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Tuesday, 12 April 2011

देखो ये कौन आया-सवेरे वाली गाडी १९८६

सन १९८६ के कम गाने इस ब्लॉग पर शामिल हुए हैं अभी तक।
जो गीत मुझे पसंद हैं सन ८६ के उनमे से एक और प्रस्तुत है
आज आपके लिए। फिल्म भले ना चली हो, इसके गाने मुझे
ज़रूर हौंट करते रहते हैं। ये एक युगल गीत है सुरेश वाडकर
और आशा भोंसले की आवाज़ में। मेरे ख्याल से आर. डी. बर्मन
ने सुरेश वाडकर की आवाज़ का और संगीतकारों की तुलना में
बेहतर इस्तेमाल किया है। सनी देवल और पूनम ढिल्लों पर
फिल्माए गाये इस गीत में एक आवाज़ और भी है जो गीत के
शुरू में है जिसके बारे में मैं ये सुनिश्चित नहीं कर पाया की ये
एस. जानकी की आवाज़ है या चित्रा की। दोनों ही दक्षिण भारत
की नामचीन गायिकाएं हैं। उल्लेखनीय है कि इस फिल्म में इन
दोनों गायिकाओं ने एक भी गीत नहीं गाया है।

अगर ये फिल्म राजस्थानी पृष्ठभूमि पर बनी है तो यही बात खटकने
वाली है कि इसमें दक्षिण भारतीय सी सुनाई पढने वाली आवाजों
का प्रयोग पार्श्व में क्यूँ किया गया है। हालाँकि ये शिकायत आगे
सुनाई देने वाले मधुर गीत के बाद लगभग ख़त्म सी हो जाती है।
गाने में तोते का होना ज़रूरी था या नहीं ये आप निश्चित कीजिये ।





गीत के बोल:

देखो ये कौन आया
देखो ये कौन आया

मुझको उड़ा लाया
मुझको उड़ा लाया

देखो ये कौन आया
देखो ये कौन आया
मेरी सदा पे भूल के रास्ता
ऐ दिल ये कौन आया

मुझको उड़ा लाया
मुझको उड़ा लाया
किसकी सदा पे झोंका हवा का
मुझको उड़ा लाया

देखो ये कौन आया
हा आ आ आ आ आ
मुझको उड़ा लाया

मेरे वीराने को किसने सजा दिया
हाँ, मेरे वीराने को किसने सजा दिया
रौनक ज़रा देखो
ओ,रौनक ज़रा देखो

कुछ तो नहीं है
क्या जाने तुमको कैसा नशा छाया

देखो ये कौन आया
देखो ये कौन आया

बातें बनाते हो क्यूँ सच्चे झूठे
हाँ, बातें बनाते हो क्यूँ सच्चे झूठे
सपने दिखाते हो
सपने दिखाते हो

हो, फिर से तो कहना
मैंने सुना नहीं क्या तुमने फ़रमाया

मुझको उड़ा लाया
हा आ आ आ आ आ
मुझको उड़ा लाया

आ मेरी बाँहों में बैठा हूँ कबसे
हाँ, आ मेरी बाँहों में बैठा हूँ कबसे
मैं तेरी राहों में
हो मैं तेरी राहों में
जलते हुए भी जबसे पड़ा है
दिल पे तेरा साया

देखो ये कौन आया
ओ,देखो ये कौन आया

मेरी सदा पे भूल के रास्ता
ऐ दिल ये कौन आया

मुझको उड़ा लाया
हो ओ ओ ओ ओ ओ
मुझको उड़ा लाया
किसकी सदा पे झोंका हवा का
मुझको उड़ा लाया

ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला

Thursday, 3 February 2011

डुगडुगी बाज उठी-ये तो कमाल हो गया १९८२

इस गीत में नायक मदारी बन कर तमाशा दिखा रहा है।
फिल्म उद्योग में निर्देशक असली मदारी होता है जो अपने
बंदरों अर्थात पात्रों को जैसा उसका जी चाहे नचाता है।

फिल्म उद्योग में भी एक भेडचाल होती है। जैसे ही कोई
नए हीरो की फिल्म हिट हो गई उसे अपनी फिल्म में लेने वालों
की कतार लग जाती है। इस फिल्म की कहानी में नायक दोहरी
भूमिकाओं में है। फिल्म एक दूजे के लिए की अपार सफलता
ने कमल हासन के लिए हिंदी फिल्मों के दरवाजे खोल दिए।
कमल हासन एक उम्दा कलाकार और बेहद कुशल नर्तक हैं।
पहले वो केवल एक कुशल नर्तक थे लेकिन समय के साथ साथ
अभिनय में उन्होंने कई मुकाम हासिल कर लिए। तमिल और
तेलुगु सिनेमा में स्थापित होने के बाद ही वे हिंदी फिल्मों में दिखाई
दिए।

ये फिल्म बहुसितारा होने के बावजूद चली नहीं। कथानक कुछ
लचर किस्म का सा है। वैसे आकर्षण के लिए इसमें एक विलायती
नायिका को भी मौका दिया गया था अभिनय का। इन सबके बावजूद
केवल इसके गाने सुनाई दिए और धीरे धीरे जनता, सिवाए कमल
हासन और पूनम ढिल्लों के प्रशंसकों के, फिल्म को भूल गई।

अब साहब हमने तो इसे दो बार देखे है-एक बार सिनेमा हाल में
और एक बार किसी टीवी चैनल पर, तो हम तो इसको चाह कर
भी नहीं भुला पाते ना जी। अब फिल्म याद है तो गाने तो याद होंगे
ही। आपको इस फिल्म का एक गीत सुनवाते हैं आज।

गीत में आपको यादों की बारात फेम विजय अरोड़ा भी नज़र आयेंगे।
विजय अरोड़ा फिल्म और टेलिविज़न संस्थान पुणे से स्वर्ण पदक
प्राप्त कलाकार हैं। आपने पाठ्यक्रम में कितने भी झंडे गाड़े हों, आपकी
किस्मत में गोल्ड मेडल नहीं छपा हो तो आप एक सीमित चढ़ाई ही
जीवन में चढ़ पाते हैं ।

उल्लेखीय है कि जिस शख्स ने ये विडियो अपलोड किया है यू ट्यूब
पर, वो शायद विलायती अभिनेत्री ऐन का भाई है , जैसा कि उसने
गीत के विवरण में लिखा है। इसको कहते है सही मायने में देसी नौटंकी
का ग्लोबेलाईजेशन । विलायती नायिका को बोलिवुडीये लटके झटके दिखाते
देखना अनूठा अनुभव है।



गीत के बोल :

गीत के बोलों के लिए चटका लगायें।

Wednesday, 24 November 2010

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे-आपस की बात १९८१

अनजान की बात छिड़ी है तो उनका लिखा हुआ एक और गीत
सुनें जो कर्णप्रिय है और ८० के दशक से है। ये राज बब्बर पर
फिल्माया गया है। राज बब्बर उन दिनों नवागंतुकों की कतार
में शामिल थे। बाद में उन्होंने अपना अलग मुकाम बना लिया।

फ़िल्में इतनी बन चुकी हैं की किस किस का नाम और विवरण
याद रखा जाए। ये समस्या लगभग सभी संगीत प्रेमियों को आती
है। मैं तो ये भी भूल चुका था कि इस फिल्म में राज बब्बर के साथ
पूनम ढिल्लों हैं। फिल्म का नाम है आपस की बात। इसमें संगीत
अन्नू मलिक का है, चौंक गए ना। जी हाँ अन्नू मलिक स्वयं अपने
संगीत पर नज़र डालते होंगे तो चौंक जाते होंगे। उन्होंने हमेशा
समय समय पर श्रोताओं को चकित किया है। उसकी एक वजह
साफ़ है-जड़ें मजबूत हैं। सरदार मलिक पुत्र होने का कुछ तो फ़ायदा
होना चाहिए ना। ये बात और है कि उन्होंने कई ऐसी ऊंची मंजिलें तय
कर ली है आज, जिसके बारे में उनके पिता शायद सपने ही देखा करते
होंगे। अन्नू मालिक ने अपनी गायक बनने की हसरत भी पूरी
कर ली।

गीत किशोर कुमार का गाया हुआ है और राज बब्बर को किशोर कुमार
के १-२ गीत ही मिले होंगे परदे पर होंठ हिलाने के लिए। ये निस्संदेह
अन्नू मलिक की एक बेहतर रचना है।




गीत के बोल:

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे,
दोनों आलम में लाजवाब लगे
दिन को देखूं तो आफताब लगे,
शब् को देखूं तो माहताब लगे

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे

रोज मिलते हो पर नहीं मिलते,
ऐसा मिलना भी मुझको ख्वाब लगे
पढ़ता रहता हु तेरी सूरत को,
तेरी सूरत मुझे किताब लगे

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे

तेरी आँखों की मस्तियाँ तौबा,
मुझको छलकी हुयी शराब लगे
जब भी चमके घटा में बिजली,
मुझको तेरा ही वो शबाब लगे

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे

तुझको देखूं तो किस तरह देखूं,
रुख पे किरणों के सौ नकाब लगे
प्यार शायद इसी को कहते हैं,
एक मुझसे ही क्यों हिजाब लगे

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे
 
 
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