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Saturday, 8 October 2011

सुरमई अंखियों में-सदमा १९८३

जैसे आदमी की ज़िन्दगी में कई पड़ाव आते हैं वैसे ही किसी भी उद्योग
के जीवन काल में भी कई पड़ाव आते हैं। हिंदी सिनेमा में दूसरी भाषा की
फिल्मों को हिंदी में डब करके दिखाने का चलन ८० के दशक के पहले तक
नहीं के बराबर था। जो फ़िल्में सफल हो जातीं उन्हें हिंदी में भी बनाया जाता।
ज़रूरी नहीं कि बाद में बनने वाली फिल्म सफल ही हो।

सन १९८३ में एक मर्मस्पर्शी फिल्म आई सदमा जिसे पहले तमिल भाषा
में मून्दरम पिराई के नाम से बनाया गया था। इसे बाद में हिंदी में भी बनाया
गया। फिल्म के दोनों संस्करण में कमल हासन और श्रीदेवी नायक-नायिका हैं।
फिल्म नायिका श्रीदेवी के कैरियर में अहम् स्थान रखती है।

फिल्म के संगीत ने तहलका मचाया। आज आपको इसी फिल्म से येसुदास
का गाया हुआ एक गीत सुनवा रहे हैं। गीत के तमिल भाई का लिंक भी दिया
है जिससे आप दोनों गीतों का आनंद उठा सकें। तमिल वर्ज़न थोड़ा तेज़ है।
हिंदी गीत के लिए बोल लिखे हैं गुलज़ार ने और संगीत तैयार किया है
इल्या राजा ने।



Moondraam pirai - Kanne kalaimaane - Ilaiyaraaja

गीत के बोल:

सुरमयी अंखियों में नन्हा मुन्ना एक सपना दे जा रे
सुरमयी अंखियों में नन्हा मुन्ना एक सपना दे जा रे
निंदिया के उड़ते पाखी रे, अंखियों में आ जा साथी रे

रा री रा रू ओ रा री रूम
रा री रा रू ओ रा री रूम

सुरमयी अंखियों में नन्हा मुन्ना एक सपना दे जा रे

सच्चा कोई सपना दे जा
मुझको कोई अपना दे जा
अनजाना सा मगर कुछ पहचाना सा
हल्का फुल्का शबनमी
रेशम से भी रेशमी

सुरमयी अंखियों में नन्हा मुन्ना एक सपना दे जा रे
निंदिया के उड़ते पाखी रे, अंखियों में आ जा साथी रे

रा री रा रू ओ रा री रूम
रा री रा रू ओ रा री रूम

रात के रथ पर जाने वाले
नींद का रस बरसाने वाले
इतना कर दे के मेरी ऑंखें भर दे
आँखों में बसता रहे, सपना ये हँसता रहे

सुरमयी अंखियों में नन्हा मुन्ना एक सपना दे जा रे
निंदिया के उड़ते पाखी रे, अंखियों में आ जा साथी रे

रा री रा रू ओ रा री रूम
रा री रा रू ओ रा री रूम
रा री रा रू ओ रा री रूम
रा री रा रू ओ रा री रूम
..............................................
Surmayi ankhiyon mein-Sadma 1983

Thursday, 3 February 2011

डुगडुगी बाज उठी-ये तो कमाल हो गया १९८२

इस गीत में नायक मदारी बन कर तमाशा दिखा रहा है।
फिल्म उद्योग में निर्देशक असली मदारी होता है जो अपने
बंदरों अर्थात पात्रों को जैसा उसका जी चाहे नचाता है।

फिल्म उद्योग में भी एक भेडचाल होती है। जैसे ही कोई
नए हीरो की फिल्म हिट हो गई उसे अपनी फिल्म में लेने वालों
की कतार लग जाती है। इस फिल्म की कहानी में नायक दोहरी
भूमिकाओं में है। फिल्म एक दूजे के लिए की अपार सफलता
ने कमल हासन के लिए हिंदी फिल्मों के दरवाजे खोल दिए।
कमल हासन एक उम्दा कलाकार और बेहद कुशल नर्तक हैं।
पहले वो केवल एक कुशल नर्तक थे लेकिन समय के साथ साथ
अभिनय में उन्होंने कई मुकाम हासिल कर लिए। तमिल और
तेलुगु सिनेमा में स्थापित होने के बाद ही वे हिंदी फिल्मों में दिखाई
दिए।

ये फिल्म बहुसितारा होने के बावजूद चली नहीं। कथानक कुछ
लचर किस्म का सा है। वैसे आकर्षण के लिए इसमें एक विलायती
नायिका को भी मौका दिया गया था अभिनय का। इन सबके बावजूद
केवल इसके गाने सुनाई दिए और धीरे धीरे जनता, सिवाए कमल
हासन और पूनम ढिल्लों के प्रशंसकों के, फिल्म को भूल गई।

अब साहब हमने तो इसे दो बार देखे है-एक बार सिनेमा हाल में
और एक बार किसी टीवी चैनल पर, तो हम तो इसको चाह कर
भी नहीं भुला पाते ना जी। अब फिल्म याद है तो गाने तो याद होंगे
ही। आपको इस फिल्म का एक गीत सुनवाते हैं आज।

गीत में आपको यादों की बारात फेम विजय अरोड़ा भी नज़र आयेंगे।
विजय अरोड़ा फिल्म और टेलिविज़न संस्थान पुणे से स्वर्ण पदक
प्राप्त कलाकार हैं। आपने पाठ्यक्रम में कितने भी झंडे गाड़े हों, आपकी
किस्मत में गोल्ड मेडल नहीं छपा हो तो आप एक सीमित चढ़ाई ही
जीवन में चढ़ पाते हैं ।

उल्लेखीय है कि जिस शख्स ने ये विडियो अपलोड किया है यू ट्यूब
पर, वो शायद विलायती अभिनेत्री ऐन का भाई है , जैसा कि उसने
गीत के विवरण में लिखा है। इसको कहते है सही मायने में देसी नौटंकी
का ग्लोबेलाईजेशन । विलायती नायिका को बोलिवुडीये लटके झटके दिखाते
देखना अनूठा अनुभव है।



गीत के बोल :

गीत के बोलों के लिए चटका लगायें।
 
 
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