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Wednesday, 20 July 2011

ओ गोरिया रे-नैया १९७९

फिल्म नैया का एक गीत आपको सुनवाया था, अब सुनिए इस फिल्म का
सबसे लोकप्रिय गीत. किसी फिल्म के अलोकप्रिय गीत पहले इसलिए सुनवाए
जाते हैं ताकि आपका अनसुने मधुए गीतों से परिचय हो जाए.

प्रस्तुत गीत येसुदास की आवाज़ में एकल गीत है. नाव में चप्पू चलाते हुए
नायक गीत गा रहा है. गीत संगीत दोनों रवींद्र जैन के हैं. इस गीत में नाविक
नायिका को धन्यवाद दे रहा है जिसकी वजह से उसकी टूटी फूटी नाव सज गयी
है. रवींद्र जैन ने येसुदास को पर्याप्त अवसर दिए गाने के उसी तरह बप्पी लहरी
ने भी येसुदास से कई कर्णप्रिय गीत गवाए. इस मामले में इन दोनों को धन्यवाद
देना ज़रूरी है. येसुदास बेहद प्रतिभाशाली गायक हैं जिनका नाम दक्षिण भारत में
फ़िल्मी हो या कर्नाटक संगीत दोनों क्षेत्र में आदर के साथ लिया जाता है.

रवींद्र जैन की टीम में बांसुरी वादक बेहद सुरीले हैं. इस गीत में भी बांसुरी की
तानें मनमोहक हैं. रवींद्र जैन ने संगीत में अपनी अलग शैली विकसित की और
उनके कुछ गीतों में ध्वनि संयोजन जटिल भी मिलेगा आपको. और वो जटिलता
सलिल चौधरी की याद दिला देती है.

एक अच्छा विडियो गीत प्रकृति के बीच शीर्षासन, व्यायाम, ऊंची इमारतों पर
उठक बैठक किये बिना भी बनाया जा सकता है.




ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव

ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव

नैया तो हमारा घर आँगना
इसी से ही पाना और माँगना
नैया तो हमारा घर आँगना
इसी से ही पाना और माँगना
गोरी ये दुआएं देना ज़रूर
माँझी से नैया हो नहीं दूर

हो गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव

सब को किनारे पहुँचायेगा
माँझी तो किनारा तभी पायेगा
सब को किनारे पहुँचायेगा
माँझी तो किनारा तभी पायेगा
गहरी नदी का ओर न छोर
लहरों से ज़्यादा मनवा में शोर

ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव

अपना तो नित यही काम है
आने जाने वालों को सलाम है
अपना तो नित यही काम है
आने जाने वालों को सलाम है
कभी कभी आना इस नाव में
इक घर तेरा है मेरे गाँव में

ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
.........................................
O goriya re-Naiya 1979

Monday, 11 July 2011

तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें -नैया १९७९

फ़िल्म नैया सन १९७९ की फ़िल्म है. इस फ़िल्म के गीत मुझे अच्छे
लगते हैं, कोई विशेष वजह नहीं, बस यूँ ही . आज इस फ़िल्म से
आपको एक बिलकुल अनसुना सा गीत सुनवाते हैं येसुदास का गाया
हुआ. बोल और संगीत रवीन्द्र जैन के हैं. येसुदास के साथ आवाज़ है
सुरेश वाडकर की.

प्रशांत नंदा के साथ आप ज़रीना वहाब को इस फ़िल्म के गीत में देखेंगे.
बलदेव खोसा उस कलाकार का नाम है जो बाद में परदे पर अवतरित होता
है. दोनों फिल्म में सहनायक हैं. दूल्हे के भेस में हैं दिनेश ठाकुर .

कुछ कलाकारों की उपस्थिति से फिल्म ऑफ-बीट सी लगने लगती है.
दिनेश ठाकुर की उपस्थिति भी ऐसा ही काम करती है जानकार दर्शकों के
लिए.

ज़रीना वहाब शायद फ़िल्म इतिहास की उन चुनिन्दा अभिनेत्रियों में से हैं
जिहोनें बहुत से नायकों के साथ फिल्मों में काम किया जिनमें कुछ अनजान
से चेहरे और उस समय के उभरते नायक भी हैं.

गीत कर्णप्रिय है और इसका फिल्मांकन भी बांध के रखने वाला है.




गीत के बोल :

तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
दिल न दुखा मान भी जा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा

तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
कभी दिल टूटा हो तो जोड़ दें
दिल न दुखा मान भी जा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा

सावन में आवन का न्यौता
भेजा है मनभावन को
न्यौता भेजा है मनभावन को
हो ओ ओ हमने तो एक देव को सौंपा
तेरे रूप के चन्दन को
गोरी तेरे रूप के चन्दन को
हैरान सा सजन तेरा

गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा

एक माझी के घर से तू गोरी
राजमहल में जाएगी
जाएगी, राजमहल में जाएगी
हो ओ ओ जो सुख हमने सपने में देखे
वो सारे सुख पायेगी
पायेगी ,वो सारे सुख पायेगी
देना नहीं हमको भुला

गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा

मैं दूंगा तुझे कजरा बिंदिया
मैं रचा दूंगा मेहँदी महावर
खुद को बंधक रख के लूँगा
सोना करूंगा वो तुझपे निछावर
हाथों की चूड़ियाँ
मैं दूंगा
पाँव के बिछुआ
मैं दूंगा
क्या चुनरी साडी
मैं दूंगा
मैं दूंगा, मैं दूंगा, मैं दूंगा, हे
मिल के तुझे देंगे सजा

गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा

तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
कभी दिल टूटा हो तो जोड़ दें
हमरा कहा मान भी जा
गीता रानी गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
....................................
Tera kuchh khoya ho to-Naiya 1979

Saturday, 2 July 2011

आज से पहले आज से ज़्यादा-चितचोर १९७५

७० के दशक में मारधाड़ और ढिशुम ढिशुम वाली फ़िल्में ज्यादा बनना
शुरू हो गयीं। इनके साथ साथ कोमेडी, हलकी फुलकी साफ़ सुथरी और
पारिवारिक फ़िल्में और कला फ़िल्में भी बनती रहीं। कुछ फ़िल्में बेहद
सफल रहीं। शोले के दौर में ही एक फिल्म आई-चितचोर जिसने धूम
मचाई और जगह जगह सिल्वर जुबली मनाई। इसी फिल्म से एक काफ़ी
लोकप्रिय गीत आज सुनवाते हैं आपको जो येसुदास की आवाज़ में है। गीत
में आपको अमोल पालेकर, विजयेन्द्र घाटगे और ज़रीना वहाब एक बाल
कलाकार मास्टर राजू के साथ दिखाई देंगे।




गीत के बोल:

आज से पहले, आज से ज़्यादा,
खुशी आज तक नहीं मिली।
इतनी सुहानी, ऐसी मीठी,
घड़ी आज तक नहीं मिली।

इसको संयोग कहें या किस्मत का लेखा,
हम जो अचानक मिले हैं।
मनचाहे साथी पाकर हम सब के चेहरे,
देखो तो कैसे खिले हैं।
इन तकदीरों को जोड़ दे ऐसी,
कड़ी आज तक नहीं मिली।

सपना हो जाए वो पूरा, जो हमने देखा,
ये मेरे दिल की दुआ है।
ये पल जो बीत रहे हैं, उसके नशे में,
दिल मेरा गाने लगा है।
हम इसी खुशी को ढ़ूँढ़ रहे थे,
यही आज तक नहीं मिली
..............................
Aaj se pehle aaj se Zyada-Chitchor 1975

Sunday, 23 January 2011

अल्लाह मेरी तौबा-दो जासूस १९७५

अरुणा ईरानी ने भी अपने जलवे खूब बिखेरे हिंदी फिल्मों में।
नृत्य कला में निपुण अरुणा पर फिल्माया गया एक गीत देखते
हैं फिल्म दो जासूस से। सन १९७५ की फिल्म दो जासूस में कुछ
अच्छे गीत हैं और काफी बजे हैं। गीत आशा भोंसले का गाया
हुआ है और जैसा की अधिकतर रवीन्द्र जैन के संगीत से सजी
फिल्मों में होता है-गीत भी उन्हीं का लिखा हुआ है। गीत में आपको
दो जासूसों की भूमिका में राज कपूर और राजेंद्र कुमार दिखाई देंगे
जो फिलहाल इस गीत में दर्शक बने हुए हैं। हर अंतरे के बाद नर्तकी
अपने वस्त्र बदल लेती है।



गीत के बोल:

अल्लाह मेरी तौबा निगाहें ना मिलूंगी
अल्लाह मेरी तौबा मैं तीर नहीं खाऊँगी
निगाहें ना मिलूंगी, मैं तीर नहीं खाऊँगी
अल्लाह मेरी तौबा निगाहें ना मिलूंगी
अल्लाह मेरी तौबा मैं तीर नहीं खाऊँगी

मैं जो नहाने गई नदिया किनारे
मैं जो नहाने गई नदिया किनारे
आ गए लोग वहां गाँव के सारे
आ गए लोग वहां सारे के सारे
तौबा मेरी तौबा
तौबा मेरी तौबा नदी पे नहीं जाऊंगी
तौबा मेरी तौबा नदी पे नहीं जाऊंगी
नदी पे नहीं जाऊंगी मैं घर पे नहऊंगी

अल्लाह मेरी तौबा निगाहें ना मिलूंगी

बीच बाज़ार हल्वैये ने छेड़ा
है दिया
बीच बाज़ार हल्वैये ने छेड़ा
देने लगा हाय मुझे मथुरा का पैदा
देने लगा वो तो मुझे मथुरा का पेढा
तौबा मेरी तौबा
तौबा मेरी तौबा बाज़ार नहीं जाऊंगी
तौबा मेरी तौबा बाज़ार नहीं जाऊंगी
बाज़ार नहीं जाऊंगी मैं पेढा नहीं खाऊँगी

अल्लाह मेरी तौबा निगाहें ना मिलाऊँगी

बाली उम्र में जो हो गई शादी
हाय मोरी, बाली उम्र में जो हो गई शादी
कैसे कैसे सैयां ने मुझे उल्फत सिखा दी
कैसे मोहे रसिया ने उल्फत सिखा दी
तौबा तौबा तौबा
तौबा मेरी तौबा वो बात ना बताऊंगी
तौबा मेरी तौबा वो बात ना बताऊंगी
बात ना बताऊंगी शर्म से मर जाऊंगी
मैं पानी हो जाऊंगी
जी आज ना बताऊंगी
मैं कल फिर आऊंगी

Sunday, 16 January 2011

एक दिन तुम-अंखियों के झरोखों से-१९७८

कुछ कुछ टकीला-शकीला के सॉफ्ट म्यूज़िक की याद दिलाता
ये गीत आकर्षक धुन में बंधा हुआ है। युवा प्रेम-आलाप पर बनी
साफ़ सुथरी फिल्म 'अंखियों के झरोखों से' फिल्म से लिया गया
ये गीत आज भी सुनने में कानों को सुकून देता है। नायक सचिन
और रंजीता पर फिल्माए गए इस गीत को लिखा और स्वरबद्ध
किया है रवीन्द्र जैन ने। रवीन्द्र जैन के इस गीत को सुनने के बाद
शायद उनकी versatility पर प्रश्नचिन्ह लगाने वालों को पुनः
विचार अवश्य करना चाहिए। प्रेमी दुनिया से किस कदर बेखबर
हो जाते हैं उसका अनूठा फिल्मांकन किया गया है इस गीत में।



गीत के बोल:



एक दिन तुम बहुत बड़े बनोगे एक दिन
चाँद से चमक उठोगे एक दिन
Will you forget me then?
How I can
Tell me, how I can


एक दिन तुम बहुत बड़े बनोगे एक दिन
चाँद से चमक उठोगे एक दिन
Will you forget me then?
How I can
Tell me, how I कैन

मान लो कहीं की शहजादी
बैठी हो तुम्हारे लिए ऑंखें बिछाए
और उसे जिद हो के वो शादी
किसी से ना करेगी तुम्हारे सिवा
Will you forget me then?

Yes, I can
If only you can

एक दिन ले गया तुम्हें जो कोई अजनबी
गैर की हो गई जो ये ज़िन्दगी
Will you forget me then?

Gentleman, oh no gentleman

सांस सांस में तुम्हारी ख़ुशबू
किस तरह जियूँगा बोलो तुमको भुला के
दिल पे जा के कर चुकी हो जादू
जानती हो पूछती हो फिर भी सता के
Will you forget me then?

Gentleman, I will gentleman

ला ला ला, ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला, ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला
..................................
Ek din-Ankhiyon ke jharokhon se 1978

Thursday, 9 December 2010

हर हसीं चीज़ का मैं तलबगार-सौदागर १९७४

संगीतकार रवीन्द्र जैन के हिंदी फिल्म संगीत क्षेत्र में
पदार्पण वाली फिल्म सौदागर(१९७३) से एक गीत और
सुनिए।

अभी हमने कुछ पोस्ट पहले पत्ते वाली चड्डी का जिक्र
किया था। हिंदी फिल्मों का हीरो भी पहना करता है
इसको। अमिताभ को पहले आप पट्टे वाली चड्डी
पहने देखेंगे फिर लुंगी पहने। निर्देशक ने छोटी छोटी
बातों का भी ध्यान रखा है। इतना ज्यादा रखा है कि
बच्चे के पास पहुँचते पहुँचते चड्डी की डिज़ाइन ही
बदल गई।

गुड बनाने का सामान इकठ्ठा किया जा रहा है
कह्जूर का पेड़ से। रस को इकठ्ठा करके पकाया
जायेगा। अब गुड बनाने वाला कोई ऐसा वैसा तो
है नहीं, हिंदी फिल्मों का महानायक है सो वो थक
हारने के बावजूद एक गाना गायेगा और वो भी
किशोर कुमार की आवाज़ में। संगीत देने के अलावा
गीत रचना भी रवीन्द्र जैन की है।




गीत के बोल:


हर हसीं चीज़ का मैं तलबगार हूँ
हर हसीं चीज़ का मैं तलबगार हूँ

रस का फूलों का गीतों का बीमार हूँ
रस का फूलों का गीतों का बीमार हूँ

हर हसीं चीज़ का मैं तलबगार हूँ

सारा गाँव मुझे रसिया कहे
सारा गाँव मुझे रसिया कहे
जो भी देखे मन बसिया कहे
हाय रे जो भी देखे मन बसिया कहे

सब की नज़रों का एक मैं ही दीदार हूँ
रस का फूलों का गीतों का बीमार हूँ

हर हसीं चीज़ का मैं तलबगार हूँ

कोई कहे भंवरा मुझे
कोई दीवाना
भेद मेरे मन का मगर
किसी से ना जाना
कोई कहे भंवरा मुझे
कोई दीवाना
भेद मेरे मन का मगर
किसी से ना जाना

रोना मैंने कभी सीखा नहीं
रोना मैंने कभी सीखा नहीं

चखा जीवन में फल फीका नहीं
हाय रे हाय, चखा जीवन में फल फीका नहीं
मैं तो हर मोल देने को तैयार हूँ
रस का फूलों फूलों का, गीतों गीतों का
बीमार हूँ

हर हसीं चीज़ का मैं तलबगार हूँ
..............................................
Har Haseen Cheez Ka Main Talabgaar Hoon-Saudagar 1973

Friday, 3 December 2010

गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा-चितचोर १९७६

७० के दशक में सन ७५ की ढिशुम ढिशुम वाली शोले
के बाद पब्लिक ने बहुत से ढिच्क्युन ढिच्क्युन आवाजों
वाली मार धाड़ भरी फ़िल्में देखी। उसी के साथ साथ
कुछ साफ़ सुथरी और पारिवारिक घरेलू किस्म की फिल्में
भी बनती रहीं। सन १९७६ में आई और गाँव की प्रष्ठभूमि
पर बनी चितचोर भी ऐसी ही एक फिल्म है। सीधी साधी
कहानी और कर्णप्रिय गीतों वाली इस फिल्म को जनता
ने बेहद पसंद किया। आइये इस फिल्म का लोकप्रिय गीत
सुनें जो येसुदास का गाया हुआ है। बोल और संगीत दोनों
रवीन्द्र जैन के हैं। गीत से एक नया शब्द सीखने को मिला
-चन्द्रमधु ।



गीत के बोल:

गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा
मैं तो गया मारा आ के यहाँ रे
उस पर रूप तेरा सादा
चन्द्रमधु आधा आधा जवाँ रे

गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा
मैं तो गया मारा आ के यहाँ रे
आ के यहाँ रे

जी करता है मोर कि पैरों में
पायलिया पहना दूँ
कुहू कुहू गाति कोयलिया को
फूलों क गहना दूँ

यहीं घर अपना बनाने को, पंछी करे देखो
तिनके जमा रे तिनके जमा रे

गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा
मैं तो गया मारा आ के यहाँ रे
आके यहाँ रे

रंग बिरंगे फूल खिले हैं
लोग भी फूलों जैसे
आ जाये इक बार यहाँ जो
जायेगा फिर कैसे
झर झर झरते हुए झरने, मन को लगे हरने
ऐसा कहाँ रे ऐसा कहाँ रे

उसपर रूप तेरा सादा
चन्द्रमधु आधा, आधा जवाँ रे
आधा जवाँ रे

परदेसी अन्जान को ऐसे
कोई नहीं अपनाता
तुम लोगों से जुड़ गया जैसे
जनम जनम का नाता
अपने धुन में मगन डोले, लोग यहाँ बोले
दिल की ज़बाँ रे दिल की ज़बाँ रे

गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा
मैं तो गया मारा आ के यहाँ रे

उसपर रूप तेरा सादा
चन्द्रमधु आधा
आधा जवाँ रे
 
 
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