जोशीला नाम की एक फिल्म है सन १९७३ की। इसमें देव आनंद और
हेमा मालिनी प्रमुख कलाकार हैं। इस फिल्म को देख कर दर्शकों में जोश
जगा हो या ना हो, गीतों के श्रोताओं में जोश अवश्य ही जगा। फिल्म में
कुछ यादगार गीत हैं। आज आपको सुनवाते हैं आशा भोंसले का गाया थोड़ा
अलग सा गीत। वैसे आर डी बर्मन ने उनके लिए बहुतेरे अलग-हट-के गीत
बनाये हैं। फिल्म की खूबी साहिर लुधियानवी के लिखे गीत हैं। गीत भी कुछ
लीक से हट कर लिखा गया प्रतीत होता है।
वैसे ये पोस्ट भी अलग हट के ही है। इसे मैंने बिलकुल अलग हट के स्थान पर
लिखा था। रेलवे स्टेशन के प्लेटफोर्म पर लगी बेंच पर बैठ के। एक परिवार
के साथ दो छोटे छौने(बच्चे) चले जा रहे थे जिसमें से एक के जूतों से चूं चूं की
आवाज़ आ रही थी , उसे सुन के मुझे इस गीत का शुरूआती संगीत याद आया।
बच्चों के जूतों में चूं चूं की आवाज़ करने वाली आईटम का इस्तेमाल काफी पुराना
हो चुका है मगर सुनने में अच्छा लगता है। अगर किसी डोकरे के जूते में वही फिट
कर दिए जाएँ तो पब्लिक कहेगी-अरे मूंह से तो चूं चूं कम थी जो पैरों से भी करने
लगा बुड़ऊ?
गीत फिल्माया गया है नायिका हेमा मालिनी और अन्य बॉलीवुड में रोजी-रोटी
के लिए रोजाना जद्दो-जहद करने वाले अन्य अनजान से महत्वाकांक्षी सहयोगी
कलाकारों पर।
दर्शक दीर्घा में जो दो अन्य कलाकार हैं उनके नाम इस प्रकार से हैं-सुधीर और बिंदु।
गीत के बीच में दो अन्य महिला कलाकार दिखते हैं वे हैं- सुलोचना और पद्मा खन्ना।
गीत में आगे आपको इफ्तेखार भी पुलिस ऑफिसर की भूमिका में नज़र आयेंगे।
गीत कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ख्यालों से बंधा हुआ है। फिर भी आपको बतलाये देते हैं कि
फिल्म की सिचुएशन के मुताबिक ये नायिका द्वारा नायक की भाव भंगिमाओं और
कृत्यों के ऊपर कटाक्ष सा है। नायिका को ये लगता है कि नायक धन के लोभ में
कुछ आड़ी टेडी हरकतें कर रहा है।
गीत के बोल:
रु रु, रु, रु रु
ओ, सोना, सोना रूपा, सोना रूपा
सोना रूपा लायो रे
सोना रे, सोना
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो, दिल दे जा
मुझे तो, दिल दे जा
आ, सोना मिले तो लोग आजकल दिल को कभी ना लें
प्रीत के मुंह पर कालिख मल दें, प्यार को ठोकर दें
ओ सखी री, अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ आ आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो, दिल दे जा
मुझे तो, दिल दे जा
आ, सोना मिले तो लोग आजकल दिल को कभी ना लें
प्रीत के मुंह पर कालिख मल दें प्यार को ठोकर दें
ओ सखी री, अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ आ आ आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
जादू भरे इशारे सब झूठे हैं
मतलब भरे सहारे सब छूटे हैं
या बा
वादे कभी ना सुनना पछताएगी
सपने कभी ना बुनना लुट जायेगी
ओ ओ ओ सखी री, अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो दिल दे जा
मुझे तो दिल दे जा
ला ला ला ला ला ला ला ला
सोना, सोना रे
पलकों तले ठिकाना कोई मांगे ना
दिल का भरा खजाना कोई मांगे ना
या बा
अपना इन्हें ना बना संसारी हैं
सदमे पड़ेंगे कहना व्यापारी हैं
ओ सखी री अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
ये सोना, ले जा रे
ये रूपा, ले जा रे
मुझे तो दिल दे जा
मुझे तो दिल दे जा
आ, सोना मिले तो लोग आजकल दिल को कभी ना लें
प्रीत के मुंह पर कालिख मल दें प्यार को ठोकर दें
ओ ओ ओ सखी री अब है ज़माना दूसरा
आ आ आ आ आ आ आ
सोना, सोना रे
सोना रूपा, सोना रूपा लायो रे
सोना, सोना रे
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Sona Rupa Layo Re-Joshila 1973
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Friday, 21 October 2011
Sunday, 17 July 2011
किसका रस्ता देखे-जोशीला १९७३
जेल की सलाखों के पीछे बंद नौजवान एक दिमाग का दही बनाने
वाला गीत कैसे गा सकता है. सोचने वाली बात है.
पढ़ा लिखा नौकरीपेशा नायक हालातों के चलते सलाखों के पीछे पहुँच
जाता है. वहाँ वो इस उम्मीद में गीत गा रहा है मानो नक्कारखाने
में तूती की आवाज़ सुनने वाला कोई आ जायेगा. और, आ भी जाता
है, सुन्दर नायिका जिसके आने के बाद उसकी जिंदगी में फिर से बहार
लौटने वाली है. अपनी यादों में लुडकते लड़खड़ाते वो आखिर मंजिल की
सीढ़ियों पर फिर से पहुँच जाता है. दो नायिकाएं दिखाई देती हैं गीत
में-राखी और हेमा मालिनी. जेलर की भूमिका में हैं मनमोहन कृष्ण.
बोल साहिर के हैं और धुन राहुल देव बर्मन की. गायक को आप पहचान
ही गए होंगे. गीत की पञ्च लाइन है-कोई नहीं जो यूँ ही जहाँ में, बाँटे
पीर पराई.
गीत के बोल:
किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
मीलों है ख़ामोशी, बरसों है तन्हाई
भूली दुनिया कभी की, तुझे भी मुझे भी
फिर क्यों आँख भर आई
हो, किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
कोई भी साया नहीं राहों में
कोई भी आएगा ना बाहों में
तेरे लिए मेरे लिए, कोई नहीं रोनेवाला ओ
झूठा भी नाता नहीं चाहों में
हाय, तू ही क्यों डूबा रहे आहों में
कोई किसी संग मरे, ऐसा नहीं होने वाला
कोई नहीं जो यूँ ही जहाँ में, बाँटे पीर पराई
हो, किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
तुझे क्या बीती हुई रातों से
मुझे क्या खोई हुई बातों से
सेज नहीं चिता सही, जो भी मिले सोना होगा
गई जो डोरी छूटी हाथों से
हो, लेना क्या टूटे हुए साथों से
खुशी जहाँ माँगी तूने, वहीं मुझे रोना होगा
ना कोई तेरा ना कोई मेरा, फिर किसकी याद आई
हो, किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
मीलों है ख़ामोशी, बरसों है तन्हाई
भूली दुनिया कभी की, तुझे भी मुझे भी
फिर क्यों आँख भर आई
किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
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Kiska rasta dekhe-Joshila 1973
वाला गीत कैसे गा सकता है. सोचने वाली बात है.
पढ़ा लिखा नौकरीपेशा नायक हालातों के चलते सलाखों के पीछे पहुँच
जाता है. वहाँ वो इस उम्मीद में गीत गा रहा है मानो नक्कारखाने
में तूती की आवाज़ सुनने वाला कोई आ जायेगा. और, आ भी जाता
है, सुन्दर नायिका जिसके आने के बाद उसकी जिंदगी में फिर से बहार
लौटने वाली है. अपनी यादों में लुडकते लड़खड़ाते वो आखिर मंजिल की
सीढ़ियों पर फिर से पहुँच जाता है. दो नायिकाएं दिखाई देती हैं गीत
में-राखी और हेमा मालिनी. जेलर की भूमिका में हैं मनमोहन कृष्ण.
बोल साहिर के हैं और धुन राहुल देव बर्मन की. गायक को आप पहचान
ही गए होंगे. गीत की पञ्च लाइन है-कोई नहीं जो यूँ ही जहाँ में, बाँटे
पीर पराई.
गीत के बोल:
किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
मीलों है ख़ामोशी, बरसों है तन्हाई
भूली दुनिया कभी की, तुझे भी मुझे भी
फिर क्यों आँख भर आई
हो, किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
कोई भी साया नहीं राहों में
कोई भी आएगा ना बाहों में
तेरे लिए मेरे लिए, कोई नहीं रोनेवाला ओ
झूठा भी नाता नहीं चाहों में
हाय, तू ही क्यों डूबा रहे आहों में
कोई किसी संग मरे, ऐसा नहीं होने वाला
कोई नहीं जो यूँ ही जहाँ में, बाँटे पीर पराई
हो, किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
तुझे क्या बीती हुई रातों से
मुझे क्या खोई हुई बातों से
सेज नहीं चिता सही, जो भी मिले सोना होगा
गई जो डोरी छूटी हाथों से
हो, लेना क्या टूटे हुए साथों से
खुशी जहाँ माँगी तूने, वहीं मुझे रोना होगा
ना कोई तेरा ना कोई मेरा, फिर किसकी याद आई
हो, किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
मीलों है ख़ामोशी, बरसों है तन्हाई
भूली दुनिया कभी की, तुझे भी मुझे भी
फिर क्यों आँख भर आई
किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई
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Kiska rasta dekhe-Joshila 1973
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