कहते हैं जब नायक-नायिका की केमिस्ट्री ज़बरदस्त हो तो गीत विशेष
बन पढता है। इस गीत की केमिस्ट्री, फिज़िक्स, जूलोजी, बोटनी इत्यादि
सब ज़बरदस्त है। गायिका श्रेया घोषाल का पहला उल्लेखनीय गीत है ये।
संगीतकार एम् एम् क्रीम ने बिलकुल क्रीम सरीखी धुन तैयार की है गीत के
लिए। नायक नायिका को तो बच्चा बच्चा पहचानता है, आपने पहचाना कि
नहीं ?
गीत वर्ष २००३ के सबसे चर्चित गीतों में से एक है। एक बोल्ड विषय पर बनी
फिल्म जिस्म में एक और उल्लेखनीय गीत है जिसे हम बाद में सुनेंगे। जो
हमारे यहाँ बोल्ड विषय कहलाता है वो होलीवुड के लिए सामान्य विषय हुआ
करता है।
तुलना करने वालों का जवाब नहीं-किसी ने बिपाशा के aura को होलिवुड की
अभिनेत्रियों- बो डेरेक, ब्रुक शील्ड और मिशेल फीफर से ज्यादा बता दिया है। '
अब शायद ये लिखने की ज़रूरत नहीं बची की गीत दर्शक को अंत तक बांधे रखने
वाला है। बोल इसलिए लिख दिए हैं क्यूंकि ऐसे गाने देखते वक्त बोलों पर शायद ही किसी
का ध्यान जाता हो !
गीत के बोल:
जादू है नशा है मदहोशियाँ
तुझको भुला के अब जाऊं कहाँ
जादू है नशा है मदहोशियाँ
तुझको भुला के अब जाऊं कहाँ
देखती हैं जिस तरह से तेरी नज़रें मुझे
मैं खुद को छुपाऊँ कहाँ
जादू है नशा है मदहोशियाँ
तुझको भुला के अब जाऊं कहाँ
देखती हैं जिस तरह से तेरी नज़रें मुझे
मैं खुद को छुपाऊँ कहाँ
जादू है नशा है मदहोशियाँ
तुझको भुला के अब जाऊं कहाँ
ये पल है अपना तो इस पल को जी लें
शोलों की तरह ज़रा चल के जी लें
पल झपकते खो न जाना
छू के कर लो यकीन न जाने ये पल पायें कहाँ
जादू है नशा है मदहोशियाँ
तुझको भुला के अब जाऊं कहाँ
बाहों में तेरी यूँ खो गए
अरमान दबे से जगने लगे
जो मिले हो आज हमको दूर जाना नहीं
मिटा दो सारी दूरियां
जादू है नशा है मदहोशियाँ
तुझको भुला के अब जाऊं कहाँ
देखती हैं जिस तरह से तेरी नज़रें मुझे
मैं खुद को छुपाऊँ कहाँ
......................................
Jadu hai Nasha Hai-Jism 2003
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Wednesday, 27 July 2011
Tuesday, 19 July 2011
चुप तुम रहो चुप हम रहें-इस रात की सुबह नहीं १९९६
नए युग से एक गीत सुनवाते हैं आपको चित्रा और एम् एम् क्रीम का गाया
हुआ. एम् एम् क्रीम दक्षिण भारत के फ़िल्मी संगीतकार हैं. उन्होंने कुछ हिंदी
फिल्मों में भी संगीत दिया है, जिसमें से कुछ एक गीत प्रसिद्द हुए हैं जैसे की
फिल्म क्रिमिनल के गीत.
आज का जो गीत है वो फिल्म "चुप तुम रहो चुप हम रहें से लिया गया है.
गीत निदा फाजली ने लिखा है. फिल्म में तारा देशपांडे, निर्मल पांडे और
आशीष विद्यार्थी की प्रमुख भूमिकाएं हैं. इनमें से जो पहचान में आते हैं वो
हैं निर्मल पांडे जो शेखर कपूर निर्देशित चर्चित फिल्म बैंडिट क्वीन में काम
कर चुके हैं. कुरता पहने जो सज्जन परदे पर गा रहे हैं वो शायद माधवन हैं.
गीत के बोल:
चुप तुम रहो चुप हम रहें
चुप तुम रहो चुप हम रहें
खामोशी को खामोशी से
ज़िंदगी को ज़िंदगी से, बात करने दो
ओ ओ ओ
चुप तुम रहो चुप हम रहें
चुप तुम रहो चुप हम रहें
खामोशी को खामोशी से
ज़िंदगी को ज़िंदगी से, बात करने दो
ओ ओ ओ
चुप तुम रहो चुप हम रहें
चुप तुम रहो
आँखों में खो जाएं आँखें बोलें हाथों से हाथ
बाहों में छुपकर साँसों से जैसे डोले रात
उंगलियों को उंगलियों से
मौसमों को शोखियों से, बात करने दो
चुप तुम रहो चुप हम रहें
चुप तुम रहो चुप हम रहें
खामोशी को खामोशी से
ज़िंदगी को ज़िंदगी से, बात करने दो
होंठों पर होंठों से लिखे बिन शब्दों के गीत
धरती से अम्बर तक गूंजे जिस्मों का संगीत
बेखुदी को बेखुदी से
आशिक़ी को आशिक़ी से, बात करने दो
चुप तुम रहो चुप हम रहें
चुप तुम रहो चुप हम रहें
खामोशी को खामोशी से
ज़िंदगी को ज़िंदगी से, बात करने दो
...................................
Chup tum raho chup hum rahen-Is raat ki subah nahin 1996
हुआ. एम् एम् क्रीम दक्षिण भारत के फ़िल्मी संगीतकार हैं. उन्होंने कुछ हिंदी
फिल्मों में भी संगीत दिया है, जिसमें से कुछ एक गीत प्रसिद्द हुए हैं जैसे की
फिल्म क्रिमिनल के गीत.
आज का जो गीत है वो फिल्म "चुप तुम रहो चुप हम रहें से लिया गया है.
गीत निदा फाजली ने लिखा है. फिल्म में तारा देशपांडे, निर्मल पांडे और
आशीष विद्यार्थी की प्रमुख भूमिकाएं हैं. इनमें से जो पहचान में आते हैं वो
हैं निर्मल पांडे जो शेखर कपूर निर्देशित चर्चित फिल्म बैंडिट क्वीन में काम
कर चुके हैं. कुरता पहने जो सज्जन परदे पर गा रहे हैं वो शायद माधवन हैं.
गीत के बोल:
चुप तुम रहो चुप हम रहें
चुप तुम रहो चुप हम रहें
खामोशी को खामोशी से
ज़िंदगी को ज़िंदगी से, बात करने दो
ओ ओ ओ
चुप तुम रहो चुप हम रहें
चुप तुम रहो चुप हम रहें
खामोशी को खामोशी से
ज़िंदगी को ज़िंदगी से, बात करने दो
ओ ओ ओ
चुप तुम रहो चुप हम रहें
चुप तुम रहो
आँखों में खो जाएं आँखें बोलें हाथों से हाथ
बाहों में छुपकर साँसों से जैसे डोले रात
उंगलियों को उंगलियों से
मौसमों को शोखियों से, बात करने दो
चुप तुम रहो चुप हम रहें
चुप तुम रहो चुप हम रहें
खामोशी को खामोशी से
ज़िंदगी को ज़िंदगी से, बात करने दो
होंठों पर होंठों से लिखे बिन शब्दों के गीत
धरती से अम्बर तक गूंजे जिस्मों का संगीत
बेखुदी को बेखुदी से
आशिक़ी को आशिक़ी से, बात करने दो
चुप तुम रहो चुप हम रहें
चुप तुम रहो चुप हम रहें
खामोशी को खामोशी से
ज़िंदगी को ज़िंदगी से, बात करने दो
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Chup tum raho chup hum rahen-Is raat ki subah nahin 1996
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