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Tuesday, 18 October 2011

पायलिया हो हो हो हो-दीवाना १९९२

आपको थोड़े दिन पहले रफ़ी का गाया एक अमर गीत सुनवाया था सन १९५२ की
दीवाना से। ठीक ४० साल बाद एक और दीवाना आई जो रंगीन थी और जिसमें
संगीत नदीम श्रवण का था। ये फिल्म शाहरुख़ खान की पदार्पण फिल्म थी ,
फिल्म काफी चली जिसकी मुख्य वजह इसकी अभिनेत्री दिव्या भारती और इसके
लोकप्रिय गीत रहे। फिल्म गायक कुमार सानू के कैरियर के लिए भी काफी फायदेमंद
साबित हुयी। इस फिल्म के बाद ऋषि कपूर शायद ही किसी रोमांटिक भूमिका में
दिखाई दिए हों। हिंदी फिल्मों की फिलासफी ऐसी है कि उसमें नायक कभी बूढा
नहीं होता। इस गीत में भी नायक अपने से आधी उम्र की नायिका से साथ ठुमके
लगा रहा है। यही वो बातें हैं जो दर्शक बिना हाजमोला के ख़ुशी ख़ुशी पचा जाता है।

गीतकार आनंद बख्शी द्वारा रिक्त किये गए स्थान को शायद अगली पीढ़ी से अनजान पुत्र
समीर ने ही भरा । ९० के दशक में उन्होंने भी गाने कि फैक्ट्री माफिक काफी गीत लिखे
हिंदी फिल्मों के लिए। उनके लिखे काफी गीत चर्चित रहे और हिट हुए।



गीत के बोल:

पायलिया, हो हो हो हो,
पायलिया, हो हो हो हो

जिंद माहिया, जिंद माहिया
जाना मैं जाना तेरे साथ वे
जिंद माहिया, जिंद माहिया
हाथों में ले ले मेरा हाथ वे
जिंद माहिया, जिंद माहिया
जाना मैं जाना तेरे साथ वे
जिंद माहिया, जिंद माहिया
हाथों में ले ले मेरा हाथ वे

पायलिया, हो हो हो हो, पायलिया, हो हो हो हो
तेरी पायलिया शोर मचाये, नींद चुराए
होश उडाये, मुझको पास बुलाये, ओ रब्बा हो

पायलिया, हो हो हो हो, पायलिया, हो हो हो हो
पायलिया गीत सुनाये, सरगम गाये
प्रीत जगाये, तुझको पास बुलाये, रब्बा हो

पायलिया, हो हो हो हो
पायलिया, हो हो हो हो

आँखों में तेरे सपने, होंठों पे तेरी बात
ये दिन तो कट जाता है, गुज़रती नहीं रात
आँखों में तेरे सपने, होंठों पे तेरी बात
ये दिन तो कट जाता है, गुज़रती नहीं रात

हाय कैसे मैं सुनाऊँ जिया का तुझको हाल
के याद नहीं मुझको महीना दिन साल

साँसों से बांधे साँसों का बंधन
तेरी पायल गोरी मेरे दिल की धड़कन

पायलिया, हो हो हो हो,
पायलिया, हो हो हो हो
पायलिया गीत सुनाये, सरगम गाये
प्रीत जगाये, तुझको पास बुलाये, रब्बा हो

तेरी पायलिया शोर मचाये, नींद चुराए
होश उडाये, मुझको पास बुलाये, रब्बा हो

मेरी पायल पे लिखा है दीवाने तेरा नाम
बाहों में तेरी बीते अब मेरे सुबह-ओ-शाम
मेरी पायल पे लिखा है दीवाने तेरा नाम
बाहों में तेरी बीते अब मेरे सुबह-ओ-शाम

जी मेरा कहता है मैं पायल बन जाऊं
इन गोरे गोरे पैरों की रंगत चुराऊँ

ऐसी बातों से मुझको डर लागे
नाज़ुक होते है चाहत के धागे

पायलिया, हो हो हो हो,
पायलिया, हो हो हो हो
तेरी पायलिया शोर मचाये, नींद चुराए
होश उडाये, मुझको पास बुलाये, ओ रब्बा हो

पायलिया गीत सुनाये, सरगम गाये
प्रीत जगाये, तुझको पास बुलाये, रब्बा हो

पायलिया, हो हो हो हो
पायलिया, हो हो हो हो

जिंद माहिया, जिंद माहिया
जाना मैं जाना तेरे साथ वे
जिंद माहिया, जिंद माहिया
हाथों में ले ले मेरा हाथ वे
जिंद माहिया, जिंद माहिया
जाना मैं जाना तेरे साथ वे
जिंद माहिया, जिंद माहिया
हाथों में ले ले मेरा हाथ वे

आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ

जिंद माहिया, जिंद माहिया
जाना मैं जाना तेरे साथ वे
जिंद माहिया, जिंद माहिया
हाथों में ले ले मेरा हाथ वे
..........................................
Payaliya ho ho ho-Deewana 1992

Monday, 12 September 2011

सैयां के साथ मढैया में-ईना मीना डीका १९९४

हर भाषा का अपना अपना आनंद होता है। पानी को पनैया , मढ़िया
को मढैया, इनके साथ सैयां-बलैयां की तुकबंदी हो तो क्या बात है !
इनको दालैयाँ, सबजैयाँ के साथ रोटियाँ, पूड़ैयाँ और पराठैयाँ खाते खाते
सुनें तो और भी आनंद आएगा।

फिल्मों के खटिया-पटिया गीतों को सुनने में भी अलग प्रकार का आनंद
अनुभव में आता है। इन गीतों की धुन आकर्षक बनाई जाती है
ताकि ये लोगों की जुबां पे आसानी से चढ़ जाएँ। आइये सुनें एक
चटैया-मढैया गीत जो फिल्म 'ईना मीना डीका' से लिया गया
है। इसे फिल्माया गया है ऋषि कपूर और जूही चावला पर। ये गीत
काफी लोकप्रिय हुआ था। गायिका पूर्णिमा की आवाज़ का
इस्तेमाल बॉलीवुड के संगीतकारों ने ऐसे खटीया पटिया वाले कई
गीत बनाने में की है। कुमार सानू साथ में गा रहे हैं। समीर के
लिखे बोलों को धुन में बंधा है आनंद मिलिंद ने। आनंद मिलिंद ९०
के दशक में काफी सक्रिय रहे। ध्यान से इस गीत को सुनें तो आप
पाएंगे अनजान पुत्र समीर की साहित्यिक बुनियाद काफी मजबूत है।



गीत के बोल:

सैयां के साथ मढैया में
मढैया में
बड़ा मज़ा आये रजिया में

सैयां के साथ मढैया में
मढैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में

टूट गई चूड़ी कलैया में
कलैया में
कलैया में
टूट गई चूड़ी कलैया में
कलैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में

ऐ, सैयां के साथ मढैया में
मढैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में

मुश्किल से मौका मेरे हाथ आये,
हाँ, मुश्किल से मौका मेरे हाथ आये
करके बहाना कहीं दूर जाये

बेदर्दी कब से पड़ा मेरे पीछे
बैयाँ पकड़ के ज़बरदस्ती खींचे

लपक झपक के लड़ैया में
लड़ैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में

हाँ, सैयां के साथ मढैया में
मढैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में

नाज़ुक बड़ी है जवानी की डोरी
नाज़ुक बड़ी है जवानी की डोरी
माने ना कहना करे जोराजोरी
नस नस में मस्ती चढ़े हौले हौले
मौसम सुहाना जिया मोरा डोले

जब जुगनू चमके तलैया में
तलैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में

सैयां के साथ मढैया में
मढैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में


टूट गई चूड़ी कलैया में
कलैया में
कलैया में
टूट गई चूड़ी कलैया में
कलैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में

ऐ,सैयां के साथ मढैया में
मढैया में
बड़ा मज़ा आये लड़ैया में
बड़ा मज़ा आये रजैया में
हाँ, बड़ा मज़ा आये रजैया में
...................................................
Saiyan ke saath madhaiya mein-Eena Meena Deeka 1994

Tuesday, 30 August 2011

तूने बेचैन इतना ज़्यादा किया-नगीना १९८६

जैसा कि आपको कुछ पोस्ट पहले बतलाया था कि फिल्म नगीना १९८६ की एक

सुपर हिट फिल्म है. इस फिल्म के गीत भी बज बज के जनता को याद से हो

गए. इस फिल्म से निर्देशक हरमेश मल्होत्रा भी काफी चर्चा में आ गए.



फिल्म का अगला गीत है मोहम्मद अज़ीज़ और अनुराधा पौडवाल की आवाजों में.

ऋषि कपूर के लिए अमूमन सभी संगीतकार किशोर कुमार या रफ़ी की आवाज़

में गीत रिकोर्ड करते रहे. इस फिल्म के पदार्पण तक तो किशोर कुमार मौजूद

थे. फिल्म निर्देशक या संगीतकार की पसंद पर गाने मोहम्मद अज़ीज़ से गवाए

गए. मोहम्मद अज़ीज़ रफ़ी के क्लोन कहे जाते हैं. वैसे अगर आप हरमेश की

निर्देशित फिल्मों पर नज़र दौडाएं तो पाएंगे उन्हें रफ़ी की आवाज़ ज्यादा पसंद

रही. फिल्म बेटी से सन १९६९ में बतौर निर्देशक अपना कैरियर शुरू करने वाले

हरमेश ने अभी तक लगभग २५ से ज्यादा फिल्मों का निर्देशन किया है .

लक्ष्मी प्यारे खेमे में पहले जगह मिली शब्बीर कुमार को फिर आये अज़ीज़.

अज़ीज़ की सुरों पर पकड़ बेहतर होने की वजह से उन्हें ज्यादा मौके मिले.



गीत में काफी उछल कूद भी है और एक जगह पर नायक नायिका ऐसे भाग रहे

हैं जैसे १०० मीटर की दौड का अभ्यास कर रहे हों. इस गीत में भी आपको ऋषि

एक बढ़िया सा स्वेटर पहने नज़र आयेंगे. उन्हें जम्मू कश्मीर का पर्यटन विभाग

अपना ब्रांड अम्बैसेडर आसानी से बना सकता था.











तूने बेचैन इतना ज़्यादा किया

मैं तेरा हो गया मैने वादा किया

दिल ने मजबूर इतना ज़्यादा किया

मैं तेरी हो गई मैने वादा किया



तूने बेचैन इतना ज़्यादा किया

मैं तेरा हो गया मैने वादा किया

दिल ने मजबूर इतना ज़्यादा किया

मैं तेरी हो गई मैने वादा किया



तूने बेचैन इतना ज़्यादा किया



लग रहा है मुझे तेरे सर की कसम

अपनी पहली मोहब्बत नहीं ये सनम

हाँ मिले और बिछड़े कई बार हम

फिर से मिलने का हमने वादा किया

मैं तेरी हो गई मैने वादा किया



रात ढलती नहीं दिन गुज़रता नहीं

मेरा दिल कब तुझे याद करता नहीं

आहें भरने से जी मेरा भरता नहीं

फ़ैसला मैने ये सीधा सादा किया

मैं तेरा हो गया मैने वादा किया



कांच की तूने चूड़ी बलम तोड़ दी

लाज की शर्म की हर कसम तोड़ दी

नींद तो लूट ली जान क्यों छोड़ दी

काम तेरी निगाहों ने आधा किया

मैं तेरा हो गया मैने वादा किया



तूने बेचैन इतना ज़्यादा किया

मैं तेरा हो गया मैने वादा किया

दिल ने मजबूर इतना ज़्यादा किया

मैं तेरी हो गई मैने वादा किया

..........................................

Toone bechain itna zyada kiya-Nagina 1986

Saturday, 27 August 2011

भूली बिसरी प्रेम कहानी-नगीना १९८६

नाग नागिन और पुनर्जन्म की अवधारणा की कहानी पर बनी फिल्म नगीना

श्रीदेवी के कैरियर की महत्वपूर्ण फिल्म है जिसने उन्हें बुलंदियों के शिखर पर

कायम रहने में मदद की. फिल्म का शीर्षक गीत बेहद लोकप्रिय हुआ जो

लता मंगेशकर की आवाज़ में है. उसके अलावा जिस गीत ने संगीत प्रेमियों

को आनंदित किया वो है प्रस्तुत गीत अनुराधा पौडवाल की आवाज़ में.



फिल्म के गीत आनंद बक्षी के लिखे हुए हैं और संगीत है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल

का. फिल्म के इस गीत को आप " हौन्टिंग सोंग्स" की श्रेणी में रख सकते हैं.

आपने शायद ही कभी गौर फ़रमाया होगा कि हिंदी फिल्म महिला भूतों की कहानी

पर ज्यादा बना करती है. उन बिरली फिल्मों में से एक है-नीलकमल.









भूली बिसरी प्रेम कहानी

भूली बिसरी प्रेम कहानी

फिर आई

फिर आई एक याद पुरानी

भूली बिसरी प्रेम कहानी

फिर आई एक याद पुरानी

भूली बिसरी प्रेम कहानी

भूली बिसरी



आने का वादा किया ओ ओ ओ

आने का वादा किया

वादा तोड़ दिया नहीं आए पिया

आने का वादा किया

वादा तोड़ दिया नहीं आए पिया

ओ ओ ओ

भूल गए तुम प्रेम कहानी

भूल गए तुम प्रेम कहानी

फिर आई एक याद पुरानी



भूली बिसरी प्रेम कहानी

फिर आई एक याद पुरानी

भूली बिसरी प्रेम कहानी

भूली बिसरी



मैने तो प्यार किया ओ ओ ओ

मैने तो प्यार किया

ऐतबार किया इंतज़ार किया

मैने तो प्यार किया

ऐतबार किया इंतज़ार किया

ओ ओ ओ

तुमने किया क्या दिलवर जानी

तुमने किया क्या दिलवर जानी

फिर आई एक याद पुरानी



भूली बिसरी प्रेम कहानी

फिर आई एक याद पुरानी

भूली बिसरी प्रेम कहानी

भूली बिसरी



हारी मैं कर के जतन हो हो हो

हारी मैं कर के जतन

मेरे बिछड़े सजन कब होगा मिलन

हारी मैं कर के जतन

मेरे बिछड़े सजन कब होगा मिलन

हो ओ ओ

लंबी जुदाई रुत मस्तानी

लंबी जुदाई रुत मस्तानी

फिर आई एक याद पुरानी



भूली बिसरी प्रेम कहानी

फिर आई एक याद पुरानी

भूली बिसरी प्रेम कहानी

फिर आई एक याद पुरानी

भूली बिसरी प्रेम कहानी

भूली बिसरी

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Bhooli bisri prem kahani-Nagina 1986

Monday, 6 December 2010

कैसे जियूँगा मैं-साहिबां १९९३

शिव हरि का नाम लिया है तो उनका एक और मधुर गीत
सुन लिया जाए । शिव कुमार शर्मा और हरिप्रसाद चौरसिया
दो दिग्गज हस्तियाँ हैं शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में। उनके
फ़िल्मी गीतों में भी फिनिशिंग ज़बरदस्त मिलेगी आपको।

संजय दत्त, ऋषि कपूर और माधुरी अभिनीत फिल्म साहिबां
सन १९९३ में आई थी। आखिर ऋषि कपूर को भी माधुरी के
साथ काम करने का मौका मिल ही गया। उन्होंने ३-४ फिल्मों
में साथ काम किया है । ९० के दशक का पूर्वार्ध धक्-धक्
गर्ल के नाम है, हर दूसरी फिल्म में वे ही नज़र आतीं। उन्होंने
सन १९८७ से सन १९९७ तक सिल्वर स्क्रीन पर राज़ किया।

तो सुनिए आनंद बक्षी का लिखा, अनुराधा पौडवाल और
जोली मुखर्जी का गाया गीत । माधुरी की ज़रा ज़रा देर
में मुस्कुराने की आदत गुज़रे ज़माने की अभिनेत्री श्यामा
की याद दिलाती है। गौर फरमाएं-ये पंक्तियाँ- डूब मरूंगी
मैं -इसे मुस्कुरा के गाते आपने किसी अभिनेत्री को नहीं
देखा होगा कभी।




गीत के बोल:

कैसे जिऊंगा मैं, हो
कैसे जिऊंगा मैं अगर तू न बनी मेरी साहिबां
मेरी साहिबां, मेरी साहिबां, हो

डूब मरूंगी मैं अगर मैं न बनी हो तेरी साहिबां
तेरी साहिबां, तेरी साहिबां, हो

लाखों हज़ारों में सैयां मैने चुन लिया
हो ओ ओ, लाखों हज़ारों में सैयां मैने चुन लिया
लाखों हज़ारों ने फ़ैसला ये सुन लिया
हो, एक दूजे के वास्ते हम बने मेरे साजना
मेरी साहिबां,
तेरी साहिबां, हो

कहती है क्या मुझसे पायल तेरे पांव की
हो ओ ओ, कहती है क्या मुझसे पायल तेरे पांव की
एक सीधी सादी सी लड़की मैं गांव की
तेरे होंठों की बांसुरी बन गई मेरे साजना
मेरी साहिबां,
तेरी साहिबां, हो

जो अंतरा विडियो गीत से गायब है वो यूँ है

रातें गुज़रती हैं सारी रात जाग के
दिल चाहे आ जाऊं घर से मैं भाग के
ओ आना मगर डोली में बैठ कर मेरी साहिबां
मेरी साहिबां,
तेरी साहिबां
तेरी साहिबां

Thursday, 2 December 2010

मेरे ख्यालों की रहगुज़र-ये इश्क नहीं आसान १९८४

ज़िगर मुरादाबादी की कुछ पंक्तियाँ यूँ हैं:

ये इश्क नहीं आसान बस इतना समझ लीजिये
एक आग का दरिया है बस डूब के जाना है

ये फलसफा ज़िन्दगी के ऊपर भी आसानी से लागू होता है।


आपको गायक अनवर हुसैन का एक लाजवाब गीत सुनवाया
था फिल्म "हम हैं लाजवाब" से। मोहम्मद रफ़ी के अवसान के
बाद हिंदी फिल्म संगीत क्षेत्र में पैदा हुए बड़े रिक्त स्थान को कुछ
हद तक भरने का भरोसा पैदा करने वाले गायक ने कुछ गीत
गाये और गुमनामी के अंधेरों में कहीं खो गया। शायद गायक
की अपनी शर्तों पर काम करने का जूनून होने की वजह से ये
गत बनी या समय का फेर कहिये इसको। मामला चाहे जो भी
हो उनसे कमतर प्रतिभा वाले गायक सामने आये या लाये गए
और उन गायकों ने वो सब हासिल कर लिया जिसकी शायद
अनवर अपने फुर्सत के क्षणों में कल्पना मात्र ही कर पाते होंगे।

इसे विडम्बना ही कहिये कि जिस कलाकार को फिल्मों में गाते
सुना जाना चाहिए वो बीयर बार में सोम-रस प्रेमियों का दिल
बहला रहा है। उस कलाकार कि आवाज़ आम श्रोता कि पहुँच
में नहीं है क्यूंकि उनके लिए सार्वजनिक मंच उपलब्ध नहीं है.
प्रश्न ये है कि क्या सुनने वालों या संगीत पेमियों में से पहले कोई
ऐसा नहीं था जिसे गायक की इस गति पर ज़रा भी सहानुभूति
नहीं हुई हो। सवाल अंतरात्मा के जागने का है। समय का फेर
इसी को कहा जाता है। खैर देर आयद दुरुस्त आयद के साथ
गायक के लिए शुभकामनाएं। उन्हें और काम मिले और उनकी
प्रतिभा का paryapt दोहन हो चाहे टी वी पर हो या फिल्मों में।
सच्चे संगीत प्रेमी उन्हें फिर से सुनना चाहते हैं।

जब सितारे गर्दिश में हो तो आपके प्रशंसक ही आपको बिना पहचाने
धक्का मार के निकाल जाते हैं।

अंग्रेजी का दैनिक और उसके रिपोर्टर बधाई के पात्र हैं जिनके प्रयासों
से एक कलाकार को वापस सुनहरे दौर में लौटने का मौका मिल सकता
है। पत्रकारों को ऐसी दैवीय प्रेरणा देने वाली शक्ति को नमन। आइये सुनें
अनवर की आवाज़ में एक ग़ज़ल सुनें जो फिल्म "ये इश्क नहीं आसान"
से है। इस गीत को लिखा आनंद बक्षी ने और संगीत तैयार किया है
लक्ष्मी प्यारे ने। अमिताभ बच्चन की फिल्म कालिया बनाने वाले
फिल्मकार टीनू आनंद ने इस फिल्म का निर्देशन किया है। फिल्म ने
अच्छा व्यवसाय नहीं किया मगर प्रयास सराहनीय कहा जायेगा। फिल्म
का संगीत सुनने लायक है।



गीत के बोल:

मेरे ख्यालों की रहगुज़र से
वो देखिये वो गुज़र रहे हैं

मेरी निगाहों के आसमान से
ज़मीन-ए-दिल पर उतर रहे हैं

ये कैसे मुमकिन है हमनशीनों
ये कैसे मुमकिन है हमनशीनों
के दिल को दिल की खबर ना पहुंचे
के दिल को दिल की खबर ना पहुंचे

उन्हें भी हम याद आते होंगे
के जिनको हम याद कर रहे हैं

मेरे ख्यालों की रहगुज़र से
वो देखिये वो गुज़र रहे हैं

इसी मुहब्बत की रोज़-ओ-शब् हम
इसी मुहब्बत की रोज़-ओ-शब् हम
सुनाया करते थे दास्तानें
सुनाया करते थे दास्तानें

इसी मुहबत का नाम लेते हुवे
भी हम आज डर रहे हैं

मेरे ख्यालों की रहगुज़र से
वो देखिये वो गुज़र रहे हैं

चले हैं थोड़ी ही दूर तक बस
वो साथ मेरे सलीम फिर भी
ये बात मैं कैसे मैं भूल जाऊं
के हम कभी हमसफ़र रहे हैं

मेरी निगाहों के आसमान से
ज़मीन-ए-दिल पर उतर रहे हैं

मेरे ख्यालों की रहगुज़र से
वो देखिये वो गुज़र रहे हैं
 
 
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