फिल्म एक मुसाफिर एक हसीना का गीत जनता को इतना भाया कि ये
एक पैरोडी में भी सुनाई दिया। पंजाबी फिल्म सात सालियाँ के एक गीत
में शुरुआत बहुत शुक्रिया गीत से होती है। बाकी के गीत इस प्रकार
से हैं जिनकी टांग मरोड़ी गयी है- १)अँखियाँ मिला के जिया भरमा के-रतन,
२) ये इश्क इश्क है इश्क इश्क-बरसात की रात
गीत गा रहे हैं मोहम्मद रफ़ी, सुमन कल्याणपुर और कमल बारोट । गीत
लिखा है नक्श लायलपुरी ने और इसकी धुन बनाई है एस मदन ने।
गीत के बोल:
अगर आपके समझ आयें तो मुझे भी बतला दें, कृपया। उसके बाद मैं भी
बोल प्रदान करने वाले के लिए गाऊंगा-बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी ।
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Monday, 22 August 2011
Thursday, 2 June 2011
जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे-नाग देवता १९६१
आइये थोड़ा धार्मिक हो जाएँ। भजन सुनें फिल्म नाग देवता से जो
सन १९६१ की फिल्म है। सुमन कल्याणपुर की आवाज़ वाले इस गीत
फिल्माया गया है शशिकला पर। ये एक पौराणिक फिल्म है जिसमें
महिपाल मुख्या भूमिका में हैं। शांतिलाल सोनी फिल्म के निर्देशक हैं
और संगीत दिया है एस एन त्रिपाठी ने। गीत का विडियो यू ट्यूब पर
उपलब्ध ज़रूर है। इसे देखने के लिए ये लिंक क्लिक करना पड़ेगा।
जब कान्हा की मीठी मुरलिया-विडियो
गीत के बोल:
हो, जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे
जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे
किसी को रिझाये किसी को तडपाये
किसी को रिझाये किसी को तडपाये
जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे
पनघट पे नैनों से कर के इशारा
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ हो ओ ओ
नटखट सांवरिया ने मुझको पुकारा
हो ओ ओ बैरन मुरलिया ने जादू सा डाला
बैरन मुरलिया ने जादू सा डाला
कान्हा का बाण हाय तान तान मारा
मैं तो रह गई पनघट पे खड़ी की खड़ी
चला भी नहीं जाये रुका भी नहीं जाये
हाय मैं तो रह गई पनघट पे कड़ी की कड़ी
चला भी नहीं जाये रुका भी नहीं जाये
जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे
मैं भी जो होती कान्हा की बांसुरिया
मैं भी जो होती कान्हा की बांसुरिया
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ हो ओ ओ
हो ओ ओ संग संग मुझे भी रखते सांवरिया
संग संग मुझे भी रखते सांवरिया
हाथों में सजती मैं होंठों से लगती
हाथों में सजती मैं होंठों से लगती
मुझपे जो पढ़ती मोहन की नजरिया
मेरे मन में हैं क्या क्या उमंगें खड़ी
बताई ना जाये छुपायी भी ना जाये
बताई ना जाये छुपायी भी ना जाये
जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे
हा आ आ आ आ आ आ आ मुरलिया बजे
हा आ आ आ आ आ आ आ मुरलिया बजे
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ
मुरलिया बजे
....................................
Jab kanha ki meethi muraliya baje-Naag Devta 1961
सन १९६१ की फिल्म है। सुमन कल्याणपुर की आवाज़ वाले इस गीत
फिल्माया गया है शशिकला पर। ये एक पौराणिक फिल्म है जिसमें
महिपाल मुख्या भूमिका में हैं। शांतिलाल सोनी फिल्म के निर्देशक हैं
और संगीत दिया है एस एन त्रिपाठी ने। गीत का विडियो यू ट्यूब पर
उपलब्ध ज़रूर है। इसे देखने के लिए ये लिंक क्लिक करना पड़ेगा।
जब कान्हा की मीठी मुरलिया-विडियो
गीत के बोल:
हो, जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे
जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे
किसी को रिझाये किसी को तडपाये
किसी को रिझाये किसी को तडपाये
जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे
पनघट पे नैनों से कर के इशारा
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ हो ओ ओ
नटखट सांवरिया ने मुझको पुकारा
हो ओ ओ बैरन मुरलिया ने जादू सा डाला
बैरन मुरलिया ने जादू सा डाला
कान्हा का बाण हाय तान तान मारा
मैं तो रह गई पनघट पे खड़ी की खड़ी
चला भी नहीं जाये रुका भी नहीं जाये
हाय मैं तो रह गई पनघट पे कड़ी की कड़ी
चला भी नहीं जाये रुका भी नहीं जाये
जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे
मैं भी जो होती कान्हा की बांसुरिया
मैं भी जो होती कान्हा की बांसुरिया
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ हो ओ ओ
हो ओ ओ संग संग मुझे भी रखते सांवरिया
संग संग मुझे भी रखते सांवरिया
हाथों में सजती मैं होंठों से लगती
हाथों में सजती मैं होंठों से लगती
मुझपे जो पढ़ती मोहन की नजरिया
मेरे मन में हैं क्या क्या उमंगें खड़ी
बताई ना जाये छुपायी भी ना जाये
बताई ना जाये छुपायी भी ना जाये
जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे
हा आ आ आ आ आ आ आ मुरलिया बजे
हा आ आ आ आ आ आ आ मुरलिया बजे
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ
मुरलिया बजे
....................................
Jab kanha ki meethi muraliya baje-Naag Devta 1961
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Suman Kalyanpur
Sunday, 12 December 2010
ऐसे तो ना देखो-भीगी रात १९६५
इसके मुखड़े के बोल पढ़ के तीन देवियाँ के गाने की
गलतफ़हमी हो जाती है। वो गीत रफ़ी का गाया एकल
गीत था जबकि प्रस्तुत गीत सुमन और रफ़ी का गाया
युगल गीत है। कालिदास के निर्देशन में बनी फिल्म
भीगी रात का संगीत अच्छा है। हमारी कोशिश है
की आपको पहले कम प्रचलित और कम सुने गए गीत
सुनवाए जाएँ ताकि आपको कुछ अतिरिक्त जानकारी मिलती
रहे। रईसी वाला गीत है। नायक नायिका कार में बैठ
के घूमने निकले है और गीत भी गाते हैं। गीत के
नीचे आपको एक कमेन्ट मिलेगा-grossly underrated for
obvious रेअसोंस- इस तरह की टिप्पणियों से अर्थ निकलना
बड़ी टेढ़ी खीर होता है। या तो लिखने वाला ये कहना
चाहता है कि रफ़ी और सुमन के गाये युगल गीत लता-रफ़ी
के गाये युगल गीतों की तुलना में कमतर आंके जाते हैं
या उसका इशारा दूसरे संगीतकारों और रोशन के
संगीत में तुलना से है। फिलहाल सम्भावना पहले कारण
की ज्यादा नज़र आ रही है। सुमन को प्रथम श्रेणी की
गायिका मानने से कई संगीत प्रेमी इनकार जो करते हैं
सीधी वजह उनकी आवाज़ लता की आवाज़ के सबसे निकट
होना। खैर ये तुलना वुलना का चक्कर छोड़ें और सुनें इस
मधुर गीत को।

भीगी रात के पिछले गीत में नायिका रूठी हुई थी। इसमें थोड़ी
खुश नज़र आ रही है और कुछ खिसियाने अंदाज़ में नायक के
साथ गीत गाना शुरू करती हैं-जैसे कहना चाह रही हों-"शर्म से
यहीं गड़ जाएँ ना कहीं हम" !!
गीत के बोल:
ऐसे तो ना देखिये के बहक जाएँ कहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
हाय, ऐसी ना कहो बात के मर जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान है फ़रिश्ता तो नहीं हम
अंगडाई सी लेती है जो ख़ुशबू भरी जुल्फें
ख़ुशबू भरी जुल्फें
गिरती हैं तेरे सुर्ख लबों पर तेरी जुल्फें
लबों पर तेरी जुल्फें
जुल्फें ना तेरी चूम लें
जुल्फें ना तेरी चूम लें ऐ माहजबीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
आ हा हा, आ आ आ आ आ, हं हं हं हं हं
सुन सुन के तेरी बात नशा छाने लगा है
नशा छाने लगा है
खुद अपने भी प्यार तो कुछ आने लगा है
है ऐ ऐ, आने लगा है।
रखना है कहीं पाँव तो
रखना है कहीं पाँव तो रखते हैं कहीं हम
आखिर को एक इंसान है फ़रिश्ता तो नहीं हम
भीगा सा ये रुख-ए-नाज़ ये हल्का सा पसीना
ये हल्का सा पसीना
हाय
ये नाचती आँखों के भंवर दिल का सफीना
दिल का सफीना
सोचा है के अब डूब के
सोचा है के अब डूब के रह जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
हाय, ऐसी ना कहो बात के मर जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
आ हा हा, आ आ आ आ आ, हं हं हं हं हं
हं हं हं हं हं हं हं
......................................................................
Aise to na dekhiye ke behak jayen-Bheegi Raat 1965
गलतफ़हमी हो जाती है। वो गीत रफ़ी का गाया एकल
गीत था जबकि प्रस्तुत गीत सुमन और रफ़ी का गाया
युगल गीत है। कालिदास के निर्देशन में बनी फिल्म
भीगी रात का संगीत अच्छा है। हमारी कोशिश है
की आपको पहले कम प्रचलित और कम सुने गए गीत
सुनवाए जाएँ ताकि आपको कुछ अतिरिक्त जानकारी मिलती
रहे। रईसी वाला गीत है। नायक नायिका कार में बैठ
के घूमने निकले है और गीत भी गाते हैं। गीत के
नीचे आपको एक कमेन्ट मिलेगा-grossly underrated for
obvious रेअसोंस- इस तरह की टिप्पणियों से अर्थ निकलना
बड़ी टेढ़ी खीर होता है। या तो लिखने वाला ये कहना
चाहता है कि रफ़ी और सुमन के गाये युगल गीत लता-रफ़ी
के गाये युगल गीतों की तुलना में कमतर आंके जाते हैं
या उसका इशारा दूसरे संगीतकारों और रोशन के
संगीत में तुलना से है। फिलहाल सम्भावना पहले कारण
की ज्यादा नज़र आ रही है। सुमन को प्रथम श्रेणी की
गायिका मानने से कई संगीत प्रेमी इनकार जो करते हैं
सीधी वजह उनकी आवाज़ लता की आवाज़ के सबसे निकट
होना। खैर ये तुलना वुलना का चक्कर छोड़ें और सुनें इस
मधुर गीत को।
भीगी रात के पिछले गीत में नायिका रूठी हुई थी। इसमें थोड़ी
खुश नज़र आ रही है और कुछ खिसियाने अंदाज़ में नायक के
साथ गीत गाना शुरू करती हैं-जैसे कहना चाह रही हों-"शर्म से
यहीं गड़ जाएँ ना कहीं हम" !!
गीत के बोल:
ऐसे तो ना देखिये के बहक जाएँ कहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
हाय, ऐसी ना कहो बात के मर जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान है फ़रिश्ता तो नहीं हम
अंगडाई सी लेती है जो ख़ुशबू भरी जुल्फें
ख़ुशबू भरी जुल्फें
गिरती हैं तेरे सुर्ख लबों पर तेरी जुल्फें
लबों पर तेरी जुल्फें
जुल्फें ना तेरी चूम लें
जुल्फें ना तेरी चूम लें ऐ माहजबीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
आ हा हा, आ आ आ आ आ, हं हं हं हं हं
सुन सुन के तेरी बात नशा छाने लगा है
नशा छाने लगा है
खुद अपने भी प्यार तो कुछ आने लगा है
है ऐ ऐ, आने लगा है।
रखना है कहीं पाँव तो
रखना है कहीं पाँव तो रखते हैं कहीं हम
आखिर को एक इंसान है फ़रिश्ता तो नहीं हम
भीगा सा ये रुख-ए-नाज़ ये हल्का सा पसीना
ये हल्का सा पसीना
हाय
ये नाचती आँखों के भंवर दिल का सफीना
दिल का सफीना
सोचा है के अब डूब के
सोचा है के अब डूब के रह जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
हाय, ऐसी ना कहो बात के मर जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
आ हा हा, आ आ आ आ आ, हं हं हं हं हं
हं हं हं हं हं हं हं
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Aise to na dekhiye ke behak jayen-Bheegi Raat 1965
Tuesday, 23 November 2010
मन मेरा तुझको माँगे -पारस १९७१
बिना विवरण के गीत सुन लीजिये एक फिल्म पारस(१९७१) से।
यह गायिका सुमन कल्याणपुर का एक लोकप्रिय गीत है।
गायिका : सुमन कल्याणपुर
गीतकार: इन्दीवर
संगीतकार: कल्याणजी आनंदजी।
गीत के बोल:
मन मेरा तुझको माँगे, दूर दूर तू भागे
मन मेरा तुझको माँगे और दूर दूर तू भागे
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
ओ हो, ओ हो हो
कहो ये प्रीत कैसी, नयी ये रीत कैसी
के भँवरा कली से लजाये
जवानी जले ऐसे, हज़ारों दिये जैसे
पतंगा न क्यूँ पास आये
जलती रही दिल में, मैं पाई तेरी छैयाँ
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
मन मेरा तुझको माँगे दूर दूर तू भागे
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
ओ हो, ओ हो हो
बदल के उजाले हैं तेरे हवाले
सम्भाले बिना कौन तेरे
तू बाँहों में उठा ले
तू सीने में छुपा ले
बहुत ग़म खड़े मुझको घेरे
सहारा लिया तेरा, छुड़ाये तू ही बैयाँ
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
मन मेरा तुझको माँगे, दूर दूर तू भागे
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
यह गायिका सुमन कल्याणपुर का एक लोकप्रिय गीत है।
गायिका : सुमन कल्याणपुर
गीतकार: इन्दीवर
संगीतकार: कल्याणजी आनंदजी।
गीत के बोल:
मन मेरा तुझको माँगे, दूर दूर तू भागे
मन मेरा तुझको माँगे और दूर दूर तू भागे
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
ओ हो, ओ हो हो
कहो ये प्रीत कैसी, नयी ये रीत कैसी
के भँवरा कली से लजाये
जवानी जले ऐसे, हज़ारों दिये जैसे
पतंगा न क्यूँ पास आये
जलती रही दिल में, मैं पाई तेरी छैयाँ
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
मन मेरा तुझको माँगे दूर दूर तू भागे
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
ओ हो, ओ हो हो
बदल के उजाले हैं तेरे हवाले
सम्भाले बिना कौन तेरे
तू बाँहों में उठा ले
तू सीने में छुपा ले
बहुत ग़म खड़े मुझको घेरे
सहारा लिया तेरा, छुड़ाये तू ही बैयाँ
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
मन मेरा तुझको माँगे, दूर दूर तू भागे
मैं ऐसी उलझी सैयाँ
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
तेरा प्यार बना है देखो भूल भुलैया
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