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Tuesday, 31 May 2011

खुली हवा में डोले रे-चम्पाकली १९५७

फिल्म चम्पाकली में संगीतकार हेमंत कुमार ने अच्छा संगीत दिया
राजेंद्र कृष्ण के मधुर गीतों को लता और रफ़ी ने बड़ी तन्मयता के
साथ गाया भी। सॉफ्ट किस्म के गीत हैं फिल्म के। सॉफ्ट गीतों कि
विशेषता ये होती है उन्हें आप जब चाहे बिना ना नुकुर, मूड हो
ना हो सुन कर जी बहला सकते हैं। आपको पहले दो गीत सुनवाये
हैं-छुप गया कोई रे और गवालन क्यूँ मेरा मन। गीत में नायिका
कुछ विशेष व्यायाम कर रही है और वो क्या है मुझे समझ नहींते हैं।
पढता। कृपया बतलाएं धागे में पत्थर बांध के ऐसा क्या किया जाता
है जिससे पक्षी बेचारे नीचे गिरने लगते हैं।





गीत के बोल:

खुली हवा में डोले रे आज मेरा मन बोले रे
दिल की बहार ले के आएगा साँवरिया
खुली हवा में डोले रे आज मेरा मन बोले रे
दिल की बहार ले के आएगा साँवरिया

बदरिया जो छाई संदेसा ऐसा लाई
कि सुन-सुन मैं तो शरमाई घबराई
बदरिया जो छाई संदेसा ऐसा लाई
कि सुन-सुन मैं तो शरमाई घबराई
किसी ने चोरी-चोरी मेरे घूँघट के पट खोले रे
लाज की मारी मैं तो हुई रे बावरिया

खुली हवा में डोले रे आज मेरा मन बोले रे
दिल की बहार ले के आएगा साँवरिया

मैं अँखियाँ झुकाऊँ या मुखड़ा छुपाऊँ
समझ नहीं आए हाय कित जाऊँ
मैं अँखियाँ झुकाऊँ या मुखड़ा छुपाऊँ
समझ नहीं आए हाय कित जाऊँ
आज किसी ने मुझे पुकारा प्यार से हौले-हौले रे
झुक झुक जाये हाय मेरी नजरिया

खुली हवा में डोले रे आज मेरा मन बोले रे
दिल की बहार ले के आएगा साँवरिया

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Khuli hawa mein dole re-Champakali 1957

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