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Sunday, 11 September 2011

जाने कैसा छाने लगा नशा ये प्यार का-ज़बक १९६१

फिल्म ज़बक और फिल्म काली टोपी ला रुमाल का संगीत एक जैसा सुनाई
पढता है, क्यूँ ना हो, दोनों फिल्मों में चित्रगुप्त का संगीत जो है। सन ६१ से
रंगीन फिल्मों का दौर शुरू हुआ, ऐसा कहा जाता । कुछ फ़िल्में आधी रंगीन
बनीं तो कुछ पूरी रंगीन। ज़बक का किस्सा भी कुछ ऐसा ही है। फिल्म के
निर्देशक हैं होमी वाडिया। वाडिया पौराणिक और ऐतिहासिक फिल्मों के लिए
जाने जाते हैं। गीत प्रेम धवन ने लिखा है और गा रही हैं लता मंगेशकर।





गीत के बोल:


जाने कैसा छाने लगा नशा ये प्यार का
थोड़ा थोड़ा आने लगा मज़ा बहार का
जाने कैसा छाने लगा नशा ये प्यार का
थोड़ा थोड़ा आने लगा मज़ा बहार का

दिल जो मिले, गुल से खिले, जान गए हमराज़ नए
दिल जो मिले, गुल से खिले, जान गए हमराज़ नए
तुझसे सनम, तेरी कसम, सीख किए अंदाज़ नए
गई दिलको उड़ा, तेरी शोख़ अदा, मेरा बस न चला

जाने कैसा छाने लगा नशा ये प्यार का
थोड़ा थोड़ा आने लगा मज़ा बहार का

दिल थे जवां, रात हसीं ऐसे में तुमसे आँख लड़ी
दिल थे जवां, रात हसीं ऐसे में तुमसे आँख लड़ी
कैसे बुझे दिलके लगी अब तो ये मुश्किल आन पड़ी
ऐसा दर्द मिला, नहीं जिसकी दवा, तेरे प्यार के सिवा

जाने कैसा छाने लगा नशा ये प्यार ने
थोड़ा थोड़ा आने लगा मज़ा बहार का
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Jaane kaisa chhane laga-Zabak 1961

Friday, 26 August 2011

आधी रात को खनक गया-तूफ़ान में प्यार कहाँ १९६६

पिछले गीत के एक साज़-विशेष की ध्वनि से मुझे एक दोगाना

याद आया जिस लगे हाथ सुन लीजिए. इसकी धुन बनायीं है एक

और कम चर्चा में रहे संगीतकार चित्रगुप्त ने.



चित्रगुप्त ने बिना चर्चा, सराहना और पुरस्कारों के निरंतर जिस जोश

और चाव के साथ संगीत जगत में अपनी उपस्थिति बनाये रखी वो

प्रशन्सनीय है. भोजपुरी मूल के चित्रगुप्त ने फिल्म संगीत की सभी

विधाओं पर साधिकार अपना प्रभाव छोड़ा चाहे वो भजन हो, कव्वाली

हो या फिर कोई रोमांटिक गीत.



प्रस्तुत गीत है फिल्म ‘तूफ़ान में प्यार कहाँ से’. फिल्म जगत के

व्यावसायिक तूफ़ान में ये फिल्म ज्यादा नहीं टिक पायी अलबत्ता इसके

गीत संगीत प्रेमी ज़रूर गुनगुनाते मिल जायेंगे आपको. सन १९६६ में

ये फिल्म रिलीज़ हुयी थी . गीत लिखा है प्रेम धवन ने और इसे गाया

है लता और रफ़ी ने.







गीत के बोल:



हो हो हो हो हो हो हो हो हो हो हो

आ आ आ आ आ आ आ आ आ

हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ



आधी रात को खनक गया मेरा कंगना

आधी रात को खनक गया मेरा कंगना

कहीं आये न हों सजना हमारे अंगना

आधी रात को खनक गया मेरा कंगना

ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न

ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न



जा के सजन से कारे कारे बदरा

ये तो कहो ज़रा मेरे लिए

जा के सजन से कारे कारे बदरा

ये तो कहो ज़रा मेरे लिए

प्यार के रंग में रंग ली है मैंने

कोरी चुनर पिया तेरे लिए

इस रंग पे,

इस रंग पे चढेगा अब कोई रंग ना

कहीं आये न हों सजना हमारे अंगना

आधी रात को खनक गया मेरा कंगना



ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न

ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न



हो जी हो हो हो हो

सुन के छनक हम तेरे कंगना की

बात है क्या पहचान गए

सुन के छनक हम तेरे कंगना की

बात है क्या पहचान गए

कौन पुकारे कैसे हैं इशारे

जानने वाले तो जान गए

तेरे सामने

तेरे सामने खड़े हैं गोरी तेरे सजना

चाहे कुछ भी हो टूटे तुम्हारा कंगना

आधी रात को खनक गया मेरा कंगना



ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न

ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न



देख रही हैं जो अँखियाँ मेरी

डरती हूँ मैं कहीं सपना न हो

देख रही हैं जो अँखियाँ मेरी

डरती हूँ मैं कहीं सपना न हो

तुझको है डर क्या

डरते हैं वही जिनका कोई भी तो अपना न हो

तेरे सामने

तेरे सामने खड़े हैं गोरी तेरे सजना

चाहे कुछ भी हो टूटे तुम्हारा कंगना



आधी रात को खनक गया मेरा कंगना

आधी रात को खनक गया मेरा कंगना



ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न

ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न

ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न

ताना देरे न ताना न ताना ताना देरे न

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Adhi raat ko kahanak gaya-Toofan mein pyar kahan

Sunday, 17 July 2011

तेरी शोख नज़र का इशारा-पतंग १९६०

आपको सुनवाते हैं पतंग फिल्म से एक युगल गीत जो मुकेश और लता का गाया हुआ
है. इसके बोल लिखे हैं राजेंद्र कृष्ण ने और संगीत तैयार किया है चित्रगुप्त ने.
सन १९६० की फिल्म पतंग में राजेंद्र कुमार और माला सिन्हा क्रमशः नायक नायिका
हैं.

एक समय था फिल्म देखने वाले ये कहते-राजेंद्र कुमार की फिल्म है इसमें गाने बढ़िया
होंगे. श्वेत श्याम युग की अधिकतर वे फ़िल्में जिनमें राजेंद्र कुमार ने अभिनय किया
मधुर गीतों से भरपूर होती थीं. सत्तर के दशक में ये धारणा थोड़ी बदलना शुरू हुयी.
राजेंद्र कुमार के जुबली कुमार बनने की प्रक्रिया में उनकी फिल्मों के संगीत का भी बड़ा
योगदान रहा है.

श्रेणी बनाने के शौकीनों के लिए सुझाव - इसे शोख नज़र गीत , नाव गीत कहा
जा सकता है.





गीत के बोल:


तेरी शोख नज़र का इशारा
मेरी वीरान रातों का तारा
तेरी शोख नज़र का इशारा

तेरी बाँहों का जब है सहारा
पिया मझधार भी है किनारा
तेरी बाँहों का जब है सहारा

तेरी शोख नज़र का इशारा
मेरी वीरान रातों का तारा
तेरी शोख नज़र का इशारा

निकले हैं राही मस्ती में डूबे
मंजिल का क्या है ,मिले न मिले
निकले हैं राही मस्ती में डूबे
मंजिल का क्या है ,मिले न मिले

तुम साथ हो तो किस्मत पे अपनी
शिकवे कहाँ के कहाँ के गीले

ओ जी हो
तेरी शोख नज़र का इशारा
मेरी वीरान रातों का तारा
तेरी शोख नज़र का इशारा

तेरी बाँहों का जब है सहारा
पिया मझधार भी है किनारा
तेरी बाँहों का जब है सहारा


एक ख्वाब सा है या है कहानी
कुछ है यकीन कुछ यकीन भी नहीं
एक ख्वाब सा है या है कहानी
कुछ है यकीन कुछ यकीन भी नहीं
हम तो ये जानें सच है या सपना
जो तुम नहीं हो तो हम भी नहीं

हो जी हो
तेरी बाँहों का जब है सहारा
पिया मझधार भी है किनारा
तेरी बाँहों का जब है सहारा

तेरी शोख नज़र का इशारा
मेरी वीरान रातों का तारा
तेरी शोख नज़र का इशारा
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Teri shokh nazar ka ishara-Patang 1960

Wednesday, 22 June 2011

लगी ना छूटेगी-परदेसी १९७०

आपको सन १९७० की परदेसी का एक गीत सुनवा चुके हैं।
अगला गीत सुनिए लता मंगेशकर की आवाज़ में। साहिर
के अंदाज़-ए-बयां पर तो संगीतप्रेमी काफी लिखते रहे हैं और
लिखते रहेंगे, थोड़ा मजरूह के अंदाज़-ए-बयां पर भी गौर किया
जाये जिन्होंने ज्यादा सरल और थोड़े कठिन अंदाज़ में काफी
उम्दा किस्म के अफ़साने बुने।

प्रस्तुत गीत में विद्रोही सी सुनाई पढ़ती नायिका का सरे आम
इकरार-ए-मोहब्बत है और अनूठे अंदाज़ में। कुछ चैलेंज वाले
अंदाज़ में ज़माने से वो मुखातिब है-जो बन पड़े कर ले बैरी जहां,
बीच में दीवारें खड़ी करवा दो चाहे मंगल ग्रह भेज दो, हम तो प्यार
करेंगे, बेहिसाब करेंगे और धुआंधार करेंगे।

कुछ कुछ सफ़ेद कपड़ों को उजला बनाने वाले उत्पादों के विज्ञापन
जैसे शुरू होते इस विडियो में लहराते बलखाते कलाकारों के
नाम हैं-विश्वजीत और मुमताज़। कुछ मनमोहक कुछ बोर से
नृत्य में थोड़ी खींचा-तानी थोड़ी ढिशुम-ढिशुम की मिलावट है।




गीत के बोल:

लगी ना छूटेगी प्यार में ज़ालिमा
जो बन पड़े कर ले बैरी जहाँ

लगी ना छूटेगी प्यार में ज़ालिमा
जो बन पड़े कर ले बैरी जहाँ

तू रोक जो सके रोक ले थाम के
हंस देगी मेरी पायल तेरे नाम पे
बोलियाँ प्यार की
बोलियाँ प्यार की बोलती जाऊंगी
कट दे चाहे मेरी जुबां

लगी ना छूटेगी प्यार में ज़ालिमा
जो बन पड़े कर ले बैरी जहाँ

दुनिया ने फिर उसे दुःख दिया भी तो क्या
कोई प्यार को भुला के जिया भी तो क्या
बावरा मन कहे
बावरा मन कहे, मार डालो मोहे
ना रहूंगी मैं पी के बिना

लगी ना छूटेगी प्यार में ज़ालिमा
जो बन पड़े कर ले बैरी जहाँ

अब छीन के मुझे ले चले तू कहीं
धड़कन तो मेरे दिल की मिलेगी नहीं
प्यार में खो चुकी
प्यार में खो चुकी मैं तो गुम हो चुकी
अब रहा जिया मेरा कहाँ

लगी ना छूटेगी प्यार में ज़ालिमा
जो बन पड़े कर ले बैरी जहाँ
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Lagi na chhootegi-Pardesi 1970
 
 
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