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Tuesday, 19 July 2011

घूंघट में चेहरा आपका -घूंघट १९९७

हरिहरन की आवाज़ में एक गीत सुनिए फिल्म घूंघट से जो सन १९९७
में आई थी. इन्द्र कुमार के साथ आयेशा जुल्का की जोड़ी इस फिल्म
में है. गीत देव कोहली ने लिखा है और संगीत है आनंद राज आनंद
का. घूंघट नाम से ये तीसरी फिल्म है जिसका गीत आपको सुनवाया है.
बाकी की दोनों फ़िल्में श्वेत श्याम युग से हैं.

आपके लिए एक प्रश्न है-फिल्म के नायक इन्द्र कुमार क्या वही शख्स है
जो नायिका अरुणा ईरानी का भाई है और फिल्म निर्देशक है ?



गीत के बोल:

हा आ आ आ आ
हा आ आ आ आ
घूंघट में चेहरा आपका
कुछ इस तरह से खो गया
घूंघट में चेहरा आपका
कुछ इस तरह से खो गया

झगडा है जैसे चाँद का
बादलों से हो गया

घूंघट में चेहरा आपका
कुछ इस तरह से खो गया

झगडा है जैसे चाँद का
बादलों से हो गया

घूंघट में चेहरा आपका
कुछ इस तरह से खो गया

नज़रें मेरी नज़र से
मेरी जान मिलाओ
कोई गीत मैं बना लूं
धुन ऐसी गुनगुनाओ
नज़रें मेरी नज़र से
मेरी जान मिलाओ
कोई गीत मैं बना लूं
धुन ऐसी गुनगुनाओ

सुनो, ले के तुम्हें अपनी बाँहों में
घूंघट मैं खोल दूं
दिल कह रहा है किसी भी तरह
तेरा चेहरा मैं देख लूं
जादू, जादू सा दिल पे आपके
एक ही नज़र में हो गया

झगडा है जैसे चाँद का
बादलों से हो गया

घूंघट में चेहरा आपका
कुछ इस तरह से खो गया

कई बार मैंने सोचा
और सोच कर ये जाना
बिन देखे ही तुझे क्यूँ
मैं हो गया दीवाना

कई बार मैंने सोचा
और सोच कर ये जाना
बिन देखे ही तुझे क्यूँ
मैं हो गया दीवाना

हे्लो, ऐसी खफा सी क्यूँ बैठी हो
घूंघट को ओढ़ के
तुमको मिलेगा क्या इतना बताओ तो
दिल मेरा तोड़ के

घूंघट, हाँ हाँ
घूंघट नहीं ये आपका
दुश्मन ये मेरा हो गया
कुछ इस तरह से हो गया
झगडा है जैसे चाँद का
बादलों से हो गया

घूंघट में चेहरा आपका
कुछ इस तरह से खो गया
..........................
Ghoonghat mein chehra aap ka-Ghoonghat 1997

Tuesday, 12 July 2011

हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ-घूंघट १९६०

सन १९४६ की घूंघट से एक गीत सुना आपने, अब सुनवाते हैं
सन १९६० की घूंघट फिल्म से. पिछला गीत रफ़ी का युगल गीत
था. इसमें वे अकेले ही गा रहे हैं. शकील बदायुनी के बोलों पर
संगीतकार रवि ने एक आकर्षक धुन बनायीं है. गीत में बीना राय
दिखाई देंगी आपको परेशां सी. थोड़ी देर के बाद प्रदीप कुमार भी
दिखलाई देने लगते हैं. वो भी कुछ परेशां से हैं . गीत पार्श्व में
बज रहा है. धीरे धीरे तीसरा चरित्र भी परदे पर आता है-वो हैं
नायिका आशा पारेख.





गीत के बोल:


हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ
हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ
पास रह कर भी हैं कितनी दूरियाँ, दूरियाँ

हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ

कुछ अँधेरे में नज़र आता नहीं
कोई तारा राह दिखलाता नहीं
जाने उम्मीदों की मंज़िल है कहाँ
जाने उम्मीदों की मंज़िल है कहाँ, हाय

हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ

शमा के अंजाम की किसको ख़बर
ख़त्म होगी या जलेगी रात भर
शमा के अंजाम की किसको ख़बर
ख़त्म होगी या जलेगी रात भर
जाने ये शोला बनेगी या धुआँ
जाने ये शोला बनेगी या धुआँ, हाय

हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ
पास रह कर भी हैं कितनी दूरियाँ, दूरियाँ

हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ
.............................................
Haye re insaan ki majbooriyan-Ghoonghat 1960

नैनों से मद मदिरा पिला कर-घूंघट १९४६

आपको एक गीत पुराने युग से और सुनवाते हैं, ये है सन १९४६
की फिल्म घूंघट से। निर्मला देवी और मोहम्मद रफ़ी की आवाज़
वाला ये युगल गीत शायद रमेश गुप्ता नाम के गीतकार ने लिखा
है मगर एक बात तो तय है कि फिल्म में संगीत शंकर राव व्यास
का है।



गीत के बोल:

नैनों से मद मदिरा पिला कर
नैनों से मद मदिरा पिला कर
तुमने, हाय तुमने हमें मस्ताना किया
अपना बना कर तुमने हमें दुनिया से बेगाना किया
अपना बना कर तुमने हमें दुनिया से बेगाना किया

ये प्रेम है क्या जा कर पूछो कोई शाम के उस दीवाने से
कोई शाम के उस दीवाने से
जलना में मज़ा आता है क्या पूछो कोई परवाने से
जलना में मज़ा आता है क्या पूछो कोई परवाने से

हमने तो आदेश से उसके दिल अपना नजराना किया
हाँ, दिल अपना नजराना किया
अपना बना कर तुमने हमें दुनिया से बेगाना किया
अपना बना कर तुमने हमें दुनिया से बेगाना किया

दिल वाले
दिल वाले हर दम हँसते हँसते दिल का सौदा करते हैं
अंजाम की क्या परवाह उनको वो नहीं मौत से डरते हैं
अंजाम की क्या परवाह उनको वो नहीं मौत से डरते हैं

हमने भी किसी दिलवर के दिल से आज सुनो यादाना किया
हाँ आज सुनो यादाना किया
अपना बना कर तुमने हमें दुनिया से बेगाना किया
अपना बना कर तुमने हमें दुनिया से बेगाना किया

क्या आन नयी क्या शान नयी
क्या आन नयी क्या शान नयी
क्या अदा निराली बातों की
क्या अदा निराली बातों की
नस नस में बिजली दौड गयी
ये हरकत है इन हाथों की
नस नस में बिजली दौड गयी
ये हरकत है इन हाथों की
हम काँप रहे अब तक देखो
हम काँप रहे अब तक देखो
इतना हमको हैरान किया
इतना हमको हैरान किया

अपना बना कर तुमने, हाँ हाँ तुमने, न न तुमने
अपना बना कर तुमने हमें दुनिया से बेगाना किया
अपना बना कर तुमने हमें दुनिया से बेगाना किया
...................................................
Nainon se mad madira pila kar-Ghoonghat 1946

Tuesday, 7 December 2010

लागे ना मोरा जिया-घूंघट १९६०

संगीतकार रवि के बहुत से मधुर गीत आपको सुनवाए
ही नहीं है अभी तक। आइये सुनें एक लता मंगेशकर का
गाया गीत जो उनकी बेहतर रचनाओं में से एक है।
प्रदीप कुमार और आशा पारेख पर फिल्माए गए इस
गीत को आप देख के अंदाज़ा लगा सकते हैं कि किसका
जिया नहीं लागे हैं और क्यूँ नहीं लागे है ? आशा पारेख
घरेलु नारी के वेश में ज्यादा खूबसूरत लगती हैं। वैसे तो
ज़रूरी नहीं आप मेरे विचार से सहमत हों।



वैसे आज इच्छा हो रही थी कि आपको गुलज़ार का लिखा
गीत-"चड्डी पहन के फूल खिला है" सुनवा दें क्यूंकि सुबह
सुबह सर्दी में बहुत से यायावरीय प्राणी बाग़ और अन्य जगहों
पर लम्बी चड्डी और घुटन्ने पहने दिखाई दिए थे। अब नेट
कनेक्शन का भरोसा नहीं कब मरणासन्न हो जाए अतः इसी
पुरानी घिसी हुई पोस्ट को अपडेट करके लगा रहा हूँ।

लागे ना मोरा जिया, बरमूडा पहन आये, हाय ........

गीत भी सुने लें और गुलज़ार साहब को भी याद कर लें। मैं
तो जब जब बरमूडा पहनता हूँ उनकी याद अवश्य याद
कर लिया करता हूँ। ये गीत शकील बदायूनी का लिखा हुआ
है। पढ़ते रहिये, आगे चल के आपको शकील के लिखे और
रवि के संगीत वाले चौदहवी का चाँद' के गीत भी सुनवायेंगे।



गीत के बोल:

लागे ना मोरा जिया
सजना नहीं आये हाय
लागे ना मोरा जिया
सजना नहीं आये हाय

लागे ना मोरा जिया

देख लिए पिया तेरे इरादे
झूठे निकले जा तेरे वादे
देख लिए पिया तेरे इरादे
झूठे निकले जा तेरे वादे
तड्पत-तड्पत याद में तेरी
नैन नीर भर आये
नैन नीर भर आये, हाय

लागे ना मोरा जिया

तू ने मेरी सुध बिसर्यी
बेदर्दी तोहे लाज ना आई
तू ने मेरी सुध बिसरायी
बेदर्दी तोहे लाज ना आई
भूल गए क्यूँ ओ हरजाई
जा के देस पराये
जा के देस पराये, हाय

लागे ना मोरा जिया
सजना नहीं आये हाय

लागे ना मोरा जिया
..............................
Laage na mora jiya-Ghoonghat 1960
 
 
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