेहद
विकासशील कह कर बुलाया जा सकता है। अधोसंरचना का भी
ज़बरदस्त विकास हुआ है। सन ८५ में हमें पहली ३-डी फिल्म
देखने को मिली जिसका नाम था शिवा का इन्साफ। ३-डी फिल्म
शिवा का इन्साफ में जैकी श्रोफ नायक हैं। ३-डी का अर्थ है
त्रियामी ।
दृश्य श्रव्य प्रभाव में क्या फर्क आया-जहाँ सन ३०-४० के दशक
में नायक नायिका एक ही जगह खड़े होकर थोडा बहुत हिल डुल
कर गाते थे वहीँ ८० के दशक में उन्होंने विशेष तकनीक के माध्यम
से हवा में उड़ कर भी गाना शुरू कर दिया।
आज पेश है एक पुरानी फिल्म अनजान का गीत जिसे फिल्माया
गया है अशोक कुमार और देविका रानी पर। अशोक कुमार अपने
ज़माने के एक बड़े स्टार थे। फिल्म 'किस्मत' ने उन्हें सुपर स्टार का
दर्ज़ा दिया था।
गीत एक युगल गीत है और आकर्षक धुन में बंधा हुआ है। इसके
गीतकार हैं पंडित प्रदीप । संगीत दिया है प्रसिद्ध बांसुरी वादक
पन्नालाल घोष ने। इसको गाया भी सितारों ने ही है-अशोक कुमार
और देविका रानी ने। प्रश्नोत्तर वाले गीतों में हिंदी सिनेमा इतिहास
के सबसे पहले गीतों में गिन लीजिये इसको आप।
गीत के बोल:
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
कौन
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
अरे
मधुर मधुर मन भाई
मधुर मधुर मन भाई
ये कौन
नहीं मधुर मधुर मन भाई
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
धीमे-धीमे मेरी कुटी में
धीमे-धीमे मेरी कुटी में
इठलाती हुई बलखाती हुई
इठलाती हुई बलखाती हुई
चुपचाप कहीं से आई
चुपचाप कहीं से आई
ये कौन
चुपचाप कहीं से आई
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
कौन पारी ये स्वर्ग से उतारी
कौन पारी ये स्वर्ग से उतारी
बड़ी लाज भरी मेरे आस पास
खेलन लागी रस रंग रास
खेलन लागी रस रंग रास
पल-पल ले कर अंगडाई
पल-पल ले कर अंगडाई
ये कौन
पल-पल ले कर अंगडाई
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
तुम कौन
पूनम की चांदनी
............................................
Mere jeevan ke path par chhayi-Anjaan 1941
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Kavi Pradeep,
Pannalal Ghosh
Wednesday, 1 December 2010
चलो चलें माँ- जागृति १९५४
फिल्म जागृति से तीन गीत आपको सुनवाए जा चुके हैं, देशभक्ति
और उज्जवल देश की कामनाओं से भरपूर गीत। अब सुनिए माँ से
गुज़ारिश करता एक बच्चा क्या कह रहा है। आशा भोंसले की
आवाज़ में ये गीत कुछ कुछ कहानी की तरह लगता है। बोल
कविवर प्रदीप के हैं और संगीत हेमंत कुमार का। कुछ महान
संगीतप्रेमियों के पास संगीतकार रवि की आवाज़ में गाया गया
यही गीत उपलब्ध है। उल्लेखनीय है कि रवि ने हेमंत कुमार के
साथ सहायक के रूप में कुछ समय काम किया था। भारतीय संस्कृति
की जड़ से जुडी हुई है फिल्म जागृति शायद इसी वजह से इसे स्कूल
के बच्चों को दिखाया जाता है। फिल्म और फिल्म के गीत काफी
प्रेरणादायक और उत्साहवर्धक हैं।
गीत के बोल:
चलो चलें माँ
चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छाओं में
चलो चले माँ
हो राहें इशारे रेशमी घटाओं में
चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छाओं में
चलो चलें माँ
आओ चलें हम एक साथ वहाँ
दुःख ना जहाँ कोई ग़म ना जहाँ
आओ चलें हम एक साथ वहाँ
दुःख ना जहाँ कोई ग़म ना जहाँ
आज है निमंत्रण सन सन हवाओं में
चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छाओं में
चलो चलें माँ
रहना मेरे संग माँ हरदम
ऐसा ना हो के बिछड़ जाएँ हम
रहना मेरे संग माँ हरदम
ऐसा ना हो के बिछड़ जाएँ हम
घूमना है हमको दूर की दिशाओं में
चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छांव में
चलो चलें माँ
और उज्जवल देश की कामनाओं से भरपूर गीत। अब सुनिए माँ से
गुज़ारिश करता एक बच्चा क्या कह रहा है। आशा भोंसले की
आवाज़ में ये गीत कुछ कुछ कहानी की तरह लगता है। बोल
कविवर प्रदीप के हैं और संगीत हेमंत कुमार का। कुछ महान
संगीतप्रेमियों के पास संगीतकार रवि की आवाज़ में गाया गया
यही गीत उपलब्ध है। उल्लेखनीय है कि रवि ने हेमंत कुमार के
साथ सहायक के रूप में कुछ समय काम किया था। भारतीय संस्कृति
की जड़ से जुडी हुई है फिल्म जागृति शायद इसी वजह से इसे स्कूल
के बच्चों को दिखाया जाता है। फिल्म और फिल्म के गीत काफी
प्रेरणादायक और उत्साहवर्धक हैं।
गीत के बोल:
चलो चलें माँ
चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छाओं में
चलो चले माँ
हो राहें इशारे रेशमी घटाओं में
चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छाओं में
चलो चलें माँ
आओ चलें हम एक साथ वहाँ
दुःख ना जहाँ कोई ग़म ना जहाँ
आओ चलें हम एक साथ वहाँ
दुःख ना जहाँ कोई ग़म ना जहाँ
आज है निमंत्रण सन सन हवाओं में
चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छाओं में
चलो चलें माँ
रहना मेरे संग माँ हरदम
ऐसा ना हो के बिछड़ जाएँ हम
रहना मेरे संग माँ हरदम
ऐसा ना हो के बिछड़ जाएँ हम
घूमना है हमको दूर की दिशाओं में
चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छांव में
चलो चलें माँ
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