भक्त सूरदास से एक गीत पेश है के. एल. सहगल की आवाज़ में .
दीना नाथ मधोक गीतकार हैं और संगीत बनाया है ज्ञान दत्त ने.
भक्त सूरदास पर बनी फिल्म है अतः इसमें भजन और प्रेरणादाई
गीत ही मिलेंगे आपको. बॉलीवुड ने भक्तों, संतों और महा पुरुषों
पर समय समय पर फ़िल्में बनायीं हैं.
वर्त्तमान समय में इस क्षेत्र में कम या नहीं के बराबर काम हो रहा है.
छोटे परदे के अवतरण के बाद सीरियल निर्माण होने से विकल्प ज्यादा
उपलब्ध हो गए हैं. अब फिल्मों के बजाये पौराणिक, धार्मिक और
ऐतिहासिक कथाएं धारावाहिक रूप में ही देखने को उपलब्ध हैं.
गीत के बोल:
नैनहीन को राह दिखा प्रभु
नैनहीन को राह दिखा प्रभु
पग पग ठोकर खाऊँ मैं
नैनहीन को राह दिखा प्रभु
पग पग ठोकर खाऊँ मैं
नैनहीन को
तुमरी नगरिया की कठिन डगरिया
तुमरी नगरिया की कठिन डगरिया
चलत चलत गिर जाऊं मैं प्रभु
नैनहीन को राह दिखा प्रभु
पग पग ठोकर खाऊँ मैं
नैनहीन को राह दिखा प्रभु
चहुँ ओर मेरे घोर अँधेरा
भूल न जाऊं द्वार तेरा
चहुँ ओर मेरे घोर अँधेरा
भूल न जाऊं द्वार तेरा
एक बार प्रभु हाथ पकड़ लो
एक बार प्रभु हाथ पकड़ लो
एक बार प्रभु हाथ पकड़ लो
मन का दीप जलाऊँ मैं प्रभु
नैनहीन को राह दिखा प्रभु
पग पग ठोकर खाऊँ मैं
नैनहीन को
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Nainheen ko raah dikha prabhuBhakt Surdas 1942
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Wednesday, 20 July 2011
Tuesday, 12 July 2011
ओ जानेवाले बालमवा-रतन १९४४
आपको तीन एकल गीत सुनवा दिए आज. एक आध युगल गीत भी हो जाए .
फिल्म रतन(१९४४) से तीसरा गीत प्रस्तुत है. श्याम कुमार और अमीरबाई
कर्नाटकी की आवाजों में ये बरसों से जनता को आनंदित करने वाला गीत
लिखा है दिन नाथ मधोक ने और इसकी धुन बनायीं है संगीतकार नौशाद ने.
विडियो के विवरण में लेखक दो बातें लिखता है-फिल्म रतन के संगीत ने
नौशाद को भौंचक करने वाली ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया . ये बात लगभग सटीक
है. दूसरी बात-रतन पहली फिल्म थी जिसमें ढोलक के लयबद्ध ठेकों का इस्तेमाल
हुआ था. इससे मैं सहमत नहीं हूँ. ढोलक का प्रयोग इसके पहले भी फिल्म संगीत
में खूब हुआ है. अमीरबाई सन १९४४ तक जाना पहचाना नाम हो चुकी थीं लेकिन
उनके इस गीत के सह-गायक श्याम कुमार एक अनजान सा नाम थे, आज भी हैं.
गीत उस समय के हिसाब से तेज गति वाला है.
गीत के बोल:
ओ जाने वाले बालमवा
लौट के आ, लौट के आ
जा मैं ना तेरा बालमवा
बेवफ़ा बेवफ़ा
आ, ओ जाने वाले बालमवा
लौट के आ, लौट के आ
जा मैं ना तेरा बालमवा
बेवफ़ा बेवफ़ा
तेरे बिन मेरा जिया
लागे ना कहीं भी पिया
हाय लागे ना
याद नहीं छोड़े तेरी
दुनिया अंधेरी मेरी
अब जाऊँ कहाँ
ओ दिल को ले करता है दर्द जिया
लौट के आ, लौट के आ
ओ दिल को ले करता है दर्द जिया
लौट के आ, लौट के आ
ओ जाने वाले बालमवा
लौट के आ लौट के आ
जा मैं ना तेरा बालमवा
बेवफ़ा बेवफ़ा
घड़ी-घड़ी पनघट पे आना
झूठ-मूठ की प्रीत जताना
मुझे याद है
फिर और किसी से आँख मिलाना
मुझसे आँख मिला कर जाना
मुझे याद है
झूठों से काहे बोलूँ जा री जा
बेवफ़ा बेवफ़ा
झूठों से काहे बोलूँ जा री जा
बेवफ़ा बेवफ़ा
आ, ओ जाने वाले बालमवा
लौट के आ, लौट के आ
जा मैं ना तेरा बालमवा
बेवफ़ा बेवफ़ा
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O jaane wale balamwa laut ke aa-Ratan 1944
फिल्म रतन(१९४४) से तीसरा गीत प्रस्तुत है. श्याम कुमार और अमीरबाई
कर्नाटकी की आवाजों में ये बरसों से जनता को आनंदित करने वाला गीत
लिखा है दिन नाथ मधोक ने और इसकी धुन बनायीं है संगीतकार नौशाद ने.
विडियो के विवरण में लेखक दो बातें लिखता है-फिल्म रतन के संगीत ने
नौशाद को भौंचक करने वाली ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया . ये बात लगभग सटीक
है. दूसरी बात-रतन पहली फिल्म थी जिसमें ढोलक के लयबद्ध ठेकों का इस्तेमाल
हुआ था. इससे मैं सहमत नहीं हूँ. ढोलक का प्रयोग इसके पहले भी फिल्म संगीत
में खूब हुआ है. अमीरबाई सन १९४४ तक जाना पहचाना नाम हो चुकी थीं लेकिन
उनके इस गीत के सह-गायक श्याम कुमार एक अनजान सा नाम थे, आज भी हैं.
गीत उस समय के हिसाब से तेज गति वाला है.
गीत के बोल:
ओ जाने वाले बालमवा
लौट के आ, लौट के आ
जा मैं ना तेरा बालमवा
बेवफ़ा बेवफ़ा
आ, ओ जाने वाले बालमवा
लौट के आ, लौट के आ
जा मैं ना तेरा बालमवा
बेवफ़ा बेवफ़ा
तेरे बिन मेरा जिया
लागे ना कहीं भी पिया
हाय लागे ना
याद नहीं छोड़े तेरी
दुनिया अंधेरी मेरी
अब जाऊँ कहाँ
ओ दिल को ले करता है दर्द जिया
लौट के आ, लौट के आ
ओ दिल को ले करता है दर्द जिया
लौट के आ, लौट के आ
ओ जाने वाले बालमवा
लौट के आ लौट के आ
जा मैं ना तेरा बालमवा
बेवफ़ा बेवफ़ा
घड़ी-घड़ी पनघट पे आना
झूठ-मूठ की प्रीत जताना
मुझे याद है
फिर और किसी से आँख मिलाना
मुझसे आँख मिला कर जाना
मुझे याद है
झूठों से काहे बोलूँ जा री जा
बेवफ़ा बेवफ़ा
झूठों से काहे बोलूँ जा री जा
बेवफ़ा बेवफ़ा
आ, ओ जाने वाले बालमवा
लौट के आ, लौट के आ
जा मैं ना तेरा बालमवा
बेवफ़ा बेवफ़ा
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O jaane wale balamwa laut ke aa-Ratan 1944
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