फिल्म एक मुसाफिर एक हसीना का गीत जनता को इतना भाया कि ये
एक पैरोडी में भी सुनाई दिया। पंजाबी फिल्म सात सालियाँ के एक गीत
में शुरुआत बहुत शुक्रिया गीत से होती है। बाकी के गीत इस प्रकार
से हैं जिनकी टांग मरोड़ी गयी है- १)अँखियाँ मिला के जिया भरमा के-रतन,
२) ये इश्क इश्क है इश्क इश्क-बरसात की रात
गीत गा रहे हैं मोहम्मद रफ़ी, सुमन कल्याणपुर और कमल बारोट । गीत
लिखा है नक्श लायलपुरी ने और इसकी धुन बनाई है एस मदन ने।
गीत के बोल:
अगर आपके समझ आयें तो मुझे भी बतला दें, कृपया। उसके बाद मैं भी
बोल प्रदान करने वाले के लिए गाऊंगा-बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी ।
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Monday, 22 August 2011
Monday, 18 July 2011
उल्फत में ज़माने की हर रस्म २-कॉल गर्ल १९७४
आपने किशोर की आवाज़ में कॉल गर्ल का सदाबाहर गीत सुना कुछ
पोस्ट पहले. अब सुनिए उसी गीत का लता मंगेशकर वाला संस्करण.
नायिका और नायक क्रमशः वही हैं इसमें -जाहिरा और विक्रम. अमर
नायक के चरित्र का नाम है और माया नायिका के चरित्र का. विक्रम
की संवाद अदायगी ऐसी है जैसे कोई परचा पढ़ा जा रहा हो.
नायिका फिल्म में कॉल गर्ल के मिरोल में है. अब नायक की पेशकश से
वो उलझन में पढ़ गयी है. आगे गीत है उसमें क्या होगा देखिये .
गौर फरमाईयेगा कि इसके बोल पुरुष आवाज़ वाले वर्जन से अलग हैं.
मुझे दोनों गीत समान रूप से पसंद हैं. दोनों के ही बोल लाजवाब हैं.
धुन तो एक समान है अतः ज्यादा कसीदाकारी न करते हुए इस पोस्ट
पर इधर ही ब्रेक दे देते हैं.
गीत के बोल:
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
फिर साथ मेरे आओ, ओ ओ ओ ओ ओ
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
दुनिया से बहुत आगे जिस राह पे हम होंगे
ये सोच लो पहले से हर मोड पे ग़म होंगे
है खौफ ग़मों से तो रुक जाओ, ठहर जाओ
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
मैं टूटी हुई कश्ती खुद पार लगा लूँगी
तूफ़ान के मौजों की पतवार बना लूँगी
मझधार का डर है तो साहिल पे, ठहर जाओ
उल्फ़त में ज़माने की, हर रस्म को ठुकराओ
दिल और कहीं दे कर तुम चाह बदल डालो
बेहतर तो यही होगा ये राह बदल डालो
दो चार क़दम चल कर मुमकिन है बहक जाओ
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
फिर साथ मेरे आओ, ओ ओ ओ ओ ओ
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
....................................
Ulfat mein zamane ki-Call Girl 1974
पोस्ट पहले. अब सुनिए उसी गीत का लता मंगेशकर वाला संस्करण.
नायिका और नायक क्रमशः वही हैं इसमें -जाहिरा और विक्रम. अमर
नायक के चरित्र का नाम है और माया नायिका के चरित्र का. विक्रम
की संवाद अदायगी ऐसी है जैसे कोई परचा पढ़ा जा रहा हो.
नायिका फिल्म में कॉल गर्ल के मिरोल में है. अब नायक की पेशकश से
वो उलझन में पढ़ गयी है. आगे गीत है उसमें क्या होगा देखिये .
गौर फरमाईयेगा कि इसके बोल पुरुष आवाज़ वाले वर्जन से अलग हैं.
मुझे दोनों गीत समान रूप से पसंद हैं. दोनों के ही बोल लाजवाब हैं.
धुन तो एक समान है अतः ज्यादा कसीदाकारी न करते हुए इस पोस्ट
पर इधर ही ब्रेक दे देते हैं.
गीत के बोल:
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
फिर साथ मेरे आओ, ओ ओ ओ ओ ओ
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
दुनिया से बहुत आगे जिस राह पे हम होंगे
ये सोच लो पहले से हर मोड पे ग़म होंगे
है खौफ ग़मों से तो रुक जाओ, ठहर जाओ
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
मैं टूटी हुई कश्ती खुद पार लगा लूँगी
तूफ़ान के मौजों की पतवार बना लूँगी
मझधार का डर है तो साहिल पे, ठहर जाओ
उल्फ़त में ज़माने की, हर रस्म को ठुकराओ
दिल और कहीं दे कर तुम चाह बदल डालो
बेहतर तो यही होगा ये राह बदल डालो
दो चार क़दम चल कर मुमकिन है बहक जाओ
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
फिर साथ मेरे आओ, ओ ओ ओ ओ ओ
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
....................................
Ulfat mein zamane ki-Call Girl 1974
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Sunday, 17 July 2011
उल्फत में ज़माने की हर रस्म को-कॉल गर्ल १९७४
सन १९७४ की फिल्म है कॉल गर्ल. फिल्म में विक्रम के साथ ज़ाहिरा
प्रमुख कलाकार हैं. फिल्म चली हो या न हो, प्रस्तुत गीत किशोर कुमार
के गाये सर्वाधिक लोकप्रिय गीतों में से एक है. जितने सुन्दर बोल नक्श
लायलपुरी के हैं उतनी ही बदिया धुन संगीतकार सपन जगमोहन ने बनाई
है. सपन जगमोहन के संगीतबद्ध ३ अच्छे गीत पहले आपको सुनवा चुके
हैं इस ब्लॉग पर. ये गीत समय के बंधन से मुक्त गीत है जिसे जब सुनो
बढ़िया ही लगता है.
आइये आनंद उठाया जाए किशोर कुमार के इस गीत का जिसे परदे पर विक्रम
गा रहे हैं. कुछ संगीत प्रेमियों की गीत के साथ कल्पननाये उगाने की आदत
होती है जैसे -फलां गीत राजेश खन्ना पर फिल्माया जाना था, फलां गीत
धर्मेन्द्र पर फिल्माया जाना था. एक कोशिश मैं भी कर लेता हूँ आज.
मेरी राय में विक्रम अच्छे लग रहे हैं इस गीत को गाते हुए, अगर वाकई किसी
और कलाकार की कल्पना आप करना चाहें की किसके ऊपर ये जंचता तो इस
मामले में मेरी पसंद होगी-देव आनंद. जिस तरीके की गायकी इस गीत में
है वो देव आनंद के ऊपर फिल्माए गए गीतों से मेल खाती है.
गीत की शुरुआत में जो माहिला कलाकार परदे पर विक्रम से बातें करते दिखाई
देती हैं उनका नाम है-उर्मिला भट्ट.
गीत के बोल:
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
क़दमों को ना रोकेगी, ज़ंजीर रिवाज़ों की
हम तोड़ के निकलेंगे, दीवार समाजों की
दूरी पे सही मंज़िल, दूरी से ना घबराओ
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
मैं अपनी बहारों को, रंगीन बना लूँगा
सौ बार तुम्हें अपनी, पलकों पे बिठा लूँगा
शबनम की तरह मेरे, गुलशन में बिखर जाओ
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
आ जाओ के जीने के, हालात बदल डालें
हम तुम ज़माने के, दिन रात बदल डालें
तुम मेरी वफ़ाओं की, एक बार क़सम खाओ
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
फिर साथ मेरे आओ, ओ ओ ओ ओ
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
...................................
Ulfat mein zamane ki-Call Girl 1974
प्रमुख कलाकार हैं. फिल्म चली हो या न हो, प्रस्तुत गीत किशोर कुमार
के गाये सर्वाधिक लोकप्रिय गीतों में से एक है. जितने सुन्दर बोल नक्श
लायलपुरी के हैं उतनी ही बदिया धुन संगीतकार सपन जगमोहन ने बनाई
है. सपन जगमोहन के संगीतबद्ध ३ अच्छे गीत पहले आपको सुनवा चुके
हैं इस ब्लॉग पर. ये गीत समय के बंधन से मुक्त गीत है जिसे जब सुनो
बढ़िया ही लगता है.
आइये आनंद उठाया जाए किशोर कुमार के इस गीत का जिसे परदे पर विक्रम
गा रहे हैं. कुछ संगीत प्रेमियों की गीत के साथ कल्पननाये उगाने की आदत
होती है जैसे -फलां गीत राजेश खन्ना पर फिल्माया जाना था, फलां गीत
धर्मेन्द्र पर फिल्माया जाना था. एक कोशिश मैं भी कर लेता हूँ आज.
मेरी राय में विक्रम अच्छे लग रहे हैं इस गीत को गाते हुए, अगर वाकई किसी
और कलाकार की कल्पना आप करना चाहें की किसके ऊपर ये जंचता तो इस
मामले में मेरी पसंद होगी-देव आनंद. जिस तरीके की गायकी इस गीत में
है वो देव आनंद के ऊपर फिल्माए गए गीतों से मेल खाती है.
गीत की शुरुआत में जो माहिला कलाकार परदे पर विक्रम से बातें करते दिखाई
देती हैं उनका नाम है-उर्मिला भट्ट.
गीत के बोल:
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
क़दमों को ना रोकेगी, ज़ंजीर रिवाज़ों की
हम तोड़ के निकलेंगे, दीवार समाजों की
दूरी पे सही मंज़िल, दूरी से ना घबराओ
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
मैं अपनी बहारों को, रंगीन बना लूँगा
सौ बार तुम्हें अपनी, पलकों पे बिठा लूँगा
शबनम की तरह मेरे, गुलशन में बिखर जाओ
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
आ जाओ के जीने के, हालात बदल डालें
हम तुम ज़माने के, दिन रात बदल डालें
तुम मेरी वफ़ाओं की, एक बार क़सम खाओ
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
फिर साथ मेरे आओ, ओ ओ ओ ओ
उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ
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Ulfat mein zamane ki-Call Girl 1974
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Friday, 4 February 2011
नज़र से फूल चुनती है नज़र-अहिस्ता अहिस्ता
नए चेहरों पर फिल्माया गया एक गीत पेश है। फिल्म रिलीज़
के वक़्त दोनों ही चेहरे नए थे। पद्मिनी कोल्हापुरे को ज़रूर जनता
पहचानने लगी थी तब तक। फिल्म का नाम है-अहिस्ता अहिस्ता
और प्रस्तुत गीत फिल्म का शीर्षक गीत है। फिल्म के गीत काफी
लोकप्रिय थे रिलीज़ के वक़्त और उसके बाद इक्का दुक्का गीत आज
भी सुनाई दे जाते हैं कभी। गीत नक्श लायलपुरी का लिखा हुआ है
और संगीत तैयार किया है खय्याम ने। आशा भोंसले और अनवर
इसके पार्श्व गायक हैं। नायक हैं शशि कपूर के सुपुत्र कुणाल कपूर।
गीत के बोल :
नजर से फूल चुनती हैं नजर
नजर से फूल चुनती हैं नजर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
दुआएं दे रहे हैं पेड, मौसम जोगिया सा हैं
तुम्हारा साथ है् जब से, हर एक मंझर नया सा हैं
दुआएं दे रहे हैं पेड, मौसम जोगिया सा हैं
तुम्हारा साथ है् जब से, हर एक मंझर नया सा हैं
हसीं लगने लगी हर रहगुजर,
आहिस्ता, आहिस्ता
बहुत अच्छे हो तुम, फिर भी हमे तुम से हया क्यों है
तुम ही बोलो हमारे दरमियाँ ये फासला क्यों हैं
बहुत अच्छे हो तुम, फिर भी हमे तुमसे हया क्यों है
तुम ही बोलो हमारे दरमियाँ ये फासला क्यों हैं
मजा जब हैं के तय हो ये सफर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
हमेशा से अकेलेपन में कोई मुस्कुराता हैं
ये रिश्ता प्यार का हैं, आसमां से बन के आता हैं
हमेशा से अकेलेपन में कोई मुस्कुराता हैं
ये रिश्ता प्यार का हैं, आसमां से बनके आता हैं
मगर होती हैं दिल को ये खबर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
नजर से फूल चुनती हैं नजर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
...................................................
Nazar se phool chunti hai nazar-Ahista ahista 1981
के वक़्त दोनों ही चेहरे नए थे। पद्मिनी कोल्हापुरे को ज़रूर जनता
पहचानने लगी थी तब तक। फिल्म का नाम है-अहिस्ता अहिस्ता
और प्रस्तुत गीत फिल्म का शीर्षक गीत है। फिल्म के गीत काफी
लोकप्रिय थे रिलीज़ के वक़्त और उसके बाद इक्का दुक्का गीत आज
भी सुनाई दे जाते हैं कभी। गीत नक्श लायलपुरी का लिखा हुआ है
और संगीत तैयार किया है खय्याम ने। आशा भोंसले और अनवर
इसके पार्श्व गायक हैं। नायक हैं शशि कपूर के सुपुत्र कुणाल कपूर।
गीत के बोल :
नजर से फूल चुनती हैं नजर
नजर से फूल चुनती हैं नजर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
दुआएं दे रहे हैं पेड, मौसम जोगिया सा हैं
तुम्हारा साथ है् जब से, हर एक मंझर नया सा हैं
दुआएं दे रहे हैं पेड, मौसम जोगिया सा हैं
तुम्हारा साथ है् जब से, हर एक मंझर नया सा हैं
हसीं लगने लगी हर रहगुजर,
आहिस्ता, आहिस्ता
बहुत अच्छे हो तुम, फिर भी हमे तुम से हया क्यों है
तुम ही बोलो हमारे दरमियाँ ये फासला क्यों हैं
बहुत अच्छे हो तुम, फिर भी हमे तुमसे हया क्यों है
तुम ही बोलो हमारे दरमियाँ ये फासला क्यों हैं
मजा जब हैं के तय हो ये सफर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
हमेशा से अकेलेपन में कोई मुस्कुराता हैं
ये रिश्ता प्यार का हैं, आसमां से बन के आता हैं
हमेशा से अकेलेपन में कोई मुस्कुराता हैं
ये रिश्ता प्यार का हैं, आसमां से बनके आता हैं
मगर होती हैं दिल को ये खबर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
नजर से फूल चुनती हैं नजर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
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Nazar se phool chunti hai nazar-Ahista ahista 1981
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Thursday, 20 January 2011
ये वही गीत है जिसको मैंने-मान जाइये १९७२
अकेले में यादें दोनों तरह की आया करती हैं-खुशनुमा और दुःख भरी।
ये गीत भी कुछ कुछ यादों की एकल प्रस्तुति सा है। देखिये और
पता लगाइए ।
फिल्म का नाम भी दुर्लभ सा है -मान जाइये। गीत किशोर कुमार
के सबसे मधुर और प्रभावी गीतों में से एक है। इसे फिल्माया गया
है जलाल आगा पर। मशहूर आगा के बेटे और फरीदा जलाल के भाई
जलाल आगा अपनी सीमित प्रतिभा के बावजूद लोगों को याद रह गए,
उनके पास बोलने वाली ऑंखें जो थीं। किशोर के ऐसे भारी आवाज़ वाले
गीत कुंदन लाल सहगल की याद दिला जाते हैं।
गीत के बोल:
ये वही गीत है जिसको मैंने धड़कन में बसाया है
ये वही गीत है जिसको मैंने धड़कन में बसाया है
तेरे होंठों से इसको चुरा कर होंठों पे सजाया है
ये वही गीत है जिसको मैंने धड़कन में बसाया है
ये वही गीत है ये वही गीत है
मैं ये गीत जब गुनगुनाया
सज गई है ख्यालों की महफ़िल
मैं ये गीत जब गुनगुनाया
सज गई है ख्यालों की महफ़िल
प्यार के रंग आँखों में छाये
प्यार के रंग आँखों में छाये
मुस्कुरायी उजालों की महफ़िल
मुस्कुरायी उजालों की महफ़िल
प्यार के रंग आँखों में छाये
मुस्कुरायी उजालों की महफ़िल
मुस्कुरायी उजालों की महफ़िल
ये वो नगमा है जो ज़िन्दगी में
रौशनी बन के आया है
तेरे होंठों से इसको चुरा कर होंठों पे सजाया है
ये वही गीत है ये वही गीत है
हो हो हो,
हो हो हो
मेरे दिल ने यही गीत गा कर
जब कभी तुझको आवाज़ दी है
मेरे दिल ने यही गीत गा कर
जब कभी तुझको आवाज़ दी है
फूल जुल्फों मीना पनी सजा कर
फूल जुल्फों मीना पनी सजा कर
तू मेरे सामने आ गई है
फूल जुल्फों मीना पनी सजा कर
तू मेरे सामने आ गई है
तू मेरे सामने आ गई है
तुझको अक्सर मेरी बेखुदी ने
सीने से लगाया है
तेरे होंठों से इसको चुरा कर होंठों पे सजाया है
ये वही गीत है जिसको मैंने धड़कन में बसाया है
तेरे होंठों से इसको चुरा कर होंठों पे सजाया है
ये वही गीत है ये वही गीत है
...........................................
Ye wahi geet hai jisko maine-Maan jaiye 1972
ये गीत भी कुछ कुछ यादों की एकल प्रस्तुति सा है। देखिये और
पता लगाइए ।
फिल्म का नाम भी दुर्लभ सा है -मान जाइये। गीत किशोर कुमार
के सबसे मधुर और प्रभावी गीतों में से एक है। इसे फिल्माया गया
है जलाल आगा पर। मशहूर आगा के बेटे और फरीदा जलाल के भाई
जलाल आगा अपनी सीमित प्रतिभा के बावजूद लोगों को याद रह गए,
उनके पास बोलने वाली ऑंखें जो थीं। किशोर के ऐसे भारी आवाज़ वाले
गीत कुंदन लाल सहगल की याद दिला जाते हैं।
गीत के बोल:
ये वही गीत है जिसको मैंने धड़कन में बसाया है
ये वही गीत है जिसको मैंने धड़कन में बसाया है
तेरे होंठों से इसको चुरा कर होंठों पे सजाया है
ये वही गीत है जिसको मैंने धड़कन में बसाया है
ये वही गीत है ये वही गीत है
मैं ये गीत जब गुनगुनाया
सज गई है ख्यालों की महफ़िल
मैं ये गीत जब गुनगुनाया
सज गई है ख्यालों की महफ़िल
प्यार के रंग आँखों में छाये
प्यार के रंग आँखों में छाये
मुस्कुरायी उजालों की महफ़िल
मुस्कुरायी उजालों की महफ़िल
प्यार के रंग आँखों में छाये
मुस्कुरायी उजालों की महफ़िल
मुस्कुरायी उजालों की महफ़िल
ये वो नगमा है जो ज़िन्दगी में
रौशनी बन के आया है
तेरे होंठों से इसको चुरा कर होंठों पे सजाया है
ये वही गीत है ये वही गीत है
हो हो हो,
हो हो हो
मेरे दिल ने यही गीत गा कर
जब कभी तुझको आवाज़ दी है
मेरे दिल ने यही गीत गा कर
जब कभी तुझको आवाज़ दी है
फूल जुल्फों मीना पनी सजा कर
फूल जुल्फों मीना पनी सजा कर
तू मेरे सामने आ गई है
फूल जुल्फों मीना पनी सजा कर
तू मेरे सामने आ गई है
तू मेरे सामने आ गई है
तुझको अक्सर मेरी बेखुदी ने
सीने से लगाया है
तेरे होंठों से इसको चुरा कर होंठों पे सजाया है
ये वही गीत है जिसको मैंने धड़कन में बसाया है
तेरे होंठों से इसको चुरा कर होंठों पे सजाया है
ये वही गीत है ये वही गीत है
...........................................
Ye wahi geet hai jisko maine-Maan jaiye 1972
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