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Wednesday, 29 June 2011

घटा घनघोर घोर-तानसेन १९४३

आज आपको 'घटा' पर दो गीत सुनवाता हूँ। दोनों पुराने ज़माने के हैं
हैं। सबसे पहले मेरी पसंद का गीत सुन लीजिये उसके बाद पड़ोसी
की पसंद वाला गीत भी सुनवा दूंगा।

गायिका खुर्शीद का ४० के दशक में बोलबाला था। सधी हुई और मीठी
आवाज़ वाली खुर्शीद के कुछ भक्त मुझे नेट की दुनिया पर मिले और
लगभग वे सभी श्वेत श्याम युग के गीतों के प्रेमी निकले। उनके बारे
में फिर कभी। फिलहाल इस लोकप्रिय गीत का आनंद उठाइए।

गीत में घोड़े पर सवार तानसेन की भूमिका में के. एल. सहगल
नज़र आते हैं जो गीत के अंत में उतर कर नायिका से कुछ कहते हैं।



गीत के बोल:

घटा घनघोर घोर
घटा घनघोर घोर
मोर मचावे शोर
मोरे सजन आजा
आ जा मोरे सजन आ जा

घटा घनघोर घोर
मोर मचावे शोर
मोरे सजन आजा
आ जा मोरे सजन आ जा

एक मौज का नाम जवानी
इक आये इक जाये
एक मौज का नाम जवानी
इक आये इक जाये
मौज में मौज ना ली जिसने वो
फिर काहे पछताये
मौज में मौज ना ली जिसने वो
फिर काहे पछताये
बड़ा दुःख देवे जिया
बड़ा दुःख देवे जिया
माने ना हाय पिया हाय
बड़ा दुःख देवे जिया
माने ना हाय पिया
माने ना हाय पिया
इसे समझा जा
आ जा इसे समझा जा
इसे समझा जा

घटा घनघोर घोर
मोर मचावे शोर
मोरे सजन आजा
आ जा मोरे सजन आ जा

सब लग फिरूँ खोज में तेरे
पिया खोये खोये
सब लग फिरूँ खोज में तेरे
पिया खोये खोये
जो लागी ना जाने मेरी
उनका भला ना होये
जो लागी ना जाने मेरी
उनका भला ना होये
फिरूँ मैं द्वारे द्वारे
फिरूँ मैं द्वारे द्वारे
दो नैनवा के मारे, हाय
फिरूँ मैं द्वारे द्वारे
दो नैनवा के मारे
दो नैनवा के मारे
मुख दिखला जा
आ जा मुख दिखला जा

घटा घनघोर घोर
मोर मचावे शोर
मोरे सजन आजा
आ जा मोरे सजन आ प्रेमी
................................
Ghata ghanghor ghor-Tansen 1943

Tuesday, 23 November 2010

पनघट को चली पनिहारी -पनघट १९४३

संगीतकार एस. एन. त्रिपाठी की बतौर स्वतंत्र संगीतकार पहली
फिल्म थी चन्दन(१९४१)। सन ४३ में आई फिल्म पनघट ने उन्हें
प्रसिद्धि दिलाई और फिल्म संगीत क्षेत्र में पैर ज़माने का मौका दिया।
ये फिल्म विजय भट्ट द्वारा प्रोड्यूस की गई थी । ये वही विजय भट्ट
हैं जिन्होंने गूँज उठी शहनाई का निर्देशन किया है। विजय भट्ट ने
जितना भी योगदान दिया फिल्म जगत को, वो उच्च कोटि का एवं
प्रशंसनीय है। विजय भट्ट की तरह ही एस. एन. त्रिपाठी को धार्मिक,
पौराणिक एवं ऐतिहासिक विषयों में काफी दिलचस्पी रही।

एस एन त्रिपाठी पर चर्चा हम आगे करते रहेंगे, पढ़ते रहिये
ये ब्लॉग।



गीत के बोल:

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे

कमर पर घड़ा धरे मतवारी
कमर पर घड़ा धरे मतवारी
मतवारी रे
कमर पर घड़ा धरे मतवारी
पनिहारी रे

पनिहारी लचक ना जाना
पनिहारी ओ पनिहारी
पनिहारी लचक ना जाना
घड़ा है तेरा भरी रे
पनिहारी रे
घड़ा है तेरा भरी रे
पनिहारी रे

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे

जिस पनघट लहराए है
सवान बारह है मॉस
उस पनघट प्यासी कड़ी
पिया मिलन की आस
क्यूँ पहना गुलाबी दुपट्टा
क्यूँ पहना गुलाबी दुपट्टा
अभी तो कुंवारी रे
पनिहारी रे
क्यूँ पहना गुलाबी दुपट्टा
अभी तो कुंवारी रे
पनिहारी रे

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे

मैं हूँ छोटी सी
मैं हूँ छोटी सी
छोटी गगरिया
मैं हूँ छोटी सी
मैं हूँ छोटी सी
छोटी गगरिया

खोजूं पीछू बाबुल की नगरिया
खोजूं पीछू बाबुल की नगरिया

मोहे पनघट मैं पनघट की प्यारी रे
मोहे पनघट मैं पनघट की प्यारी रे
पनिहारी रे

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे

धीरे खींचो बदन में हौले
धीरे खींचो
धीरे खींचो बदन में हौले
घबरावे है नाज़ुक जवानी
घबरावे है नाज़ुक जवानी

देख ढूंढें ननदिया किनारी
देख ढूंढें ननदिया किनारी रे
पनिहारी रे

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे
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Panghat ko chali panihari-Panghat 1943
 
 
www.lyrics2nd.blogspot.com