बिलकुल राज कपूराना गीत है ये। कुछ गीत ख़ास राज कपूर के लिए रचे
गये थे उनमें से एक है फिल्म आशिक का ये शीर्षक गीत। इस फिल्म से पूर्व
में आप ४ गीत सुन चुके हैं इस ब्लॉग पर। किसी मोहतरमा के ख्याल में
आशिक होना आम बात है। इसमें कुदरत के नज़रों के साथ साथ कई और
पहलुओं के साथ आशिकी का जिक्र है जो गीत को अलग बनाता है।
इस तरह के गीत राज कपूर कि फिल्मों में कई हैं। इन सभी गीतों में वे इधर
उधार घुमते हुए बेफिक्र से गीत गेट दिखाई देते हैं। फिल्म आवारा के शीर्षक
गीत का ही उदाहरण ले लीजिये। ऐसे प्रेरणादायी गीत उनकी फिल्मों की
विशेषता होते थे। ऐसे गीतों को रचने के लिए गीतकार शैलेन्द्र का एक बार
फिर से तह-ए-दिल शुक्रिया।
गीत के बोल:
मैं आशिक हूँ बहारों का, नज़रों का, फिजाओं का, इशारों का
मैं आशिक हूँ बहारों का नज़रों का, फिजाओं का, इशारों का
मैं मस्ताना मुसाफिर हूँ जवां धरती के अनजाने किनारों का
मैं आशिक हूँ बहारों का
सदियों से जग में आता रहा मैं
नए रंग जीवन में गता रहा मैं
नए भेस में नित नए देश मैं
मैं आशिक हूँ बहारों का नज़रों का, फिजाओं का,इशारों का
मैं मस्ताना मुसाफिर हूँ जवां धरती के अनजाने किनारों का
मैं आशिक हूँ बहारों का
कभी मैंने हंस के दीपक जलाए
कभी बन के बादल आंसू बहाए
मेरा रास्ता प्यार का रास्ता
मैं आशिक हूँ बहारों का नज़रों का, फिजाओं का, इशारों का
मैं मस्ताना मुसाफिर हूँ जवां धरती के अनजाने किनारों का
मैं आशिक हूँ बहारों का
चला गर सफ़र को कोई बेसहारा
तो मैं हो लिया संग दिए एक तारा
गाता हुआ दुःख भूलता हुआ
मैं आशिक हूँ बहारों का नज़रों का, फिजाओं का, इशारों का
मैं मस्ताना मुसाफिर हूँ जवां धरती के अनजाने किनारों का
मैं आशिक हूँ बहारों का
..........................................
Main aashiq hoon baharon ka-Aashiq 1962
Showing posts with label Aashiq. Show all posts
Showing posts with label Aashiq. Show all posts
Tuesday, 18 October 2011
Friday, 27 May 2011
ओ शमा मुझे फूँक दे-आशिक १९६२
फिल्म आशिक(१९६२) के ३ मधुर गीत आपको सुनवा चुके हैं-
लता का गाया एक गीत झनन झनझना के अपनी पायल,
मुकेश के गाये दो गीत - ये तो कहो कौन हो तुम, और
तुम जो हमारे मीत ना होते । हर एक गीत इस फिल्म का
नायाब है। आइये अब चौथा गीत सुना जाये जो कि एक
युगल गीत है मुकेश और लता की आवाज़ में। इसे लिखा
है शैलेन्द्र ने और अलबेले बैले नृत्य जैसे कुछ-कुछ मसाले
पर नाचने वाले कलाकारों के नाम अगर आपको मालूम हो
तो बतलाएं। गौरतलब है फिल्म की नायिका पद्मिनी आपको
नाचती दिखाई दे जाएँगी भीड़ के बीच में। खुशनुमा अंदाज़
से गीत दर्दीला गीत बन जाता है। पुराने ओर्केस्ट्रा कार्यक्रमों
में इस गीत को कई बार सुना है। गाने का ध्वनि संयोजन ही
ऐसा है कि ओर्केस्ट्रा वाले इसको अपने कार्यक्रमों में शामिल
करना पसंद करते।
गीत के बोल:
ओ शमा मुझे फूंक दे
मैं न मैं रहूँ, तू न तू रहे
यही इश्क़ का है दस्तूर
यही इश्क़ का है दस्तूर
परवाने जा है अजब चलन
यहाँ जीते जी अपना मिलन
क़िस्मत को नहीं मंजूर
क़िस्मत को नहीं मंजूर
शाम से लेकर रोज़ सहर तक
तेरे लिए मैं सारी रात जली
मैने तो हाय ये भी न जाना
कब दिन डूबा कब रात ढली
फिर भी हैं मिलने से मजबूर
फिर भी हैं मिलने से मजबूर
ओ शमा मुझे फूंक दे
मैं न मैं रहूँ, तू न तू रहे
यही इश्क़ का है दस्तूर
यही इश्क़ का है दस्तूर
पत्थर दिल हैं ये जगवाले
जाने न कोई मेरे दिल की जलन
पत्थर दिल हैं ये जगवाले
जाने न कोई मेरे दिल की जलन
जब से है जनमी प्यार की दुनिया
तुझको है मेरी मुझे तेरी लगन
तुम बिन ये दुनिया है बेनूर
तुम बिन ये दुनिया है बेनूर
परवाने जा है अजब चलन
यहाँ जीते जी अपना मिलन
क़िस्मत को नहीं मंजूर
क़िस्मत को नहीं मंजूर
हाय री क़िस्मत अंधी क़िस्मत
देख सकी ना तेरी-मेरी ख़ुशी
हाय री उल्फ़त बेबस उल्फ़त
रो के थकी जल-जल के मरी
दिल जो मिले किसका था क़सूर
दिल जो मिले किसका था क़सूर
ओ शमा मुझे फूंक दे
मैं न मैं रहूँ, तू न तू रहे
यही इश्क़ का है दस्तूर
यही इश्क़ का है दस्तूर
परवाने जा है अजब चलन
यहाँ जीते जी अपना मिलन
क़िस्मत को नहीं मंजूर
क़िस्मत को नहीं मंजूर
...................................
O shama mujhe phoonk de-Aashiq 1962
लता का गाया एक गीत झनन झनझना के अपनी पायल,
मुकेश के गाये दो गीत - ये तो कहो कौन हो तुम, और
तुम जो हमारे मीत ना होते । हर एक गीत इस फिल्म का
नायाब है। आइये अब चौथा गीत सुना जाये जो कि एक
युगल गीत है मुकेश और लता की आवाज़ में। इसे लिखा
है शैलेन्द्र ने और अलबेले बैले नृत्य जैसे कुछ-कुछ मसाले
पर नाचने वाले कलाकारों के नाम अगर आपको मालूम हो
तो बतलाएं। गौरतलब है फिल्म की नायिका पद्मिनी आपको
नाचती दिखाई दे जाएँगी भीड़ के बीच में। खुशनुमा अंदाज़
से गीत दर्दीला गीत बन जाता है। पुराने ओर्केस्ट्रा कार्यक्रमों
में इस गीत को कई बार सुना है। गाने का ध्वनि संयोजन ही
ऐसा है कि ओर्केस्ट्रा वाले इसको अपने कार्यक्रमों में शामिल
करना पसंद करते।
गीत के बोल:
ओ शमा मुझे फूंक दे
मैं न मैं रहूँ, तू न तू रहे
यही इश्क़ का है दस्तूर
यही इश्क़ का है दस्तूर
परवाने जा है अजब चलन
यहाँ जीते जी अपना मिलन
क़िस्मत को नहीं मंजूर
क़िस्मत को नहीं मंजूर
शाम से लेकर रोज़ सहर तक
तेरे लिए मैं सारी रात जली
मैने तो हाय ये भी न जाना
कब दिन डूबा कब रात ढली
फिर भी हैं मिलने से मजबूर
फिर भी हैं मिलने से मजबूर
ओ शमा मुझे फूंक दे
मैं न मैं रहूँ, तू न तू रहे
यही इश्क़ का है दस्तूर
यही इश्क़ का है दस्तूर
पत्थर दिल हैं ये जगवाले
जाने न कोई मेरे दिल की जलन
पत्थर दिल हैं ये जगवाले
जाने न कोई मेरे दिल की जलन
जब से है जनमी प्यार की दुनिया
तुझको है मेरी मुझे तेरी लगन
तुम बिन ये दुनिया है बेनूर
तुम बिन ये दुनिया है बेनूर
परवाने जा है अजब चलन
यहाँ जीते जी अपना मिलन
क़िस्मत को नहीं मंजूर
क़िस्मत को नहीं मंजूर
हाय री क़िस्मत अंधी क़िस्मत
देख सकी ना तेरी-मेरी ख़ुशी
हाय री उल्फ़त बेबस उल्फ़त
रो के थकी जल-जल के मरी
दिल जो मिले किसका था क़सूर
दिल जो मिले किसका था क़सूर
ओ शमा मुझे फूंक दे
मैं न मैं रहूँ, तू न तू रहे
यही इश्क़ का है दस्तूर
यही इश्क़ का है दस्तूर
परवाने जा है अजब चलन
यहाँ जीते जी अपना मिलन
क़िस्मत को नहीं मंजूर
क़िस्मत को नहीं मंजूर
...................................
O shama mujhe phoonk de-Aashiq 1962
Labels:
1962,
Aashiq,
Lata Mangeshkar,
Mukesh,
Padmini,
Raj Kapoor,
Shailendra,
Shankar Jaikishan
Subscribe to:
Posts (Atom)


