वर्ष १९७९ में येसुदास की आवाज़ हिंदी सिनेमा संगीत क्षेत्र में जितनी गूंजी
उतनी किसी और गायक की नहीं. अगला गीत सुनवाते हैं आपको फिल्म
सावन को आने दो से. इस सुपरहिट फिल्म से दो गीत आप पहले सुन चुके
हैं.
इस बार नायिका वही हैं-ज़रीना वहाब लेकिन नायक बदल गए हैं और वो हैं
अरुण गोविल. इस गीत को लिखा है इन्दीवर ने और इसकी धुन बनायीं है
संगीतकार राजकमल ने.
गीत के बोल:
तुझे देख कर जग वाले पर
तुझे देख कर जग वाले पर यकीन नहीं क्यूँ कर होगा
तुझे देख कर जग वाले पर यकीन नहीं क्यूँ कर होगा
जिसकी रचना इतनी सुन्दर वो कितना सुन्दर होगा
वो कितना सुन्दर होगा
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
तुझे देखने को मैं क्या हर दर्पण तरसा करता है
तुझे देखने को मैं क्या हर दर्पण तरसा करता है
ज्यों तुलसी के बिरवा को हर आंगन तरसा करता है
हर आंगन तरसा करता है
अंग अंग तेरा रस की गंगा, हो हो हो हो हो
अंग अंग तेरा रस की गंगा रूप का वो सागर होगा
जिसकी रचना इतनी सुन्दर वो कितना सुन्दर होगा
वो कितना सुन्दर होगा
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
राग रंग रस का संगम आधार तू प्रेम कहानी का
राग रंग रस का संगम आधार तू प्रेम कहानी का
मेरे प्यासे मन में यूँ उतरी ज्यूं रेत में झरना पानी का
ज्यूं रेत में झरना पानी का
अपना रूप दिखाने को
अपना रूप दिखाने को तेरे रूप में खुद ईश्वर होगा
जिसकी रचना इतनी सुन्दर वो कितना सुन्दर होगा
वो कितना सुन्दर होगा
............................................
Tujhe dekh kar jag wale par-Sawan ko aane do 1979
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Wednesday, 20 July 2011
ओ गोरिया रे-नैया १९७९
फिल्म नैया का एक गीत आपको सुनवाया था, अब सुनिए इस फिल्म का
सबसे लोकप्रिय गीत. किसी फिल्म के अलोकप्रिय गीत पहले इसलिए सुनवाए
जाते हैं ताकि आपका अनसुने मधुए गीतों से परिचय हो जाए.
प्रस्तुत गीत येसुदास की आवाज़ में एकल गीत है. नाव में चप्पू चलाते हुए
नायक गीत गा रहा है. गीत संगीत दोनों रवींद्र जैन के हैं. इस गीत में नाविक
नायिका को धन्यवाद दे रहा है जिसकी वजह से उसकी टूटी फूटी नाव सज गयी
है. रवींद्र जैन ने येसुदास को पर्याप्त अवसर दिए गाने के उसी तरह बप्पी लहरी
ने भी येसुदास से कई कर्णप्रिय गीत गवाए. इस मामले में इन दोनों को धन्यवाद
देना ज़रूरी है. येसुदास बेहद प्रतिभाशाली गायक हैं जिनका नाम दक्षिण भारत में
फ़िल्मी हो या कर्नाटक संगीत दोनों क्षेत्र में आदर के साथ लिया जाता है.
रवींद्र जैन की टीम में बांसुरी वादक बेहद सुरीले हैं. इस गीत में भी बांसुरी की
तानें मनमोहक हैं. रवींद्र जैन ने संगीत में अपनी अलग शैली विकसित की और
उनके कुछ गीतों में ध्वनि संयोजन जटिल भी मिलेगा आपको. और वो जटिलता
सलिल चौधरी की याद दिला देती है.
एक अच्छा विडियो गीत प्रकृति के बीच शीर्षासन, व्यायाम, ऊंची इमारतों पर
उठक बैठक किये बिना भी बनाया जा सकता है.
ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
नैया तो हमारा घर आँगना
इसी से ही पाना और माँगना
नैया तो हमारा घर आँगना
इसी से ही पाना और माँगना
गोरी ये दुआएं देना ज़रूर
माँझी से नैया हो नहीं दूर
हो गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
सब को किनारे पहुँचायेगा
माँझी तो किनारा तभी पायेगा
सब को किनारे पहुँचायेगा
माँझी तो किनारा तभी पायेगा
गहरी नदी का ओर न छोर
लहरों से ज़्यादा मनवा में शोर
ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
अपना तो नित यही काम है
आने जाने वालों को सलाम है
अपना तो नित यही काम है
आने जाने वालों को सलाम है
कभी कभी आना इस नाव में
इक घर तेरा है मेरे गाँव में
ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
.........................................
O goriya re-Naiya 1979
सबसे लोकप्रिय गीत. किसी फिल्म के अलोकप्रिय गीत पहले इसलिए सुनवाए
जाते हैं ताकि आपका अनसुने मधुए गीतों से परिचय हो जाए.
प्रस्तुत गीत येसुदास की आवाज़ में एकल गीत है. नाव में चप्पू चलाते हुए
नायक गीत गा रहा है. गीत संगीत दोनों रवींद्र जैन के हैं. इस गीत में नाविक
नायिका को धन्यवाद दे रहा है जिसकी वजह से उसकी टूटी फूटी नाव सज गयी
है. रवींद्र जैन ने येसुदास को पर्याप्त अवसर दिए गाने के उसी तरह बप्पी लहरी
ने भी येसुदास से कई कर्णप्रिय गीत गवाए. इस मामले में इन दोनों को धन्यवाद
देना ज़रूरी है. येसुदास बेहद प्रतिभाशाली गायक हैं जिनका नाम दक्षिण भारत में
फ़िल्मी हो या कर्नाटक संगीत दोनों क्षेत्र में आदर के साथ लिया जाता है.
रवींद्र जैन की टीम में बांसुरी वादक बेहद सुरीले हैं. इस गीत में भी बांसुरी की
तानें मनमोहक हैं. रवींद्र जैन ने संगीत में अपनी अलग शैली विकसित की और
उनके कुछ गीतों में ध्वनि संयोजन जटिल भी मिलेगा आपको. और वो जटिलता
सलिल चौधरी की याद दिला देती है.
एक अच्छा विडियो गीत प्रकृति के बीच शीर्षासन, व्यायाम, ऊंची इमारतों पर
उठक बैठक किये बिना भी बनाया जा सकता है.
ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
नैया तो हमारा घर आँगना
इसी से ही पाना और माँगना
नैया तो हमारा घर आँगना
इसी से ही पाना और माँगना
गोरी ये दुआएं देना ज़रूर
माँझी से नैया हो नहीं दूर
हो गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
सब को किनारे पहुँचायेगा
माँझी तो किनारा तभी पायेगा
सब को किनारे पहुँचायेगा
माँझी तो किनारा तभी पायेगा
गहरी नदी का ओर न छोर
लहरों से ज़्यादा मनवा में शोर
ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
अपना तो नित यही काम है
आने जाने वालों को सलाम है
अपना तो नित यही काम है
आने जाने वालों को सलाम है
कभी कभी आना इस नाव में
इक घर तेरा है मेरे गाँव में
ओ गोरिया रे, ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
ओ तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
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O goriya re-Naiya 1979
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Monday, 11 July 2011
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें -नैया १९७९
फ़िल्म नैया सन १९७९ की फ़िल्म है. इस फ़िल्म के गीत मुझे अच्छे
लगते हैं, कोई विशेष वजह नहीं, बस यूँ ही . आज इस फ़िल्म से
आपको एक बिलकुल अनसुना सा गीत सुनवाते हैं येसुदास का गाया
हुआ. बोल और संगीत रवीन्द्र जैन के हैं. येसुदास के साथ आवाज़ है
सुरेश वाडकर की.
प्रशांत नंदा के साथ आप ज़रीना वहाब को इस फ़िल्म के गीत में देखेंगे.
बलदेव खोसा उस कलाकार का नाम है जो बाद में परदे पर अवतरित होता
है. दोनों फिल्म में सहनायक हैं. दूल्हे के भेस में हैं दिनेश ठाकुर .
कुछ कलाकारों की उपस्थिति से फिल्म ऑफ-बीट सी लगने लगती है.
दिनेश ठाकुर की उपस्थिति भी ऐसा ही काम करती है जानकार दर्शकों के
लिए.
ज़रीना वहाब शायद फ़िल्म इतिहास की उन चुनिन्दा अभिनेत्रियों में से हैं
जिहोनें बहुत से नायकों के साथ फिल्मों में काम किया जिनमें कुछ अनजान
से चेहरे और उस समय के उभरते नायक भी हैं.
गीत कर्णप्रिय है और इसका फिल्मांकन भी बांध के रखने वाला है.
गीत के बोल :
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
दिल न दुखा मान भी जा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
कभी दिल टूटा हो तो जोड़ दें
दिल न दुखा मान भी जा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
सावन में आवन का न्यौता
भेजा है मनभावन को
न्यौता भेजा है मनभावन को
हो ओ ओ हमने तो एक देव को सौंपा
तेरे रूप के चन्दन को
गोरी तेरे रूप के चन्दन को
हैरान सा सजन तेरा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
एक माझी के घर से तू गोरी
राजमहल में जाएगी
जाएगी, राजमहल में जाएगी
हो ओ ओ जो सुख हमने सपने में देखे
वो सारे सुख पायेगी
पायेगी ,वो सारे सुख पायेगी
देना नहीं हमको भुला
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
मैं दूंगा तुझे कजरा बिंदिया
मैं रचा दूंगा मेहँदी महावर
खुद को बंधक रख के लूँगा
सोना करूंगा वो तुझपे निछावर
हाथों की चूड़ियाँ
मैं दूंगा
पाँव के बिछुआ
मैं दूंगा
क्या चुनरी साडी
मैं दूंगा
मैं दूंगा, मैं दूंगा, मैं दूंगा, हे
मिल के तुझे देंगे सजा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
कभी दिल टूटा हो तो जोड़ दें
हमरा कहा मान भी जा
गीता रानी गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
....................................
Tera kuchh khoya ho to-Naiya 1979
लगते हैं, कोई विशेष वजह नहीं, बस यूँ ही . आज इस फ़िल्म से
आपको एक बिलकुल अनसुना सा गीत सुनवाते हैं येसुदास का गाया
हुआ. बोल और संगीत रवीन्द्र जैन के हैं. येसुदास के साथ आवाज़ है
सुरेश वाडकर की.
प्रशांत नंदा के साथ आप ज़रीना वहाब को इस फ़िल्म के गीत में देखेंगे.
बलदेव खोसा उस कलाकार का नाम है जो बाद में परदे पर अवतरित होता
है. दोनों फिल्म में सहनायक हैं. दूल्हे के भेस में हैं दिनेश ठाकुर .
कुछ कलाकारों की उपस्थिति से फिल्म ऑफ-बीट सी लगने लगती है.
दिनेश ठाकुर की उपस्थिति भी ऐसा ही काम करती है जानकार दर्शकों के
लिए.
ज़रीना वहाब शायद फ़िल्म इतिहास की उन चुनिन्दा अभिनेत्रियों में से हैं
जिहोनें बहुत से नायकों के साथ फिल्मों में काम किया जिनमें कुछ अनजान
से चेहरे और उस समय के उभरते नायक भी हैं.
गीत कर्णप्रिय है और इसका फिल्मांकन भी बांध के रखने वाला है.
गीत के बोल :
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
दिल न दुखा मान भी जा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
कभी दिल टूटा हो तो जोड़ दें
दिल न दुखा मान भी जा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
सावन में आवन का न्यौता
भेजा है मनभावन को
न्यौता भेजा है मनभावन को
हो ओ ओ हमने तो एक देव को सौंपा
तेरे रूप के चन्दन को
गोरी तेरे रूप के चन्दन को
हैरान सा सजन तेरा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
एक माझी के घर से तू गोरी
राजमहल में जाएगी
जाएगी, राजमहल में जाएगी
हो ओ ओ जो सुख हमने सपने में देखे
वो सारे सुख पायेगी
पायेगी ,वो सारे सुख पायेगी
देना नहीं हमको भुला
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
मैं दूंगा तुझे कजरा बिंदिया
मैं रचा दूंगा मेहँदी महावर
खुद को बंधक रख के लूँगा
सोना करूंगा वो तुझपे निछावर
हाथों की चूड़ियाँ
मैं दूंगा
पाँव के बिछुआ
मैं दूंगा
क्या चुनरी साडी
मैं दूंगा
मैं दूंगा, मैं दूंगा, मैं दूंगा, हे
मिल के तुझे देंगे सजा
गीता रानी, गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
तेरा कुछ खोया हो तो ढूंढ दें
कभी दिल टूटा हो तो जोड़ दें
हमरा कहा मान भी जा
गीता रानी गीता रानी हंस दे ज़रा
हंस दे ओ गीता रानी हंस दे ज़रा
....................................
Tera kuchh khoya ho to-Naiya 1979
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Sunday, 10 July 2011
झूमता गाता सावन आया -जज़्बात १९८०
बारिश के मौसम में फिर एक गीत और याद आ गया. सन १९८० की
फ़िल्म जज़्बात से अगला गीत पेश है. एक अनजान सी फ़िल्म है
जिसके गीत पर ज़रीना वहाब होंठ हिला रही हैं. महेंद्र देहलवी के बोलों
को संगीत में ढाला है राजकमल ने और आवाज़ है सुलक्षणा पंडित की .
ज़रीना वहाब ने इस गीत पर काफी मेहनत की होगी. फिल्म गर ज्यादा
न चले तो सब बेकार हो जाता है. महेंद्र देहलवी साहब ने सावन को आग
लगा दी है इस गीत में. फ़िल्मी गीत में कभी सावन आग लगाता है तो
कभी सावन को आग लगा दी जाती है.
गीत के बोल:
हो हो हो हो हो हो
हो हो हो हो हो हो
हो ओ ओ हो
हो ओ ओ ओ
झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को
झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को
झूमता गाता सावन आया
सावन आया, हो ओ ओ, हो ओ ओ
रिमझिम रिमझिम बरखा बरसे
ऐसे में प्रियतम ये मनवा
तेरे मिलन को तरसे
सखियाँ झूलें, हाय प्यार के झूले
उसको झूला कौन झुलाये
जिसको साजन भूले
ओ आ जा पिया ओ आ जा रे
झुलना झुला जा रे
ओ आ जा पिया
ओ ओ, झुलना झुला जा रे
तकते हैं नैन तेरी राह दिनन
तू अब तो दरस दिखा जा रे
तेरे नाम की
तेरे नाम की रट लागी है
मन तड़पे तेरे दर्शन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को
झूमता गाता सावन आया
सावन आया, हो ओ ओ, हो ओ ओ
....................................
Jhoomta gaata sawan aaya-Jazbaat 1980
फ़िल्म जज़्बात से अगला गीत पेश है. एक अनजान सी फ़िल्म है
जिसके गीत पर ज़रीना वहाब होंठ हिला रही हैं. महेंद्र देहलवी के बोलों
को संगीत में ढाला है राजकमल ने और आवाज़ है सुलक्षणा पंडित की .
ज़रीना वहाब ने इस गीत पर काफी मेहनत की होगी. फिल्म गर ज्यादा
न चले तो सब बेकार हो जाता है. महेंद्र देहलवी साहब ने सावन को आग
लगा दी है इस गीत में. फ़िल्मी गीत में कभी सावन आग लगाता है तो
कभी सावन को आग लगा दी जाती है.
गीत के बोल:
हो हो हो हो हो हो
हो हो हो हो हो हो
हो ओ ओ हो
हो ओ ओ ओ
झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को
झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को
झूमता गाता सावन आया
सावन आया, हो ओ ओ, हो ओ ओ
रिमझिम रिमझिम बरखा बरसे
ऐसे में प्रियतम ये मनवा
तेरे मिलन को तरसे
सखियाँ झूलें, हाय प्यार के झूले
उसको झूला कौन झुलाये
जिसको साजन भूले
ओ आ जा पिया ओ आ जा रे
झुलना झुला जा रे
ओ आ जा पिया
ओ ओ, झुलना झुला जा रे
तकते हैं नैन तेरी राह दिनन
तू अब तो दरस दिखा जा रे
तेरे नाम की
तेरे नाम की रट लागी है
मन तड़पे तेरे दर्शन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को
झूमता गाता सावन आया
सावन आया, हो ओ ओ, हो ओ ओ
....................................
Jhoomta gaata sawan aaya-Jazbaat 1980
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Saturday, 2 July 2011
आज से पहले आज से ज़्यादा-चितचोर १९७५
७० के दशक में मारधाड़ और ढिशुम ढिशुम वाली फ़िल्में ज्यादा बनना
शुरू हो गयीं। इनके साथ साथ कोमेडी, हलकी फुलकी साफ़ सुथरी और
पारिवारिक फ़िल्में और कला फ़िल्में भी बनती रहीं। कुछ फ़िल्में बेहद
सफल रहीं। शोले के दौर में ही एक फिल्म आई-चितचोर जिसने धूम
मचाई और जगह जगह सिल्वर जुबली मनाई। इसी फिल्म से एक काफ़ी
लोकप्रिय गीत आज सुनवाते हैं आपको जो येसुदास की आवाज़ में है। गीत
में आपको अमोल पालेकर, विजयेन्द्र घाटगे और ज़रीना वहाब एक बाल
कलाकार मास्टर राजू के साथ दिखाई देंगे।
गीत के बोल:
आज से पहले, आज से ज़्यादा,
खुशी आज तक नहीं मिली।
इतनी सुहानी, ऐसी मीठी,
घड़ी आज तक नहीं मिली।
इसको संयोग कहें या किस्मत का लेखा,
हम जो अचानक मिले हैं।
मनचाहे साथी पाकर हम सब के चेहरे,
देखो तो कैसे खिले हैं।
इन तकदीरों को जोड़ दे ऐसी,
कड़ी आज तक नहीं मिली।
सपना हो जाए वो पूरा, जो हमने देखा,
ये मेरे दिल की दुआ है।
ये पल जो बीत रहे हैं, उसके नशे में,
दिल मेरा गाने लगा है।
हम इसी खुशी को ढ़ूँढ़ रहे थे,
यही आज तक नहीं मिली
..............................
Aaj se pehle aaj se Zyada-Chitchor 1975
शुरू हो गयीं। इनके साथ साथ कोमेडी, हलकी फुलकी साफ़ सुथरी और
पारिवारिक फ़िल्में और कला फ़िल्में भी बनती रहीं। कुछ फ़िल्में बेहद
सफल रहीं। शोले के दौर में ही एक फिल्म आई-चितचोर जिसने धूम
मचाई और जगह जगह सिल्वर जुबली मनाई। इसी फिल्म से एक काफ़ी
लोकप्रिय गीत आज सुनवाते हैं आपको जो येसुदास की आवाज़ में है। गीत
में आपको अमोल पालेकर, विजयेन्द्र घाटगे और ज़रीना वहाब एक बाल
कलाकार मास्टर राजू के साथ दिखाई देंगे।
गीत के बोल:
आज से पहले, आज से ज़्यादा,
खुशी आज तक नहीं मिली।
इतनी सुहानी, ऐसी मीठी,
घड़ी आज तक नहीं मिली।
इसको संयोग कहें या किस्मत का लेखा,
हम जो अचानक मिले हैं।
मनचाहे साथी पाकर हम सब के चेहरे,
देखो तो कैसे खिले हैं।
इन तकदीरों को जोड़ दे ऐसी,
कड़ी आज तक नहीं मिली।
सपना हो जाए वो पूरा, जो हमने देखा,
ये मेरे दिल की दुआ है।
ये पल जो बीत रहे हैं, उसके नशे में,
दिल मेरा गाने लगा है।
हम इसी खुशी को ढ़ूँढ़ रहे थे,
यही आज तक नहीं मिली
..............................
Aaj se pehle aaj se Zyada-Chitchor 1975
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Friday, 17 June 2011
ये साये हैं ये दुनिया है-सितारा १९८०
फिल्म सितारा के किरदार के बारे में आपको बताया था पहले।
कैसे एक गाँव की लड़की फिल्म दुनिया के शिखर पर पहुँच
जाती है। शिखर पर पहुँचते ही उसे तमाम कडवे अनुभव होना
शुरू होते हैं। प्रेमी से बिछुड़ने का दर्द, अपनों द्वारा दोहे जाने
की कचोट, मतलबपरस्त हंसी वाले लोग इर्द गिर्द में। इन सभी
तत्वों के बीच नायिका अकेलापन महसूस करती है। उस दर्द
को बोलों के जरिया गुलज़ार ने,संगीत के ज़रिये राहुल देव बर्मन
ने और आवाज़ के ज़रिये आशा भोंसले ने बखूबी उभरा है।
अच्छे गीत कैसे बनते हैं, उसका एक नमूना। फिल्म नहीं
चली मगर ये गीत बजता रहेगा । एक पंक्ति में चकाचौंध
वाली दुनिया की हकीकत और औकात उधेड़ के रख दी गई है-
"यहाँ सारी रौनक है रुसवाइयों की" । गुलज़ार स्वयं बॉलीवुड
की हर नब्ज़ से वाकिफ हैं, उनसे बेहतर और कम शब्दों में
फिल्म जगत का असली चेहरा दिखलाने का तरीका शायद ही
किसी के पास हो।
गीत के बोल:
ये साये हैं
ये दुनिया है परछाइयों की
ये साये हैं ये दुनिया है
भरी भीड़ में खाली
भरी भीड़ में खाली तन्हाइयों की
ये साये हैं ये दुनिया है
यहाँ कोई साहिल सहारा नहीं है
कहीं डूबने को किनारा नहीं है
यहाँ कोई साहिल सहारा नहीं है
कहीं डूबने को किनारा नहीं है
यहाँ सारी रौनक है रुसवाइयों की
ये साये हैं
ये दुनिया है परछाइयों की
ये साये हैं ये दुनिया है
यहाँ सारे चेहरे हैं मांगे हुए से
निगाहों में आंसू भी टाँगे हुए से
यहाँ सारे चेहरे हैं मांगे हुए से
निगाहों में आंसू भी टाँगे हुए से
बड़ी नीची राहें हैं ऊंचाइयों की
ये साये हैं
ये दुनिया है परछाइयों की
ये साये हैं ये दुनिया है
भरी भीड़ में खाली
भरी भीड़ में खाली तन्हाइयों की
ये साये हैं ये दुनिया है
जो अंतरा विडियो से गायब है वो इस प्रकार से है:
कई चाँद उठ कर जलाए बुझाये
बहुत हमने चाहा ज़रा नींद आये
कई चाँद उठ कर जलाए बुझाये
बहुत हमने चाहा ज़रा नींद आये
यहाँ रात होती है बेदारियों की
...............................
Ye saaye hain ye duniya hai-Sitara 1980
कैसे एक गाँव की लड़की फिल्म दुनिया के शिखर पर पहुँच
जाती है। शिखर पर पहुँचते ही उसे तमाम कडवे अनुभव होना
शुरू होते हैं। प्रेमी से बिछुड़ने का दर्द, अपनों द्वारा दोहे जाने
की कचोट, मतलबपरस्त हंसी वाले लोग इर्द गिर्द में। इन सभी
तत्वों के बीच नायिका अकेलापन महसूस करती है। उस दर्द
को बोलों के जरिया गुलज़ार ने,संगीत के ज़रिये राहुल देव बर्मन
ने और आवाज़ के ज़रिये आशा भोंसले ने बखूबी उभरा है।
अच्छे गीत कैसे बनते हैं, उसका एक नमूना। फिल्म नहीं
चली मगर ये गीत बजता रहेगा । एक पंक्ति में चकाचौंध
वाली दुनिया की हकीकत और औकात उधेड़ के रख दी गई है-
"यहाँ सारी रौनक है रुसवाइयों की" । गुलज़ार स्वयं बॉलीवुड
की हर नब्ज़ से वाकिफ हैं, उनसे बेहतर और कम शब्दों में
फिल्म जगत का असली चेहरा दिखलाने का तरीका शायद ही
किसी के पास हो।
गीत के बोल:
ये साये हैं
ये दुनिया है परछाइयों की
ये साये हैं ये दुनिया है
भरी भीड़ में खाली
भरी भीड़ में खाली तन्हाइयों की
ये साये हैं ये दुनिया है
यहाँ कोई साहिल सहारा नहीं है
कहीं डूबने को किनारा नहीं है
यहाँ कोई साहिल सहारा नहीं है
कहीं डूबने को किनारा नहीं है
यहाँ सारी रौनक है रुसवाइयों की
ये साये हैं
ये दुनिया है परछाइयों की
ये साये हैं ये दुनिया है
यहाँ सारे चेहरे हैं मांगे हुए से
निगाहों में आंसू भी टाँगे हुए से
यहाँ सारे चेहरे हैं मांगे हुए से
निगाहों में आंसू भी टाँगे हुए से
बड़ी नीची राहें हैं ऊंचाइयों की
ये साये हैं
ये दुनिया है परछाइयों की
ये साये हैं ये दुनिया है
भरी भीड़ में खाली
भरी भीड़ में खाली तन्हाइयों की
ये साये हैं ये दुनिया है
जो अंतरा विडियो से गायब है वो इस प्रकार से है:
कई चाँद उठ कर जलाए बुझाये
बहुत हमने चाहा ज़रा नींद आये
कई चाँद उठ कर जलाए बुझाये
बहुत हमने चाहा ज़रा नींद आये
यहाँ रात होती है बेदारियों की
...............................
Ye saaye hain ye duniya hai-Sitara 1980
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Zarina Wahab
Wednesday, 15 June 2011
साथ साथ तुम चलो-सितारा १९८०
फिल्म अभिमान में नारी के सितारा बनने का जिक्र है तो एक
और ऐसी फिल्म है जिसमें ग्रामीण परिवेश में पली बड़ी नायिका
फिल्म जगत की एक हस्ती बन जाती है। इस थीम पर पहले एक
फिल्म हम देख चुके हैं-मेरे हमसफ़र। फिल्म सितारा बॉक्स ऑफिस
पर कोई कमाल नहीं दिखा पाई ना ही इसके संगीत ने कोई अलख
जगाया । फिर भी, इस फिल्म में कुछ यादगार गीत हैं। फिल्म का
सबसे अलोकप्रिय गीत आपको सुनवाते हैं जो भूपेंद्र और आशा भोंसले
की आवाज़ में है। संगीत राहुल देव बर्मन का है। गीत फिल्माया गया
है ज़रीना वहाब और मिथुन पर। फिल्म एक आध बार आपको टी वी के
चैनल पर दिखाई दी होगी। मिथुन के चरित्र का नाम कुंदन और ज़रीना
के चरित्र का नाम धनिया है। वो धनिया से सरिता बन जाती है फिल्म
जगत में। गुल्ज़ाराना गीत बहुत दिनों के बाद प्रस्तुत कर रहा हूँ
ब्लॉग पर।
गीत के बोल:
साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
हो, साथ साथ तुम चलो तो रात रात चलें
रात साथ कल सुबह एक सुबह के घर चलें
साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
हो, साथ साथ तुम चलो तो रात रात चलें
रात साथ कल सुबह एक सुबह के घर चलें
साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
सुबह से कह्नेगे जा के
अपना घर संभालिये
रात को जो सपने
दे गये थे वो निकालिए
हो, आपको खबर ना हो
सपने बेखबर चले
साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
रोज़ चढ़ के आस्मां पे
आ हा हा
चाँद जब लगायेंगे
लौ बुझाने का भी समय
ओ हो
हम उसे बताएँगे
फूँक से बुझा के चाँद
चाँद के उधर चलें
उधर चलें, उधर चलें
साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
हो हो, हो हो
तेज़ है हवा कहीं
वक़्त ना उड़े आज का, हो
हो, चाँद से पकड़ के रखना
आ हा हा
हो ना वो एक रात का
रात ओढ़ के चलो,
रात के उधर चलें
उधर चलें, उधर चलें
उधर चलें, उधर चलें
साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
रात साथ कल सुबह एक सुबह के घर चलें
रात साथ कल सुबह एक सुबह के घर चलें
हो, रात साथ कल सुबह एक सुबह के घर चलें
..................................
Saath saath tum chalo-Sitara 1980
और ऐसी फिल्म है जिसमें ग्रामीण परिवेश में पली बड़ी नायिका
फिल्म जगत की एक हस्ती बन जाती है। इस थीम पर पहले एक
फिल्म हम देख चुके हैं-मेरे हमसफ़र। फिल्म सितारा बॉक्स ऑफिस
पर कोई कमाल नहीं दिखा पाई ना ही इसके संगीत ने कोई अलख
जगाया । फिर भी, इस फिल्म में कुछ यादगार गीत हैं। फिल्म का
सबसे अलोकप्रिय गीत आपको सुनवाते हैं जो भूपेंद्र और आशा भोंसले
की आवाज़ में है। संगीत राहुल देव बर्मन का है। गीत फिल्माया गया
है ज़रीना वहाब और मिथुन पर। फिल्म एक आध बार आपको टी वी के
चैनल पर दिखाई दी होगी। मिथुन के चरित्र का नाम कुंदन और ज़रीना
के चरित्र का नाम धनिया है। वो धनिया से सरिता बन जाती है फिल्म
जगत में। गुल्ज़ाराना गीत बहुत दिनों के बाद प्रस्तुत कर रहा हूँ
ब्लॉग पर।
गीत के बोल:
साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
हो, साथ साथ तुम चलो तो रात रात चलें
रात साथ कल सुबह एक सुबह के घर चलें
साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
हो, साथ साथ तुम चलो तो रात रात चलें
रात साथ कल सुबह एक सुबह के घर चलें
साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
सुबह से कह्नेगे जा के
अपना घर संभालिये
रात को जो सपने
दे गये थे वो निकालिए
हो, आपको खबर ना हो
सपने बेखबर चले
साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
रोज़ चढ़ के आस्मां पे
आ हा हा
चाँद जब लगायेंगे
लौ बुझाने का भी समय
ओ हो
हम उसे बताएँगे
फूँक से बुझा के चाँद
चाँद के उधर चलें
उधर चलें, उधर चलें
साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
हो हो, हो हो
तेज़ है हवा कहीं
वक़्त ना उड़े आज का, हो
हो, चाँद से पकड़ के रखना
आ हा हा
हो ना वो एक रात का
रात ओढ़ के चलो,
रात के उधर चलें
उधर चलें, उधर चलें
उधर चलें, उधर चलें
साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
रात साथ कल सुबह एक सुबह के घर चलें
रात साथ कल सुबह एक सुबह के घर चलें
हो, रात साथ कल सुबह एक सुबह के घर चलें
..................................
Saath saath tum chalo-Sitara 1980
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Tuesday, 1 February 2011
सजना का कंगना-सितारा १९८०
हम में से कई एक ने पुराने ज़माने का चाबी वाला भोंपू या
ग्रामोफोन नहीं देखा होगा। नई पीढ़ी तो लगभग इसके स्वाद
से अछूती है। गाँव में एक फिल्म आई है उसका प्रचार हो रहा
है। पहले के समय में फिल्म का प्रचार तांगे, रिक्शे या बैलगाड़ी
के ज़रिये भी होता था। उसमे एक माइक होता जिसे लगभग
मुंह में डाल के उदघोषक कुछ अस्पष्ट से तो कुछ अति-अस्पष्ट से
शब्दों का उच्चारण करता हुआ अपना गला साफ़ करता। जो
चीज़ साफ़ सुनाई देती वो थी ग्रामोफोन से निकलने वाली ध्वनि।
कुछ लग चुकी फिल्मों के एल पी या ई पी रिकॉर्ड बजाये जाते।
गीत मनोरंजक है, इसमें महिला और पुरुष उदघोषक फुर्सत के
क्षणों में रिकॉर्ड बजा कर उसपर नृत्य और अभिनय कर रहे हैं।
जैसे ही ग्रामोफोन कि चाबी ख़त्म होने लगती है वो टें बोल जाता
है, उस प्रभाव को बड़े प्रभावी ढंग से बतलाया गया है। सिनेमा के
उन कुछ क्षणों में से एक जो वास्तविकता के सबसे करीब हैं। इसके
अलावा एक और पहलू से आप वाकिफ होंगे रिकॉर्ड के घिस जाने पर
सुई अटकना भी शुरू हो जाती है और एक ही शब्द को आपको रटने
की कोशिश करने लगती है तब उसे हलके से धक्के से आगे बढ़ाना
पढता था। ऐसी ऐसी विकट स्तिथियों में मैंने ग्रामोफोन बजते
सुने हैं कि आप सुन कर चकित रह जायेंगे वे किस्से। एक बार तो
रेगिस्तानी मेले में ऊँट की पीठ पर रख कर बजाया जा रहा था
ग्रामोफोने। ऊँट को २-४ गाने के बाद जाने क्या सूझी उसने एक
ज़ोरदार अंगडाई ली और ग्रामोफोन चारों खाने चित हो कर गिरा
मरा फ़ोन में तब्दील हो गया । वो बैटरी की सहायता से बजाया जाने
वाला रिकॉर्ड प्लयेर था ।
गौरतलब है कि इसमें नायक और नायिका हेमा मालिनी और राजेश
खान्नाका नाम लेते हैं। फिल्म सिनेमा के इतिहास में फ़िल्मी गीतों
की जीवन्तता के बारे में बात की जाये तो ये दोनों कलाकार दूसरों
पर भरी पढ़ते हैं। ज़रूरी नहीं की हिट गीत रोचक हो या रोचक गीत
बड़ा हिट हो जाये। इस गीत के मामले में भी कुछ ऐसा ही है।
लेखनी एक बार फिर गुलज़ार की है और संगीतमय प्रयोगधर्मिता
राहुल देव बर्मन की। पिछले गीत में भूपेंद्र के साथ लता गा रहीं थीं
तो इस गीत में उनका साथ दिया है आशा भोंसले ने।
गीत में हास्य का पुट भी है। नायिका अति उत्साह में उछलती कूदती
गोबर के ढेर में पांव डाल कर फिसल पढ़ती है। नायक ने धोती यूँ बांध
रखी है मानो धोती के कपडे का कोई पतलून सिलवा के पहना हो।
म्यूजिकल मिस्फॉयरिंग भी है इस गीत में। कल्पना करें कि पुरुष आवाज़
नायिका के लिए और महिला आवाज़ नायक के लिए। गीत को आप
सिनेमा इतिहास के सबसे मनोरंजक गीतों में शामिल कर लीजिये।
गीत के बोल:
सजना का कंगना
हो कंगना में हीरा
हो सजना का कंगना
कंगना में हीरा
हीरा मैं खाई के मरूं एक बार,
के दुई बार, के तीन बार, के कै बार मरूं
अरे सजनी का कंगना
कंगना में हीरा
हीरा मैं खाई के मरूं एक बार,
के दुई बार, के तीन बार, के कै बार मरूं
एक तो तेरी ऑंखें बिल्लौरी
ऑंखें जैसे दो हीरों की चोरी
एक तो तेरी ऑंखें बिल्लौरी
ऑंखें जैसे दो हीरों की चोरी
हो हीरे पे, हीरे पे, हीरे पे......
सजना का कंगना
कंगना में हीरा
हो हीरे पे हीरा मैं खाई के मरूं
एक बार, के दुई बार, के तीन बार,
के कै बार मरूं
सजना का कंगना
कंगना में हीरा
हीरा मैं खाई के मरूं एक बार,
के दुई बार, के तीन बार, के कै बार मरूं
एक तो पड़े लोगों की नज़र ना
दूजे तेरी गली से गुज़ारना
हो ओ ओ ओ, एक तो पड़े लोगों की नज़र ना
दूजे तेरी गली से गुज़ारना
बच बच के रुकना कभी चलना
एक बार, के दुई बार, के तीन बार,
के कै बार बचूं
हे सजनी का कंगना
कंगना में हीरा
हीरा मैं खाई के मरूं एक बार,
के दुई बार, के तीन बार, के कै बार मरूं
एक तो तेरी पायल ऊंची बोले
दूजे गोरी घूंघट में ना बोले
एक तो तेरी पायल ऊंची बोले
दूजे गोरी घूंघट में ना बोले
मलमल के घूंघट में गोरी जले
एक बार के दुई बार के तीन बार
के कै बार जले
सजना का कंगना
कंगना में हीरा
हीरा मैं खाई के मरूं एक बार,
के दुई बार, के तीन बार, के कै बार मरूं
...................................
Sajna ka kangna-Sitara 1980
ग्रामोफोन नहीं देखा होगा। नई पीढ़ी तो लगभग इसके स्वाद
से अछूती है। गाँव में एक फिल्म आई है उसका प्रचार हो रहा
है। पहले के समय में फिल्म का प्रचार तांगे, रिक्शे या बैलगाड़ी
के ज़रिये भी होता था। उसमे एक माइक होता जिसे लगभग
मुंह में डाल के उदघोषक कुछ अस्पष्ट से तो कुछ अति-अस्पष्ट से
शब्दों का उच्चारण करता हुआ अपना गला साफ़ करता। जो
चीज़ साफ़ सुनाई देती वो थी ग्रामोफोन से निकलने वाली ध्वनि।
कुछ लग चुकी फिल्मों के एल पी या ई पी रिकॉर्ड बजाये जाते।
गीत मनोरंजक है, इसमें महिला और पुरुष उदघोषक फुर्सत के
क्षणों में रिकॉर्ड बजा कर उसपर नृत्य और अभिनय कर रहे हैं।
जैसे ही ग्रामोफोन कि चाबी ख़त्म होने लगती है वो टें बोल जाता
है, उस प्रभाव को बड़े प्रभावी ढंग से बतलाया गया है। सिनेमा के
उन कुछ क्षणों में से एक जो वास्तविकता के सबसे करीब हैं। इसके
अलावा एक और पहलू से आप वाकिफ होंगे रिकॉर्ड के घिस जाने पर
सुई अटकना भी शुरू हो जाती है और एक ही शब्द को आपको रटने
की कोशिश करने लगती है तब उसे हलके से धक्के से आगे बढ़ाना
पढता था। ऐसी ऐसी विकट स्तिथियों में मैंने ग्रामोफोन बजते
सुने हैं कि आप सुन कर चकित रह जायेंगे वे किस्से। एक बार तो
रेगिस्तानी मेले में ऊँट की पीठ पर रख कर बजाया जा रहा था
ग्रामोफोने। ऊँट को २-४ गाने के बाद जाने क्या सूझी उसने एक
ज़ोरदार अंगडाई ली और ग्रामोफोन चारों खाने चित हो कर गिरा
मरा फ़ोन में तब्दील हो गया । वो बैटरी की सहायता से बजाया जाने
वाला रिकॉर्ड प्लयेर था ।
गौरतलब है कि इसमें नायक और नायिका हेमा मालिनी और राजेश
खान्नाका नाम लेते हैं। फिल्म सिनेमा के इतिहास में फ़िल्मी गीतों
की जीवन्तता के बारे में बात की जाये तो ये दोनों कलाकार दूसरों
पर भरी पढ़ते हैं। ज़रूरी नहीं की हिट गीत रोचक हो या रोचक गीत
बड़ा हिट हो जाये। इस गीत के मामले में भी कुछ ऐसा ही है।
लेखनी एक बार फिर गुलज़ार की है और संगीतमय प्रयोगधर्मिता
राहुल देव बर्मन की। पिछले गीत में भूपेंद्र के साथ लता गा रहीं थीं
तो इस गीत में उनका साथ दिया है आशा भोंसले ने।
गीत में हास्य का पुट भी है। नायिका अति उत्साह में उछलती कूदती
गोबर के ढेर में पांव डाल कर फिसल पढ़ती है। नायक ने धोती यूँ बांध
रखी है मानो धोती के कपडे का कोई पतलून सिलवा के पहना हो।
म्यूजिकल मिस्फॉयरिंग भी है इस गीत में। कल्पना करें कि पुरुष आवाज़
नायिका के लिए और महिला आवाज़ नायक के लिए। गीत को आप
सिनेमा इतिहास के सबसे मनोरंजक गीतों में शामिल कर लीजिये।
गीत के बोल:
सजना का कंगना
हो कंगना में हीरा
हो सजना का कंगना
कंगना में हीरा
हीरा मैं खाई के मरूं एक बार,
के दुई बार, के तीन बार, के कै बार मरूं
अरे सजनी का कंगना
कंगना में हीरा
हीरा मैं खाई के मरूं एक बार,
के दुई बार, के तीन बार, के कै बार मरूं
एक तो तेरी ऑंखें बिल्लौरी
ऑंखें जैसे दो हीरों की चोरी
एक तो तेरी ऑंखें बिल्लौरी
ऑंखें जैसे दो हीरों की चोरी
हो हीरे पे, हीरे पे, हीरे पे......
सजना का कंगना
कंगना में हीरा
हो हीरे पे हीरा मैं खाई के मरूं
एक बार, के दुई बार, के तीन बार,
के कै बार मरूं
सजना का कंगना
कंगना में हीरा
हीरा मैं खाई के मरूं एक बार,
के दुई बार, के तीन बार, के कै बार मरूं
एक तो पड़े लोगों की नज़र ना
दूजे तेरी गली से गुज़ारना
हो ओ ओ ओ, एक तो पड़े लोगों की नज़र ना
दूजे तेरी गली से गुज़ारना
बच बच के रुकना कभी चलना
एक बार, के दुई बार, के तीन बार,
के कै बार बचूं
हे सजनी का कंगना
कंगना में हीरा
हीरा मैं खाई के मरूं एक बार,
के दुई बार, के तीन बार, के कै बार मरूं
एक तो तेरी पायल ऊंची बोले
दूजे गोरी घूंघट में ना बोले
एक तो तेरी पायल ऊंची बोले
दूजे गोरी घूंघट में ना बोले
मलमल के घूंघट में गोरी जले
एक बार के दुई बार के तीन बार
के कै बार जले
सजना का कंगना
कंगना में हीरा
हीरा मैं खाई के मरूं एक बार,
के दुई बार, के तीन बार, के कै बार मरूं
...................................
Sajna ka kangna-Sitara 1980
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Monday, 31 January 2011
थोड़ी सी ज़मीन थोडा आसमान-सितारा
तुमसे थोड़ी सी ज़मीन ही तो मांगी थी तुम तो हलकट प्रोपर्टी
ब्रोकर की तरह थोड़ी सी धूल थमा के चलते बने। थोडा आसमान
क्या मांग लिया तुमने तो हमें भैंस की तरह पोखर में डुबो दिया।
अब भाई दारू पी के बढ़िया बढ़िया शेर निकलते होंगे दिल से, हम
तो चाय और भजिये पर जिंदा रहने वाले प्राणी हैं अतः बासी
भजिये खाने के बाद आने वाली डकार के अंदाज़ में ऐसे ही उदगार
प्रकट हो पा रहे हैं, बतलाइए क्या किया जाए।
आइये सुनें एक आशावादी गीत जो देखने और सुनने दोनों में आनंद
देता है। गुलज़ार का लिखा और संगीतकार पंचम उर्फ़ आर डी बर्मन
का संगीतबद्ध किया ये गीत गा रहे हैं लता और भूपेंद्र। सौंधी मिटटी
और लेपे हुए चूल्हे को सुनें ध्यान लगा कर और बाजरे के या चने के
जिस खेत में आपका जी चाहे कौवे उड़ायें।
सपने ज़रूर देखने चाहिए मगर उनको अमल में लाने का पुख्ता
प्रोग्राम होना ज़रूरी है।
गीत के बोल:
ला ला ला ला ला ला, ला ला ला ला ला ला
थोड़ी सी ज़मीन थोड़ा आसमान
तिनकों का बस एक आशियाँ
थोड़ी सी ज़मीन थोड़ा आसमान
तिनकों का बस एक आशियाँ
मांगा है जो तुमसे वो ज्यादा तो नहीं है
देने को तो जान दें दें, वादा तो नहीं है
कोई तेरे वादों पे जीता हैं कहाँ
मेरे घर के आँगन में, छोटा सा झूला हो
सौंधी सौंधी मिटटी होगी, लेप हुआ चूल्हा हो
थोड़ी थोड़ी आग होगी, थोड़ा सा धुंआ
रात कट जायेगी तो कैसे दिन बिताएंगे
बाजरे के खेतों में कौवे उड़ायेंगे
बाजरे के टिक्कों जैसे, बेटे हो जवान
ब्रोकर की तरह थोड़ी सी धूल थमा के चलते बने। थोडा आसमान
क्या मांग लिया तुमने तो हमें भैंस की तरह पोखर में डुबो दिया।
अब भाई दारू पी के बढ़िया बढ़िया शेर निकलते होंगे दिल से, हम
तो चाय और भजिये पर जिंदा रहने वाले प्राणी हैं अतः बासी
भजिये खाने के बाद आने वाली डकार के अंदाज़ में ऐसे ही उदगार
प्रकट हो पा रहे हैं, बतलाइए क्या किया जाए।
आइये सुनें एक आशावादी गीत जो देखने और सुनने दोनों में आनंद
देता है। गुलज़ार का लिखा और संगीतकार पंचम उर्फ़ आर डी बर्मन
का संगीतबद्ध किया ये गीत गा रहे हैं लता और भूपेंद्र। सौंधी मिटटी
और लेपे हुए चूल्हे को सुनें ध्यान लगा कर और बाजरे के या चने के
जिस खेत में आपका जी चाहे कौवे उड़ायें।
सपने ज़रूर देखने चाहिए मगर उनको अमल में लाने का पुख्ता
प्रोग्राम होना ज़रूरी है।
गीत के बोल:
ला ला ला ला ला ला, ला ला ला ला ला ला
थोड़ी सी ज़मीन थोड़ा आसमान
तिनकों का बस एक आशियाँ
थोड़ी सी ज़मीन थोड़ा आसमान
तिनकों का बस एक आशियाँ
मांगा है जो तुमसे वो ज्यादा तो नहीं है
देने को तो जान दें दें, वादा तो नहीं है
कोई तेरे वादों पे जीता हैं कहाँ
मेरे घर के आँगन में, छोटा सा झूला हो
सौंधी सौंधी मिटटी होगी, लेप हुआ चूल्हा हो
थोड़ी थोड़ी आग होगी, थोड़ा सा धुंआ
रात कट जायेगी तो कैसे दिन बिताएंगे
बाजरे के खेतों में कौवे उड़ायेंगे
बाजरे के टिक्कों जैसे, बेटे हो जवान
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Friday, 3 December 2010
गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा-चितचोर १९७६
७० के दशक में सन ७५ की ढिशुम ढिशुम वाली शोले
के बाद पब्लिक ने बहुत से ढिच्क्युन ढिच्क्युन आवाजों
वाली मार धाड़ भरी फ़िल्में देखी। उसी के साथ साथ
कुछ साफ़ सुथरी और पारिवारिक घरेलू किस्म की फिल्में
भी बनती रहीं। सन १९७६ में आई और गाँव की प्रष्ठभूमि
पर बनी चितचोर भी ऐसी ही एक फिल्म है। सीधी साधी
कहानी और कर्णप्रिय गीतों वाली इस फिल्म को जनता
ने बेहद पसंद किया। आइये इस फिल्म का लोकप्रिय गीत
सुनें जो येसुदास का गाया हुआ है। बोल और संगीत दोनों
रवीन्द्र जैन के हैं। गीत से एक नया शब्द सीखने को मिला
-चन्द्रमधु ।
गीत के बोल:
गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा
मैं तो गया मारा आ के यहाँ रे
उस पर रूप तेरा सादा
चन्द्रमधु आधा आधा जवाँ रे
गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा
मैं तो गया मारा आ के यहाँ रे
आ के यहाँ रे
जी करता है मोर कि पैरों में
पायलिया पहना दूँ
कुहू कुहू गाति कोयलिया को
फूलों क गहना दूँ
यहीं घर अपना बनाने को, पंछी करे देखो
तिनके जमा रे तिनके जमा रे
गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा
मैं तो गया मारा आ के यहाँ रे
आके यहाँ रे
रंग बिरंगे फूल खिले हैं
लोग भी फूलों जैसे
आ जाये इक बार यहाँ जो
जायेगा फिर कैसे
झर झर झरते हुए झरने, मन को लगे हरने
ऐसा कहाँ रे ऐसा कहाँ रे
उसपर रूप तेरा सादा
चन्द्रमधु आधा, आधा जवाँ रे
आधा जवाँ रे
परदेसी अन्जान को ऐसे
कोई नहीं अपनाता
तुम लोगों से जुड़ गया जैसे
जनम जनम का नाता
अपने धुन में मगन डोले, लोग यहाँ बोले
दिल की ज़बाँ रे दिल की ज़बाँ रे
गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा
मैं तो गया मारा आ के यहाँ रे
उसपर रूप तेरा सादा
चन्द्रमधु आधा
आधा जवाँ रे
के बाद पब्लिक ने बहुत से ढिच्क्युन ढिच्क्युन आवाजों
वाली मार धाड़ भरी फ़िल्में देखी। उसी के साथ साथ
कुछ साफ़ सुथरी और पारिवारिक घरेलू किस्म की फिल्में
भी बनती रहीं। सन १९७६ में आई और गाँव की प्रष्ठभूमि
पर बनी चितचोर भी ऐसी ही एक फिल्म है। सीधी साधी
कहानी और कर्णप्रिय गीतों वाली इस फिल्म को जनता
ने बेहद पसंद किया। आइये इस फिल्म का लोकप्रिय गीत
सुनें जो येसुदास का गाया हुआ है। बोल और संगीत दोनों
रवीन्द्र जैन के हैं। गीत से एक नया शब्द सीखने को मिला
-चन्द्रमधु ।
गीत के बोल:
गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा
मैं तो गया मारा आ के यहाँ रे
उस पर रूप तेरा सादा
चन्द्रमधु आधा आधा जवाँ रे
गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा
मैं तो गया मारा आ के यहाँ रे
आ के यहाँ रे
जी करता है मोर कि पैरों में
पायलिया पहना दूँ
कुहू कुहू गाति कोयलिया को
फूलों क गहना दूँ
यहीं घर अपना बनाने को, पंछी करे देखो
तिनके जमा रे तिनके जमा रे
गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा
मैं तो गया मारा आ के यहाँ रे
आके यहाँ रे
रंग बिरंगे फूल खिले हैं
लोग भी फूलों जैसे
आ जाये इक बार यहाँ जो
जायेगा फिर कैसे
झर झर झरते हुए झरने, मन को लगे हरने
ऐसा कहाँ रे ऐसा कहाँ रे
उसपर रूप तेरा सादा
चन्द्रमधु आधा, आधा जवाँ रे
आधा जवाँ रे
परदेसी अन्जान को ऐसे
कोई नहीं अपनाता
तुम लोगों से जुड़ गया जैसे
जनम जनम का नाता
अपने धुन में मगन डोले, लोग यहाँ बोले
दिल की ज़बाँ रे दिल की ज़बाँ रे
गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा
मैं तो गया मारा आ के यहाँ रे
उसपर रूप तेरा सादा
चन्द्रमधु आधा
आधा जवाँ रे
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