आपको हमने कई ऐसे गीत सुनवाए जिसमे पशुओं ने भी
अभिनय किया है। हिंदी फिल्म संगीत के खजाने में
कई ऐसे गीत भी हैं जिनमें पशुओं ने मनुष्यों से अच्छा
अभिनय किया है। हालाँकि आज जो गीत आपको सुनवाया
जा रहा है उसमें नायक ने अच्छा अभिनय किया है मगर
उनके साथ सहायक कलाकार के रूप में दो बैल भी हैं ।
बैलगाड़ी पर सवार दादा कोंडके को आप ज़रूर पहचान
जायेंगे। ये गीत है फिल्म आगे की सोच से जिसे गायक
किशोर कुमार ने गाया है। बालकिशन पुरी के लिखे गीत
की तर्ज़ बनाई है राम लक्ष्मण (विजय पाटिल) ने ।
गीत के बोल:
अरे हट हा
अरे हट हा
अरे बाजू हो जा
हुर्र, पहलवान
ओ मेरे बैल चला चल जोर से
अरे, ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बेटा ज़ोर चला चल जोर से
हम दोनों का बंधा है बंधन, हाँ
हम दोनों का बंधा है बंधन
प्रीत प्यार की डोर से
ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बिटुआ जोर चला चल जोर से
इधर भी पर्वत, उधर भी पर्वत
बीच में नदिया नाले बैल जी
बीच में नदिया नाले
इन झरनों की ताल पे मितवा
कोई रागिनी गा ले बैल जी
कोई रागिनी गा ले
दूर खेत में देख मोरनी, हाय
दूर खेत में देख मोरनी
इशक करे है मोर से
ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बिटुआ जोर चला चल जोर से, हा
देख ले सूरज सर पे आया
बज गए पूरे बारह बैल जी
बज गए पूरे बारह
अरे मैं खाऊँगा चना भटूर
तुम खा लेना चारा बैल जी
तुम खा लेना चारा
खाने की खुसबू आई है, आय हाय
खाने की खुसबू आई है
उस ढाबे की ओर से
ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बेटा जोर चला चल जोर से
शहर में जा के तुम चुप रहना
देख के धंधे काले बैल जी
देख के धंधे काले
अरे तन के उजले लोग वहां पर
लेकिन मन के काले बैल जी
लेकिन मन के काले
नीली छतरी वाला देखो, हाय
नीली छतरी वाला देखो
देख रहा है गौर से
ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बेटा जोर चला चल जोर से
ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बिटुआ जोर चला चल जोर से
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O mere pyare bail chala chal jor se-Aage ki soch 1987
Monday, 10 January 2011
ओ मेरे प्यारे बैल चला चल-आगे की सोच १९८७
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