फिल्म देवर से आपको दूसरा गीत सुनवा रहे हैं. नायक अपनी फूटी किस्मत को
कोसते हुए कोठे पर जा पहुँचता है. उसने जम कर मदिरा सेवन भी कर रखा है.
अब उस मदिरा की ऐंठन वाले भाव चेहरे पर कैसे आते हैं वो देखिये इस गीत में.
उस ऐंठन में और बल देने का काम कर रहे हैं नर्तकी का नाच गाना.
संगीतकार रोशन बहुमुखी प्रतिभा वाले संगीतकार थे. इस गीत को ही लीजिए जो
एक मुजरा गीत कहा जा सकता है, इसको बिना विडियो देखे आप अंदाजा नहीं लगा
सकते कि फिल्म कि किस सिचुएशन में इस गीत का प्रयोग हुआ होगा. गीत में
संतूर और बांसुरी का सुन्दर प्रयोग हुआ है. बस हारमोनियम की ध्वनि से ही आप
एक क्लू पा सकते हैं कि ये शायद मुजरा गीत है.
गीत बेला बोस नामक अभिनेत्री पर फिल्माया गया है जिन्होंने लगभग इसी प्रकार की
भूमिकाएं ज्यादा कीं फिल्मों में. इसके अलावा वे डाकुओं कि पृष्ठभूमि पर बनी फिल्मों
में दिखाई दीं .
गीत के बोल:
होए रूठे सैंया
हाय, रूठे सैंया हमारे सैंया क्यों रूठे
ना तो हम बेवफ़ा ना तो हम झूठे
रूठे सैंया हमारे सैंया क्यों रूठे
चैन न आया हमें नींद न आई
देते रहे सारी रैन दुहाई
चैन न आया हमें नींद न आई
देते रहे सारी रैन दुहाई
कोई उनकी भी हाय राम
कोई उनकी भी यूँ ही निंदिया लूटे
रूठे सैंया हमारे सैंया क्यों रूठे
रूठे सैंया हमारे सैंया क्यों रूठे
कैसे न तड़पे दिल ये दीवाना
सच ही तो कहता है सारा ज़माना
कैसे न तड़पे दिल ये दीवाना
सच ही तो कहता है सारा ज़माना
लागी छूटे ना चाहे दुनिया छूटे
रूठे सैंया हमारे सैंया क्यों रूठे
रूठे सैंया हमारे सैंया क्यों रूठे
उनको मनाया हर एक अदा से
हाय मगर तौबा उनकी बला से
उनको मनाया हर एक अदा से
हाय मगर तौबा उनकी बला से
वो ना माने
वो ना माने हाय राम
वो ना माने किसी का चाहे दिल टूटे
रूठे सैंया हमारे सैंया क्यों रूठे
ना तो हम बेवफ़ा ना तो हम झूठे
रूठे सैंया हमारे सैंया क्यों रूठे
रूठे सैंया हमारे सैंया क्यों रूठे
..................................
Roothe saiyan hamare saiyan-Devar 1966
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Friday, 5 August 2011
Tuesday, 2 August 2011
बहारों ने मेरा चमन लूट कर-देवर १९६६
जिंदगी में बहुत कुछ सरप्राइज़ गिफ्ट सरीखा प्राप्त होता है। फिल्म में नायक
जिस युवती से प्रेम करता है उसकी शादी नायक के मित्र से हो जाती है।
कुछ कुछ धोखे वाली कहानी है। धोखा नायक का मित्र देता है । नायक
घटनाक्रम बदलते ही नायिका का देवर बन जाता है। अपनी भावनाओं को
वो गीत के माध्यम से कैसे व्यक्त कर रहा है सुनिए आनंद बक्षी के बोलों,
मुकेश की आवाज़ और रोशन के संगीत में। नायक हैं धर्मेन्द्र, दूल्हा बने हैं
देवेन वर्मा और नायिका हैं शर्मीला टैगोर । आनंद बक्षी के लेखन कौशल के
अगर आप कायल नहीं हैं तो इस गीत को ध्यान से एक बार सुन लीजिए।
गीत के बोल:
बहारों ने मेरा चमन लूटकर
खिज़ां को ये इल्ज़ाम क्यों दे दिया
किसी ने चलो दुश्मनी की मगर
इसे दोस्ती नाम क्यों दे दिया
बहारों ने मेरा चमन लूटकर
मैं समझा नहीं ऐ मेरे हमनशीं
सज़ा ये मिली है मुझे किस लिये
सज़ा ये मिली है मुझे किस लिये
के साक़ी ने लब से मेरे छीन कर
किसी और को जाम क्यों दे दिया
बहारों ने मेरा चमन लूटकर
मुझे क्या पता था कभी इश्क़ में
रक़ीबों को कासिद बनाते नहीं
रक़ीबों को कासिद बनाते नहीं
खता हो गई मुझसे कासिद मेरे
तेरे हाथ पैगाम क्यों दे दिया
बहारों ने मेरा चमन लूटकर
खुदाया यहाँ तेरे इन्साफ़ के
बहुत मैंने चर्चे सुने हैं मगर
बहुत मैंने चर्चे सुने हैं मगर
सज़ा की जगह एक खतावार को
भला तूने ईनाम क्यों दे दिया
बहारों ने मेरा चमन लूटकर
खिज़ां को ये इल्ज़ाम क्यों दे दिया
....................................
Baharon ne mera chaman loot kar-Devar 1966
जिस युवती से प्रेम करता है उसकी शादी नायक के मित्र से हो जाती है।
कुछ कुछ धोखे वाली कहानी है। धोखा नायक का मित्र देता है । नायक
घटनाक्रम बदलते ही नायिका का देवर बन जाता है। अपनी भावनाओं को
वो गीत के माध्यम से कैसे व्यक्त कर रहा है सुनिए आनंद बक्षी के बोलों,
मुकेश की आवाज़ और रोशन के संगीत में। नायक हैं धर्मेन्द्र, दूल्हा बने हैं
देवेन वर्मा और नायिका हैं शर्मीला टैगोर । आनंद बक्षी के लेखन कौशल के
अगर आप कायल नहीं हैं तो इस गीत को ध्यान से एक बार सुन लीजिए।
गीत के बोल:
बहारों ने मेरा चमन लूटकर
खिज़ां को ये इल्ज़ाम क्यों दे दिया
किसी ने चलो दुश्मनी की मगर
इसे दोस्ती नाम क्यों दे दिया
बहारों ने मेरा चमन लूटकर
मैं समझा नहीं ऐ मेरे हमनशीं
सज़ा ये मिली है मुझे किस लिये
सज़ा ये मिली है मुझे किस लिये
के साक़ी ने लब से मेरे छीन कर
किसी और को जाम क्यों दे दिया
बहारों ने मेरा चमन लूटकर
मुझे क्या पता था कभी इश्क़ में
रक़ीबों को कासिद बनाते नहीं
रक़ीबों को कासिद बनाते नहीं
खता हो गई मुझसे कासिद मेरे
तेरे हाथ पैगाम क्यों दे दिया
बहारों ने मेरा चमन लूटकर
खुदाया यहाँ तेरे इन्साफ़ के
बहुत मैंने चर्चे सुने हैं मगर
बहुत मैंने चर्चे सुने हैं मगर
सज़ा की जगह एक खतावार को
भला तूने ईनाम क्यों दे दिया
बहारों ने मेरा चमन लूटकर
खिज़ां को ये इल्ज़ाम क्यों दे दिया
....................................
Baharon ne mera chaman loot kar-Devar 1966
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Saturday, 16 July 2011
आग छिड़क गई चांदनी-आगोश १९५३
मीना कपूर आवाज़ के मामले में गीत दत्त की बहन जैसी
सुनाई पढ़ती हैं । वैसे उनकी आवाज़ गीता की आवाज़ से
अलग है। हर आवाज़ का अपना अंदाज़ होता है, खूबियाँ
होती हैं। बस गीता की आवाज़ में दर्द ज्यादा है। मीना कपूर
ने ४० और ५० के दशक के लगभग सभी प्रमुख संगीतकारों
के लिए गीत गाये हैं। एक प्रमुख संगीतकार की तो वे
जीवनसंगिनी ही बन गयीं-अनिल बिश्वास।
ये गीत है फिल्म आगोश से और बड़ा ही मस्तमौला सा गीत
है.
गीत के बोल:
आग छिड़क गयी चांदनी ,
मेरे गोरे बदन पे
ओ मेरे कोमल मन पे, हाय
आज मैं डर गयी डर गयी डर गयी रे
आग छिड़क गयी चांदनी ,
मेरे गोरे बदन पे
ओ मेरे कोमल मन पे, हाय
आज मैं डर गयी डर गयी डर गयी रे
लहरों के संग नाचे छम छम किरणों की डोरियाँ
धीरे से पल खींचे दिल के पर्दों की डोरियाँ
झूम ही जाता है आसमान मचल गयी मेरे सजना
हाय आज मैं डर गयी डर गयी डर गयी रे
आग छिड़क गयी चांदनी ,
मेरे गोरे बदन पे
ओ मेरे कोमल मन पे, हाय
आज मैं डर गयी डर गयी डर गयी रे
रात सुहानी चुपके से कुछ कानों में कह गयी
मेरे दिल की बात बेदर्दी दिल में ही रह गयी
तारे भी संग हैं सितारे हँसे मदमस्त नज़ारे
हाय, आज मैं डर गयी डर गयी डर गयी रे
आग छिड़क गयी चांदनी ,
मेरे गोरे बदन पे
ओ मेरे कोमल मन पे, हाय
आज मैं गिर गयी गिर गयी गिर गयी रे
चाँद की शीतल छांव में सब दुनिया सो गयी
मेरी दुनिया प्यार की खुशियों में खो गयी
बैठे हैं वो आग लगा के मगर दामन को बचा के
हाय आज मैं डर गयी डर गयी डर गयी रे
आग छिड़क गयी चांदनी ,
मेरे गोरे बदन पे
ओ मेरे कोमल मन पे, हाय
आज मैं गिर गयी गिर गयी गिर गयी रे
....................................
Aag chhidak gayi chandni-Aagosh 1953
सुनाई पढ़ती हैं । वैसे उनकी आवाज़ गीता की आवाज़ से
अलग है। हर आवाज़ का अपना अंदाज़ होता है, खूबियाँ
होती हैं। बस गीता की आवाज़ में दर्द ज्यादा है। मीना कपूर
ने ४० और ५० के दशक के लगभग सभी प्रमुख संगीतकारों
के लिए गीत गाये हैं। एक प्रमुख संगीतकार की तो वे
जीवनसंगिनी ही बन गयीं-अनिल बिश्वास।
ये गीत है फिल्म आगोश से और बड़ा ही मस्तमौला सा गीत
है.
गीत के बोल:
आग छिड़क गयी चांदनी ,
मेरे गोरे बदन पे
ओ मेरे कोमल मन पे, हाय
आज मैं डर गयी डर गयी डर गयी रे
आग छिड़क गयी चांदनी ,
मेरे गोरे बदन पे
ओ मेरे कोमल मन पे, हाय
आज मैं डर गयी डर गयी डर गयी रे
लहरों के संग नाचे छम छम किरणों की डोरियाँ
धीरे से पल खींचे दिल के पर्दों की डोरियाँ
झूम ही जाता है आसमान मचल गयी मेरे सजना
हाय आज मैं डर गयी डर गयी डर गयी रे
आग छिड़क गयी चांदनी ,
मेरे गोरे बदन पे
ओ मेरे कोमल मन पे, हाय
आज मैं डर गयी डर गयी डर गयी रे
रात सुहानी चुपके से कुछ कानों में कह गयी
मेरे दिल की बात बेदर्दी दिल में ही रह गयी
तारे भी संग हैं सितारे हँसे मदमस्त नज़ारे
हाय, आज मैं डर गयी डर गयी डर गयी रे
आग छिड़क गयी चांदनी ,
मेरे गोरे बदन पे
ओ मेरे कोमल मन पे, हाय
आज मैं गिर गयी गिर गयी गिर गयी रे
चाँद की शीतल छांव में सब दुनिया सो गयी
मेरी दुनिया प्यार की खुशियों में खो गयी
बैठे हैं वो आग लगा के मगर दामन को बचा के
हाय आज मैं डर गयी डर गयी डर गयी रे
आग छिड़क गयी चांदनी ,
मेरे गोरे बदन पे
ओ मेरे कोमल मन पे, हाय
आज मैं गिर गयी गिर गयी गिर गयी रे
....................................
Aag chhidak gayi chandni-Aagosh 1953
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Wednesday, 22 June 2011
लोग कहते हैं कि हम-बहू बेगम १९६७
साहिर का है अंदाज़-ए-बयां और। ख़वातीनों हाज़रात, महबूब
से किनारा करने का खुशनुमा ख्याल और किस के दिमाग में
आ कर कागज़ पर उतर सकता है। किनारा करने की बात पर
रज़ामंदी मांगी जा रही है, समाज की बंदिशें या फिर कोई और
वजह ऐसा करने को प्रेरित कर रही हैं जानने के लिए आपको
बहू बेगम फिल्म एक बार ज़रूर देखना पड़ेगी।
साहिर के गीतों से फिल्म के निर्देशक का काम कभी कभी बहुत
आसान हो जाया करता था। आम दर्शक तो धुन से ही आनंद उठा
लिया करता लेकिन दिमाग खपाने वाले दर्शक गीत की गहराई
में उतर कर नायक की करतब-ए-एक्टिंग को गीत के शब्दों और
भावों से मिलाने की असफल कोशिश में लग जाते। साहिर के गीतों
पर कुछ ही संजीदा कलाकारों ने बढ़िया अभिनय किया है।
कमबख्त दिल तो मानता नहीं है क्या किया जाये, इश्क की
खुमारी दिल पर झाड फानूस की धूल माफिक चिपकी रहती है,
कुछ करने या ना करने की जायज़ वजहें होना ज़रूरी है। अब
जुदा हो ही रहे हैं तो सारे अरमान पूरे करते चलें और ये जुमला
दोहराते चलें-किनारा कर लें।
प्रेम त्रिकोण पर आधारित इस फिल्म में कई यादगार गीत हैं।
ये गीत थोड़ा कम सुना जाता है और गीतों की तुलना में। गीत
मधुर है इसलिए हमने इसे पहले चुना है सुनने के लिए।
गीत के बोल:
लोग कहते हैं कि हम तुमसे किनारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं
तुमने जिस हाल-ए-परेशानी से निकला था हमें
आसरा दे के मोहब्बत का संभाला था हमें
सोचते हैं के वही
सोचते हैं के वही हाल दुबारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं
यूँ भी अब तुमसे मुलाक़ात अब नहीं होने की
मिल भी जाओ
मिल भी जाओ तो कोई बात नहीं होने की
आखिरी बार बस अब
आखिरी बार बस अब जिक्र तुम्हारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं
आखिरी बार ख्यालों में बुला लें तुमको
आखिरी बार कलेजे से लगा लें तुमको
और फिर अपने तड़पने
और फिर अपने तड़पने का नज़ारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं कि हम तुमसे किनारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं
.....................
Log kehte hain ki hum-Bahu Begum 1967
से किनारा करने का खुशनुमा ख्याल और किस के दिमाग में
आ कर कागज़ पर उतर सकता है। किनारा करने की बात पर
रज़ामंदी मांगी जा रही है, समाज की बंदिशें या फिर कोई और
वजह ऐसा करने को प्रेरित कर रही हैं जानने के लिए आपको
बहू बेगम फिल्म एक बार ज़रूर देखना पड़ेगी।
साहिर के गीतों से फिल्म के निर्देशक का काम कभी कभी बहुत
आसान हो जाया करता था। आम दर्शक तो धुन से ही आनंद उठा
लिया करता लेकिन दिमाग खपाने वाले दर्शक गीत की गहराई
में उतर कर नायक की करतब-ए-एक्टिंग को गीत के शब्दों और
भावों से मिलाने की असफल कोशिश में लग जाते। साहिर के गीतों
पर कुछ ही संजीदा कलाकारों ने बढ़िया अभिनय किया है।
कमबख्त दिल तो मानता नहीं है क्या किया जाये, इश्क की
खुमारी दिल पर झाड फानूस की धूल माफिक चिपकी रहती है,
कुछ करने या ना करने की जायज़ वजहें होना ज़रूरी है। अब
जुदा हो ही रहे हैं तो सारे अरमान पूरे करते चलें और ये जुमला
दोहराते चलें-किनारा कर लें।
प्रेम त्रिकोण पर आधारित इस फिल्म में कई यादगार गीत हैं।
ये गीत थोड़ा कम सुना जाता है और गीतों की तुलना में। गीत
मधुर है इसलिए हमने इसे पहले चुना है सुनने के लिए।
गीत के बोल:
लोग कहते हैं कि हम तुमसे किनारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं
तुमने जिस हाल-ए-परेशानी से निकला था हमें
आसरा दे के मोहब्बत का संभाला था हमें
सोचते हैं के वही
सोचते हैं के वही हाल दुबारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं
यूँ भी अब तुमसे मुलाक़ात अब नहीं होने की
मिल भी जाओ
मिल भी जाओ तो कोई बात नहीं होने की
आखिरी बार बस अब
आखिरी बार बस अब जिक्र तुम्हारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं
आखिरी बार ख्यालों में बुला लें तुमको
आखिरी बार कलेजे से लगा लें तुमको
और फिर अपने तड़पने
और फिर अपने तड़पने का नज़ारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं कि हम तुमसे किनारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं
.....................
Log kehte hain ki hum-Bahu Begum 1967
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Saturday, 21 May 2011
ख्यालों में किसी के इस तरह-बावरे नैन १९५०
अजीब इत्तेफाक है। बीच रोड पर ट्राफिक के सर्कस के बीच आपको
अगर फिल्म बावरे नैन का ये गीत याद आ जाये तो क्या कीजियेगा ?
अजी बस गुनगुना लग जाइये और क्या। बीच में आड़े टेड़े चलने वालों
के चरित्रों का उल्लेख करके जुबान ख़राब करने के बजाये गीत जोर जोर
से गाने लग जाइये। आज हमने भी यही किया और गाने ने होर्न का काम
किया। बात फिर भी समझ नहीं आई-ऐसा क्यूँ होता है-उलझन में
दिमाग हो और कोई गीत अपने आप दिमाग में कौंध जाये। हम भी
गीत बनाने वालों से यही पूछ लेते हैं-"ख्यालों में किसी के इस तरह
आया नहीं करते" । केदार शर्मा के लिखे गीत की धुन बनाई है रोशन
ने। गीत गा रहे हैं गीता दत्त और मुकेश। राज कपूर के साथ परदे
पर शायद विजय लक्ष्मी नामक अभिनेत्री हैं।
गीत के बोल:
ख़यालों में किसी के, इस तरह आया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते
ख़यालों में किसी के, इस तरह आया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते
दिलों को रौंद कर दिल अपना बहलाया नहीं करते
जो ठुकराए गए हों उनको ठुकराया नहीं करते
दिलों को रौंद कर
हँसी फूलों की दो दिन चाँदनी भी चार दिन की है
चाँदनी चार दिन की है
हँसी फूलों की दो दिन चाँदनी भी चार दिन की है
चाँदनी चार दिन की है
मिली हो चाँद सी सूरत तो इतराया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते
ख़यालों में किसी के
जिन्हें मिटना हो वो मिटने से डर जाया नहीं करते
वो डर जाया नहीं करते
जिन्हें मिटना हो वो मिटने से डर जाया नहीं करते
वो डर जाया नहीं करते
मुहब्बत करने वाले ग़म से घबराया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते
ख़यालों में किसी के
मुहब्बत का सबक सीखो, ये जाकर जलने वालों से
ये जाकर जलने वालों से
मुहब्बत का सबक सीखो, ये जाकर जलने वालों से
ये जाकर जलने वालों से
के दिल की बात भी लब तक कभी लाया नहीं करते
जो ठुकराए गए हों उनको ठुकराया नहीं करते
ख़यालों में किसी के, इस तरह आया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते
--------------------------------------
Khayalon mein kisi ke-Baawre Nain 1950
अगर फिल्म बावरे नैन का ये गीत याद आ जाये तो क्या कीजियेगा ?
अजी बस गुनगुना लग जाइये और क्या। बीच में आड़े टेड़े चलने वालों
के चरित्रों का उल्लेख करके जुबान ख़राब करने के बजाये गीत जोर जोर
से गाने लग जाइये। आज हमने भी यही किया और गाने ने होर्न का काम
किया। बात फिर भी समझ नहीं आई-ऐसा क्यूँ होता है-उलझन में
दिमाग हो और कोई गीत अपने आप दिमाग में कौंध जाये। हम भी
गीत बनाने वालों से यही पूछ लेते हैं-"ख्यालों में किसी के इस तरह
आया नहीं करते" । केदार शर्मा के लिखे गीत की धुन बनाई है रोशन
ने। गीत गा रहे हैं गीता दत्त और मुकेश। राज कपूर के साथ परदे
पर शायद विजय लक्ष्मी नामक अभिनेत्री हैं।
गीत के बोल:
ख़यालों में किसी के, इस तरह आया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते
ख़यालों में किसी के, इस तरह आया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते
दिलों को रौंद कर दिल अपना बहलाया नहीं करते
जो ठुकराए गए हों उनको ठुकराया नहीं करते
दिलों को रौंद कर
हँसी फूलों की दो दिन चाँदनी भी चार दिन की है
चाँदनी चार दिन की है
हँसी फूलों की दो दिन चाँदनी भी चार दिन की है
चाँदनी चार दिन की है
मिली हो चाँद सी सूरत तो इतराया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते
ख़यालों में किसी के
जिन्हें मिटना हो वो मिटने से डर जाया नहीं करते
वो डर जाया नहीं करते
जिन्हें मिटना हो वो मिटने से डर जाया नहीं करते
वो डर जाया नहीं करते
मुहब्बत करने वाले ग़म से घबराया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते
ख़यालों में किसी के
मुहब्बत का सबक सीखो, ये जाकर जलने वालों से
ये जाकर जलने वालों से
मुहब्बत का सबक सीखो, ये जाकर जलने वालों से
ये जाकर जलने वालों से
के दिल की बात भी लब तक कभी लाया नहीं करते
जो ठुकराए गए हों उनको ठुकराया नहीं करते
ख़यालों में किसी के, इस तरह आया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते
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Khayalon mein kisi ke-Baawre Nain 1950
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Monday, 13 December 2010
आ के अब आता नहीं दिल को करार-महबूबा १९५४
आपको इस ब्लॉग पर १९७६ की महबूबा फिल्म से
दो गीत सुनवाए जा चुके हैं। आइये अब सुना जाए
गीत जी की एक पसंद की अभिनेत्री पर फिल्माया गया
लता जी का गाया गीत। फिल्म में शम्मी कपूर और
नलिनी जयवंत की जोड़ी है।
उस ज़माने में नलिनी जयवंत एक नामी सितारा
थीं और शम्मी नए कलाकार। शम्मी को इस हिसाब
से सभी काल की सुन्दर अभिनेत्रियों के साथ अभिनय
का मौका मिल गया। स्वयं के निर्देशन में फिल्म
मनोरंजन में जीनत अमान के साथ अभिनय का भी
मौका मिला हालाँकि उस फिल्म के हीरो थे संजीव कुमार।
गाने के बोल:
आ के अब आता नहीं दिल को करार
आ के अब आता नहीं दिल को करार
राह तकते थक गया है इंतज़ार
आ के अब आता नहीं दिल को क़रार
किस कदर बेचैन है दुनिया मेरी
किस कदर बेचैन है दुनिया मेरी
दिल की हर धड़कन में है आहात तेरी
आरजुएँ हो रही हैं बेकरार
आ के अब आता नहीं दिल को करार
दिल सदायें दे रहा है तू कहाँ
दिल सदायें दे रहा है तू कहाँ
मुन्तजिर है चाँद तारे आसमान
ये हवाएं ये फज़ाएँ ये बहार
आ के अब आता नहीं दिल को करार
पास तेरे वो हसीं रातें गई
पास तेरे वो हसीं रातें गई
प्यार की रंगीं मुलाक़ातें गई
रह गया है दर्द दिल की यादगार
आ के अब आता नहीं दिल को क़रार
आ के अब आता नहीं दिल को करार
राह तकते थक गया है इंतज़ार
आ के अब आता नहीं दिल को क़रार
दो गीत सुनवाए जा चुके हैं। आइये अब सुना जाए
गीत जी की एक पसंद की अभिनेत्री पर फिल्माया गया
लता जी का गाया गीत। फिल्म में शम्मी कपूर और
नलिनी जयवंत की जोड़ी है।
उस ज़माने में नलिनी जयवंत एक नामी सितारा
थीं और शम्मी नए कलाकार। शम्मी को इस हिसाब
से सभी काल की सुन्दर अभिनेत्रियों के साथ अभिनय
का मौका मिल गया। स्वयं के निर्देशन में फिल्म
मनोरंजन में जीनत अमान के साथ अभिनय का भी
मौका मिला हालाँकि उस फिल्म के हीरो थे संजीव कुमार।
गाने के बोल:
आ के अब आता नहीं दिल को करार
आ के अब आता नहीं दिल को करार
राह तकते थक गया है इंतज़ार
आ के अब आता नहीं दिल को क़रार
किस कदर बेचैन है दुनिया मेरी
किस कदर बेचैन है दुनिया मेरी
दिल की हर धड़कन में है आहात तेरी
आरजुएँ हो रही हैं बेकरार
आ के अब आता नहीं दिल को करार
दिल सदायें दे रहा है तू कहाँ
दिल सदायें दे रहा है तू कहाँ
मुन्तजिर है चाँद तारे आसमान
ये हवाएं ये फज़ाएँ ये बहार
आ के अब आता नहीं दिल को करार
पास तेरे वो हसीं रातें गई
पास तेरे वो हसीं रातें गई
प्यार की रंगीं मुलाक़ातें गई
रह गया है दर्द दिल की यादगार
आ के अब आता नहीं दिल को क़रार
आ के अब आता नहीं दिल को करार
राह तकते थक गया है इंतज़ार
आ के अब आता नहीं दिल को क़रार
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Sunday, 12 December 2010
ऐसे तो ना देखो-भीगी रात १९६५
इसके मुखड़े के बोल पढ़ के तीन देवियाँ के गाने की
गलतफ़हमी हो जाती है। वो गीत रफ़ी का गाया एकल
गीत था जबकि प्रस्तुत गीत सुमन और रफ़ी का गाया
युगल गीत है। कालिदास के निर्देशन में बनी फिल्म
भीगी रात का संगीत अच्छा है। हमारी कोशिश है
की आपको पहले कम प्रचलित और कम सुने गए गीत
सुनवाए जाएँ ताकि आपको कुछ अतिरिक्त जानकारी मिलती
रहे। रईसी वाला गीत है। नायक नायिका कार में बैठ
के घूमने निकले है और गीत भी गाते हैं। गीत के
नीचे आपको एक कमेन्ट मिलेगा-grossly underrated for
obvious रेअसोंस- इस तरह की टिप्पणियों से अर्थ निकलना
बड़ी टेढ़ी खीर होता है। या तो लिखने वाला ये कहना
चाहता है कि रफ़ी और सुमन के गाये युगल गीत लता-रफ़ी
के गाये युगल गीतों की तुलना में कमतर आंके जाते हैं
या उसका इशारा दूसरे संगीतकारों और रोशन के
संगीत में तुलना से है। फिलहाल सम्भावना पहले कारण
की ज्यादा नज़र आ रही है। सुमन को प्रथम श्रेणी की
गायिका मानने से कई संगीत प्रेमी इनकार जो करते हैं
सीधी वजह उनकी आवाज़ लता की आवाज़ के सबसे निकट
होना। खैर ये तुलना वुलना का चक्कर छोड़ें और सुनें इस
मधुर गीत को।

भीगी रात के पिछले गीत में नायिका रूठी हुई थी। इसमें थोड़ी
खुश नज़र आ रही है और कुछ खिसियाने अंदाज़ में नायक के
साथ गीत गाना शुरू करती हैं-जैसे कहना चाह रही हों-"शर्म से
यहीं गड़ जाएँ ना कहीं हम" !!
गीत के बोल:
ऐसे तो ना देखिये के बहक जाएँ कहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
हाय, ऐसी ना कहो बात के मर जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान है फ़रिश्ता तो नहीं हम
अंगडाई सी लेती है जो ख़ुशबू भरी जुल्फें
ख़ुशबू भरी जुल्फें
गिरती हैं तेरे सुर्ख लबों पर तेरी जुल्फें
लबों पर तेरी जुल्फें
जुल्फें ना तेरी चूम लें
जुल्फें ना तेरी चूम लें ऐ माहजबीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
आ हा हा, आ आ आ आ आ, हं हं हं हं हं
सुन सुन के तेरी बात नशा छाने लगा है
नशा छाने लगा है
खुद अपने भी प्यार तो कुछ आने लगा है
है ऐ ऐ, आने लगा है।
रखना है कहीं पाँव तो
रखना है कहीं पाँव तो रखते हैं कहीं हम
आखिर को एक इंसान है फ़रिश्ता तो नहीं हम
भीगा सा ये रुख-ए-नाज़ ये हल्का सा पसीना
ये हल्का सा पसीना
हाय
ये नाचती आँखों के भंवर दिल का सफीना
दिल का सफीना
सोचा है के अब डूब के
सोचा है के अब डूब के रह जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
हाय, ऐसी ना कहो बात के मर जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
आ हा हा, आ आ आ आ आ, हं हं हं हं हं
हं हं हं हं हं हं हं
......................................................................
Aise to na dekhiye ke behak jayen-Bheegi Raat 1965
गलतफ़हमी हो जाती है। वो गीत रफ़ी का गाया एकल
गीत था जबकि प्रस्तुत गीत सुमन और रफ़ी का गाया
युगल गीत है। कालिदास के निर्देशन में बनी फिल्म
भीगी रात का संगीत अच्छा है। हमारी कोशिश है
की आपको पहले कम प्रचलित और कम सुने गए गीत
सुनवाए जाएँ ताकि आपको कुछ अतिरिक्त जानकारी मिलती
रहे। रईसी वाला गीत है। नायक नायिका कार में बैठ
के घूमने निकले है और गीत भी गाते हैं। गीत के
नीचे आपको एक कमेन्ट मिलेगा-grossly underrated for
obvious रेअसोंस- इस तरह की टिप्पणियों से अर्थ निकलना
बड़ी टेढ़ी खीर होता है। या तो लिखने वाला ये कहना
चाहता है कि रफ़ी और सुमन के गाये युगल गीत लता-रफ़ी
के गाये युगल गीतों की तुलना में कमतर आंके जाते हैं
या उसका इशारा दूसरे संगीतकारों और रोशन के
संगीत में तुलना से है। फिलहाल सम्भावना पहले कारण
की ज्यादा नज़र आ रही है। सुमन को प्रथम श्रेणी की
गायिका मानने से कई संगीत प्रेमी इनकार जो करते हैं
सीधी वजह उनकी आवाज़ लता की आवाज़ के सबसे निकट
होना। खैर ये तुलना वुलना का चक्कर छोड़ें और सुनें इस
मधुर गीत को।
भीगी रात के पिछले गीत में नायिका रूठी हुई थी। इसमें थोड़ी
खुश नज़र आ रही है और कुछ खिसियाने अंदाज़ में नायक के
साथ गीत गाना शुरू करती हैं-जैसे कहना चाह रही हों-"शर्म से
यहीं गड़ जाएँ ना कहीं हम" !!
गीत के बोल:
ऐसे तो ना देखिये के बहक जाएँ कहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
हाय, ऐसी ना कहो बात के मर जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान है फ़रिश्ता तो नहीं हम
अंगडाई सी लेती है जो ख़ुशबू भरी जुल्फें
ख़ुशबू भरी जुल्फें
गिरती हैं तेरे सुर्ख लबों पर तेरी जुल्फें
लबों पर तेरी जुल्फें
जुल्फें ना तेरी चूम लें
जुल्फें ना तेरी चूम लें ऐ माहजबीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
आ हा हा, आ आ आ आ आ, हं हं हं हं हं
सुन सुन के तेरी बात नशा छाने लगा है
नशा छाने लगा है
खुद अपने भी प्यार तो कुछ आने लगा है
है ऐ ऐ, आने लगा है।
रखना है कहीं पाँव तो
रखना है कहीं पाँव तो रखते हैं कहीं हम
आखिर को एक इंसान है फ़रिश्ता तो नहीं हम
भीगा सा ये रुख-ए-नाज़ ये हल्का सा पसीना
ये हल्का सा पसीना
हाय
ये नाचती आँखों के भंवर दिल का सफीना
दिल का सफीना
सोचा है के अब डूब के
सोचा है के अब डूब के रह जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
हाय, ऐसी ना कहो बात के मर जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
आ हा हा, आ आ आ आ आ, हं हं हं हं हं
हं हं हं हं हं हं हं
......................................................................
Aise to na dekhiye ke behak jayen-Bheegi Raat 1965
मोहब्बत से देखा खफा हो गए हैं-भीगी रात १९६५
रोशन ने अपने कैरियर के उत्तरार्ध में गीत की ध्वनियों
में हल्का ईको प्रभाव का काफी प्रयोग किया। ये अक्सर
गायक की आवाज़ के लिए प्रयोग में लायी जाती। कुछ
गीतों में वाद्य यन्त्र के साथ भी इसका प्रयोग हुआ है मगर
सुनने वाले का ध्यान वाद्य यन्त्र के साथ हुए खिलवाड़ पर
कम जाता है इसलिए उसको अभी नज़रअंदाज़ कर के
चलते हैं।
रफ़ी के गाये रोमांटिक गीतों के सृजन कर्ताओं में केवल
ओ पी नय्यर और शंकर जयकिशन ही नहीं बल्कि रोशन
भी शामिल हैं। ये गीत लिखा है मजरूह ने और इसे रुपहले
परदे पर गा रहे हैं प्रदीप कुमार । साथ में जो अभिनेत्री हैं
वो मीना कुमारी हैं।
गीत के बोल:
मोहब्बत से देखा खफा हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
अदाओं में थी सादगी अब से पहले
हो ओ ओ, अदाओं में थी सादगी अब से पहले
वल्लाह
कहाँ रंग थे ये सुनहरे रुपहले
हो ओ ओ नज़र मिलते ही
नज़र मिलते ही क्या से क्या हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
किसी मोड़ पे बन के सूरज निकलना
हो ओ ओ, किसी मोड़ पे बन के सूरज निकलना
तौबा
कहीं धुप में चाँदनी बन के चलाना
हो ओ ओ जिधर देखो जलवा
जिधर देखो जलवानुमां हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
यहाँ तो लगा दिल पे एक ज़ख्म गहरा
हो ओ ओ, यहाँ तो लगा दिल पे एक ज़ख्म गहरा
हाय
वहां सिर्फ उनका ये अंदाज़ ठहरा
हो ओ ओ खता कर के भी
खता कर के भी बे-खता हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
........................................................
Mohabbat se dekha khafa ho gaye-Bheegi Raat 1965
में हल्का ईको प्रभाव का काफी प्रयोग किया। ये अक्सर
गायक की आवाज़ के लिए प्रयोग में लायी जाती। कुछ
गीतों में वाद्य यन्त्र के साथ भी इसका प्रयोग हुआ है मगर
सुनने वाले का ध्यान वाद्य यन्त्र के साथ हुए खिलवाड़ पर
कम जाता है इसलिए उसको अभी नज़रअंदाज़ कर के
चलते हैं।
रफ़ी के गाये रोमांटिक गीतों के सृजन कर्ताओं में केवल
ओ पी नय्यर और शंकर जयकिशन ही नहीं बल्कि रोशन
भी शामिल हैं। ये गीत लिखा है मजरूह ने और इसे रुपहले
परदे पर गा रहे हैं प्रदीप कुमार । साथ में जो अभिनेत्री हैं
वो मीना कुमारी हैं।
गीत के बोल:
मोहब्बत से देखा खफा हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
अदाओं में थी सादगी अब से पहले
हो ओ ओ, अदाओं में थी सादगी अब से पहले
वल्लाह
कहाँ रंग थे ये सुनहरे रुपहले
हो ओ ओ नज़र मिलते ही
नज़र मिलते ही क्या से क्या हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
किसी मोड़ पे बन के सूरज निकलना
हो ओ ओ, किसी मोड़ पे बन के सूरज निकलना
तौबा
कहीं धुप में चाँदनी बन के चलाना
हो ओ ओ जिधर देखो जलवा
जिधर देखो जलवानुमां हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
यहाँ तो लगा दिल पे एक ज़ख्म गहरा
हो ओ ओ, यहाँ तो लगा दिल पे एक ज़ख्म गहरा
हाय
वहां सिर्फ उनका ये अंदाज़ ठहरा
हो ओ ओ खता कर के भी
खता कर के भी बे-खता हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
........................................................
Mohabbat se dekha khafa ho gaye-Bheegi Raat 1965
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Wednesday, 8 December 2010
वो पास नहीं मजबूर है दिल-नौबहार १९५२
एक संगीतप्रेमी ने पूछा था-आप कैसे गीत सुनते हैं।
अमूमन इस सवाल का जवाब मैं कुछ लोकप्रिय गीत
गिनवा कर दे देता हूँ। कुछ हद तक ठीक भी है क्युंकि
मैं हर तरह का संगीत सुनना पसंद करता हूँ। अब वो
चाहे १५० लोगों के ओर्केस्ट्रा से भरा हुआ कोई संगीत
का टुकड़ा हो या डालडे के तीन के डब्बे से बने इकतारे
के साथ कोई प्रलाप। सब सुन लेता हूँ। इन सबके बीच
पोप, कॉर्न, रॉक, सॉइल, मेटल, प्लांट, एनिमल सब तरह
का संगीत आ जाता है।
वास्तविकता में कैसे गीत ज्यादा सुनता हूँ-उसका एक
नमूना पेश है आपके लिए-फिल्म नौबहार(१९५२) का
ये गीत जो नलिनी जयवंत पर फिल्माया गया है और
लता मंगेशकर ने गाया है। कवि शैलेन्द्र के लिखे बोलों
को सुरों में ढाला है रोशन ने। गीत का ऑडियो उपलब्ध
है सुनने के लिए और विडियो आप देखना चाहें तो
इस लिंक को क्लिक कर लीजिये। विडियो
मुझे ज़्यादातर दर्द भरे और सॉफ्ट गीत पसंद हैं। दर्द भरे
और रोतले गीतों में फर्क है। कुछ तो गीत ही रोते हुए से
प्रतीत होते हैं। इस पर ज्यादा चर्चा नहीं वरना सन
१९००-१९३५ के दौर के गीत सुनने वाले मेरे पीछे लग
जायेंगे।
नलिनी जयवंत के पास भी जादुई ऑंखें थीं। अक्सर
देखा गया है कि जिन नायक नायिकाओं की ऑंखें
भावाभिव्यक्ति में समर्थवान होती हैं वही ज्यादा
लोकप्रिय और सफल होते हैं, कुछ अपवाद हमेशा
मिलेंगे आपको, जैसे अजय देवगन आँखों से बढ़िया
अभिनय कर लेते हैं मगर नंबर एक की कुर्सी पर
कोई और बैठा है।
गीत के बोल:
भटके हुए मुसाफिर मंजिल को ढूंढते हैं
दिल खो गया हमारा हम दिल को ढूंढते हैं
वो पास नहीं मजबूर है दिल हम आस लगाये बैठे हैं
उम्मीद भरे अरमानों का तूफ़ान छुपाये बैठे हैं
जाओ के वही बेदर्द हो तुम
जाओ के वही बेदर्द हो तुम
वादों का जिन्हें कुछ भास् नहीं
हम हैं के तुम्हारे वादों पर
दुनिया को भुलाये बैठे हैं
बरबाद है दिल उजड़ा है चमन,
बेरंग हुई फूलों की खबन
बरबाद है दिल उजड़ा है चमन,
बेरंग हुई फूलों की खबन
बेकार उलझते काटों से
दामन को बचाये बैठे हैं
वो पास नहीं मजबूर है दिल
हम आस लगाये बैठे हैं
..............................
Wo paas nahin majboor hai dil-Naubahaar 1952
अमूमन इस सवाल का जवाब मैं कुछ लोकप्रिय गीत
गिनवा कर दे देता हूँ। कुछ हद तक ठीक भी है क्युंकि
मैं हर तरह का संगीत सुनना पसंद करता हूँ। अब वो
चाहे १५० लोगों के ओर्केस्ट्रा से भरा हुआ कोई संगीत
का टुकड़ा हो या डालडे के तीन के डब्बे से बने इकतारे
के साथ कोई प्रलाप। सब सुन लेता हूँ। इन सबके बीच
पोप, कॉर्न, रॉक, सॉइल, मेटल, प्लांट, एनिमल सब तरह
का संगीत आ जाता है।
वास्तविकता में कैसे गीत ज्यादा सुनता हूँ-उसका एक
नमूना पेश है आपके लिए-फिल्म नौबहार(१९५२) का
ये गीत जो नलिनी जयवंत पर फिल्माया गया है और
लता मंगेशकर ने गाया है। कवि शैलेन्द्र के लिखे बोलों
को सुरों में ढाला है रोशन ने। गीत का ऑडियो उपलब्ध
है सुनने के लिए और विडियो आप देखना चाहें तो
इस लिंक को क्लिक कर लीजिये। विडियो
मुझे ज़्यादातर दर्द भरे और सॉफ्ट गीत पसंद हैं। दर्द भरे
और रोतले गीतों में फर्क है। कुछ तो गीत ही रोते हुए से
प्रतीत होते हैं। इस पर ज्यादा चर्चा नहीं वरना सन
१९००-१९३५ के दौर के गीत सुनने वाले मेरे पीछे लग
जायेंगे।
नलिनी जयवंत के पास भी जादुई ऑंखें थीं। अक्सर
देखा गया है कि जिन नायक नायिकाओं की ऑंखें
भावाभिव्यक्ति में समर्थवान होती हैं वही ज्यादा
लोकप्रिय और सफल होते हैं, कुछ अपवाद हमेशा
मिलेंगे आपको, जैसे अजय देवगन आँखों से बढ़िया
अभिनय कर लेते हैं मगर नंबर एक की कुर्सी पर
कोई और बैठा है।
गीत के बोल:
भटके हुए मुसाफिर मंजिल को ढूंढते हैं
दिल खो गया हमारा हम दिल को ढूंढते हैं
वो पास नहीं मजबूर है दिल हम आस लगाये बैठे हैं
उम्मीद भरे अरमानों का तूफ़ान छुपाये बैठे हैं
जाओ के वही बेदर्द हो तुम
जाओ के वही बेदर्द हो तुम
वादों का जिन्हें कुछ भास् नहीं
हम हैं के तुम्हारे वादों पर
दुनिया को भुलाये बैठे हैं
बरबाद है दिल उजड़ा है चमन,
बेरंग हुई फूलों की खबन
बरबाद है दिल उजड़ा है चमन,
बेरंग हुई फूलों की खबन
बेकार उलझते काटों से
दामन को बचाये बैठे हैं
वो पास नहीं मजबूर है दिल
हम आस लगाये बैठे हैं
..............................
Wo paas nahin majboor hai dil-Naubahaar 1952
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Sunday, 5 December 2010
बांसुरिया काहे बजाई-आगोश १९५३
लता मंगेशकर की आवाज़ में एक गीत और सुना
जाए फिल्म आगोश से। इस गीत को लिखा है गीतकार
शैलेन्द्र ने और धुन बनाई है रोशन ने। ऐसा लगता है
फिल्म आगोश के लिए संगीतकार रोशन ने कई गीतकारों
की सेवाएँ लीं। पिछला लता का गया गीत कैफ इरफानी
का लिखा हुआ था। इस गीत में लता का बखूबी साथ
दिया है एक और गायिका-सुधा मल्होत्रा ने। बच्चों पर
फिल्माया गया ये गीत मधुर है। इसको शायद ही कभी
आपने सुना होगा पहले । कान्हा के लिए सुधा मल्होत्रा
की आवाज़ और राधा के लिए लता की आवाज़ इस्तेमाल
की गई है। ये जो 'ढिक्का चिका-ढिक्का चिका' ताल इस्तेमाल
की गई है वो आपको राजेश रोशन के कई गीतों में संशोधित
रूप में मिलेगी।
बहुत ही सॉफ्ट किस्म का युगल गीत है ये और जबसे इसे देखा
है मैं इसका फैन बन गया हूँ। पहले कुछ एक बार इसे सुना भर
था।
गीत के बोल:
लता- बाँसुरिया काहे बजाई बिन सुने रहा नहीं जाये रे
सुधा- मीठी नज़र काहे मिलाई बिन देखे रहा नहीं जाये रे
लता- बाँसुरिया काहे बजाई बिन सुने रहा नहीं जाये रे
लता- जाने अनजाने जब मुख पे किसी के आये
तेरा नाम, तेरा नाम
जाने अनजाने
सर से सरक जाये चुनरी सहेली करे बदनाम, बदनाम
होवे रे हमरी जगत हँसाई रे कान्हा
बाँसुरिया काहे बजाई बिन सुने रहा नहीं जाये रे
सुधा- मीठी नज़र काहे मिलाई बिन देखे रहा नहीं जाये रे
सुधा-हँस हँस जादू कर जावें दो नैन तेरे, नैन तेरे
ये दो नैन तेरे
तुम जित जावो उत जावें दो नैन मेरे, नैन मेरे
ये दो नैन मेरे
हो गई हमरी निंदिया पराई हो राधा
मीठी नज़र काहे मिलाई बिन देखे रहा नहीं जाये रे
लता- बाँसुरिय काहे बजाई बिन सुने रहा नहीं जाये रे
छोड़ो छोड़ो हमरी बैन बिहारी हमें छेड़ो ना, छेड़ो ना
सुधा-बतियाँ बना के
बतियाँ बना के हमें अपना बना के मुख फेरो ना, फेरो ना
लता- प्रेम डगरिया बड़ी दुखदाई रे
कान्हा बाँसुरिया काहे बजाई बिन सुने रहा नहीं जाये रे
सुधा-मीठी नज़र काहे मिलाई बिन देखे रहा नहीं जाये रे
लता- बिन सुने रहा नहीं जाये रे
सुधा-ओ बिन देखे रहा नहीं जाये रे
जाए फिल्म आगोश से। इस गीत को लिखा है गीतकार
शैलेन्द्र ने और धुन बनाई है रोशन ने। ऐसा लगता है
फिल्म आगोश के लिए संगीतकार रोशन ने कई गीतकारों
की सेवाएँ लीं। पिछला लता का गया गीत कैफ इरफानी
का लिखा हुआ था। इस गीत में लता का बखूबी साथ
दिया है एक और गायिका-सुधा मल्होत्रा ने। बच्चों पर
फिल्माया गया ये गीत मधुर है। इसको शायद ही कभी
आपने सुना होगा पहले । कान्हा के लिए सुधा मल्होत्रा
की आवाज़ और राधा के लिए लता की आवाज़ इस्तेमाल
की गई है। ये जो 'ढिक्का चिका-ढिक्का चिका' ताल इस्तेमाल
की गई है वो आपको राजेश रोशन के कई गीतों में संशोधित
रूप में मिलेगी।
बहुत ही सॉफ्ट किस्म का युगल गीत है ये और जबसे इसे देखा
है मैं इसका फैन बन गया हूँ। पहले कुछ एक बार इसे सुना भर
था।
गीत के बोल:
लता- बाँसुरिया काहे बजाई बिन सुने रहा नहीं जाये रे
सुधा- मीठी नज़र काहे मिलाई बिन देखे रहा नहीं जाये रे
लता- बाँसुरिया काहे बजाई बिन सुने रहा नहीं जाये रे
लता- जाने अनजाने जब मुख पे किसी के आये
तेरा नाम, तेरा नाम
जाने अनजाने
सर से सरक जाये चुनरी सहेली करे बदनाम, बदनाम
होवे रे हमरी जगत हँसाई रे कान्हा
बाँसुरिया काहे बजाई बिन सुने रहा नहीं जाये रे
सुधा- मीठी नज़र काहे मिलाई बिन देखे रहा नहीं जाये रे
सुधा-हँस हँस जादू कर जावें दो नैन तेरे, नैन तेरे
ये दो नैन तेरे
तुम जित जावो उत जावें दो नैन मेरे, नैन मेरे
ये दो नैन मेरे
हो गई हमरी निंदिया पराई हो राधा
मीठी नज़र काहे मिलाई बिन देखे रहा नहीं जाये रे
लता- बाँसुरिय काहे बजाई बिन सुने रहा नहीं जाये रे
छोड़ो छोड़ो हमरी बैन बिहारी हमें छेड़ो ना, छेड़ो ना
सुधा-बतियाँ बना के
बतियाँ बना के हमें अपना बना के मुख फेरो ना, फेरो ना
लता- प्रेम डगरिया बड़ी दुखदाई रे
कान्हा बाँसुरिया काहे बजाई बिन सुने रहा नहीं जाये रे
सुधा-मीठी नज़र काहे मिलाई बिन देखे रहा नहीं जाये रे
लता- बिन सुने रहा नहीं जाये रे
सुधा-ओ बिन देखे रहा नहीं जाये रे
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तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर-आगोश १९५३
लता मंगेशकर और किशोर कुमार की आवाज़ में आपने
कई युगल गीत सुने होंगे। अधिकतर गीत आपने सुने होंगे
जो लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, एस. डी. बर्मन , कल्याणजी आनंदजी
और आर. डी. बर्मन के संगीत निर्देशन वाले हैं। एक गीत
आपको भूपेन हजारिका के संगीत वाला भी सुनवा चुके हैं
इस ब्लॉग पर फिल्म आरोप (१९७३) से
आइये अब सुनें एक सन १९५३ की फिल्म आगोश से इन्हीं
का एक युगल गीत जिसका संगीत रोशन ने तैयार किया
है। बोल इन्दीवर के हैं। सहायक अभिनेता और अभिनेत्री
पर ये गीत फिल्माया गया है और फिल्म के नायक नायिका
नासिर खान और नूतन दर्शकों के बीच बैठे दिखाई दे रहे हैं।
सहायक पुरुष कलाकार तो आगा जैसे लग रहे हैं बाकी का
पता नहीं जी कौन कौन है।
गीत के बोल:
तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
ओ टूटे ना लगन की डोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
देखा देखी हो गई
मिल गए नैन से नैन
तू भी है बेचैन
एख ले मैं भी हूँ बेचैन
हो ये भेद ना दे कोई खोल
तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
मैं हूँ तेरी नार छबीली
तू है मेरा छैल
जैसे फैले आंख में काजल
बात गई है फैल
हो, गली कूचों में है यही शोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
आंचल में बाल डाल डाल के
सोची है क्या बात
देखो टूट ना जाए बलमा
जीवन भर का साथ
हो, भले दुनिया लगा ले जोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
कई युगल गीत सुने होंगे। अधिकतर गीत आपने सुने होंगे
जो लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, एस. डी. बर्मन , कल्याणजी आनंदजी
और आर. डी. बर्मन के संगीत निर्देशन वाले हैं। एक गीत
आपको भूपेन हजारिका के संगीत वाला भी सुनवा चुके हैं
इस ब्लॉग पर फिल्म आरोप (१९७३) से
आइये अब सुनें एक सन १९५३ की फिल्म आगोश से इन्हीं
का एक युगल गीत जिसका संगीत रोशन ने तैयार किया
है। बोल इन्दीवर के हैं। सहायक अभिनेता और अभिनेत्री
पर ये गीत फिल्माया गया है और फिल्म के नायक नायिका
नासिर खान और नूतन दर्शकों के बीच बैठे दिखाई दे रहे हैं।
सहायक पुरुष कलाकार तो आगा जैसे लग रहे हैं बाकी का
पता नहीं जी कौन कौन है।
गीत के बोल:
तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
ओ टूटे ना लगन की डोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
देखा देखी हो गई
मिल गए नैन से नैन
तू भी है बेचैन
एख ले मैं भी हूँ बेचैन
हो ये भेद ना दे कोई खोल
तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
मैं हूँ तेरी नार छबीली
तू है मेरा छैल
जैसे फैले आंख में काजल
बात गई है फैल
हो, गली कूचों में है यही शोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
आंचल में बाल डाल डाल के
सोची है क्या बात
देखो टूट ना जाए बलमा
जीवन भर का साथ
हो, भले दुनिया लगा ले जोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
तू है चंदा तो मैं हूँ चकोर
तेरी मेरी प्रीत लगी
हाय रे प्रीत लगी
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Wednesday, 1 December 2010
मोहब्बत एक शोला है-आगोश १९५३
काले पीले दौर की तरफ चला जाए फिर से, सन १९५३ में,
और सुनिए फिल्म आगोश से एक गीत जो कैफ इरफानी
का लिखा और रोशन का संगीतबद्ध किया हुआ है। इसे गा
रही हैं लता मंगेशकर। परदे पर होंठ हिलाने का श्रेय मिला
है नूतन को।
कभी कभी विचार आता है की गीत के साथ चिपकाये गए
विवरण में १३ का या १९ का पहाडा छाप दिया करूं। विवरण
कितने लोग पढ़ते हैं ये समझना काफी आड़ी टेड़ी खीर है।
गीत के बोल
मुहब्बत एक शोला है,
बचा दामन ज़माने
बचा दामन ज़माने
हुए हम ख़ाक यूं जलकर
जले कोई तो जाने
बचा दामन ज़माने
नहीं मालूम क्या मंज़ूर है
तकदीर को मेरी
तकदीर को मेरी
नहीं मालूम क्या मंज़ूर है
तकदीर को मेरी
तकदीर को मेरी
कटे हैं आज तक रोते
मेरे सावन सुहाने
बचा दामन ज़माने
बहे आंसू हंसी किस्मत
लूटे अरमान भी मेरे
अरमान भी मेरे
बहे आंसू हंसी किस्मत
लूटे अरमान भी मेरे
अरमान भी मेरे
रहे फरियाद ही बन कर मेरे रंगीन तराने
बचा दामन ज़माने
किसी से दिल लगा के हम यहाँ बर्बाद हो गए
बर्बाद हो गए
किसी से दिल लगा के हम बर्बाद हो गए
बर्बाद हो गए
ये जलता सा जिगर अपना,
ये जलते से फ़साने
बचा दामन ज़माने
और सुनिए फिल्म आगोश से एक गीत जो कैफ इरफानी
का लिखा और रोशन का संगीतबद्ध किया हुआ है। इसे गा
रही हैं लता मंगेशकर। परदे पर होंठ हिलाने का श्रेय मिला
है नूतन को।
कभी कभी विचार आता है की गीत के साथ चिपकाये गए
विवरण में १३ का या १९ का पहाडा छाप दिया करूं। विवरण
कितने लोग पढ़ते हैं ये समझना काफी आड़ी टेड़ी खीर है।
गीत के बोल
मुहब्बत एक शोला है,
बचा दामन ज़माने
बचा दामन ज़माने
हुए हम ख़ाक यूं जलकर
जले कोई तो जाने
बचा दामन ज़माने
नहीं मालूम क्या मंज़ूर है
तकदीर को मेरी
तकदीर को मेरी
नहीं मालूम क्या मंज़ूर है
तकदीर को मेरी
तकदीर को मेरी
कटे हैं आज तक रोते
मेरे सावन सुहाने
बचा दामन ज़माने
बहे आंसू हंसी किस्मत
लूटे अरमान भी मेरे
अरमान भी मेरे
बहे आंसू हंसी किस्मत
लूटे अरमान भी मेरे
अरमान भी मेरे
रहे फरियाद ही बन कर मेरे रंगीन तराने
बचा दामन ज़माने
किसी से दिल लगा के हम यहाँ बर्बाद हो गए
बर्बाद हो गए
किसी से दिल लगा के हम बर्बाद हो गए
बर्बाद हो गए
ये जलता सा जिगर अपना,
ये जलते से फ़साने
बचा दामन ज़माने
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Sunday, 28 November 2010
एक झूठी सी तसल्ली-शीशम १९५२
जब माहौल छाया गीत वाला बन ही गया है तो आइये सुनें
फिल्म शीशम से मुकेश का गाया एक बढ़िया गीत। गीत
लिखा है ज़िया सरहदी ने और इसकी धुन बनाई है रोशन ने।
फिल्म में नासिर खान और नूतन प्रमुख कलाकार हैं। बहुत
सरल सा गीत है और एक ही धारा में चलता जाता है।
गीत के बोल:
एक झूठी सी तसल्ली वो मुझे दे के चले
मेरा दिल ले के चले
एक झूठी सी तसल्ली वो मुझे दे के चले
मेरा दिल ले के चले
तेरे वादों के सहारे पे जिए जायेंगे हम
सहते जायेंगे सितम
तेरे वादों के सहारे पे जिए जायेंगे हम
सहते जायेंगे सितम
सहते जायेंगे सितम
राज़ ये तेरे सिवा और कोई जान ना ले
मेरा दिल ले के चले
एक झूठी सी तसल्ली
अपने बीमार को वो देखने आये थे मगर
थी ना कुछ दिल कि खाबर
अपने बीमार को वो देखने आये थे मगर
थी ना कुछ दिल कि खाबर
थी ना कुछ दिल कि खाबर
बुझा जायेंगे दिया उनसे जलाये ना जले
मेरा दिल ले के चले
एक झूठी सी तसल्ली वो मुझे दे के चले
मेरा दिल ले के चले
फिल्म शीशम से मुकेश का गाया एक बढ़िया गीत। गीत
लिखा है ज़िया सरहदी ने और इसकी धुन बनाई है रोशन ने।
फिल्म में नासिर खान और नूतन प्रमुख कलाकार हैं। बहुत
सरल सा गीत है और एक ही धारा में चलता जाता है।
गीत के बोल:
एक झूठी सी तसल्ली वो मुझे दे के चले
मेरा दिल ले के चले
एक झूठी सी तसल्ली वो मुझे दे के चले
मेरा दिल ले के चले
तेरे वादों के सहारे पे जिए जायेंगे हम
सहते जायेंगे सितम
तेरे वादों के सहारे पे जिए जायेंगे हम
सहते जायेंगे सितम
सहते जायेंगे सितम
राज़ ये तेरे सिवा और कोई जान ना ले
मेरा दिल ले के चले
एक झूठी सी तसल्ली
अपने बीमार को वो देखने आये थे मगर
थी ना कुछ दिल कि खाबर
अपने बीमार को वो देखने आये थे मगर
थी ना कुछ दिल कि खाबर
थी ना कुछ दिल कि खाबर
बुझा जायेंगे दिया उनसे जलाये ना जले
मेरा दिल ले के चले
एक झूठी सी तसल्ली वो मुझे दे के चले
मेरा दिल ले के चले
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