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Sunday, 17 July 2011

झननन झन झननन झन बाजे पायलिया-रानी रूपमती १९५९

आपको फिल्म रानी रूपमती से कानों की कसरत करवाने वाला
एक और मधुर गीत सुनवाते हैं. ये लता और रफ़ी का गाया युगल
गीत है जिसे भारत भूषण और निरूपा राय पर फिल्माया गया है.
भारत व्यास के बोल है और श्रीनाथ त्रिपाठी का संगीत है. विडियो
में आपको मांडू की ऐतिहासिक इमारतें दिखाई देंगी.






गीत के बोल :


अमिय हलाहल मदभरे श्वेत श्याम रतनार
जियत मरत झुकि झुकि परत जेहि चितवत एक बार

झननन झन झननन झन झननन बाजे पायलिया
झननन झन झननन झन झननन बाजे पायलिया
पिया से मिलन चली आज कामिनिया
झननन झन झननन झन झननन बाजे पायलिया
झननन झन झननन झन झननन

ओ ओ ओ ओ ओ
रात अन्धेरी डर लागे रसिया
रात अन्धेरी डर लागे रसिया
पास कैसे आऊँ तोरे मनबसिया
पपीहा बोले
पपीहा बोले अम्रित घोले जियरा डोले हौले हौले हौले
झननन झन झननन झन झननन बाजे पायलिया
झननन झन झननन झन झननन बाजे

सज सिंगार कोई नार नवेली
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
सज सिंगार कोई नार नवेली
निडर डगर में चली है अकेली
ऋतु बसन्त आई अलबेली
डार डार बोले कारी कोयलिया
झननन झन झननन झन झननन बाजे पायलिया
झननन झन झननन झन झननन

ल : ओ ओ ओ ओ ओ
प्यार जगा है देखो कण कण में
प्यार जगा है देखो कण कण में
रास रसा है मन मधुबन में
बजे मंजीरे
बजे मंजीरे जमुना तीरे मैं तो चली रे धीरे धीरे धीरे
झननन झन झननन झन झननन बाजे पायलिया

झननन झन झननन झन झननन बाजे
बाजे पायलिया
झनन झन झन बाजे पायलिया
झनन झनन बाजे पायलिया
झन झन बा झन झन बा झन झन बा
आ आ आ आ आ आ आ
झनन झनन झनन झनन बाजे
झनन झनन झनन झनन बाजे
झनन झनन झनन झनन बाजे

आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
बा आ आ आ आ जे
बा आ आ आ आ जे
बा आ आ आ आ जे
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
झननन झन झननन झन झननन बाजे
....................................
Jhananan jhan baaje-Rani Roopmati 1957

बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी-रानी रूपमती १९५७

आइये गायकी का आनंद उठाया जाए। गीत के आनंद और
गायकी के आनंद में फर्क है। गायकी में बोल सुरीले हो सकते
हैं और नहीं भी। अभिनेता अभिनेत्री हो या ना हों, कोई फर्क नहीं
पढता। गायकी का मज़ा या तो किसी शास्त्रीय संगीत के दिग्गज
की आवाज़ में मिलता है या फिर मन्ना डे के गायन में मिलता
है। यहाँ परदे पर कृष्ण राव चोनकर नाम के शास्त्रीय संगीत के
गायक आपको दिखाई देंगे जो हमारे हीरो को गायन सिखा
रहे हैं। इस गीत में आवाज़ कृष्ण राव चोनकर और रफ़ी की है।

ऐसे गायन को हम उप-शास्त्रीय संगीत में शामिल कर सकते हैं
जो ना तो पूरा फ़िल्मी है ना पूर्ण रागदारी का हिस्सा।





गीत के बोल:

आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ
हा आ आ आ आ आ

बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
हे ऐ ऐ ऐ ऐसो है बेदर्दी बनवारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
हे ऐ ऐ ऐ मोहे बेदर्दी बनवारी
ऐसो है निडर डरत न काहूँ से लंगर
ऐसो है निडर डरत न काहूँ से लंगर
अपने धिंगा धिंगी करत है डगर
हे मोरे राम, हे मोरे राम, हे मोरे राम

बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी

इतने दिनन में मोसे कबहूँ न अटक्यो
हा आ आ आ आ आ ,
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
बाट चलत
इतने दिनन में मोसे कबहूँ न
आ आ आ, आ आ आ, आ आ आ आ आ आ आ
हा आ आ आ आ आ
बाट चलत
इतने दिनन में मोसे कबहूँ न अटक्यो
नित प्रति जात गलिन में सुबह शाम
आवत फागुन इतरात जात दे-दे तारी
हे मोरे राम, हे मोरे राम, हे मोरे राम

बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नई चुनरी रँग डारी रे
चुनरी रँग डारी रे, चुनरी रँग डारी रे,
चुनरी रँग डारी रे, चुनरी रँग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी

ध, प म ग रे सा नी सा, रे ग म प ध प,
ध प, म ग, रे सा, सा ग रे म सा म ग
म ध नी ध म ग, म ध नी सा, आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ

बाट चलत नयी
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
बाट चलत नयी
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
बाट चलत नयी
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
..........................................
Baat chalat nayi chunri-Rani Roopmati 1957

Wednesday, 15 June 2011

नैनों से नैनों की बात हुई-चंद्रमुखी १९६०

पुरानी फिल्मों में कई ऐसे रत्न छुपे हुए हैं कि ढूंढ ढूंढ के उनको
निकालना पढता है। प्रस्तुत गीत भी ऐसा ही है। रेडियो पर काफी
बजा ये गीत शायद विडियो के रूप में उपलब्ध नहीं है यू ट्यूब पर।
भारत व्यास रचित गीत लता मंगेशकर द्वारा गाये अतिरिक्त
मधुरता वाले गीतों में गिना जाता है संगीत रसिकों द्वारा। कानों
में मिश्री सी घोल दी हो जैसे। संगीतकार एस एन त्रिपाठी का जादुई
संगीत है जनाब इस गीत में। गीत की साउंड क्वालिटी ज़बरदस्त है
और आपको आनंद ज़रूर आएगा मेरा दावा है।




गीत के बोल:

नैनों से नैनों की बात हुई
छुप-छुप के तुमसे मुलाक़ात हुई
नहीं जान सके तुम नहीं जान सके हम
नहीं जान सके तुम नहीं जान सके हम
फिर भी घुँघरू ने बोल दिया छम-छम-छम

नैनों से नैनों की बात हुई

तुम जो मिले फूल खिले दिल के अरमान हिले
धरती गगन दोनों लगे झूमने
नैनों से मिलते ही नयन चलने lagi मंद पवन
भँवर लगे कलियों को चूमने
भँवर लगे कलियों को चूमने
पहले मिलन की ये करामात हुई
चन्दा बिन पूनम की रात हुई
नहीं जान सके तुम नहीं जान सके हम
फिर भी घुँघरू ने बोल दिया छम-छम-छम

नैनों से नैनों की बात हुई

चंचल पलकों के तले नज़रों के तीर चले
बाज़ी लगी दो दिलों के खेल की
तुम भी चले हम भी चले देख के सब लोग जले
बढ़ने लगी बेल मधुर मेल की
बढ़ने लगी बेल मधुर मेल की
अपनी मुहब्बत की शुरुआत हुई
जीत इधर और उधर मात हुई
नहीं जान सके तुम नहीं जान सके हम
फिर भी घुँघरू ने बोल दिया छम-छम-छम

नैनों से नैनों की बात हुई
छुप-छुप के तुमसे मुलाक़ात हुई
नहीं जान सके तुम नहीं जान सके हम
फिर भी घुँघरू ने बोल दिया छम-छम-छम
.....................................
Nainon se nainon ki baat huyi-Chandrakanta 1960

Friday, 10 June 2011

परवरदिगार-ए-आलम-हातिम ताई १९५६

बिना विवरण के भी कभी कभी गीत सुनने में आनंद आता है।
विवरण देना ज़रूरी नहीं है मगर दिया जाता है जिससे पढने
वाले को कुछ अतिरिक्त जानकारी मिले या जिससे लिखने और
पढने वाले के बीच संवाद कायम हो।

प्रस्तुत गीत फिल्म हातिम ताई से है। बाकी की जानकारी टैग में
समाहित है। गीत में ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करते हुए उससे
फ़रियाद की जा रही है।



गीत के बोल:

परवरदिगार-ए-आलम तेरा ही है सहारा
तेरे सिवा जहाँ में कोई नहीं हमारा

परवरदिगार-ए-आलम तेरा ही है सहारा
तेरे सिवा जहाँ में कोई नहीं हमारा
परवरदिगार-ए-आलम

नूह का सफ़ीना तूने तूफ़ान से बचाया
दुनिया में तू हमेशा बंदों के काम आया
माँगी ख़लील ने जब तुझसे दुआ ख़ुदाया
आतिश को तूने फ़ौरन एक गुलसिताँ बनाया
har इल्तेजा ने तेरी रहमत को है उभारा

परवरदिगार-ए-आलम तेरा ही है सहारा
तेरे सिवा जहाँ में कोई नहीं हमारा
परवरदिगार-ए-आलम

यूनुस को तूने मछली के पेट से निकाला
तूने ही मुश्किलों में अयूब को सम्भाला
इलयास पर करम का तूने किया उजाला
है दो जहाँ में या रब तेरा ही बोल बाला
तूने सदा इलाही बिगड़ी को है सँवारा

परवरदिगार-ए-आलम तेरा ही है सहारा
तेरे सिवा जहाँ में कोई नहीं हमारा
परवरदिगार-ए-आलम

यूसुफ़ को तूने मौला दी क़ैद से रिहाई
याक़ूब को दुबारा शक़्ल-ए-पिसर दिखाई
बहती हुई नदी में मूसा की रह बनाई
तूने सलीब पर भी ईसा की जाँ बचाई
दाता तेरे करम का कोई नहीं किनारा


परवरदिगार-ए-आलम तेरा ही है सहारा
तेरे सिवा जहाँ में कोई नहीं हमारा
परवरदिगार-ए-आलम
...........................
Parvardigaar-e-alm- Hatim Tai 1956

Saturday, 4 June 2011

झूमती है नज़र-हातिम ताई १९५६

जयराज और शकीला परदे पर। आशा और रफ़ी का युगल गीत। गीत
अख्तर रोमानी का और संगीत श्रीनाथ त्रिपाठी का। एक सदाबहार
युगल गीत जो निहायत ही रूमानी है, क्यूँ ना हो रोमानी साहब ने जो
लिखा है। आशा और रफ़ी के युगल गीतों में एक अलग सी कशिश महसूस
की मैंने। जहाँ लता और रफ़ी के गीत सादगी की सीमाओं के भीतर होते,
संगीतकार आशा और रफ़ी के गीतों में अभिनव प्रयोग करते और वो
सब करने की कोशिश करते जो लता रफ़ी के युगल गीतों में संभव नहीं
हो पाता। वैसे प्रस्तुत गीत बहुत ही सौम्य किस्म का गीत है, सौम्यता
जो कि एस एन त्रिपाठी के संगीत का वाटरमार्क है। एस एन त्रिपाठी वाकई
बहुत प्रतिभाशाली संगीतकार थे, बस ज्यादा प्रसिद्धि उनकी किस्मत में
नहीं थी सो वे केवल वर्ग विशेष की पसंद बन कर रह गये। बहरहाल
ये गीत उनके सबसे लोकप्रिय गीतों में से एक है और क्यूँ है इसको सुनिए,
खुद जान जाइये।

फिल्म में नायिका शकीला परी की भूमिका में हैं और जयराज हातिम ताई
की। शकीला स्वभावतः कुछ ज्यादा ही प्रसन्न नज़र आ रही हैं इस गीत
में। कहीं कहीं तो ऐसा आभास होता है मानो उन्होंने कोई चुटकुला सुन
लिया हो और उसपर प्रतिक्रिया जाहिर कर रही हों। जयराज ज्यादा उछल
कूद नहीं मचाते थे सो इस गीत में भी वे गंभीर और संतुलित दिखाई दे
रहे हैं।





गीत के बोल:

झूमती है नज़र झूमता है प्यार
झूमती है नज़र झूमता है प्यार
ये नज़र छीन कर ले गई करार
ये नज़र छीन कर ले गई करार
झूमती है नज़र झूमता है प्यार

हम हैं आज़ाद पंछी फिजाओं के
हाथ ना आ सके हम हवाओं के
वादे करते नहीं हम वफाओं के
फिर भी तुम जानो दिल तुम पे हैं निसार
ये नज़र छीन कर ले गई करार

झूमती है नज़र झूमता है प्यार

मैं तेरे हुस्न के गीत गाऊंगा
इश्क की आरजू लब पे लाऊंगा
मैं तुझे धडकनों में बसाऊंगा
एक है दिल जिसमें हैं हसरतें हज़ार
ये नज़र छीन कर ले गई करार

झूमती है नज़र झूमता है प्यार

मेरी हर सांस में तेरा प्यार है
मेरी हर सांस में तेरा प्यार है
तू मेरे बाग़-ए-दिल की बाहर है
तू मेरे बाग़-ए-दिल की बाहर है
तू मेरी ज़िन्दगी का सिंगार है
ओ सनम तू मेरे दिल की है पुकार
ये नज़र छीन कर ले गई करार

झूमती है नज़र झूमता है प्यार

तुम हमें हम तुम्हें देखते राहें

तुम हमें हम तुम्हें देखते राहें
हाल-ए-दिल हो बयां लब ना कुछ कहें
हाल-ए-दिल हो बयां लब ना कुछ कहें
मिल के हम प्यार की मौजों में बाहें
आ ज़रा छेड़ दे दिल से दिल के तार
ये नज़र छीन कर ले गई करार

झूमती है नज़र झूमता है प्यार
.....................................
Jhoomti hai nazar jhoomta hai pyar-Hatim Tai 1956

Thursday, 2 June 2011

जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे-नाग देवता १९६१

आइये थोड़ा धार्मिक हो जाएँ। भजन सुनें फिल्म नाग देवता से जो
सन १९६१ की फिल्म है। सुमन कल्याणपुर की आवाज़ वाले इस गीत
फिल्माया गया है शशिकला पर। ये एक पौराणिक फिल्म है जिसमें
महिपाल मुख्या भूमिका में हैं। शांतिलाल सोनी फिल्म के निर्देशक हैं
और संगीत दिया है एस एन त्रिपाठी ने। गीत का विडियो यू ट्यूब पर
उपलब्ध ज़रूर है। इसे देखने के लिए ये लिंक क्लिक करना पड़ेगा।
जब कान्हा की मीठी मुरलिया-विडियो






गीत के बोल:

हो, जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे
जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे
किसी को रिझाये किसी को तडपाये
किसी को रिझाये किसी को तडपाये

जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे

पनघट पे नैनों से कर के इशारा
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ हो ओ ओ
नटखट सांवरिया ने मुझको पुकारा
हो ओ ओ बैरन मुरलिया ने जादू सा डाला
बैरन मुरलिया ने जादू सा डाला
कान्हा का बाण हाय तान तान मारा
मैं तो रह गई पनघट पे खड़ी की खड़ी
चला भी नहीं जाये रुका भी नहीं जाये
हाय मैं तो रह गई पनघट पे कड़ी की कड़ी
चला भी नहीं जाये रुका भी नहीं जाये

जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे

मैं भी जो होती कान्हा की बांसुरिया
मैं भी जो होती कान्हा की बांसुरिया
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ हो ओ ओ
हो ओ ओ संग संग मुझे भी रखते सांवरिया
संग संग मुझे भी रखते सांवरिया
हाथों में सजती मैं होंठों से लगती
हाथों में सजती मैं होंठों से लगती
मुझपे जो पढ़ती मोहन की नजरिया
मेरे मन में हैं क्या क्या उमंगें खड़ी
बताई ना जाये छुपायी भी ना जाये
बताई ना जाये छुपायी भी ना जाये

जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे
हा आ आ आ आ आ आ आ मुरलिया बजे
हा आ आ आ आ आ आ आ मुरलिया बजे
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ
मुरलिया बजे
....................................
Jab kanha ki meethi muraliya baje-Naag Devta 1961

Tuesday, 11 January 2011

आ लौट के आ जा मेरे मीत-रानी रूपमती १९५९

मुकेश की आवाज़ में एक गीत सुनिए जिसे ना जाने कितनी
बार सुना होगा मैंने। इस दर्द भरे गीत का आकाशवाणी से
विशेष नाता रहा है और इसे लगभग सभी गीतों के कार्यक्रम
में नियमित रूप से बजाय जाता रहा। पिछले गीत से मुझे ये
गीत याद आया। भारत भूषण इस गीत में भी आपको दिखाई देंगे
बस फर्क गायक की आवाज़ का हो गया है। पिछला गीत रफ़ी की
आवाज़ में था। ऐतिहासिक और पौराणिक फिल्मों के लिए अभिनेता
भारत भूषण भी एक पसंद हुआ करते थे फिल्म निर्माताओं की। गीत
लिखा है कविवर भारत व्यास ने और धुन है एस एन त्रिपाठी की।



गीत के बोल:

लौट के आ, लौट के आ
लौट के आ , लौ के आ

आ लौट के आ जा मेरे मीत
आ लौट के आ जा मेरे मीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

आ लौट के आ जा मेरे मीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

मेरा सूना पड़ा रे संगीत
मेरा सूना पड़ा रे संगीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

आ लौट के आ जा मेरे मीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

आ लौट के आ जा मेरे मीत

बरसे गगन मेरे बरसे नयन
देखो तरसे है मन अब तो आ जा
बरसे गगन मेरे बरसे नयन
देखो तरसे है मन अब तो आ जा
शीतल पवन लगाये अगन
ओ सजन अब तो मुखड़ा दिखा जा
शीतल पवन लगाये अगन
ओ सजन अब तो मुखड़ा दिखा जा

तूने भाली रे निभाई प्रीत
तूने भाली रे निभाई प्रीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

आ लौट के आ जा मेरे मीत

एक पल है हँसना एक पल है रोना
कैसा है जीवन का खेला
एक पल है हँसना एक पल है रोना
कैसा है जीवन का खेला
एक पल है मिलना एक पल बिछड़ना
दुनिया है दो दिन का मेला

ये घडी ना जाए बीत
ये घडी ना जाए बीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

आ लौट के आ जा मेरे मीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

मेरा सूना पड़ा रे संगीत
मेरा सूना पड़ा रे संगीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

आ लौट के आ जा मेरे मीत

Saturday, 1 January 2011

नया नया चाँद है-खुदा का बंदा १९५७

नया साल, नई उमंगें, नई उमंगें, नई मंजिलें और नये रेज़ोल्यूशन ।
नव वर्ष की शुभकामनाओं के साथ ही ये गीत प्रस्तुत है पुरानी फिल्म
खुदा का बंदा से। संगीत एस एन त्रिपाठी का है और इसे गा रहे हैं
गीता दत्त और मन्ना डे।

नए साल में आपको प्याज़ और टमाटर खूब खाने को मिलें इसी दुआ
के साथ.......



गीत के बोल:

नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया प्यार है जी
नया नया साथ है

नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नई नई रात है

कितने भी रंग चाहे बदले ज़माना
हो ओ ओ ओ ओ ओ
कितने भी रंग चाहे बदले ज़माना
दिल में जो आई हो तो
दिल पे ना जाना
दिल पे ना जाना
जी दिल पे ना जाना

मिल के बिछड़ जाना
बड़ी बुरी बात है
मिल के बिछड़ जाना
बड़ी बुरी बात है

नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया प्यार है जी
नया नया साथ है

नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नई नई रात है

नज़रों में आज मेरी दुनिया हसीं है
हो ओ ओ ओ
नज़रों में आज मेरी दुनिया हसीं है
उल्फत की राह देखो
कितनी रंगीन है
कितनी रंगीन है
जी,कितनी रंगीन है

घर में हमारे आई
ख़ुशी की बारात है
घर में हमारे आई
ख़ुशी की बारात है

नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया प्यार है जी
नया नया साथ है

नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नई नई रात है

तुम जो मिले तो
मिला ख़ुशी का खज़ाना
हो ओ ओ ओ ओ ओ
तुम जो मिले तो मिला
ख़ुशी का खज़ाना
तुम जो हो पास मेरे
समा है सुहाना
समा है सुहाना
जी समा है सुहाना

प्यार फले फूले यही
दुआ दिन रात है
प्यार फले फूले यही
दुआ दिन रात है

नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया प्यार है जी
नया नया साथ है

नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नई नई रात है

Tuesday, 23 November 2010

पनघट को चली पनिहारी -पनघट १९४३

संगीतकार एस. एन. त्रिपाठी की बतौर स्वतंत्र संगीतकार पहली
फिल्म थी चन्दन(१९४१)। सन ४३ में आई फिल्म पनघट ने उन्हें
प्रसिद्धि दिलाई और फिल्म संगीत क्षेत्र में पैर ज़माने का मौका दिया।
ये फिल्म विजय भट्ट द्वारा प्रोड्यूस की गई थी । ये वही विजय भट्ट
हैं जिन्होंने गूँज उठी शहनाई का निर्देशन किया है। विजय भट्ट ने
जितना भी योगदान दिया फिल्म जगत को, वो उच्च कोटि का एवं
प्रशंसनीय है। विजय भट्ट की तरह ही एस. एन. त्रिपाठी को धार्मिक,
पौराणिक एवं ऐतिहासिक विषयों में काफी दिलचस्पी रही।

एस एन त्रिपाठी पर चर्चा हम आगे करते रहेंगे, पढ़ते रहिये
ये ब्लॉग।



गीत के बोल:

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे

कमर पर घड़ा धरे मतवारी
कमर पर घड़ा धरे मतवारी
मतवारी रे
कमर पर घड़ा धरे मतवारी
पनिहारी रे

पनिहारी लचक ना जाना
पनिहारी ओ पनिहारी
पनिहारी लचक ना जाना
घड़ा है तेरा भरी रे
पनिहारी रे
घड़ा है तेरा भरी रे
पनिहारी रे

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे

जिस पनघट लहराए है
सवान बारह है मॉस
उस पनघट प्यासी कड़ी
पिया मिलन की आस
क्यूँ पहना गुलाबी दुपट्टा
क्यूँ पहना गुलाबी दुपट्टा
अभी तो कुंवारी रे
पनिहारी रे
क्यूँ पहना गुलाबी दुपट्टा
अभी तो कुंवारी रे
पनिहारी रे

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे

मैं हूँ छोटी सी
मैं हूँ छोटी सी
छोटी गगरिया
मैं हूँ छोटी सी
मैं हूँ छोटी सी
छोटी गगरिया

खोजूं पीछू बाबुल की नगरिया
खोजूं पीछू बाबुल की नगरिया

मोहे पनघट मैं पनघट की प्यारी रे
मोहे पनघट मैं पनघट की प्यारी रे
पनिहारी रे

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे

धीरे खींचो बदन में हौले
धीरे खींचो
धीरे खींचो बदन में हौले
घबरावे है नाज़ुक जवानी
घबरावे है नाज़ुक जवानी

देख ढूंढें ननदिया किनारी
देख ढूंढें ननदिया किनारी रे
पनिहारी रे

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे
......................................
Panghat ko chali panihari-Panghat 1943
 
 
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