पुरानी यादें कभी-कभी तीव्र गति से आती जाती हैं। फिल्म सल्तनत
के गीत सुनते हुए कल्याणजी आनंदजी के ८० के दशक के गीतों
पर ध्यान गया। फिल्म क़ुरबानी के गीत याद आये और याद आयीं
एक खूबसूरत चेहरे और आवाज़ की मालकिन नाज़िया हसन।
प्रस्तुत गीत एक प्राइवेट एल्बम से है जिसका संगीत बिद्दू ने
तैयार किया है। इस एल्बम-डिस्को दीवाने ने बिक्री के सारे
रिकोर्ड तोड़े थे ८० के दशक में।
गीत के बोल:
हवा चलती रहे, लोग मिलते रहें
लेकिन मेरा दिल
लेकिन मेरा दिल,
मेरा दिल रो रहा है
लेकिन मेरा दिल,
मेरा दिल रो रहा है
तुम ना हो तो मैं कुछ भी नहीं
सूनी सूनी सी मेरी ज़िन्दगी
तुम ना हो तो मैं कुछ भी नहीं
सूनी सूनी सी मेरी ज़िन्दगी
क्या है ये जीना
तेरे बिन ऐ सनम
क्या है ये जीना
तेरे बिन ऐ सनम
लेकिन मेरा दिल,
मेरा दिल रो रहा है
लेकिन मेरा दिल,
मेरा दिल रो रहा है
ऐसे क्यूँ रूठ गये हो तुम
अब तो भूल जाओ सारा गम
ऐसे क्यूँ रूठ गये हो तुम
अब तो भूल जाओ सारा गम
आ जाओ पास मेरे
मेरे पास सनम
आ जाओ मेरे पास
मेरे पास सनम
लेकिन मेरा दिल,
मेरा दिल रो रहा है
लेकिन मेरा दिल,
मेरा दिल रो रहा है
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Lekin mera dil-Disco Deewane-Nazia Hasan
Monday, 30 May 2011
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