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Monday, 30 January 2012

रात गई फिर दिन आता है-बूट पॉलिश १९५४

कथनी और करनी में अंतर मिट जाता है तभी व्यक्ति महात्मा बनता है।
आज बापू की पुण्यतिथि है और उनकी याद में एक गीत प्रस्तुत है फिल्म
बूट पॉलिश से। प्रेरणादायक गीत है ये और मानो ये सन्देश दे रहा हो कि
राजनीति के संक्रमण काल के बाद सुहानी भोर ज़रूर आएगी एक बार फिर।

आम आदमी का जीवन क्या जीवन है इस गीत के माध्यम से ही जान लीजिये।
बच्चों पर बनी ये मर्मस्पर्शी फिल्म मधुर गीतों का खज़ाना है। गीतकार शैलेन्द्र
हसरत और 'सरस्वती कुमार दीपक' ने एक एक गीत में प्राण फूँक दिए हों
मानो। फिल्म 'तीसरी कसम' के एक गीत में भी बुढ़ापे और जवानी की गाथा है
जो शैलेन्द्र का लिखा हुआ है । काल के पहिये पर नीरज साहब फिल्म 'चंदा
और बिजली' के गीत में कह चुके हैं। तीनों ही गीतों का संगीत तैयार किया है
शंकर जयकिशन ने। गीत में प्रमुख कलाकार हैं-बेबी नाज़ और डेविड।

प्रस्तुत गीत के लेखक हैं सरस्वती कुमार "दीपक" । गायक मन्ना डे की आवाज़
को तो आप पहचानते ही होंगे।



गीत के बोल:

रात गई
हो हो हो हो हो
रात गई फिर दिन आता है
इसी तरह आते जाते ही
ये सारा जीवन जाता है
हो ओ रात गई, रात गई

रात गई फिर दिन आता है
इसी तरह आते जाते ही
ये सारा जीवन जाता है
हो ओ रात गई, रात गई

कितना बड़ा सफ़र इस दुनिया का
एक रोता एक मुस्काता है
एक रोता एक मुस्काता है
हा आ आ आ आ आ आ आ
कदम कदम रखता राही
कितनी दूर चला जाता है
एक एक तिनके तिनके से
एक एक तिनके तिनके से
पंछी का घर बन जाता है

हो ओ रात गई, रात गई

कभी अँधेरा कभी उजाला
कभी अँधेरा कभी उजाला
फूल खिला फिर मुरझाता है
खेला बचपन हंसी जवानी
खेला बचपन हंसी जवानी
मगर बुढ़ापा तडपाता है
मगर बुढ़ापा तडपाता है
खेला बचपन हंसी जवानी
मगर बुढ़ापा तडपाता है

सुख दुःख का पहिया चलता है
वही नसीबा कहलाता है

हो ओ रात गई, रात गई

रात गई फिर दिन आता है
इसी तरह आते जाते ही
ये सारा जीवन जाता है
हो ओ रात गई, रात गई
........................................
Raat gayi fir din aata hai-Boot Polish

Saturday, 29 January 2011

मेरी तकदीर के मालिक-शर्त १९५४

फिल्म शर्त के नाम से एक गाना तुरंत याद आ जाता है
वो है-ना ये चाँद होगा ना तारे रहेंगे जो गीता दत्त और
हेमंत कुमार ने गाया है। इस फिल्म में बहुत से मधुर
गीत हैं। आज आपको लता का गाया हुआ गीत सुनवाते
हैं । थोड़ा दर्द भरा गीत है ये। एस एच बिहारी के लिखे गीत
की तर्ज़ बनाई है हेमंत कुमार ने। इस गीत को हम हेमंत
कुमार द्वारा तैयार किये गए सर्वश्रेष्ठ गीतों में शामिल कर
सकते हैं। इस गीत की अतिरिक्त मधुरता जादू सा असर
करती है और आप इसे पूरा सुने बिना नहीं रह पाते।



गीत के बोल:


कहाँ से ले के आई हैं कहाँ मजबूरियाँ मेरी
ज़बान खामोश आँखें ख़ामोश आँखें कह रही हैं दास्तां मेरी

मेरी तक़दीर के मालिक मेरा कुछ फ़ैसला कर दे
बुरा चाहे बुरा कर दे भला चाहे भला कर दे

मेरी तक़दीर के मालिक

मुझे इतना बता दे मैं कहाँ जाऊँ किधर जाऊँ
कहीं जाने से अच्छा है तेरे क़दमों में मर जाऊँ
सहारा दे नहीं सकता तो फिर बेआसरा कर दे

मेरी तक़दीर के मालिक

नहीं दुनिया में मेरा दूसरा कोई ठिकाना है
मुझे तो बस यहीं अपना मुक़द्दर आजमाना है
लिया है दिल तो मेरी जान भी तन से जुदा कर दे

मेरी तक़दीर के मालिक

मुझे बरबाद करने में जो होता हो भला तेरा
बुझा दे अपने हाथों से चिराग़-ए-ज़िन्दगी मेरा
नहीं कोई गिला तुझसे अगर चाहे फ़ना कर दे

मेरी तक़दीर के मालिक मेरा कुछ फ़ैसला कर दे
बुरा चाहे बुरा कर दे भला चाहे भला कर दे

मेरी तक़दीर के मालिक

Saturday, 1 January 2011

बोल परदेसिया ये तूने क्या किया-मंगू १९५४

मधुर गीतों की श्रृंखला में अगला गीत पेश है सन १९५ की फिल्म
मंगू से। परदेसी शब्द से बॉलीवुड का खासा लगाव रहा है। परदेसी शब्द
के जिक्र वाले मधुर गीतों में से एक ये है आशा भोंसले की आवाज़ में।
गीत की धुन तबियत से तैयार की गई है संगीतकार ओ पी नय्यर द्वारा।



गीत के बोल:

बोल परदेसिया ये तूने क्या किया
अपना बना के सैयां हाय दगा दे दिया
बोल परदेसिया ये तूने क्या किया
अपना बना के सैयां हाय दगा दे दिया
बोल परदेसिया

किसको मैं जाऊं समझाने
दर्द मेरा जब तू ना जाने
जब तू ना जाने

बोल परदेसिया ये तूने क्या किया
अपना बना के सैयां हाय दगा दे दिया
बोल परदेसिया

जब तोहे नहीं पाऊंगी मैं
? आग-ए-वफ़ा ? किस जाऊंगी मैं
जाऊंगी मैं

बोल परदेसिया ये तूने क्या किया
अपना बना के सैयां हाय दगा दे दिया
बोल परदेसिया

इतना ही बतलाते जाना
मेरी गली कब होगा आना
होगा आना

बोल परदेसिया ये तूने क्या किया
अपना बना के ज़ालिम हाय दगा दे दिया
बोल परदेसिया

Monday, 13 December 2010

आ के अब आता नहीं दिल को करार-महबूबा १९५४

आपको इस ब्लॉग पर १९७६ की महबूबा फिल्म से
दो गीत सुनवाए जा चुके हैं। आइये अब सुना जाए
गीत जी की एक पसंद की अभिनेत्री पर फिल्माया गया
लता जी का गाया गीत। फिल्म में शम्मी कपूर और
नलिनी जयवंत की जोड़ी है।

उस ज़माने में नलिनी जयवंत एक नामी सितारा
थीं और शम्मी नए कलाकार। शम्मी को इस हिसाब
से सभी काल की सुन्दर अभिनेत्रियों के साथ अभिनय
का मौका मिल गया। स्वयं के निर्देशन में फिल्म
मनोरंजन में जीनत अमान के साथ अभिनय का भी
मौका मिला हालाँकि उस फिल्म के हीरो थे संजीव कुमार।




गाने के बोल:

आ के अब आता नहीं दिल को करार
आ के अब आता नहीं दिल को करार
राह तकते थक गया है इंतज़ार

आ के अब आता नहीं दिल को क़रार

किस कदर बेचैन है दुनिया मेरी
किस कदर बेचैन है दुनिया मेरी
दिल की हर धड़कन में है आहात तेरी
आरजुएँ हो रही हैं बेकरार

आ के अब आता नहीं दिल को करार

दिल सदायें दे रहा है तू कहाँ
दिल सदायें दे रहा है तू कहाँ
मुन्तजिर है चाँद तारे आसमान
ये हवाएं ये फज़ाएँ ये बहार

आ के अब आता नहीं दिल को करार

पास तेरे वो हसीं रातें गई
पास तेरे वो हसीं रातें गई
प्यार की रंगीं मुलाक़ातें गई
रह गया है दर्द दिल की यादगार

आ के अब आता नहीं दिल को क़रार
आ के अब आता नहीं दिल को करार
राह तकते थक गया है इंतज़ार

आ के अब आता नहीं दिल को क़रार

Wednesday, 1 December 2010

चलो चलें माँ- जागृति १९५४

फिल्म जागृति से तीन गीत आपको सुनवाए जा चुके हैं, देशभक्ति
और उज्जवल देश की कामनाओं से भरपूर गीत। अब सुनिए माँ से
गुज़ारिश करता एक बच्चा क्या कह रहा है। आशा भोंसले की
आवाज़ में ये गीत कुछ कुछ कहानी की तरह लगता है। बोल
कविवर प्रदीप के हैं और संगीत हेमंत कुमार का। कुछ महान
संगीतप्रेमियों के पास संगीतकार रवि की आवाज़ में गाया गया
यही गीत उपलब्ध है। उल्लेखनीय है कि रवि ने हेमंत कुमार के
साथ सहायक के रूप में कुछ समय काम किया था। भारतीय संस्कृति
की जड़ से जुडी हुई है फिल्म जागृति शायद इसी वजह से इसे स्कूल
के बच्चों को दिखाया जाता है। फिल्म और फिल्म के गीत काफी
प्रेरणादायक और उत्साहवर्धक हैं।



गीत के बोल:

चलो चलें माँ
चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छाओं में
चलो चले माँ

हो राहें इशारे रेशमी घटाओं में
चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छाओं में
चलो चलें माँ

आओ चलें हम एक साथ वहाँ
दुःख ना जहाँ कोई ग़म ना जहाँ
आओ चलें हम एक साथ वहाँ
दुःख ना जहाँ कोई ग़म ना जहाँ
आज है निमंत्रण सन सन हवाओं में
चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छाओं में
चलो चलें माँ

रहना मेरे संग माँ हरदम
ऐसा ना हो के बिछड़ जाएँ हम
रहना मेरे संग माँ हरदम
ऐसा ना हो के बिछड़ जाएँ हम
घूमना है हमको दूर की दिशाओं में
चलो चलें माँ
सपनों के गाँव में
काँटों से दूर कहीं
फूलों की छांव में
चलो चलें माँ

Tuesday, 23 November 2010

अरे छोड़ दे सजनिया पतंग मेरी-नागिन १९५४

नागिन सन १९५४ की फिल्म है और ज़बरदस्त हिट फिल्म है।
इसके गीत इतने बजे कि लोगों को याद हो गए। पिछले गीत
को सुनने के बाद ये ही सबसे पहले दिमाग में आता है। वजह
क्या है आप ढूंढिए। फिल्म में एक नौटंकी में नायक प्रदीप कुमार
और नायिका वैजयंतीमाला ये गीत गा रहे हैं। हेमंत कुमार और
लता मंगेशकर के गाये इस गीत को लिखा है राजेंद्र कृष्ण ने और
धुन बनाई है हेमंत कुमार ने।



गीत के बोल:

अरी छोड़ दे सजनिया
छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
ऐसे छोड़ूँ न बलमवा
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे

अरी छोड़ दे सजनिया
छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
ऐसे छोड़ूँ न बलमवा
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे

आशाओं का मांजा लागा
रंगी प्यार से डोरी
आशाओं का मांजा लागा
रंगी प्यार से डोरी
तेरे मुहल्ले उड़ते उड़ते
आई चोरी चोरी

बैरी दुनिया कहीं न तोड़ दे
पतंग मेरी छोड़ दे
ऐसे छोड़ूँ न बलमवा
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे

अरमानों की डोर लूटने
खड़े है दुनियवाले
बाँके चरख़ीवाले
अरमानों की डोर लूटने
खड़े है दुनियवाले
बाँके चरख़ीवाले

ऊँचे नीलगगन में
छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
ऐसे छोड़ूँ न बलमवा
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे

देख चली ये संग हवा के
बलखाती इठलाती
सैयाँ बलखाती इठलाती
चीर के बैरी जग का सीना
गीत प्यार के गाती
देखो गीत प्यार के गाती

हैं किस में इतना ज़ोर
जो काटे डोर सामने आये न
फिर मेरी अटरिया पे
छोड़ दे पतंग सैयाँ छोड़ दे

ऐसे छोड़ूँ न सजनिया
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
सैयाँ छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
गोरी नैनवा के डोर पहले जोड़ दे

सैयाँ छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
गोरी नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
सैयाँ छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
गोरी नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
सैयाँ छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
 
 
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