सन १९९२ से अगला मधुर गीत पेश है फिल्म वंश का। इसे गाया
है लता मंगेशकर और एस. पी. बालसुब्रमण्यम ने। बोल समीर के हैं
और संगीत आनंद मिलिंद का। इसका फिल्मांकन भी लुभावना है।
समीर के बोल भी लाजवाब हैं-'बाँहों में धंस लेने दे'! और
तो और गीत में दिखने वाली बकरियां भी सुन्दर हैं। किसी ने कमेन्ट
में लिखा है कि ये गीत राग पूरिया धनश्री पर आधारित है। मान लेते हैं
जब तक कोई शास्त्रीय संगीत प्रेमी टीका टिपण्णी न करे।
फिल्म एक प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय फिल्म का रिमेक है और इसके गीतों
की धुनें भी उक्त फिल्म से इलयाराजा की धुनों की रीसाइकलिंग है।
गीत के बोल:
आ के तेरी बाहों में हर शाम लगे सिन्दूरी
आ के तेरी बाहों में हर शाम लगे सिन्दूरी
मेरे मन को महकाए
मेरे मन को महकाए तेरे मन की कस्तूरी
आ के तेरी बाहों में हर शाम लगे सिन्दूरी
आ के तेरी बाहों में हर शाम लगे सिन्दूरी
मेरे मन को महकाए
मेरे मन को महकाए तेरे मन की कस्तूरी
आ के तेरी बाहों में हर शाम लगे सिन्दूरी
हो ओ, आ के तेरी बाहों में हर शाम लगे सिन्दूरी
महकी हवायें उड़ता आंचल
लट घुंघराले काले बादल
हाँ हाँ हाँ हाँ
महकी हवायें उड़ता आंचल
लट घुंघराले काले बादल
प्रेम सुधा नैनों से बरसे
पी लेने को जीवन तरसे
बाहों में धंस लेने दे
प्रीत के चुम्बन देने दे
बाहों में धंस लेने दे
प्रीत के चुम्बन देने दे
इन अधरों से छलक न जाये
इन अधरों से छलक न जाये
यौवन रस अन्गूरी
आ के तेरी बाहों में हर शाम लगे सिन्दूरी
आ के तेरी बाहों में हर शाम लगे सिन्दूरी
सुंदरता का बहता सागर
तेरे लिये है रूप के बादल
सुंदरता का बहता सागर
तेरे लिये है रूप के बादल
इन्द्रधनुश के रंग चुराऊँ
तेरी ज़ुल्मी माँग सजाऊँ
दो फूलों के खिलने का
वक़्त यही है मिलने का
दो फूलों के खिलने का
वक़्त यही है मिलने का
आ जा मिल के आज मिटा दें
आ जा मिल के आज मिटा दें
थोड़ी सी ये दूरी
आ के तेरी बाहों में हर शाम लगे सिन्दूरी
आ के तेरी बाहों में हर शाम लगे सिन्दूरी
मेरे मन को महकाए
मेरे मन को महकाए तेरे मन की कस्तूरी
आ के तेरी बाहों में हर शाम लगे सिन्दूरी
...................................
Aa ke teri bahon mein-Vansh 1992
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Tuesday, 26 July 2011
Thursday, 19 May 2011
बटाटा वडा-हिफाज़त १९८७
आपको सन १९४१ के गीत के जिक्र के वक़्त बताया था कि फिल्म निर्माण
की तकनीक ने इस कदर विकास किया कि ज़मीन पर रेंगते रेंगते गीत गाते
नायक नायिका हवा में उड़ कर भी गीत गाने लगे। विशेष प्रभावों के माध्यम
से ये संभव हुआ। प्रस्तुत गीत में भी एक ऐसा ही प्रभाव है।
लगभग सभी खाने पीने की चीज़ें गीतों के माध्यम से बोलिवुडियों ने याद
कर ली हैं। बॉलीवुड की उत्पत्ति हुई है बम्बई में तो बटाटा वडा कैसे
भुलाया जा सकता है। आम और ख़ास दोनों वर्गों को समान रूप से प्रिय
ये बम्बैया खाना आपको शहर में हर जगह आसानी से और उत्तम गुणवत्ता
वाला मिल जायेगा। इसे जनता नाश्ते और खाने में जैसे चाहे खाती है,
चटनी के साथ, बिना चटनी के।
फिल्म में कहानी कुछ यूँ है-नायक नायिका एक बटाटा वडे की दुकान
पर पहुँच जाते हैं, वहां बटाटा बड़े बनाने वाली महिला वडे के मसाले
में गलती से भांग डाल देती है। भांग वाले वडे खाने के बाद क्या होता है
वो इस गीत में आप देखिये। गीत का मसाला तैयार किया है आनंद बक्षी
ने और इसको धुन में तल कर स्वादिष्ट बनाया है आर डी बर्मन ने। गाने
वाले कलाकार हैं-एस पी बालसुब्रमण्यम और एस जानकी ।
गीत के बोल:
बटाटा वडा हे
बटाटा वडा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा हे
बटाटा वडा
प्यार नहीं करना था, करना पड़ा
बटाटा वडा, हे
बटाटा वडा
बटाटा वडा, बटाटा वडा
होते जो होश मं हम
ऐसे ना झूम जाते
अच्छा यही था पहले
हम तुम ना पास आते
हो ओ ओ ओ ओ
अब दूर जाना है मुश्किल बड़ा
बटाटा वडा, हे
बटाटा वडा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा, डा डा डा डा डा
बटाटा वडा
लगता है आज दिल के
अरमान निकाल रहे हैं
कैसी है आग जिस में
हम दोनों जल रहे हैं
जा ठन्डे पानी का
ले आ तू घड़ा
बटाटा वडा है
बटाटा वडा हा हा हा हा हा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
हो हो हो हो हो हो हो
बटाटा वडा, बटाटा वडा
मस्ती में दिल की कश्ती
जाये ना डूब अपनी
डूबे के पार उतरे
जोड़ी है खूब अपनी
तू भी है कंवारी
मैं भी हूँ छडा, हा हा हा हा हा
बटाटा वडा, आ हा हा
बटाटा वडा आ हा हा हा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा, आ हा हा
बटाटा वडा, टा वडा
टा वडा
........................
Batata Wada-Hifazat 1987
की तकनीक ने इस कदर विकास किया कि ज़मीन पर रेंगते रेंगते गीत गाते
नायक नायिका हवा में उड़ कर भी गीत गाने लगे। विशेष प्रभावों के माध्यम
से ये संभव हुआ। प्रस्तुत गीत में भी एक ऐसा ही प्रभाव है।
लगभग सभी खाने पीने की चीज़ें गीतों के माध्यम से बोलिवुडियों ने याद
कर ली हैं। बॉलीवुड की उत्पत्ति हुई है बम्बई में तो बटाटा वडा कैसे
भुलाया जा सकता है। आम और ख़ास दोनों वर्गों को समान रूप से प्रिय
ये बम्बैया खाना आपको शहर में हर जगह आसानी से और उत्तम गुणवत्ता
वाला मिल जायेगा। इसे जनता नाश्ते और खाने में जैसे चाहे खाती है,
चटनी के साथ, बिना चटनी के।
फिल्म में कहानी कुछ यूँ है-नायक नायिका एक बटाटा वडे की दुकान
पर पहुँच जाते हैं, वहां बटाटा बड़े बनाने वाली महिला वडे के मसाले
में गलती से भांग डाल देती है। भांग वाले वडे खाने के बाद क्या होता है
वो इस गीत में आप देखिये। गीत का मसाला तैयार किया है आनंद बक्षी
ने और इसको धुन में तल कर स्वादिष्ट बनाया है आर डी बर्मन ने। गाने
वाले कलाकार हैं-एस पी बालसुब्रमण्यम और एस जानकी ।
गीत के बोल:
बटाटा वडा हे
बटाटा वडा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा हे
बटाटा वडा
प्यार नहीं करना था, करना पड़ा
बटाटा वडा, हे
बटाटा वडा
बटाटा वडा, बटाटा वडा
होते जो होश मं हम
ऐसे ना झूम जाते
अच्छा यही था पहले
हम तुम ना पास आते
हो ओ ओ ओ ओ
अब दूर जाना है मुश्किल बड़ा
बटाटा वडा, हे
बटाटा वडा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा, डा डा डा डा डा
बटाटा वडा
लगता है आज दिल के
अरमान निकाल रहे हैं
कैसी है आग जिस में
हम दोनों जल रहे हैं
जा ठन्डे पानी का
ले आ तू घड़ा
बटाटा वडा है
बटाटा वडा हा हा हा हा हा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
हो हो हो हो हो हो हो
बटाटा वडा, बटाटा वडा
मस्ती में दिल की कश्ती
जाये ना डूब अपनी
डूबे के पार उतरे
जोड़ी है खूब अपनी
तू भी है कंवारी
मैं भी हूँ छडा, हा हा हा हा हा
बटाटा वडा, आ हा हा
बटाटा वडा आ हा हा हा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा, आ हा हा
बटाटा वडा, टा वडा
टा वडा
........................
Batata Wada-Hifazat 1987
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Thursday, 3 February 2011
डुगडुगी बाज उठी-ये तो कमाल हो गया १९८२
इस गीत में नायक मदारी बन कर तमाशा दिखा रहा है।
फिल्म उद्योग में निर्देशक असली मदारी होता है जो अपने
बंदरों अर्थात पात्रों को जैसा उसका जी चाहे नचाता है।
फिल्म उद्योग में भी एक भेडचाल होती है। जैसे ही कोई
नए हीरो की फिल्म हिट हो गई उसे अपनी फिल्म में लेने वालों
की कतार लग जाती है। इस फिल्म की कहानी में नायक दोहरी
भूमिकाओं में है। फिल्म एक दूजे के लिए की अपार सफलता
ने कमल हासन के लिए हिंदी फिल्मों के दरवाजे खोल दिए।
कमल हासन एक उम्दा कलाकार और बेहद कुशल नर्तक हैं।
पहले वो केवल एक कुशल नर्तक थे लेकिन समय के साथ साथ
अभिनय में उन्होंने कई मुकाम हासिल कर लिए। तमिल और
तेलुगु सिनेमा में स्थापित होने के बाद ही वे हिंदी फिल्मों में दिखाई
दिए।
ये फिल्म बहुसितारा होने के बावजूद चली नहीं। कथानक कुछ
लचर किस्म का सा है। वैसे आकर्षण के लिए इसमें एक विलायती
नायिका को भी मौका दिया गया था अभिनय का। इन सबके बावजूद
केवल इसके गाने सुनाई दिए और धीरे धीरे जनता, सिवाए कमल
हासन और पूनम ढिल्लों के प्रशंसकों के, फिल्म को भूल गई।
अब साहब हमने तो इसे दो बार देखे है-एक बार सिनेमा हाल में
और एक बार किसी टीवी चैनल पर, तो हम तो इसको चाह कर
भी नहीं भुला पाते ना जी। अब फिल्म याद है तो गाने तो याद होंगे
ही। आपको इस फिल्म का एक गीत सुनवाते हैं आज।
गीत में आपको यादों की बारात फेम विजय अरोड़ा भी नज़र आयेंगे।
विजय अरोड़ा फिल्म और टेलिविज़न संस्थान पुणे से स्वर्ण पदक
प्राप्त कलाकार हैं। आपने पाठ्यक्रम में कितने भी झंडे गाड़े हों, आपकी
किस्मत में गोल्ड मेडल नहीं छपा हो तो आप एक सीमित चढ़ाई ही
जीवन में चढ़ पाते हैं ।
उल्लेखीय है कि जिस शख्स ने ये विडियो अपलोड किया है यू ट्यूब
पर, वो शायद विलायती अभिनेत्री ऐन का भाई है , जैसा कि उसने
गीत के विवरण में लिखा है। इसको कहते है सही मायने में देसी नौटंकी
का ग्लोबेलाईजेशन । विलायती नायिका को बोलिवुडीये लटके झटके दिखाते
देखना अनूठा अनुभव है।
गीत के बोल :
गीत के बोलों के लिए चटका लगायें।
फिल्म उद्योग में निर्देशक असली मदारी होता है जो अपने
बंदरों अर्थात पात्रों को जैसा उसका जी चाहे नचाता है।
फिल्म उद्योग में भी एक भेडचाल होती है। जैसे ही कोई
नए हीरो की फिल्म हिट हो गई उसे अपनी फिल्म में लेने वालों
की कतार लग जाती है। इस फिल्म की कहानी में नायक दोहरी
भूमिकाओं में है। फिल्म एक दूजे के लिए की अपार सफलता
ने कमल हासन के लिए हिंदी फिल्मों के दरवाजे खोल दिए।
कमल हासन एक उम्दा कलाकार और बेहद कुशल नर्तक हैं।
पहले वो केवल एक कुशल नर्तक थे लेकिन समय के साथ साथ
अभिनय में उन्होंने कई मुकाम हासिल कर लिए। तमिल और
तेलुगु सिनेमा में स्थापित होने के बाद ही वे हिंदी फिल्मों में दिखाई
दिए।
ये फिल्म बहुसितारा होने के बावजूद चली नहीं। कथानक कुछ
लचर किस्म का सा है। वैसे आकर्षण के लिए इसमें एक विलायती
नायिका को भी मौका दिया गया था अभिनय का। इन सबके बावजूद
केवल इसके गाने सुनाई दिए और धीरे धीरे जनता, सिवाए कमल
हासन और पूनम ढिल्लों के प्रशंसकों के, फिल्म को भूल गई।
अब साहब हमने तो इसे दो बार देखे है-एक बार सिनेमा हाल में
और एक बार किसी टीवी चैनल पर, तो हम तो इसको चाह कर
भी नहीं भुला पाते ना जी। अब फिल्म याद है तो गाने तो याद होंगे
ही। आपको इस फिल्म का एक गीत सुनवाते हैं आज।
गीत में आपको यादों की बारात फेम विजय अरोड़ा भी नज़र आयेंगे।
विजय अरोड़ा फिल्म और टेलिविज़न संस्थान पुणे से स्वर्ण पदक
प्राप्त कलाकार हैं। आपने पाठ्यक्रम में कितने भी झंडे गाड़े हों, आपकी
किस्मत में गोल्ड मेडल नहीं छपा हो तो आप एक सीमित चढ़ाई ही
जीवन में चढ़ पाते हैं ।
उल्लेखीय है कि जिस शख्स ने ये विडियो अपलोड किया है यू ट्यूब
पर, वो शायद विलायती अभिनेत्री ऐन का भाई है , जैसा कि उसने
गीत के विवरण में लिखा है। इसको कहते है सही मायने में देसी नौटंकी
का ग्लोबेलाईजेशन । विलायती नायिका को बोलिवुडीये लटके झटके दिखाते
देखना अनूठा अनुभव है।
गीत के बोल :
गीत के बोलों के लिए चटका लगायें।
Wednesday, 2 February 2011
बागों में खिले हैं कैसे कैसे फुलवा-शुभकामना १९८३
आपको फिल्म सितारा के दो गीत सुनवाए। उम्मीद है
पसंद आये होंगे। अब सुनिए एक कम सुना हुआ कर्णप्रिय
गीत जो कम देखी गई फिल्म शुभकामना से है। इसे
आशा भोंसले और एस पी बालसुब्रमण्यम ने गाया है।
फिल्म में रति अग्निहोत्री और राकेश रोशन की जोड़ी
है। उत्पल दत्त के अलावा इस फिल्म के कलाकारों के
अभिनय पर ज्यादा दिमाग खर्च करने की आवश्यकता
नहीं पड़ेगी, अगर आप फिल्म देखना चाहें तो। गीत
अलबत्ता फिल्म के सुनने लायक हैं और ऐसा लगता है
एक बार फिर संगीतकार की मेहनत बेकार हुई। फिल्म
हिट होती है तो जनता गाने भी सुन लेती है। राकेश रोशन
की हंसी शायद फिल्म उद्योग की सबसे खिसियानी हंसियों
में से एक है। गीत की शुरुआत में केवल यही एक चीज़
खटकती है। बोल अनजान के हैं वही "खाई के पान बनारस"
गीत को लिखने वाले । एक बिल्ली अलसाई सी म्याऊँ बोले
तो जो आवाज़ आएगी कुछ वैसे ही अंदाज़ में इस गीत के
शब्द "गाये", "आये" वगैरह गाये गए हैं।
गीत के बोल:
बागों में खिले हैं कैसे कैसे फुलवा
बुलबुल क्यूँ नहीं गाये
गाना वो चाहे जो होंठों पे ना आये
बुलबुल कैसे गाये
पसंद आये होंगे। अब सुनिए एक कम सुना हुआ कर्णप्रिय
गीत जो कम देखी गई फिल्म शुभकामना से है। इसे
आशा भोंसले और एस पी बालसुब्रमण्यम ने गाया है।
फिल्म में रति अग्निहोत्री और राकेश रोशन की जोड़ी
है। उत्पल दत्त के अलावा इस फिल्म के कलाकारों के
अभिनय पर ज्यादा दिमाग खर्च करने की आवश्यकता
नहीं पड़ेगी, अगर आप फिल्म देखना चाहें तो। गीत
अलबत्ता फिल्म के सुनने लायक हैं और ऐसा लगता है
एक बार फिर संगीतकार की मेहनत बेकार हुई। फिल्म
हिट होती है तो जनता गाने भी सुन लेती है। राकेश रोशन
की हंसी शायद फिल्म उद्योग की सबसे खिसियानी हंसियों
में से एक है। गीत की शुरुआत में केवल यही एक चीज़
खटकती है। बोल अनजान के हैं वही "खाई के पान बनारस"
गीत को लिखने वाले । एक बिल्ली अलसाई सी म्याऊँ बोले
तो जो आवाज़ आएगी कुछ वैसे ही अंदाज़ में इस गीत के
शब्द "गाये", "आये" वगैरह गाये गए हैं।
गीत के बोल:
बागों में खिले हैं कैसे कैसे फुलवा
बुलबुल क्यूँ नहीं गाये
गाना वो चाहे जो होंठों पे ना आये
बुलबुल कैसे गाये
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Saturday, 11 December 2010
सागर से गहरा है प्यार हमारा- मझधार १९९४
एक महानुभाव से मैं कल एक मसाज-अरंजेर पर बात कर रहा था ।
जी हाँ सारे मेसेंजर दिमाग और आँखों की अच्छी मसाज जो करते
हैं सो इनका इससे बेहतर नाम मुझे नहीं सूझ रहा। उसपर वार्तालाप
के दौरान एक गीत पर चर्चा हुई-गुटुर गुटुर-फिल्म दलाल के। मेरे
मित्र ने कहा-अच्छे गीत भी सुना करो। मैंने उदाहरण पूछा तो झट
उन्होंने नाम लिया इस गीत का-सागर से गहरा है प्यार हमारा।
खैर मेरे वो मित्र मेरे संगीत प्रेम से ज्यादा वाकिफ नहीं हैं। उनकी
खातिर मैं ये गीत यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ। इस गीत की स्वर लहरियां
मुझे पसंद है और जब भी कहीं सुनाई देता है कोशिश करता हूँ इसको
पूरा सुनने की। वार्तालाप के बाद मेरे मित्रा मुझे फिल्म मझधार का
ये गीत बतलाने के पश्चात मुझे चैट की मझधार में छोड़ गए। गीत
फिल्माया गया है मनीषा कोइराला और राहुल रॉय पर। राहुल रॉय
अपनी एक्टिंग से ज्यादा अपने केश विन्यास की वजह से पहचाने
गए हैं।
गीत के बोल:
सागर से गहरा है प्यार हमारा
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
साथ कभी छूटा जो तुम्हारा,
आ आ आ , तुम्हारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
साथ कभी छूटा जो तुम्हारा
आ आ आ , तुम्हारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
सीने में दिल दिल में धड़कन
धड़कन में तू है समाया
सीने में दिल दिल में धड़कन
धड़कन में तू है समाया
कितने दिनों तड़पी हूँ मैं
तब जा के है तुझको पाया
मेरे दिल पे मेरे यार
अब है तेरा इख्तियार
अब है तेरा इख्तियार
सागर से गहरा है प्यार हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
ऐ मेरे दोस्त किस्मत मेरी
देखो है क्या रंग लायी
ऐ मेरे दोस्त किस्मत मेरी
देखो है क्या रंग लायी
अपने मिलन की रुत हसीं
बरसों के है बाद आई
दूरियों को अब मिटा
आ गले से लग जा
आ गले से लग जा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
शाम-ओ-सहर मेरी नज़र
करती है दीदार तेरा
शाम-ओ-सहर मेरी नज़र
करती है दीदार तेरा
तेरे बिना क्या ज़िन्दगी
तू ही है संसार मेरा
अब ना चाहत होगी कम
मैंने ली है ये कसम
मैंने ली है ये कसम
सागर से गहरा है प्यार हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
साथ कभी छूटा जो तुम्हारा
आ आ आ , तुम्हारा
सागर से ......... हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
...............................................
Sagar se gehra hai pyaar hamara-Majhdhaar 1994
जी हाँ सारे मेसेंजर दिमाग और आँखों की अच्छी मसाज जो करते
हैं सो इनका इससे बेहतर नाम मुझे नहीं सूझ रहा। उसपर वार्तालाप
के दौरान एक गीत पर चर्चा हुई-गुटुर गुटुर-फिल्म दलाल के। मेरे
मित्र ने कहा-अच्छे गीत भी सुना करो। मैंने उदाहरण पूछा तो झट
उन्होंने नाम लिया इस गीत का-सागर से गहरा है प्यार हमारा।
खैर मेरे वो मित्र मेरे संगीत प्रेम से ज्यादा वाकिफ नहीं हैं। उनकी
खातिर मैं ये गीत यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ। इस गीत की स्वर लहरियां
मुझे पसंद है और जब भी कहीं सुनाई देता है कोशिश करता हूँ इसको
पूरा सुनने की। वार्तालाप के बाद मेरे मित्रा मुझे फिल्म मझधार का
ये गीत बतलाने के पश्चात मुझे चैट की मझधार में छोड़ गए। गीत
फिल्माया गया है मनीषा कोइराला और राहुल रॉय पर। राहुल रॉय
अपनी एक्टिंग से ज्यादा अपने केश विन्यास की वजह से पहचाने
गए हैं।
गीत के बोल:
सागर से गहरा है प्यार हमारा
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
साथ कभी छूटा जो तुम्हारा,
आ आ आ , तुम्हारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
साथ कभी छूटा जो तुम्हारा
आ आ आ , तुम्हारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
सीने में दिल दिल में धड़कन
धड़कन में तू है समाया
सीने में दिल दिल में धड़कन
धड़कन में तू है समाया
कितने दिनों तड़पी हूँ मैं
तब जा के है तुझको पाया
मेरे दिल पे मेरे यार
अब है तेरा इख्तियार
अब है तेरा इख्तियार
सागर से गहरा है प्यार हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
ऐ मेरे दोस्त किस्मत मेरी
देखो है क्या रंग लायी
ऐ मेरे दोस्त किस्मत मेरी
देखो है क्या रंग लायी
अपने मिलन की रुत हसीं
बरसों के है बाद आई
दूरियों को अब मिटा
आ गले से लग जा
आ गले से लग जा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
शाम-ओ-सहर मेरी नज़र
करती है दीदार तेरा
शाम-ओ-सहर मेरी नज़र
करती है दीदार तेरा
तेरे बिना क्या ज़िन्दगी
तू ही है संसार मेरा
अब ना चाहत होगी कम
मैंने ली है ये कसम
मैंने ली है ये कसम
सागर से गहरा है प्यार हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
साथ कभी छूटा जो तुम्हारा
आ आ आ , तुम्हारा
सागर से ......... हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
...............................................
Sagar se gehra hai pyaar hamara-Majhdhaar 1994
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Nadeem Shrawan,
Rahul Roy,
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