आपको २-३ पोस्ट पहले एक फरहा और आमिर खान की जोड़ी पर
फिल्माया गया गीत सुनवाया था जिसमें अमित कुमार की आवाज़
थी। अब सुनवाते हैं आपको फिल्म दिलजला से किशोर कुमार की
आवाज़ में एक गीत जो इन्दीवर का लिखा हुआ है और जिसकी धुन
बनाई है बप्पी लहरी ने। इस गीत में जैकी और फरहा की जोड़ी है।
दाढ़ी वाले नायक बहुत कम दिखे हैं हिंदी फिल्म जगत में। जैकी श्रोफ
ने इस सुविधा का काफी इस्तेमाल किया है-उन्हें शायद दाढ़ी बढ़ाये
रखने की छूट थी।
गीत में बगावती अंदाज़ में प्यार और उसका इज़हार किया जा रहा है।
नायक नायिका और उनके इर्द गिर्द हिलने वाले कलाकारों के अलावा
पार्टी में मौजूद लोगों में से और कोई खुश नहीं दिखाई दे रहा है।
गीत के बोल:
हम ऐसे जान-ए-जान तुमसे प्यार करते हैं
हम ऐसे जान-ए-जान युमसे प्यार करते हैं
जान तन से, तन जान से
जान तन से, तन जान से
हम ऐसे जान-ए-जान युमसे प्यार करते हैं
आंख को किरण सांस को पवन
आंख को किरण सांस को पवन
जीने को तुम ज़रूरी, इकरार करते हैं
जान तन से, तन जान से
हम प्यार तेरा ऊपर से
किस्मत में लिखा कर लाये
नहीं मजाल किसी की
कोई बीच में अपने आये
प्यार ना माने कोई पहरा
या कफ़न मिले या सेहरा
ऐलान-ए-वफ़ा दीवाने सर-ए-आम करते हैं
जान तन से, तन जान से
हम ऐसे जान-ए-जान तुमसे प्यार करते हैं
जान तन से, तन जान से
हस्ती क्या इंसान की
गर जिद पर हम अड़ जाएँ
करने को तुझे हासिल
भगवन से भी लड़ जाएँ
दिलजला जान भी ले ले
दिलजला जान भी दे दे
दिलजले जहाँ वालों को
होशियार करते हैं
हम ऐसे जान-ए-जान युमसे प्यार करते हैं
हम ऐसे जान-ए-जान युमसे प्यार करते हैं
............................
Jaan tan se, tan jaan se-Diljala 1987
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Wednesday, 6 July 2011
Sunday, 5 June 2011
वो तेरी दुनिया नहीं-डकैत १९८७
डकैत समस्या पर कई फ़िल्में बनी हैं हिंदी सिनेमा जगत में।
इनमें से अधिकतर फ़िल्में ७० के दशक में बनीं और खूब चलीं।
८० के दशक में रोमांटिक फिल्मों का दौर आया और बाकी के
सारे विषय पीछे छूट गये। इस दौर में कुछ फ़िल्में लीक से हट कर
भी बनीं जिनमें से अधिकतर बॉक्स ऑफिस की पटरी से ज़ल्दी
उतर भी गयीं। ऐसी ही एक फिल्म है-डकैत जिसमे सनी देओल ने
डकैत की भूमिका निभाई। फिल्म परेश रावल के जीवंत अभिनय
के लिए याद की जाती है तो दूसरी वजह इसके मधुर गीत हैं।
प्रस्तुत गीत में नायिका नायक से फ़रियाद कर रही है, उसे विद्रोह
के रास्ते से सामान्य जीवन की तरफ लाने की संगीतमय कोशिश।
गीत में अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्री ने बढ़िया अभिनय किया है। गीत
कर्णप्रिय है और इसे आप कभी कभार अवश्य सुन सकते हैं।
गीत के बोल:
वो तेरी दुनिया नहीं
वो तेरी महफ़िल नहीं
उस तरफ मत जा
उधार, रस्ता तो है मंजिल नहीं
वो तेरी दुनिया नहीं
वो तेरी महफ़िल नहीं
उस तरफ मत जा
उधर, रस्ता तो है मंजिल नहीं
वो तेरी दुनिया नहीं
वो तेरी महफ़िल नहीं
हर कसम को तोड़ कर
हर एक वादा तोड़ कर
हर कसम को तोड़ कर
हर एक वादा तोड़ कर
जा रहा है आज तू
नफरत से सबको छोड़ कर
क्या मेरी, क्या मेरी
क्या मेरी चाहत भी तेरे
प्यार के काबिल नहीं
उस तरफ मत जा
उधर, रस्ता तो है मंजिल नहीं
वो तेरी दुनिया नहीं
वो तेरी महफ़िल नहीं
गीत बुलबुल का है ये
कोयल की मीठी कूक है
ज़िन्दगी है फूल
तेरे हाथ में बन्दूक है
तू मेरा, तू मेरा
तू मेरा साजन है, साजन
तू कोई कातिल नहीं
उस तरफ मत जा
उधर, रस्ता तो है मंजिल नहीं
वो तेरी दुनिया नहीं
वो तेरी महफ़िल नहीं
..................................
Wo teri duniya nahin-Dacait 1987
इनमें से अधिकतर फ़िल्में ७० के दशक में बनीं और खूब चलीं।
८० के दशक में रोमांटिक फिल्मों का दौर आया और बाकी के
सारे विषय पीछे छूट गये। इस दौर में कुछ फ़िल्में लीक से हट कर
भी बनीं जिनमें से अधिकतर बॉक्स ऑफिस की पटरी से ज़ल्दी
उतर भी गयीं। ऐसी ही एक फिल्म है-डकैत जिसमे सनी देओल ने
डकैत की भूमिका निभाई। फिल्म परेश रावल के जीवंत अभिनय
के लिए याद की जाती है तो दूसरी वजह इसके मधुर गीत हैं।
प्रस्तुत गीत में नायिका नायक से फ़रियाद कर रही है, उसे विद्रोह
के रास्ते से सामान्य जीवन की तरफ लाने की संगीतमय कोशिश।
गीत में अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्री ने बढ़िया अभिनय किया है। गीत
कर्णप्रिय है और इसे आप कभी कभार अवश्य सुन सकते हैं।
गीत के बोल:
वो तेरी दुनिया नहीं
वो तेरी महफ़िल नहीं
उस तरफ मत जा
उधार, रस्ता तो है मंजिल नहीं
वो तेरी दुनिया नहीं
वो तेरी महफ़िल नहीं
उस तरफ मत जा
उधर, रस्ता तो है मंजिल नहीं
वो तेरी दुनिया नहीं
वो तेरी महफ़िल नहीं
हर कसम को तोड़ कर
हर एक वादा तोड़ कर
हर कसम को तोड़ कर
हर एक वादा तोड़ कर
जा रहा है आज तू
नफरत से सबको छोड़ कर
क्या मेरी, क्या मेरी
क्या मेरी चाहत भी तेरे
प्यार के काबिल नहीं
उस तरफ मत जा
उधर, रस्ता तो है मंजिल नहीं
वो तेरी दुनिया नहीं
वो तेरी महफ़िल नहीं
गीत बुलबुल का है ये
कोयल की मीठी कूक है
ज़िन्दगी है फूल
तेरे हाथ में बन्दूक है
तू मेरा, तू मेरा
तू मेरा साजन है, साजन
तू कोई कातिल नहीं
उस तरफ मत जा
उधर, रस्ता तो है मंजिल नहीं
वो तेरी दुनिया नहीं
वो तेरी महफ़िल नहीं
..................................
Wo teri duniya nahin-Dacait 1987
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Thursday, 19 May 2011
बटाटा वडा-हिफाज़त १९८७
आपको सन १९४१ के गीत के जिक्र के वक़्त बताया था कि फिल्म निर्माण
की तकनीक ने इस कदर विकास किया कि ज़मीन पर रेंगते रेंगते गीत गाते
नायक नायिका हवा में उड़ कर भी गीत गाने लगे। विशेष प्रभावों के माध्यम
से ये संभव हुआ। प्रस्तुत गीत में भी एक ऐसा ही प्रभाव है।
लगभग सभी खाने पीने की चीज़ें गीतों के माध्यम से बोलिवुडियों ने याद
कर ली हैं। बॉलीवुड की उत्पत्ति हुई है बम्बई में तो बटाटा वडा कैसे
भुलाया जा सकता है। आम और ख़ास दोनों वर्गों को समान रूप से प्रिय
ये बम्बैया खाना आपको शहर में हर जगह आसानी से और उत्तम गुणवत्ता
वाला मिल जायेगा। इसे जनता नाश्ते और खाने में जैसे चाहे खाती है,
चटनी के साथ, बिना चटनी के।
फिल्म में कहानी कुछ यूँ है-नायक नायिका एक बटाटा वडे की दुकान
पर पहुँच जाते हैं, वहां बटाटा बड़े बनाने वाली महिला वडे के मसाले
में गलती से भांग डाल देती है। भांग वाले वडे खाने के बाद क्या होता है
वो इस गीत में आप देखिये। गीत का मसाला तैयार किया है आनंद बक्षी
ने और इसको धुन में तल कर स्वादिष्ट बनाया है आर डी बर्मन ने। गाने
वाले कलाकार हैं-एस पी बालसुब्रमण्यम और एस जानकी ।
गीत के बोल:
बटाटा वडा हे
बटाटा वडा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा हे
बटाटा वडा
प्यार नहीं करना था, करना पड़ा
बटाटा वडा, हे
बटाटा वडा
बटाटा वडा, बटाटा वडा
होते जो होश मं हम
ऐसे ना झूम जाते
अच्छा यही था पहले
हम तुम ना पास आते
हो ओ ओ ओ ओ
अब दूर जाना है मुश्किल बड़ा
बटाटा वडा, हे
बटाटा वडा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा, डा डा डा डा डा
बटाटा वडा
लगता है आज दिल के
अरमान निकाल रहे हैं
कैसी है आग जिस में
हम दोनों जल रहे हैं
जा ठन्डे पानी का
ले आ तू घड़ा
बटाटा वडा है
बटाटा वडा हा हा हा हा हा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
हो हो हो हो हो हो हो
बटाटा वडा, बटाटा वडा
मस्ती में दिल की कश्ती
जाये ना डूब अपनी
डूबे के पार उतरे
जोड़ी है खूब अपनी
तू भी है कंवारी
मैं भी हूँ छडा, हा हा हा हा हा
बटाटा वडा, आ हा हा
बटाटा वडा आ हा हा हा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा, आ हा हा
बटाटा वडा, टा वडा
टा वडा
........................
Batata Wada-Hifazat 1987
की तकनीक ने इस कदर विकास किया कि ज़मीन पर रेंगते रेंगते गीत गाते
नायक नायिका हवा में उड़ कर भी गीत गाने लगे। विशेष प्रभावों के माध्यम
से ये संभव हुआ। प्रस्तुत गीत में भी एक ऐसा ही प्रभाव है।
लगभग सभी खाने पीने की चीज़ें गीतों के माध्यम से बोलिवुडियों ने याद
कर ली हैं। बॉलीवुड की उत्पत्ति हुई है बम्बई में तो बटाटा वडा कैसे
भुलाया जा सकता है। आम और ख़ास दोनों वर्गों को समान रूप से प्रिय
ये बम्बैया खाना आपको शहर में हर जगह आसानी से और उत्तम गुणवत्ता
वाला मिल जायेगा। इसे जनता नाश्ते और खाने में जैसे चाहे खाती है,
चटनी के साथ, बिना चटनी के।
फिल्म में कहानी कुछ यूँ है-नायक नायिका एक बटाटा वडे की दुकान
पर पहुँच जाते हैं, वहां बटाटा बड़े बनाने वाली महिला वडे के मसाले
में गलती से भांग डाल देती है। भांग वाले वडे खाने के बाद क्या होता है
वो इस गीत में आप देखिये। गीत का मसाला तैयार किया है आनंद बक्षी
ने और इसको धुन में तल कर स्वादिष्ट बनाया है आर डी बर्मन ने। गाने
वाले कलाकार हैं-एस पी बालसुब्रमण्यम और एस जानकी ।
गीत के बोल:
बटाटा वडा हे
बटाटा वडा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा हे
बटाटा वडा
प्यार नहीं करना था, करना पड़ा
बटाटा वडा, हे
बटाटा वडा
बटाटा वडा, बटाटा वडा
होते जो होश मं हम
ऐसे ना झूम जाते
अच्छा यही था पहले
हम तुम ना पास आते
हो ओ ओ ओ ओ
अब दूर जाना है मुश्किल बड़ा
बटाटा वडा, हे
बटाटा वडा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा, डा डा डा डा डा
बटाटा वडा
लगता है आज दिल के
अरमान निकाल रहे हैं
कैसी है आग जिस में
हम दोनों जल रहे हैं
जा ठन्डे पानी का
ले आ तू घड़ा
बटाटा वडा है
बटाटा वडा हा हा हा हा हा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
हो हो हो हो हो हो हो
बटाटा वडा, बटाटा वडा
मस्ती में दिल की कश्ती
जाये ना डूब अपनी
डूबे के पार उतरे
जोड़ी है खूब अपनी
तू भी है कंवारी
मैं भी हूँ छडा, हा हा हा हा हा
बटाटा वडा, आ हा हा
बटाटा वडा आ हा हा हा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा, आ हा हा
बटाटा वडा, टा वडा
टा वडा
........................
Batata Wada-Hifazat 1987
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Monday, 10 January 2011
ओ मेरे प्यारे बैल चला चल-आगे की सोच १९८७
आपको हमने कई ऐसे गीत सुनवाए जिसमे पशुओं ने भी
अभिनय किया है। हिंदी फिल्म संगीत के खजाने में
कई ऐसे गीत भी हैं जिनमें पशुओं ने मनुष्यों से अच्छा
अभिनय किया है। हालाँकि आज जो गीत आपको सुनवाया
जा रहा है उसमें नायक ने अच्छा अभिनय किया है मगर
उनके साथ सहायक कलाकार के रूप में दो बैल भी हैं ।
बैलगाड़ी पर सवार दादा कोंडके को आप ज़रूर पहचान
जायेंगे। ये गीत है फिल्म आगे की सोच से जिसे गायक
किशोर कुमार ने गाया है। बालकिशन पुरी के लिखे गीत
की तर्ज़ बनाई है राम लक्ष्मण (विजय पाटिल) ने ।
गीत के बोल:
अरे हट हा
अरे हट हा
अरे बाजू हो जा
हुर्र, पहलवान
ओ मेरे बैल चला चल जोर से
अरे, ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बेटा ज़ोर चला चल जोर से
हम दोनों का बंधा है बंधन, हाँ
हम दोनों का बंधा है बंधन
प्रीत प्यार की डोर से
ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बिटुआ जोर चला चल जोर से
इधर भी पर्वत, उधर भी पर्वत
बीच में नदिया नाले बैल जी
बीच में नदिया नाले
इन झरनों की ताल पे मितवा
कोई रागिनी गा ले बैल जी
कोई रागिनी गा ले
दूर खेत में देख मोरनी, हाय
दूर खेत में देख मोरनी
इशक करे है मोर से
ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बिटुआ जोर चला चल जोर से, हा
देख ले सूरज सर पे आया
बज गए पूरे बारह बैल जी
बज गए पूरे बारह
अरे मैं खाऊँगा चना भटूर
तुम खा लेना चारा बैल जी
तुम खा लेना चारा
खाने की खुसबू आई है, आय हाय
खाने की खुसबू आई है
उस ढाबे की ओर से
ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बेटा जोर चला चल जोर से
शहर में जा के तुम चुप रहना
देख के धंधे काले बैल जी
देख के धंधे काले
अरे तन के उजले लोग वहां पर
लेकिन मन के काले बैल जी
लेकिन मन के काले
नीली छतरी वाला देखो, हाय
नीली छतरी वाला देखो
देख रहा है गौर से
ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बेटा जोर चला चल जोर से
ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बिटुआ जोर चला चल जोर से
............................................................
O mere pyare bail chala chal jor se-Aage ki soch 1987
अभिनय किया है। हिंदी फिल्म संगीत के खजाने में
कई ऐसे गीत भी हैं जिनमें पशुओं ने मनुष्यों से अच्छा
अभिनय किया है। हालाँकि आज जो गीत आपको सुनवाया
जा रहा है उसमें नायक ने अच्छा अभिनय किया है मगर
उनके साथ सहायक कलाकार के रूप में दो बैल भी हैं ।
बैलगाड़ी पर सवार दादा कोंडके को आप ज़रूर पहचान
जायेंगे। ये गीत है फिल्म आगे की सोच से जिसे गायक
किशोर कुमार ने गाया है। बालकिशन पुरी के लिखे गीत
की तर्ज़ बनाई है राम लक्ष्मण (विजय पाटिल) ने ।
गीत के बोल:
अरे हट हा
अरे हट हा
अरे बाजू हो जा
हुर्र, पहलवान
ओ मेरे बैल चला चल जोर से
अरे, ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बेटा ज़ोर चला चल जोर से
हम दोनों का बंधा है बंधन, हाँ
हम दोनों का बंधा है बंधन
प्रीत प्यार की डोर से
ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बिटुआ जोर चला चल जोर से
इधर भी पर्वत, उधर भी पर्वत
बीच में नदिया नाले बैल जी
बीच में नदिया नाले
इन झरनों की ताल पे मितवा
कोई रागिनी गा ले बैल जी
कोई रागिनी गा ले
दूर खेत में देख मोरनी, हाय
दूर खेत में देख मोरनी
इशक करे है मोर से
ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बिटुआ जोर चला चल जोर से, हा
देख ले सूरज सर पे आया
बज गए पूरे बारह बैल जी
बज गए पूरे बारह
अरे मैं खाऊँगा चना भटूर
तुम खा लेना चारा बैल जी
तुम खा लेना चारा
खाने की खुसबू आई है, आय हाय
खाने की खुसबू आई है
उस ढाबे की ओर से
ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बेटा जोर चला चल जोर से
शहर में जा के तुम चुप रहना
देख के धंधे काले बैल जी
देख के धंधे काले
अरे तन के उजले लोग वहां पर
लेकिन मन के काले बैल जी
लेकिन मन के काले
नीली छतरी वाला देखो, हाय
नीली छतरी वाला देखो
देख रहा है गौर से
ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बेटा जोर चला चल जोर से
ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बिटुआ जोर चला चल जोर से
............................................................
O mere pyare bail chala chal jor se-Aage ki soch 1987
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Raam Laxman
Monday, 13 December 2010
हैरान हूँ मैं आपकी जुल्फों को देख कर-जवाब हम देंगे १९८७
जवाब देने हम आ गए फिल्म जवाब हम देंगे का गीत
ले कर। अभी गीत जी की एक प्रविष्टि में पढ़ा कि अनु मालिक
ने गायक विनोद राठोड को परदे पर दिखा के एक नयी शुरुआत
की। जानकारी के लिए बतला दूं फिल्म जवाब हम देंगे के
गीत "हैरान हूँ मैं आपकी....." में भी आप एक गायक को देख
पाएंगे। फिल्म १९८७ की है और परदे पर आप शब्बीर कुमार
को माइक पकडे गीत गाते देख्नेगे साथ में एक और प्रसिद्द
गायिका अनुराधा पौडवाल हैं। अनुराधा पौडवाल को तो बहुत
से संगीत प्रेमी पहचानते हैं, कारण, टी सीरीज के म्यूजिक
विडियो में उनका चेहरा अक्सर दिखाई दे जाता है। गीत में
फिल्म के हीरो हीरोइन जैकी श्रोफ़ और श्रीदेवी ड्यूटी पुलिस
की ड्यूटी बजाते देखे जा सकते हैं। पुलिस की वर्दी के अलावा
उन्होंने कांजीवरम की सिल्क की साडी भी पहनी है इस गीत में।
दो अंतरे तक 'बाल जुल्फें ' ही हो रहा है उसके बाद श्रीदेवी की
छोटी यकायक गायब हो जाती है और छोटे बाल में नज़र आती
है और गाने का टॉपिक बदल जाता है, बाल से गाल की चर्चा होने
लग जाती है। गीत के अंत में फिर वही-हैरान हूँ मैं आपकी जुल्फों
को देख कर। अबके तो ऐसा लगता है हीरो कहना चाहता हो-
कब जुल्फें बड़ी हो जाती हैं, कब छोटी हैरानी की बात है।
गाने के बोल:
हैरान हूँ मैं आपकी जुल्फों को देख कर
हैरान हूँ मैं आपकी जुल्फों को देख कर
इनको घटा कहूं,
इनको घटा कहूं,तो घटाओं को की कहूं
हैरान हूँ मैं आपकी जुल्फों को देख कर।
तारीफ करना उसकी मर्दों की है अदा
तारीफ करना उसकी मर्दों की है अदा
इसको अदा कहूं,
इसको अदा कहूं,तो अदाओं को क्या कहूं
हैरान हूँ मैं आपकी जुल्फों को देख कर
कितनी है खुशनसीब ये बहकी हुई हवा
हाथों में जिसके रेशमी आंचल है आपका
इतना करीब आपके मैं भी न क्यूँ हुआ
इसको वफ़ा कहूं,
इसको वफ़ा कहूं तो वफाओं को क्या कहूं
तारीफ करना उसकी मर्दों की है अदा
इसको अदा कहूं,
इसको अदा कहूं,तो अदाओं को क्या कहूं
हैरान हूँ मैं आपकी जुल्फों को देख कर
नगमे मुझे मगर बहार सुनती रही मगर
मुझको, मेरी जवानी पे, कुछ न हुआ असर
आवाज़ जब तुम्हारी मेरे दिल में उतर गयी
कोयल की मीठी मीठी
कोयल की मीठी मीठी, शराब क्या कहूं
हैरान हूँ मैं आपकी जुल्फों को देख कर
इनको घटा कहूं,तो घटाओं को की कहूं
तारीफ करना उसकी मर्दों की है अदा
रंगीनियाँ हैं गालों की जैसे चमन के फूल
जो कुछ कहा जनाब ने सब है मुझे कुबूल
महके हुए कदम हैं तो महका हुआ बदन
तुमको फ़ज़ा कहूं
तुमको फ़ज़ा कहूं,तो फ़ज़ाओं को क्या कहूं
तारीफ करना उसकी मर्दों की है अदा
इसको अदा कहूं,
इसको अदा कहूं,तो अदाओं को क्या कहूं
हैरान हूँ मैं आपकी जुल्फों को देख कर
इनको घटा कहूं,तो घटाओं को की कहूं
तारीफ करना उसकी मर्दों की है अदा
हैरान हूँ मैं आपकी जुल्फों को देख कर
....................................
Hairan Hoon Main Aapki Zulfon Ko Dekh Kar-Jawab Hum Denge 1987
ले कर। अभी गीत जी की एक प्रविष्टि में पढ़ा कि अनु मालिक
ने गायक विनोद राठोड को परदे पर दिखा के एक नयी शुरुआत
की। जानकारी के लिए बतला दूं फिल्म जवाब हम देंगे के
गीत "हैरान हूँ मैं आपकी....." में भी आप एक गायक को देख
पाएंगे। फिल्म १९८७ की है और परदे पर आप शब्बीर कुमार
को माइक पकडे गीत गाते देख्नेगे साथ में एक और प्रसिद्द
गायिका अनुराधा पौडवाल हैं। अनुराधा पौडवाल को तो बहुत
से संगीत प्रेमी पहचानते हैं, कारण, टी सीरीज के म्यूजिक
विडियो में उनका चेहरा अक्सर दिखाई दे जाता है। गीत में
फिल्म के हीरो हीरोइन जैकी श्रोफ़ और श्रीदेवी ड्यूटी पुलिस
की ड्यूटी बजाते देखे जा सकते हैं। पुलिस की वर्दी के अलावा
उन्होंने कांजीवरम की सिल्क की साडी भी पहनी है इस गीत में।
दो अंतरे तक 'बाल जुल्फें ' ही हो रहा है उसके बाद श्रीदेवी की
छोटी यकायक गायब हो जाती है और छोटे बाल में नज़र आती
है और गाने का टॉपिक बदल जाता है, बाल से गाल की चर्चा होने
लग जाती है। गीत के अंत में फिर वही-हैरान हूँ मैं आपकी जुल्फों
को देख कर। अबके तो ऐसा लगता है हीरो कहना चाहता हो-
कब जुल्फें बड़ी हो जाती हैं, कब छोटी हैरानी की बात है।
गाने के बोल:
हैरान हूँ मैं आपकी जुल्फों को देख कर
हैरान हूँ मैं आपकी जुल्फों को देख कर
इनको घटा कहूं,
इनको घटा कहूं,तो घटाओं को की कहूं
हैरान हूँ मैं आपकी जुल्फों को देख कर।
तारीफ करना उसकी मर्दों की है अदा
तारीफ करना उसकी मर्दों की है अदा
इसको अदा कहूं,
इसको अदा कहूं,तो अदाओं को क्या कहूं
हैरान हूँ मैं आपकी जुल्फों को देख कर
कितनी है खुशनसीब ये बहकी हुई हवा
हाथों में जिसके रेशमी आंचल है आपका
इतना करीब आपके मैं भी न क्यूँ हुआ
इसको वफ़ा कहूं,
इसको वफ़ा कहूं तो वफाओं को क्या कहूं
तारीफ करना उसकी मर्दों की है अदा
इसको अदा कहूं,
इसको अदा कहूं,तो अदाओं को क्या कहूं
हैरान हूँ मैं आपकी जुल्फों को देख कर
नगमे मुझे मगर बहार सुनती रही मगर
मुझको, मेरी जवानी पे, कुछ न हुआ असर
आवाज़ जब तुम्हारी मेरे दिल में उतर गयी
कोयल की मीठी मीठी
कोयल की मीठी मीठी, शराब क्या कहूं
हैरान हूँ मैं आपकी जुल्फों को देख कर
इनको घटा कहूं,तो घटाओं को की कहूं
तारीफ करना उसकी मर्दों की है अदा
रंगीनियाँ हैं गालों की जैसे चमन के फूल
जो कुछ कहा जनाब ने सब है मुझे कुबूल
महके हुए कदम हैं तो महका हुआ बदन
तुमको फ़ज़ा कहूं
तुमको फ़ज़ा कहूं,तो फ़ज़ाओं को क्या कहूं
तारीफ करना उसकी मर्दों की है अदा
इसको अदा कहूं,
इसको अदा कहूं,तो अदाओं को क्या कहूं
हैरान हूँ मैं आपकी जुल्फों को देख कर
इनको घटा कहूं,तो घटाओं को की कहूं
तारीफ करना उसकी मर्दों की है अदा
हैरान हूँ मैं आपकी जुल्फों को देख कर
....................................
Hairan Hoon Main Aapki Zulfon Ko Dekh Kar-Jawab Hum Denge 1987
Friday, 19 November 2010
बात पते की कहे मदारी-परिवार १९८७
चिट्ठाजगत पर एक शब्द देखा-ब्लॉगवुड । एकदम सटीक शब्द
है। जिन महानुभाव ने इसे सर्वप्रथम प्रयोग किया वो बधाई के
पात्र हैं। जैसे बॉलीवुडिये कहते हैं कि बॉलीवुड एक परिवार है
वैसे ही ब्लॉगवुडियों के लिए ब्लॉगवुड एक परिवार है । मदारी
और जमूरे वाला फंडा ब्लॉग जगत पर पाया जाता है। परिवार
फिल्म के नाम से एक गीत याद आया फिल्म परिवार का।आप
भी देखिये और मजा लीजिये। इसमें मिथुन चक्रवर्ती के साथ
उनकी मण्डली है जिसमे बच्चे और दो जानवर-बन्दर और
कुत्ता शामिल है।
गीत के बोल:
बोलों की अगर ज़रुरत हो तो चटका लगायें.
...........................................
Baat pate ki kahe madari-Parivar 1987
है। जिन महानुभाव ने इसे सर्वप्रथम प्रयोग किया वो बधाई के
पात्र हैं। जैसे बॉलीवुडिये कहते हैं कि बॉलीवुड एक परिवार है
वैसे ही ब्लॉगवुडियों के लिए ब्लॉगवुड एक परिवार है । मदारी
और जमूरे वाला फंडा ब्लॉग जगत पर पाया जाता है। परिवार
फिल्म के नाम से एक गीत याद आया फिल्म परिवार का।आप
भी देखिये और मजा लीजिये। इसमें मिथुन चक्रवर्ती के साथ
उनकी मण्डली है जिसमे बच्चे और दो जानवर-बन्दर और
कुत्ता शामिल है।
गीत के बोल:
बोलों की अगर ज़रुरत हो तो चटका लगायें.
...........................................
Baat pate ki kahe madari-Parivar 1987
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