इब्ने इंशा को याद कर लेते हैं आज। स्मार्ट इंडियन साहब
ने मुझ से पहले याद कर लिया उनको। इस बार उनको एक
नज़्म के ज़रिये याद करते हैं। ये नज़्म गाई है ग़ुलाम अली ने।
मेरे पसंदीदा संगीत के टुकड़ों में एक ये भी शामिल है।
नज़्म के बोल:
ये बातें झूठी बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
ये बातें झूठी बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम इंशा जी का नाम ना लो
क्या इंशा जी सौदाई हैं ?
ये बातें झूठी बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
ये बातें, ये बातें
हैं लाखों रोग ज़माने में
क्यूँ इश्क है रुसवा बेचारा
हैं लाखों रोग ज़माने में
क्यूँ इश्क है रुसवा बेचारा
हैं और भी वजहें वहशत की
इंसान को रखतीं दुखियारा
हाँ बेकल बेकल रहता है
वो प्रीत में जिस ने जी हारा
पर शाम से लेकर सुबहो तलक
यूं कौन फिरे है आवारा
ये बातें झूठी बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
ये बातें, ये बातें
ये बातें झूठी बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
ये बातें, ये बातें
गर इश्क किया है तब क्या है
क्यों शाद नहीं आबाद नहीं
गर इश्क किया है तब क्या है
क्यों शाद नहीं आबाद नहीं
जो जान लिए बिन ताल ना सके
ये ऐसी भी उफ़ताद नहीं
ये बात तो तुम भी मानोगे
वो कैस नहीं फरहाद नहीं
क्या हिज्र का दारू मुश्किल है
क्या वस्ल के नुस्खे याद नहीं
ये बातें झूठी बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम इंशा जी का नाम ना लो
क्या इंशा जी सौदाई हैं ?
ये बातें झूठी बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
ये बातें, ये बातें
जो हमसे कहो हम करते हैं
क्या इंशा को समझाना है
जो हमसे कहो हम करते हैं
क्या इंशा को समझाना है
उस लड़की से भी कह लेंगे
गो अब कुछ और ज़माना है
या छोडें या तकमील करें
ये इश्क है या अफसाना है
ये कैसा गोरखधंधा है
ये कैसा ताना बाना है
ये बातें झूठी बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम इंशाजी का नाम ना लो
तुम इंशाजी का नाम ना लो
क्या इंशाजी सौदाई हैं
ये बातें झूठी बातें हैं
ये लोगों ने फैलाई हैं
ये बातें, ये बातें
ये बातें, ये बातें
ये बातें
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Ye batein jhoothi batein hain-Non film song
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Wednesday, 15 June 2011
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