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Thursday, 23 December 2010

कसमें हम अपनी जान की-मेरे गरीब नवाज़ १९७३

अनवर की आवाज़ में एक गीत और सुनते हैं । कुछ पोस्ट पहले आपको
एक गीत सुनवाया था उनका। ये गीत पदार्पण गीत है अनवर का हिंदी
फिल्म जगत में जो लिया गया है फिल्म मेरे गरीब नवाज़ से। इसकी
धुन कमल राजस्थानी की है जिन्हें हम उनके कई मधुर गैर फ़िल्मी गीतों
के लिए पहचानते हैं। परदे पर किस कलाकार ने अभिनय किया है गीत पर
इसकी मुझे कतई जानकारी नहीं है। उम्मीद है आप में से किसी को अवश्य
ही उस कलाकार का नाम मालूम होगा। गीत महबूब सरवर का लिखा हुआ है।





गीत के बोल :

कसमें हम अपनी जान की खाए चले गए
फिर भी वो ऐतबार न लाए चले गए

कह कर गए थे वोह कि न आएंगे अब कभी
कह कर गए थे वोह कि न आएंगे अब कभी
लेकिन खयाल बन के वो आये चले गए
फिर भी वो ऐतबार न लाए चले गए

कसमें हम अपनी जान की

रुस्वाइओं के डर से न दामन भिगो सके
रुस्वाइओं के डर से न दामन भीगो सके
पलकों में आंसुओं को छुपाये चले गए
फिर भी वो ऐतबार न लाए चले गए

कसमें हम अपनी जान की

अनवर सुजूद-ए-शौक़ की मत पूछ इंतहा
अनवर सुजूद-ए-शौक़ की मत पूछ इंतहा
हर हर क़दम पे सर को झुकाये चले गए
फिर भी वो ऐतबार न लाए चले गए

कसमें हम अपनी जान की खाए चले गए

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