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Thursday, 7 July 2011

ये काली काली ऑंखें-बाज़ीगर १९९३

फिल्म बाज़ीगर(१९९३) का सबसे लोकप्रिय गीत आपको सुनवाते
हैं आज। फिल्म के ३ गीत आपको पहले सुनवा चुके हैं। ये
चौथा गीत है जिसे देव कोहली ने लिखा है। फिल्म में संगीत
अन्नू मलिक का है। गीत मुख्यतः कुमार सानू की आवाज़
में है जिसमें बीच में अन्नू मलिक ने भी अपनी आवाज़ ठूंसी है।

उल्लेखनीय है कि काली-काली और कजरारी ऑंखें वाले कुछ सबसे
लोकप्रिय गीत जिन अभिनेत्रियों पर फिल्माए गये हैं उनकी ऑंखें
या तो भूरी हैं या बिल्लौरी । उच्कूदो किस्म का नृत्य हो रहा है
गीत पर जिसकी कोरिओग्राफी की है ३ काबिल लोगों ने।




गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ, हो ओ ओ ओ ओ
हो हो ओ ओ ओ ओ

ये काली काली आखें
तू रु तू रु रु
ये गोरे गोरे गाल
तू रु रु तू रु रु
ये तीखी तीखी नज़रें
तू रु रु तू रु रु
ये हिरनी जैसी चाल
तू रु रु तू रु रु

ये काली काली आखें
तू रु तू रु रु
ये गोरे गोरे गाल
तू रु रु तू रु रु
ये तीखी तीखी नज़रें
तू रु रु तू रु रु
ये हिरनी जैसी चाल
तू रु रु तू रु रु

देखा जो तुझे जानम
हुआ है बुरा हाल

ये काली काली आखें
तू रु तू रु रु
ये गोरे गोरे गाल
तू रु रु तू रु रु
ये तीखी तीखी नज़रें
तू रु रु तू रु रु
ये हिरनी जैसी चाल
तू रु रु तू रु रु

मैं मिला, तू मिली
ऐ तू मिली, मैं मिला
मैं मिला, तू मिली
तू मिली, मैं मिला
दुनिया जले तो जले
प्यार करेंगे तुझपे मरेंगे
धक् धक् दिल ये करे, हा

उफ़ तेरी दिल्लगी दिल को जलाने लगी
गैरों कि बाहों मैं इठला के जाने लगी
ये तेरी पैरों कि मुझको सताने लगी
छोडो जी छोडो सनम
जिद अपनी छोडो सनम
नाज़ुक ये दिल है मेरा
दिल को ना तोड़ो सनम
दिल को ना तोड़ो सनम

ये लम्बी लम्बी रातें
आ कर ले मुलाकातें
जाने क्यों दिल ये मेरा
तेरा ही होना चाहे
जाने क्यूँ दिल ये मेरा
तेरा ही होना चाहे
गुस्से में लाल ना कर
ये गोरे गोरे गाल

ये काली काली आखें
तू रु तू रु रु
ये गोरे गोरे गाल
तू रु रु तू रु रु
ये तीखी तीखी नज़रें
तू रु रु तू रु रु
ये हिरनी जैसी चाल
तू रु रु तू रु रु

ना तू कर ख़टपट
कर प्यार झट पट
मेरी आजा तू निकट
कटे प्यार का टिकट
ना तू जुल्फें झटक
ना तू पैर पटक
अरे ऐसे ना मटक
दिल गया है भटक

चेहरे पे तेरे सनम
लैला की है शोखियाँ
हीर सी बढ़ के है
आखों की ये मस्तियाँ
जुलिएट की तरह होंटों पे हैं सुर्खियाँ
देख ले खुद को तू
नज़र से मेरी जान-ए-जान

देखी जो तेरी अदा
मैं फिदा हो गया
सीने से लग जा मेरे
जीने का आये मज़ा

ये बिखरी बिखरी जुल्फें
ये झुकी झुकी पलकें
ये गोरी गोरी बाहें
हम क्यूँ ना तुम्हे चाहें
ऐसा तो हमने पहले
देखा नहीं कमाल

ये काली काली आखें
तू रु तू रु रु
ये गोरे गोरे गाल
तू रु रु तू रु रु
ये तीखी तीखी नज़रें
तू रु रु तू रु रु
ये हिरनी जैसी चाल
तू रु रु तू रु रु

देखा जो तुझे जानम
हुआ है बुरा हाल

ये काली काली आखें
तू रु तू रु रु
ये गोरे गोरे गाल
.............................
Ye kaali kaali ankhen-Baazigar 1993

Wednesday, 29 June 2011

हाय मेरा दिल-जोश २०००

फिल्म जोश के पांच गीत आप सुन चुके हैं। छठा गीत सुनवाते हैं
आपको जो युगल गीत है अलका याग्निक और उदित नारायण
की आवाजों में। अनजान पुत्र समीर के लिखे बोलों को स्वरबद्ध
किया है अन्नू मलिक ने।

कुछ तुम एम्बेरैसो कुछ हम एम्बेरैसें, कुछ तुम स्माइलो कुछ हम
स्माइलें । आधुनिक युग के बोलिवुडिये हिंगलिश गीत सुन सुन के
दिमाग में नए नए शब्द आ जाते हैं। अंग्रेजी शब्दों का देसीकरण
कैसे किया जाये उसका एक नमूना आपके लिए पेश किया है ।

जोश फिल्म के सारे गीत श्रवणीय हैं। सन २००० में कई मधुर गीत
बने हैं। धीरे धीरे आपको इस वर्ष के बाकी कर्णप्रिय गीत भी सुनवायेंगे।
अभी तो काले-पीले युग के ही हजारों गीत बाकी हैं सुनवाने के लिए।



गीत के बोल:

इतना प्यारा है ये प्यार, प्यारा प्यारा
हुआ है पहली बार, होता है एक बार
फिर ना होगा, ये दुबारा

हाय मेरा दिल, चुरा के ले गया
चुराने वाला, मेरा कातिल
हाय मेरा दिल, चुरा के ले गई,
चुराने वाली, मेरी कातिल

ये दिल तुझ पे आया है, आते आते
दर्द-ए- दिल तो जाते है, जाते जाते
जागे हैं, सोये हैं, हम दोनों खोये हैं
कैसी तन्हाई है, मस्ती सी छाई है
ये मौसम है, प्यार के काबिल

हाय मेरा दिल, चुरा के ले गया
चुराने वाला, मेरा कातिल

अब तो काटे ना कटे, प्यासी रातेइन
कुछ कुछ होता है सुन के, ऐसी बातेइन
बेचैनी सहने दे, पलकों में रहने दे
तेरी बाहों में है, तेरी राहों में है
जान-ए-जाना मेरी मंजिल

हाय मेरा दिल, चुरा के ले गई,
चुराने वाली, मेरी कातिल

हाय मेरा दिल, चुरा के ले गया
चुराने वाला, मेरा कातिल

इतना प्यारा है ये प्यार, प्यारा प्यारा
हुआ है पहली बार, होता है एक बार
फिर ना होगा, ये दुबारा
......................................
Haye mera dil-Josh 2000

Friday, 3 June 2011

जिंदा हैं हम तो-जोश २०००

फिल्म जोश(२०००) के चार गीत आपको सुनवा दिए हैं। फिल्म के संगीत
पर काफी चर्चा हम कर चुके हैं। केवल इस गीत के ऊपर थोड़ी लालटेन
चमकाएंगे। नितिन रैकवार के हिंगलिश गीत को गाया है अभिजीत,
जोली मुखर्जी और हेमा सरदेसाई ने। इसमें से जोली और हेमा ऊंची
पट्टी पर गाने वाले गायक हैं। अभिजीत ने भी कई गीत ऊंची पट्टी
पर गाये हैं मगर वे ऊंची पट्टी वालों की जमात में शामिल नहीं किये
जाते। एक आवाज़ और है इस गीत में-अलका याग्निक की जो दूसरे
अंतरे के समय प्रकट होती हैं।

गोवा की संस्कृति से ओतप्रोत ये गीत पुराने गोवा और आधुनिक गोवा
के बदलावों के बीच सेतु का काम सा करता दिखाई देता है। गीत के
बोलों पर ज्यादा दिमाग ना खपायें, खाली धुन का आनंद लेकर काम
चलाया जा सकता है। रे रे रे री रा रा गाने वाला गायक ऐसी आवाजें
निकाल रहा है जैसे उसको कब्जियत की शिकायत हो । कुल मिला के
गीत आकर्षक है और देखने में बढ़िया लगता है अपने नृत्य की वजह
से। आप अगर आवाज़ बंद करके सुनेंगे इस गीत को तो लगेगा किसी
बहुराष्ट्रीय कंपनी के उत्पाद का विज्ञापन देख रहे हों। आपको विभिन्न देशों
के जीव इस गीत में थिरकते नज़र आयेंगे। मिस्त्र की सुंदरी सी वेशभूषा
में युवती के साथ टावेल लपेटे चश्मा लगाये अपना हिन्दुस्तानी भाई
भी नज़र आएगा इस गीत में। गीत काफी महंगे सेट पर फिल्माया गया
है और इसका फिल्मांकन उत्तम कोटि का है।

गीत में नायक को पुरानी यादों के साये में घिरा हुआ दिखाया जाता है।
उत्सवी माहौल में वो दुखी है और अपने बचपन को याद कर रहा है।




गीत के बोल :

जिंदा है हम तो, तेरे ही लव से,
नहीं तो मर जाता डार्लिंग हम कब से
दिल ना तोड़ो, मुंह ना मोड़ो ,
ओ मारिया ओ मारिया

जिंदा है हम तो, तेरे ही लव से,
नहीं तो मर जाता डार्लिंग हम कब से
दिल ना तोड़ो, मुंह ना मोड़ो ,
ओ मारिया ओ मारिया

ओ रम्भा... ओ सम्भा...
इतना मुस्का नको मारो हमें, ऐसी बातों से डर लगता हमें
तुम प्यार कैसे, बोलो करेगा, डरता है क्यूँ मारिया
आईला साला हमपे मरता है ये, लगता है लव हमको करता है ये
यूँ न डरेगा, हम तो कहेगा, तुम सा नहीं मारिया

जिंदा है हम तो, तेरे ही लव से,
नहीं तो मर जाता डार्लिंग हम कब से
दिल ना तोड़ो, मुंह ना मोड़ो ,
ओ मारिया ओ मारिया

रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु
ओ साहिबा तुम भुलाना नहीं, दिल में आ के दूर जाना नहीं
दिल जो लिया है, दिल भी दिया है, बेवफा हम नहीं
ओ दिल जो तोड़ेगा हम कुछ कर जायेगा, लगता है हम तो मर जायेगा
तुमसे मोहब्बत, हमको है कितना, कैसे कहें मारिया
ओ रम्भा... ओ सम्भा.... रु रु....

रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु

जिंदा है हम तो, तेरे ही लव से,
नहीं तो मर जाता डार्लिंग हम कब से
दिल ना तोड़ो, मुंह ना मोड़ो ,
ओ मारिया ओ मारिया
..............................
Zinda hain hum to-Josh 2000

Tuesday, 11 January 2011

जब तक रहेगा समोसे में आलू-मिस्टर और मिसेज़ खिलाडी १९९७

आलू, भालू, कचालू की तुकबंदी वाला ये गीत अगर आपने अपने
रेडियो पर नहीं सुना तो पडोसी के रेडियो पर अवशय ही एक बार
सुन लिया होगा। जैसा कि हम बतला चुके हैं कि खिलाडी श्रेणी की
फ़िल्में बहुत आयीं बीच में। ऐसी फिल्मों के आने के बाद गीतों की
एक और श्रेणी निर्मित हो गई-खिलाडी हिट्स। प्रस्तुत गीत वैसे
एक हिट गीत माना जाता है, आप या मैं ना मानें तो भी इसकी
सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। गीतकार हैं आनंद बक्षी और
संगीत है अन्नू मालिक का। इस तेज़ मसाले(गति) वाले फ़िल्मी
समोसे(गीत) को खाया(गाया) है अभिजीत और पूर्णिमा ने। गीत
चर्चित होता है तो गीत के में तरह तरह कि टिप्पणियां भी सुनने
पढने को मिलती हैं । फिल्म के सेहतमंद निर्देशक डेविड धवन को
ये गीत इतना पसंद आया कि उन्होंने फिल्म कि नायिका का नाम
ही शालू रख दिया। कोई इस गीत को outrageous(अपमानजनक,
अत्याचारी, चौंकाने वाला) कहता है तो कोई इसे funny कहता है।
आप जो चाहे इसे कह सकते हैं।



गीत के बोल:

जब तक रहेगा समोसे में आलू
जब तक रहेगा समोसे में आलू
तेरा रहूँगा ओ मेरी शालू

जब तक रहेगा समोसे में आलू
चिपकी रहेगी तुझसे ये शालू

जब तक रहेगा समोसे में आलू
तेरा रहूँगा ओ मेरी शालू

हाय चटनी बिना लागे समोसा फीका
चटनी भी आएगी कर ले भरोसा
हाय चटनी बिना लागे समोसा फीका
चटनी भी आएगी कर ले भरोसा
मैं तेरी इडली हूँ तू मेरा डोसा
हो जाए फिर गरम एक बोसा

ना ना अरे ना ना अरे ना ना अरे ना ना
हाँ हाँ अरे हाँ हाँ अरे हाँ हाँ अरे हाँ

जब तक रहेगा समोसे में आलू
तेरा रहूँगा ओ मेरी शालू

जब तक रहेगा समोसे में आलू
चिपकी रहेगी तुझसे ये शालू

जब तक रहेगा समोसे में आलू
तेरा रहूँगा ओ मेरी शालू

तेरे लिए की है सबसे लड़ाई
क्या देखता है पकड़ ले कलाई
तेरे लिए की है सबसे लड़ाई
तो क्या देखता है पकड़ ले कलाई
रे मेरी मोहब्बत तुझे खींच लायी
मेरे बाप का तू गया बन जमाई

ना ना अरे ना ना अरे ना ना अरे ना ना
हाँ हाँ अरे हाँ हाँ अरे हाँ हाँ अरे हाँ

जब तक रहेगा समोसे में आलू
तेरा रहूँगा ओ मेरी शालू

जब तक रहेगा समोसे में आलू
चिपकी रहेगी तुझसे ये शालू

जब तक रहेगा समोसे में आलू
तेरा रहूँगा ओ मेरी शालू

जब तक रहेगा समोसे में आलू
तेरा रहूँगा ओ मेरी शालू

जब तक रहेगा समोसे में आलू
चिपकी रहेगी तुझसे ये शालू
.........................................
Jab tak rahega samose mein aaloo-Mr. & Mrs. Khiladi 1997

Wednesday, 15 December 2010

होने लगा होने लगा-कुछ तो है २००२

एकता कपूर फिर से सुर्ख़ियों में हैं। इसलिए "क्यूंकि वे एकता कपूर हैं"
एकता कपूर के किसी सीरियल का शीर्षक गीत नहीं सुनवाने जा
रहे हैं आपको बल्कि उनके भ्राता श्री के ऊपर फिल्माया गया एक
गीत सुनवा रहे हैं आपको।

सुनिए फिल्म "कुछ तो है" से एक गीत। फिल्म में कुछ तो ज़रूर है।
संगीत अपेक्षाकृत अच्छा है इसका। एक धाम-धामा-धाम गीत
आपको सुनवा ही चुके हैं इस फिल्म का-डिंग डोंग डिंग गीत में
आपको दो अभिनेत्रियाँ दिखेंगी(बहुत सी युवतियां और भी हैं
जिनको ना मैं पहचानता हूँ ना आप पहचान पाएंगे) । शादी के
अवसर पर ये गीत गाया जा रहा है। जैसा कि बॉलीवुड का पुराना
अंगूठे वाला नियम(thumb rule)कहता है-इस शादी की भव्यता
में भी कोई कमी नहीं है। अन्नू मलिक ने इस गीत के संगीत में
सितार और बांसुरी का भी प्रयोग किया है। बोल समीर के हैं और
गीत गाया है सुनिधि चौहान, प्रिया भट्टाचार्य और ढेर सारी जनानी
आवाजों वाले कोरस ने।



गीत के बोल:

शर्म से कह रही हैं चूड़ियाँ, आ सनम
अब मिटा दूरियां, हाँ
होने लगा होने लगा होने लगा होने लगा होने लगा
ओये होए होए प्यार मुझे होने लगा
प्यार मुझे होने लगा

खोने लगा खोने लगा खोने लगा खोने लगा खोने लगा
ओये होए होए दिल मेरा खोने लगा,
दिल मेरा खोने लगा

ओ हो हो हो हो हो हो हो, हो हो, ओ ओ

कोरस की लम्बी सी हूँ हाँ

ओ हो हो हो हो हो हो हो, हो हो, ओ ओ
ओ हो हो हो हो हो हो हो, हो हो, ओ ओ

मेरा मन मेरा तन सिर्फ तेरा सजन
तू मेरी धडकनों में बसा है
खोयी हूँ ख्वाबों में अब तो शाम-ओ-सहर
मेरी पलकों में तू ही छुपा है
तू मुझे मिल गया हर ख़ुशी मिल गई
ये मेरी चाहतों कि दुआ है
पायलें पैरों की बज रही
रिश्तों की डोलियाँ सज रही, हाँ
आने लगा आने लगा आने लगा आने लगा आने लगा
ओये होए होए चैन मुझे आने लगा,
चैन मुझे आने लगा

ओये होए होए प्यार मुझे होने लगा,
प्यार मुझे होने लगा
खोने लगा खोने लगा खोने लगा खोने लगा खोने लगा
ओये होए होए दिल मेरा खोने लगा,
दिल मेरा खोने लगा

ओ हो हो हो हो हो हो हो, हो हो, ओ ओ

थोड़े दिन दूरी थी, फिर भी जान-ए-वफ़ा
हर घडी रात दिन पास थे हम
यादों के सायें में हर कदम संग थे
चाहतें ना कभी हुई कम
हम मिले जो यहाँ मिल गए दो जहाँ
ना जुदा अब कभी होंगे जानम
तू मेरे सामने आ गया
देख के क्या नशा छा गया, हाँ
जाने लगा जाने लगा जाने लगा जाने लगा जाने लगा

ओ होए होए दर्द मेरा जाने लगा, दर्द मेरा जाने लगा
ओ होए होए प्यार मुझे होने लगा, प्यार मुझे होने लगा
खोने लगा खोने लगा खोने लगा खोने लगा खोने लगा
ओ होए होए दिल मेरा खोने लगा, दिल मेरा खोने लगा
ओ हो हो हो हो हो हो हो, हो हो, ओ ओ

Friday, 10 December 2010

ऐ दिल दिल की दुनिया में-यादें २००१

आपको फिल्म गोलमाल(नई) का स्नेहा पन्त का गाया
एक गीत सुनवाया था २-३ पोस्ट पहले। आइये गायिका
स्नेहा पन्त के बारे में कुछ जानें। कुछ रीमिक्स वगैरह
गाने के बाद और स्टेज पर शो करने के बाद उन्हें फिल्मों
के लिए गाने का मौका मिला।

थोडा और पीछे चलते है। धारावाहिक-सा रे गा मा आपने
ज़रूर सुना और देखा होगा। ये जब TVS कंपनी द्वारा
प्रायोजित था तब इसका नाम था- टी वी एस सा रे गा मा।
उस समय वो एक फाइनल में विजेता चुनी गयीं थीं।
किराना घराने के कलाकारों से शास्त्रीय संगीत सीखने
के बाद स्नेहा को कल्याणजी(कल्याणजी आनंदजी
संगीतकार द्वय में से बड़े भाई) के सान्निध्य में काफी
कुछ गीत गायन की बारीकियां सीखने को मिलीं।
कल्याणजी भाई वैसे भी कई प्रतिभाओं को सामने
ला चुके हैं। इनमे साधना सरगम का नाम प्रमुख है।
कल्याणजी भाई के साथ उन्होंने कई स्टेज शो भी
किये हैं। स्टेज वाला कोंफिड़ेंस उनकी आवाज़ में
बखूबी झलकता है और आवाज़ एकदम सधी हुई
सुनाई पढ़ती है ।

आइये फिल्म सौदागर के गाने का रीमिक्स देखने जिसमे
आवाज़ स्नेहा की है उसके बाद टोपिक को आगे बढ़ाएंगे।
इस रीमिक्स में खरखरी आवाज़ वाला कौन है मुझे इसकी
जानकारी नहीं, आपको हो तो मेरा ज्ञानवर्धन अवश्य ही
कीजियेगा।



संगीतकार अन्नू मालिक के साथ भी उन्होंने कुछ स्टेज प्रोग्राम किये
उसका सिला उन्हें अवश्य मिला। फिल्म यादें का एक मधुर गीत उनके
खाते में आ गया। गीत वाकई मधुर है और फिल्म ना चलने की सूरत
में अनसुना सा रह गया। गीत की विशेषता ये है की इसमें स्नेहा पन्त
स्वयं स्टेज पर ये गीत गाती हुई आपको दिखाई देंगी। अन्नू मालिक
पहले भी ऐसे करिश्मे कर चुके हैं। याद कीजिये-बाज़ीगर में उन्होंने
विनोद राठोड को परदे पर गाते दिखाया था ये यूँ कहिये फिल्म के
निर्देशक से कह कर ऐसा इन्तेजाम करवाया था। जो भी हो इस तरह
के कारनामों से कलाकार को प्रसिद्धि ज़रूर मिलती है और ये एक
अच्छी पहल है। पार्श्व गायन में कई बार गायक का परिचय आम
जनता तक नहीं पहुँच पाता अभी भी ऐसे हजारों फिल्म प्रेमी हैं जो
कोई गीत सुनकर याद करते हैं-धर्मेन्द्र ने या अमुक कलाकार ने
कितना बढ़िया गाया था फिल्म में। उनको यही लगता है कि गीत
नायक नायिका ही गाते हैं।

गीत आनंद बक्षी की रचना है और संगीतकार का नाम आप अब तक
जान ही चुके होंगे। इस गीत में उनका साथ दिया है उदित नारायण ने
और ऊंची पट्टी पर गाने में सिद्धहस्त कलाकार के. के. ने । आइये
फिल्म यादें का गीत देखें और सुनें। के. के. इस गीत में बिलकुल
ऐ. आर. रहमान के कुम्भ के मेले में बिछड़े हुए भाई वाले अंदाज़ में
गा रहे हैं। अरे भैया ओरिजनल मौजूद है, काहे कसरत कर रहे हैं आप ?



गीत के बोल:

आ आ आ
आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ

ऐ दिल दिल की दुनिया में
ऐसा हाल भी होता है
बाहर कोई हँसता है
अन्दर कोई रोता है
ऐ दिल दिल की दुनिया में
ऐसा हाल भी होता है
बाहर कोई हँसता है
अन्दर कोई रोता है

ऐ दिल, कोई पहचाना नहीं
किसी ने ये माना नहीं
किसी ने ये जाना नहीं
किसी को बताना नहीं
दर्द छुपा है कहाँ

ऐ दिल दिल की दुनिया में,
ऐसा हाल भी होता है
बाहर कोई हँसता है,
अन्दर कोई रोता है

ओ , हे, एह, एह हे
तूने मुझसे वफ़ा नहीं की
तुझको कैसे वफ़ा मिलेगी
तूने मुझको दर्द दिया है
तुझको कैसे दवा मिलेगी

सीने में उठते है अरमान ऐसे
दरिया में आते है तूफ़ान जैसे
कभी कभी खुद ही माझी
कश्ती को डुबोता है

ऐ दिल दिल की दुनिया में
ऐसा हाल भी होता है
बाहर कोई हँसता है
अन्दर कोई रोता है

कांटे चुन कर तेरा दामन
फूलों से मैं भर जाऊंगा
इससे बड़ी सज़ा क्या होगी
माफ़ तुझे मैं कर जाऊंगा
आ एह आ

होगी किसी को पहचान कैसे
प्यार में होते हैं कुर्बान कैसे
हमको यह मालूम ना था
प्यार भी एक समझौता है

ऐ दिल, दिल की दुनिया में
ऐसा हाल भी होता है
बाहर कोई हँसता है
अन्दर कोई रोता है

.........................................
Ae dil dil ki duniya mein-Yadein 2001

Wednesday, 1 December 2010

हम तो दिल से हारे-जोश २०००

दौर चाहे जो भी हो, अधिकतर गीतों में दिल(या कुछ और)
लगाने की बात ही सुनाई देती है। इस मामले में हॉलीवुड
और बॉलीवुड जुदा हैं। यहाँ हर चीज़ का मतलब दिल होता
है। कभी दिल जीते तो कभी दिल हारे। दिल ने शायद सारे
काम कर लिए हैं हिंदी गीतों में सिवाए खाना खाने के,
पानी पीने के और सुलभ कोम्प्लेक्स को इस्तेमाल करने के ।
दिल ने कई मुकाम भी तय किये, वो गन्ने के खेत से
लेकर सरसों के खेत तक घूम आया।

तो सुनिए एक गीत फिल्म जोश से, ये गीत गाया है अलका
याग्निक और उदित नारायण ने। फिल्माया गया है इसको
चंद्रचूड सिंह और ऐश्वर्या राय पर। गीत लिखा है समीर ने
और धुन बनाई है अन्नू मलिक ने। इस गीत में मँडोलिन
का अच्छा प्रयोग किया गया है।

चंद्रचूड सिंह सबसे पहले ऐ बी सी एल (अमिताभ बच्चन की एक
कंपनी जो आजकल बंद है) की खोज थे और उसकी पहली फिल्म-
तेरे मेरे सपने में दिखाई दिए। गुलज़ार की फिल्म माचिस और
एक अन्य मसाला फिल्म -'सिलसिला है प्यार का' में दिखने के
बाद वो कहाँ हैं और क्या कर रहे हैं इसकी चिंता शायद फ़िल्मी
मसाला अख़बारों और रिसालों को भी नहीं है।



गीत के बोल:

तेरी याद में पागल पल पल रोता है
बिन तेरे ना जगे यह ना सोता है
अक्सर तन्हाई में तुझे पुकारे,
ना जोर दिल पे चले

हारे हारे हारे,हम तो दिल से हारे
हारे हारे हारे,हम तो दिल से हारे
तेरी याद में पागल पल पल रोता है
बिन तेरे ना जगे यह ना सोता है
अक्सर तन्हाई में तुझे पुकारे,
ना जोर दिल पे चले
हारे हारे हारे,हम तो दिल से हारे
हारे हारे हारे,हम तो दिल से हारे

अब जाने हम, ये प्यार क्या है,
दर्द-ए-जिगर मुश्किल बड़ा है,
सुनता नहीं कहना कोई भी
दिल पे खबर, जिद पे अड़ा है
समझाऊँ कैसे उसे जान-ए-जान

हारे हारे हारे,हम तो दिल से हारे
हारे हारे हारे,हम तो दिल से हारे

हर आइना टूटा लगे है,
सच भी हमें झूठा लगे है
जाने कहाँ हम आ गए हैं,
सारा जहाँ रूठा लगे है
क्या दर्द दिल ने दिया क्या कहीं

हारे हारे हारे,हम तो दिल से हारे
हारे हारे हारे,हम तो दिल से हारे

तेरी याद में पागल पल पल रोता है
बिन तेरे ना जगे यह ना सोता है
अक्सर तन्हाई में तुझे पुकारे,
ना जोर दिल पे चले

हारे हारे हारे,हम तो दिल से हारे
हारे हारे हारे,हम तो दिल से हारे
हारे हारे हारे,हम तो दिल से हारे

Tuesday, 30 November 2010

इस तरह आशिक़ी का असर-इम्तिहान १९९४

पहले सोचा आपको पुरानी ७० के दशक वाली इम्तिहान
का गीत सुन्वाओं फिर विचार बदला, सोचा सुननेवालों का
भी एक इम्तिहान लेना चाहिए। अरे भाई बहुत से दर्शक इस
फिल्म को देख कर इम्तिहान दे चुके हैं आप एक गीत नहीं
सुन सकते ?

ये उस दौर की फिल्म है जब शर्मिला टैगोर पुत्र उर्फ़ नायक
सैफ अली खान "सेफ" माने जाते थे। वो इसलिए कि एक्टिंग
आये या ना आये, फिल्म पिटे चाहे हिट हो उनको फ़िल्में मिलती
रहेंगी, ऐसा कई लोगों का मानना था। इस मामले में बच्चन पुत्र
उतना भाग्यशाली नहीं रहे। खैर एक्टिंग ना इस फिल्म की
नायिका से बनी ना नायक से, अलबत्ता गीत ने ही हिट होकर
कुछ फिल्म में कमाल दिखाया। गीत फायज़ अनवर का है और
धुन अनु मालिक की। ये अनु के भी उस दौर का संगीत है जिस
दौर में वो हर दूसरी फिल्म के संगीत में बाज़ीगर के संगीत की
झलक दिखलाने कि कोशिश करते। गीत गाया है कुमार सानू ने।

गीत फिल्माया गया है सनी देओल पर। ये एक चमत्कारी गीत भी है।
जैसे ही हीरो गिटार बजाता है उसमें से प्यानो की आवाज़ निकलती है।
ऐसा करने के बाद वो टार्ज़न की माफिक खिड़की से कूदकर फर्श पर
आ जाता हैं। या कौनसा गिटार है भाई जो पूरे गीत में प्यानो की
आवाज़ निकाल रहा है। विचित्र वीणा के अविष्कारक विश्व मोहन
भट्ट ने शायद ये गीत नहीं देखा है।



चलते चलते आपको इस गीत के फ़्रांसिसी भाई से भी मिलवा देते हैं:
Yves Montand - Les Feuilles Mortes
ये भाई हालाँकि उम्र में बड़ा है और इसकी पैदाइश san १९५१ की है।






गीत के बोल:

इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा

इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा

मैं दीवाना बन गया हूँ कैसी ये मुहब्बत है
ज़िन्दगी से बढ़कर अब तेरी ज़रूरत है
मुझको तू चाहिए तेरा प्यार चाहिए
एक बार नहीं सौ बार चाहिए
हर साँस मैं अपनी तुझपे लुटाऊँगा
दिल के लहू से तेरी माँग सजाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा

इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा

प्यार क्या है दर्द क्या है दीवाने समझते हैं
इश्क़ में जलने का मतलब आशिक़ ही समझते हैं
मैं तड़पता हूँ तुझसे कुछ न कहूँ
बिन कहे भी मगर मैं तो रह न सकूँ
इस बेखुदी में आखिर कहाँ चैन पाऊँगा
मर के भी मैं तुझसे जुदा हो न पाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा

इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा

Wednesday, 24 November 2010

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे-आपस की बात १९८१

अनजान की बात छिड़ी है तो उनका लिखा हुआ एक और गीत
सुनें जो कर्णप्रिय है और ८० के दशक से है। ये राज बब्बर पर
फिल्माया गया है। राज बब्बर उन दिनों नवागंतुकों की कतार
में शामिल थे। बाद में उन्होंने अपना अलग मुकाम बना लिया।

फ़िल्में इतनी बन चुकी हैं की किस किस का नाम और विवरण
याद रखा जाए। ये समस्या लगभग सभी संगीत प्रेमियों को आती
है। मैं तो ये भी भूल चुका था कि इस फिल्म में राज बब्बर के साथ
पूनम ढिल्लों हैं। फिल्म का नाम है आपस की बात। इसमें संगीत
अन्नू मलिक का है, चौंक गए ना। जी हाँ अन्नू मलिक स्वयं अपने
संगीत पर नज़र डालते होंगे तो चौंक जाते होंगे। उन्होंने हमेशा
समय समय पर श्रोताओं को चकित किया है। उसकी एक वजह
साफ़ है-जड़ें मजबूत हैं। सरदार मलिक पुत्र होने का कुछ तो फ़ायदा
होना चाहिए ना। ये बात और है कि उन्होंने कई ऐसी ऊंची मंजिलें तय
कर ली है आज, जिसके बारे में उनके पिता शायद सपने ही देखा करते
होंगे। अन्नू मालिक ने अपनी गायक बनने की हसरत भी पूरी
कर ली।

गीत किशोर कुमार का गाया हुआ है और राज बब्बर को किशोर कुमार
के १-२ गीत ही मिले होंगे परदे पर होंठ हिलाने के लिए। ये निस्संदेह
अन्नू मलिक की एक बेहतर रचना है।




गीत के बोल:

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे,
दोनों आलम में लाजवाब लगे
दिन को देखूं तो आफताब लगे,
शब् को देखूं तो माहताब लगे

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे

रोज मिलते हो पर नहीं मिलते,
ऐसा मिलना भी मुझको ख्वाब लगे
पढ़ता रहता हु तेरी सूरत को,
तेरी सूरत मुझे किताब लगे

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे

तेरी आँखों की मस्तियाँ तौबा,
मुझको छलकी हुयी शराब लगे
जब भी चमके घटा में बिजली,
मुझको तेरा ही वो शबाब लगे

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे

तुझको देखूं तो किस तरह देखूं,
रुख पे किरणों के सौ नकाब लगे
प्यार शायद इसी को कहते हैं,
एक मुझसे ही क्यों हिजाब लगे

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे

Tuesday, 23 November 2010

मेरे ख्यालों की मलिका-जोश २०००

ये कुछ कुछ युवाओं के सपने जैसा है । एक आम युवा के अन्दर कैसी
भावनाएं उमड़ती हैं उसे दर्शाने का बेहतरीन प्रयास किया गया है इस
गीत में। चंद्रचूड सिंह ने अभिनय भी ठीक किया है इस गीत में। अभिजीत
की आवाज़ में ये मधुर गीत फिल्म जोश से है। इसे समीर ने लिखा है और
अन्नू मलिक ने संगीतबद्ध किया है।

कहते हैं प्यार अँधा होता है, वाकई, आपके ऊपर कोई झूठे बेर की गुठली
थूक दे तो वो भी फूल के माफिक लगती है। इस गीत का फिल्मांकन बढ़िया
है और यदा कदा मैं इसको देख लिया करता हूँ।




गीत के बोल:

मेरे ख्यालों की मलिका,
मेरे ख्यालों की मलिका
चारों तरफ तेरी छैय्याँ रे,
थाम ले आ के बैय्याँ
चारों तरफ तेरी छैय्याँ रे, छैय्याँ

मेरे ख्यालों की मलिका, मेरे ख्यालों की मलिका
चारों तरफ तेरी छैय्याँ रे, थाम ले आ के बैय्याँ
चारों तरफ तेरी छैय्याँ रे, छैय्याँ

आये फूलों के रस में नहा के,
लाई भीनी सी ख़ुशबू चुरा के
आये फूलों के रस में नहा के,
लाई भीनी सी ख़ुशबू चुरा के
तेरी आँखों में है हल्का सा नशा,
तेरा रूप मेरी नजरूं में बसा

मेरे ख्यालों की मलिका,
मेरे ख्यालों की मलिका
चारों तरफ तेरी छैय्याँ रे,
थाम ले आ के बैय्याँ
चारों तरफ तेरी छैय्याँ रे, छैय्याँ


जादू छाया है तेरा जादू,
काबू, दिल पे नहीं है काबू
जादू छाया है तेरा जादू,
काबू, दिल पे नहीं है काबू
सपनों की परी इतना तो बता,
रहती है कहाँ, तेरा नाम है क्या

मेरे ख्यालों की मलिका
चारों तरफ तेरी छैय्याँ रे,
थाम ले आ के बैय्याँ
चारों तरफ तेरी छैय्याँ रे, छैय्याँ

मेरे ख्यालों की मलिका
चारों तरफ तेरी छैय्याँ रे,
थाम ले आ के बैय्याँ
चारों तरफ तेरी छैय्याँ रे, छैय्याँ
.................................
Mere khayalon ki malika-Josh 2000

Saturday, 20 November 2010

अपुन बोला-जोश २०००

बॉलीवुड के नायक नायिकाओं को गाने का शौक
अपने बुजुर्गों से लगा है। प्रथम पीढ़ी के अभिनेता
गायन भी किया करते थे। जब तक पार्श्व गायन
अस्तित्व में नहीं आया था नायक नायिकाओं को
गीत खुद ही गाने पढ़ते। पार्श्व गायन आने के बाद भी
कुछ नायक नायिकाओं ने गीत गाये उनमे नायक
राज कपूर, दिलीप कुमार, अभिनेत्री नूतन प्रमुख हैं।
नूतन ने तो स्नेहल भाटकर की एक फिल्म के लिए
४ गीत गाये हैं। नए दौर में आपने आमिर खान का
"क्या बोलती तू" सुना। परंपरा को जारी रखते हुए
शाहरुख़ ने भी फिल्म जोश के लिए एक गीत गा लिया।
पेश है वही गीत जिसमे उनका साथ दिया है गायिका
हेमा सरदेसाई ने। नितिन रैकवार के लिखे बोलों को
धुन पहनाई है अन्नू मालिक ने।



गीत के बोल:

अपुन बोला तू मेरी लैला
वो बोली फेंकता है साला
अपुन जब ही सच्ची बोलता
ऐ उसको झूठ काई को लगता है
ये उसका स्टाइल होइंगा
होठों पे ना दिल में हाँ होइंगा
ये उसका स्टाइल होइंगा
होठों पे ना दिल में हाँ होइंगा
आज नहीं तो कल बोलेगी
ऐ तू टेंशन काई को लेता रे

अपुन बोला तू मेरी लैला
वो बोली फेंकता है साला
अपुन जब ही सच्ची बोलता
ऐ उसको झूठ काई को लगता है

एक काम कर उस को बुला,
होटल में खाना खिला
समुन्दर किनारे लेजा के रे, बोल
बोल दे खुल्लम खुल्ला
अरे मैंने उसे बुलाया,
कोकम करी खिलाया
फिर देख के मौका,मारा चौका
दिल की बात बताया रे

ऐ क्या बताया रे?

अपुन बोला तू मेरी लैला
वो बोली फेंकता है साला
अपुन जब ही सच्ची बोलता
ऐ उसको झूठ काई को लगता है

ये उसका स्टाइल होइंगा
होठों पे ना दिल में हाँ होइंगा
ये उसका स्टाइल होइंगा
होठों पे ना दिल में हाँ होइंगा
आज नहीं तो कल बोलेगी
ऐ तू टेंशन काई को लेता रे

अपुन बोला तू मेरी लैला
वो बोली फेंकता है साला
अपुन जब ही सच्ची बोलता
ऐ उसको झूठ काई को लगता है

सौ लफड़े देखे मैंने,
तेरा लफड़ा हट के है
सब कुछ क्लेअर होके भी,
तू किस में अटके है

अपुन बोला तू मेरी लै...

घर से भगा के ले जा,
समझेगी तेरी बात तो
अरे, घर से भगा के ले गया था,
उस को आधी रात को

ऐ सैटिंग हुई क्या?

अपुन बोला तू मेरी लैला
वो बोली फेंकता है साला
अपुन जब ही सच्ची बोलता
ऐ उसको झूठ काई को लगता है

ये उसका स्टाइल होइंगा
होठों पे ना दिल में हाँ होइंगा
ये उसका स्टाइल होइंगा
होठों पे ना दिल में हाँ होइंगा
आज नहीं तो कल बोलेगी
ऐ तू टेंशन काई को लेता रे

अपुन बोला तू मेरी लैला
वो बोली फेंकता है साला
अपुन जब ही सच्ची बोलता
ऐ उसको झूठ काई को लगता है
 
 
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