आपको फिल्म बाबू(राजेश खन्ना वाली) का एक गीत पहले
सुनवाया था। अब सुनिए रति अग्निहोत्री के ऊपर फिल्माया गया
लता मंगेशकर का गाया एक गीत। फिल्म रिलीज़ के वक़्त और
उसके २-३ साल बाद तक ये गीत बहुत बजा था। गाँव और गाँव
जैसे शहरों के मेले में नौटंकी में इस गीत के ऊपर स्कूल के बच्चों
वाली पी. टी. कसरत जैसी मुद्राओं में नौटंकी की काबिल डांसर्स
नृत्य किया करती थीं। वैसे इस गीत में नायिका जो नृत्य कर रही
है वो थोड़ा ही बेहतर है। गीत की ताल और गीत के फिल्मांकन
में ज्यादा तादतम्य नहीं है लेकिन बाकी मसाला काफी है गीत
में आपको बहलाने के लिए। ढप ढप और टपर टपर की ताल
राजेश रोशन के संगीत की विशेषता है। दीपक पाराशर नाम
के कलाकार रति अग्निहोत्री के साथ आपको परदे पर दिखाई
देंगे। नृत्य देख के मुझे कुछ भ्रष्ट भाषा के शब्द याद आ जाते हैं
- उच्कंती, कूदंती, बल्खंती और नाचंती।
गीत मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा हुआ है इसलिए आपको इसके
बोल सुहाने लगेंगे। मजरूह के ज़माने तक दिल में हलचल ही मचा
करती थी आजकल के दौर में होने लगी है- सन सनन साँय साँय।
गीत के बोल:
ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल
ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल
कहे दरिया का पानी कल कल
तुझे आस मिलन की हर पल
ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल
रुक ना सकूं मैं दौड़ी आऊँ
फिर कुछ सोच के मैं घबराऊँ
रुक ना सकूं मैं दौड़ी आऊँ
फिर कुछ सोच के मैं घबराऊँ
ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल
तूने कैसा जादू किया है
बिन डोर के मुझे बांध दिया है
तूने कैसा जादू किया है
बिन डोर के मुझे बांध दिया है
ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल
कठपुतली सी नाच रही हूँ
कैसे कहूं तुझे ढूंढ रही हूँ
कठपुतली सी नाच रही हूँ
कैसे कहूं तुझे ढूंढ रही हूँ
ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल
कहे दरिया का पानी कल कल
तुझे आस मिलन की हर पल
ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल
...............................
Ae hawa mere sang sang chal-Babu 1985
Showing posts with label Deepak Parashar. Show all posts
Showing posts with label Deepak Parashar. Show all posts
Monday, 13 June 2011
Monday, 16 May 2011
मैं भी हूँ यहाँ - कौन कैसे १९८३
आपको एक गीत सुनवाया था पहले फिल्म स्वयंवर का।
फ़िल्मी गीत कभी कभी कुछ ध्वनि विशेष की वजह
से कुछ जीव जंतुओं की याद ताज़ा करवा देते हैं।
आइये एक और ऐसा ही गीत और सुनवाया जाये। आपने
कुत्ते के छोटे पिल्ले को "काईं काएं क्यों क्यों" की ध्वनियाँ
अवश्य निकलते सुना होगा, विशेषकर तब, जब वे किसी
परेशानी में होते हैं या जब बच्चे उनको पत्थर मार दिया करते हैं।
प्रस्तुत गीत में "आ", "ऊ" की ध्वनियों पे गौर करें तो
आपको कुछ समानता सुनाई पड़ेगी। बहरहाल गीत कर्णप्रिय
है और इस पर किया जा रहा नृत्य भी काफी उत्तेजक है।
फिल्म का नाम है "कौन कैसे", जिसमे परेशान से दिखाई
देने वाले नायक हैं दीपक पराशर और नाचने वाली नायिका
का नाम है अनीता राज। गुलशन बावरा के लिखे गीत की तर्ज़
बनाई है राहुल देव बर्मन ने।
गीत के बोल:
मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
ऊ ऊ
मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
आ आ आ
बात करो जो पास आ के
निगाहों को मिला के
तो फिर कुछ मज़ा है
बात करो जो पास आ के
निगाहों को मिला के
तो फिर कुछ मज़ा है
दोस्त रहे जो यूँ अकेले
ना खेल कोई खेले
तो जीने में क्या है
जुल्फों के साये में
आ लूट ले मस्तियाँ
आ आ आ
मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
ऊ ऊ
मैं भी हूँ ला ला ला ला ला ला
खूब निभेगी तेरी मेरी
तो फिर कैसी देरी
मुझे आजमा ले
ला ला ला ला ला ला ला ला ला
खूब निभेगी तेरी मेरी
तो फिर कैसी देरी
मुझे आजमा ले
जीत उसी की हुई यारा
के जो भी दिल हारा
ये बाज़ी लगा ले
तीर-ए-नज़र यूँ चला के
चला है कहाँ
आ आओ
मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
.......................................................................
Main bhi hoon yahan-Kaun Kaise 1983
फ़िल्मी गीत कभी कभी कुछ ध्वनि विशेष की वजह
से कुछ जीव जंतुओं की याद ताज़ा करवा देते हैं।
आइये एक और ऐसा ही गीत और सुनवाया जाये। आपने
कुत्ते के छोटे पिल्ले को "काईं काएं क्यों क्यों" की ध्वनियाँ
अवश्य निकलते सुना होगा, विशेषकर तब, जब वे किसी
परेशानी में होते हैं या जब बच्चे उनको पत्थर मार दिया करते हैं।
प्रस्तुत गीत में "आ", "ऊ" की ध्वनियों पे गौर करें तो
आपको कुछ समानता सुनाई पड़ेगी। बहरहाल गीत कर्णप्रिय
है और इस पर किया जा रहा नृत्य भी काफी उत्तेजक है।
फिल्म का नाम है "कौन कैसे", जिसमे परेशान से दिखाई
देने वाले नायक हैं दीपक पराशर और नाचने वाली नायिका
का नाम है अनीता राज। गुलशन बावरा के लिखे गीत की तर्ज़
बनाई है राहुल देव बर्मन ने।
गीत के बोल:
मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
ऊ ऊ
मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
आ आ आ
बात करो जो पास आ के
निगाहों को मिला के
तो फिर कुछ मज़ा है
बात करो जो पास आ के
निगाहों को मिला के
तो फिर कुछ मज़ा है
दोस्त रहे जो यूँ अकेले
ना खेल कोई खेले
तो जीने में क्या है
जुल्फों के साये में
आ लूट ले मस्तियाँ
आ आ आ
मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
ऊ ऊ
मैं भी हूँ ला ला ला ला ला ला
खूब निभेगी तेरी मेरी
तो फिर कैसी देरी
मुझे आजमा ले
ला ला ला ला ला ला ला ला ला
खूब निभेगी तेरी मेरी
तो फिर कैसी देरी
मुझे आजमा ले
जीत उसी की हुई यारा
के जो भी दिल हारा
ये बाज़ी लगा ले
तीर-ए-नज़र यूँ चला के
चला है कहाँ
आ आओ
मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
.......................................................................
Main bhi hoon yahan-Kaun Kaise 1983
Subscribe to:
Posts (Atom)


