श्वेत श्याम युग से एक मधुर गीत पेश है सन १९६१ से। फिल्म का
नाम है अनुराधा। इस फिल्म के साथ जो हस्तियाँ जुडी हुई हैं उनके
बारे में थोड़ी बकर बकर कर लेते हैं।
फिल्म के संगीतकार हैं प्रख्यात सितार वादक पंडित रविशंकर। फिल्म
कि नायिका हैं ख्यात सुंदरी लीला नायडू जिन्होनें गिनी चुनी फ़िल्में कीं
फिल्म के नायक है बलराज साहनी जिन्होंने फिल्म में एक डॉक्टर की
भूमिका निभाई है। फिल्म का निर्देशन प्रख्यात निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी
ने किया है। फिल्म के गीत लिखे है शैलेन्द्र ने।
गीत के बोल:
जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां
जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां
अजब दीवानी भई मोसे अन्जानी भई
अजब दीवानी भई मोसे अन्जानी भई
पल में पराई देखो हो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां
जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां
मन उजियारा छाया, जग उजियारा छाया
मन उजियारा छाया, जग उजियारा छाया
जगमग दीप संजो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां
जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां
कोई मन भा गया जलवा जला गया
कोई मन भा गया जलवा जला गया
मन के दो मोतिया पिरो गयी अँखियाँ
जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां
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Jaane kaise sapnon mein-Anuradha 1961
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Wednesday, 3 August 2011
Monday, 17 January 2011
पीपरा के पतवा-गोदान १९६३
आपको एक फ़िल्मी भोजपुरी गीत से रूबरू करवाते हैं।
शैलेन्द्र के लिखे बोलों की तर्ज़ बनाई है सितार वादक पंडित
रविशंकर ने। फिल्म गोदान के लिए इसे गा रहे हैं रफ़ी।
मस्त गीत है ये और इसको बहुत दिन बाद आज सुना है।
गीत के बोल:
पीपरा के पतवा सरीखे डोले मनवा
के हियरा में उठत हिलोर
अरे पुरवा के झोंकवा में आयो रे संदेसवा
के चल आज देसवा कि ओर
पीपरा के पतवा सरीखे डोले मनवा
के हियरा में उठत हिलोर
अरे पुरवा के झोंकवा में आयो रे संदेसवा
के चल आज देसवा कि ओर
पीपरा के पतवा सरीखे डोले मनवा
के हियरा में उठत हिलोर
अरे पुरवा के झोंकवा में आयो रे संदेसवा
के चल आज देसवा की ओर
झुकी झुकी बोले कारे कारे ये बदरवा
झुकी झुकी बोले कारे कारे ये बदरवा
कबसे पुकारे तोहे नैनों का कजरवा
उमड़ घुमड़ जब गरजे बदरिया रे
ठुमुक ठुमुक नाचे मोर
पुरवा के झोंकवा में आयो रे संदेसवा
के चल आज देसवा की ओर
सिमिट सिमिट बोले लम्बी ये डगरिया
सिमिट सिमिट बोले लम्बी ये डगरिया
जल्दी जल्दी चल राही अपनी नगरिया
रहिया ताकत फिर हिनिया दुल्हनिया
रे बांध के लगनिया की डोर
पुरवा के झोंकवा में आयो रे संदेसवा
के चल आज देसवा की ओर
पीपरा के पतवा सरीखे डोले मनवा
के हियरा में उठत हिलोर
पुरवा के झोंकवा में आयो रे संदेसवा
के चल आज देसवा की ओर
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Pipra ke patwa-Godaan 1963
शैलेन्द्र के लिखे बोलों की तर्ज़ बनाई है सितार वादक पंडित
रविशंकर ने। फिल्म गोदान के लिए इसे गा रहे हैं रफ़ी।
मस्त गीत है ये और इसको बहुत दिन बाद आज सुना है।
गीत के बोल:
पीपरा के पतवा सरीखे डोले मनवा
के हियरा में उठत हिलोर
अरे पुरवा के झोंकवा में आयो रे संदेसवा
के चल आज देसवा कि ओर
पीपरा के पतवा सरीखे डोले मनवा
के हियरा में उठत हिलोर
अरे पुरवा के झोंकवा में आयो रे संदेसवा
के चल आज देसवा कि ओर
पीपरा के पतवा सरीखे डोले मनवा
के हियरा में उठत हिलोर
अरे पुरवा के झोंकवा में आयो रे संदेसवा
के चल आज देसवा की ओर
झुकी झुकी बोले कारे कारे ये बदरवा
झुकी झुकी बोले कारे कारे ये बदरवा
कबसे पुकारे तोहे नैनों का कजरवा
उमड़ घुमड़ जब गरजे बदरिया रे
ठुमुक ठुमुक नाचे मोर
पुरवा के झोंकवा में आयो रे संदेसवा
के चल आज देसवा की ओर
सिमिट सिमिट बोले लम्बी ये डगरिया
सिमिट सिमिट बोले लम्बी ये डगरिया
जल्दी जल्दी चल राही अपनी नगरिया
रहिया ताकत फिर हिनिया दुल्हनिया
रे बांध के लगनिया की डोर
पुरवा के झोंकवा में आयो रे संदेसवा
के चल आज देसवा की ओर
पीपरा के पतवा सरीखे डोले मनवा
के हियरा में उठत हिलोर
पुरवा के झोंकवा में आयो रे संदेसवा
के चल आज देसवा की ओर
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Pipra ke patwa-Godaan 1963
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