गुमनाम फिल्मों में इतने नायब रत्न छुपे पढ़े हैं कि खोजने लग जाओ तो
थाह ही नहीं मिले। ऐसा ही एक मधुर गीत आपको सुनवाते हैं आज।
जुलाई ३१ तारीख को रफ़ी की पुण्यतिथि थी। रफ़ी ने जितनी तन्मयता से
भजन गाये उतने ही डूब के रोमांटिक गीत गाये। एक सीधे सरल स्वभाव
वाला व्यक्ति कैसे चमत्कार कर सकता है इस गीत के माध्यम से महसूस
कर लीजिए। एक कम प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी-लाला असर सत्तार ने इस
गीत की धुन बनाई है। रफ़ी के सरल व्यव्हार के चलते कई गुमनाम और
संघर्षरत संगीतकारों को भी बेहतरीन नगमे बनाने का मौका मिल गया।
दारा सिंह और रंधावा नाम के दो प्रसिद्ध पहलवान हुए हैं। दोनों इस फिल्म में
मौजूद हैं। फिल्म में दो नायिकाएं हैं-अरुणा ईरानी और गीतांजलि। अब चूंकि
इस गीत के कलाकार दारा सिंह और अरुणा ईरानी जैसे नहीं लग रहे अतः हम
मान लेते हैं दूसरे नायक और नायिका पर ये गीत फिल्माया गया है।
मैं तो तेरे हसीन ख्यालों में खो गया
मैं तो तेरे हसीन ख्यालों में खो गया
दुनिये ये कह रही है के, दीवाना हो गया
मैं तो तेरे हसीन ख्यालों में खो गया
ये हुस्न तेरा खिलता हुआ सा गुलाब है
ये हुस्न तेरा खिलता हुआ सा गुलाब है
ऑंखें तेरी हसीन कमाल का शबाब है
तू लाजवाब है
वो खुशनसीब है तेरी महफ़िल में जो गया
मैं तो तेरे हसीन ख्यालों में खो गया
कोई न जिसको समझा तू एक ऐसा राग है
कोई न जिसको समझा तू एक ऐसा राग है
मुझको भी आज अपने मुक़द्दर पे नाज़ है
तू दिल नवाज़ है
आशिक हूँ तेरी जुल्फों के साये में खो गया
मैं तो तेरे हसीन ख्यालों में खो गया
दामन छुडा के जाओ न इतने गुरूर से
दामन छुडा के जाओ न इतने गुरूर से
क्या है कसूर पूछते हैं हम हुज़ूर से
देखो न दूर से
कर दो खता मुआफ जो होना था हो गया
मैं तो तेरे हसीन ख्यालों में खो गया
मैं तो तेरे हसीन ख्यालों में खो गया
दुनिये ये कह रही है के, दीवाना हो गया
मैं तो तेरे हसीन ख्यालों में खो गया
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Main to tere haseen khayalon mein-Sangram 1965
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Tuesday, 2 August 2011
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