Social Icons

Showing posts with label SH Bihari. Show all posts
Showing posts with label SH Bihari. Show all posts

Wednesday, 17 August 2011

है दुनिया उसी की ज़माना उसी का-काश्मीर की कली १९६१

फिल्म दुनिया के कुछ सम्पूर्ण मनोरंजन प्रदान करने वाले कलाकारों

में से एक और अपने समय में युवा पीढ़ी के प्रतिनिधि शम्मी कपूर

इस फानी दुनिया को अलविदा कह गए. काफी समय से बीमारी से

जूझ रहे शम्मी अपने अंतिम समय तक भी जीवन का भरपूर आनंद

उठाते रहे.



उनके नृत्य वाले गीत दर्शकों को ज्यादा पसंद आते हैं. मैं आज प्रस्तुत

कर रहा हूँ एक दर्द भरा गीत जो मुझे उनके ऊपर फिल्माए गए गीतों

में सबसे ज्यादा पसंद है. गीत में बहुत गहरी बात कह दी गयी है.

गीत एस एह बिहारी साहब का है और इसका संगीत तैयार किया है

ओ पी नय्यर ने. आवाज़ रफ़ी कि है और गीत में बज रही सैक्सोफोन

कि ध्वनि मनोहारी सिंह कि साँसों के सहयोग से आ रही है. गीत दिल

को छू लेने वाला है और कुछ हद तक झंझोड़ने वाला भी.







गीत के बोल:



है दुनिया उसी कि ज़माना उसी का

मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का



है दुनिया उसी कि ज़माना उसी का

मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का



लुटा जो मुसाफिर दिल के सफर में

है जन्नत ये दुनिया उसकी नज़र में

लुटा जो मुसाफिर दिल के सफर में

है जन्नत ये दुनिया उसकी नज़र में

उसी ने है लूटा मज़ा जिंदगी का

मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का



है सजदे के काबिल हर वो दीवाना

कि जो बन गया हो तस्वीर-ऐ-जाना

है सजदे के काबिल हर वो दीवाना

कि जो बन गया हो तस्वीर-ऐ-जाना

करो एहतराम उसकी दीवानगी का

मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का



बर्बाद होना जिसकी अदा हो

दर्द-ऐ-मोहब्बत जिसकी दवा हो

बर्बाद होना जिसकी अदा हो

दर्द-ऐ-मोहब्बत जिसकी दवा हो

सताएगा क्या गम उसे जिंदगी का

मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का

......................................

Hai duniya usi ki-Kashmir ki kali 1964

Thursday, 11 August 2011

बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी-एक मुसाफिर एक हसीना १९६२

दिल की धडकनें बढ़ा दिया करता था ये गीत एक ज़माने में प्रेमियों का.

यह काफी लोकप्रिय और चर्चित गीत है फिल्म एक मुसाफिर एक हसीना से.

जॉय मुखर्जी के साथ विडम्बना ये है कि वाचाल फिल्म प्रेमी उन्हें गरीबों

का शम्मी कपूर कहते हैं. शम्मी कपूर के दौर में उनका फिल्मों में पदार्पण

हुआ अतः शम्मी के हाव भाव और अभिनय का थोडा बहुत असर तो मिलेगा

ही आपको. किस्मत से फ़िल्में भी उन्हें जो मिलीं, वे सब लगभग, मधुर

संगीत वाली थीं. प्रस्तुत गीत में वे दिल के बीमार के बजाये अस्पताल से

अभी अभी ठीक हो के उठे बीमार जैसे ज्यादा दिखाई देते हैं. उनकी तुलना

में नायिका के चहरे पर चमक अधिक है. मगर बीच बीच में दिखाई देने

वाली उनकी आँखों की चमक कुछ और ही अफसाना बयां करती हैं. गीत में

नायिका साधना के चेहरे के भाव गीत की हर पंक्ति के साथ बदलते हैं जो इस

गीत का सबसे मजबूत पक्ष है.



फिल्म एक मुसाफिर एक हसीना ने तो सफलता के कीर्तिमान रच दिए थे.

फिल्म से ज्यादा मगर, इसका संगीत लोकप्रिय रहा और आज भी इसके गीत

आपको सुनाई देते होंगे. प्रस्तुत गीत का तो फिल्मांकन भी बहुत उम्दा दर्जे का

है. फिल्म निर्देशक राज खोसला की ऑंखें कुछ अलग कोण से कैमरे को घुमाया

करती थीं. ट्रोली शाट उन्हें बेहद पसंद थे जो कि आप उनकी फिल्मों के गीत

देखते वक्त अवश्य महसूस करेंगे. उनके शाट में नायक नायिका के बजाये कैमरा

ज्यादा घूमा करता था.



चम्मच वाली ढोलक बजायी जा रही है गीत में, ढोलक लटकते ही आवाज़ आनी

शुरू हो जाती है. चम्मच को ढूँढने कि कोशिश न करें, फ़िल्मी ढोलक में से कुछ

भी आवाज़ निकल सकती है. वैसे हारमोनियम भी लटकते ही बजना शुरू हो जाता

है गीत में. इसको ज्यादा ज्ञानियों के एंगल से देखें तो-प्रतीकात्मक स्वरुप ढोलक

और हारमोनियम का प्रयोग हुआ है शुरू में.



यकीनन ये गीत हिंदी फिल्म संगीत के सबसे लोकप्रिय ढोलक-हारमोनियम गीतों

में यूँ ही नहीं गिना जाता है. नैयर की इस धुन में बहुत कसावट है और गायकी

भी अपने पूरे शबाब पर है. नैयर और एस एच बिहारी को सलाम इतने रोमांटिक

गीत के निर्माण के लिए.











गीत के बोल:



बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी

मेरी ज़िन्दगी में हुज़ूर आप आए

कदम चूम लूँ या के आँखें बिछा दूँ

करूँ क्या ये मेरी समझ में न आए



बहुत शुक्रिया



करूँ पेश तुमको नज़राना दिल का

नज़राना दिल का

के बन जाए कोई अफ़साना दिल का

खुदा जाने ऐसी सुहानी घड़ी फिर

खुदा जाने ऐसी सुहानी घड़ी फिर

मेरी ज़िन्दगी में पलट के न आए



बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी

मेरी ज़िन्दगी में हुज़ूर आप आए

बहुत शुक्रिया



खुशी तो बहुत है मगर ये भी ग़म है

मगर ये भी ग़म है

के ये साथ अपना कदम दो कदम है

मगर ये मुसाफ़िर दुआ माँगता है

मगर ये मुसाफ़िर दुआ माँगता है

खुदा आपसे किसी दिन मिलाए



बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी

मेरी ज़िन्दगी में हुज़ूर आप आए

बहुत शुक्रिया



आ आ आ आ आ आ आ आ

मुझे डर है मुझमें ग़ुरूर आ न जाए

लगूँ झूमने मैं सुरूर आ न जाए

सुरूर आ न जाए

कहीं दिल ये मेरा ये तारीफ़ सुन कर

कहीं दिल ये मेरा ये तारीफ़ सुन कर

तुम्हारा बने और मुझे भूल जाए



बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी

मेरी ज़िन्दगी में हुज़ूर आप आए

बहुत शुक्रिया

.........................................

Bahut shukriya badi meharbani-Ek musafir ek haseena 1962

Tuesday, 2 August 2011

ये चाँद सा रोशन चेहरा-काश्मीर की कली १९६४

प्रस्तुत गीत में ऐसा क्या खास है जो जनता इसे बेहद पसंद करती है, खोजिये !

जवाब बहुत से हैं- शम्मी कपूर का शरारती उछल्कूदियाना अंदाज़ है, शर्मिला टैगोर
की खूबसूरती और बिनाका स्माइल है, कश्मीर की मुफ्त सैर है, एस एच बिहारी
के बोल हैं, ओ पी नय्यर का जादुई संगीत है और रफ़ी की मोहक आवाज़ है।

बस बोलों में एक बेसिक फॉल्ट है वो ये कि झील सी ऑंखें नायिका की ज़रूर होंगी
मगर नीला रंग नायक की आँखों का है। अब गीत बढ़िया हो तो फॉल्ट वॉल्ट गए
तेल लेने, है न ?

इतना विवरण पर्याप्त है या पांच पन्ने का निबंध लिखूं.............




गीत के बोल:

ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा

तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा

तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

एक चीज़ क़यामत भी है
लोगों से सुना करते थे
तुम्हें देख के मैंने माना
वो ठीक कहा करते थे
वो ठीक कहा करते थे

है चाल में तेरी ज़ालिम
कुछ ऐसी बाला का जादू
सौ बार संभाला दिल को
मगर हो के रहा बेकाबू
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा

तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

हर सुबह किरण की लाली
है रंग तेरे गालों का
हर शाम की चादर काली
साया है तेरे बालों का
हर सुबह किरण की लाली
है रंग तेरे गालों का
हर शाम की चादर काली
साया है तेरे बालों का
साया है तेरे बालों का

तू बलखाती एक नदिया
हर मौज तेरी अंगडाई
जो इन मौजों में डूबा
उसने ही दुनिया पायी
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा

तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

मैं खोज में हूँ मंजिल की
और मंजिल पास है मेरे
मुखड़े से हटा दो आँचल
हो जाएँ दूर अँधेरे
हो जाएँ दूर अँधेरे

माना के ये जलवे तेरे
कर देंगे मुझे दीवाना
जी भर के ज़रा मैं देखूं
अंदाज़ तेरा मस्ताना

तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली ऑंखें
कोई राज़ है उनमें गहरा

तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया
......................................
Ye chand sa roshan chehra-Kashmir ki kali 1964

Tuesday, 19 July 2011

ये दिल ले कर नज़राना-एक बार मुस्कुरा दो १९७२

फिर आ गया सन १९७२. क्या किया जाए, उस वर्ष बहुत से मधुर गीत
जो बने थे. एक और सुन लेते हैं. बहुत दिन से ओ. पी. नैयर के संगीत
वाले गीत नहीं सुने हैं. आज आपके लिए लिया है फिल्म 'एक बार मुस्कुरा
दो' से एक गीत. फिल्म के सभी गीत काफी दफे सुने गए हैं और ये नैयर
के सबसे सफल एल्बम में गिना जाता है. नैयर की खूबी थी कि वे एक
फिल्म के लिए धुनें बनाते तो ऐसी बनाते कि श्रोता सभी गीतों को सुने.
इस चक्कर में कभी कभी एक ही फिल्म के गीत सगे भाई बहनों जैसे
सुनाई देते जैसे कि उनकी एक हिट फिल्म फागुन के गीत हैं. काम चलाऊ
धुनें उनकी फिल्मों में ने के बराबर मिलेगी आपको. उनका गाने/हिट का
अनुपात कई समकालीनों से बेहतर है.

प्रस्तुत गीत कि विशेषता ये है कि ये मुकेश कि आवाज़ में है. मुकेश से
नय्यर ने बहुत कम गीत गवाए. रफ़ी के बाद उनकी पसंद महेंद्र कपूर रहे.
प्रस्तुत गीत में मुकेश के साथ आशा भोंसले की आवाज़ है जो नय्यर खेमे
कि प्रमुख गायिका रहीं.

फिल्म के नायक हैं देव मुखर्जी और नायिका हैं तनुजा. दोनों में से शायद
तनुजा बेहतर अभिनय कर लेती हैं. गीत किस्मत फिल्म के गीत की
याद ज़रूर ही दिलाएगा जिसमें संगीत नैयर का ही है. नायक महिला के
वेश में और नायिका पुरुष भेस में. गीत शमसुल हुदा बिहारी का लिखा
हुआ है.




गीत के बोल:


ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
आ आ आ आ, आ आ, आ आ आ आ

ये दिल ले कर नज़राना आ गया तेरा दीवाना
ये दिल ले कर नज़राना आ गया तेरा दीवाना
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़

ये प्यार है गहरा सागर है डूब के तुझको जाना
ये प्यार है गहरा सागर है डूब के तुझको जाना
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़


ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
नस-नस में है बिजली कहीं जल ना जाना
कहीं जल ना जाना, जल ना जाना
सोच समझकर हमसे ज़रा दिल टकराना
ज़रा दिल टकराना, दिल टकराना
राह प्यार की बड़ी कठिन है कहाँ चला मर जाने, ओ
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़

ये दिल ले कर नज़राना आ गया तेरा दीवाना
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
टूट पड़े ये बिजली तो क़िस्मत चमके
अरे क़िस्मत चमके, क़िस्मत चमके
आग में तप कर सोना और भी दमके
अरे और भी दमके, और भी दमके
हार-जीत की बात प्यार में चली किसे समझाने
ओ दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़
दिलबर जानी न देना दिल तोड़ तोड़ तोड़

ये प्यार है गहरा सागर है डूब के तुझको जाना
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़
दिलबर जानी जा जा रे पल्ला छोड़ छोड़ छोड़
.................................
Ye dil le ke nazrana-Ek baar muskura do 1972

Saturday, 29 January 2011

मेरी तकदीर के मालिक-शर्त १९५४

फिल्म शर्त के नाम से एक गाना तुरंत याद आ जाता है
वो है-ना ये चाँद होगा ना तारे रहेंगे जो गीता दत्त और
हेमंत कुमार ने गाया है। इस फिल्म में बहुत से मधुर
गीत हैं। आज आपको लता का गाया हुआ गीत सुनवाते
हैं । थोड़ा दर्द भरा गीत है ये। एस एच बिहारी के लिखे गीत
की तर्ज़ बनाई है हेमंत कुमार ने। इस गीत को हम हेमंत
कुमार द्वारा तैयार किये गए सर्वश्रेष्ठ गीतों में शामिल कर
सकते हैं। इस गीत की अतिरिक्त मधुरता जादू सा असर
करती है और आप इसे पूरा सुने बिना नहीं रह पाते।



गीत के बोल:


कहाँ से ले के आई हैं कहाँ मजबूरियाँ मेरी
ज़बान खामोश आँखें ख़ामोश आँखें कह रही हैं दास्तां मेरी

मेरी तक़दीर के मालिक मेरा कुछ फ़ैसला कर दे
बुरा चाहे बुरा कर दे भला चाहे भला कर दे

मेरी तक़दीर के मालिक

मुझे इतना बता दे मैं कहाँ जाऊँ किधर जाऊँ
कहीं जाने से अच्छा है तेरे क़दमों में मर जाऊँ
सहारा दे नहीं सकता तो फिर बेआसरा कर दे

मेरी तक़दीर के मालिक

नहीं दुनिया में मेरा दूसरा कोई ठिकाना है
मुझे तो बस यहीं अपना मुक़द्दर आजमाना है
लिया है दिल तो मेरी जान भी तन से जुदा कर दे

मेरी तक़दीर के मालिक

मुझे बरबाद करने में जो होता हो भला तेरा
बुझा दे अपने हाथों से चिराग़-ए-ज़िन्दगी मेरा
नहीं कोई गिला तुझसे अगर चाहे फ़ना कर दे

मेरी तक़दीर के मालिक मेरा कुछ फ़ैसला कर दे
बुरा चाहे बुरा कर दे भला चाहे भला कर दे

मेरी तक़दीर के मालिक

Thursday, 20 January 2011

तेरी मेहरबानियाँ-तेरी मेहरबानियाँ १९८५

लेब्रेडोर नस्ल का कुत्ता काफ़ी घरेलू माना जाता है।
ये परिवार के सदस्यों से काफी हिल-मिल जाता है।
इस फिल्म में एक काले रंग का लेब्रेडोर प्रजाति कुत्ता
है जिसने बढ़िया अभिनय किया है। उसी की मेहरबानियों
के इर्द गिर्द इस फिल्म की कहानी घूमती है। साथ में हैं नायक
जैकी श्रोफ और नायिका स्वप्ना। प्रस्तुत गीत फिल्म का
शीर्षक गीत है और इसे गाया है शब्बीर कुमार ने।
इस फिल्म को जनता प्यार से "कुत्ते की मेहरबानियाँ"
भी बुलाती है। गीत एस एच बिहारी का लिखा हुआ है जिन्हें
हम ओ पी नय्यर के साथ की वजह से ज्यादा जानते हैं।



गीत के बोल:

गीत के बोलों के लिए चटका(comment) लगायें

Monday, 6 December 2010

आप से मैंने मेरी जान-ये रात फिर नहीं आएगी १९६६

ओ पी नय्यर के संगीत निर्देशन वाली एक और फिल्म है
जिसके सभी गीत सुने जाते हैं और ये तय करना मुश्किल
होता है कि कौन सा बेहतर है। ओ पी नय्यर के लिए शायद
ये चुनौती भरा विषय रहा होगा एक भूतिया फिल्म के लिए
संगीत तैयार करना। हिंदी सस्पेंस फिल्मों का खाका अक्सर
भूतों के इर्द गिर्द घूमा करता है। इस गीत में नायक नायिका
दोनों स्मार्ट दिख रहे हैं। मैंने सुन्दर शब्द का प्रयोग इसलिए
नहीं किया कि सुन्दरता शब्द शायद स्त्रियों के लिए सुरक्षित
है। पुराने ज़माने में पुरुषों का चेहरा गोरा बनाने वाली क्रीम
नहीं आया करती थी।

गीत फिल्माया गया है विश्वजीत और शर्मिला टेगोर पर।
शर्मिला अपनी चित-परिचित घबराहट मिश्रित मुस्कराहट
के साथ प्रस्तुत हैं। ये एक ऐसा भाव था जो उनका ट्रेड मार्क
भाव कहा जा सकता है।

गीत के बोल लाजवाब हैं और इसको टाइप करने में भी आनंद की
अनुभूति हो रही है। इसको आप कह सकते हैं आदर्श/संपूर्ण युगल
गीत । एक उम्दा किस्म का रोमांटिक गीत सुनकर दिल बाग़ बाग़ हो
उठता है। गीत लिखा है शम्सुल हुदा बिहारी(SH Bihari) ने।




गीत के बोल:

आपसे मैंने मेरी जान मोहब्बत की है
आप चाहें तो मेरी जान भी ले सकती हैं
आप जब हैं तो मेरे पास मेरा सब कुछ है
जान क्या चीज है ईमान भी ले सकती हैं

आप से मैंने मेरी जान

आपको मैंने मोहब्बत का खुदा समझा है
आप कहिये कि मुझे आपने क्या समझा है
ज़िन्दगी क्या है मोहब्बत की मेहरबानी है
दर्द को मैंने हकीकत में दवा समझा है

आपसे मैंने मेरी जान मोहब्बत की है
आप चाहें तो मेरी जान भी ले सकती हैं

आप से मैंने मेरी जान

दिल वही है जो सदा गीत वफ़ा के गाये
प्यार करता हो जिसे प्यार ही करता जाए
सैंकड़ों साल जीने से बेहतर है वो घडी
हाथ में जब हाथ हो जब यार का मौत आ जाए

आपसे मैंने मेरी जान मोहब्बत की है
आप चाहें तो मेरी जान भी ले सकते हैं

आप जब हैं तो मेरे पास मेरा सब कुछ है
जान क्या चीज है ईमान भी ले सकती हैं

आपसे मैंने मेरी जान
 
 
www.lyrics2nd.blogspot.com