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Tuesday, 19 July 2011

तारों की छांव में-समाज को बदल डालो १९७०

आपको एक मजरूह का लिखा फिल्म बेनाम का एक लोरी गीत सुनवाया
था. अब सुनिए साहिर का लिखा एक गीत जिसे लोरी कहा जाये या बाल
गीत आप डिसाईड कीजिये. गीत मधुर है और इसे गा रही हैं लता मंगेशकर
नायिका शारदा के लिए फिल्म समाज को बदल डालो में. फिल्म के नाम से
ही अंदाजा लगा लीजिए कि इसके गीतों के लिए सबसे फिट कौन गीतकार
हो सकता है साहिरसा के सिवा. परीक्षित सहनी भी गीत में शामिल हो जाते
हैं थोड़ी देर में. रफ़ी की आवाज़ पर उन्होंने होंठ हिलाए हैं.

चुटकी वाले अंदाज़ में पुरुष स्वर के बोल सुनाई देना शुरू होते हैं. बाद में वो
भी लोरीमय हो जाते हैं .



गीत के बोल:

तारों की छांव में सपनों के गांव में
परियों के संग तुम्हें जाना है
तारों की छांव में सपनों के गांव में
परियों के संग तुम्हें जाना है

सो जाओ चैन से, इस काली रैन से
आगे जो देश है सुहाना है

तारों की छांव में सपनों के गांव में
परियों के संग तुम्हें जाना है

गगन तले पवन चले ठंडी सुहानी
धीमी धीमी लय में कहे मन से कहानी
आई रे, आई रे
आई हिंडोले ले के निंदिया की रानी
सो जाओ, सो जाओ
सो जाओ, सो जाओ

तारों की छांव में सपनों के गांव में
परियों के संग तुम्हें जाना है

भवें तेरी पिता जैसी माँ जैसी अँखियाँ
गज़ब करे जिया हरे भोली कनखियाँ
आई हैं आई हैं
आई हैं लेने तुम्हें फूलों की सखियाँ
सो जाओ, सो जाओ
सो जाओ, सो जाओ

तारों की छांव में सपनों के गांव में
परियों के संग तुम्हें जाना है

खिली रहे सजी रहे यूँ ही ये क्यारी
हंसी खुशी जियो माँ तुमपे वारी
खिली रहे सजी रहे यूँ ही ये क्यारी
हंसी खुशी जियो माँ तुमपे वारी
आई रे आई रे
आई रे चंदा के रथ की सवारी
सो जाओ, सो जाओ
सो जाओ, सो जाओ

तारों की छांव में सपनों के गांव में
परियों के संग तुम्हें जाना है
..................................
Taaron ki chhaon mein-Samaj ko badal daalo 1970

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