माचिस की अगली तीली प्रस्तुत है. मेरा मतलब; माचिस फिल्म का
अगला गीत सुनिए. जैसा की गीत के नीचे लिखे कमेन्ट में जिक्र है-
गीत गंभीरता से सुनने की आवश्यकता है. तनाव और चिंता के क्षणों
में भी कुछ देर आनंद किस तरह लिया जा सकता है, शायद यही
सन्देश देता सा सुनाई देता है ये गीत. गुलज़ार के लिखे इस गीत को
चार गायक गा रहे हैं -हरिहरन, सुरेश वाडकर, विनोद सहगल और के.के.
ये गीत भी काफी सुना गया जनता द्वारा.
गीत में ओम पूरी को भी दो पंक्तियाँ गाते दिखाया गया है.
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
जहाँ तेरे पैरों के, कँवल गिरा करते थे
हँसे तो दो गालों में, भँवर पड़ा करते थे
जहाँ तेरे पैरों के, कँवल गिरा करते थे
हँसे तो दो गालों में, भँवर पड़ा करते थे
हे, तेरी कमर के बल पे, नदी मुड़ा करती थी
हँसी तेरी सुन सुन के, फ़सल पका करती थी
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
हो, जहाँ तेरी एड़ी से, धूप उड़ा करती थी
सुना है उस चौखट पे, अब शाम रहा करती है
जहाँ तेरी एड़ी से, धूप उड़ा करती थी
सुना है उस चौखट पे, अब शाम रहा करती है
लटों से उलझी-लिपटी, इक रात हुआ करती थी
हो,कभी कभी तकिये पे, वो भी मिला करती है
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
दिल दर्द का टुकड़ा है, पत्थर की डली सी है
इक अंधा कुआँ है या, इक बंद गली सी है
इक छोटा सा लम्हा है, जो ख़त्म नहीं होता
मैं लाख जलाता हूँ, यह भस्म नहीं होता
यह भस्म नहीं होता
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
.............................
Chhod aaye hum-Maachis 1996
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Sunday, 21 August 2011
Thursday, 11 August 2011
माटी रे माटी रे -गॉड मदर १९९८
आपने फिल्म माचिस का "पानी पानी रे " सुना। अब सुनिए "माटी रे माटी रे"
इन पर्यावरण प्रेमी गीतों का संगीत तैयार किया है विशाल भरद्वाज ने। फिल्म माचिस
का गीत गुलज़ार का लिखा हुआ है। उन्हें दोनों गीतों के गायन के लिए सबसे उपयुक्त
लता मंगेशकर ही लगीं। गौरतलब है कि लता ने ९० के दशक के उत्तरार्ध में गायन
काफी कम कर दिया था।
प्रस्तुत गीत जावेद अख्तर का है और इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ
सन १९९९ में। गीत का विडियो पूरी कहानी की तरह है और गीत खत्म होने के बाद
इसमें हिंसक दृश्य भी शामिल हैं। फिल्म में शबाना आज़मी गॉड मदर की भूमिका
में हैं।
गीत के बोल:
माटी रे माटी रे माटी रे माटी रे
रुत आए दिन आए जो आए दुख लाए
देख ले हमने कैसे उमरिया काटी रे
माटी रे माटी रे
माटी रे माटी रे
देस छूटा गांव छूटा छूटे घर आंगन
काट ही डाले दुखो ने जन्मों के बंधन
दर्द ने ही दिल की खाई पाटी रे
माटी रे माटी रे
माटी रे माटी रे
घात कैसी कर गया मुझसे मेरा जीवन
किसका मुख दिखला रहा है तुझको ये दर्पण
हो गई कैसे मैं इतनी नाटी रे
माटी रे माटी रे
माटी रे माटी रे
.................................
Maati re maati re-God Mother 1998
इन पर्यावरण प्रेमी गीतों का संगीत तैयार किया है विशाल भरद्वाज ने। फिल्म माचिस
का गीत गुलज़ार का लिखा हुआ है। उन्हें दोनों गीतों के गायन के लिए सबसे उपयुक्त
लता मंगेशकर ही लगीं। गौरतलब है कि लता ने ९० के दशक के उत्तरार्ध में गायन
काफी कम कर दिया था।
प्रस्तुत गीत जावेद अख्तर का है और इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ
सन १९९९ में। गीत का विडियो पूरी कहानी की तरह है और गीत खत्म होने के बाद
इसमें हिंसक दृश्य भी शामिल हैं। फिल्म में शबाना आज़मी गॉड मदर की भूमिका
में हैं।
गीत के बोल:
माटी रे माटी रे माटी रे माटी रे
रुत आए दिन आए जो आए दुख लाए
देख ले हमने कैसे उमरिया काटी रे
माटी रे माटी रे
माटी रे माटी रे
देस छूटा गांव छूटा छूटे घर आंगन
काट ही डाले दुखो ने जन्मों के बंधन
दर्द ने ही दिल की खाई पाटी रे
माटी रे माटी रे
माटी रे माटी रे
घात कैसी कर गया मुझसे मेरा जीवन
किसका मुख दिखला रहा है तुझको ये दर्पण
हो गई कैसे मैं इतनी नाटी रे
माटी रे माटी रे
माटी रे माटी रे
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Maati re maati re-God Mother 1998
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