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Thursday, 3 February 2011

डुगडुगी बाज उठी-ये तो कमाल हो गया १९८२

इस गीत में नायक मदारी बन कर तमाशा दिखा रहा है।
फिल्म उद्योग में निर्देशक असली मदारी होता है जो अपने
बंदरों अर्थात पात्रों को जैसा उसका जी चाहे नचाता है।

फिल्म उद्योग में भी एक भेडचाल होती है। जैसे ही कोई
नए हीरो की फिल्म हिट हो गई उसे अपनी फिल्म में लेने वालों
की कतार लग जाती है। इस फिल्म की कहानी में नायक दोहरी
भूमिकाओं में है। फिल्म एक दूजे के लिए की अपार सफलता
ने कमल हासन के लिए हिंदी फिल्मों के दरवाजे खोल दिए।
कमल हासन एक उम्दा कलाकार और बेहद कुशल नर्तक हैं।
पहले वो केवल एक कुशल नर्तक थे लेकिन समय के साथ साथ
अभिनय में उन्होंने कई मुकाम हासिल कर लिए। तमिल और
तेलुगु सिनेमा में स्थापित होने के बाद ही वे हिंदी फिल्मों में दिखाई
दिए।

ये फिल्म बहुसितारा होने के बावजूद चली नहीं। कथानक कुछ
लचर किस्म का सा है। वैसे आकर्षण के लिए इसमें एक विलायती
नायिका को भी मौका दिया गया था अभिनय का। इन सबके बावजूद
केवल इसके गाने सुनाई दिए और धीरे धीरे जनता, सिवाए कमल
हासन और पूनम ढिल्लों के प्रशंसकों के, फिल्म को भूल गई।

अब साहब हमने तो इसे दो बार देखे है-एक बार सिनेमा हाल में
और एक बार किसी टीवी चैनल पर, तो हम तो इसको चाह कर
भी नहीं भुला पाते ना जी। अब फिल्म याद है तो गाने तो याद होंगे
ही। आपको इस फिल्म का एक गीत सुनवाते हैं आज।

गीत में आपको यादों की बारात फेम विजय अरोड़ा भी नज़र आयेंगे।
विजय अरोड़ा फिल्म और टेलिविज़न संस्थान पुणे से स्वर्ण पदक
प्राप्त कलाकार हैं। आपने पाठ्यक्रम में कितने भी झंडे गाड़े हों, आपकी
किस्मत में गोल्ड मेडल नहीं छपा हो तो आप एक सीमित चढ़ाई ही
जीवन में चढ़ पाते हैं ।

उल्लेखीय है कि जिस शख्स ने ये विडियो अपलोड किया है यू ट्यूब
पर, वो शायद विलायती अभिनेत्री ऐन का भाई है , जैसा कि उसने
गीत के विवरण में लिखा है। इसको कहते है सही मायने में देसी नौटंकी
का ग्लोबेलाईजेशन । विलायती नायिका को बोलिवुडीये लटके झटके दिखाते
देखना अनूठा अनुभव है।



गीत के बोल :

गीत के बोलों के लिए चटका लगायें।

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