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Friday, 26 August 2011

आधी रात को खनक गया-तूफ़ान में प्यार कहाँ १९६६

पिछले गीत के एक साज़-विशेष की ध्वनि से मुझे एक दोगाना

याद आया जिस लगे हाथ सुन लीजिए. इसकी धुन बनायीं है एक

और कम चर्चा में रहे संगीतकार चित्रगुप्त ने.



चित्रगुप्त ने बिना चर्चा, सराहना और पुरस्कारों के निरंतर जिस जोश

और चाव के साथ संगीत जगत में अपनी उपस्थिति बनाये रखी वो

प्रशन्सनीय है. भोजपुरी मूल के चित्रगुप्त ने फिल्म संगीत की सभी

विधाओं पर साधिकार अपना प्रभाव छोड़ा चाहे वो भजन हो, कव्वाली

हो या फिर कोई रोमांटिक गीत.



प्रस्तुत गीत है फिल्म ‘तूफ़ान में प्यार कहाँ से’. फिल्म जगत के

व्यावसायिक तूफ़ान में ये फिल्म ज्यादा नहीं टिक पायी अलबत्ता इसके

गीत संगीत प्रेमी ज़रूर गुनगुनाते मिल जायेंगे आपको. सन १९६६ में

ये फिल्म रिलीज़ हुयी थी . गीत लिखा है प्रेम धवन ने और इसे गाया

है लता और रफ़ी ने.







गीत के बोल:



हो हो हो हो हो हो हो हो हो हो हो

आ आ आ आ आ आ आ आ आ

हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ



आधी रात को खनक गया मेरा कंगना

आधी रात को खनक गया मेरा कंगना

कहीं आये न हों सजना हमारे अंगना

आधी रात को खनक गया मेरा कंगना

ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न

ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न



जा के सजन से कारे कारे बदरा

ये तो कहो ज़रा मेरे लिए

जा के सजन से कारे कारे बदरा

ये तो कहो ज़रा मेरे लिए

प्यार के रंग में रंग ली है मैंने

कोरी चुनर पिया तेरे लिए

इस रंग पे,

इस रंग पे चढेगा अब कोई रंग ना

कहीं आये न हों सजना हमारे अंगना

आधी रात को खनक गया मेरा कंगना



ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न

ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न



हो जी हो हो हो हो

सुन के छनक हम तेरे कंगना की

बात है क्या पहचान गए

सुन के छनक हम तेरे कंगना की

बात है क्या पहचान गए

कौन पुकारे कैसे हैं इशारे

जानने वाले तो जान गए

तेरे सामने

तेरे सामने खड़े हैं गोरी तेरे सजना

चाहे कुछ भी हो टूटे तुम्हारा कंगना

आधी रात को खनक गया मेरा कंगना



ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न

ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न



देख रही हैं जो अँखियाँ मेरी

डरती हूँ मैं कहीं सपना न हो

देख रही हैं जो अँखियाँ मेरी

डरती हूँ मैं कहीं सपना न हो

तुझको है डर क्या

डरते हैं वही जिनका कोई भी तो अपना न हो

तेरे सामने

तेरे सामने खड़े हैं गोरी तेरे सजना

चाहे कुछ भी हो टूटे तुम्हारा कंगना



आधी रात को खनक गया मेरा कंगना

आधी रात को खनक गया मेरा कंगना



ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न

ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न

ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न

ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न

........................................

Adhi raat ko kahanak gaya-Toofan mein pyar kahan

Friday, 5 August 2011

रूठे सैयां हमारे सैयां-देवर १९६६

फिल्म देवर से आपको दूसरा गीत सुनवा रहे हैं. नायक अपनी फूटी किस्मत को
कोसते हुए कोठे पर जा पहुँचता है. उसने जम कर मदिरा सेवन भी कर रखा है.
अब उस मदिरा की ऐंठन वाले भाव चेहरे पर कैसे आते हैं वो देखिये इस गीत में.
उस ऐंठन में और बल देने का काम कर रहे हैं नर्तकी का नाच गाना.

संगीतकार रोशन बहुमुखी प्रतिभा वाले संगीतकार थे. इस गीत को ही लीजिए जो
एक मुजरा गीत कहा जा सकता है, इसको बिना विडियो देखे आप अंदाजा नहीं लगा
सकते कि फिल्म कि किस सिचुएशन में इस गीत का प्रयोग हुआ होगा. गीत में
संतूर और बांसुरी का सुन्दर प्रयोग हुआ है. बस हारमोनियम की ध्वनि से ही आप
एक क्लू पा सकते हैं कि ये शायद मुजरा गीत है.

गीत बेला बोस नामक अभिनेत्री पर फिल्माया गया है जिन्होंने लगभग इसी प्रकार की
भूमिकाएं ज्यादा कीं फिल्मों में. इसके अलावा वे डाकुओं कि पृष्ठभूमि पर बनी फिल्मों
में दिखाई दीं .



गीत के बोल:

होए रूठे सैंया
हाय, रूठे सैंया हमारे सैंया क्यों रूठे
ना तो हम बेवफ़ा ना तो हम झूठे

रूठे सैंया हमारे सैंया क्यों रूठे

चैन न आया हमें नींद न आई
देते रहे सारी रैन दुहाई
चैन न आया हमें नींद न आई
देते रहे सारी रैन दुहाई
कोई उनकी भी हाय राम
कोई उनकी भी यूँ ही निंदिया लूटे

रूठे सैंया हमारे सैंया क्यों रूठे
रूठे सैंया हमारे सैंया क्यों रूठे

कैसे न तड़पे दिल ये दीवाना
सच ही तो कहता है सारा ज़माना
कैसे न तड़पे दिल ये दीवाना
सच ही तो कहता है सारा ज़माना
लागी छूटे ना चाहे दुनिया छूटे

रूठे सैंया हमारे सैंया क्यों रूठे
रूठे सैंया हमारे सैंया क्यों रूठे

उनको मनाया हर एक अदा से
हाय मगर तौबा उनकी बला से
उनको मनाया हर एक अदा से
हाय मगर तौबा उनकी बला से
वो ना माने
वो ना माने हाय राम
वो ना माने किसी का चाहे दिल टूटे

रूठे सैंया हमारे सैंया क्यों रूठे
ना तो हम बेवफ़ा ना तो हम झूठे
रूठे सैंया हमारे सैंया क्यों रूठे
रूठे सैंया हमारे सैंया क्यों रूठे
..................................
Roothe saiyan hamare saiyan-Devar 1966

Tuesday, 2 August 2011

बहारों ने मेरा चमन लूट कर-देवर १९६६

जिंदगी में बहुत कुछ सरप्राइज़ गिफ्ट सरीखा प्राप्त होता है। फिल्म में नायक
जिस युवती से प्रेम करता है उसकी शादी नायक के मित्र से हो जाती है।
कुछ कुछ धोखे वाली कहानी है। धोखा नायक का मित्र देता है । नायक
घटनाक्रम बदलते ही नायिका का देवर बन जाता है। अपनी भावनाओं को
वो गीत के माध्यम से कैसे व्यक्त कर रहा है सुनिए आनंद बक्षी के बोलों,
मुकेश की आवाज़ और रोशन के संगीत में। नायक हैं धर्मेन्द्र, दूल्हा बने हैं
देवेन वर्मा और नायिका हैं शर्मीला टैगोर । आनंद बक्षी के लेखन कौशल के
अगर आप कायल नहीं हैं तो इस गीत को ध्यान से एक बार सुन लीजिए।






गीत के बोल:

बहारों ने मेरा चमन लूटकर
खिज़ां को ये इल्ज़ाम क्यों दे दिया
किसी ने चलो दुश्मनी की मगर
इसे दोस्ती नाम क्यों दे दिया

बहारों ने मेरा चमन लूटकर

मैं समझा नहीं ऐ मेरे हमनशीं
सज़ा ये मिली है मुझे किस लिये
सज़ा ये मिली है मुझे किस लिये
के साक़ी ने लब से मेरे छीन कर
किसी और को जाम क्यों दे दिया

बहारों ने मेरा चमन लूटकर

मुझे क्या पता था कभी इश्क़ में
रक़ीबों को कासिद बनाते नहीं
रक़ीबों को कासिद बनाते नहीं
खता हो गई मुझसे कासिद मेरे
तेरे हाथ पैगाम क्यों दे दिया

बहारों ने मेरा चमन लूटकर

खुदाया यहाँ तेरे इन्साफ़ के
बहुत मैंने चर्चे सुने हैं मगर
बहुत मैंने चर्चे सुने हैं मगर
सज़ा की जगह एक खतावार को
भला तूने ईनाम क्यों दे दिया

बहारों ने मेरा चमन लूटकर
खिज़ां को ये इल्ज़ाम क्यों दे दिया
....................................
Baharon ne mera chaman loot kar-Devar 1966

Tuesday, 19 July 2011

या दिल की सुनो दुनियावालों-अनुपमा १९६६

फिल्म अनुपमा से एक गीत पेश है हेमंत कुमार की आवाज़ में.
बोल लिखे हैं कैफी अजमी ने और धुन बनायीं है स्वयं हेमंत कुमार ने.
गीत फिल्माया गया है धर्मेन्द्र पर जिन्हें एक पार्टी में गीत गाने के
लिए बोला गया है. दुखियारी नायिका(शर्मिला टैगोर) को ध्यान में रखते
हुए शायद ऐसा गीत गाया जा रहा है.



गीत के बोल:

या दिल की सुनो दुनियावालों
या मुझको अभी चुप रहने दो
मैं ग़म को खुशी कैसे कह दूँ
जो कहते हैं उनको कहने दो

या दिल की सुनो दुनियावालों

ये फूल चमन में कैसा खिला
माली की नजर में प्यार नहीं
हँसते हुए क्या-क्या देख लिया
अब बहते हैं आँसू बहने दो

या दिल की सुनो दुनियावालों

इक ख्वाब खुशी का देखा नहीं
देखा जो कभी तो भूल गए
मांगा हुआ तुम कुछ दे न सके
जो तुमने दिया वो सहने दो

या दिल की सुनो दुनियावालों

क्या दर्द किसी का लेगा कोई
इतना तो किसी में दर्द नहीं
बहते हुए आँसू और बहें
अब ऐसी तसल्ली रहने दो

या दिल की सुनो दुनियावालों
............................
Ya dil ki suno-Anupama 1966

Monday, 6 June 2011

फूल बन जाऊँगा-प्यार किये जा १९६६

राजेंद्र कृष्ण का गीत और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का संगीत ? और तो और
शशि कपूर पर महेंद्र कपूर की आवाज़। कुछ अटपटा कोम्बिनाशन है ना।
जो भी हो, ये गीत बढ़िया बन पड़ा है और खासा लोकप्रिय हुआ था। साथ
में आवाज़ है लता मंगेशकर की। शशि के साथ जो खाते पीते घर की
अभिनेत्री हैं उनका नाम है-राजश्री, ये दक्षिण भारत की अभिनेत्री हैं। इस
फिल्म में दो बड़े नामी हास्य कलाकार मौजूद हैं-महमूद और किशोर कुमार।
किशोर कुमार तो फिल्म में नायक हैं और उनकी जोड़ी जमाई गई है कल्पना
के साथ। सभी अभिनेत्रियाँ इस फिल्म की सेहतमंद और तंदुरुस्त हैं।



गीत के बोल:

फूल बन जाऊँगा शर्त ये है मगर
फूल बन जाऊँगा शर्त ये है मगर
अपनी जुल्फों में मुझको सजा लीजिये
अपनी जुल्फों में मुझको सजा लीजिये
ख्वाब बन जाऊंगी शर्त ये है मगर
ख्वाब बन जाऊंगी शर्त ये है मगर
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये

कभी कभी सोचूं की तुम मेरे क्या हो
कभी कभी सोचूं की तुम मेरे क्या हो
दर्द हो दिल का, आ आ आ आ आ आ आ
दर्द हो दिल का या तुम दवा हो
दर्द बान जाऊँगा शर्त ये है मगर
दर्द बान जाऊँगा शर्त ये है मगर
दर्द-ए-दिल की मुझी से दवा लीजिये
दर्द-ए-दिल की मुझी से दवा लीजिये
ख्वाब बन जाऊंगी शर्त ये है मगर
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये

आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ
तुमने चाह था अफसाना मैं बन गया
तुमने चाह था अफसाना मैं बन गया
बैठे बिथ्लाये दीवाना मैं बन गया
होश में लूंगी, शर्त ये है मगर
होश में लूंगी, शर्त ये है मगर
इक सिवा मेरे सब कुछ भुला दीजिये
इक सिवा मेरे सब कुछ भुला दीजिये
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये

दुनिया में मेरी जो तुम ही ना आते
दुनिया में मेरी जो तुम ही ना आते
गीत हमारे ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ
गीत हमारे सितारे ना गाते
गीत बन जाऊँगा शर्त ये है मगर
गीत बन जाऊँगा शर्त ये है मगर
अपने कानों में मुझको जगह दीजिये
अपने कानों में मुझको जगह दीजिये
ख्वाब बन जाऊंगी शर्त ये है मगर
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये

फूल बन जाऊँगा शर्त ये है मगर
अपनी जुल्फों में मुझको सजा लीजिये
अपनी जुल्फों में मुझको सजा लीजिये

................................
Phool ban jaoonga-Pyar kiye ja 1966

Monday, 3 January 2011

और कुछ देर ठहर-आखरी ख़त १९६६

राजेश खन्ना के खाते में शायद सबसे ज्यादा रोमांटिक गीत आये हैं।
वैसे तो सभी नायकों के हिस्से में आये होंगे मगर जिन गीतों को सबसे
ज्यादा सुना जाता है उनकी बात हो रही है। शुरूआती दौर में उनके खाते में
रफ़ी के गाये काफी गीत आये, उनमें से जो उल्लेखनीय गीत है वो हम
पहले सुनेंगे इस ब्लॉग पर। ये गीत कैफ़ी आज़मी का लिखा और ख़य्याम
द्वारा संगीतबद्ध गीत है सन १९६६ की फिल्म आखरी ख़त से।



गीत के बोल:

और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर

रात बाक़ी है अभी रात में रस बाक़ी है
पा के तुझको तुझे पाने की हवस बाक़ी है
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर

जिस्म का रंग फ़ज़ा में जो बिखर जायेगा
मेहरबान हुस्न तेरा और निखर जायेगा
लाख ज़ालिम है ज़माना मगर इतना भी नहीं
तू जो बाहों में रहे वक़्त ठहर जायेगा
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर

ज़िंदगी अब इन्हीं क़दमों पे लुटा दूँ तो सही
ज़िंदगी अब इन्हीं क़दमों पे लुटा दूँ तो सही
ऐ हसीन बुत मैं ख़ुदा तुझको बना दूँ तो सही
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर और कुछ देर न जा
और कुछ देर ठहर
....................................
Aur kuchh der thehar-Akhiri khat 1966

Monday, 6 December 2010

आप से मैंने मेरी जान-ये रात फिर नहीं आएगी १९६६

ओ पी नय्यर के संगीत निर्देशन वाली एक और फिल्म है
जिसके सभी गीत सुने जाते हैं और ये तय करना मुश्किल
होता है कि कौन सा बेहतर है। ओ पी नय्यर के लिए शायद
ये चुनौती भरा विषय रहा होगा एक भूतिया फिल्म के लिए
संगीत तैयार करना। हिंदी सस्पेंस फिल्मों का खाका अक्सर
भूतों के इर्द गिर्द घूमा करता है। इस गीत में नायक नायिका
दोनों स्मार्ट दिख रहे हैं। मैंने सुन्दर शब्द का प्रयोग इसलिए
नहीं किया कि सुन्दरता शब्द शायद स्त्रियों के लिए सुरक्षित
है। पुराने ज़माने में पुरुषों का चेहरा गोरा बनाने वाली क्रीम
नहीं आया करती थी।

गीत फिल्माया गया है विश्वजीत और शर्मिला टेगोर पर।
शर्मिला अपनी चित-परिचित घबराहट मिश्रित मुस्कराहट
के साथ प्रस्तुत हैं। ये एक ऐसा भाव था जो उनका ट्रेड मार्क
भाव कहा जा सकता है।

गीत के बोल लाजवाब हैं और इसको टाइप करने में भी आनंद की
अनुभूति हो रही है। इसको आप कह सकते हैं आदर्श/संपूर्ण युगल
गीत । एक उम्दा किस्म का रोमांटिक गीत सुनकर दिल बाग़ बाग़ हो
उठता है। गीत लिखा है शम्सुल हुदा बिहारी(SH Bihari) ने।




गीत के बोल:

आपसे मैंने मेरी जान मोहब्बत की है
आप चाहें तो मेरी जान भी ले सकती हैं
आप जब हैं तो मेरे पास मेरा सब कुछ है
जान क्या चीज है ईमान भी ले सकती हैं

आप से मैंने मेरी जान

आपको मैंने मोहब्बत का खुदा समझा है
आप कहिये कि मुझे आपने क्या समझा है
ज़िन्दगी क्या है मोहब्बत की मेहरबानी है
दर्द को मैंने हकीकत में दवा समझा है

आपसे मैंने मेरी जान मोहब्बत की है
आप चाहें तो मेरी जान भी ले सकती हैं

आप से मैंने मेरी जान

दिल वही है जो सदा गीत वफ़ा के गाये
प्यार करता हो जिसे प्यार ही करता जाए
सैंकड़ों साल जीने से बेहतर है वो घडी
हाथ में जब हाथ हो जब यार का मौत आ जाए

आपसे मैंने मेरी जान मोहब्बत की है
आप चाहें तो मेरी जान भी ले सकते हैं

आप जब हैं तो मेरे पास मेरा सब कुछ है
जान क्या चीज है ईमान भी ले सकती हैं

आपसे मैंने मेरी जान

Friday, 3 December 2010

बहारों मेरा जीवन भी संवारो-आखरी ख़त १९६६

राजेश खन्ना की काले पीले ज़माने की फिल्म। इसमें उनके
साथ इन्द्राणी मुखर्जी और एक बच्चे ने काम किया है। पूरी
फिल्म बच्चे के इर्द गिर्द घूमती है। फिल्म के गीत कैफ़ी आज़मी
के लिखे हुए हैं और संगीत तैयार किया ख़य्याम ने। फिल्म से
एक लता का गाया मधुर गीत सुनवाते हैं आपको। चेतन आनंद
निर्देशित ये फिल्म एक बार ज़रूर देखनी चाहिए फिल्म प्रेमियों
को। बच्चे ने फिल्म के नायक नायिका से अच्छी एक्टिंग की है।
मन्नू भंडारी की एक कहानी-आपका बंटी पर आधारित इस फिल्म
ने अलोचाकों के बीच वाहवाही ज़रूर बटोरी भले ही टिकट घर पर
नोट ना बटोरें हों।

गीत के साथ प्रस्तुत कमेंट्स में एक जानकारी यूँ हैं-इस गीत के लिए
सितार वादक उस्ताद रईस खान को विशेष तौर पर पाकिस्तान से
बुलवाया गया था जबकि हमारे देश में सितार वादकों की कोई कमी
नहीं। दूसरे संगीतकार भी सितार वादकों की सेवाएँ नियमित रूप से
लेते रहे हैं। अब ये जानकारी कितनी प्रमाणिक है कहा नहीं जा सकता।
खैर बाकी की जानकारी भी दिए देते हैं आपको-ये गीत राग 'पहाड़ी '
पर आधारित है।



गीत के बोल:

बहारों, मेरा जीवन भी सँवारों
बहारों, मेरा जीवन भी सँवारों

कोई आए कहीं से
कोई आए कहीं से, यूँ पुकारो
बहारों, मेरा जीवन भी सँवारों,
बहारों

तुम्हीं से दिल ने सीखा है तड़पना
तुम्हीं से दिल ने सीखा है तड़पना

तुम्हीं को दोष दूंगी
तुम्हीं को दोष दूंगी, ऐ नज़ारों
बहारों, मेरा जीवन भी सँवारों,
बहारों

रचाओ कोई कजरा लाओ गजरा
रचाओ कोई कजरा लाओ गजरा

लचकती डालियों तुम
लचकती डालियों तुम, फूल बहारों
बहारों, मेरा जीवन भी सँवारों,
बहारों

लगाओ मेरे इन हाथों में मेहंदी
लगाओ मेरे इन हाथों में मेहंदी

सजाओ माँग मेरी
सजाओ माँग मेरी, या सिधारो,
बहारों, मेरा जीवन भी सँवारों,
बहारों

Sunday, 21 November 2010

कजरे बदरवा रे-पति पत्नी १९६६

पिछला गीत आपने सुना पिता का, अब पुत्र की एक मधुर
रचना सुन लीजिये। घरेलू सी दिखने वाली अभिनेत्री नंदा पर ये
गीत फिल्माया गया है। नंदा ६० के दशक में दिखाई देना शुरू हुयीं
और ७० के पूर्वार्ध तक नियमित रूप से दिखती रही फिर अचानक
से गायब हो गयीं। इस फिल्म में वे शायद संजीव कुमार की पत्नी
की भूमिका कर रही हैं। गीत आनंद बक्षी ने लिखा है और इसे लता
मंगेशकर गा रही हैं। हल्का सा ईको प्रभाव इस गीत को खूबसूरती
प्रदान कर रहा है। बदरवा बोलते-बोलते आवाज़ गूंजती हुई हवा
में घुल जाती है।



गीत के बोल:

कजरे बदरवा रे
कजरे बदरवा रे
मर्ज़ी तेरी है क्या ज़ालिमा
ऐसे न बरस जुल्मी
कह न दूं किसी को मैं बालमा

कजरे बदरवा

कहीं गिर जाए न बिंदिया
कहीं उड़ जाए न निंदिया
हो ओ, कहीं गिर जाए न बिंदिया
कहीं उड़ जाए न निंदिया
काली काली आने वाली
काली काली आने वाली
बरखा की रात है

कजरे बदरवा

रिमझिम वाली चुनरिया
ओढ़े हुए आई बदरिया
हो, रिमझिम वाली चुनरिया
ओढ़े हुए आई बदरिया
झूमें ऐसे गोरी जैसे
झूमें ऐसे गोरी जैसे
सजना के साथ में

कजरे बदरवा

इस भीगी भीगी हवा ने
कानों में कहा क्या न जाने
हो ओ, इस भीगी भीगी हवा ने
कानों में कहा क्या न जाने
मैं शरमाई मैं घबरायी
मैं शरमाई मैं घबरायी
ऐसी कोई बात है

कजरे बदरवा
...........................
Kajre Badarwa re-Pati Patni 1966
 
 
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