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Saturday, 17 December 2011

आपकी याद आती रही-गमन १९८०

देसी संगीत को मुख्यतः पांच श्रेणियों में बांटा जा सकता है- गौरवशाली, समृद्ध,
अनगढ़, अल्हड और फूहड़. ये श्रेणियाँ मुझे इतने सालों के दौरान हुए अनुभवों के
आधार पर दिमाग में उपजी हैं. इन अनुभवों को बढाने में कई संगीत प्रेमियों,
संगीत समीक्षाकारों और संगीतकारों का योगदान रहा है. संगीतकार जयदेव समृद्ध
देसी संगीत के प्रतिनिधि हैं. उनके संगीत में भारतीय उपमहाद्वीप की मिटटी और
संस्कृति की खुशबू हमेशा आती रही. उनके योगदान को भुलाया जाना संगीत रसिकों
के लिए असंभव सा है.

उनके संगीत निर्देशन में सन १९८० में एक अल्बम आया था-फिल्म गमन के गीतों
का. गीत किसने गाया ये मायने बिलकुल भी नहीं रखता था श्रोताओं के लिए क्यूंकि
अधिकांश को ये नहीं मालूम था की इसे छाया गांगुली नामक गायिका ने गाया है. ये
शायद अब भी कईयों को नहीं मालूम है. एक थोडा लीक से हट कर अच्छा गीत बनाया
था जयदेव ने जो ख़ासा लोकप्रिय हुआ था. महानगर में महत्वाकांक्षी युवकों की दो वक्त
की रोटी के लिए जारी जद्दो-जहद देखने लायक थी इस फिल्म में.

मखदूम मोइउद्दीन की रचना को स्वर दिया है छाया गांगुली ने जिन्होंने हिंदी फिल्मों में
बहुत ही कम गीत गाये हैं. गीत फिल्माया गया है हिंदी सिनेमा की सबसे प्रतिभाशाली
अभिनेत्रियों में से एक स्मिता पाटिल पर.

गौर तलब है जयदेव को इस फिल्म के संगीत के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान
किया गया था और प्रस्तुत गीत के लिए छाया गांगुली को भी पुरस्कर से नवाज़ा गया
था.






गीत के बोल:

आपकी याद आती रही रात भर
चश्मे-नम मुस्कुराती रही रात भर
आपकी याद आती रही

रात भर दर्द की शाम जलती रही
रात भर दर्द की शाम जलती रही
गम की लौ थरथराती रही रात भर
गम की लौ थरथराती रही रात भर

आपकी याद आती रही

बांसुरी की सुरीली सुहानी सदा
बांसुरी की सुरीली सुहानी सदा
याद बन बनके आती रही रात भर
याद बन बनके आती रही रात भर

आपकी याद आती रही

याद की चांदनी दिल में उतरती रही
याद की चांदनी दिल में उतरती रही
चांदनी डगमगाती रही रात भर
चांदनी डगमगाती रही रात भर

आपकी याद आती रही

कोई दीवाना गलियों में फिरता रहा
कोई दीवाना गलियों में फिरता रहा
कोई आवाज़ आती रही रात भर
कोई आवाज़ आती रही रात भर

आपकी याद आती रही
........................................
Aapki yaad aati rahi-Gaman 1980

Thursday, 16 December 2010

जनम जनम का साथ है हमारा तुम्हारा -भीगी पलकें १९८२

कुछ फिल्मों ने प्रेमियों के मन पर काफी प्रभाव डाला
उनमे से एक है-भीगी पलकें जो सन १९८२ में आई थी।
राज बब्बर और स्मिता पाटिल ने इसमें अभिनय किया है
जो बाद में एक दूसरे के जीवन साथी भी बन गए। ये गीत
मानो उन्हीं के लिए लिखा सा प्रतीत होता है। ये है लता और
रफ़ी के गाये युगल गीतों में से आखिरी एक गीत। इसकी
रेकॉर्डिंग सन १९८० या उससे पहले हो गई होगी । फिल्म
का नाम है-भीगी पलकें जिसमे कलाकारों की पलकें कम
भीगी दिखीं और दर्शकों कि ज्यादा और ये शायद दर्शकों के
लिए ही ऐसा नाम रखा गया होगा। फिल्म को महिला दर्शकों
ने काफी पसंद किया।

गीत की बात की जाए- गीत को सदाबहार गीत का दर्ज़ा प्राप्त
है। गीत लिखा है एम्. जी. हशमत ने और धुन बनाई है जोड़ी
जुगल किशोर-तिलक राज ने। इस फिल्म में स्मिता पाटिल का
अभिनय बेजोड़ है और राज बब्बर उस लेवल पर आने के लिए
संघर्षरत ही दिखे हैं। राज बब्बर समर्थ कलाकार हैं और अपने
कई समकालीनों से बेहतर मगर अभिव्यक्ति के मामले में
स्मिता उनसे कई कदम आगे हैं। फिल्म में अगर केवल एक
नाम स्मिता पाटिल का हो तो बस यही बहाना बहुत है फिल्म
देखने का।



गीत के बोल:

जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा

जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा

जब से घूमे धरती, सूरज चाँद सितारे
तब से मेरी निगाहें, समझे तेरे इशारे
रूप बदल कर साजन मैंने, फिर से तुम्हे पुकारा

जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा

प्यार के पंख लगा के, दूर कहीं उड़ जायें
जहाँ हवाएं गम की, हम तक पहुच ना पायें
खुशियों की ख़ुशबू से महके, घर संसार हमारा

जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा
...........................................
Janam Janam Ka Sath Hai Hamara Tumhara-Bheegi Palkein 1982

Saturday, 20 November 2010

शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया-आखिर क्यों १९८५

'क' शब्द से राकेश रोशन का पुराना नाता लगता है ।
इस फिल्म के नाम में भी एक शब्द है जो 'क' से
शुरू होता है। उनके ससुर जे. ओमप्रकाश को 'अ'
अक्षर से विशेष लगाव था। इस फिल्म के निर्देशक
जे. ओमप्रकाश ही हैं। ये एक सफल फिल्म है। इसके
गीत भी फुरसत और तबियत से तैयार किये गए हैं ।
गीत के बोल, धुन और स्मिता का अभिनय सभी कुछ
लाजवाब है। स्मिता पाटिल ने भारतीय नारी की छबि
खूबसूरत ढंग से निखारी थी हिंदी फिल्मों में। "कोई जब
तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे" , "फूल तुम्हे भेजा है ख़त में"
वाले इन्दीवर साहब के बोल हैं इसमें और सुर दिए हैं
स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर ने।





गीत के बोल :

आ आ आ, आ आ आ, आ आ
हूँ ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं

शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
अबहूँ न आये मोरे श्याम संवरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
अबहूँ न आये मोरे श्याम संवरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया

हो ओ ओ ओ
हा आ आ आ

अनछुए होंठ मेरे खोये खोये नैन मेरे
गूंजते हैं पर्णों में मधुर मधुर बोल तेरे
मेरे साथ बैन करे, हो
मेरे साथ बैन करे मोरी अटरिया

शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया

सोलह बरस बीते गिन गिन रतियाँ
पी से मिलन चली संग की सखियाँ
अब तो ले लो पिया, हो
अब तो ले लो पिया आ के खबरिया

शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया

प् नि सा रे नि सा रे नि सा रे नि ध प्
आ आ आ आ आ आ आ आ आ

शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
अबहूँ न आये मोरे श्याम संवरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
शाम हुई चढ़ आई रे बदरिया
 
 
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