अमिताभ की कई खुशनुमा सी फ़िल्में भी आयीं। ये फिल्म उतनी
खुशनुमा नहीं है जितनी नाम से या गीतों से लगती है। इसका अंत
दुखांत है और थोड़ा अलग हटके है। फिल्म में दो नायक हैं और
एक नायिका। कन्फ्यूज़न बरकरार रहता है जब तक एक नायक
और एकमात्र नायिका की शादी नहीं हो जाती। इस गीत में तीनों
चरित्र एक गीत गा रहे हैं और कश्मीर कि प्रशंसा में कसीदे काढ रहे
हैं। विनोद मेहरा और रखी हैं अमिताभ के अलावा इस गीत में।
आनंद बक्षी के लिखे गीत को स्वर दिया है लता, किशोर और सुरेश
वाडकर ने। संगीत है आर डी बर्मन का।
गीत के बोल:
कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
मौसम बेमिसाल बेनज़ीर है
ये कशमीर है, ये कशमीर है
पर्वतों के दरमियाँ हैं
जन्नतों की तरमियाँ हैं
आज के दिन हम यहाँ हैं
साथी ये हमारी तकदीर है
कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
ये कशमीर है, ये कशमीर है
इस ज़मीन से आसमान से
फूलों के इस गुलसिताँ से
जाना मुश्किल है यहाँ से
इस ज़मीन से आसमान से
फुलों के इस गुलसिताँ से
जाना मुशकिल है यहाँ से
तौबा ये हवा है या जंज़ीर है
कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
ये कशमीर है, ये कशमीर है
ऐ सखी देख तो नज़ारा
एक अकेला बेसहारा
कौन है वो हम कहारा
मुझसा कोई आशिक़ ये दिलजीर है
अरे, कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है
ये कश्मीर है, ये कश्मीर है
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Kitni khoobsurat ye tasveer hai-Bemisaal 1982
Saturday, 29 January 2011
कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है-बेमिसाल १९८२
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